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गाय को बचाने के चक्कर में पानी में बहे दो शख्स

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पीटीआई, भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में गाय को बचाने के लिए नदी में कूदे एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं वचाव कार्य के लिए आपदा दल के दो कर्मी भी नाव पलटने के कारण पानी में बह गए। लापता कर्मियों का पता लगाने के लिए लगभग 100 बचावकर्मियों को लगाया गया है।

घटना भिंड जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर एक इलाके की है। पुलिस अधीक्षक असित यादव ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि बुधवार शाम को कुंवारी नदी पर बने बांध के गेट में एक गाय के फंस जाने के बाद विजय सिंह ने पानी में छलांग लगा दी। उसे भंवर में फंसा देख उसके चचेरे भाई दिनेश सिंह भदोरिया ने भी उसे बचाने की कोशिश में छलांग लगाई, लेकिन तेज बहाव के कारण वह बह गया।

एसडीईआरएफ की ली गई मदद

अधिकारी ने एजेंसी को बताया कि किनारे पर मौजूद कचोंगरा गांव के स्थानीय लोगों ने रस्सियों की मदद से विजय को पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। नदी के बीच में झाड़ियों में फंसे दिनेश को देखने के बाद, ग्रामीणों ने अधिकारियों को सूचित किया, जिन्होंने उसे बचाने के लिए राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (एसडीईआरएफ) की मदद मांगी।

एसपी ने बताया कि एसडीईआरएफ की तीन सदस्यीय टीम लाइफ जैकेट पहनकर नदी में उतरी। हालांकि, उनकी नाव पलट गई, जिससे बचावकर्मी पानी के तेज बहाव में गिर गए। कुछ ही देर में बांध के पास तेज बहाव के चलते एसडीईआरएफ के जवान प्रवीण कुशवाहा और हरदास चौहान के लाइफ जैकेट निकल गए और दोनों लापता हो गए। एसपी ने कहा कि उन्हें बचाने के प्रयास जारी हैं।

तलाश में जुटी 100 कर्मियों की टीम

एसपी ने बताया कि एसडीईआरएफ का तीसरा जवान सुरक्षित नदी किनारे जाने में कामयाब रहा। दो लापता जवानों को खोजने का अभियान बुधवार रात को अंधेरे के कारण रोक दिया गया था और यह गुरुवार सुबह फिर से शुरू हुआ। लगभग 100 बचावकर्मी लापता एसडीईआरएफ जवानों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश – यूनिफॉर्म में तैनात रहेंगे गौरक्षक दल

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राजगढ़: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में एक नवाचार हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर बैठने वाले गौवंशों को हटाने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया गया है। कलेक्टर ने इस काम के लिए गौ रक्षक दलों को तैनात करने के निर्देश दिए है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत गौ रक्षक दल टार्च, सीटी, लाठी लेकर सड़कों पर जमा होने वाले आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाने का काम करेंगे।

राजगढ़ कलेक्टर डॉक्टर गिरीश कुमार मिश्रा ने कहा जिले से गुजरने वाले राजमार्गों से आवारा मवेशी को हटाने के लिए गौरक्षक दल तैनात करने के निर्देश दिए हैं। जनपद पंचायतों के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी एवं नगरीय निकायों के अधिकारियों की बैठक लेकर उन्‍होंने कहा कि राजमार्गों के जिन स्‍थानों पर गौवंश एकत्रित होता है, उन स्‍थानों को चिहिंत किया जाएगी। वहां विचरण करने वाले गौंवंश को मार्ग से हटाने की व्‍यवस्‍था की जाएगी।

दुघर्टना का शिकार होने बचेंगे

बैठक में कलेक्‍टर ने कहा कि राजमार्गों पर गौवंश की मौजूदगी रहने के कारण अक्सर सड़क दुर्घटनाएं हो जाती हैं। जिनसे जनहानि के साथ-साथ पशुहानि भी होती है। उन्‍होंने नगरीय निकायों एवं ग्राम पंचायतों के माध्‍यम से कर्मचारी तैनात कर मार्गों से पशुओं को हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

यूनिफॉर्म में तैनात रहेंगे गौरक्षक दल

कलेक्‍टर ने आगे कहा कि पशु हटाने के लिए तैनात होने वाले गौरक्षक दलों को निर्घारित यूनिफॉर्म दी जाएगी। साथ ही उनके पास टॉर्च, सीटी एवं लाठी भी होगी। जिससे वे आसानी से पशुओं को इन मार्गों से हटा सकेंगे। इन गौरक्षक के दलों के सदस्‍यों के फोन नंबर सीधे कंटोल रूम से जुड़े रहेंगे। इससे आवश्‍यकता पड़ने पर उन्‍हे उचित निर्देश दिए जा सकेंगे। साथ ही जरूरी सहयोग भी लिया जा सकेगा।

गौशालाओं की स्थिति को लेकर समीक्षा

कलेक्‍टर ने पशुओं को सड़क से हटाने के लिए पशुपालकों को जागरूक एवं प्रेरित करने के भी निर्देश दिए हैं। बैठक में कलेक्‍टर ने जिले में गौशालाओं की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्‍होंने कहा की जो गौशालाएं दुरूस्‍त नही हैं। उनको दुरूस्‍त कर सक्रिय किया जाएगा। इससे इन गौशालाओं में गौवंश रखे जाने की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था हो सकेगी।

एक्ट्रेस सीमा मीना अभिनीत एलबम “ओ मेरे हमदम” का वीडियो रिलीज

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मुंबई। एक्ट्रेस सीमा मीना अभिनीत एलबम “ओ मेरे हमदम” का ऑडियो और 150 से अधिक प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया है जिसे लाखों करोड़ों दर्शकों द्वारा पसंद किया गया। 21 अगस्त 2024 को इस एलबम का वीडियो बॉलीवुड के प्रसिद्ध म्यूजिक डायरेक्टर, सिंगर मनमीत सिंह के हाथों रिलीज हुआ। जिसे शाइनिंग स्टार यूट्यूब प्लेटफॉर्म में देखा जा सकता है।

