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25 मई को प्रधानमंत्री आएंगे बिहार

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लोकसभा चुनाव के छठे और सातवें चरण में बिहार की कुल 16 सीटों पर मतदान होना है. इन सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत लगा दी है. इसी कड़ी में गुरुवार (23 मई) को बिहार के विभिन्न इलाकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेताओं की ताबड़तोड़ जनसभाएं होंगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए 25 मई को आठवीं बार बिहार आ रहे हैं. इस दौरान वो तीन सभाएं करेंगे. पीएम की चुनावी जनसभा बक्सर, काराकाट और पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र में होगी. इन तीनों सीट पर आखिरी चरण में एक जून को मतदान होना है. पीएम यहां जनता को संबोधित करते हुए पीएम एनडीए प्रत्याशियों के लिये वोट मांगेंगे.

इन नेताओं की भी होगी सभा

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा भी होगी. इसके अलावा एनडीए के अन्य घटक दलों के नेता भी जोर शोर से प्रचार में जुटे हुए हैं. सीएम नीतीश कुमार, चिराग पासवान, ललन सिंह आदि नेता भी ताबड़तोड़ सभा कर रहे हैं.

23 से 26 मई तक ताबड़तोड़ सभाएं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 23 मई को पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण में चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे. वे बीजेपी प्रत्याशी राधामोहन सिंह और डॉ. संजय जायवाल के लिए वोट मांगेंगे. इसके बाद 24 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आरा में चुनावी सभा करेंगे. जहां से भाजपा के आरके सिंह चुनावी मैदान में हैं. वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 26 मई को काराकाट, आरा और नालंदा में चुनावी जनसभाएं करेंगे और वोट मांगेंगे.

छठे-सातवें चरण में यहां होगा मतदान

बता दें कि लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 25 मई को बिहार के वाल्मीकिनगर, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सिवान और महाराजगंज में वोटिंग होगी. वहीं सातवें चरण में एक जून को नालंदा, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, सासाराम, काराकट और जहानाबाद में मतदान होना है.

बांग्लादेश के सांसद अनवारुल आजिम कोलकाता में मृत मिले

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West Bengal News: बांग्लादेश से इलाज कराने के लिए पश्चिम बंगाल आए, एक सांसद अनवारुल आजिम का शव कोलकाता से बरामद हुआ है. बताया जा रहा है कि 9 दिन से लापता सांसद का शव बुधवार (22 मई) को कोलकाता के न्यूटाउन से बरामद हुआ. आशंका जताई जा रही है कि बांग्लादेश के सांसद की हत्या हुई है.

बांग्लादेश के सांसद 12 मई को आए थे इलाज कराने

अनवारुल आजिम 12 मई को इलाज कराने के लिए बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल आए थे. वह अपने एक मित्र के यहां बरानगर में ठहरे थे. 13 मई को उन्होंने कहा कि वह इलाज कराने के लिए डॉक्टर के पास जा रहे हैं. इसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं चल रहा था. 14 मई को उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में लिखाई गई. बांग्लादेश के दूतावास को भी इसकी सूचना दी गई.

9 दिन से लापता थे बांग्लादेश के सांसद अनवारुल आजिम

बांग्लादेश के सांसद की तलाश में पुलिस जुटी. जांच के दौरान उनका लोकेशन बिहार के मुजफ्फरपुर में मिला. कोलकाता से पुलिस की एक टीम बिहार गई, लेकिन उनके लापता होने के 9 दिन बाद अनवारुल आजिम का शव कोलकाता के न्यू टाउन से बरामद हुआ है. उनकी हत्या की आशंका जताई जा रही है.

झिनाईदह-4 लोकसभा क्षेत्र के सांसद थे अनवारुल आजिम

अनवारुल आजिम बांग्लादेश के झिनाईदह-4 संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं. अचानक उनके लापता होने की वजह से पश्चिम बंगाल से लेकर बांग्लादेश तक हड़कंप मच गया. पुलिस ने उन सभी जगहों पर बांग्लादेश के सांसद की तलाश की, जहां उनके जाने का अनुमान था. पुलिस ने कहा था कि जिस गाड़ी में वह चढ़े थे, उसका लोकेशन न्यू टाउन इलाके में मिला था.

बैरकपुर और उसके आसपास भी तलाश कर रही थी बंगाल पुलिस

इसके बाद पुलिस ने बैरकपुर और उसके आसपास के इलाकों में उनकी तलाश शुरू की, लेकिन वह कहीं नहीं मिले. पुलिस ने बताया कि 12 मई को अनवारुल आजिम अपने एक मित्र गोपाल विश्वास के घर पहुंचे थे. 12 मई की रात को वह वहीं रहे. 13 मई को इलाज कराने के लिए निकले और उसके बाद लापता हो गए.

न्यू टाउन में किराए के फ्लैट में कुछ लोगों से साथ ठहरे थे आजिम

यह भी बताया जा रहा है कि कोलकाता आने के बाद वह बरानगर में रहने वाले अपने पुराने दोस्त के घर से निकलने के बाद अनवारुल आजिम न्यू टाउन के एक आवासन में फ्लैट किराए पर लेकर कुछ लोगों के साथ वहां ठहरे थे. न्यू टाउन थाने की पुलिस और विधाननगर कमिश्नरेट का खुफिया विभाग पूरे मामले की जांच में जुटा है.

