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जिला गौ सेवा समिति का सम्मेलन, मंत्री जोराराम बोले- लाभ देककर सरकार गोपालकों को दे रही है संबल

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झुंझुनू खेमी शक्ति मंदिर परिसर में झुंझुनू जिला गौ सेवा समिति के जिला स्तरीय प्रतिनिधि समेलन में भाग लिया। कैबिनेट मंत्री ने इस दौरान गोशाला के संचालन,अनुदान, भूमि, चारा अन्य प्रशासनिक समस्याओं पर चर्चा कर उनके समाधान पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं से गोपालकों को सहायता और संबल प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार गोशालाओं को और भी सुविधाजनक बनाने की कार्य योजना बनाकर कार्य कर रही है इस दौरान रमाकान्त टीबड़ा मुंबई,एडीएम अजय कुमार आर्य, बनवारीलाल सैनी,महेंद्र चंदवा,प्रांत प्रचारक बाबूलाल, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ.सुरेश सूरा, बजरंगलाल सोलानावाला जयपुर,राजकुमार टीबड़ा, श्यामसुन्दर सौंथलिया मुम्बई, रतनलाल जाखोदिया दिल्ली,वी. एन. शर्मा चैन्नई, रामप्रकाश बिरमीवाला बिसाऊ की उपस्थिति में गौ माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। स्वागत उदबोधन समिति अध्यक्ष ताराचंद गुप्ता एवं कार्यकारी अध्यक्ष निरंजन सिंह जानू ने दिया। कार्यक्रम का संचालन कैलाश व्यास लिखवा ने किया।

इस दौरान जिले की सर्वश्रेष्ठ तीन गोशालाओं की घोषणा की गई , जिसमें प्रथम जमवाय माता गौशाला भौड़की, द्वितीय श्री गोपाल गौशाला झुन्झनू व तृतीय पिंजरापोल गौशाला बिसाऊ रही। सांत्वना पुरस्कार की हकदार पिलानी गौशाला रही, जिसके प्रतिनिधियों को 20 अक्टूबर 2024 को पिलानी गौशाला में पिलानी के प्रमुख उद्योगपतियों द्वारा पारितोषिक प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में जिला समिति द्वारा प्रकाशित कामधेनु स्मारिका का भी विमोचन भी किया गया, जिसमें पूरे जिले की सभी गौशालाओं का विवरण प्रकाशित किया गया है।

 

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ हत्या को लेकर पीएम मोदी पर सवाल उठाए

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रायपुर : शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बड़ी बात कही है. अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ हत्या को लेकर पीएम मोदी पर सवाल उठाए हैं. आपको बता दें कि अविमुक्तेश्वरानंद देश में गौ हत्या के खिलाफ मुहिम छेड़े हुए हैं. शंकराचार्य सभी राज्यों में गौ ध्वज स्थापना करने के लिए भारत यात्रा कर रहे हैं. अब तक शंकराचार्य ने 8 राज्यों की यात्रा की है. जिसमें चार राज्यों में उन्हें एंट्री दी गई है. चार राज्यों में उन्हें घुसने नहीं दिया गया. इसके साथ ही अविमुक्तेश्वरानंद ने महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता मानने से इंकार किया है.

पीएम मोदी को शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती बता चुके हैं एजेंट : इससे पहले अंबिकापुर में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने मोदी को गौ हत्या का एजेंट बताया है. इस सवाल के जवाब में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि साल 2014 में हमने मोदी जी से आशा की थी कि यह व्यक्ति देश में गौ हत्या बंद करेगा. यही सोचकर हमने वोट दिया था और हमें आशा भी थी. लेकिन बिल्कुल भी ऐसा नहीं हुआ.