वीडियो रिलीज के अवसर पर निर्माता डॉ निकेश जैन माधानी, डॉ रामकुमार पाल, एक्ट्रेस सीमा मीना सहित पूरी प्रोडक्शन टीम की उपस्थिति रही।
“ओ मेरे हमदम” एलबम के वीडियो में दर्शक सीमा मीना को मनमोहक अंदाज में गिटार बजाते हुए देख सकते हैं जिसके लिए उन्होंने विशेष रूप से ट्रेनिंग ली हैं। एलबम में सीमा के साथ को-एक्टर विपिन सिंह हैं।
इस एलबम के सिंगर आदित्य जैन, कंपोजर मीत ट्यून्स, विराज विधीर, गीतकार मनीष सिंह और डायरेक्टर तान्या थानादार हैं।
मुंबई के जाने माने बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी ने बतौर प्रोड्यूसर रोमांटिक एलबम “ओ मेरे हमदम” का निर्माण किया है।


सीमा मीना ने डॉ निकेश जैन माधानी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने मेरे टैलेंट को पहचाना और अपने एलबम में अवसर देते हुए मुझे लॉन्च किया जो कि मेरे लिए बड़ी खुशी की बात है।
“ओ मेरे हमदम” एलबम को शाईनिंग स्टार और माधानी फाइनेंस एंड इंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
इस एलबम के निर्माण में ब्राइट आउटडोर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के सर्वेसर्वा डॉ योगेश लखानी, सोशल वर्कर डॉ रामकुमार पाल के साथ साथ निशान कुमार का भरपूर सहयोग रहा और मीत ब्रदर्स के साथ उनकी पूरी टीम का भी उत्साहजनक सहयोग प्राप्त हुआ।
इससे पहले सीमा मीना टीवीएस के लिए एड शूट में अमिताभ बच्चन और महेंद्र सिंह धोनी के साथ काम कर चुकी हैं। हाल ही सीमा ने एक एनर्जी ड्रिंक 7 हॉर्स के लिए पोस्टर शूट की है। साथ ही वह कई प्रिंट शूट और पोस्टर शूट में मुख्य भूमिका निभा चुकी है।
राजस्थान सरकार के कार्यक्रम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान में ब्रांड एंबेसडर के रूप में एक्ट्रेस सीमा मीना जुड़ी हैं।
आपको बता दें कि सीमा मीणा राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर की रहने वाली हैं। फैशन इंडस्ट्री में वह कई ब्यूटी पेजेंट कंपीटिशन में नए मॉडल को ट्रेनिंग और ग्रूमिंग करती है। इसके अलावा वह एक सोशल वर्कर के रूप में लड़कियों के उत्थान के लिए नियमित कार्य करती रहती हैं और वह अनेक लड़कियों के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं।
सीमा मीणा के उल्लेखनीय सामाजिक कार्यों को देखते हुए उन्हें पिछले दिनों मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के हाथों सम्मान मिल चुका है। इसके अलावा सीमा को फिल्म तेरे नाम की एक्ट्रेस भूमिका चावला के हाथों तमस आईकॉनिक अवॉर्ड्स 2024, फिल्म परदेश की एक्ट्रेस महिमा चौधरी के हाथों ग्लैमर एंड लाइफ स्टाइल अवार्ड 2024 और फिल्म मोहब्बतें की एक्ट्रेस प्रीति झंगियानी के हाथों नेशनल इंपैक्ट अवार्ड 2024 मिल चुका है।
मुंबई में निवासरत मॉडल एक्ट्रेस सीमा मीना के पति आशीष मीना मुंबई में रेलवे में पेशे से इंजीनियर हैं। सीमा एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देने से कभी भी पीछे नहीं हटती। सीमा मीणा FENTA Association की राष्ट्रीय सदस्य है। वह मिसेज एशिया इंडिया 2021 और मिसेज राजस्थान 2023 रह चुकी हैं। सीमा ब्यूटी पेजेंट शो फेश ऑफ गुजरात 2023 और मिस एंड मिसेज सुपर इंडियन मॉडल 2024 में ज्यूरी मेंबर रही हैं।

प्रोड्यूसर डॉ निकेश जैन माधानी निर्मित एलबम “ओ मेरे हमदम” का वीडियो शाइनिंग स्टार चैनल पर हुआ रिलीज

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मुंबई। हाल ही में “ओ मेरे हमदम” अलबम का वीडियो बॉलीवुड के प्रसिद्ध म्यूजिक डायरेक्टर, सिंगर मनमीत सिंह के हाथों रिलीज हुआ। उसी अवसर पर एलबम के निर्माता डॉ निकेश जैन माधानी, सोशलवर्कर डॉ रामकुमार पाल, एक्ट्रेस सीमा मीना सहित पूरी टीम की उपस्थिति रही। मुंबई के जाने माने बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी ने बतौर प्रोड्यूसर और फाइनेंसर रोमांटिक एलबम “ओ मेरे हमदम” का निर्माण किया है। इस एलबम के ऑडियो को 150 से अधिक प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया जिसे लाखों करोड़ों दर्शकों द्वारा पसंद किया जा रहा है। और अब वीडियो को शाइनिंग स्टार चैनल पर रिलीज किया गया है। इस एलबम में खूबसूरत एक्ट्रेस एवं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एंबेसडर सीमा मीना ने अभिनय किया है। “ओ मेरे हमदम” एल्बम में सीमा मीना को मनमोहक अंदाज में गिटार बजाते हुए दर्शक देख सकते हैं। एलबम में सीमा के साथ को-एक्टर विपिन सिंह हैं।

