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‘हर घर तिरंगा अभियान’ राष्ट्रीय ध्वजों की बिक्री 1101 प्रतिशत तक बढ़ी

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पिछले तीन वर्षों में, जब से तिरंगा यात्रा की शुरूआत हुई है, खादी के राष्ट्रीय ध्वजों की कुल बिक्री 33 करोड़ रुपये को पार कर गयी है।

वर्ष 2013-14 में देश में जहां खादी से बने राष्ट्रीय ध्वजों की बिक्री सिर्फ 87 लाख थी, वहीं वर्ष 2023-24 में यह बढ़कर 10.45 करोड़ रुपये तक पहुंच गयी।
अध्यक्ष केवीआईसी श्री मनोज कुमार ने कहा कि पीएम मोदी की ब्रांड शक्ति से खादी विकसित भारत की गारंटी बन गयी है।

New Delhi पूरे देश में खादी राष्ट्रीय ध्वज के उत्पादन और बिक्री को बढ़ाने और देश की सभी खादी संस्थाओं को सशक्त बनाने व प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने बोरीवली स्थित सी. वी. कोरा ग्रामोद्योग संस्थान में शुक्रवार को खादी राष्ट्रीय ध्वज कार्यकर्ता संवाद का आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि अध्यक्ष केवीआईसी, श्री मनोज कुमार ने खादी कार्यकर्ताओं को संबोधित  किया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने राष्ट्र निर्माण में खादी कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना की और कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने खादी के राष्ट्रीय ध्वजों की मांग में भारी वृद्धि की है।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष ने इस अवसर पर कहा, “यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह हमारे स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक खादी को और अधिक प्रासंगिक बनाने का प्रयास है, जो राष्ट्र के प्रति हमारी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।” उन्होंने आगे कहा कि खादी आत्मनिर्भर भारत की आत्मा है। ग्रामीण भारत के अर्थतंत्र का आधार है। विश्व में खादी ही एक ऐसा वस्त्र है जिसका अपना गौरवशाली इतिहास है। सही मायने में खादी को ‘नयी शक्ति’ 2014 में तब मिली जब देश में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व वाली सरकार बनी। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जिस खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री वित्तवर्ष 2013-14 के दौरान 31154.20 करोड़ रुपये थी वो 5 गुना बढ़कर वित्तवर्ष 2023-24 में 155673.12 करोड़ रुपये पहुंच गयी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और एमएसएमई मंत्रालय के मार्गदर्शन में स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार खादी और ग्रामोद्योग के कारोबार ने 1 लाख 55 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर नया कीर्तिमान बनाया है। पहली बार इस क्षेत्र में 10.17 लाख नए रोजगार सृजित हुए हैं।

अपने विचार व्यक्त करते हुए आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चले ‘हर घर तिरंगा अभियान’ ने खादी के राष्ट्रीय ध्वजों की बिक्री को 1101.15 प्रतिशत तक बढ़ाया है। वर्ष 2013-14 में देश में जहां खादी से बने राष्ट्रीय ध्वजों की बिक्री सिर्फ 87 लाख थी, वहीं वर्ष 2023-24 में ये बढ़कर 10.45 करोड़ रुपये तक पहुंच गयी। पिछले तीन वर्षों में, जब से तिरंगा यात्रा की शुरूआत हुई है, खादी के राष्ट्रीय ध्वजों की कुल बिक्री 33 करोड़ रुपये को पार कर गयी है। इस बिक्री का सीधा लाभ खादी कारीगरों को अतिरिक्त पारिश्रमिक के रूप में हो रहा है, जो इस बात को सिद्घ करता है कि तिरंगा यात्रा से खादी जगत को सबसे ज्यादा लाभ हुआ है। अध्यक्ष केवीआईसी ने आगे कहा कि पिछले 10 वर्षों में पूज्य बापू की विरासत खादी विकसित भारत की गारंटी बन गयी है।

अध्यक्ष केवीआईसी श्री मनोज कुमार ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खादी क्रांति ने भारतीय धरोहर खादी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है। लेकिन कुछ लोग अपने दूषित विचारों से पूज्य बापू की खादी के खिलाफ भ्रामक प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा पहली बार नहीं है, पहले भी ऐसे असफल प्रयास हुए हैं। लेकिन पूज्य बापू के नेतृत्व में खादी ना तो स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों सामने झुकी थी, ना ही आज ‘भ्रामक प्रचार’ करने वालों के सामने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में झुकेगी। खादी के 5 लाख कारीगर, जिसमें 80 प्रतिशत महिलाएं हैं, अपनी शक्ति और सामर्थ्य से खादी को नयी ऊंचाइयों पर ले जाएंगी। खादी के विरूद्ध हर भ्रामक प्रचार को देशभर के खादी प्रेमी स्वयं विफल करेंगे।

खादी राष्ट्रीय ध्वज कार्यकर्ता संवाद समारोह में स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों, खादी उद्योग के प्रतिनिधियों और क्षेत्र के नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस इकाई के माध्यम से खादी उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम में केवीआईसी के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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गुजरात विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन खूब हंगामा