साल 2014 में हमने मोदी को यही सोचकर आशा करते हुए वोट दिया था कि यह देश में गौ हत्या बंद कर देगा. लेकिन जितनी बड़ी आशा हमने की थी इतनी बड़ी निराशा भी हमें हाथ लगी है. जितने ज्यादा ऊपर हम पहुंचे थे उतने ही हमें नीचे पहुंचना पड़ा. मोदी जी से हम कम आशा रखते तो कम दुख होता. उन्होंने बड़ी आशा जताई थी इसलिए हमें बड़ा दुख हुआ है: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

गौ हत्याओं पर प्रतिबंध क्यों नहीं ?: शंकराचार्य ने कहा कि जब देश में एक टैक्स, वन नेशन, एक इलेक्शन की बात होती है तो फिर एक देश में गाय के लिए एक कानून होना चाहिए. गौ हत्या बंद होनी चाहिए. लेकिन कुछ राज्यों में गौ हत्या पर प्रतिबंध लगा हुआ है और कुछ राज्यों में आज भी लगातार गौ हत्या हो रही है. ऐसे में पूरे देश में गौ हत्या बंद हो इसके लिए एक कानून होना चाहिए. इसी को लेकर हम पूरे देश में गौ ध्वज स्थापना के तहत भारत यात्रा कर रहे हैं.लेकिन चार राज्यों में एंट्री नहीं मिली.

हमारी यात्रा को लेकर राज्य की सरकारें और वहां विरोध करने वाले लोगों को हमने धन्यवाद देते हुए कहा कि विरोध के कारण हमारी बात वहां तक पहुंच गई. भारत देश की आर्थिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान रखने वाला मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने हमें आमंत्रित किया था. वहां के मुख्यमंत्री ने कहा कि हम गाय को राष्ट्र माता तो घोषित नहीं कर सकते लेकिन हमारे राज्य का नाम महाराष्ट्र है इसलिए हम गाय को महाराष्ट्र माता घोषित करते हैं: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

छत्तीसगढ़ के नेताओं से अपील : छत्तीसगढ़ को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि यहां के विधायक और सांसद गौ माता को लेकर काफी गंभीर हैं. हम समझते हैं कि छत्तीसगढ़ में गाय को छत्तीसगढ़ महतारी का दर्जा देगा. शंकराचार्य ने छत्तीसगढ़ सरकार से अपेक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ी में कहा कि मुझे छत्तीसगढ़ की सरकार से काफी उम्मीद है और विश्वास भी है कि छत्तीसगढ़ में भी गौ माता को दर्जा मिलेगा. उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से अपेक्षा की और कहा कि कौशल्या मां के राज्य में गाय को भी राज माता का दर्जा मिलेगा.

पाकिस्तान के राष्ट्रपिता मोहम्मद अली जिन्ना बने क्योंकि पाकिस्तान नया जन्मा था. लोग अफवाह फैलाते हैं कि मोहनदास करमचंद गांधी राष्ट्रपिता हैं. यदि राष्ट्रपिता हैं तो बताओं कि उन्होंने किस राष्ट्र को जन्म दिया. भारत तो पहले से था, भारत को किसी ने नहीं जन्मा. कोई भी यहां राष्ट्रपिता के पर पद प्रतिष्ठित नहीं किया जा सकता.: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

“गाय को सिर्फ चाहिए सम्मान” : शंकराचार्य ने कहा कि गाय कुछ नहीं चाहती लेकिन गाय इतना जरूर चाहती है कि उसका सम्मान हो. गाय को अनुदान नहीं चाहिए. कई राज्यों की सरकारी गाय को अनुदान देती है. गाय को अनुदान की जरूरत नहीं है बल्कि सम्मान की जरूरत है. अगर आप गाय को सम्मान नहीं देते हैं तो हम गाय के भक्त हैं और हम गाय का सम्मान करेंगे. उन्होंने सरकारों से कहा है कि गौ माता को पशु की सूची से हटाकर उनका सम्मान सुनिश्चित करें. यदि वह ऐसा करते हैं तो स्वागत है. वे गौ की सेवा करते हैं तो स्वागत है. अगर वह नहीं करते हैं तो कोई बात नहीं वह हम करेंगे.