इस एलबम के सिंगर आदित्य जैन, कंपोजर मीत ट्यून्स, विराज विधीर, गीतकार मनीष सिंह और डायरेक्टर तान्या थानादार हैं।
“ओ मेरे हमदम” एलबम को शाईनिंग स्टार और माधानी फाइनेंस एंड इंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
इस एलबम के निर्माण में ब्राइट आउटडोर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के सर्वेसर्वा डॉ योगेश लखानी, डॉ रामकुमार पाल के साथ साथ निशान कुमार का भरपूर सहयोग रहा और मीत ब्रदर्स के साथ उनकी पूरी टीम का भी उत्साहजनक सहयोग प्राप्त हुआ।
डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी बॉलीवुड में कई वर्षों से सक्रिय हैं, इसके पहले उन्होंने कई एल्बम और टीवी शो का निर्माण किया है। साथ ही वह कई प्रोजेक्ट को फाइनेंस भी करते हैं। डॉ निकेश जैन हमेशा नई प्रतिभाओं को मौका देकर प्रोत्साहित करते हैं। इस एलबम में उन्होंने सीमा मीना को लॉन्च किया है जिससे खुश होकर सीमा मीना उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट की हैं।

सात हजार हिन्दू मुस्लिम महिलाओं सहित बच्चियों ने रईस लश्करिया को बांधी राखी

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मुंबई। भाई बहन के स्नेह, प्यार और रक्षा का त्योहार रक्षाबंधन के उपलक्ष्य में जोगेश्वरी इलाके में एआईएमआईएम नवनियुक्त मुम्बई अध्यक्ष रईस लश्करिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम में लगभग 7 हज़ार हिन्दू, मुस्लिम महिलाओं ने उन्हें राखी बांधी। कुछ बहनों ने आशीर्वाद दिया तो किसी ने उनके सुनहरे भविष्य की कामना की।

एआईएमआईएम के पूर्व मुम्बई अध्यक्ष को हटाकर रईस लश्करिया को पार्टी का नया अध्यक्ष बनाया गया है। पत्रकारों से उन्होंने कहा, हमें पूरा यकीन है कि आगामी विधानसभा चुनाव में हमारी पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी और हमारे कई विधायक जीत कर आएंगे। हमारे महाराष्ट्र अध्यक्ष इम्तियाज़ जलील महा विकास आघाडी के साथ गठबंधन की पेशकश की है। हमारी पार्टी और महा विकास आघाडी का मसकद वर्तमान सरकार और उसकी सहयोगी पार्टी को हराना है। साथ ही उन्होंने दुख जाते हुए कहा कि बदलापुर और पश्चिम बंगाल की दर्दनाक घटना समाज के लिए कलंक है। बहन बेटियों पर ऐसा अत्याचार असहनीय है। दोषियों पर कड़ी कारवाई होनी चाहिए।
कुल मिलाकर रक्षाबंधन का ये कार्यक्रम शानदार रहा था, लेकिन राजनीतिक गलियारे में ये भी चर्चा है कि मुसलमानों के हित की बात करने वाली पार्टी की अब हिन्दू वोट बैंक पर भी नज़र है।

फायर एंड सिक्योरिटी इंडिया एक्सपो के उद्घाटन पर मंत्री अनिल भाईदास पाटिल सहित चार हजार से अधिक प्रतिभागी की उपस्थिति

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मुंबई। फायर एंड सिक्योरिटी इंडिया एक्सपो (FSIE) के उद्घाटन दिवस में 4,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और उद्योग में नवीनतम नवाचारों का प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम की सह-मेजबानी नोवा एग्जीबिशन और कॉन्फ्रेंस और फायर एंड सेफ्टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FSAI) द्वारा की गई, जिसमें सरकारी अधिकारियों, उद्योग के नेताओं और विशेषज्ञों सहित विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाया गया।

एक्सपो की भव्य उद्घाटन के अवसर पर महाराष्ट्र के राहत और पुनर्वास और आपदा प्रबंधन मंत्री अनिल भाईदास पाटिल की उपस्थिति रही। श्री पाटिल की उपस्थिति ने पूरे देश में अग्नि, सुरक्षा और सुरक्षा उपायों को बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। इसके अतिरिक्त, उद्घाटन सत्र को सजाने वाले गणमान्य व्यक्तियों में MIDC के मुख्य अग्नि अधिकारी और सलाहकार और MFS के निदेशक संतोष वारिक, मुंबई फायर ब्रिगेड के मुख्य अग्नि अधिकारी रविंद्र अंबुलगेकर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष राजमल नाहर, FSAI के अध्यक्ष सुरेश मेनन और FSIE के निदेशक सिद्धार्थ साराफ शामिल थे।


इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे को संबोधित करते हुए, महाराष्ट्र फायर सर्विसेज ने IIT गांधीनगर के सहयोग से 20 से अधिक राज्यों के अग्नि अधिकारियों के लिए एक विशेष कार्यशाला आयोजित की, जिसमें सुरक्षा कर्मी, नौकरशाह, सलाहकार और अन्य उद्योग हितधारक शामिल थे। कार्यशाला में ईवी आग से उत्पन्न चुनौतियों और रोकथाम और शमन रणनीतियों पर चर्चा की गई।
एक्सपो में एक व्यापक सुरक्षा सम्मेलन भी शामिल था, जिसमें जोखिम शमन में नवीनतम रुझानों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा की गई।
160 से अधिक प्रमुख ब्रांडों ने अपने नवीनतम उत्पादों और समाधानों का प्रदर्शन करते हुए, एक्सपो ने उद्योग की प्रगति का व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया। अपनी प्रभावशाली उपस्थिति और विविध प्रस्तावों के साथ, फायर एंड सिक्योरिटी इंडिया एक्सपो ने खुद को उद्योग के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में स्थापित किया है। इस कार्यक्रम ने नवीनतम प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया, ज्ञान साझा करने को बढ़ावा दिया और प्रमुख हितधारकों के बीच नेटवर्किंग के अवसरों की सुविधा प्रदान की।