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गुजरात सरकार को अक्सर ड्रग्स के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा घेरा जाता रहा है. ऐसे में गुजरात विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन खूब हंगामा हुआ. विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर थी. गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने प्रेस से बातचीत करते हुए उल्टा विपक्ष पर हमलावर हो गए. उन्होंने कहा कि ड्रग्स से जुड़े सभी नेक्सस पर कार्रवाई की जा रही है. गुजरात सरकार सभी पर नकेल कसने की पूरी तैयारी में है. साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्ष ने चर्चा को रोकने की कोशिश की. वे नहीं चाहते कि ड्रग्स के मुद्दे पर चर्चा हो.
गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि गुजरात विधानसभा में गुजरात के गृह मंत्री होने के नाते मैंने स्पीकर से अनुरोध किया कि वे मुझे विपक्ष द्वारा ड्रग्स के मुद्दे पर उठाए गए सभी प्रश्नों का उत्तर देने की अनुमति दें. विपक्ष केवल जनता का ध्यान आकर्षित करने के लिए बैनर लेकर खड़ा है. विपक्ष ने चर्चा को रोकने की कोशिश की. साथ ही उन्होंने विपक्ष पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर वे चर्चा नहीं करना चाहते थे तो वे बैनर क्यों पकड़े हुए थे?

सुरक्षित राज्यों में है गुजरात

गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने गुजरात को सुरक्षित राज्यों में से एक बताया है. उन्होंने कहा कि गुजरात सबसे सुरक्षित राज्यों में से एक है. गुजरात राज्य ने पिछले तीन वर्षों में ड्रग्स के खिलाफ सक्रिय कदम उठाए हैं. ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी. हमने ड्रग्स से संबंधित लगभग सभी नेक्सस पर नकेल कसा है. गुजरात सरकार इसके खिलाफ शक्ति से पेश आ रही है.

गुजरात में बन रहा साइक्लोनिक सर्कुलेशन

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अहमदाबाद: गुजरात में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विभाग ने प्रदेश में अगले 5 दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले कुछ दिनों में राज्य के ज़्यादातर हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश होगी। अहमदाबाद में भी भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। आईएमडी ने बताया है कि उत्तर पूर्व अरब सागर में गुजरात के पास एक चक्रवाती हवा का क्षेत्र बना हुआ है, जिससे राज्य में और ज्यादा बारिश हो सकती है। आने वाले दिनों में गुजरात के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

आने वाले दिनों में ऐसा रहेगा मौसम

24 अगस्त से 28 अगस्त तक बहुत भारी बारिश होने की उम्मीद है। बनासकांठा, पाटन और अहमदाबाद सहित कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। 24 अगस्त को, वडोदरा, छोटा उदयपुर और आनंद जैसे स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया जाएगा। कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा भी हो सकती है। 23 अगस्त से 26 अगस्त तक अहमदाबाद में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और भारी बारिश होगी। तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। 27 और 28 अगस्त को, मौसम में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे और गरज के साथ बारिश या बौछारें पड़ सकती हैं। तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। सप्ताह भर लगातार बारिश जारी रहने की उम्मीद है, जिसमें भारी बारिश होने की संभावना है। शहर में नमी और बादल छाए रहेंगे।

बारिश की वजह से उड़ानों में देरी
भारी बारिश की वजह से उड़ानों में देरी हुई है। इसका कारण घूर्णी देरी और परिचालन संबंधी बाधाओं को बताया गया है। आईएमडी का कहना है कि खराब मौसम की वजह से उड़ानें लेट हो रही हैं। देश भर में भारी बारिश की वजह से उड़ानों के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम की ताज़ा जानकारी लेते रहें और भारी बारिश के कारण होने वाली किसी भी परेशानी के लिए तैयार रहें।
बारिश की वजह से अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय (SVPI) हवाई अड्डे पर भी काफी दिक्कतें आई हैं। गुरुवार को खराब मौसम के कारण 19 उड़ानें लेट हो गईं। दुबई और शारजाह जैसे अंतर्राष्ट्रीय गंतव्यों के लिए उड़ानों में कम से कम दो घंटे की देरी हुई, जबकि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों के लिए घरेलू उड़ानें 35 मिनट से तीन घंटे तक देरी से चलीं।

गौ तस्करी पर जशपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

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जशपुर (आरएनएस)। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में गौवंश तस्करी के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन शंखनाद की शुरुआत की है. इस अभियान के तहत जशपुर जिले के रास्ते से झारखंड होते हुए पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक की गौवंश तस्करी को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं. इस ऑपरेशन में अब तक 13 पिकअप वाहनों को राजसात किया गया है, जिनकी कुल कीमत 2 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. यह पहली बार है जब प्रदेश में मवेशी तस्करी के वाहनों को राजसात किया गया है. कलेक्टर रवि मित्तल ने इन वाहनों को राजसात करने के आदेश जारी किया है.पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में जनवरी 2024 से अब तक गौ-तस्करों के विरूद्ध विशेष अभियान चलाकर कुल 36 प्रकरणों में 43 आरोपियों को गिरफ्तार कर 431 गौवंशों को तस्करी होने से बचाया गया. गौ तस्कर तस्करी करने में पीकअप वाहन और ट्रक का प्रयोग करते है. इस दौरान लगातार पुलिस कार्रवाई में तस्करों से कुल 26 वाहन को जब्त किया गया है. जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 2 से 2.5 करोड़ रुपये है. जब्त किये गए वाहनों में अधिकतर वाहन झारखंड के हैं.7 अगस्त 2024 को पुलिस अधीक्षक, अति. पुलिस अधीक्षक और 125 अधिकारियों की टीम ने सांईटांगरटोली में ऑपरेशन चलाया. इस दौरान 10 तस्कर गिरफ्तार किए गए और 67 गौवंशों को मुक्त कराया गया. एसपी ने जशपुर के द्वारा समस्त थाना और चौकी प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस प्रकार के अवैध गतिविधि में सम्मिलित व्यक्तियों के विरूद्ध कार्रवाई करें और उक्त कार्य में लगे व्यक्त्यिों के विरूद्ध निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी.गौवंश तस्करी में पुलिस की इस कार्रवाई पर डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा ने सराहना की है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा छत्तीसगढ़ में पशु तस्करी और क्रूरता नहीं चलेगी. अकेले जशपुर जिले में पशु तस्करी के 10 प्रकरणों में 13 वाहन का राजसात. गौवंश की रक्षा के लिए विष्णुदेव सरकार ने कड़े प्रावधान किए हैं.

