Home Blog Page 476

भारतीय धर्मदर्शन के “कर्म सिद्धांत” का जीवंत विद्यालय है उज्जैन का ऐतिहासिक श्री चित्रगुप्त मंदिर

0

(विवेक रंजन श्रीवास्तव -विभूति फीचर्स)

महाकाल की नगरी उज्जैन बाबा महाकाल, देवी हरसिद्धि, चिंतामणि श्री गणेशजी के साथ ही कर्म, न्याय और मोक्ष की गहरी अवधारणाओं से जुड़े भगवान श्री चित्रगुप्त मंदिर के कारण भी विशेष पहचान रखती है। क्षिप्रा नदी के पवित्र तट रामघाट, अंकपात क्षेत्र में स्थित यह मंदिर उन विरले तीर्थों में गिना जाता है, जहाँ मृत्यु के बाद मिलने वाले न्याय, कर्मों के लेखा-जोखा और मोक्ष की परंपरा को महसूस किया जा सकता है। प्राचीन अवंति या उज्जयिनी की इस तपोभूमि को भगवान श्री चित्रगुप्त की साधना का स्थल माना जाता है, जहाँ उन्होंने तपस्या कर सर्वज्ञता और समस्त जीवों के कर्मों का लेखा रखने की दिव्य शक्ति प्राप्त की थी।
मान्यता के अनुसार, सृष्टि की रचना के समय भगवान ब्रह्मा ने दीर्घ तपस्या के दौरान अपने ही मन में अंकित एक दिव्य पुरुष की कल्पना की, वह चित्र मन के अंतरतम में गुप्त हो गया, इसी से “चित्रगुप्त” नाम की उत्पत्ति मानी जाती है।
ब्रह्मा ने इस दिव्य पुरुष को आदेश दिया कि वे महाकाल की नगरी उज्जैन जाकर कठोर तपस्या करें और मानव कल्याण के लिए ऐसी शक्तियाँ अर्जित करें, जिनसे वे समस्त प्राणियों के पाप पुण्य और कर्मों का सूक्ष्मतम लेखा रख सकें। लोक परंपरा में यही स्थान आगे चलकर श्री चित्रगुप्त धाम , धर्मराज चित्रगुप्त मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित हुआ । आज भी भगवान श्री चित्रगुप्त की प्रतिमा को एक हाथ में कर्मों की पुस्तक और दूसरे हाथ से लेखा करते हुए दर्शाया गया है।
उज्जैन का यह मंदिर उत्तर भारतीय नागर शैली की परंपरागत रचना लिए हुए है, जिसमें गर्भगृह, मंडप और ऊँचा शिखर प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं। गर्भगृह में स्थापित भगवान चित्रगुप्त की मूर्ति को सफेद संगमरमर की शांत, गंभीर और न्यायमूर्ति भाव वाली प्रतिमा के रूप में वर्णित किया जाता है, जो भक्तों को अपने कर्मों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देती है। रामघाट स्थित धर्मराज श्री चित्रगुप्त मंदिर में यमराज, धर्मराज और यमुना के साथ चित्रगुप्त की संयुक्त उपासना की परंपरा भी मिलती है, जिससे यह स्थल मृत्यु, धर्म, पवित्रता और न्याय , इन चारों के अनूठे संगम के रूप में देखा जाता है।
कथाओं के अनुसार, उज्जैन के इसी क्षेत्र में भगवान चित्रगुप्त ने दीर्घकालीन तप कर वह दिव्य शक्ति पायी, जिसके बल पर वे यमलोक में प्रत्येक आत्मा के लोक-परलोक के कर्मों का खाता तैयार करते हैं। इसी कारण यहाँ आने वाले श्रद्धालु केवल पूजा ही नहीं, बल्कि आत्म-मंथन, अनुशासित जीवन और सत्यनिष्ठ आचरण का संकल्प भी करते हैं ताकि मृत्यु के बाद उनके पक्ष में उत्तम लेखा लिखा जाए। कायस्थ समाज, जो श्री चित्रगुप्त को अपना आदि देव और कुलदेव मानता है, इस मंदिर को ‘कायस्थों के चार धाम’ के रूप में अग्रणी स्थान देता है , और कार्तिक शुक्ल द्वितीया (चित्रगुप्त पूजा ,यम द्वितीया) पर यहाँ विशेष अनुष्ठानों, लेखनी, बही की पूजा और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक एकता को व्यक्त करता है।