अब नहीं चलेगा जेल में जातिवाद* 

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(मनोज कुमार अग्रवाल -विभूति फीचर्स)
यह नितान्त दुखद और विस्मित करने वाली खबर है कि हमारे लोकजीवन में जाति कहीं भी पीछा नहीं छोड़ती। यहां तक कि जेल में अभिरक्षा में होने के बाद भी जाति पांति कायम रहती  है। देश की आजादी के 77 साल बाद भी जेलों के अंदर कैदियों के साथ जातिगत भेदभाव होना दुर्भाग्यपूर्ण होने के साथ ही शर्मनाक भी हैं। हाल ही में चीफ जस्टिस ने इस बात पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हुए एक आदेश दिया है। हमारे यहां जेलों में जाति के आधार पर कैदियों को काम पर लगाया जाता रहा है।
इस का सीधा तात्पर्य यह है कि यदि निम्न कही जाने वाली जाति से है तो उन कैदियों को सफाई कर्मी जैसे काम पर लगाया जाता है और यदि उच्च जाति से है तो खान पान यानि की मैस का काम दिया जाता है। यह भेदभाव बताता है कि जाति का जहर हमारे तंत्र की जड़ों को आज भी दूषित किए है। औपनिवेशिक काल में अंग्रेजों के समय से चली आ रही इस कुप्रथा को पहले ही बंद होना चाहिए था, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण घटिया जातिवादी सोच आज भी बरकरार है। सजा के बाद कैदियों को जेल में रखने का उद्देश्य उनको सुधारना और समाज की मुख्यधारा में वापस लाने में मदद करना होता है, ताकि जेल से छूटने के बाद वे समाज के साथ फिर से जुड़ सकें। लेकिन अगर जेलों में ही कैदियों से जातिगत स्तर पर भेदभाव होता है, तो समझना मुश्किल नहीं है कि उनकी मानसिक स्थिति पर क्या असर पड़ता होगा। मगर अच्छी बात है कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में जेलों में जातिगत भेदभाव के साथ श्रम विभाजन पर रोक लगाने की दिशा में अहम फैसला दिया है।
शीर्ष न्यायालय ने भारत की जेलों में बंद कैदियों के बीच जाति के आधार पर भेदभाव करने को गैर कानूनी तथा असंवैधानिक करार देते हुए स्पष्ट तौर पर कहा है कि देश की किसी भी जेल में जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। जेल नियमावली में मौजूद ऐसे सभी प्रावधानों को हटाया जाना चाहिए, जो इस तरह के भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। कोर्ट ने इसे संविधान के आर्टिकल 15 का सरासर उल्लंघन बतलाया है और साफतौर पर कहा है कि रसोई व सफाई का काम जाति के आधार पर बांटा जाना अनुचित है। दरअसल एक महिला पत्रकार द्वारा दायर जनहित याचिका पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि जेल नियमावली जाति के आधार पर कामों के बंटवारे में भेदभाव करती है।
खाना बनाने का काम ऊंची जाति के लोगों को देना व सफाई का काम निचली जातियों के कैदियों को देना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है, जो जेलों में जातिगत भेदभाव को बढ़ाता है। कोर्ट का कहना था कि जाति के आधार पर कामों का बंटवारा औपनिवेशक सोच का पर्याय है, जिसे स्वतंत्र भारत में जारी नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यह बात स्पष्ट है कि जेल नियमावली साफतौर पर भेदभाव करती है। साथ ही कहा कि नियमावली में जाति से जुड़ी डिटेल्स का उल्लेख असंवैधानिक है। कोर्ट ने खरी-खरी सुनाते हुए सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के जेल मैन्युअल में तुरंत बदलाव करने को कहा है। साथ ही राज्यों को इस फैसले के अनुपालन की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली इस बेंच में जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल थे। दरअसल एक पत्रकार सुकन्या शांता ने सबसे पहले यह मामला उठाया था। उनका कहना था कि देश के 17 राज्यों की जेलों में कैदियों के साथ यह भेदभाव हो रहा है। उन्होंने दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट में यह जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने तीन महीनों में नियमों में बदलाव करने को कहा है।
देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा है कि सम्मान के साथ जीने का अधिकार कैदियों को भी है। कैदियों को सम्मान प्रदान न करना औपनिवेशिक काल की निशानी है, जब उन्हें मानवीय गुणों से वंचित किया जाता था। संविधान- पूर्व युग के सत्तावादी शासन ने जेलों को न केवल कारावास के स्थान के रूप में देखा, बल्कि वर्चस्व के उपकरण के रूप में भी देखा। इस अदालत ने संविधान द्वारा लाए गए बदले हुए कानूनी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करते हुए माना है कि कैदियों को भी सम्मान का अधिकार है। फैसले में कहा गया है कि मानव गरिमा एक संवैधानिक मूल्य और संवैधानिक लक्ष्य है। अदालत ने अन्य फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मानव गरिमा मानव अस्तित्व का अभिन्न अंग है और दोनों को अलग नहीं किया जा सकता है’ और इसमें ‘यातना या क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार के खिलाफ सुरक्षा का अधिकार भी शामिल है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि गरिमा और जीवन की गुणवत्ता के बीच भी घनिष्ठ संबंध है।
मानव अस्तित्व की गरिमा तभी पूरी तरह से साकार होती है, जब कोई व्यक्ति गुणवत्तापूर्ण जीवन जीता है। शीर्ष न्यायालय ने आदेश दिया कि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव का निषेध), 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन), 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और 23 (जबरन श्रम के खिलाफ अधिकार) का उल्लंघन करने के कारण इन प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया जाता है। सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया जाता है कि वे तीन महीने की अवधि के भीतर इस फैसले के अनुसार अपने जेल नियमावली/नियमों को संशोधित करें। दरअसल आरोप है कि देश भर के जेलों के बैरकों में जाति आधारित भेदभाव जारी है और शारीरिक श्रम कार्यों तक फैला हुआ है, जो विमुक्त जनजातियों और आदतन अपराधियों के रूप में वर्गीकृत लोगों को प्रभावित कर रहा है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में इन्हें गंभीर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे कई उदाहरण सामने है, जहां अनुसूचित जातियों के व्यक्तियों को अलग और अन्य जातियों के व्यक्तियों को अलग रखा गया है। इस तरह का जाति आधारित भेदभाव जेल में कदम रखने के बाद से ही शुरू होता है।
राजस्थान समेत देश की कई जेलों में आज भी ब्रिटिश शासन के जेल मैनुअल के मुताबिक काम का आवंटन होता है। प्रत्येक आरोपी व्यक्ति, जो जेल में दाखिल होता है, उससे जाति पूछी जाती है। एक रिपोर्ट के अनुसार मानवाधिकार से जुड़ी एक निजी संस्था ने दावा किया है कि निचले तबके के बंदियों को शौचालय व जेलों की सफाई जैसे काम सौंपे जाते हैं। जानकारी के मुताबिक जाति पिरामिड के निचले भाग वाले सफाई का काम करते हैं, उनसे उच्च वर्ग वाले रसोई या लीगल दस्तावेज विभाग को संभालते हैं, जबकि अमीर और प्रभावशाली कोई काम नहीं करते।
दअरसल औपनिवेशिक युग के जेल मैनुअल ने इस तरह के जाति-आधारित श्रम विभाजन की अनुमति दी थी। लेकिन बाद में सरकारों ने बुनियादी मानवाधिकारों के अनुरूप मैनुअल में संशोधन करने के लिए बहुत कम काम किया है, लेकिन इसके बावजूद कुछ कुप्रथाएं आज भी विद्यमान है, जिसमें से एक जातिवाद के आधार पर काम देना भी शामिल है।अब कानूनी और मानवीय आधार पर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए फैसले के बाद उम्मीद की जा सकती है कि कैदियों के साथ भेदभाव की कुप्रथा खत्म होगी और जेलों में उनके अधिकारों की रक्षा होगी।जरूरत इस बात की है कि आरक्षण के स्थान पर जातिविहीन समाज की स्थापना पर बल दिया जाए। जाति के आधार पर वर्गीकरण करना ही व्यवस्था से समाप्त कर दिया जाए।(विभूति फीचर्स)