थारपारकर गाय पशुपालकों के लिए ‘दुधारू सोना’ है

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रायबरेली. पशुपालन लोगों के लिए समृद्धि का द्वार खोलने में बड़ी भूमिका निभा रहा है. पशुपालन का काम करके लोग अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. अब ग्रामीण अंचल से लेकर शहरी क्षेत्र के लोग एवं पढ़े-लिखे युवा भी इसके जरिए अपनी तकदीर बदल रहे हैं. जिसमें लोग गाय, भैंस, बकरी के साथ सूअर पालन का काम बड़े स्तर पर कर रहे हैं. गाय पालन का काम करने वाले पशुपालकों को उन्नत नस्ल की जानकारी न होने के कारण उन्हें काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. इसीलिए आज हम उन्हें गाय की एक खास उन्नत नस्ल के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसका पालन करके वह अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. दरअसल हम बात कर रहे हैं गाय की उन्नत नस्ल थारपारकर गाय की जो अपने कई खास गुणों के लिए जानी जाती है. इसे हमारे देश के पशुपालक इस गाय को ‘दुधारू सोने’ के नाम से भी जानते हैं.

लोकल 18 से बात करते हुए रायबरेली के पशु विशेषज्ञ डॉ. इंद्रजीत वर्मा (एमवीएससी वेटनरी ) बताते हैं कि थारपारकर गाय भारत में मुख्य रूप से राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर में पाई जाती है. जो अपने दुग्ध उत्पादन के लिए जानी जाती है. यही वजह है, कि इसका पालन अब राजस्थान, यूपी , बिहार, महाराष्ट्र के पशुपालक भी कर रहे हैं. इसकी उत्पत्ति मुख्य रूप से पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जिले थारपारकर की है.

थारपारकर गाय की पहचान
डॉ. इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि थारपारकर गाय पशुपालकों के लिए ‘दुधारू सोना’ है. इसकी खासियत है कि यह भीषण गर्मी व सर्दी को सहन करने की क्षमता रखती है.यह गाय अन्य नस्ल की गायों को तुलना में बेहद अलग है. इस गाय का रंग सफेद या धूसर होता है. पीठ पर हल्के आसमानी रंग की धारियां होती हैं. इसका सिर मध्यम आकार का माथा एवं कान चौड़े होने के साथ ही पूंछ पतली और लंबी होती है.

इतनी है कीमत
डॉ. इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि यह गाय प्रतिदिन लगभग 15 से 18 लीटर दूध का उत्पादन देती है. इसकी कीमत 20 हजार रुपए से लेकर 60 हजार रुपए तक है. यह गाय एक ब्यांत में 1500 से 2200 लीटर दुग्ध उत्पादन की क्षमता रखती है. वहीं इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है. जिसकी वजह से यह जल्दी से बीमार भी नहीं पड़ती है. इसका पालन करके किसान कम समय में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. थारपारकर गाय सामान्य गायों की तरह ही आहार का सेवन करती है.

वित्त मंत्री ने आरआरबी के प्रौद्योगिकी उन्नयन में हुए सुधार की सराहना की

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केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज उदयपुर में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के नौ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता की


श्रीमती सीतारमण ने आरआरबी से सरकारी योजनाओं के बारे में, खासकर आकांक्षी जिलों में जागरूकता पैदा करने का आग्रह किया

केंद्रीय वित्त मंत्री ने 2022 से पश्चिमी मध्य क्षेत्र के नौ आरआरबी के प्रौद्योगिकी उन्नयन में हुए सुधार की सराहना की

श्रीमती सीतारमण ने एमएसएमई क्लस्टरों में स्थित आरआरबी शाखाओं द्वारा छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को ऋण सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय पहुँच (आउटरीच) बनाने पर जोर दिया

केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज उदयपुर में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान राज्यों के नौ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव श्री एम. नागराजू, अतरिक्‍त सचिव, अन्य वरिष्ठ डीएफएस अधिकारी, आरआरबी के अध्यक्ष और प्रायोजक बैंकों के सीईओ, आरबीआई, सिडबी और नाबार्ड के प्रतिनिधि और 5 राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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समीक्षा बैठक में व्यवसाय प्रदर्शन, डिजिटल प्रौद्योगिकी सेवाओं को उन्नत करने, एमएसएमई क्लस्टरों में कारोबार के विकास को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेश को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन देने में आरआरबी की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री ने आरआरबी से विशेष रूप से आकांक्षी जिलों में सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता पैदा करने का आग्रह किया।