उज्जैन के धर्मराज चित्रगुप्त मंदिर से कई जीवंत लोककथाएँ भी जुड़ी हैं, जो इसके आध्यात्मिक महत्व को बढ़ाती हैं। एक प्रसिद्ध मान्यता यह है कि वनवास के बाद भगवान राम ने शिप्रा तट पर इसी क्षेत्र में आकर धर्मराज चित्रगुप्त की विशेष पूजा की और अपने पिता दशरथ सहित पूर्वजों का तर्पण कर पितृऋण से मुक्ति की प्रार्थना की थी। इसीलिए आज भी बहुत से लोग यह विश्वास लेकर आते हैं कि शिप्रा में स्नान और चित्रगुप्त मंदिर में विधिवत पूजा तर्पण से पितृदोष शांत होता है और पूर्वजों की आत्माओं को शांति और उन्नति प्राप्त होती है।
आधुनिक समय में इस मंदिर की एक अत्यंत विशिष्ट और चमत्कारिक मानी जाने वाली लोकपरंपरा ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। यहाँ ऐसे अनेक श्रद्धालु पहुँचते हैं जो असहनीय रोग, दीर्घकालीन पीड़ा या जीवन मृत्यु के संघर्ष में उलझे अपने परिजनों के लिए या तो चमत्कारिक स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करते हैं या फिर शांत, पीड़ामुक्त मृत्यु के रूप में मोक्ष का वरदान माँगते हैं।
प्रचलित विश्वास यह है कि सच्ची आस्था से की गई विशेष पूजा के बाद चौबीस घंटे के भीतर या तो कष्टों से राहत मिलती है या फिर अत्यंत शांतिपूर्ण प्रस्थान का मार्ग खुल जाता है, इसलिए इसे कई लोग रूपक रूप में “मौत का वरदान” माँगने वाला मंदिर भी कहने लगे हैं, जबकि भक्त इसे वास्तव में “मोक्ष और कष्टमुक्ति” की याचना मानते हैं।
स्थानीय परंपरा में यह धारणा भी प्रचलित है कि इस मंदिर के ऊपर से कर्क रेखा गुजरती है, जो इसे ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष ऊर्जा क्षेत्र बनाती है और ग्रहदोषों, विशेषकर कालसर्प, राहु- केतु आदि के समाधान के लिए यहाँ दीपदान और विशेष पूजा कराई जाती है। कई पीढ़ियों से यहाँ सेवा कर रहे पुरोहितों के अनुसार रामघाट का यह मंदिर सैकड़ों वर्षों से नियमित पूजा अर्चना का केंद्र है, और उनके वंश द्वारा सत्रहवीं, अठारहवीं शताब्दी से यहाँ आराधना किए जाने के प्रमाण मिलते हैं। समय समय पर मंदिर का जीर्णोद्धार, नई प्रतिमाओं की प्राणप्रतिष्ठा और ट्रस्ट के गठन जैसी प्रक्रियाएँ भी हुईं, जिनके कारण इसे “श्री चित्रगुप्त धाम” के रूप में व्यवस्थित धार्मिक केंद्र का रूप मिला।
समग्र रूप से देखें तो उज्जैन का श्री चित्रगुप्त मंदिर केवल एक देवालय भर नहीं, बल्कि भारतीय धर्मदर्शन के “कर्म सिद्धांत” का जीवंत विद्यालय है, जहाँ हर दर्शन यह स्मरण कराता है कि मृत्यु के बाद न्याय निश्चित है और उसका आधार हमारे अपने कर्म ही हैं। महाकालेश्वर, कालभैरव और शक्तिपीठों के साथ स्थित यह धाम उज्जैन की बहुरंगी आध्यात्मिक विरासत में उस कड़ी के रूप में जुड़ता है जो भक्ति के साथ-साथ जिम्मेदार, न्यायपूर्ण और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा देती है । इसलिए जब यह कहा जाता है कि “स्वयं भगवान चित्रगुप्त ने यहाँ तपस्या की थी”, तो इसके पीछे वही भाव निहित है कि यह स्थल मनुष्य को अपने भीतर के न्यायाधीश, अपने ही ‘चित्रगुप्त’ को जगाने की प्रेरणा देता है।
यह मंदिर न केवल कायस्थों के लिए बल्कि समूचे हिंदू समाज,पौराणिक,ऐतिहासिक,पुरातत्व एवं पर्यटन हर दृष्टि से जन महत्व की विरासत है। (विभूति फीचर्स)

