चुनावी मुद्दे नहीं हैं भ्रष्टाचार और घोटाले*
लायम ग्रुप ने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ाते कदम
23 मई, 2024 – लायम ग्रुप उन उद्योगों का भरोसेमंद पार्टनर रहा है, जो लागत, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता पर अधिक ध्यान देते हैं। हाल ही में लायम ने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में रणनीति के साथ विस्तार करने की घोषणा की है। 17 वर्षों की शानदार विरासत के साथ यह कदम रखना नवाचार और विविधता को लेकर लायम की प्रतिबद्धता दर्शाती है। इस तरह अपने भागीदारों का ग्रोथ बढ़ाने में लायम की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी।
कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल लायम और उनके क्लाइंट के बीच एक खास करार है जिससे उत्पादन के सभी कार्य करने और बिना रुकावट उत्पादों की डिलीवरी सुनिश्चित करने का लक्ष्य पूरा होगा। लायम इस प्रक्रिया से जुड़ी खास जरूरतों और बाधाओं को समझता है इसलिए अपने ग्राहकों को सुव्यवस्थित उत्पादन समाधान देने में सफल रहेगा। इसके लिए इन-हाउस उत्पादन क्षमताएं बढ़ाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह मॉडल कंपनी के अंदर कंपनी के कांसेप्ट की मिसाल है। इसमें लायम उन संगठनों का भरोसेमंद भागीदार होगा जो अपनी खास जरूरतों के अनुसार उत्पादन का भरोसेमंद समाधान चाहते हैं।
लायम यह विस्तार अपने अत्याधुनिक धारवाड़ प्लांट के माध्यम से करेगा जहां वर्तमान में 100 से अधिक कुशल प्रोफेशनलों की टीम है। इस प्लांट में हल्के वाणिज्यिक वाहन (एलसीवी), मध्यम वाणिज्यिक वाहन (एमसीवी) और वाई1 बसें बनती हैं।
लायम ग्रुप के निदेशक श्री रोहित रमेश ने इस विस्तार के बारे में कहा, ‘‘आज की भारी प्रतिस्पर्धा में किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान की सफलता के लिए लागत कम करना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और ‘कम में अधिक’ करने की दूरदृष्टि रखनी होगी। कंट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल से यह सब संभव है। इस माध्यम से हम कंपनियों/ओईएम संगठनों के परिचालन कार्य संभाल लेते हैं ताकि वे कारोबार के रणनीतिक विकास के क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दें।’’
हमारे कंट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल में सबसे यूनिक यह है कि हम डिलिवरेबल्स क्या हैं इस पर ध्यान केंद्रित करते हैं ना कि डिलिवरेबल्स कैसे पूरा करें। कंट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में हम अपने ग्राहकों की लागत कम करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और 100 प्रतिशत गुणवत्ता प्राप्त करने पर जोर देते हैं। हमारी सबस अलग पहचान यह है कि हेड काउंट के बजाय ब्रेन काउंट पर ध्यान देते हैं। लायम में हम सामने से समस्या का समाधान करते हैं। हम ने अपनी शुरुआत से ही बुद्धिमत्ता के साथ मानव संसाधन की आपूर्ति की है क्योंकि हम जानते हैं कि प्रतिभाशाली और सक्षम व्यक्ति ही हमारे ग्राहक की सबसे बड़ी पूंजी साबित होंगे। संक्षेप में कहें तो कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग हम जो भी काम करते हैं वह ब्रेन काउंट पर केंद्रित होता है और इस तरह हायर, ट्रेन और डिप्लॉय मॉडल पर काम करते हुए हम अपने ग्राहकों की संतुष्टि सुनिश्चित करते हैं।’’
लायम ग्रुप ने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल के साथ-साथ जॉब कॉन्ट्रैक्ट, स्टोर्स और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट जैसे अन्य कार्यों की शुरुआत कर दी है और वर्तमान में अशोक लीलैंड, एलएंडटी शिप बिल्डिंग, टाटा मार्काेपोलो, आईटीसी आदि को ये सेवाएं दे रहा है। लायम ग्रुप का यह कदम एक सुनहरे भविष्य की ओर है। यह उत्पादन में उत्कृष्टता के साथ प्रतिभा प्रबंधन कौशल का सही तालमेल करेगा। लायम के ग्राहक अपनी खास जरूरतें पूरा करने के लिए सुव्यवस्थित उत्पादन, कुशल संसाधन और अटूट विश्वसनीयता को लेकर आश्वस्त रहेंगे।
लायम ग्रुप का गठन 2007 में श्री जी.एस. रमेश ने किया जो उन सभी को अवसर देना चाहते थे जिनका बड़े उत्पादन संगठन से जुड़ने का सपना हो। इस ग्रुप में उद्योग जगत के सेवानिवृत्त प्रोफेशनल, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया ताकि एक यूनिक बिजनेस मॉडल के माध्यम से भागीदार संगठन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सफलता मिले। यह ग्रुप एचआर पर ध्यान केंद्रित करता है और भागीदार संगठनों को वांछित परिणाम देने में सफल रहा है।