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श्रीमती सीतारमण ने बुंदेलखंड क्षेत्र में मुद्रा योजना के कम उपयोग का उल्लेख किया और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) को बुंदेलखंड क्षेत्र और आकांक्षी जिलों में अन्य वित्तीय समावेश योजनाओं के साथ-साथ मुद्रा योजना के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों, प्रायोजक बैंकों और आरआरबी के साथ विशेष बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने गुजरात और राजस्थान राज्यों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की प्राकृतिक क्षमता का उल्लेख किया और आरआरबी से इस योजना के लिए जागरूकता पैदा करने और ऋण प्रदान करने का आग्रह किया। आरआरबी द्वारा ऋण पहुँच बढ़ाने के लिए एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) कार्यक्रम की क्षमता पर भी प्रकाश डाला गया। इसी तरह, आरआरबी को ऋण प्रदान करने के लिए अपने संचालन-क्षेत्रों में पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत संभावित कारोबार की पहचान करने का निर्देश दिया गया। आरआरबी को जमीनी स्तर पर कृषि ऋण वितरण में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के घोषित उद्देश्यों को प्राप्त करने का भी निर्देश दिया गया।

आरआरबी का समेकित पूंजी से जोखिम (भारित) परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) वित्त वर्ष 2021 में 7.8 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 13.7 प्रतिशत हो गया है और वित्त वर्ष 2021 के 41 करोड़ रुपये के घाटे की जगह लाभप्रदता बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 2,018 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ में बदल गई है और सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (जीएनपीए) 3.9 प्रतिशत के अनुपात के साथ अपेक्षाकृत निम्न स्तर पर हैं। श्रीमती सीतारमण ने 2022 से पश्चिमी मध्य क्षेत्र के नौ आरआरबी के प्रौद्योगिकी उन्नयन में संतोषजनक सुधार को स्वीकार किया – इसी वर्ष आरआरबी की नियमित समीक्षा शुरू की गयी थी और इन आरआरबी से भविष्य में भी गति जारी रखने का आग्रह किया।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने आरआरबी को अधिक ऋण वितरित करने के लिए अपने स्वस्थ सीएएसए अनुपात का लाभ उठाने का निर्देश दिया तथा सरकार और प्रायोजक बैंकों द्वारा किए जा रहे प्रयासों के अलावा, राज्य सरकारों से आरआरबी की लंबित बकाया राशि का समाधान करने में आरबीआई के हस्तक्षेप का भी आग्रह किया।

समीक्षा बैठक के दौरान, वित्त मंत्री ने आरआरबी को और अधिक ग्राहक अनुकूल बनने तथा प्रदर्शन को और बेहतर बनाने के लिए अपने स्थानीय संपर्क का लाभ उठाने का भी निर्देश दिया। तकनीकी सहायता प्रदान करने, सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करने और आरआरबी को सफल होने के लिए आवश्यक संसाधनों तक पहुँच सुनिश्चित करने से जुड़े प्रयासों में प्रायोजक बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

श्रीमती सीतारमण ने छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को ऋण सुनिश्चित करने के लिए एमएसएमई क्लस्टरों में स्थित आरआरबी शाखाओं द्वारा सक्रिय पहुँच (आउटरीच) बनाने पर जोर दिया। सभी आरआरबी ने क्लस्टर गतिविधियों के अनुरूप एमएसएमई उत्पादों को अंतिम रूप दिया है। हालांकि, उन्हें इस खंड में अपने ऋण अनुभाग की नियमित समीक्षा करने की आवश्यकता है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि प्रायोजक बैंकों और आरआरबी को आगे आने वाली चुनौतियों की पहचान करनी चाहिए। विशेष रूप से परिसंपत्ति की गुणवत्ता बनाए रखना, डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना और मजबूत कॉरपोरेट प्रशासन सुनिश्चित करना, ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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राजनीति से सिनेमा तक स्त्री ही बिकती है