बांकाबाड़ा गांव में आग की भेंट चढ़ी 5 पशुशालाएं

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संवाद न्यूज एजेंसी

कालाअंब (सिरमौर)। ग्राम पंचायत कालाअंब के मोगीनंद के समीप बांकाबाड़ा गांव में एक पशुपालक की 5 पशुशालाएं मंगलवार को आग की भेंट चढ़ गई। दोपहर के समय अचानक आग लगी और देखते ही देखते आग ने रौद्र रूप धारण कर लिया। जब तक आग पर काबू पाया गया तब तक पांचों पशुशालाओं सहित एक गाय जिंदा जल गई एवं पशुओं के लिए स्टोर किया गया भूसा भी आग से जलकर राख हो गया। इस घटना से पशुपालक को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
गमीमत रही कि आग उनके घर तक नहीं पहुंची क्योंकि पशुशाला के साथ ही घर भी था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बांकाबाड़ा निवासी दिलशाद मोहम्मद पशुपालन कर अपने परिवार का गुजारा करते हैं। उनके पास दो दर्जन से अधिक पशु हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार को अचानक उनकी एक पशुशाला में आग भड़की। जैसे ही वह आग पर काबू पाने लगे तभी आग सूखा होने के चलते आसपास की पांचों पशुशालाओं में फैल गई।

इस दौरान उन्होंने पशुशालाओं में बंधी गायों को बाहर निकाल दिया लेकिन एक गाय अंदर ही फंस गई। इसके बाद गाय जिंदा जल गई। उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में नई पशुशालाओं का निर्माण किया था। आग से उनका करीब 20 क्विंटल भूसा व पराली आदि जल गई है। अब उन्हें पशुचारे का संकट पैदा हो गया है।

उधर, आग लगने के तुरंत बाद ही उक्त मकान से कुछ दूरी पर स्थित दो उद्योगों वी गार्ड इंडस्ट्री और विशाल पॉलिपेट ने अपने हाइड्रेंट खोल कर आग पर काबू पाया। वी गार्ड इंडस्ट्री के महाप्रबंधक एसएस मेहता ने बताया कि उन्हें उद्योग से कुछ दूरी पर स्थित पशुशालाओं में आग लगने का जैसे ही पता चला उन्होंने अपने कर्मचारियों को फौरन सहायता के लिए भेज दिया। एक अन्य उद्योग के कर्मचारी भी मौके पर पहुंच गए थे। लिहाजा, आग पर काबू पा लिया गया।उधर, सूचना मिलते ही राजस्व, पुलिस व दमकल दस्तों की टीमें भी पहुंची।

एसडीएम नाहन सलीम आजम ने बताया कि आग लगने की जानकारी मिलते ही टीमों को मौके पर भेजा गया है। पशुपालक के नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। पशुपालक की नियमानुसार सहायता की जाएगी।

उज्जैन में गौ वध के प्रकरण में फरार मोहम्मद कासिम गिरफ्तार

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MP News: मध्य प्रदेश के उज्जैन में गौ वध एवं अवैध परिवहन के प्रकरण में फरार मोहम्मद कासिम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ कई थानों में FIR दर्ज है। कई मामलों में पुलिस उसे तलाश रही थी

थाना माकडौन के अपराध क्रमांक 127/2023 धारा 429,295-ए आईपीसी, 4, 6, 9 गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 25 आर्म्स एक्ट के प्रकरण में दो माह से फरार चल रहे आरोपी मोहम्मद कासिम पिता अब्दुर बशीर अब्बासी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ के दौरान कासिम ने माकडौन के ग्राम झालरा में हुए गौवध में भी संलिप्त होना स्वीकार किया है। कासिम को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। गिरोह के अन्य सदस्यों को पुलिस ने पूर्व में ही गिरफ्तार कर लिया है। चार फरार आरोपियों की तलाश जारी है। आरोपी मोहम्मद कासिम पिता अब्दुर बशीर अब्बासी के विरुद्ध पूर्व में भी इंदौर तथा उज्जैन जिले के अलग-अलग थानों में कई अपराध पंजीबद्ध है। मोहम्मद कासिम पिता अब्दुर बशीर अब्बासी के खिलाफ इंदौर के सदर बाजार और चंदन नगर थाना क्षेत्रों में मादक पदार्थों की स्मगलिंग, अवैध हथियार रखने एवं अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत भी प्रकरण दर्ज है।

करण जौहर की फ़िल्म में एक नए अवतार में देंगे टाइगर श्रॉफ 

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मुंबई (अनिल बेदाग) : बॉलीवुड के यंगेस्ट एक्शन सुपरस्टार टाइगर श्रॉफ एक बड़े बजट की फिल्म के लिए करण जौहर के साथ काम करने के लिए तैयार हैं।रिपोर्टों के अनुसार, श्रॉफ धर्मा प्रोडक्शन द्वारा निर्मित एक फिल्म करने के लिए तैयार हैं, जिसमें वह पहले कभी न देखे गए अवतार में नजर आएंगे। एक सूत्र ने कहा कि कई स्क्रिप्ट्स पर विचार करने के बाद, टाइगर और करण दोनों ने इस स्क्रिप्ट पर विचार किया, दोनों को लगा कि 2025 में बड़े पर्दे पर वापसी के लिए एक्टर के लिए सबसे अच्छी फिल्म होगी। सोर्स ने कहा “तौर-तरीकों पर काम किया जा रहा है और एक घोषणा की जा रही है जून के अंत तक बनने की उम्मीद है।”

सूत्र ने आगे बताया कि यह फिल्म एक मनोरंजक फिल्म है, जिसे ग्रैंड स्केल पर पेश किया जाएगा। रिपोर्ट में आगे कहा गया, “यह किरदार उनके (टाइगर) द्वारा पिछले 10 सालों में किए गए किसी भी काम से अलग है।” टाइगेरियंस यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि प्रोजेक्ट किस बारे में होगा। एक्टर को बड़े पर्दे पर एंटरटेन करते देखने के लिए उनकी उत्सुकता आसमान छू रही है।