लायम ग्रुप का परिचय:
लायम ग्रुप का गठन 2007 में श्री जी.एस. रमेश ने किया जो एक दूरदर्शी व्यक्ति हैं। चेन्नई के इस ग्रुप का सालाना कारोबार 300 करोड़ रुपये से अधिक है। यह अपने ग्राहकों का विश्वसनीय मैनेजमेंट सॉल्यूशन पार्टनर है। विभिन्न सेवाओं में विशेषज्ञता प्राप्त है जैसे मानव संसाधन समाधान, नियुक्ति, स्टाफिंग, कंट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग, प्रशिक्षण और व्यवसाय परामर्श आदि। लायम भारत और पूरी दुनिया के विभिन्न उद्योगों को सेवाएं देता है। अपने तीन विज़न सीक्यूपी (लागत, गुणवत्ता और उत्पादकता) के माध्यम से उद्योग जगत में आरओआई सुनिश्चित करते हुए अपनी साख बनाई है। यह कंपनी अपने कार्य और सेवाओं के लिए डी एंड बी और यूरोप और एशिया की कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से प्रमाणित है। आईएसओ 9001ः2015 प्रमाणित संगठन है और एनईईएम एजेंट, एनएपीएस टीपीए और सरकार से एएसडीसी भागीदार के रूप में मान्यता प्राप्त है।
लायम ग्रुप का मिशन ग्राहकों के लिए नई-नई सेवाएं सेवाएं इजाद कर प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे बना रहना है। ग्राहकों की बदलती जरूरतों, बाजार के रुझानों और तकनीकी प्रगति के आधार पर यह अपने मिशन में सफल रहा है। यह उत्पादन, ऑटोमोबाइल, तेल और औद्योगिक क्षेत्र, गैस, बीएफएसआई और संबद्ध क्षेत्र के अपने ग्राहकों का विश्वसनीय भागीदार बन गया है। लायम ने ग्राहकों के साथ मिल कर सफलता की कहानी लिखी है। वे शुरुआत से ही ग्रुप के साथ रहे हैं। कुछ खास ग्राहक हैं – महिंद्रा, टोयोटा, अशोक लीलैंड, मदरसन सुमी सिस्टम्स, एंड्योरेंस, टाटा पावर, टाटा मार्काेपोलो, हिताची, एमआरएफ, याजाकी, एलएंडटी, पीएसए, यामाहा म्यूजिक आदि।
लायम ग्रुप का मुख्यालय चेन्नई में है। पूरे भारत में कारोबार है। गुरुग्राम, पुणे और मुंबई में कार्यालय हैं। लायम का लक्ष्य आईटीआई और डिप्लोमा धारकों को प्रशिक्षण देकर या कौशल बढ़ाकर उनके लिए जॉब का अवसर सुनिश्चित करना है और इसमें यह सफल रहा है। लायम से प्राप्त स्किल सेट के बल पर आज हजारों युवा रोजगार योग्य बन गए हैं।
इस तरह हुआ गौतम बुद्ध का अवतार*
(दिनेश चंद्र वर्मा – विनायक फीचर्स)
एशिया के अधिकांश देशों में ईश्वर के अवतार के रूप में आराध्य भगवान गौतम बुद्ध के उपदेशों और शिक्षाओं की सर्वव्यापकता इतनी अधिक रही है कि हिन्दू धर्म के दशावतारों में से एक अवतार गौतम बुद्ध का भी माना जाता है। हिन्दू धर्म ग्रंथों में भी उनका उल्लेख हुआ है तथा उनकी शिक्षाओं को भी महत्व दिया गया है।
भारत, तिब्बत, श्रीलंका, चीन, थाईलैंड, बर्मा तथा अन्य एशियाई देशों में गौतम बुद्ध के जीवन चरित्र और अलौकिक चमत्कारों पर अनेक ग्रंथ लिखे गये हैं, पर आज भारत में लोग गौतम बुद्ध से बहुत कम परिचित हैं। जिसने भारत में जन्म लिया तथा ज्ञान के आलोक से न केवल संपूर्ण एशिया को अपितु यूरोप को भी आलोकित किया। रूस से मिली गौतम बुद्ध की प्रतिमाएं इस बात का प्रमाण है कि उनकी आराधना पूर्व से पश्चिम तक व्याप्त थी। गौतम बुद्ध के बारे में भारत में सीमित ज्ञान का एक बड़ा कारण यह है कि उनके बारे में विदेशों में जो साहित्य लिखा गया वह विदेशी भाषाओं में था। भारत में उनके बारे में अधिकांश सहित्य पाली भाषा में लिख गया और यह भाषा आज लगभग विलुप्तावस्था में है।
गौतम बुद्ध के जन्म और जीवन की जो कथाएं भारतीय बौद्ध ग्रंथों में मिलती हैं, उनके अनुसार भगवान बुद्ध मूलरूप से स्वर्ग के निवासी थे। उन्होंने बुद्ध बनने के लिए बोधिसत्व के रूप में अनेक जीवन योनियों में जन्म लिया था। ये योनियां देवताओं की भी थी, मानव की भी थी और प्राणियों की भी। बौद्ध धर्म के महायान सम्प्रदाय के अनुसार गौतम बुद्ध एकमात्र बोधिसत्व भी इस धरती पर आए थे।
बोधिसत्व का पाली भाषा में अर्थ होता है- जिसके जीवन का लक्ष्य ज्ञान प्राप्त करना हो। महायान सम्प्रदाय में गौतम बुद्ध के अतिरिक्त जिन अन्य बोधिसत्वों का उल्लेख मिलता है, उनमें अक्लोकितेश्वर, मंजुश्री, मारीचि, समतभ्रद, वज्रपाणि एवं मैत्रेय के नाम उल्लेखनीय है, इनमें गौतम बुद्ध अंतिम बोधिसत्व हुए। गौतम बुद्ध के बोधिसत्व के रूप में अवतरण की कथाएं जातक कथाएं कहलाती है। इन कथाओं की संख्या 550 है अर्थात् बुद्धत्व प्राप्त करने के पूर्व गौतम बुद्ध 550 बार इस धरती पर मानव एवं विविध प्राणियों के रूप में अवतरित हुये थे।