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राकेश अचल-

दुनिया में जो देश नारी की पूजा का दावा करता है उसी देश में नारी की सुरक्षा आज राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा है। ये मुद्दा लालकिले की प्राचीर से भी गूंजता है। उत्तर से दक्षिण तक,पूरब से पश्चिम तक ये एक समान मुद्दा है। ये मुद्दा राजनीति का भी है ,क़ानून और व्यवस्था का भी है ,समाज का भी है और अदालत का भी। फिर भी स्थिति ये है कि आज हम दुनिया के उन दुर्भाग्यशाली देशों में शुमार किये जा रहे हैं जहां नारी सबसे ज्यादा असुरक्षित,सबसे ज्यादा अपमानित,शोषित और पीड़ित है। कोई माने या न माने लेकिन ये सच है कि नारी यानि स्त्री यानि अबला सबके लिए आज भी वस्तु है,फिर चाहे वो सिनेमा हो,बाजार हो या सियासत हो।
हम और हमारा समाज मनुवादी है ,मनुस्मृति कहती है –
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः। (मनुस्मृति 3/56 ) लेकिन मुझे लगता है कि मनुस्मृति झूठ कहती है। मनुस्मृति के आधार पर चलने वाले लोग झूठे है। वे नारी की पूजा केवल स्मृतियों में करते हैं ,वास्तविकता में नहीं।। मनुस्मृति से ज्यादा सच तो हमारे दद्दा मैथलीशरण गुप्त बोलते रहे ,वे लिख गए कि –
‘ अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी
आँचल में है दूध और आँखों में पानी ‘
हम सदियों से स्त्रियों के बारे में अपनी सोच नहीं बदल पाए । आजादी के बाद भी हमारी सोच स्त्रियों को लेकर पाशविक ही बनी हुई है ,इसे बदलने के लिए कोई कुछ नहीं करना चाहता। सब स्त्री सुरक्षा के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं। स्त्री सुरक्षा के मुद्दे पर हमारा या किसी का सर शर्म से नहीं झुकता ,झुक भी नहीं सकता ,क्योंकि हम सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। हमारे लिए स्त्री केवल वस्तु है।
राजनीति में स्त्री की अस्मिता का मुद्दा आपको सत्ता तक ले जाता है, यानि राजनीति में स्त्री सत्ता के लिए एक सीढ़ी से ज्यादा कुछ नहीं है। जैसे बाजार में स्त्री को एक सामान की तरह बिकने के लिए मजबूर किया जाता हैं वैसे ही राजनीति में भी स्त्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। वे स्त्रियां अपवाद हैं जो पुरुष प्रधान और मनुवादी समाज में भी राजनीति में शीर्ष पर पहुंची और उन्होंने पुरुषों को उनकी औकात दिखाई ,बाकी तो केवल दही शक़्कर खिलाने के काम आने वाली स्त्रियां होतीं हैं। राजनीति में इंदिरा गाँधी कम ही जन्म लेती हैं। हमारे समाज में स्त्री आज भी एक गाली है और सबसे पहले इस्तेमाल की जाती है।
हाल ही में मैं श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव की हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘स्त्री 2’ के बारे में पढ़ रहा था। ये फिल्म अपनी रिलीज के पहले दिन से ही रिकॉर्ड तोड़ कलेक्शन कर रही है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कब्जा किए हुए हैं और हर रोज करोड़ों की कमाई कर रही है। ‘स्त्री 2’ महज हफ्ते भर के कलेक्शन के साथ अब घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ क्लब में एंट्री लेने के करीब आ गई है। कहते हैं की ‘स्त्री 2’ ने प्रीव्यू और रिलीज के साथ पहले दिन 76.5 करोड़ रुपए कमाए थे। दूसरे दिन फिल्म ने 41.5 करोड़, तीसरे दिन 54 करोड़, चौथे दिन के 58.2 करोड़ और पांचवें दिन 38.4 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था। छठे दिन भी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 25.8 करोड़ रुपए बटोरे। वहीं अब सातवें दिन के शुरुआती आंकड़े सामने आ गए हैं जिसके मुताबिक फिल्म ने अब तक 20 करोड़ रुपए का कारोबार कर लिया है।
भारत में ‘स्त्री 2’ ने हफ्ते भर में अब तक लगभग 300 करोड़ रुपए कमा लिए है। इसी के साथ ‘स्त्री 2’ साल की सबसे बड़ी फिल्म फाइटर के लाइफटाइम कलेक्शन से आगे निकल गई है। बता दें कि फाइटर ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर कुल 254.83 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन किया था। ‘स्त्री 2’ ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के मामले में भी फाइटर को शिकस्त दे दी है।आपको याद होगा की 15 अगस्त को रिलीज हुई ‘स्त्री 2’ बॉक्स ऑफिस पर कई हिंदी और साउथ फिल्मों से टकराई थी।
मैंने स्त्री-2 का उदाहरण जानबूझकर आपके सामने रखा है। मेरे कहने का आशय ये है कि स्त्री धरती की तरह उर्वरा भी है सहनशील भी ,लेकिन उसके इन गुणों का दुरूपयोग किया जा रहा है। पुरुष प्रधान समाज की राजनीति,और सत्ता मिलजुलकर स्त्री समाज को मूर्ख बना रही है ।
मैंने दुनिया के दर्जनों देशों का भ्रमण किया है। उन देशों का भी जहाँ की पूरी अर्थव्यवस्था नारियों की जिस्म फरोशी पर टिकी है लेकिन वहां भी नारियों के साथ वैसी ज्यादती नहीं होती ,जैसी भारत में होती है। भारत में नारी स्वातंत्र्य केवल एक नारा है ,जुमला है। हकीकत में भारतीय नारी सबसे ज्यादा असुरक्षित, शोषित ,पीड़िता है। मौजूदा स्थित में बदलाव कोई क़ानून नहीं कर सकता,कोई सरकार नहीं कर सकती। इसके लिए हमें देश की उस आधी आबादी का दिमाग बदलना होगा जो स्त्री के प्रति दुर्भाव रखती है। मानसिकता का बदलाव करने के लिए हमें हमारी शिक्षा प्रणाली बदलना होगी । महिलाओं को देखने का नजरिया बदलना होगा।
जब तक ये सब नहीं होगा ,तब तक मणिपुर में भी स्त्रियां जलेंगी और बंगाल में भी। कश्मीर में भी और उत्तर प्रदेश में भी। इस दुरावस्था को बदलने के लिए स्त्रियों को पुरुष समाज से खुद ही लोहा लेना होगा। उनकी वंदना क़ानून से तो होने से रही। क़ानून तो हमारे यहां बहुत से हैं लेकिन स्त्रियों की सुरक्षा इनसे नहीं हो पा रही ,बिलकुल नहीं हो पा रही। हमारे यहां स्त्रियों से साल में बलात्कार के 25 हजार मामले दर्ज होते हैं और सजा होती है केवल 27 -28 फीसदी लोगों को। दुर्भाग्य तो ये है कि सजायाफ्ता अपराधी भी फरलो जैसे घृणित कानूनों का इस्तेमाल कर मौज कर रहे हैं।
(विभूति फीचर्स)