अनंत अंबानी की ‘वंतारा’ ने मुंबई में वन्यजीव मूर्तियों का अनावरण किया

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                          अनंत भाई अंबानी द्वारा स्थापित ‘वंतारा’, प्रदूषण से लेकर आवास विनाश तक आधुनिक जीवन के व्यापक पर्यावरणीय परिणामों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई एक नई सार्वजनिक कला पहल की शुरुआत की है। शुरआती दौर में पिछले दिनों अनंत भाई अंबानी की ‘वंतारा’ ने मुंबई में प्लास्टिक प्रदूषण के छिपे हुए खतरे को उजागर करने के लिए आकर्षक वन्यजीव मूर्तियों का अनावरण किया। 4 से 6 अक्टूबर  तक, मुंबई के प्रमुख स्थानों- कार्टर रोड, शिवाजी पार्क और जुहू बीच पर तीन वन्यजीव-प्रेरित मूर्तियां प्रदर्शित की गई, जिनमें से प्रत्येक मानव गतिविधि के कारण जानवरों के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाती है। तार की जाली और स्थानीय रूप से प्राप्त सामग्रियों से बनी ये मूर्तियाँ न केवल कलात्मक अभिव्यक्ति हैं, बल्कि चिंतन का आह्वान भी हैं। प्रत्येक कलाकृति में वन्यजीवों को मानव अपशिष्ट के साथ बातचीत करते हुए दिखाया गया है, जो एक सूक्ष्म लेकिन मार्मिक अनुस्मारक है कि कैसे हमारी दैनिक आदतें- प्लास्टिक के उपयोग से लेकर शहरी विस्तार तक- पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करती हैं। एक इंस्टॉलेशन में एक एशियाई काले भालू को दिखाया गया है जिसका सिर एक फेंके गए प्लास्टिक कंटेनर में फंसा हुआ है, जो दर्शाता है कि कैसे जानवर अनजाने में मानव अपशिष्ट का शिकार बन जाते हैं। एक अन्य मूर्ति में प्लास्टिक में उलझे दो फ्लेमिंगो को दर्शाया गया है, जो प्रदूषण के कारण पक्षियों के आवासों में व्यवधान का प्रतीक है। जुहू बीच पर, समुद्री जीवन पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें जाल में फंसे और कचरे से घिरे कछुओं की एक सरल लेकिन आकर्षक मूर्ति है, जो समुद्री जीवों के सामने आने वाली चुनौतियों का प्रतिनिधित्व करती है।
यह पहल वंतारा के वन्यजीवों की रक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने के व्यापक मिशन को दर्शाता है। गुजरात में 3,500 एकड़ में फैले अपने अभयारण्य के साथ, वंतारा ने वन्यजीव बचाव, पुनर्वास और पुनर्वनीकरण के प्रयासों का नेतृत्व किया है, जिसने 1 मिलियन से अधिक जानवरों के संरक्षण और 100 मिलियन पेड़ लगाने में योगदान दिया है। ये प्रयास मानव प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बहाल करने के एक बड़े दृष्टिकोण का हिस्सा हैं। जहाँ मूर्तियाँ मुंबई के निवासियों को इस विश्व पशु दिवस पर विचार करने और चिंतन करने के लिए प्रेरित करती हैं, वहीं ‘वंतारा’ देश के नागरिकों को अपने पर्यावरणीय पदचिह्न पर पुनर्विचार करने और छोटे बदलाव करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

गौ हत्या के आरोपियों पर चला हरिद्वार पुलिस का हंटर

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🔆 हरिद्वार पुलिस की कार्यवाही से गौ तस्करों में मची अफरा तफरी

गौ तस्करी करके अर्जित की संपत्ति, हरिद्वार पुलिस ने घर के चौखट दरवाजे भी उखाड़े, अब हो गए पैदल

🔆 दोनो आरोपी थाना भगवानपुर के हिस्ट्रीशीटर

“गौ हत्या के आरोपियों को किसी भी सूरत में बख्शा नही जाएगा:: एसएसपी”

गौ तस्करों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने के साथ साथ गौ हत्या पर अंकुश लगाने हेतु एसएसपी हरिद्वार द्वारा कड़े दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

जिसके अनुपालन में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एवं क्षेत्रधिकारी मंगलौर के पर्यवेक्षण में थाना भगवानपुर में दर्ज मु0अ0सं0 85/2024 में वांछित आरोपी असलम उर्फ टांडा पुत्र सुल्तान व सनव्वर पुत्र सुल्तान निवासीगण ग्राम सिकरोड़ा के विरुद्ध माननीय न्यायालय से कुर्की के आदेश प्राप्त कर ग्राम सिकरोड़ा में अभियुक्तगणों के घरों की कुर्की गई और इनके घरों से तीन ट्रैक्टर, दो डीसीएम भर कर कुर्की का समान जब्त किया गया। खिड़की दरवाजों के चौखट भी उखाड़े गए।