गौशाला संस्थाओं को स्वावलंबी बनाएं: डॉ गिरीश जयंतीलाल शाह ,गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेलने शुभकामनाएं दीं

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समस्त महाजन का अंतरराष्ट्रीय सेमिनार 23 अगस्त से….
गौशाला संस्थाओं को स्वावलंबी बनाएं: डॉ गिरीश जयंतीलाल शाह

हाइलाइट्स:
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> भारत सरकार के एनिमल वेल्फेर बोर्ड के सहयोग से समस्त महाजन द्वारा 23 से 25 अगस्त तक धर्मज (गुजरात) और पिंडवाड़ा(राजस्थान) तक ‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’का डॉ. गिरिशभाई शाह के मार्गदर्शन में आयोजन
> अजीत प्रसाद महापात्र, गोपाल आर्य, नवल किशोरजी, सुनील विदवंश, गुजरात के कृषि मंत्री राघवजीभाई पटेल, भारत सरकार के पशुपालन मंत्रालय,एनिमल वेल्फेर बोर्ड के विभिन्न राज्यों के गौ सेवा आयोग और राज्य एनिमल वेल्फेर बोर्ड आदि के अधिकारी, पदाधिकारी शामिल होंगे।
> गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेलने शुभकामनाएं दीं
> विभिन्न राज्यों के लगभग 500 गौशाला-पांजरापोलो -जीवदया संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
> गुजरात और राजस्थान के विभिन्न शहरों में पशुपालन एवं पर्यावरण पर आंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

 ( गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेलने शुभकामनाएं दीं ) 

राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित स्वयंसेवी संस्था समस्त महाजन के तत्वावधान में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संबोधित करते हुए भारत सरकार के पशु कल्याण विषय के सलाहकार मित्तल खेतानी डॉ गिरीश जयंतीलाल शाह की ओर से संबोधित करते हुए कहा कि समूचे देश में लावारिस पशुओं की बहुत बड़ी समस्या है जिसके लिए देश भर में गौशाला का विकास करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बनाने के लिए समस्त महाजन समर्पित है और तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन कर रहा है।
भारत सरकार के भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इस विषय पर विशेष विवरण देते हुए बताया कि डॉ गिरीश जयंती लाल शाह भारतीय जीवन कल्याण रोड के मार्गदर्शन में एनिमल वेलफेर बोर्ड के सहयोग से समस्त महाजन ने 23 से 25 अगस्त 2024 (शुक्रवार- शनिवार -रविवार) तक धर्मज (गुजरात) और पिंडवाड़ा (राजस्थान) तक ‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’ का आयोजन किया हैं। यह यात्रा गौशालाओं, पांजरापोलो के बारे में जानने-समझने और अबोल जीवों को शाता देने के लिए की गई है।
उन्होंने आगे बताया कि आज वैश्विक स्तर पर जल, जन, जमीन, जंगल, जानवरों की सेवा में कार्यरत सभी समाजों की गतिविधियों में मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, बचाव कार्य, गौशालाओं और पांजरापोलो को सहायता प्रदान करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, आत्मनिर्भर कृषि, जल भंडारण शामिल हैं। जीवदया रथ, भोजन रथ, सामाजिक उत्थान, विशेषकर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तत्काल सहायता, पशु वध और बलि की रोकथाम, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जीवन रक्षा, गौसेवा, मानव सेवा सहित विभिन्न सेवाएँ शामिल हैं।
डॉ गिरीश जयंती लाल शाह के उद्देश्यों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, गौ सेवा गतिविधि के अखिल भारतीय गौसेवा संयोजक अजीत प्रसाद महापात्रा, अखिल भारतीय पर्यावरण गितिविधि संयोजक गोपाल आर्य, अखिल भारतीय गौसेवा संयोजक नवल किशोरजी, अखिल भारतीय गौसेवा क्षेत्र संयोजक सुनील विदवंश, गुजरात के कृषि मंत्री राघवजीभाई पटेल, पशुपालन मंत्रालय, भारत सरकार, एनिमल वेल्फेर बोर्ड ,विभिन्न राज्यों के गौ सेवा आयोग और राज्य एनिमल वेल्फेर बोर्ड आदि के अधिकारी, पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। विभिन्न राज्यों की लगभग 500 गौशालाओं-पंजारापोलो-जीवदया संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे। गुजरात के जीवदयाप्रेमी मुख्यमंत्री भूपेन्द्रभाई पटेलने इस संबंध में अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं।
अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के बारे में कहा कि 23 अगस्त 2024 को यात्रा के दौरान 146 एकड़ भूमि पर घास उगाकर गांव के पशुधन का भरण-पोषण कैसे किया जाए, 6000 पशुओं को ग्राम पंचायत से मूल मूल्य पर घास मिलेगी, हर साल रु. 50 लाख की आय आदि तथा 17000 इमली, आँवला तथा आम के वृक्षों की मुलाकात तथा अहमदाबाद में सायं 5 बजे से 9 बजे तक 700 गिर गाये जहां निवास करती है ऐसी बंसी गिर गौशाला की मुलाकात, गौशाला में एक शैक्षणिक कक्षा का आयोजन किया गया है । 24 अगस्त सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक वीरमगाम में 4 तालाब, 5000 पेड़, 2700 पशुओं तथा 1200 एकड़ गौचर भूमि का दौरा और दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक गुजरात में बनासकांठा जिले के भाभर में 11000 गायों के साथ वैज्ञानिक मॉडल से बनी जलाराम गौशाला का दौरा, 25 अगस्त सुबह 9 बजे से राजस्थान आबू रोड के पास 12 बजे तक पावापुरी में 6000 गायों वाली गौशाला और 1 लाख पेड़ों की सुंदर व्यवस्था का दौरा और पिंडवाड़ा में वैज्ञानिक ढंग से निर्मित सुविधाजनक गौशाला का निरीक्षण करने की भी योजना है। जिसमें गुजरात और राजस्थान के विभिन्न शहरों में पशुपालन एवं पर्यावरण विषय पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किये जायेंगे।
इसके साथ ही गौशालाओं को स्वावलंबन की ओर परिवर्तित करना, गौ-आधारित संस्कृति की पुनर्स्थापना, पशु-विकास, गौ-आधारित कृषि-स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर जन-जागरूकता, गौ-पालन, जीवदया के संबंध में विभिन्न कानूनों का निर्माण तथा मौजूदा कानून का कड़ाई से कार्यान्वयन करना, गाय संस्कृति को बढ़ावा देना, गौशाला-पंजरापोलों की बुनियादी सुविधाओं का निर्माण करना, जानवरों और पक्षियों का स्वास्थ्य संरक्षण, रासायणिक कीटनाशकों के उपयोग पर प्रतिबंध, भारत में 6.50 लाख ग्राम गौचरों का विकास, देशी वृक्षों का रोपण बढ़ाना, जल संरक्षण, भावना और विज्ञान का एकीकरण, मनुष्यों में पक्षियों, पशुओं के प्रति अधिक दया पैदा करना, वर्षा जल संचयन, स्वच्छ दूध उत्पादों की उपलब्धता, फसल सुरक्षा के लिए अहिंसक स्वदेशी उपचार, शाकाहारी प्रसार के मुद्दों सहित सभी मुद्दों पर परिणामलक्षी तरीके से चर्चा की जाएगी।
यात्रा में शामिल होने के लिए प्रति व्यक्ति पंजीकरण शुल्क रु. 1000 जिसमें तीन दिनों का आवास और भोजन शामिल है। सभी को अपने वाहन की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। संस्था द्वारा की जानीवाली बस की व्यवस्था का लाभ लेना है तो रु. 1000/- अलग से भुगतान करना होगा। बस बड़ौदा या अहमदाबाद से चलेगी। इन दोनों राशियों का भुगतान अलग-अलग करना होगा।गायें हमेशा से भारत की संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही हैं। ‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’ एक ऐतिहासिक प्रयास है जिसमें गाय-केंद्रित और गाय-आधारित उद्योगों से जुड़े सभी क्षेत्रों के सैकड़ों लोग भाग लेंगे। इस ‘राष्ट्रीय जीवदया पर्यावरण यात्रा’ में गाय के पंचगव्य से बने शैंपू, साबुन और गोमूत्र से बने सौंदर्य प्रसाधन, औषधि सहित गाय आधारित उत्पादों के बारे में ज्ञान और समझ प्रदान की जाएगी।
अधिक जानकारी के लिए भारत सरकार के एनिमल वेलफेर बोर्ड के सदस्य डॉ. गिरीश शाह (मो. 98200 20976), भारत सरकार के पशुपालन मंत्रालय के मानद सलाहकार समिति सदस्य मित्तल खेताणी (मो. 98242 21999), देवेन्द्र जैन (मो. 98251 29111), डॉ. आर. बी. चौधरी (मो. 861 083 7079) का संपर्क करने की बिनती है।

पुण्य श्लोका महारानी अहिल्याबाई होल्कर

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(शिवप्रकाश-विभूति फीचर्स)

पुण्यश्लोका महारानी अहिल्याबाई होल्कर, का जीवन सादगीपूर्ण एवं शासन शैली संवेदनशील, सहज, धर्मनिष्ठ, न्यायप्रिय एवं लोक कल्याणकारी थीं। इन्हीं गुणों के कारण उनकी प्रजा उन्हें सदैव लोकमाता के रूप में देखती थी। उनके अप्रतिम गुणों को देखकर ब्रिटिश इतिहासकार जॉन केयस ने उन्हें “दार्शनिक रानी” ( The Philosopher Queen) की उपाधि दी ।
अहिल्याबाई पिता मंकोजीराव शिंदे एवं माता सुशीलाबाई के परिवार में 31 मई 1725 को जन्मी थीं। उनका जन्मस्थान चौंडी (अहमदनगर, महाराष्ट्र) था, जो अब अहिल्यानगर के नाम से ही परिवर्तित हो गया है। धनगर जाति में जन्म लेने के बाद भी उनकी प्रतिभा को पहचानकर पेशवा बाजीराव एवं मल्हारराव होल्कर दोनों के परस्पर परामर्श के उपरान्त अहिल्याबाई का विवाह मल्हारराव ने अपने पुत्र खंडेराव के साथ संपन्न कराया । युद्ध में वीरगति प्राप्त होने के कारण उनको पति वियोग सहना पड़ा । अपने जीवन काल में उन्होंने श्वसुर मल्हार राव होल्कर, नवासे ( पुत्री के पुत्र) एवं पुत्री सभी की असमय मृत्यु को देखा। इसी असहय वेदना को सहते- सहते वे स्वयं भी 70 वर्ष की उम्र में 1795 में संसार छोड़कर चली गई।