ट्रेड एनालिस्ट जोगिंदर टुटेजा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इस बड़ी खबर को शेयर करके टाइगेरियंस के बीच उत्साह बढ़ा दिया है।

हालाँकि, यह आगामी फिल्म 2025 में रिलीज़ होने वाली है, टाइगर के पास पाइपलाइन में कुछ दिलचस्प प्रोजेक्ट्स हैं। जहां उन्हें आखिरी बार ‘बड़े मियां छोटे मियां’ में देखा गया था, वहीं वह ‘सिंघम अगेन’ की रिलीज की तैयारी कर रहे हैं। टाइगेरियंस भी हाल ही में घोषित एक्शन फिल्म ‘बागी 4’ में सुपरस्टार की तरह उनका जलवा देखने का इंतजार कर रहे हैं, जो अगले साल रिलीज होने के लिए तैयार है।

उंगली पर नाचता लोकतंत्र 

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(विवेक रंजन श्रीवास्तव – विभूति फीचर्स)

भारत के लोकतंत्र की रीढ़ उसके चौंकाने वाले निर्णय लेते मतदाता हैं।  सारे कथित बुद्धिजीवी और ढ़ेरों वरिष्ठ पत्रकार, आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस तथा एक्स्ट्रा पोलेशन के ग्राफ से हर चुनाव के परिणाम के पूर्वानुमान लगाते रह जाते हैं और देश के मतदाता अपने  तरीके से निर्णय लेकर बरसों से कुरसियों पर काबिज क्षत्रपों को भी उठा कर खड़ा करने की ताकत रखते हैं। भारत में जनता खुद पर राज करने के लिये खुद ही अपने नेता चुनकर अपनी सरकारें बना लेते हैं। विशेषज्ञ एनालिसिस करते रह जाते हैं। भारत के मतदाता के निर्णय में भावना भी होती है , राष्ट्रभक्ति भी और दीर्घगामी परिपक्व सोच भी दिखती है। फ्री बीज से मताधिकार को प्रभावित करने के क्या कुछ प्रयत्न नहीं होते हैं, पर क्या सचमुच उससे परिणाम बदलते हैं ? सरे आम धर्म और जाति के कार्ड खेले जाते हैं , राजनैतिक दल वोटर आबादी के अनुसार उम्मीदवार चुनते दिखते हैं किंतु क्या इससे पिछले 77 सालों में लोकतंत्र कमजोर होता दिखता है? क्षेत्रीयता, आरक्षण, प्रलोभन, धन बल, बाहुबल, झूठा डर हमारे परिपक्व और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र को कितना प्रभावित कर पाता है? दुनियां की अनेक विदेशी शक्तियां देश के चुनावों को प्रभावित करने के लिये स्पष्ट रूप से मीडिया के जरिये  मनोवैज्ञानिक चालें चलती हैं और परोक्ष तरीकों से विदेशी धन हमारे चुनावों में इस्तेमाल करने की कोशिशें होती हैं, लेकिन कुछ बात है कि हमारी हस्ती हम ही हैं। क्या भारत के संविधान को बदलने की जरूरत है? क्या डेढ़ महीनों की लम्बी अवधि तक सरकारों को ठप्प करके चुनाव चलने चाहिये?

संविधान संशोधन आवश्यक हैं भी  तो कितने और क्या? ये सारी बातें प्रत्येक बुद्धिजीवी , साहित्यकार, पत्रकारिता में अभिरुचि रखने वालों और हमारे युवा कहे जाने वाले देश की नव युवा आबादी को हमेशा से परेशान करती रही हैं। सब इसके उत्तर चाहते हैं। घर परिवार में , मित्रों में आपस में, टी वी चैनलों पर पैनल डिस्कशन्स में खूब बहस होती हैं, चाय की गुमटियों पर जाने कितनी चाय पी जाती है, कितने ही पान खाये जाते हैं, बहस होती है,  किन्तु गणना से पहले कोई निर्णायक अंतिम परिणाम नहीं निकल पाते।

भारतीय चुनावों को समझने के इच्छुक युवाओं के लिये आदर्श आचार संहिता, चुनाव प्रक्रिया, उम्मीदवारों की योग्यता , राजनैतिक दलों की पात्रता हर वोटर को समझना जरूरी है।  हमारी संस्कृति में भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा कर प्रजा जनों को वृष्टि आपदा से बचा लिया था। हर गृहणी पर आरोप लगता है कि वह अपनी उंगली पर अपने पति को नचा रही है। उसकी उंगली में ताकत प्रधानमंत्री जितनी शक्ति संहित होती है, या केवल राष्ट्रपति की ताकत सी नजर भर आती है, यह वास्तविकता तो सारी गृहस्थी का भार उठाये वह महिला ही जानती है। मतदाता के वोट डाल चुकने की सहज पहचान के लिये उसकी उंगली पर त्वरित रूप से न मिटने वाली स्याही से निशान लगा दिया जाता है , पोलिंग बूथ पर खड़ा मतदाता  दरअसल वह मदारी है जिसकी  उंगली पर लोकतंत्र  नाचता है, उसे रिझाने मनाने बड़ी बड़ी रैलियां , रोड शो, सभायें होती हैं। धडक़ने थामें खुद मतदाता भी चुनाव परिणामों का इंतजार करते हैं, यह जानते हुये भी कि बहुत कुछ रातों रात बदलने वाला नहीं है, कोई नृप होय हमें का हानि, चेरी छोड़ न हुई हैं रानी! (विभूति फीचर्स)

पाकिस्तानी प्रेस में भारतीय चुनाव

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(सुभाष आनंद – विनायक फीचर्स)

भारतीय चुनाव में पाकिस्तान के नागरिक विशेष रुचि ले रहे इसीलिए इस पर और पाकिस्तान के समाचार पत्रों में लंबे-लंबे लेख लिखे जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी को लेकर पाकिस्तान के समाचार पत्र बहुत सख्त है। उनका कहना है कि यदि भारतीय जनता पार्टी तीसरी बार सत्ता में आती है तो भारत-पाकिस्तान के संबंधों में कुछ खास सुधार देखने को नहीं मिल सकता।

इस्लामाबाद से प्रकाशित होने वाले उर्दू समाचार पत्र जंग में महिला पत्रकार करीना लोधी ने लिखा है कि पाकिस्तान मे हवाओं का रुख बदल गया है । पाकिस्तान सरकार भारत में  मधुर संबंध  बनाने की इच्छुक है।  नई सरकार चाहे किसी भी पार्टी की बने, उन्हें भी मित्रता का हाथ बढ़ाना चाहिए। उन्होंने लिखा है कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है, भारत-पाक पहले भी दो परतयज्ञ  युद्ध लड़ चुके हैं। 1965 और 1971 के युद्ध में दोनों देशों का नुकसान हुआ था। जब से पाकिस्तान में नई सरकार बनी है तभी से पाकिस्तान के व्यापारी सरकार पर दबाव बना रहे है कि दोनों देशों के बीच व्यापार का रास्ता खोला जाए।

एक अन्य पत्रकार नूर अकरम ने अपने समाचार पत्र में लिखा है कि दोनों देश आतंकवाद से पीडि़त है, दोनों सरकारों को मिल जुल कर आतंकवाद की समाप्ति के लिए कदम उठाने चाहिए।  हालांकि पाकिस्तान सरकार को मालूम है कि भारत में आतंकवाद  फैलाने और नशीले  पदार्थ भेजने के लिए कौन-कौन से लोग सक्रिय है। पाकिस्तानी मीडिया ऐसे गिरोहों का पर्दा फाश करती है लेकिन पाकिस्तान सरकार इन पर कोई एक्शन नहीं लेती।

डॉन समाचार पत्र के सिद्दीकी रहमान ने लिखा है कि यदि भारत में मोदी सरकार दोबारा रिपीट होती है तो हिंद पाक के संबंध सुधरने वाले नहीं है। क्योंकि मोदी हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। मोदी सरकार ने मुस्लिम समाज का शोषण किया है और अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त करके राम मंदिर का निर्माण किया है। मोदी सरकार संविधान में संशोधन करके मुसलमान को दूसरे दर्जे का नागरिक बना सकती है। यदि भारत में कांग्रेस सरकार आए तो मुस्लिम समाज को कुछ राहत मिल सकती है, मुस्लिम समाज सदा कांग्रेस के शासनकाल में सुरक्षित रहा है। गुजरात के दंगों से प्रभावित हुए मुसलमान आज भी मोदी को कसाई कहते हैं। मोदी के शासनकाल में मुस्लिम समाज सुरक्षित नहीं है। एक के बाद एक मस्जिदों को शहीद किया जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक चालेें चल कर पाकिस्तान को बदनाम किया जा रहा है।

पाकिस्तान के उर्दू समाचार पत्र भारतीय चुनाव से भरे पड़े हैं। उनका मानना है कि यदि हिंदुस्तान में दोबारा मोदी जीतता है तो वह पाकिस्तान के विकास में कांटे खड़े कर सकता है। यदि भारतीय जनता पार्टी ने 400 का आंकड़ा पार कर लिया तो मोदी पाकिस्तान के खिलाफ सख्त फैसले  ले सकता है जिससे पाकिस्तान को बड़ा नुकसान हो सकता है।

नवाए वक्त समाचार पत्र में हिमा

कुरैशी ने लिखा है कि भारतीय जनता पार्टी मुस्लिम समाज से इतनी नफरत करती है कि उन्होंने भारतीय लोकसभा की 542 सीटों पर एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया।

पाकिस्तान के प्रसिद्ध पत्रकार हैदर हुमायूं ने अपने लेख में लिखा है कि मोदी की मुस्लिम विरोधी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश ,बिहार के मुसलमान नेशनल एलायंस के पक्ष में खड़े हो गए हैं , उससे लगता है कि मुस्लिम बाहुल्य धनी आबादी वाले प्रदेशों में मोदी को बहुत नुकसान होने वाला है जिसके कारण वह तीसरी बार सत्ता में नहीं आ सकते।

भारत की अन्य राजनीतिक पार्टियों जैसे कांग्रेस, एस.पी इत्यादि ने बड़े पैमाने पर मुसलमानों  को टिकट दिए हैं जो आपसी भाईचारे का अच्छा प्रतीक है।

पाकिस्तान सरकार के साथ-साथ पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज की निगाहें भी भारतीय चुनाव पर लगी हुई है। मरियम नवाज भी चाहती हैं कि भारत के साथ खुला व्यापार खोला जाए, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था सुधर सके।

पाकिस्तान के बड़े कालम नवीस डॉक्टर सुल्तान अहमद ने लिखा है कि जहां पाकिस्तान में हाल ही में नई सरकार का गठन हुआ है वहीं भारत में दो माह बाद चुनाव प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, देखना होगा कौन सी पार्टी सत्ता में आती है। दोनों बड़ी शक्तियां हैं युद्ध के बारे में कोई सोच नहीं सकता। एक तरफ पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है इसलिए वह युद्ध के बारे में सोच भी नहीं सकता।

उधर भारत विश्व की चौथी महान शक्ति बनने के नजदीक पहुंच रहा है, भारत को चाहिए कि वह पाकिस्तान को अपने छोटे भाई की तरह व्यवहार करें ताकि दोनों देशों की गरीबी दूर हो सके। शिक्षा के क्षेत्र में पाकिस्तान बहुत कमजोर है वही आपसी संबंधों से शिक्षा स्तर का सुधार होना चाहिए, पाकिस्तान के दिल के रोगियों की आधुनिक सर्जरी को भारत में करवाने में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मोदी को हिंदू-मुसलमान का नारा छोड़ एशिया में विकास का नारा बुलंद करना चाहिए। पाकिस्तान हिंदुस्तान से निकला हुआ एक राष्ट्र है ,दोनों देशों के प्रतिनिधियों को  आपसी दुश्मनी भुलाकर विकास के पथ पर चलना चाहिए। (विनायक फीचर्स)

एक्ट्रेस स्नेहा उल्लाल के हाथों हिंदुस्तान रत्न अवार्ड से सम्मानित हुए बिजनेसमैन डॉ निकेश जैन माधानी

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मुंबई। 18 माई 2024 को मुक्ति कल्चरल हब अंधेरी, मुंबई में बॉलीवुड एक्ट्रेस स्नेहा उल्लाल (सलमान खान स्टारर फिल्म लकी फेम) के हाथों हिंदुस्तान रत्न अवार्ड अवॉर्ड से युवा बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी सम्मानित हुए। यह अवार्ड शो में डॉ निकेश जैन गेस्ट ऑफ ऑनर थे और उन्हें बेस्ट बिजनेसमैन के रूप में पुरस्कृत किया गया। इस पुरस्कार समारोह का आयोजन राजकुमार तिवारी के साथ पुनीत खरे ने किया।

आपको बता दें कि हाल ही में ग्लैमर एंड लाइफ स्टाइल अवॉर्ड अभिनेत्री महिमा चौधरी के हाथों और प्रीति झंगियानी के हाथों नेशनल इंपैक्ट अवार्ड 2024 बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को प्राप्त हुआ है। इस अवॉर्ड शो में निकेश जैन वीआईपी गेस्ट थे साथ ही उनकी कंपनी माधानी ग्रुप और पुष्पा गृह उद्योग तथा पुष्पम पापड़ इस शो का सहयोगी पार्टनर था।
विदित हो कि कुछ माह पूर्व बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को फिल्म तेरे नाम की अभिनेत्री भूमिका चावला ने तमस आईकॉनिक अवॉर्ड्स 2024 से सम्मानित किया था। वहीं निकेश को दिग्गज अभिनेता निर्माता निर्देशक धीरज कुमार, गदर 2 के एक्शन डायरेक्टर टीनू वर्मा और डिस्को डांसर गीत के गायक विजय बेनेडिक्ट एवं शो के ओर्गेनाइजर संजीव कुमार के हाथों बेस्ट बिजनेसमैन कैटेगिरी में राष्ट्रीय अचीवर अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया था। तो वहीं डॉ निकेश जैन माधानी रामायण धारावाहिक में सीता की भूमिका निभाने वाली दीपिका चिखलिया के हाथों दादासाहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवार्ड 2024, पार्श्वगायक उदित नारायण के हाथों अखंड भारत गौरव अवार्ड 2024 और अभिनेता सोनू सूद के हाथों एशियन एक्सीलेंस अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए हैं।
इसके साथ ही उन्हें सुप्रसिद्ध अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे, एसीपी संजय पाटिल के हाथों दादासाहेब फाल्के अवार्ड प्रस्तुत आईआईएफए अवार्ड 2023 प्राप्त हुआ है।
विदित हो कि कुछ माह पूर्व दिल्ली में डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रसिद्ध अभिनेत्री काजल अग्रवाल एवं भारतीय पहलवान नरसिंह पंचम यादव के हाथों ऑनरेरी डॉक्टरेट डिग्री एवं बिजनेस अवार्ड और विंदू दारा सिंह के हाथों आत्मनिर्भर एक्सीलेंस अवार्ड भी मिल चुका है।
इसके साथ ही 2022 में निकेश जैन मधानी को महाराष्ट्र राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों गऊ भारत भारती अवार्ड तथा कैबिनेट मंत्री परषोत्तम रूपाला (मत्स्य, दुग्ध व उद्योग मंत्री) के हाथों से गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2023 एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुरस्कार 2023 प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज गौरव पुरस्कार 2021 भी मिल चुका है। ब्राइट आउटडोर के सीएमडी योगेश लखानी ने अपने जन्मदिन पर निकेश जैन को बिज़नेस आइकॉनिक ब्राइट अवार्ड एवं ब्राइट आउटडोर बी.एस.सी. आईपीओ आने की खुशी में बिज़नेस अवार्ड 2023 से सम्मानित किया। निकेश को परफेक्ट वुमेन अचीवर अवॉर्ड, गोल्डन ह्यूमेनिटी अवॉर्ड भी मिल चुका है। वहीं आईपीएस कृष्ण प्रकाश नायर 2021 और 2022 में उन्हें अवॉर्ड देकर सम्मानित कर चुके हैं।
विदित हो कि डॉ निकेश जैन मधानी फाइनेंस एडवाइजर हैं और इनके कई बिजनेस हैं जैसे कि माधानी फाइनेंस, माधानी एंटरटेनमेंट एंड प्रोडक्शन, माधानी ट्रेडिंग कंपनी, माधानी न्यूज लाइव 24×7 और मधानी इंटरप्राइज इत्यादि। इसके साथ ही निकेश की माँ के नाम पुष्पा गृह उद्योग कंपनी और पुष्पम पापड़ कंपनी है। जल्द ही मधानी कंपनी की लिस्टिंग हो जायेगी।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी ने एक हिंदी कॉमेडी फिल्म प्रोड्यूस की है। इसके पहले उन्होंने 12 म्यूजिक एल्बम ओर शॉर्टफिल्म को माधानी एंटरटेनमेंट और प्रोडक्शन यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया है।
निकेश ताराचंद जैन मधानी ने लॉ बुक में इतिहास बनाया है। दरअसल उनके ऊपर 2014 में ईडी पीएमएलए का केस हो गया था। फिर उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ते हुए 2017 में सुप्रीम कोर्ट से धारा 45 ए रद्द हुआ जिससे कानून के किताब में डॉ निकेश जैन मधानी का नाम दर्ज हुआ और उनके ऊपर लगे धारा को हटाने में प्रसिद्ध वकील मुकुल रोहतगी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। निकेश जैन की कानून लड़ाई में जाने माने वकील साजल यादव, वकील नेमीचंद शर्मा और वकील मनीष वोरा ने भी सहयोग किया।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी सबसे सफल व्यवसायी रतन टाटा, मुकेश अंबानी, गौतम आडानी और लक्ष्मी मित्तल से प्रेरित हैं।