न्याय में देरी का विश्व रिकार्ड बनाती सबसे बड़े लोकतंत्र की न्यायपालिका

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– मनोज कुमार अग्रवाल 

तीन दशक पहले 1992 के अजमेर सेक्स स्कैंडल में अब बत्तीस साल बाद अदालत का फैसला आया है। इस मामले के आरोपी नफीस चिश्ती, नसीम उर्फ ​​टार्जन जैसे 6 और हैवानों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। दुनिया भर की अदालत और कानून का राज देने वाले विश्व भर की न्याय व्यवस्थाओं में संभवतः हमारी अदालत और न्यायपालिका देरी का विश्व रिकॉर्ड कायम कर रही है। क्या यही है हमारी संविधान और लोकतंत्र की कानून व्यवस्था जिसमें न्याय देने में बत्तीस साल लग जाते हैं? सैकड़ों नाबालिग व बालिग छात्राओं को एक स्कैंडल के तहत फंसा कर यौन शोषण करने के 1992 के बेहद शर्मनाक मामले में तीन दशक बाद निचली अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा का फैसला सुनाना हमारे देश की न्याय व्यवस्था पर ही सवालिया निशान लगाता है।

राजस्थान का अजमेर ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह और पुष्कर मंदिर की वजह से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं।इस धार्मिक शहर की आबोहवा में साल 1990 से 1992 तक कुछ ऐसा हुआ, जो ना सिर्फ भारतीय संस्कृति को कलंकित करने वाला था, बल्कि अजमेर के सामाजिक ताने-बाने पर बदनुमा दाग बन गया। उस वक्त एक स्थानीय दैनिकअखबार में एक ऐसी खबर छपी जिसने सबको हिलाकर रख दिया था।इस खबर में स्कूली छात्राओं को उनकी अश्लील तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करते हुए उनका यौन शौषण किए जाने का पर्दाफाश किया गया था। ”बड़े लोगों की पुत्रियां ब्लैकमेल का शिकार” शीर्षक से प्रकाशित खबर ने पाठकों के हाथों में अखबार पहुंचने के साथ ही भूचाल ला दिया।क्या नेता, क्या पुलिस, क्या प्रशासन, क्या सरकार, क्या सामाजिक धार्मिक नगर सेवा संगठन से जुड़े लोग सब के सब सहम गए।यह कैसे हो गया? कौन हैं? किसके साथ हुआ?
इसके बाद खुलासा हुआ कि एक गिरोह अजमेर के बड़े नाम वाले गर्ल्स स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों को फार्म हाउसों पर बुला-बुला कर रेप करता रहा और उन लड़कियों के घरवालों को भनक तक नहीं लगी।रेप की गई लड़कियों में आईएएस, आईपीएस की बेटियां भी शामिल थीं।इस पूरे कांड को अश्लील तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करके अंजाम दिया गया था। पीड़ित लड़कियों की संख्या 100 से अधिक बताई गई थी।इन लड़कियों की उम्र 12 से 20 साल के बीच थी।
बताया गया है कि इस कांड की शुरूआत में सबसे पहले फारूक चिश्ती नामक एक शख्स ने पहले नामी स्कूल की एक लड़की को फंसाया।उसके साथ रेप किया।इस दौरान उसने उसकी अश्लील तस्वीरें खींच ली।इसके बाद वह इन अश्लील तस्वीरों के जरिए उसे ब्लैकमेल करने लगा।उससे स्कूल की दूसरी लड़कियों को बहला-फुसला कर लाने के लिए कहने लगा।मजबूरन वो लड़की अपनी सहेलियों को भी फार्म हाउस ले जाने लगी।उन सभी के साथ रेप और ब्लैकमेल का खेल होता रहा। एक के बाद दूसरी, दूसरी के बाद तीसरी, इस तरह एक ही स्कूल की करीब सौ से ज्यादा लड़कियों के साथ रेप हुआ। घर वालों की नजरों के सामने से ये लकड़ियां फार्म हाउसों पर जाती थीं।उनके लेने के लिए बाकायदा गाड़ियां आती थीं।घर पर छोड़ कर भी जाती थीं। लड़कियों की रेप करते समय तस्वीरें ले ली जाती थीं।इसके बाद डरा-धमका कर और लड़कियों को बुलाया जाता।स्कूल की इन लड़कियों के साथ रेप करने में नेता, पुलिस, अधिकारी भी शामिल थे।
आरोप है कि फारूक चिश्ती रैकेट का सरगना था वहीं इस सेक्स रैकेट में उसके साथ नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती भी शामिल थे। तीनों ही उन दिनों यूथ कांग्रेस के नेता थे। फारूक अध्यक्ष पद पर था।इन लोगों की पहुंच दरगाह के खादिमों तक भी थी।खादिमों तक पहुंच होने के कारण रेप करने वालों के पास राजनैतिक और धार्मिक दोनों ही तरह की शक्तियां थी।रेप की शिकार लड़कियां ज्यादतर हिंदू परिवारों से थीं। रेप करने वाले ज्यादातर मुस्लिम समुदाय थे। इस वजह से पुलिस डरती थी।
आरोप तो यह भी है कि इस कांड के बारे में जानकारी होते हुए भी पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही थी।उसे डर था कि कही साम्प्रदायिक दंगे न हो जाएं और उस संभालना मुश्किल न हो जाए। धीरे-धीरे इस स्कैंडल के बारे में पूरे शहर को पता चल गया. लड़कियों की अश्लील तस्वीरें हवा में तैरने लगी। जिसे मौका मिलता वो हाथ साफ कर लेता।लड़कियों को ब्लैकमेल करके उनके साथ रेप करता।यहां तक कि निगेटिव से फोटो को डवलप करने वाला टेकनिशियन भी इसमें शामिल हो गया था।
समाज में अपनी बेइज्जती होती देख लड़कियां एक-एक करके खुदकुशी करने लगी।उन्हें इस नर्क से निकलने रास्ता जिंदगी को खत्म करना ही समझ आया क्योंकि परिवार, समाज, पुलिस और प्रशासन तक कुछ नहीं कर रहा था। इस तरह 6-7 लड़कियों की खुदकुशी के बाद मामला संगीन हो गया.।इसी बीच एक पत्रकार संतोष गुप्ता ने इस केस पर सीरीज शुरू कर दी।उनकी खबरों ने पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद तत्कालीन भैरोसिंह सरकार ने इस मामले की जांच सीआईडी-सीबी को सौंपी थी।
पीड़िताओं से आरोपियों की पहचान कराई गई। 30 नवंबर 1992 को अजमेर कोर्ट में पहली चार्जशीट दायर हुई, जिसमें सभी 18 आरोपियों के नाम थे। 1994 में आरोपी पुरुषोत्तम जमानत पर बाहर आया और आत्महत्या कर ली। 18 मई 1998 को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पहला फैसला सुनाया। सभी को उम्रकैद की सजा दी। 20 जुलाई 2001 को हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया, जिसमें 4 को बरी कर दिया गया। 19 दिसंबर 2003 को सुप्रीम कोर्ट ने चार दोषियों की उम्रकैद की सजा को 10 साल कर दिया। 20 अगस्त 2024 को स्पेशल पॉक्सो एक्ट कोर्ट (जिला अदालत) ने छह दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामले में आरोपी जहूर चिश्ती पर फैसला लंबित है।
हैरानी की बात यह है कि 1992 में हुए इस कांड के बाद पुलिस के लिए आरोपियों को सामने लाना और सबूतों को सहेजकर रखना बहुत बड़ी चुनौती थी. क्योंकि पीड़िताओं ने समाज में बदनामी और दुष्कर्मियों के खौफ की वजह से अपना घर और शहर तक छोड़ दिया था और बतौर सबूत जमा किया गया सामान मसलन बिस्तर और कंडोम इत्यादि बदबू मारने लगे थे।
अभियोजन विभाग के सहायक निदेशक विजय सिंह राठौड़ इस मामले की साल 2020 से पैरवी कर रहे हैं।उनसे पहले करीब 12 अभियोजक बदल चुके।उनके अनुसार इस कांड में 100 से ज्यादा स्कूली छात्राओं को दरिंदों ने अपना शिकार बनाया, लेकिन अभियोजन पक्ष और पुलिस सिर्फ 16 पीड़िताओं को ही गवाही के लिए तैयार कर सकी।आखिरी कुछ गवाही के बाद इनमें से भी 13 पीड़िताओं ने रसूखदार आरोपियों के खौफ से कोर्ट में अपने बयान बदल दिए।ऐसे में अदालत ने पीड़िताओं के पुराने बयानों के आधार पर कार्रवाही की।
अजमेर की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने सनसनीखेज सेक्स स्कैंडल में 6 और लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।इस स्कैंडल में 100 से अधिक लड़कियों के साथ बलात्कार और उन्हें ब्लैकमेल किया गया था। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कोर्ट के जज रंजन सिंह ने हर आरोपी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
यह मामला हमारे देश की न्याय व्यवस्था की लेट लतीफी और अभियोजन की नाकामी का जीता जागता उदाहरण है यह वही न्याय व्यवस्था है जो देश के सबसे नृशंसता भरे निठारी कांड के अभियुक्तों को सत्रह साल की सुनवाई के बाद बरी कर देती है ।आप को याद होगा कि राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा के निठारी में कम से कम 19 युवतियों और बच्चों के साथ बलात्कार किया गया, उनकी हत्या कर दी गई और उनके टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए थे।इस में 2006 में सुरिंदर कोली को 12 लड़कियों के साथ दुष्कर्म व हत्या के लिए आरोपित किया गया था जबकि कोठी मालिक मनिंदर सिंह पंढेर को दो मामलों में अभियुक्त बनाया गया था।
इस कांड के पीछे अंग व्यापार का रेकेट बताया गया। इन हालातों में इस देश की बच्चियों और महिलाओं को यौन विकृत राक्षसों से कौन और कैसे बचाएगा?इसी 18 अगस्त को जोधपुर में एक तीन साल की कूड़ा बीनने वाली मासूम के साथ दरिंदगी की खबर सामने आई तो इसी दिन सीहोर में 63 साल की महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है वहीं बदलापुर में चार साल की दो अबोध स्कूल छात्राओं के साथ दरिंदगी को लेकर बदलापुर महाराष्ट्र उबल रहा है। इन सब हालात के लिए देश की न्याय व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराना गलत नहीं होगा।  (विभूति फीचर्स)

– मनोज कुमार अग्रवाल 

UP-करोड़ो की लागत से गौ आश्रय स्थलों का हो रहा निर्माण

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कानपुर,23 अगस्त । योगी सरकार गौ संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास कर रही है। इसी अभियान के तहत कानपुर नगर जनपद में दो वृहद गौ आश्रय स्थल का निर्माण किया जा रहा है। निर्माणाधीन गौ आश्रय स्थल की क्षमता लगभग साढ़े तीन सौ से अधिक होगी। एक गौ आश्रय स्थल के निर्माण में एक करोड़ बीस लाख रूपए खर्च होगा। यह जानकारी गुरुवार को कानपुर नगर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.आई.डी.एन.चतुर्वेदी ने दी।

उन्होंने बताया कि कानपुर नगर में ग्रामीण क्षेत्र में 135 गौ आश्रय स्थल है और शहर में 7 गौ आश्रय स्थल है। गायों को चारा एवं पानी एवं समय-समय पर उनका उपचार एवं किसी भी बीमारी से बचने के लिए ​टीका समय-समय पर प्रत्येक ब्लाक में तैनात पशु चिकित्साधिकारी देखरेख करते हैं। गौ आश्रय स्थल का संचालन क्षेत्र के ग्राम प्रधान और उसके लिए बनी समिति के सदस्य देखरेख करते हैं।

हरे चारे के लिए गौ आश्रय स्थल के समीप स्थित चारागाह एवं जीएस की जमीन पर नेपियर घास को लगाया जा रहा है। कुछ स्थानों पर तैयार भी हो गई हैं, जिसे गौ वंशजों को दिया जा रहा है। इस तरह कुल 142 गोआश्रय स्थल पशुपालन विभाग की देखरेख में संचालित हो रहा है।

डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि कानपुर नगर में दो वृहद गौ आश्रय स्थल निर्माणाधीन है। दोनों के कार्यों को प्रतिदिन देखा जा रहा है। एक विकासखंड बिल्हौर के नानामऊ गांव में वृहद गौ आश्रय स्थल का निर्माण हो रहा है। दूसरा ककवन ब्लाक के जमालपुर गांव में बनाया जा रह है। दोनों का निमार्ण कार्य होने के बाद यहां गायों को संरक्षण के लिए रखा जाएगा।

गाय को बचाने के चक्कर में पानी में बहे दो शख्स

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पीटीआई, भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में गाय को बचाने के लिए नदी में कूदे एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं वचाव कार्य के लिए आपदा दल के दो कर्मी भी नाव पलटने के कारण पानी में बह गए। लापता कर्मियों का पता लगाने के लिए लगभग 100 बचावकर्मियों को लगाया गया है।

घटना भिंड जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर एक इलाके की है। पुलिस अधीक्षक असित यादव ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि बुधवार शाम को कुंवारी नदी पर बने बांध के गेट में एक गाय के फंस जाने के बाद विजय सिंह ने पानी में छलांग लगा दी। उसे भंवर में फंसा देख उसके चचेरे भाई दिनेश सिंह भदोरिया ने भी उसे बचाने की कोशिश में छलांग लगाई, लेकिन तेज बहाव के कारण वह बह गया।

एसडीईआरएफ की ली गई मदद

अधिकारी ने एजेंसी को बताया कि किनारे पर मौजूद कचोंगरा गांव के स्थानीय लोगों ने रस्सियों की मदद से विजय को पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। नदी के बीच में झाड़ियों में फंसे दिनेश को देखने के बाद, ग्रामीणों ने अधिकारियों को सूचित किया, जिन्होंने उसे बचाने के लिए राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (एसडीईआरएफ) की मदद मांगी।

एसपी ने बताया कि एसडीईआरएफ की तीन सदस्यीय टीम लाइफ जैकेट पहनकर नदी में उतरी। हालांकि, उनकी नाव पलट गई, जिससे बचावकर्मी पानी के तेज बहाव में गिर गए। कुछ ही देर में बांध के पास तेज बहाव के चलते एसडीईआरएफ के जवान प्रवीण कुशवाहा और हरदास चौहान के लाइफ जैकेट निकल गए और दोनों लापता हो गए। एसपी ने कहा कि उन्हें बचाने के प्रयास जारी हैं।

तलाश में जुटी 100 कर्मियों की टीम

एसपी ने बताया कि एसडीईआरएफ का तीसरा जवान सुरक्षित नदी किनारे जाने में कामयाब रहा। दो लापता जवानों को खोजने का अभियान बुधवार रात को अंधेरे के कारण रोक दिया गया था और यह गुरुवार सुबह फिर से शुरू हुआ। लगभग 100 बचावकर्मी लापता एसडीईआरएफ जवानों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।