पति की मृत्यु के पश्चात अपने श्वसुर के आग्रह पर उन्होंने राजकाज सम्हालना प्रारंभ किया। उनका शासन प्रजावत्सल, न्यायप्रिय, सुशासन का प्रतीक था। धर्म के प्रति भक्ति के कारण उन्होंने अपनी राजधानी इंदौर से परिवर्तित कर पवित्र नदी नर्मदा के किनारे महेश्वर में स्थानांतरित की । उनका महेश्वर में राजधानी स्थानान्तरित करने का उद्देश्य था कि राज्य संचालन के साथ-साथ वह माँ नर्मदा की सेवा एवं आराधना कर सकें । माँ नर्मदा के किनारे उनका महल एक सर्वस्व त्यागी सन्यासिनी का महल था । जिसमें उन्होंने अपनी आयु के 28 वर्ष व्यतीत किए थे।

देश की सरकारें वर्तमान समय में अपनी आर्थिक नीतियों के केंद्र में समाज के जिस पिछड़े वर्ग के उत्थान एवं लघु उद्योग केंद्रित नीतियों का विचार करती हैं, आज से लगभग 300 वर्ष पूर्व महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इस दूरदृष्टि का परिचय देते हुए 1745 में एक राजज्ञा द्वारा बुनकर, सुतार, कारीगरों से महेश्वर में निवास करने का आग्रह किया । आर्थिक विकास की दिशा में उनके द्वारा की गई अनेक पहल में से एक महेश्वर में निर्मित साड़ी आज भी संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है , जिसे महेश्वरी साड़ी के नाम से जाना जाता है । इस उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए वह स्वयं भी वहाँ निर्मित वस्त्र पहनती थी एवं देश- विदेश से आने वाले महानुभावों को भेंट स्वरूप इन्हीं वस्त्रों को प्रदान भी करती थीं । प्राकृतिक आपदा में किसानों का सहयोग, सेना के आवागमन से होने वाली फसलों की क्षतिपूर्ति की व्यवस्था भी उन्होंने की थी । आत्मनिर्भरता के साथ-साथ शिक्षा का केंद्र महेश्वर बने इसके लिए विद्वानों, धर्माचार्यों को बुलाकर संस्कृत पाठशाला प्रारंभ करने का कार्य भी उनके द्वारा हुआ।

मल्हारराव के युद्ध अभियानों पर जाने के उपरांत महारानी अहिल्याबाई राज्य का संचालन भी कुशलता के साथ करती थीं। पत्राचार के माध्यम से मल्हार राव को अपने राज्य के समाचार भेजना एवं प्रत्युत्तर में राज्य संचालन के लिए सुझाव लेना यह उनकी नियमित प्रक्रिया थी । सेवा एवं रसद सामग्री का प्रबंध, कर वसूली आदि की व्यवस्था बड़ी निपुणता के साथ उन्होंने की थी ।

महारानी स्त्री होने के बाद भी न केवल राज्य संचालन में निपुण बल्कि एक कुशल योद्धा भी थीं। बचपन में ही सैन्य शिक्षा, घुड़सवारी, शस्त्र संचालन उन्होंने सीखा था । राघोवा के आक्रमण के समय अपने राज्य की रक्षा के लिए कूटनीति का परिचय देते हुए उन्होंने पुराने संबंधों के आधार पर सिंधिया, भोंसले, गायकवाड आदि का सहयोग माँगा । राघोवा को उचित दंड देने के लिए 500 महिलाओं की सैन्य टुकड़ी को प्रशिक्षित भी किया । राघोवा को उनके द्वारा लिखा पत्र आज भी उनकी कूटनीतिक दूरदर्शिता को प्रकट करता है, जिसमें उन्होंने लिखा कि “आप मुझे अबला समझकर राज्य हड़पने के लिए यहां आए हैं लेकिन मेरी शक्ति आपको युद्ध क्षेत्र में ज्ञात होगी । मैं महिला सेना के साथ आपका मुकाबला करूंगी।यदि मैं युद्ध में पराजित हो गई तब मेरी हंसी और आपकी प्रशंसा कोई नहीं करेगा और यदि आप युद्ध में हार गए तो आप कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे ।” केवल राघोवा ही नहीं अपने राज्य की सीमाओं पर राजस्थान की ओर से मिलने वाली चुनौती का भी उन्होंने साहस के साथ सामना कर शत्रु को कुचलने का कार्य किया । सेना का संचालन, सैनिकों की चिकित्सा आदि भी उन्होंने कुशलता के साथ की । नाना फड़नवीस ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा था कि “अब तक देवी अहिल्याबाई की धार्मिकता की प्रशंसा तो हम सुनते आए हैं मगर हम नहीं जानते थे कि वह बहादुर भी हैं अपने शत्रुओं के दांत खट्टे कर सकती हैं।”

महारानी अहिल्याबाई का शासन कठोर एवं न्यायप्रिय शासन था । उन्होंने जाति-पांति, ऊँच – नीच के भेदभाव से ऊपर उठकर चोरों के भय से जनता को मुक्ति प्रदान करने वाले नौजवान से अपनी पुत्री का विवाह किया । गरीब एवं कमजोर लोगों की सेवा में वह हमेशा तत्पर रहती थी। पति की मृत्यु के पश्चात् पति की संपत्ति पर पूर्ण अधिकार की व्यवस्था एवं स्त्री को दत्तक लेने का अधिकार देना यह उनके महिला सशक्तिकरण के उदाहरण हैं । उनके राज्य में रहने वाले भीलों (जनजाति) को अपराध मुक्त करने के लिए कृषि के औजार उपलब्ध कराकर सशक्त करने का कार्य उन्होंने किया। अपराध करने पर कठोर दंड एवं समस्याओं का त्वरित समाधान यह उनके शासन की विशेषता थी । पक्षपात रहित सभी को समान न्याय उनके शासन में था । इसके लिए अपने सेनापति के पुत्र को भी अपराध करने पर उन्होंने जेल में डलवा दिया था। प्रजा को न्याय दिलाने के लिए न्यायालय एवं न्यायाधीशों की नियुक्ति उन्होंने की थी। अपने राज्य कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील एवं आत्मीयतापूर्ण व्यवहार, युद्ध में वीरगति पाने वाले सैनिक परिवारों के कल्याण की व्यवस्था को राज्य कोष से करने का प्रबंध उन्होंने किया था। अपने प्रति कठोर जीवन जीते हुए, प्रजा का पुत्र की तरह पालन, लोक कल्याण की योजनाएं एवं न्यायप्रियता के कारण उनको लोकमाता की उपाधि मिली ।