– संतोष साहू

कांग्रेस का आखिरी दांव बनती प्रियंका गांधी

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(अंजनी सक्सेना – विनायक फीचर्स)
अठारहवीं लोकसभा के चुनाव कई दृष्टियों से अलग और दिलचस्प साबित हो रहे हैं। इसमें सर्वाधिक दिलचस्प तथ्य तो यह है कि अब इस देश में कोई भी ऐसा दल नहीं है जो कि लोकसभा की सभी सीटों पर चुनाव लड़ रहा हो। एक समय कश्मीर से कन्या कुमारी तक देश की लगभग सभी सीटों पर चुनाव लडऩे वाली कांग्रेस अब गठबंधन के नाम पर दूसरे दलों के लिए कई सीटें छोडऩे के लिए विवश है। कभी एकला चलो की नीति पर विश्वास करने वाली कांग्रेस कई छोटे राजनैतिक दलों से गठबंधन कर चुकी है। इसी तरह भाजपा भी अनेक छोटे-छोटे दलों को साथ लेकर ही चुनाव लड़ रही है।

कांग्रेस की राजनीति नेहरू-गांधी परिवार की धुरी पर ही घूमती रही है। मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, श्रीमती सोनिया गांधी और अब राहुल और प्रियंका गांधी कांग्रेस का इतिहास इन नामों के बिना अधूरा है। दुनियां में शायद ही ऐसा कोई परिवार होगा जिसके तीन-तीन सदस्य (जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी एवं राजीव गांधी) किसी लोकतांत्रिक शासन में सत्ता के सर्वोच्च स्थान पर बैठे हों। इसी तरह दुनिया में ऐसा कोई राजनैतिक दल भी नहीं होगा, जिसके सर्वोच्च पद पर एक ही परिवार के छह व्यक्ति आसीन हुए हों। अब प्रियंका गांधी के चुनाव प्रचार की सक्रिय राजनीति में आ जाने से नेहरू-गांधी परिवार के सातवें सदस्य (मोतीलाल नेहरू से लेकर प्रियंका गांधी तक) का भी कांग्रेसाध्यक्ष बनना तय हो गया है। वैसे प्रियंका गांधी एवं राहुल गांधी के सक्रिय राजनीति में उतरने से भी कांग्रेस का कुछ खास भला हो नहीं पाया है।

इस तथ्य से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि भारत में कांग्रेस का जनाधार घटता जा रहा है। प्रियंका गांधी को चुनाव प्रचार की सक्रिय राजनीति में उतारने का उद्देश्य संभवत: यही है कि इस घटते जनाधार को रोका जाये। प्रियंका गांधी को सक्रिय होने से कांग्रेस जनों को तीन लाभ दिख रहे हैं। पहला लाभ तो यह है कि उन पर विदेशी मूल के होने का आरोप नहीं लगाया जा सकता, दूसरा लाभ यह होगा कि आम जनता उनमें इंदिरा गांधी जैसी जुझारू छवि देखेगी। तीसरा लाभ यह होगा कि देश के नवयुवक मतदाता  प्रियंका के युवा नेतृत्व की ओर आकर्षित होंगे। इन तीन लाभों के माध्यम से कांग्रेस उस क्षति की पूर्ति करना चाहती है, जो पिछले चुनावों के परिणामों के बाद हुई है।

2014 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी और 2019 में राहुल गांधी के नेतृत्व की विफलता के बाद निराशा के समुद्र में गोते लगा रही कांग्रेस के नेता प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारने की रणनीति बनाते समय यह भूल गए हैं कि सन् 1947 के बाद गंगा और यमुना में काफी पानी बह गया है। सन् 1947 में जवाहरलाल नेहरू का नेतृत्व इसलिए चुनौती हीन था कि उनके नाम के साथ उनका त्याग तथा स्वतंत्रता आंदोलन के लिए उनका बलिदान भी जुड़ा हुआ था। इंदिरा गांधी को भी उनके त्याग और बलिदान का लाभ मिला था, पर प्रियंका गांधी या राहुल गांधी के खाते में कौन सा त्याग या बलिदान हैं।

लोग प्रियंका और राहुल को अनुभवहीन एवं अपरिपक्व राजनेता मानते हैं। यद्यपि राजीव गांधी जब राजनीति में आए थे तब उन्हें भी अपरिपक्व माना जाता था फिर भी उन्हें कांग्रेस को सर्वाधिक सीटें एवं प्रचण्ड बहुमत दिलाने का श्रेय मिला था। पर इस श्रेय का कारण श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति थी। श्रीमती इंदिरा गांधी ने जब राजनीति में प्रवेश किया था तब उन्हें भी अपरिपक्व माना जाता था, पर वे उतनी अपरिपक्व नहीं थी जितना कि उन्हें समझा गया था। अपने पिता स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू से उन्होंने राजनीति के गुणदोषों को अच्छी तरह समझा था। फिर उनके पास समर्पित एवं जनाधार युक्त सलाहकारों की टीम थी। राजीव गांधी की अपरिपक्वता इसलिए सामने आयी कि वे अपने नाना एवं मां के समान कोई चमत्कार नहीं दिखा पाये। इसका एक मात्र कारण यही था कि वे भी जनाधार विहीन सलाहकारों से घिरे हुए थे। इसीलिए वे अपने प्रधानमंत्रित्व काल में कोई चमत्कार तो नहीं दिखा पाए बल्कि बोफोर्स घोटाले के आरोपों से घिर गए। फिर उनके पास देश सेवा या जनसेवा के लिए त्याग और बलिदान की वह पूंजी नहीं थी, जो जवाहरलाल नेहरू एवं श्रीमती इंदिरा गांधी के पास थी। राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी के पास भी यह पूंजी नहीं है। उनके पास भी जनाधार विहीन सलाहकारों की फौज है।

ये जनाधार विहीन सलाहकार और साथी ही कांग्रेस को चला रहे हैं। इन साथियों एवं सलाहकारों की बानगी देखिए। दिग्विजय सिंह और अशोक गहलोत अपने-अपने प्रांतों (मध्यप्रदेश और राजस्थान) में कांग्रेस की दुर्गति करा चुके हैं। मणिशंकर अय्यर और सैम पित्रोदा भी गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं पर ये भी लोकसभा चुनावों के बीच में अपनी बयानबाजी से कांग्रेस को संकट में डालने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। वहीं मध्यप्रदेश में राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले जीतू पटवारी भी अपने बयानों से चर्चा में बने रहते हैं और मध्यप्रदेश कांग्रेस के सबसे असफल अध्यक्ष साबित हो रहे हैं।

राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी के जनाधार विहीन साथियों और सलाहकारों की यह सूची काफी लम्बी है। जब ये सलाहकार  स्वयं चुनाव जीत नहीं सकते है, तो वे दूसरों को क्या चुनाव जितायेंगे?

ऐसी स्थिति में इन सलाहकारों एवं साथियों के भरोसे प्रियंका गांधी यदि राजनीति में आयी हैं तो यह उनकी राजनैतिक अपरिपक्वता ही कही जाएगी। पर फिर भी इसे कांग्रेस का आखिरी दांव ही कहा जा सकता है और यहआखिर दांव कांग्रेस की हारी हुई बाजी को जीत में बदल सकता है, इसमें मुझे तो संदेह है ही क्या आपको भी है? (विनायक फीचर्स)

हिमालयी जड़ी बूटियों पर गहराता संकट*

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(दीपक नौगांई – विभूति फीचर्स)

उत्तराखण्ड का पर्वतीय क्षेत्र अपनी अकूत वन संपदा और वनस्पतियों की विविधता के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ सालों मे शिवालिक पर्वत शिखरों मेें पाई जाने वाली जड़ी बूटियाँ अवैध दोहन और तस्करी के चलते तेजी से विलुप्त हो रही है। उत्तराखण्ड के हिमालय को हिमवंत औषधम भूमिनाम कहा गया है अर्थात जहाँ  औषधीय पौधों की भरमार है। महर्षि चरक, सुश्रुत, वांगभट्ट  से लेकर धनवंतरि के शोध ग्रन्थ द्रव्य गुण विज्ञान में पाँच सौ से अधिक जड़ी बूटियों के इस क्षेत्र में पाए जाने का वर्णन मिलता है।

हिमालय क्षेत्र में पाई जाने वाली जड़ी बूटियाँ ही आयुर्वेद चिकित्सा के ज्ञान का आधार रही है, जिनका आयुर्वेदाचार्यो ने दिल खोलकर गुणगान किया है, परन्तु प्रकृति प्रदत्त यह बेशकीमती संपदा अब छीज रही है। पहले स्थानीय  लोग यहाँ की जड़ी  बूटियों से परंपरागत रुप से लाभान्वित होते थे, लेकिन अब मोटी रकम कमाने की चाह में तस्करों ने गाँव वालों के साथ मिलकर इनका बेजा दोहन कर पहाड़ को कई महत्वपूर्ण बूटियों से विहीन कर दिया है। ये दुर्लभ जड़ी बूटियाँ तस्करी के जरिए विदेश पहुंच रही है।

एक सर्वेक्षण के अनुसार पहाड़ की दो सौ से अधिक जड़ी बूटियों की प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर है। कई तो विलुप्त हो चुकी है। शोधकर्ता भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण विभाग ने इनके अस्तित्व पर संकट का कारण  मनमाफिक दोहन,, वनों का कटाव,  वनों में हर साल लगने वाली आग तथा प्राकृतिक वन संपदा का क्षरण होना बताया है।
अवैध दोहन का एक मुख्य कारण यह भी है कि यूरोपीय व अन्य देशों में  आयुर्वेदिक दवाओं के प्रति आकर्षण के चलते कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में उतर आई है। इस कारण तस्करी बढ़ी है और हमारी बहुमूल्य बूटियाँ चोरी छिपे विदेशों में पहुँच रही है। पिछले कुछ सालों मे हमारी तीन दर्जन से अधिक वनौषधियों को विदेशों में पेटेंट भी करा लिया गया है।

पहाड़ की संकटग्रस्त औषधीय पौधों की प्रजातियों में टैक्सस बकाटा,  कूठ,  पुनर्नवा, सर्पगंधा, हरड़, जटामांसी, कीड़ाजड़ी, शतावर, गूलर, चिरायता,  सालमपंजा, कासनी,  कालाबाशा,  पिपली,  जिंबू ,आक,  कौंच,  वज्रदंती आदि शामिल हैं।

इन जड़ी बूटियों में  टैक्सस बकाटा अर्थात टैक्साल को कैंसर की औषधि के रुप मे प्रयोग किया जाता है। टैक्साल का मूल स्रोत  टैक्सस ब्रेविफोलिया नामक वृक्ष की छाल है। कुमाऊं में इसे थनेर नाम से जाना जाता है। एक से दो ग्राम टैक्साल की कीमत 3 लाख से अधिक होती है। कई जगह तस्कर चोरी छिपे इस पेड़ की छाल निकालकर या पेड़ को ही काटकर ले जाते हैं। नतीजतन यह अमूल्य वनस्पति आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जूझ रही है।

संकटग्रस्त प्रजातियों में खैर व भोज वृक्ष का बड़े स्तर पर अवैध कटान हो रहा है। खैर का उपयोग कत्था व गुटखा बनाने में होता है। इधर बाजार में नित नए गुटखे आने से खैर की मांग बहुत बढ़ गयी है। मांग बढऩे का अर्थ है तस्करी का भी बढऩा। इसी तरह भोज वृक्षों की संख्या भी  बहुत कम रह गई है। कभी हमारे श्रृषि मुनियों ने इसकी छाल पर कई ग्रंथ लिखे थे। स्वयं इस लेखक ने पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा में देखा था कि गाँव वाले ही ईंधन के लिए भोज वृक्षों को काट रहे है।
हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में एक नायाब जड़ी मिलती है, जिसे हमारे यहाँ कीड़ाजड़ी तो तिब्बत व चीन में  यारशागुंबा कहा जाता है। चीन में इसका इस्तेमाल एथलीटों की  क्षमता बढ़ाने के लिए प्राकृतिक स्टीरॉयड के रुप में ट्री किया जाता है। यही कारण है कि पिथौरागढ़ जनपद के धारचुला,  मुनस्यारी के ऊँचे इलाकों में स्थानीय  लोग बड़े पैमाने पर इसका दोहन व तस्करी कर रहे हैं कयोंकि चीन में इसकी मुंहमांगी  कीमत मिल रही है। इसके संग्रह और व्यापार से जुड़े लोगों में अक्सर खूनी संघर्ष तक देखने को मिलता है।
यह जड़ी 3500 मीटर की ऊंचाई पर हिम आच्छादित क्षेत्र में पाई जाती है,  जहाँ ट्री लाइन  खत्म हो जाती हैं। सामान्य तौर पर यह एक जंगली मशरुम है, जो एक खास तरह के कीड़े के कैटरपिलर्स को मारकर उस पर पनपता है। स्थानीय  लोग इसे कीड़ाजड़ी इसलिए कहते है क्योंकि  ये आधा कीड़ा है और आधा जड़ी। इसकी बड़े पैमाने पर तस्करी हो रही है। दुनिया भर में लोग आयुर्वेद की ओर मुड़ रहे है। विदेशों में जड़ी बूटियाँ दुर्लभ है पर भारत में इनकी प्रचुरता है। इसलिए दुनिया भर की दवा कंपनियों और तस्करों की नजरें भारत की इस संपदा पर टिकी है। वनौषधियों की विलुप्तता का एक कारण यह भी है कि महत्वपूर्ण जड़ी बूटियों की पहचान करने वाले परंपरागत पीढ़ी के वनस्पति विशेषज्ञ अब नहीं रहे और जिन्हें इनका ज्ञान है वे जानकारियों को अपने तक ही सीमित रख नई पीढ़ी को इस ज्ञान से वंचित कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि जंगल से जड़ी बूटियों को खोज निकालना जितना मेहनत का काम है उतना ही श्रम साध्य है इन जड़ी बूटियों को तोडऩा। जिस पौधे की जड़ दवा बनाने मे काम आती है , उसे उखाड़ देने से पूरा पौधा ही मर जाता है। जंगल मे वन औषधीय पौधे अपने आप उगते हैं,  पर तस्कर बड़ी बेरहमी से जड़ों सहित इन पौधों को उखाड़ कर ले जाते हैं।

तस्कर कई बार सीधे सादे गाँव वालों से औने पौने दामों में जड़ी बूटियाँ खरीद लेते है। गाँव वाले जड़ी बूटियों के वास्तविक मूल्य से अनभिज्ञ रहते है और चंद रुपयों के बदले वनौषधियों को तस्करों के हाथों बेचकर खुश हो जाते है। बड़ी क्रूरता से किए जा रहे अवैध व अनियंत्रित दोहन से अनेक दुर्लभ वनौषधियों की प्रजातियां विलुप्त हो चुकी है और जो बची है वे भी विलुप्ति की कगार पर है। (विभूति फीचर्स)