अधिकांश बौद्ध ग्रंथ कहते हैं कि बोधिसत्व के रूप में जब गौतम बुद्ध तुषित नामक स्वर्ग में रहा करते थे तब उनकी एक ही आकांक्षा थी- मानव जाति का कल्याण और उद्धार। जब वे अपनी इच्छा पर दृढ़ रहे तो उनसे पूछा गया कि वे यह निश्चित करें कि वे पृथ्वी के किस भाग में जन्म लेना चाहेंगे, किस जाति में जन्म लेना चाहेंगे तथा उनकी माता कौन होगी तथा मनुष्य का शरीर धारण करके वे कितने दिनों तक पृथ्वी पर रहना चाहेंगे? गौतम बुद्ध ने इसके उत्तर में भारत भूमि में, क्षत्रिय जाति में, राजा शुद्धोधन के घर में तथा रानी महामाया के गर्भ से जन्म लेने का निश्चय बताया। उन्होंने यह भी निश्चित किया कि उनके जन्म के सात दिन बाद ही रानी महामाया की मृत्यु हो जाएगी।
तुषित स्वर्ग से रानी महामाया के गर्भ में आने के पूर्व गौतम बुद्ध ने अपनी भावी माता को स्वप्न में अपने जन्म की सूचना दी। उनकी मां ने यह स्वप्न देखा कि एक सफेद हाथी उनके गर्भ में प्रवेश कर रहा है। रानी ने यह स्वप्न राजा शुद्धोदन को सुनाया। शुद्धोदन ने इस स्वप्न का अर्थ विद्वान ब्राह्मणों से पूछा। ब्राह्मणों ने इस स्वप्न का यही अर्थ बताया कि रानी के गर्भ में या तो चक्रवर्ती सम्राट जन्म लेने वाला है या फिर कोई ज्ञानी (बुद्ध)
रानी महामाया ने लुम्बिनी के उद्यान में बुद्ध को जन्म दिया। प्रसव के समय वे एक शाल वृक्ष के नीचे खड़ी थी। जन्म के समय इंद्र सहित कई देवी-देवता उपस्थित थे। बुद्ध के शरीर पर जन्म के समय ही 32 शुभचिन्ह अंकित थे। अपने जन्म के साथ गौतम बुद्ध उठ खड़े हुये। वे सात कदम चले तथा उन्होंने उद्घोष किया- मैं संसार में अग्रणी हूं। शुद्धोदन ने जब गौतम बुद्ध के जन्म का उत्सव मनाया तो देवताओं तथा असित नामक ऋषि ने कहा- यह बालक बुद्धत्व (ज्ञान) प्राप्त करेगा। पर कुछ ब्राह्मणों ने कहा कि यदि यह बालक वृद्ध पुरुष, रोगी पुरुष, शव (मृत शरीर) और साधु को नहीं देखे तो चक्रवर्ती सम्राट बनेगा अन्यथा यह बुद्धत्व प्राप्त करेगा। राजा शुद्धोदन अपने पुत्र को चक्रवर्ती सम्राट बनाना चाहते थे, इसलिये गौतम बुद्ध पर कड़ी चौकसी रखी जाने लगी तथा यह प्रयास किया जाने लगा कि वह सांसारिक सुखों की ओर उन्मुख हो। बाल्यावस्था में गौतम बुद्ध का नाम सिद्धार्थ था।
इसके बाद की कथा से सभी परिचित हैं। सिद्धार्थ का विवाह 16 वर्ष की आयु में राजकुमारी यशोधरा या गोपा से हुआ। उनके राहुल नाम का एक पुत्र भी हुआ। एक दिन राजमहल से जब वे बाहर निकले तो उन्हें एक वृद्ध पुरुष, एक रोगी, एक साधु तथा एक शव देखने को मिला। इनके बारे में जानकारी मिलते ही सिद्धार्थ का हृदय दुख एवं वेदना से भर गया। इसके बाद 29 वर्ष की उम्र में उन्होंने एक रात को अपनी पत्नी तथा पुत्र को सोता हुआ छोड़ा तथा राजमहल त्याग दिया। बौद्ध ग्रंथों में इस घटना को महाभिनिष्कृमण कहा गया है।
विभिन्न धर्मों में जिस प्रकार की कल्पना शैतान या दुष्टात्माओं की कि गयी है उसी प्रकार की कल्पना बौद्ध ग्रंथों में भी है।
सिद्धार्थ ने जब राजमहल त्यागा तो दुष्टात्मा मार ने उन्हें पथभ्रष्ट करने का प्रयत्न किया तथा उन्हें सारी धरती का सम्राट बनाने का भी प्रलोभन दिया पर सिद्धार्थ अपने पथ से विचलित नहीं हुए। मार की कल्पना बौद्ध धर्म में उसी प्रकार की है, जिस प्रकार हिन्दू धर्म में कामदेव की।
अनोमा नदी पार करने के बाद सिद्धार्थ ने अपने बाल तलवार से काटे तथा उन्हें आकाश की ओर उछालकर कहा यदि मैं बुद्ध बनने वाला हूं तो ये बाल पृथ्वी पर नहीं आए। इसके साथ ही स्वर्ग के देवताओं ने यह बाल संभाले, उन्हें सीधा किया तथा उन्हें एक स्वर्ण मंजूषा में रखकर स्वर्ग ले गये।
यहां से सिद्धार्थ पैदल ही राजगृह पहुंचे। मगध का शासक बिम्बसार उनके पास आया तथा अपना राज्य उन्हें सौंपने का प्रस्ताव किया। बुद्ध ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तथा वे चलते-चलते गया के पास उरूवेला नामक स्थान पर पहुंचे। इसी स्थान पर उन्होंने छह वर्ष तक कठोर तपस्या की, जिससे उनका शरीर कृश हो गया। इसी समय सिद्धार्थ की यह धारणा बनी कि मांस और रक्त सुखाने से बुद्धत्व प्राप्त नहीं होगा। तभी (तपस्या की अवधि में बने) उनके पांच अनुयायी उन्हें छोड़कर चले गये।