जहरीली हवा से घुट रहा मुंबई का दम

0

 मुंबई। दिल्ली के बाद अब मुंबई में भी सांसों का संकट बढ़ने लगा है। वायु प्रदूषण के कारण लोगों का दम घुटने लगा है। मुंबई में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि शहर के ज्यादातर हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खराब से गंभीर स्थित में पहुंच गया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने शहर में ग्रैप-4 (GRAP-4) लागू कर दिया है।

BMC ने इन जगहों पर निर्माण कार्य रोकने का आदेश दिया है। निर्माण कार्य से उठने वाली धूल के कारण शहर में वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। ऐसे में BMC ने 50 से ज्यादा कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम रोकने और उन्हें बंद रखने का नोटिस जारी किया है। BMC के अधिकारी इन सभी साइटों पर नजर रखे हुए हैं।

फ्लाइंग स्क्वाड तैनात

BMC ने बेकरी और मार्बल काटने वाले छोटे उद्योगों से भी सफाई की प्रक्रिया कहीं और शिफ्ट करने की अपील की गई है। BMC के आदेश का पालन न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुंबई के कई वार्ड में फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए गए हैं, जो सभी की निगरानी करते हुए उत्सर्जन पर भी नजर रखेंगे। इस स्क्वाड टीम में इंजीनियर्स, पुलिसकर्मी समेत कई जीपीएस ट्रैक्ड वाहन भी शामिल हैं।

आम लोगों की बढ़ी परेशानी

पिछले कुछ दिनों से मुंबई की हवा काफी खराब हो गई है। शहर का AQI ‘काफी खराब’ से ‘गंभीर’ स्थिति में चल रहा है। इससे लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में समस्या और गले में खराश की समस्या देखने को मिल रही है।

LIVE: PM Modi’s remarks during the felicitation of Thiru CP Radhakrishnan Ji in the Rajya Sabha

0

LIVE: PM Modi’s remarks during the felicitation of Thiru CP Radhakrishnan Ji in the Rajya Sabha

गौ तस्करो पर उत्तरप्रदेश पुलिस का कहर

0
लखनऊ. यूपी पुलिस ने गौ तस्करों पर शिकंजा कसते हुए वाराणसी और सोनभद्र में अलग-अलग कार्रवाई की. थाना फूलपुर क्षेत्र (वाराणसी) और खलियारी–दरमा मार्ग (सोनभद्र) पर चेकिंग के दौरान तस्करों ने पुलिस पर फायरिंग की, लेकिन पुलिस ने हिम्मत और तत्परता से जवाबी कार्रवाई की. इस कार्रवाई में कई तस्कर घायल और गिरफ्तार हुए, जबकि उनके कब्जे से अवैध हथियार और गोवंश बरामद हुए.
वाराणसी के सिन्धुरिया रोड पर चेकिंग के दौरान पुलिस टीम पर तस्करों ने फायरिंग की. जवाबी कार्रवाई में अभिषेक यादव उर्फ गोलू, जो कई गौ तस्करी मामलों में वांछित था, घायल हो गया. पुलिस ने उसे पकड़कर अस्पताल में उपचार के लिए भेजा, वहीं मौके से अवैध तमंचा और जिंदा कारतूस बरामद किए गए. (रवि पांडेय)

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार जारी

0

कोविड लॉकडाउन अवधि को छोड़कर पिछले आठ वर्षों में जनवरी–नवंबर के लिए सबसे कम औसत एक्यूआई दर्ज किया गया; 2025 में केवल तीन दिन ऐसे रहे जिनमें दैनिक औसत एक्यूआई 400 से अधिक था

दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की समग्र वायु गुणवत्ता में सुधार का रुख जारी है और वर्तमान वर्ष के दौरान जनवरी से नवंबर के बीच की अवधि में दिल्ली में आठ वर्षों के दौरान यानी 2018 से 2025 तक (2020 को छोड़कर – कोविड के कारण लॉकडाउन का वर्ष) जनवरी से नवंबर के बीच की अवधि के लिए अपना अब तक का सबसे कम औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) दर्ज किया है।

वर्तमान वर्ष के दौरान जनवरी-नवंबर की अवधि के लिए दिल्ली का औसत एक्यूआई 187 दर्ज किया गया है, जबकि इसी अवधि के दौरान 2024 में यह 201, 2023 में 190, 2022 में 199, 2021 में 197, 2020 में 172, 2019 में 203 और 2018 में 213 था।

जनवरी से नवंबर, 2025 के दौरान सिर्फ तीन दिन ऐसे रहे जब रोज का औसत एक्यूआई 400 से अधिक (‘गंभीर से अत्यधिक गंभीर’ की श्रेणी में) था। 2024 में ऐसे 11 दिन, 2023 में 12 दिन, 2022 में चार दिन, 2021 में 17 दिन, 2020 में 11 दिन, 2019 में 16 दिन और 2018 में ऐसे 12 दिन थे।

इसके अलावा, इस साल अब तक किसी भी दिन दैनिक औसत एक्यूआई 450 से अधिक (‘अत्यंत गंभीर श्रेणी में’) दर्ज नहीं किया गया। 2024 में ऐसे दो दिन (एक्यूआई 450 से अधिक), 2023 में दो दिन, 2022 में शून्य दिन, 2021 में तीन दिन, 2020 में दो दिन, 2019 में पांच दिन और 2018 में शून्य दिन ऐसे थे जब एक्यूआई 450 से अधिक था।

जनवरी से नवंबर (27 नवंबर तक) की अवधि में दिल्ली में पीएम 2.5 सांद्रता का स्तर 2018 के बाद से अब तक की समान अवधि की तुलना में सबसे कम रहा है, जो 2020 (कोविड लॉकडाउन का वर्ष) के बराबर है। दिल्ली में वर्तमान वर्ष में पीएम2.5 का औसत 85 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर देखा गया है, जबकि 2024 में यह 98, 2023 में 90, 2022 में 90, 2021 में 95, 2020 में 85, 2019 में 99 और 2018 में 103 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था।

इसी तरह, जनवरी-नवंबर (27 नवंबर तक) की अवधि में भी दिल्ली में पीएम10 सांद्रता का स्तर 2018 के बाद से (2020 को छोड़कर – कोविड के कारण लॉकडाउन का वर्ष) इसी अवधि की तुलना में सबसे कम देखा गया। दिल्ली में इस साल पीएम10 सांद्रता का स्तर औसतन 183 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है, जबकि 2024 में यह 205, 2023 में 193, 2022 में 202, 2021 में 200, 2020 में 167, 2019 में 210 और 2018 में 228 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) वायु प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और इसमें कमी लाने के उद्देश्य से प्रभावी कदम उठाने तथा दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता की स्थिति को और बेहतर बनाने के प्रयासों को और अधिक तेज किया जाएगा।

भारत ने गौ माता का गोबर बेच कर ₹400 करोड़ की विदेशी मुद्रा अर्जित की

0

भारत, दुनिया का सबसे बड़ा मवेशी उत्पादक देश होने के साथ, गोबर (काउ डंग) का भी प्रमुख निर्यातक बन चुका है। यहां रोजाना लगभग 30 करोड़ मवेशियों से 30 लाख टन गोबर पैदा होता है। वैश्विक स्तर पर जैविक खेती, सस्टेनेबल कृषि और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण गोबर निर्यात में तेजी आई है। 2024-25 वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2024 से नवंबर 2025 तक) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने गोबर और इससे बने उत्पादों (जैसे खाद, कंपोस्ट, पाउडर) से लगभग ₹400 करोड़ की विदेशी मुद्रा अर्जित की है। यह 2023-24 के ₹386 करोड़ से अधिक है, जो “वेस्ट टू वेल्थ” की मिसाल है। कमाल करते है मोदी जी