राज्य संचालन में अनेक गुण होने के बाद भी उनका शासन मूलतः धर्म अधिष्ठित शासन था । जहां उनके व्यक्तिगत जीवन में सेवा, त्याग -तपस्या एवं दान का महत्व था वहीं उन्होंने मंदिरों के जीर्णोद्धार, उनकी स्थायी आर्थिक व्यवस्था, यात्रियों के लिए विश्राम स्थल एवं अन्न क्षेत्र स्थापित कराए। अपना राज्य भगवान शिव को समर्पित कर वह उनके प्रतिनिधि के रूप में शासन चलातीं थी। हिमालय में स्थित भगवान बद्रीनाथ, केदारनाथ , दक्षिण में रामेश्वरम, पश्चिम में द्वारिका से लेकर पूर्व में जगन्नाथ पुरी तक उनके द्वारा चलाए सेवा कार्य आज भी प्रसिद्ध है । तीर्थ स्थानों पर गंगाजल भिजवाने की व्यवस्था देश को एक सूत्र में बांधती दिखाई देती है । काशी विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार सहित देश के लगभग समस्त तीर्थक्षेत्रों के विकास, हरिद्वार के गंगा घाटों सहित देश भर की नदियों के किनारे सैकड़ो स्थानों पर उन्होंने पक्के घाटों का निर्माण कराकर तीर्थ यात्रियों के लिए उचित स्नान की व्यवस्था करायी। समस्त अगणित धार्मिक कार्य वह अपने भाग में प्राप्त संपत्ति के द्वारा कराती थी । वह दीन- दुखी, गरीबों के लिए समर्पित निष्ठावान कर्मयोगी थी।

दक्षिण के प्रसिद्ध इतिहासकार रायबहादुर चिंतामणि विनायक वैद्य ने महारानी के संदर्भ में लिखा है कि वह लोकोत्तर स्त्री अपने अनेक गुणों के कारण महाराष्ट्र के लिए ही नहीं वरन् समूची मानवजाति के लिए भूषण रूप हुई है । इंदौर में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी अपने उद्बोधन में कहा था कि “मैं देवी अहिल्याबाई को भी नमन करता हूं उनका पुण्य स्मरण करता हूं। देवी अहिल्याबाई ने शासन संचालन में छोटी-छोटी आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी, उनके जीवन का एक-एक अध्याय इतना प्रेरक होता है कि आने वाली पीढ़ियों को उनसे सीख मिलती रहेगी । लोकमाता महारानी अहिल्याबाई के जीवन से प्रेरणा लेकर उनकी 300 वीं जयंती के अवसर पर हम उनके दिखाये मार्ग का अनुसरण करते हुए एकात्म, समृद्ध, समरस एवं शक्तिशाली भारत का निर्माण करें तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हुए विश्व कल्याण करने का संकल्प लें । महारानी अहिल्याबाई होल्कर को उनकी 300वीं जन्म-जयंती पर यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

लेखक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री हैं। (विभूति फीचर्स)

फिल्म संगीत के नींव के पत्थर हैं अनूप बोरलिया

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(डॉ.मुकेश कबीर-विनायक फीचर्स)

किसी फिल्म के बनने में जितना योगदान पर्दे पर दिखने वाले कलाकारों का होता है उससे कहीं अधिक योगदान पर्दे के पीछे काम करने वालों का होता है।ठीक उसी तरह जैसे किसी भवन निर्माण की आंतरिक साज सज्जा तो हमें दिखाई देती है लेकिन नींव के पत्थर और भवन तराशने वाले कारीगरों का योगदान हमें दिखाई नहीं देता। पर्दे के पीछे काम करने वालों का फिल्म संगीत में भी बहुत बड़ा योगदान होता है।कुछ कलाकर फिल्म संगीत में वही भूमिका निभाते हैं जो माला में धागा निभाता है,वह बाहर से दिखाई तो नहीं देता लेकिन माला का सारा वजूद धागे पर ही टिका होता है, ऐसा ही एक नाम है फिल्म संगीतकार अनूप सिंह बोरलिया का जिन्होंने कई फिल्मी गीतों में ढोलक वादक और परकनिष्ट (जो कई वाद्य यंत्रों को बजाने में कुशल होता है)की भूमिका निभाई है।