सिद्धार्थ उस स्थान से चले तथा एक नदी के किनारे पहुंचे तो सुजाता ने उन्हें खीर खाने को दी। खीर खाने के बाद उन्होंने सोने के उस भारी बर्तन को नदी की जलधारा में फैंक दिया, जिसमें सुजाता खीर लाई थी तथा कहा- यदि आज मैं बुद्ध बनने वाला हूं तो यह भारी बर्तन ऊपर आ जाये अन्यथा पानी में डूब जाये। बर्तन पानी में नहीं डूबा। उसी दिन संध्या को सिद्धार्थ एक पीपल के वृक्ष के समीप पहुंचे। यही वृक्ष आज बोधि वृक्ष के नाम से विख्यात है। इस वृक्ष तक पहुंचने के पूर्व उन्हें स्वास्तिक का चिन्ह तथा एक घसियारा मिला, जिससे उन्होंने घास के आठ पूले लिये। पीपल के इस पेड़ को चारों ओर से देखने के बाद उन्होंने पूर्व दिशा में घास रखी और उस पर बैठकर प्रतिज्ञा की- चाहे मेरा चर्म, मेरी अस्थियां, मेरी मज्जा नष्ट हो जाय मेरा रक्त सूख जाये पर मैं इस स्थान से तब तक नहीं हटूंगा जब तक कि मुझे संपूर्ण ज्ञान प्राप्त नहीं हो जाएगा।
सिद्धार्थ की यह प्रतिज्ञा सुनकर दुष्टात्मा मार ने उन्हें कष्ट पहुंचाना प्रारंभ किया। उसने ऐसी तेज आंधी चलाई कि हाहाकार मच गया, पर सिद्धार्थ अपने स्थान पर अडिग बैठे रहे। मार ने उन पर पत्थर और अंगारे बरसाए पर सिद्धार्थ अडिग रहे। मार और उसकी सेनाएं जब सिद्धार्थ को डिगा नहीं सकी तो सिद्धार्थ ने पृथ्वी से कहा कि वह इस बात की साक्षी रहें कि मैं अपने स्थान से हिला तक नहीं हूं। तभी देवताओं ने आकाशवाणी की कि मार पराजित हो गया है तथा सिद्धार्थ विजयी हुए हैं। इसके साथ ही सूर्यास्त हुआ और रात्रि को सिद्धार्थ को बुद्धत्व प्राप्त हो गया। रात्रि के पहले प्रहर में उन्हें अपने पूर्व जन्मों का वृतान्त ज्ञात हुआ। दूसरे प्रहर में उन्हें संसार की वर्तमान स्थिति का ज्ञान हुआ तथा तीसरे प्रहर में उन्हें संसार की कार्यकारण श्रृंखला का ज्ञान हुआ।
बुद्धत्व प्राप्ति के बाद 49 दिन तक गौतम बुद्ध ने सात सप्ताह किया। इसके बाद के सात सप्ताह उन्होंने बोधिवृक्ष के नीचे बिताए, जहां उन्होंने मुक्ति का आनंद लिया तथा अभिधर्म पिटक का ज्ञान लिया। इसके बाद जब वे एक अन्य पीपल के पेड़ के पास पहुंचे तो दुष्टात्मा मार की पुत्रियां च्छिा, कामना और वासना ने उन्हें दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया। इसके बाद वे एक अन्य वृक्ष के पास पहुंचे वहां उन्हें दो व्यापारियों ने रोटी और मधु अर्पित की। पर बुद्ध के पास कोई बर्तन नहीं था, जिसमें वे ये रोटी और मधु ले सकते, तभी देवताओं ने उनके पास चार पाषाण पात्र पहुंचाए, जिनमें से एक में रोटी और मधु रखकर गौतम बुद्ध ने भोजन किया।
इसके बाद बुद्ध की संसार से अपने ज्ञान को परिचित कराने की कल्याणकारी यात्रा शुरू हुई। उन्होंने अपने पहले पांच प्रवचन सारनाथ (वाराणसी) के निकट मृगदाव में दिये तथा वहां धर्मचक्र की स्थापना की। यहां उन्होंने आर्य अष्टांग मार्ग की व्याख्या की। बुद्ध के अनुसार इन अष्टांग मार्गों के अनुसरण से निर्वाण की प्राप्ति होती है। ये अष्टांग मार्ग है- सम्यक विचार, सम्यक प्रेरणा, सम्यक भाषण, सम्यक व्यवहार, सम्यक जीविका, सम्यक प्रयास, सम्यक स्मृति, चेतना तथा सम्यक ध्यान। अपने प्रवचनों में उन्होंने सांसारिक दुखों के कारण तथा उनके निवारण के उपाय बताए।
इस समय बुद्ध की आयु 35 वर्ष की हो गयी थी। शेष 45 वर्ष उन्होंने यात्राएं की तथा धर्मोपदेश दिये। इस अवधि में उन्होंने आग तथा पानी पर चलकर दिखाया। बुद्ध के धर्मोपदेशों से प्रभावित होकर अनेक राजा-रानी उनके शिष्य बने। उनके पिता शुद्धोदन भी उनके अनुयायी बने।
उन दिनों बुद्ध के छह कट्टर विरोधी भी थे। राजा प्रसेनजित की सभा में बुद्ध ने इन विरोधियों के समक्ष अपनी अलौकिक शक्ति प्रदर्शित की। उन्होंने आकाश में पूर्व से पश्चिम तक मार्ग का निर्माण किया। उनके शरीर के ऊपरी हिस्से से जलधारा प्रवाहित हुई तथा इसके साथ ही निचले हिस्से से अग्नि की ज्वालाएं प्रगट हुई। बाद में उनके शरीर से सुनहरी किरणें निकली, जो सारे विश्व में बिखर गयी।
राजगृह प्रवास के दौरान बुद्ध के चचेरे भाई देवदत्त ने उनकी हत्या के तीन प्रयास किये। पहले एक हत्यारा भेजा, फिर शिलाएं फैंकी और अंत में उन्मत्त हाथी भेजा, पर ये तीनों प्रयास असफल हुए। हत्यारे एवं उन्मत्त हाथी के हृदय परिवर्तित हो गए और शिलाएं वहां तक पहुंच नहीं पायी।
राजा प्रसेनजित की सभा में चमत्कार दिखाने के बाद गौतम बुद्ध सशरीर त्रयत्रिंश नामक स्वर्ग में पहुंचे, वहां से जब वे पृथ्वी पर लौटे तो उनके साथ इंद्र और ब्रह्मा भी थे।
बुद्ध का निधन यद्यपि चंद नामक एक भक्त द्वारा सुअर के सूखे मांस का भोजन कराने के कारण हुआ, पर उन्हें पहिले से ही यह भासित था कि उनका अंत निकट है। उन्होंने दो शाल वृक्षों के बीच अपना बिस्तर लगवाया। (यह घटना कुशीनगर के समीप की है।) बुद्ध उत्तर दिशा में अपना मस्तक रखकर लेट गये। अंतिम क्षणों में उन्होंने अपने शिष्य आनंद सहित अनेक अनुयायियों को धर्मोपदेश दिया तथा महापरिनिर्वाण को प्राप्त हुए।
बुद्ध के महापरिनिर्वाण के समय पृथ्वी तक कांप उठी, कुशीनगर में भूकंप एवं आंधिया आयी। छह दिनों तक बुद्ध का शव उनके अनुयायियों के दर्शनार्थ रखा गया। सातवें दिन उनके शव को पांच सौ वस्त्रों से ढककर चिता पर रखा गया। पर चिता प्रज्जवलित नहीं हुई, क्योंकि बुद्ध के शिष्य कश्यप अंतिम दर्शनों से वंचित रह गये थे। बाद में कश्यप आए, उन्होंने बुद्ध की वंदना की तो चिता प्रज्वलित हो उठी।
बुद्ध के अस्थि अवशेषों को कुशीनगर के शासक मल्ल अपने पास ही रखना चाहते थे, जबकि सात अन्य शासक भी इन अवशेषों को प्राप्त करना चाहते थे। ये शासक अपनी सेनायें लेकर कुशीनगर पर आक्रमण करना चाहते थे। तभी द्रोण नामक एक ब्राह्मण की मध्यस्थता से ये अस्थि अवशेष आठ शासकों में बांटे गये। ये आठ शासक थे- मगध का अजात शत्रु, वैशाली के लिच्छवि, कपिलवस्तु के शाक्य, अल्पकप्प के बाली, रामग्राम के कोलिय, बेउद्रीप के ब्राह्मण, पावा के मल्ल तथा कुशीनगर के मल्ल।
इस बंटवारे के बाद पिप्पलिवन के मौर्य भी वहां पहुंचे तो अस्थियां कुशीनगर से जा चुकी थी, उन्हें चिता की भस्म से ही संतोष करना पड़ा। अस्थियां ले जाने वाले शासकों ने इन अस्थियों को स्तूपों में सुरक्षित रखा। पर आज केवल रामग्राम का स्तूप ही ऐसा है, जो क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है।
बौद्ध साहित्य में गौतम बुद्ध को बोधिसत्व, तथागत, सिद्धार्थ, शाक्य मुनि एवं शाक्य सिंह के नाम से अनिहित किया गया है।
उनका सारा जीवन चरित्र ही अलौकिक चमत्कारों से भरा बताया गया है, जिससे आज के युग में अधिकांश लोग असहमत हो सकते हैं। पर इस तथ्य से सभी सहमत हैं कि वे अलौकिक देव-पुरुष थे, जिन्होंने इस संसार को सत्य, अहिंसा, शांति और प्रेम का संदेश दिया। (विनायक फीचर्स)
अनंत अंबानी के वंतारा में एक असाधारण तीन दिवसीय कार्यक्रम
मुंबई (अनिल बेदाग) : वंतारा में एक असाधारण तीन दिवसीय कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण शुरुआत थी, जहां भारत भर के 45 प्रतिष्ठित कॉलेजों के 132 छात्रों ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में ज्ञान और कार्रवाई की यात्रा शुरू की। चार बैचों में विभाजित, इन छात्रों को संरक्षण, वन्य जीवन और पर्यावरण के बारे में जागरूकता और शिक्षा बढ़ाने पर केंद्रित एक व्यापक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए तैयार किया गया था।
यह कार्यक्रम अनंत भाई अंबानी का आइडिया था, जिनके वन्यजीव संरक्षण के प्रति गहन जुनून ने हमारे ग्रह की जैव विविधता के संरक्षण के लिए आशा जगाई। वन्यजीवों की भलाई के प्रति गहरी प्रतिबद्धता से प्रेरित होकर, उन्होंने खुद को उन अग्रणी पहलों के लिए समर्पित कर दिया है जो प्राकृतिक दुनिया के साथ हमारे संबंधों को फिर से परिभाषित करते हैं।
वंतारा इस प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यहीं पर त्यागे गए जानवरों और लुप्तप्राय प्रजातियों को सांत्वना और अभयारण्य मिला, भावुक आत्माओं के अथक प्रयासों के लिए धन्यवाद, जिन्होंने जीवन भर देखभाल के प्रति अपनी निष्ठा की प्रतिज्ञा की। प्रभाव कार्यक्रम मानव शोषण और निवास स्थान के नुकसान का खामियाजा भुगतने वाले जानवरों के लिए जीवन का एक नया पट्टा प्रदान करने के वंतारा के मिशन की पृष्ठभूमि में सामने आया। अभिनव संरक्षण प्रयासों और अटूट समर्पण के माध्यम से, वंतारा ने मानवता और पशु साम्राज्य के बीच सह-अस्तित्व की कहानी को फिर से लिखने का प्रयास किया। वंतारा के लिए अनंत भाई अंबानी का दृष्टिकोण पर्यावरण प्रबंधन की विरासत में गहराई से निहित था। अपने मूल में स्थिरता के साथ, वंतारा ने जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी की विरासत को आगे बढ़ाया, और 2035 तक शुद्ध-शून्य कार्बन पदचिह्न की दिशा में प्रयास किया।
जैसे ही पूरे भारत से छात्र वंतारा में एकत्रित हुए, वे खोज और परिवर्तन की यात्रा पर निकल पड़े। गहन अनुभवों और व्यावहारिक शिक्षा के माध्यम से, वे अपने समुदायों और उससे परे वन्यजीव संरक्षण के समर्थक बनने के लिए ज्ञान और प्रेरणा से लैस थे।
11 से 13 मई के बीच आयोजित, छात्रों ने एक सावधानीपूर्वक तैयार किए गए कार्यक्रम का अनुभव किया जो उन्हें सुविधा और इसके कामकाज से परिचित कराने और वन्यजीव बचाव और संरक्षण में प्रभावशाली करियर के लिए तैयार करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। इन छात्रों ने शैक्षणिक उत्कृष्टता और नेतृत्व क्षमता के शीर्ष क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया, जिन्हें समूह चर्चा और व्यक्तिगत साक्षात्कार से जुड़ी एक कठोर चयन प्रक्रिया के माध्यम से चुना गया था, और उन्होंने आरसीपी घनसोली, जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर और नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र सहित अन्य रिलायंस कार्यालयों का दौरा किया था।
कार्यक्रम की शुरुआत वंतारा के व्यापक दौरे के साथ हुई, जिससे छात्रों को रिलायंस की सबसे दूरदर्शी परियोजनाओं में से एक में परिचालन उत्कृष्टता और टिकाऊ प्रथाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखने का मौका मिला।
दो दिनों में निर्धारित गतिविधियों में वंतारा के कार्यवाहकों और व्यापार प्रमुखों के साथ गहन चर्चाएं शामिल थीं। इसका उद्देश्य भविष्य के नेताओं को व्यवसाय के वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों और वंतारा के लोकाचार से परिचित कराना था। कार्यक्रम वर्तमान और भविष्य को प्रेरित करने के लिए था
पीढ़ियों को अपने व्यावसायिक जीवन में पर्यावरण की स्थिरता और देखभाल को एकीकृत करने की आवश्यकता है।
वंतारा के प्रवक्ता ने व्यक्त किया, “वंतारा टाउन हॉल हमारे लिए इन असाधारण छात्रों को संरक्षण और नेतृत्व पर इसके प्रभाव के बारे में व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करने का एक अवसर था। उन्हें वंतारा की टिकाऊ प्रथाओं से अवगत कराकर, हमारा उद्देश्य प्राकृतिक दुनिया के साथ गहरे संबंध को प्रोत्साहित करना था और हमें आशा है कि हम इन युवा दिमागों को अधिक टिकाऊ भविष्य की दृष्टि से अपने-अपने क्षेत्रों में परिवर्तन लाने वाले बनने के लिए प्रेरित करेंगे।”
दीपिका चिखलिया टोपीवाला ने 200 एपिसोड को किया सेलिब्रेट
मुंबई (अनिल बेदाग) : टीवी धारावाहिक ‘रामायण’ में सीता की भूमिका से घर घर में लोकप्रियता हासिल करने वाली अभिनेत्री दीपिका चिखलिया ने जय श्रीराम का नारा लगाते हुए अपने टीवी शो धरतीपुत्र नंदिनी के 200 एपिसोड पूरे होने का जश्न मनाया। इस सीरियल से निर्मात्री बनीं दीपिका चिखलिया ने इस सफलता के अवसर पर शो के सेट पर शानदार केक काटकर सक्सेस को सेलिब्रेट किया। इस अवसर पर नंदिनी का रोल कर रही शगुन सिंह और आकाश की भूमिका निभा रहे अमन जायसवाल, राईटर हर्षा जी , क्रिएटिव निर्माता धीरज मिश्रा सहित पूरी टीम मौजूद रही। धारावाहिक धरती पुत्र नंदनी हर सोमवार से शुक्रवार रात साढ़े आठ बजे नज़ारा टीवी पर देखा जा सकता है।
कई दशकों बाद छोटे पर्दे पर लौटीं दीपिका चिखलिया टोपीवाला ने कहा कि कैसे एक साल बीत गया और सीरियल के 200 एपिसोड्स कंप्लीट हो गए हमें पता ही नहीं चला। अपना प्रोडक्शन हाउस डीटीसी मूवीज़ शुरू करने में धीरज मिश्रा ने मेरा काफी सहयोग किया। धरतीपुत्र नंदिनी की कहानी ने मुझे छू लिया था और मैं बहुत खुश हूं कि नज़ारा टीवी ने ऐसी कहानी को प्रसारित करने की हामी भरी। नज़ारा टीवी से जुड़े लोग भी काफी सहयोगीं रवैया हैं और यह धारावाहिक बनाने में उनका काफी क्रिएटिव सपोर्ट रहा।” दीपिका चिखलिया टोपीवाला शो में सुमित्रा देवी की महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रही हैं।
सीरियल में टाइटल रोल निभा रही शगुन सिंह धारावाहिक की सफलता से काफी खुश और उत्साहित हैं। उन्होंने 200 एपिसोड्स पूरे होने की पार्टी में खूब डांस किया और कहा कि मैं खुद को काफी भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे धरतीपुत्र नंदिनी में नंदिनी का प्यारा सा किरदार निभाने का मौका मिला। मैं सीरियल की मेकर दीपिका चिखलिया, अपनी मां, नज़ारा टीवी से जुड़े लोगों, धीरज मिश्रा और सभी साथी कलाकारों का शुक्रिया अदा करती हूं। मुझे खुशी है कि दर्शक मेरी भूमिका, मेरे लुक और मेरे बोलने के अंदाज को पसन्द कर रहे हैं।
बता दें कि टीवी शो धरतीपुत्र नंदिनी की कहानी एक ऐसे ‘किसान की बेटी’ की है जो जमीन और मिट्टी से गहरे रूप से जुड़ी हुई है। वह धरती के लिए बहुत सारे संघर्षों से गुजरने के लिए तैयार है। धरती माता के प्रति बेपनाह प्यार रखने वाली नंदिनी की मुलाकात सुमित्रा देवी से होती है, जो किसी ऐसी लड़की की तलाश में हैं जो उनके परिवार की जिम्मेदारी संभाले और उनके पोते आकाश को प्रभावित करे, जो विदेश से वापस लौटना चाहता है। सुमित्रा देवी आकाश के लिए नंदिनी को चुनती हैं लेकिन क्या एक ‘किसान की बेटी’ आकाश का दिल जीत पाएगी और परिवार को एकजुट कर पाएगी, इसके लिए आपको नज़ारा टीवी पर सीरियल धरतीपुत्र नंदिनी देखना होगा, जिसमें बहुत सारा मनोरंजन, ड्रामा और बेहतरीन कलाकारों की अदाकारी है।
पालीथिन की दुष्परिणाम, जिसे खाने से गाय की हो गई मौत
बिलासपुर। देखने में तो यह पालीथिन और कचरे का ढेर नजर आ रहा है, लेकिन यह कुछ और हैं। कुछ दिन पहले तिफरा के यदुनंदन नगर के पीछे के खाली बंजर पड़े जमीन में एक गाय की मौत हो गई थी। फिर धीरे-धीरे उनका शरीर डिकम्पोज होने लगा और चील, कव्वा ये और शियार ने भक्षण कर लिया। इसके बाद जो अवशेष बचा है, वो आपके सामने है।इसमें करीब 15 से 20 प्रतिशत पालीथिन नजर आ रहा है। खत्म न होने वाले इस पालीथिन ने ही गाय की जान ले ली। इसमें साफ दिख रहा कि इस पालीथिन के उपयोग से कितने गंभीर परिमाण सामने आते हैं। सरकार ने पालीथिन पर बैन लगा दिया है, क्योंकि यह पर्यावरण के लिए काफी घातक साबित हो रहा है।
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चुनाव के सारे चरण खत्म होते ही महायुति में मचमच शुरू
शहरी क्षेत्र में इन पालीथिन की बिक्री रोकने की जिम्मेदारी नगर निगम को दी गई है। साथ ही कहा गया है लोगों को भी जागरूक किया जाए और जुट के थैले उपयोग करने प्रेरित किया जाए। लेकिन इन कार्यों में महज खानापूर्ति की जा रही है। दिखावे के लिए कार्यवाही की जाती है, उसके बाद सब शांत हो जाता है। बाजार में धड़ल्ले से प्रतिबंधित प्लास्टिक और पालीथिन की बिक्री बढ़ते ही जा रही है। इसका बूरा असर पर्यावरण पर पड़ रहा है और बेवजह इसे खाकर बेसहारा मवेशियों को अपने जान से हाथ धोना पड़ रहा है।
शहरी क्षेत्र में इन पालीथिन की बिक्री रोकने की जिम्मेदारी नगर निगम को दी गई है। साथ ही कहा गया है लोगों को भी जागरूक किया जाए और जुट के थैले उपयोग करने प्रेरित किया जाए। लेकिन इन कार्यों में महज खानापूर्ति की जा रही है।
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चुनाव के सारे चरण खत्म होते ही महायुति में मचमच शुरू
मुंबई: महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के सारे चरण खत्म होते ही महायुति में मचमच शुरू हो गई है। महायुति में शामिल मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से इसकी शुरूआत हुई है। एक तरफ तो शिंदे की पार्टी के नेता अपने ही नेता के खिलाफ आरोप लगा रहे हैं, वहीं महायुति में शामिल अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी पर भी चुनाव में मदद न करने का आरोप लग रहा है। इस मचमच में बीजेपी नेता की भी एंट्री हो गई है, जिन्होंने शिंदे शिवसेना के नेता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री शिंदे की अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अजित ने अपने विधायकों की बैठक बुलाई है, जिसमें लोकसभा चुनाव के दौरान की स्थिति का आकलन किया जाएगा।
कीर्तिकर बनाम शिंदे
मुख्यमंत्री शिंदे की पार्टी के नेता और उत्तर-पश्चिम मुंबई से सांसद गजानन कीर्तिकर इन दिनों अपनी पार्टी के नेताओं के निशाने पर हैं। शिवसेना के उप नेता और पूर्व विधायक शिशिर शिंदे ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर गजानन पर पार्टी विरोधी होने का आरोप लगाते हुए उन्हें पार्टी से निकालने की मांग की है। शिशिर ने पत्र में लिखा कि पूर्व सांसद गजानन और उनकी पत्नी ने राज्य में पांचवें चरण के मतदान के दिन पार्टी विरोधी बयान देकर विपक्षी उद्धव ठाकरे गुट का पक्ष लिया। उन्होंने शिंदे से अनुरोध किया है कि पार्टी का जो नेता मातोश्री के सामने जो नतमस्तक है, उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाए। उन्होंने कहा कि गजानन के बेटे अमोल कीर्तिकर को ठाकरे गुट ने उत्तर-पश्चिम मुंबई लोकसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा है। अमोल अपने पिता गजानन के ऑफिस का इस्तेमाल कर रहे हैं। शिशिर ने आरोप लगाया है कि गजानन सीएम शिंदे के साथ हैं, लेकिन उनके एमपीएलएडी फंड का इस्तेमाल अमोल ने अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए किया। इसके परिणामस्वरूप शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में असंतोष फैल गया, क्योंकि इससे ठाकरे खेमे को फायदा हुआ। शिशिर के मुताबिक, गजानन की पत्नी ने मतदान के दिन मुख्यमंत्री को अपमानित किया और ठाकरे गुट का पक्ष लिया।
विवाद में बीजेपी नेता की एंट्री
शिंदे की पार्टी के नेता के गजानन पर लगाए इन आरोपों के बीच बीजेपी नेता प्रवीण दरेकर ने भी उनके खिलाफ बयान देकर विरोध को हवा दी है। दरेकर ने आरोप लगाया है, ‘गजानन मुंबई उत्तर-पश्चिम लोकसभा सीट से खुद चुनाव लड़ने के लिए शिंदे की शिवसेना से टिकट पाना चाह रहे थे। उनकी योजना अंतिम क्षण में अपनी उम्मीदवारी वापस लेकर बेटे और शिवसेना (ठाकरे गुट) के उम्मीदवार अमोल को निर्विरोध चुनकर लाने की थी।’
पुणे पोर्शे कार एक्सीडेंट केस में नाबालिग आरोपी की जमानत रद्द
पुणे: जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने पुणे के कल्याणीनगर दुर्घटना मामले में किशोर आरोपी की जमानत रद्द कर दी है और अब उसे जुवेनाइल कस्टडी सेंटर भेजा जाएगा। दरअसल दो जिंदगियों को खत्म करने के बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी को केवल एक निबंध लिखने के लिए कहकर जमानत दे दी थी। इसके खिलाफ पूरे महाराष्ट्र में गुस्से का माहौल था। इस घटना के दुष्परिणामों के बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आज नाबालिग आरोपी की जमानत रद्द कर दी और उसे किशोर सुधार गृह भेजने का आदेश दिया।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश
आरोपी वेदांत अग्रवाल को आज यानी बुधवार को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया गया। इसके साथ ही उनके खिलाफ लगाए गए अपराध की धारा भी बढ़ा दी गई है। उनके खिलाफ धारा 185 के तहत शराब पीकर गाड़ी चलाने का नया मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में पुणे पुलिस ने अदालत से अनुरोध किया है कि नाबालिग आरोपी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की इजाजत दी जाए क्योंकि यह अपराध गंभीर है। कोर्ट ने पुलिस की अर्जी पर सुनवाई की लेकिन आरोपी होश में था नहीं, यह पुलिस जांच के बाद तय करेगी।
नाबालिग के पिता, पब के दो कर्मियों को पुलिस हिरासत में भेजा
इससे पहले पुणे की एक सत्र अदालत ने कार दुर्घटना में शामिल नाबालिग के पिता और एक पब के दो कर्मियों को बुधवार को 24 मई तक की पुलिस हिरासत में भेज दिया। नाबालिग लड़के के पिता और ब्लैक कब पब के कर्मी नितेश शेवाणी और जयेश गावकर को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.पी. पोंखसे के सामने पेश किया गया। नाबालिग लड़के के पिता एक रियल एस्टेट कारोबारी हैं।
लोकसभा चुनाव के सातवें चरण में 08 राज्यों में 904 उम्मीदवार चुनाव मैदान में
लोकसभा चुनाव 2024 के सातवें चरण में 08 राज्यों /केंद्रशासित प्रदेशों में 904 उम्मीदवार चुनाव मैदान में
चरण 7 के लिए 08 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 57 संसदीय क्षेत्रों के लिए 2105 नामांकन पत्र दाखिल किए गए
चरण 7 में, पंजाब में 13 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों से अधिकतम 598 नामांकन फॉर्म थे, इसके बाद उत्तर प्रदेश में 13 संसदीय क्षेत्रों से 495 नामांकन थे। बिहार के 36- जहानाबाद संसदीय क्षेत्र से सर्वाधिक 73 नामांकन पत्र प्राप्त हुए, इसके बाद पंजाब के 7-लुधियाना संसदीय क्षेत्र से 70 नामांकन पत्र प्राप्त हुए। 7वें चरण के लिए एक संसदीय क्षेत्र में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की औसत संख्या 16 है।
लोकसभा चुनाव 2024 के आम चुनाव के चरण 7 के लिए राज्य/केंद्रशासित प्रदेशवार विवरण
| क्र.सं. | राज्य/ केंद्रशासित प्रदेश | 7वें चरण में संसदीय सीटों की सं. | नामांकन प्रपत्र प्राप्त हुए | जांच के बाद वैध उम्मीदवार | नाम वापसी के बाद अंतिम रूप से चुनाव मैदान में उम्मीदवार |
| 1 | बिहार | 8 | 372 | 138 | 134 |
| 2 | चंडीगढ़ | 1 | 33 | 20 | 19 |
| 3 | हिमाचल प्रदेश | 4 | 80 | 40 | 37 |
| 4 | झारखंड | 3 | 153 | 55 | 52 |
| 5 | ओडिशा | 6 | 159 | 69 | 66 |
| 6 | पंजाब | 13 | 598 | 353 | 328 |
| 7 | उत्तर प्रदेश | 13 | 495 | 150 | 144 |
| 8 | पश्चिम बंगाल | 9 | 215 | 129 | 124 |
| कुल | 57 | 2105 | 954 | 904 |