धर्मांतरण – गाय का मांस खिलाया और कलमा व नमाज पढ़वाया

0

बिहार के अररिया जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना का खुलास हुआ है। यहां एक महिला को अगवा कर उसे महीनों तक बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान पीड़िता का शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया और उसको जबरन धर्मांतरण करने पर मजबूर किया गया। महीनों तक प्रताड़ना सहने के बाद एक दिन पीड़िता मौका देखकर आरोपियों के चंगुल से भाग निकली और उसने पुलिस में मामले की शिकायत दर्ज कराई।

बिहार और दिल्ली में अलग-अलग जगह बंधक बना कर रखा

पीड़िता ने नरपतगंज थाना क्षेत्र के पलासी गांव के मो. आलम समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि, उसे अगवा कर सबसे पहले भीमपुर और वीरपुर ले जाया गया। इसके बाद उसे बिहार और दिल्ली में अलग अलग जगहों पर बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान उस पर जबरण धर्मांतरण करने के लिए दबाव बनाया गया। महिला नहीं मानी तो उसके साथ कई पुरुषों ने जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए और उसे प्रताड़ित किया।

गाय का मांस खिलाया और कलमा व नमाज पढ़वाया

इसके अलावा पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि, आरोपियों ने उसे मजबूर करने के लिए उसे गाय का मांस खिलाया और कलमा व नमाज पढ़ने का भी दबाव बनाया। खबरों के अनुसार, महिला पहले से शादीशुदा है और उसके बच्चे भी हैं। महिला की शिकायत के अनुसार, जब वह आरोपियों की बात नहीं मानती थी तो वह उसके बच्चों को जान से मारने की धमकी देते थे। पीड़िता के अनुसार, सीमा क्षेत्र में जबरन धर्मांतरण कराने वाला एक गिरोह सक्रिय है।

कोर्ट ने तुरंत एफआईआर कर जांच के आदेश दिए

महीनों की प्रताड़ना के बाद एक दिन महिला मौका पाकर आरोपियों के चंगुल से भाग निकली और सीधे अररिया में अपने पति के घर पहुंची। इसके बाद महिला और उसके पति ने कोर्ट में जाकर मामले की शिकायत दी। पीड़िता ने न्यायाधीश के सामने बताया कि आठ लोगों ने उसे अगवा कर उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने फारबिसगंज थानाध्यक्ष को तुरंत एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरु करने के निर्देश दिए हैं।

Watch GAU BHARAT BHARATI PODCAST

 

गोवर्धन में गौ-रक्षा पर जानलेवा हमला

0

मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र स्थित राधाकुंड में अवैध मांस बिक्री की शिकायत पर गए गौरक्षा दल के सदस्य पर उन्मादी भीड़ ने जानलेवा हमला कर दिया। धीरज कौशिक नामक गौरक्षक पर लगभग 30-40 लोगों ने मिलकर लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक इलाज के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया है।

बताया जा रहा है कि धीरज कौशिक को राधाकुंड की एक बस्ती में मांस बिकने की जानकारी मिली थी। वह स्थिति की जांच करने वहां पहुंचे, जहां कुछ स्थानीय लोगों से उनकी बहस हुई। मामला शांत होने के बाद धीरज वापस लौट गए।

लेकिन लगभग आधे घंटे बाद आरोप है कि उसी बस्ती के कुछ लोगों ने बाहर से दर्जनों युवकों को बुला लिया। यह झुंड धीरज के प्लॉट तक पहुंचा और वहां पहुंचते ही उनके साथ गाली-गलौज करते हुए बुरी तरह हमला करने लगा।

पीड़ित के अनुसार, उपद्रवियों ने उनके प्लॉट पर पथराव भी किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। हमले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पुलिस को देखते ही हमलावर मौके से फरार हो गए।

पुलिस टीम ने घायल धीरज को तुरंत गोवर्धन सीएचसी भिजवाया, जहां से उनकी हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया। धीरज कौशिक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और आरोपियों की पहचान के लिए आसपास की CCTV फुटेज और स्थानीय इनपुट खंगाले जा रहे हैं। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था सख़्त कर दी है।

Watch Gau bharat bharati Podcast 

 

श्री कृष्ण के दिव्यज्ञान की पवित्र भूमि है कुरुक्षेत्र – मुख्यमंत्री धामी

0

संजय बलोदी प्रखर
मीडिया समनवयक उत्तराखंड प्रदेश

हरियाणा , 29 नवम्बर ,मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को कुरूक्षेत्र, हरियाणा में अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म क्षेत्र कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो दिव्य उपदेश प्रदान किया, वही श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में मानवता का शाश्वत ज्ञान बनकर पूरे विश्व को दिशा दिखा रहा है। इस भूमि से धर्म, कर्तव्य, सत्य, निष्काम कर्म और आत्मोन्नति का संदेश सम्पूर्ण मानव समाज में प्रवाहित हुआ। इस भव्य महोत्सव के माध्यम से गीता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए उन्होंने हरियाणा सरकार एवं स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद् भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन की कालजयी मार्गदर्शिका है। यह एक ऐसा दिव्य प्रकाशपुंज है, जिसमें मनुष्य के आचरण, चिंतन, कर्तव्य, भक्ति, ज्ञान और जीवन व्यवहार का अद्वितीय संकलन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे बचपन से ही गीता का अनुसरण करते हैं। पहले गीता के सार के कथनों के माध्यम से समझते थे, वे अपने प्रत्येक निर्णय, कर्म और जीवन के हर मोड़ पर गीता के उपदेशों को अपने मार्गदर्शक के रूप में रखते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के कल्याण के लिए किया गया कार्य ही सबसे बड़ा धर्म है। यह संदेश उन्हें सदैव प्रेरणा देता है कि व्यक्तिगत लाभ, स्वार्थ और अहंकार से ऊपर उठकर निष्काम भाव से समाज, राष्ट्र और संपूर्ण मानवता की सेवा करना ही जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक युग में भौतिकता की दौड़ में जब मानव जीवन जटिल और तनावपूर्ण हो गया है, ऐसे समय में गीता का संदेश और भी अधिक प्रासांगिक हो गया है। गीता के 18 अध्याय हमें किसी न किसी योग की शिक्षा अवश्य देते हैं। गीता में बताए गए सभी सूत्र जीवन को संतुलित, उद्देश्यपूर्ण और उच्चतम नैतिक आदर्शों के अनुरूप बनाने का शाश्वत मार्गदर्शन देते हैं। गीता की इसी सार्वभौमिकता के कारण आज विश्व के बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में गीता पर शोध हो रहे हैं। आज दुनियाभर में श्रीमद्भगवद्गीता को लीडरशिप, मैनेजमेंट और आत्मशांति के ग्रंथ के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। गीता से हमें न केवल जीवन जीने का व्यावहारिक ज्ञान मिलता है, बल्कि जीवन की प्रत्येक चुनौती को अवसर में बदलने की प्रेरणा भी प्राप्त होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता के महत्त्व को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सभी विद्यालयों में प्रतिदिन गीता के श्लोकों के पाठ को अनिवार्य किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है। हमारे गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को आज न केवल पुनर्स्थापित किया जा रहा है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय चेतना का आधार भी बनाया जा रहा है। हमें अपने सांस्कृतिक मूल्यों, परंपराओं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर गर्व है। आज हमारी सनातन संस्कृति की पताका संपूर्ण विश्व में गर्व से लहरा रही है और भारत अपनी जड़ों से जुड़ते हुए पुनः विश्वगुरु बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड संपूर्ण भारत के नागरिकों के लिए आस्था, विश्वास और संस्कृति का पवित्र केंद्र है। देवभूमि के सांस्कृतिक मूल्यों और मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने राज्य में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कठोर कानून लागू किया है। उत्तराखंड में एक सख्त दंगारोधी कानून भी बनाया है। 10 हजार एकड़ से अधिक की सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। देश में सबसे पहले उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता कानून लागू कर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की स्थापना की है।
इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर, अवधेशानन्द जी महाराज, कुमार ऋषि, जैन समाज, स्वामी लोकेश मुनि, बाबा भूपेन्द्र, कपिल पुरी जी महाराज एवं अनेक संतगण मौजूद थे।

सुब्रह्मण्यम कृष्णस्वामी: संकट से संकल्प तक का प्रेरणादायक सफर

0

संजय अमान

जीवन अक्सर ऐसे मोड़ लाता है जहाँ इंसान या तो टूट जाता है या फिर खुद को नया रूप देकर और मज़बूती से खड़ा हो जाता है। सुब्रह्मण्यम कृष्णस्वामी (सुब्बू) की कहानी इसी दुस्साहस और आत्मविश्वास की मिसाल है।   34 साल तक उन्होंने फार्मा और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक सम्मानित और स्थिर करियर बनाया। मेहनत, ईमानदारी और नेतृत्व—इन तीन स्तंभों पर उनकी पहचान कायम थी। लेकिन 2018 में किस्मत ने अचानक करवट ली। एक साजिश के तहत उन पर झूठे आरोप लगाए गए और उनकी नौकरी चली गई। सिर्फ नौकरी ही नहीं, प्रतिष्ठा और कई रिश्ते भी इस झटके से बिखरने लगे।
यह वह समय था जिसने सुब्बू को भीतर तक झकझोर दिया। लगभग 15 महीनों तक बेरोजगारी और अपमान की चोटें उन्हें सहनी पड़ीं। कोई भी कमज़ोर मन होता तो शायद टूट जाता, लेकिन सुब्बू ने इस अंधेरे दौर को आत्म-विकास का अवसर बना लिया।

उन्होंने अपने मन, शरीर और आत्मा को समझने की यात्रा शुरू की। ऑक्यूल्ट साइंस—ग्राफोलॉजी, रेकी, न्यूमेरोलॉजी, टैरो, ज्योतिष और वास्तु—इन सबमें उन्होंने गहराई से अध्ययन किया। पहले उन्होंने इन विधाओं को खुद पर लागू किया, अपनी ऊर्जा को संतुलित किया, अपने भीतर छिपी संभावनाओं को पहचाना और फिर खुद को धीरे-धीरे हील किया।

जब खुद की रोशनी जागी, तब उन्होंने दूसरों की जिंदगी में भी वही उजाला बाँटना शुरू किया। उनका दर्द उन्हें दूसरों की पीड़ा समझने में मदद करता गया। 2019 के अंत तक उनका जीवन फिर से सही दिशा पकड़ने लगा।

आज सुब्रह्मण्यम कृष्णस्वामी सिर्फ एक स्पिरिचुअल हीलर नहीं, बल्कि एक प्रेरक शक्ति बन चुके हैं। वे हजारों लोगों को जीवन में दिशा, उम्मीद और आत्मविश्वास देने का काम कर रहे हैं। उनका सफर हमें याद दिलाता है कि कभी-कभी सबसे अंधेरा वक्त ही हमें अपनी असली रोशनी खोजने की राह दिखाता है।

सुब्बू की कहानी यह सिखाती है कि संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, संकल्प और सकारात्मक दृष्टिकोण से उसे अवसर में बदला जा सकता है।

उनका संदेश बहुत साफ है: “जिंदगी चाहे जितना भी गिरा दे, अगर हिम्मत नहीं छोड़ी तो दोबारा उठना और चमकना तय है।”संकट से संकल्प तक का यह सफर हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो कभी हताश हो चुका हो।

सुब्रह्मण्यम कृष्णस्वामी (लोग प्यार से उन्हें “सुब्बू” कहते हैं) एक ऐसे इंसान हैं जिन्होंने जीवन के सबसे काले दौर में भी हार नहीं मानी। 34 साल तक फार्मास्यूटिकल्स और लॉजिस्टिक्स जैसे बड़े-बड़े क्षेत्रों में ऊँचे पदों पर काम करने के बाद अचानक सब कुछ छिन गया। नौकरी गई, सम्मान गया, रिश्ते टूटने की कगार पर पहुँच गए, और जो लोग कभी उनके मुरीद थे, वही पीठ पीछे बुराई करने लगे। लेकिन सुब्बू ने उस जहर को पीकर भी जिंदगी को नई दिशा दे दी। आज वे एक सफल ऑक्यूल्ट साइंस प्रैक्टिशनर, स्पिरिचुअल हीलर और हजारों लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

ऊँचाई से गिरकर फिर उठना

जनवरी 2018 तक सब कुछ परफेक्ट था। भारत में 19 साल और विदेश में 14 साल का शानदार करियर। हाई-प्रोफाइल पोस्ट, अच्छी सैलरी, परिवार में सुख-शांति। लेकिन एक आंतरिक साजिश ने सब उजाड़ दिया। झूठे इल्ज़ाम लगे, अपमान हुआ, और मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद पूरा 15 महीने तक नौकरी नहीं मिली, चाहे कितनी भी कोशिश की। पैसों की तंगी, समाज का ताना, रिश्तों में खटास — सब कुछ एक साथ आ गया।उस दौर में सुब्बू ने एक बात गांठ बांध ली थी —  “एक चीज जिसे आप रिसाइकल नहीं कर सकते, वह है बर्बाद किया हुआ समय।”इसलिए उन्होंने रोना-धोना छोड़ दिया और खुद को व्यस्त रखने के लिए ऑक्यूल्ट साइंस की पढ़ाई शुरू कर दी। ग्राफोलॉजी, रेकी, न्यूमेरोलॉजी, फेस रीडिंग, टैरो, पामिस्ट्री, ज्योतिष, वास्तु, माइंडफुलनेस, पॉजिटिव थिंकिंग — एक के बाद एक विषय सीखते चले गए। पहले खुद पर प्रयोग किया, फिर दूसरों की मदद करने लगे।

नया जन्म

दिसंबर 2019 में जैसे चमत्कार हुआ। सही मेंटर मिले, सही लोग मिले, और जिंदगी ने फिर पलटी मारी — इस बार सही दिशा में। कॉर्पोरेट जीवन में जो कम्युनिकेशन स्किल्स, डिसीजन मेकिंग, ईमानदारी और प्रेजेंस ऑफ माइंड सीखा था, वही गुण अब लोगों को हील करने में काम आए। आज सुब्बू हजारों लोगों को स्पिरिचुअल हीलिंग के जरिए नई उम्मीद देते हैं। वे कहते हैं — “मैं उनका दर्द समझता हूँ, क्योंकि मैं वहाँ से गुजरा हूँ।”

आज का सुब्बूआज सुब्रह्मण्यम कृष्णस्वामी एक खुश, संतुष्ट और ऊर्जावान इंसान हैं। वे मानते हैं कि दुनिया दिमाग से बड़ी है और दिल एक गहरा रहस्य। वे उस परम शक्ति के सामने समर्पण करते हैं जो उनकी रक्षा करती है। उनकी कविता की आखिरी पंक्तियाँ उनकी जिंदगी का फलसफा हैं

:“मैं लड़खड़ा सकता हूँ, लेकिन पूरी ताकत से वापस लड़ूँगा

क्योंकि मैंने कभी हार नहीं मानी और कभी नहीं मानूँगा…”

सुब्बू की कहानी हमें सिखाती है कि जब जिंदगी आपको सबसे नीचे गिरा दे, तब भी अगर हिम्मत न छोड़ें तो नया सवेरा जरूर आता है। वे जीता-जागता सबूत हैं कि इंसान की असली ताकत उसकी हार नहीं, बल्कि दोबारा उठने की जिद में छुपी होती है।आप भी कभी टूटे हैं और फिर खड़े हुए हैं ? सुब्बू की यह यात्रा आपको भी प्रेरित करेगी।

” जय हो जीवन की ”

  • ( इस लेख के लेखक जाने माने वरिष्ठ पत्रकार और गऊ भारत भारती समाचारपत्र के संपादक है  )