राम तेरी गंगा मैली से शुरू हुआ अनूप जी का सफर आज भी जारी है,इन्होंने इस दौरान हिना,आशिकी,साजन, बंटी और बबली जैसी अनेक फिल्मों के अलावा महान धारावाहिक रामायण में भी ढोलक वादन किया है। फिल्म संगीत के मामले में अनूप जी आज देश के सर्वश्रेष्ठ परकनिष्ट हैं जो ढोलक के साथ ही ढपली, मटकी, घुंघरू, मादल और विदेशी लोक वाद्य एंकलुंग भी बजाते हैं।इनकी इसी खूबी के कारण बड़े बड़े संगीतकारों ने इनको हमेशा अपने साथ रखा है, फिर चाहे रविंद्र जैन हों या लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की महान जोड़ी, अनूप जी के बिना रिकॉर्डिंग नहीं करते थे। रविंद्र जैन के साथ तो उनका वैसा ही रिश्ता रहा जैसा सुर के साथ ताल का होता है, दोनों हमेशा साथ रहे, रविन्द्र जैन तो रियाज भी अनूप जी के साथ ही करते थे और लता जी जैसी महान गायिका भी रिहर्सल और रिकॉर्डिंग में अनूप जी के साथ गाती थीं।रविंद्र जी के मशहूर गीत राम तेरी गंगा मैली हो गई और सुन साहिबा सुन पर वह थाप अनूप जी ने ही दी है,जिस पर मंदाकिनी नाची हैं। अनूप जी उन चंद संगीतकारों में से एक हैं जो फिल्म संगीत और क्लासिकल दोनों के महारथी हैं, फिल्मों में उन्होंने जहां रविंद्र जैन, लक्ष्मी कांत-प्यारेलाल, आदेश श्रीवास्तव, अनु मलिक,अजय अतुल जैसे अनेक बड़े संगीतकारों को रिदम दी तो वहीं उन्होंने क्लासिकल के मशहूर तालवाद्य कचहरी में भी अहम भूमिका निभाई जिसका संयोजन प्रसिद्ध पखावज वादक अखिलेश गुंदेचा करते हैं,बचपन के इन दोनों मित्रों की तालवाद्य कचहरी शास्त्रीय संगीत जगत में बहुत प्रतिष्ठित है ।

अनूप जी चार दशक फिल्मनगरी में रहने के बाद आजकल ज्यादा वक्त अपने गृह नगर उज्जैन में बिताते हैं जहां उनका उद्देश्य ताल वाद्य में एक नई पौध तैयार करना है । वे अपने स्टूडेंट्स को ढोलक,तबला, ढपली, मादल,घुंघरू सभी वाद्य सिखाते हैं। अनूप जी एचएमवी के लिए पुराने फिल्मी गीतों का ताल संयोजन भी कर चुके हैं जिनके कैसेट्स और सीडी बहुत पॉपुलर हुए ,पुराने फिल्मी गीतों पर अपने स्टूडेंट्स के साथ नई ताल देकर अनूप जी जो रील अपलोड करते हैं वह सोशल मीडिया पर लाखों की संख्या में देखी जाती हैं।

अनूप जी अथाह ज्ञान के सागर हैं।उन्होंने बहुत बड़े बड़े संगीतकारों के साथ काम किया है ,उन्हें फिल्म संगीत की वे सारी बारीकियां मालूम हैं जो संगीत को मधुर और कर्णप्रिय बनाती हैं।आजकल के बड़े बड़े संगीतकार भी ये बारीकियां अपने संगीत में उपयोग नहीं कर पाते इसीलिए अनूप जी के पास सीखने वालों की भीड़ रहती है। अनूप जी को पिछले वर्ष श्री श्री रविशंकर के फाउंडेशन द्वारा कला सारथी सम्मान भी दिया जा चुका है जो प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमा मालिनी ने दिया था। अनूप बारोलिया संगीत नाटक अकादमी से भी अनुबंधित गुरु हैं।वे यहां अकादमी द्वारा छात्रवृत्ति पाने वाले बच्चों को लोक वाद्यों की शिक्षा देते हैं।

मध्यप्रदेश की धरती ने फिल्म संगीत में लता जी ,किशोर कुमार और प्रदीप जी जैसे महान संगीतकार दिए हैं उसी कड़ी में बेशक अनूप जी का नाम भी लिया जा सकता है क्योंकि अनूप बोरलिया जी का योगदान इन महान कलाकारों से बिल्कुल कम नही है बस फर्क यही है कि अनूप जी ने जो भी किया परदे के पीछे किया लेकिन साधना तो साधना है इसलिए सरकार और कलाकार दोनों को अनूप जी जैसे कला साधकों का सम्मान जरूर करना चाहिए क्योंकि गाना कितना भी खूबसूरत हो ताल के बिना अधूरा होता है और फिल्म संगीत के उसी अधूरेपन को पूर्ण करने वाले साधक का नाम है अनूप सिंह बोरलिया।

अनूप बोरलिया की फिल्में

राम तेरी गंगा मैली,हिना,आशिकी, साजन,राम लखन, खलनायक, विवाह, खुदा गवाह, लम्हे, बंटी और बबली,चंद्रमुखी (मराठी) और महान धारावाहिक रामायण, श्रीकृष्णा।(लेखक गीतकार हैं)(विनायक फीचर्स)

कंतारा चैप्टर 1′ में दमदार एक्शन सीक्वेंस होंगे शामिल

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                           होम्बले फिल्म्स के बैनर तले बन रही बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘कंतारा चैप्टर 1’ का फर्स्ट-लुक टीज़र जारी किए जाने के बाद इस फिल्म का चौथा शेड्यूल बहुत जल्द ही शुरू होने वाला है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस शेड्यूल में बड़े पैमाने पर एक्शन सीक्वेंस शूट किए जाएंगे, जिससे सिनेदर्शकों को फिल्म के विज़ुअल और सिनेमैटिक अनुभव का दिव्य आनंद लेने का मौका मिलेगा। वैसे पूर्व में जारी फर्स्ट-लुक टीज़र में अभिनेता ऋषभ शेट्टी एक थ्रिलिंग और इंटेंस अवतार में दिखाई दे रहे हैं। इस फिल्म के टीजर को मिले व्यूज को लेकर मेकर्स काफी उत्साहित हैं। विदित हो कि ‘कंतारा चैप्टर 1’ के पूर्व फिल्म ‘कंतारा’ 2022 के 70वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में ‘बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट’ का अवॉर्ड हासिल कर चुकी है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय