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कान्स में सम्मानित होना सिनेमाई के शिखर पर चढ़ना है-उर्वशी रौतेला

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मुंबई (अनिल बेदाग) : अपनी कई मिस यूनिवर्स विजय से लेकर जज और फ्रंटलाइन बॉलीवुड सुपरस्टार के रूप में लोगों का मार्गदर्शन करने तक, आकर्षक और आकर्षक अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने निश्चित रूप से अपने जीवन में एक लंबा सफर तय किया है। यह सब उनके अनुशासन, कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और दृढ़ता की बदौलत है। एक व्यक्तित्व के रूप में उर्वशी रौतेला शायद भारतीय मनोरंजन उद्योग की एकमात्र अभिनेत्री हैं जिन्हें पूरी दुनिया में जबरदस्त प्यार और पहचान मिलती है।

सिर्फ भारत में ही नहीं, अपने आकर्षण और शानदार करियर की बदौलत, उर्वशी रौतेला को अतीत में कई प्रशंसाएं और पुरस्कार सम्मान मिले हैं। अच्छा अंदाजा लगाए? इस साल 77वें फेस्टिवल डे कान्स के उद्घाटन समारोह में उर्वशी रौतेला के लिए चीजें एक अलग स्तर पर बड़ी और बेहतर हो गईं। न केवल उन्हें जबरदस्त सम्मान से सम्मानित किया गया, बल्कि उन्होंने इसे अद्भुत मेरिल स्ट्रीप की उपस्थिति में भी प्राप्त किया, जो उनके साथ विशिष्ट अतिथि भी थीं। खुश और प्रसन्न उर्वशी रौतेला ने विशेष पुरस्कार सम्मान के बारे में अपनी भावनाओं को साझा किया और कहा, “मैं इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की खबर पाकर बेहद सम्मानित महसूस कर रही हूं और साथ ही मेरिल स्ट्रीप से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए उत्साहित हूं। अंतरराष्ट्रीय कलात्मक समुदाय द्वारा सम्मानित संस्थान कान्स में सम्मानित होना सिनेमाई के शिखर पर चढ़ना है।”

मेरे सामने इस मंच की शोभा बढ़ाने वाले दिग्गजों के बीच खड़ा होना एक विनम्र लेकिन उत्साहवर्धक अनुभव है। मैं इस मई में फ्रांस में व्यक्तिगत रूप से अपना हार्दिक धन्यवाद देने के अवसर का उत्सुकता से इंतजार कर रही हूं।” उर्वशी रौतेला ने निश्चित रूप से एक बार फिर साबित कर दिया है कि किसी अन्य भारतीय अभिनेत्री को वैश्विक स्तर पर उतना सम्मान, प्यार और प्रशंसा नहीं मिलती जितनी उन्हें मिलती है।

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आम आदमी पार्टी में हो सकती है बगावत

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सुभाष आनंद – 
देश में जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव का अंतिम दौर नजदीक आता जा रहा हैं वैसे-वैसे पार्टियों में हलचल बढ़ती जा रही है। आम आदमी पार्टी जिन्होंने पंजाब में अपने  आठ उम्मीदवारों के चुनाव लडऩे की घोषणा की थी उनमें से एक उम्मीदवार के बगावत करके भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के पश्चात पार्टी को बहुत बड़ा धक्का लगा है।  दूसरा आम आदमी पार्टी में स्वाति मालीवाल प्रकरण के बाद  निराशा और हताशा बढ़ती जा रही है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा के अचानक राजनीति से लुप्त होने के पश्चात पंजाब की राजनीति में नए-नए प्रश्न उभर रहे है।
राघव चड्ढा को जिस प्रकार पंजाब से राज्यसभा के  द्वार से प्रवेश करने के पश्चात वह राजनीति में छाए हुए थे। कुछ राजनीतिक पंडितों का मानना है की भगवंत सिंह मान पंजाब के मुख्यमंत्री हैं परंतु असली रूप से पंजाब के मुख्यमंत्री की भूमिका राघव चड्डा ही निभा रहे थे। 
 देश की राजनीति में राघव चड्ढा की शादी पर जिस प्रकार भूचाल उठा था, वह किसी से लुकी छिपी  बात नहीं है । पंजाब की राजनीति पर जिस प्रकार राघव छाए हुए थे, उसको लेकर भगवंत सिंह मान अनईजी महसूस कर रहे थे। आम आदमी पार्टी के विधायक ने पिछले दिनों ट्वीट किया है की क्या से क्या हो गया आम आदमी पार्टी में , कुंवर विजय सिंह के इस ट्विट से राजनीति मैं नई हलचल देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के घर शीशे से बने होते हैं उन्हें दूसरों के घरों मैं पत्थर फेंकने से परहेज करना चाहिए।
राघव चड्डा के लुप्त होने पर आम आदमी पार्टी के बीच बड़े प्रश्न उठ रहे है, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ई डी द्वारा जिस प्रकार आम आदमी पार्टी के लोगों पर शिकंजा कसा जा रहा है उनमें राघव चड्ढा का नाम भी प्रमुख है। पार्टी के भीतर कुछ लोग बातें कर रहे हैं कि केजरीवाल के संकट के समय में जिस प्रकार राघव चड्डा लुप्त हुए हैं उससे कई प्रकार के प्रश्न सामने आ रहे हैं, राघव चड्डा आंखों का ऑपरेशन करवाने के बहाने विदेश में गए हैं,सूत्रों से पता चला है कि वह राजनीति को त्याग कर वहां ही सेटल होना चाहते हैं। पंजाब की राजनीति पर एकमात्र कब्जा करने के पश्चात सरकारी कामों में भी खुलकर हस्तक्षेप करते थे। संकट की घड़ी में जिस प्रकार राघव प्रताप अपनी आंखों के इलाज के बहाने विदेश जा भागे है वह पार्टी के लिए एक यज्ञ है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अगर राघव चड्ढा और अमित शाह के बीच कई मीटिंग हो चुकी है राघव चड्डा अपने भविष को ले कर बहुत चिंतित है वह राजनीति में लंबी पारी खेलने के लिए मैदान तैयार कर रहे हैं।
 राघव चड्ढा का पंजाब की राजनीति से लुप्त होना बड़े प्रश्न खड़े कर रहा है, अब भगवंत मान ने भी राघव चड्ढा को महत्व देना छोड़ दिया है। पंजाब के बड़े नेता समझते हैं की आम आदमी पार्टी में यदि केजरीवाल नंबर 1 तो दूसरे नंबर पर भगवंत मान का नाम आता है पार्टी में जिस प्रकार बगावत का असर देखने को मिल रहा है उसे आम आदमी पार्टी में बड़ी चिंता की बात है। कोई समय था जब पंजाब की राजनीति  इर्द-गिर्द घूमती थी। 
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राघव भाजपा के बड़े नेताओं से संपर्क बनाए हुए हैं वह केजरीवाल के लाडले माने जाते थे परंतु संकट की घड़ी केजरीवाल का साथ देने की बजाय वह विदेश जाकर बैठ गए है। (विभूति फीचर्स)

अमेठी में चुनाव कितना सरल कितना कठिन

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(शिव शरण त्रिपाठी-विनायक फीचर्स)
 कभी कांग्रेस की खानदानी सीट मानी जाने वाली अमेठी से 2019 में पहले भाजपा की स्मृति ईरानी से चुनाव हारना और अब 2024 में राहुल गांधी का पलायन करना नि:संदेह यह बताने को काफी है कि कांग्रेस इस सीट पर स्मृति ईरानी से टक्कर लेने का साहस नहीं दिखा पा रही है।
अलबत्ता कांग्रेस ने राहुल गांधी की बजाय अर्से तक गांधी परिवार के अमेठी, रायबरेली में चुनाव प्रबन्धक एवं वफादार सिपहसालार रहे किशोरी लाल शर्मा को चुनाव मैदान में उतारकर यह जताने की कोशिश अवश्य की हैं कि गांधी परिवार अमेठी से अपने पुराने रिश्ते को बरकरार रखना चाहता है।
कांग्रेस के रणनीतिकारों को उम्मीद थी कि चूंकि राहुल गांधी पड़ोस में ही गांधी परिवार की खानदानी सीट रायबरेली से चुनाव लड़ रहे हैं सो किशोरी लाल शर्मा को इसका लाभ मिलना तय है। यही नहीं चूंकि उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन के तहत रायबरेली व अमेठी सीट कांग्रेस के खाते में गई अतएवं दोनों ही सीटों पर गठबंधन की प्रमुख भागीदार सपा के वोटों का लाभ मिलना तय है।
कांग्रेस के रणनीतिकार अपनी इस रणनीति से भले ही संतुष्ट हो, भले ही गांधी परिवार अपनी साख बचाने की  कोई भी दलील दे पर सच्चाई यही है कि राहुल गांधी ने अमेठी सीट से चुनाव लड़ना कतई उचित नहीं समझा।संभवतः राहुल गांधी को अमेठी से ज्यादा सुरक्षित श्रीमती सोनिया गांधी की जीती हुई रायबरेली  सीट ही लगी।
जहां तक अमेठी सीट से किशोरी लाल शर्मा को मैदान में उतारने की बात है तो कांग्रेस के इस निर्णय से अमेठी में न तो कोई उत्साह की लहर है न तो शर्मा को अमेठी के कांग्रेस कार्यकर्ता सहयोग कर रहे हैं। कांग्रेस के पदाधिकारियों के अलावा न तो कोई बड़ा कांग्रेसी नेता उनके पक्ष में दिखाई दे रहा है और न ही उन्हें गांधी परिवार से कोई विशेष तरजीह दी जा रही है। श्री शर्मा के नामांकन के मौके पर प्रियंका पड़ोस में यानी रायबरेली में अपने भाई राहुल के नामांकन के अवसर पर जोश-ओ-खरोश के साथ उपस्थित थी लेकिन नजदीक ही अमेठी में नामांकन के समय न तो प्रियंका उपस्थित थी न ही कांग्रेस का कोई बड़ा नेता अमेठी पहुंचा।  जहां तक विपक्षी गठबंधन के प्रमुख दल सपा का कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन मिलने का सवाल है, हालात बता रहे हैं कि सपा समर्थक खासकर यादव समाज के लोगों का रूझान कांग्रेस प्रत्याशी की तुलना में भाजपा प्रत्याशी की ओर ज्यादा है।
भाजपा ने यादव बाहुल्य वाले इस क्षेत्र में  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ० मोहन यादव को स्मृति ईरानी के जुलूस से लेकर नामांकन पत्र दाखिल करने के मौके पर साथ रखा और उन्होने भी खुद को पड़ोस के सुल्तानपुर को अपनी सुसराल बताकर अपने को यहां का दामाद बताते हुए अपना हक जताया।भाजपा के इस दांव से  यादव बिरादरी का रुख भी बदलना  तय माना जा रहा है जिसका लाभ  निश्चित ही स्मृति इरानी को मिलेगा।
यहां यह भी कम गौरतलब नहीं है कि अमेठी की जिन दो विधानसभा सीटों पर सपा विधायकों का कब्जा है उनमें से एक गौरीगंज के सपा विधायक सपा से लगभग नाता तोड़ चुके हैं। उनका पूरा परिवार हाल ही में भाजपा में शामिल हो चुका है। वैसे सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह गौरीगंज सीट से लगातार तीन बार चुनाव जीतकर एक रिकार्ड बना चुके हैं। उनका इस सीट के मतदाताओं पर काफी अच्छा प्रभाव माना जाता है। ऐसे में उनके समर्थकों के अधिकाधिक वोट कांग्रेस के  शर्मा की बजाय भाजपा की ईरानी को मिलना तय माना जा रहा है।
सपा की दूसरी विधान सभा सीट अमेठी पर भी ऐसा ही नजारा दिखने को मिल रहा है। यहां से सपा की विधायक महाराजी देवी हैं।उनके  बेटे और बेटी सहित पूरा कुनबा ही स्मृति ईरानी के पक्ष में चुनाव प्रचार करने में जुटा हुआ है। वैसे महाराजी देवी के पति गायत्री प्रजापति भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते एक अर्से से जेल में बंद हैं और उन्हें लगता है कि भाजपा की शरण में जाने से उनके पति व परिवार को राहत मिल सकती है।
महाराजी देवी प्रजापति ओबीसी से आती हैं और उनकी बिरादरी कुम्हार है,अपनी बिरादरी के अलावा मौर्य, नाई जातियों में भी गायत्री प्रजापति के परिवार का काफी दबदबा है।
जानकार सूत्रों का कहना है  कि जब 2019 में कांग्रेस प्रत्याशी राहुल गांधी को सपा-बसपा गठबंधन का पूरा समर्थन प्राप्त था तब भी भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी को ओबीसी के 70 फीसदी मतदाताओं का समर्थन हासिल हुआ था और कुर्मी तथा कोरी जाति का तो 80 फीसदी से अधिक समर्थन मिला था। बसपा के सपा से अलग होकर स्वतंत्र चुनाव लड़ने से बसपा प्रत्याशी ओबीसी जाति के रवि प्रकाश मौर्य भाजपा व कांग्रेस दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। यहां यह भी कहा जा रहा है कि बसपा के चलते मुस्लिम व दलित वोटों में बंटवारा तय है। जिसका खामियाजा कांग्रेस को ही भुगतना पड़ेगा।
अमेठी में अभी तक कांग्रेस और सपा की ओर से बड़े नेता  कोई खास दिलचस्पी नहीं दिख रहे हैं जबकि भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्मृति ईरानी के समर्थन में अब तक दो बार रैलियां करके उदासीन मतदाताओं को जोश में लाने के प्रयास कर रहे है।भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी यहां सभा कर चुके हैं।
कुल मिलाकर आज की स्थिति में अमेठी किसी के लिए भी सरल नहीं हैं एक ओर जहां भाजपा स्मृति इरानी को जिताने के लिए भरपूर ताकत के प्रचार प्रसार कर रही है तो  किशन लाल शर्मा भी चुनाव जीतने के लिए गांधी परिवार से अपनी नजदीकियों को भुनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। (विनायक फीचर्स)

मरुस्थल में गऊ माता के लिए कूलर की ठंडी हवा

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बीकानेर. मरुस्थलीय प्रदेश राजस्थान में गर्मी के दिन जला देने वाले होते हैं. आसमान से इन दिनों धूप नहीं आग बरस रही है. इंसान तो इंसान, पशु भी परेशान हैं. इंसान तो गर्मी से निपटने के लिए अपना इंतजाम कर लेता है. बेजुबानों क्या करें. इसलिए गौ माता की देखभाल के लिए गौ शाला में कूलर और पंखे लगाए गए हैं

राजस्थान में सबसे अधिक तापमान बीकानेर संभाग में रहता है. भीषण गर्मी का असर अब सीधे दुधारू पशुओं पर पड़ने लगा है. गर्मी से दूध उत्पादन में कमी दिख रही है. पशुओं का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है. पशुओं को भीषण गर्मी से बचाने के लिए बीकानेर की गौशाला में कूलर लगाया गया है. इसके साथ-साथ पंखे की व्यवस्था भी की गई है.

गायों के लिए कूलर
लक्ष्मीनाथ मंदिर गौ शाला के मैनेजर हरिओम पुरोहित ने बताया गर्मी को देखते हुए डेढ़ माह पहले ही गौ वंश के लिए कूलर और पंखे लगा दिए गए हैं. यहां ज्यादतर कमजोर गौ वंश या छोटे बछड़ों के लिए कूलर लगाए हैं. वहीं अन्य गौ वंश के लिए पंखे की व्यवस्था की गई है. यहां गौ शाला में एक हजार से अधिक गाय हैं. जहां इनके लिए 5 से 7 कूलर लगाए गए हैं. 10 कूलर और लगाए जाना हैं. लेकिन पंखे हर जगह हैं.

ठंडा पानी, गुड़ का शरबत
गौवंश के लिए पीने के पानी और हरे चारे की व्यवस्था की गयी है. शाम को गुड का शरबत बनाकर देते हैं. ताकि गायों को गर्मी में राहत मिल सके.गर्मी की वजह से गाय अच्छे से खा नहीं रही हैं. इसलिए दूध उत्पादन पर काफी असर पड़ रहा है.जो गाय सामान्य मौसम में दस लीटर तक दूध देती हैं, इन दिनों पांच से छह लीटर ही दूध दे रही हैं. मसलन 40 से 50 फीसदी तक दूध का उत्पादन घट गया है. गर्मी की वजह से पशु हांफ रहे हैं वो चारा नहीं खा रहे हैं.

कार्तिक आर्यन अपने शहर ग्वालियर में करेंगे “चंदू चैंपियन” का ट्रेलर लॉन्च

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साजिद नाडियाडवाला और कबीर खान द्वारा प्रोड्यूस्ड फिल्म “चंदू चैंपियन” में कार्तिक आर्यन को एक नए और अलग किरदार में देखने के लिए दर्शक काफी उत्साहित थे। ऐसे में अब मेकर्स द्वारा फिल्म के फर्स्ट लुक पोस्टर से पर्दा उठा दिया गया है और दर्शक चाहकर भी उससे अपनी नजर नहीं हटा पा रहे हैं। बता दें कि नेटीजेंस से लेकर इंडस्ट्री तक ने कार्तिक आर्यन के रेसलर अवतार को लेकर चर्चा बड़े पैमाने पर हो रही है। इन सब के बीच, मेकर्स साजिद नाडियाडवाला और कबीर खान ने फिल्म के पोस्टर लॉच के साथ कैंपेन की भी शुरुआत कर दी है। फर्स्ट पोस्टर बिना किसी शक हाल के दिनों में सामने आया सबसे बड़ा और जबरदस्त पोस्टर है। फैंस और दर्शक पोस्टर पर अपना प्यार लुटा रहे हैं और अब सभी की निगाहें ट्रेलर पर टिकी हैं।

फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के आने वाले ट्रेलर को लेकर हर कोई एक्साइटेड है। ट्रेलर लॉन्च को खास बनाने के लिए फिल्म मेकर्स ने एक अनोखी प्लानिंग बनाई है। जी हां! प्लान के मुताबिक सुपरस्टार कार्तिक आर्यन फिल्म के दमदार ट्रेलर से 18 मई 2024 को अपने होम टाउन ग्वालियर में पर्दा उठाने के लिए रवाना होने वाले हैं। कई सालों की कड़ी मेहनत, संघर्ष और अपने शानदार प्रदर्शन और ब्लॉकबस्टर फिल्मों से ग्लोबल सफलता पाने के बाद, कार्तिक आर्यन ने एक बड़ा फैन बेस हासिल कर लिया है। इतने लंबे समय में यह पहली बार होगा, जब वह अपने होम टाउन ग्वालियर का दौरा करेंगे।

इंडस्ट्री में कार्तिक आर्यन का सफर किसी ‘चैंपियन’ से कम नहीं रहा है। उन्होंने हर तरह से खुद को साबित किया है। कार्तिक आर्यन असल जिंदगी में एक चैंपियन हैं और यह दौरा उनके, उनके फैंस और दर्शकों के लिए एक बहुत बड़ा पल होगा। ‘चंदू चैंपियन’ की बात करें तो कार्तिक आर्यन ने अपने किरदार के लिए काफी मेहनत की है। फर्स्ट पोस्टर में उनका लुक उनकी मेहनत की कहानी को बयां करता है।

वहीं, बात करें फिल्म चंदू चैंपियन में उनके द्वारा निभाए जाने वाले किरदार की तो, फिल्म में अपने रोल को लेकर कार्तिक आर्यन का डेडिक्टेयन उनके जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन में साफ नजर आता है। अपने किरदार को असल बनाने के लिए उन्होंने बिना रुके 14 महीने तक बॉक्सिंग ट्रेनिंग की है। बता दें कि कार्तिक पहली बार ऐसे रोल में कदम रख रहे हैं, और इस तरह से उन्होंने इसे परफेक्ट बनाने के लिए किसी तरह को कसर नहीं छोड़ी है।

मिडिलवेट कैटेगरी में इंटेंस ट्रेनिंग के साथ-साथ, कार्तिक ने अपनी डाइट पर भी ध्यान दिया है। पूरी तरह से शुगर को एलिमिनेट करते हुए, एक्टर ने एक बॉक्सर की फिजिक को पाने के लिए 20 किलोग्राम वजन कम किया। फिल्म की ऑथेंटिसिटी बढ़ाने के लिए, कार्तिक ने असल दुनिया के चैंपियंस के साथ रिंग शेयर कर प्रोफेशनल बॉक्सिंग की दुनिया में खुद को डुबो दिया है।

साजिद नाडियाडवाला और कबीर खान दोनों द्वारा प्रोड्यूस ‘चंदू चैंपियन’ का ट्रेलर 18 मई 2024 को रिलीज होने वाला है, जबकि 14 जून, 2024 को फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह कहना बनता है कि फिल्म अपनी रिलीज के साथ ही दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली है।

करुणामयी और स्वाभिमानी थीं सिंधिया घराने की राजमाता माधवी राजे

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(राकेश अचल -विभूति फीचर्स)

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां श्रीमती माधवी राजे सिंधिया नहीं रहीं। वे लम्बे अरसे से अस्वस्थ थीं। एक लम्बे अरसे से सार्वजनिक जीवन से दूर अपने परिवार में रमीं रहने वाली श्रीमती माधवी राजे सिंधिया अपने यशस्वी खानदान की अंतिम विधिक महारानी थीं ,उन्हें क़ानूनन सिंधिया राजघराने के राज चिन्हों और प्रतीकों का इस्तेमाल करते हुए महारानी रहने का सुख केवल पांच साल ही मिल सक। 1971 में भारत सरकार ने देश के तमाम राजघरानों के साथ सिंधिया राजघराने के सभी विशेषाधिकार और प्रतीक चिन्ह छीन लिए थे।

श्रीमती माधवी राजे सिंधिया 8 मई 1966 को नेपाल से सिंधिया घराने की महारानी बनकर आयीं थीं। उनका विवाह सिंधिया घराने के अंतिम राज प्रमुख श्री माधवराव सिंधिया से हुआ था। उस समय राजमाता की पदवी श्रीमती विजयाराजे सिंधिया के पास थी। माधवी राजे नेपाल के कास्की और लामजुंग के महाराजा शमशेर जंग बहादुर राणा की पुत्री थीं। विवाह से पहले उनका नाम किरण राज लक्ष्मी देवी था। सिंधिया परिवार का हिस्सा बनते ही उनका नाम किरण से माधवी राजे हो गया। श्रीमती माधवी राजे की पहली संतान चित्रांगदा राजे थीं। उनका जन्म 1967 में हुआ,उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया 1971 में जन्मे।

परम्परा ने श्रीमती माधवी राजे सिंधिया को राजमाता उसी दिन बना दिया था जिस दिन उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया का विवाह हुआ था ,लेकिन वैधानिक रूप से वे राजमाता नहीं बन पायीं थी। राजमाता के रूप में जो सम्मान उनकी सास श्रीमती विजया राजे सिंधिया को हासिल हुआ था ,वो भी उन्हें शायद हासिल नहीं हुआ। इसकी वजह ये है कि वे अपनी सास की तरह न तो जनता से बहुत हिलीमिली थीं और न उनकी सार्वजनिक जीवन में बहुत ज्यादा उपस्थिति थी ,हालाँकि उनके विवाह के पांच साल बाद ही माधवीराजे के पति माधवराव सिंधिया राजनीति में उतर आए थे। माधवराव सिंधिया ने 1971,1977 और 1980 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता था।

राजघराने की परम्पराओं से बंधी श्रीमती माधवी राजे ने पहली बार राजमहल की सीढ़ियां लांघने का साहस 1985 में तब दिखाया जब उनके पति माधवराव सिंधिया ग्वालियर से भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे। मुझे खूब याद है कि उस चुनाव में श्रीमती माधवी राजे सिंधिया ने अपने पति के लिए कंधे से कन्धा मिलाकर चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया था। वे छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाओं में भाषण देने जातीं थीं। एक सामाजिक कार्यकर्ता मनमोहन घायल तथा कुछ और लोग पूरे चुनाव में माधवी राजे सिंधिया की सभाओं और जनसम्पर्क कार्यक्रमों की रूप रेखा बनाते थे।

श्रीमती माधवी राजे का ग्वालियर से मोह तब तक ज्यादा था जब तक उनके पति जीवित रहे । 2002 में माधवराव सिंधिया के आकस्मिक निधन के बाद श्रीमती माधवी राजे का राजनीति से मोह भंग हो गया । उन्होंने अपने आपको अपने परिवार बहू,बेटे और नाती-पोतों तक सीमित कर लिया। उनका ग्वालियर आना भी पहले के मुकाबले बहुत कम हो गया था। लेकिन वे अपने पति के समर्थकों को नाम से पहचानती और पुकारती थीं। वे बहुत स्वाभिमानी और करुणामयी थी। उन्होंने अपने पति के निधन के बाद अपने बेटे को राजनीति में स्थापित होते देखकर ही सुखानुभूति कर ली लेकिन वे कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए चुनाव प्रचार करतीं नहीं दिखाई दीं। कुछ महल की मर्यादा और कुछ परिस्थितियां उन्हें एकाकी बनाती चली गयी।

अन्तिम समय में उनके बहू,बेटे और नाती महाआर्यमन ने उनका भरपूर ख्याल रखा। उनकी कमी ग्वालियर को खलेगी,क्योंकि उनके जाने के बाद ग्वालियर की एक पूरी पीढ़ी का महल में कोई अपना कहने वाला नहीं रहा। श्रीमती माधवी राजे सिंधिया और राजमाता विजयाराजे सिंधिया में कोई समानता नहीं थी लेकिन वे महल की गरिमा को आजीवन बनाये रखने में कामयाब रहीं यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी।उनकी एक अन्य उपलब्धि यह भी थी कि वे कभी किसी विवाद में भी नहीं उलझी।(विनायक फीचर्स)

जो भी सरकार आएगी गाय की हत्या करवाएगी : अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

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अलवर. ज्योतिष पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि अब हमारा सरकारों से मोहभंग हो चुका है. हम जान गए हैं कि कोई भी सरकार और किसी भी नाम से आए और कोई भेष चोला धारण कर आए, वह गाय की हत्या करवाएगी. इसलिए हमने नेताओं और पार्टियों से मोहभंग कर लिया है. अब हम मतदाताओं को संकल्पित करा रहे हैं, यदि 33 करोड़ लोग गाय के लिए संकल्प करें तो गोरक्षा हो जाएगी. शंकराचार्य सरस्वती मंगलवार को अलवर के दो दिवसीय प्रवास के दौरान पत्रकारों से बात कर रहे थे.

जगदगुरू शंकराचाय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को बहुत उंचा स्थान दिया गया, उस स्थान तक कोई नहीं ठहरता. गाय पूजनीय है और 33 करोड़ देवी-देवताओं की निवास स्थली है, लेकिन पूजनीय गाय की निरंतर हत्या कर मांस का व्यापार किया जा रहा है. यह हिन्दुओं के लिए कलंक है. आजादी के बाद से ही पूर्वज गाय की हत्या पर रोक लगाने की मांग करते रहे, लेकिन 75 साल में केन्द्र में आई किसी भी सरकार ने गोहत्या पर रोक की मांग को पूरा नहीं किया.

उन्होंने कहा कि अब देश में अमत महोत्सव मनाया जा रहा है. अमृत कोई दूसरी चीज नहीं, बल्कि गाय का दूध माना गया है. जिस गाय द्वारा अमृत दूध दिया जाता है उस गाय को काटा जा रहा है और अमृत महोत्सव मनाया जाए, ये बड़ी विडम्बना है. इसको देखकर हमारे मन में आया कि अब नहीं तो कभी नहीं, अब लोगों को गोरक्षा के लिए खडा होकर गाय को बचाना होगा.

गाय को राष्टीय पशु घोषित नहीं करने के कारण अब सरकारों से मोहभंग हो चुका है. इस अभियान को सभी जगह समर्थन मिल रहा है. लोग दाहिनी मुट्ठी बांधकर संकल्प कर रहे हैं. देश में जल्द ही 33 करोड़ लोग संकल्पित मतदाता बन जाएंगे और गाय की हत्या पर रोक लग सकेगी. गाय बीफ पर सब्सिडी दिए जाने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि जो जैसा करेगा वैसा भरेगा. जिसको नहीं मारना चाहिए, उसे मार रहे हैं और मांस का व्यापार कर रहे हैं, इसका फल भी उन्हें ही भोगना पड़ेगा.

जगदगुरू शंकराचार्य ने कहा कि हिन्दू एक दर्शन है, जिसमें किसी की मत्यु होती और शरीर छूटता है, फिर यमराज के दरबार में खडा होना पड़ता है. वहां प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का पद नहीं चलता कि हम बड़े पद पर रह कर आए हैं. वहां कोई प्रोटोकाॅल नहीं मिलता, वहां कर्म देखे जाते हैं, यदि अच्छे कर्म करके आया होगा तो स्वर्ग मिलेगा और यदि बुरे कर्म करके आया होगा तो कठोर नर्कों में जाने कितने सालों के लिए डाल दिया जाएगा. नील गाय की हत्या के कानून पर उन्होंने का कि कौनसी सरकार क्या कर रही है. यह सरकारों का मामला है, लेकिन हमारा मतलब गाय की हत्या पर रोक से है.

गौशाला बेरी में गौ भक्तों द्वारा किया गया गोसवामणी का आयोजन

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बेरी : स्व. बनवारी लाल मील की चतुर्थ पुण्यतिथि पर आज बाबा त्रिवेणी दास गौशाला बेरी में उनकी याद में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी चतुर्थ पुण्यतिथि पर गोसवामणी का आयोजन किया गया। इस मौके पर स्वर्गीय बनवारी लाल मील के परिवार के सभी सदस्य उनके भाई पुत्र महिलाएं मित्र मंडली और गौ भक्त गोसवामणी कार्यक्रम के समय मौजूद रहे और गायों को मीठा दलिया गुड़ फल आदि खिलायें आए हुए सभी गौ भक्तों का गौशाला व्यवस्थापक बनवारी लाल जांगिड़ ने आभार व्यक्त किया

मुंबई के शिवाजी पार्क में 17 मई को रखी PM मोदी की रैली

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मुंबई: महाराष्ट्र में अब सिर्फ 13 लोकसभा सीटों का चुनाव शेष बचा है। इसमें मुंबई की छह लोकसभा सीटें शामिल हैं। मुंबई समेत ठाणे, कल्याण, पालघर और भिवंडी सीटों पर भगवा लहराने के लिए बीजेपी ने बड़ी तैयारी की है। बीजेपी ने चुनाव प्रचार खत्म होने से ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 17 मई को शिवाजी पार्क में रैली रखी है। बीजेपी इस रैली में दो बड़े दांव खेलने की तैयारी कर रही है। इस रैली में जहां महायुति की तरफ से आखिरी शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा तो वहीं इस रैली में महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे पीएम मोदी के साथ मंच साझा करेंगे।

महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिवाजी पार्क रैली को लेकर राज ठाकरे को आमंत्रित किया है। दोनों नेताओं की मीटिंग के बाद यह चर्चा है कि राज ठाकरे पीएम मोदी के साथ शिवाजी पार्क की रैली में मंच पर नजर आ सकते हैं। गुड़ी पड़वा के मौके पर राज ठाकरे ने 2024 लोकसभा चुनावों में बीजेपी को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया था। राज ठाकरे ने तब पीएम मोदी की खुलकर तारीफ भी की। इससे पहले नई दिल्ली में राज ठाकरे की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई थी। मनसे द्वारा बीजेपी को समर्थन दिए जाने के बाद राज्य में पार्टी के कार्यकर्ता महायुति के उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं। अभी तक राज ठाकरे किसी भी सभा में नजर नहीं आए हैं। बीजेपी की कोशिश है राज ठाकरे को शिवाजी पार्क की रैली में एक मंच पर लाकर हिंदू वोटों को एकजुट किया जाए।

महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रशेखकर बावनकुले और राज ठाकरे की बीच बैठक के बाद मुंबई की राजनीति गरमा गई है। महाविकास आघाड़ी खासकार उद्धव गुट की इस डेवलपमेंट पर खास नजर है, तो वहीं बीजेपी की कोशिश है कि अगर राज ठाकरे शिवाजी पार्क की रैली में पीएम मोदी के साथ आते हैं तो मराठी वोटों में अच्छा संदेश जाएगी। बीजेपी मुंबई की सभी छह सीटों को जीतने के लिए शिवाजी पार्क की रैली को मास्टर स्ट्रोक बनाना चाहती है। अगर राज ठाकरे खुलकर पीएम मोदी के साथ मंच साझा करते हैं और अपने अंदाज में रैली को संबोधित करते हैं तो उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना को नुकसान हो सकता है। शिवसेना यूबीटी मुंबई की चार सीटों पर चुनाव लड़ रही है

अगर मैं हिंदू-मुसलमान करूंगा तो मैं सार्वजनिक जीवन में रहने योग्य नहीं रहूंगा

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वाराणसी से लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना नामांकन दाखिल किया. इसके बाद न्यूज 18 को दिए अपने एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा कि “अगर मैं हिंदू-मुसलमान करूंगा तो मैं सार्वजनिक जीवन में रहने योग्य नहीं रहूंगा.” इसके अलावा भी अपने इंटरव्यू में पीएम मोदी ने हिंदू और मुसलमान को लेकर की जाने वाली राजनीति पर खुलकर बात की और कहा कि वह कभी भी वह कभी हिंदू और मुसलमान को नहीं बांटेंगे.

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

  • पीएम मोदी ने बताया कि उनका बचपन मुस्लिम परिवारों के बीच ही बीता है. उन्होंने कहा, “मेरे बहुत सारे मुस्लिम दोस्त हैं और 2002 के बाद मेरी छवि को खराब करने की कोशिश की गई है. हमारे आस-पड़ोस में मुस्लिम परिवार रहा करते थे. ईद के मौके पर हम घर पर खाना भी नहीं बनाते थे क्योंकि हमारे आस-पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम पड़ोसियों के यहां से ही खाना आया करता था. यहां तक कि मुहर्रम पर हमें ताज़िया करना भी सिखाया गया था.”
  • पीएम मोदी ने बताया कि 2002 के बाद उनकी छवि को खराब करने का प्रयास किया गया. उन्होंने बताया कि अहमदाबाद में मानेक चॉक नाम की जगह पर उन्होंने एक सर्वे कराया था. जहां सभी व्यापारकर्ता मुस्लिम हैं और खरीददार हिंदू हैं. वहां उन्होंने कुछ लोगों को सर्वे के लिए भेजा था. उस वक्त जब किसी ने उनके बारे में कुछ गलत कहा तो दुकानदार ने उसे रोक दिया और कहा कि मोदी के खिलाफ एक शब्द भी न कहें. हमारे बच्चे मोदी की वजह से ही स्कूल जा रहे हैं. उस वक्त लगभग 90 प्रतिशत दुकानदारों ने यही बात कही थी.
  • अधिक बच्चों को जन्म देने वाले बयान के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मैं हैरान हूं. मुझे समझ नहीं आता है कि जब मैं लोगों से यह अपील करता हूं कि वो अधिक बच्चे न करें तो लोग ऐसा क्यों समझते हैं कि मैं मुस्लिमों की बात कर रहा हूं. गरीब हिंदू परिवारों में भी यह समस्या है. वो अपने बच्चों को जरूरी शिक्षा देने के सक्षम नहीं हैं. मैंने कभी भी हिंदू या मुस्लिम का नाम नहीं लिया है. मैंने केवल अपील की है कि आप उतने ही बच्चे करें, जितनों का आप पालन पोषण कर सकते हैं.”
  • पीएम मोदी ने मुस्लिम वोट बैंक के बारे में बात करते हुए कहा, “मुझे यकीन है कि मेरे देश के लोग मेरे लिए वोट करेंगे. जिस दिन मैं हिंदू-मुस्लिम करना शुरू कर दूंगा उस दिन मैं सार्वजनिक जीवन में रहने योग्य नहीं करूंगा. मैं कभी भी हिंदू-मुस्लिम बंटवारा नहीं करूंगा और यह मेरा वादा है.”
  • नरेंद्र मोदी ने कहा, “मेरा मंत्र सबका साथ सबका विकास है. मैं वोट बैंक के लिए काम नहीं करता हूं. अगर मुझे कुछ गलत लगता है तो मैं कहता हूं कि यह गलत है.”