गौ-तस्करी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर हरिद्वार पुलिस द्वारा साफ तौर पर आगाह किया गया है कि गौ तस्करों को किसी भी सूरत में बक्शा नहीं जाएगा। पुलिस से बचकर भागने का कोई फायदा नहीं, आज नहीं तो कल, जेल जाना ही होगा।

नाम पता आरोपी–
1.असलम उर्फ टांडा पुत्र सुल्तान निवासी ग्राम सिकरोडा थाना भगवानपुर हरिद्वार।
2.सनव्वर पुत्र सुल्तान निवासी ग्राम सिकरोडा थाना भगवानपुर हरिद्वार।

सरसंघचालक ने 13 नवंबर को गौ विज्ञान पर होने वाली परीक्षा का किया पोस्टर विमोचन

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बारां, 7 अक्टूबर।    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने रविवार को बारां में गौ विज्ञान अनुसंधान एवं सामान्य ज्ञान परीक्षा के पोस्टर का विमोचन किया।  इस दौरान मंच पर विमोचन के लिए सरसंघचालक डॉ. भागवत के साथ क्षेत्र संघचालक रमेश अग्रवालप्रांत संघचालक जगदीश सिंह राणाक्षेत्र गौ सेवा संयोजक राजेंद्र पामेचा और सह प्रान्त गौ सेवा संयोजक धनराज मालव भी उपस्थित रहे।

सह प्रांत गौ सेवा संयोजक धनराज मालव ने बताया कि इस परीक्षा का उद्देश्य गौ माता के प्रति छात्रछात्राओं में सेवा और सुरक्षा का भाव जगाना है। गौ माता का पंचगव्य और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। परीक्षा के माध्यम से गौ माता के संरक्षण व संवर्धन के लिए गौ उत्पाद पंचगव्यगौ काष्ठ आदि की व्यवसायिक एवं विज्ञान आधारित जानकारी विद्यार्थियों को होनी है। प्रदेश में वर्ष 2011 में पहली बार इस परीक्षा का आयोजन हुआ था और अब तक 8 बार आयोजित हो चुकी है। इस वर्ष यह परीक्षा 13 नवंबर 2024 को होनी है

अटूट आस्था का केंद्र है कर्ण की आराध्या माँ दशभुजी दुर्गा का मंदिर

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(कुमार कृष्णन-विभूति फीचर्स)
बिहार के मुंगेर का ऐतिहासिक माँ दशभुजी दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और श्रद्धा का केन्द्र है। शारदीय नवरात्र और बासंती नवरात्र में तो यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है।भक्तों का मानना है कि देवी के मंदिर में जो भी भक्त श्रद्धा और भक्ति के भाव से आता हैं। उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं
माँ दशभुजी को कर्ण की आराध्य देवी माना जाता है। महादानी, महातेजस्वी एवं महारथी कर्ण महाभारतकालीन भारत के महानायकों में अपने शौर्य, और पराक्रमी राजा के रूप में प्रसिद्ध हैं। तत्कालीन अंगदेश के राजा के रूप में उनका अधिकांश समय मुंगेर में व्यतीत हुआ है। अपनी दानशीलता के लिए इतिहास के अमर व्यक्तित्व राजा कर्ण की अधिष्ठात्री देवी दशभुजी दुर्गा के नाम से आज भी मुंगेर में स्थापित है और उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर पर स्थित प्रसिद्ध शक्ति पीठ चंडिका स्थान में उनकी आराधना की कथा जनश्रुतियों में आज भी व्याप्त है। वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बिहार योग विद्यालय के गंगा दर्शन को कर्णचौरा ही कहा जाता है। इसी कर्णचौरा से महाराज कर्ण प्रतिदिन सवा मन सोना दान किया करते थे जो उन्हें देवी की आराधना और अपने बलिदान के फलस्वरूप प्राप्त होता था।
कर्ण, पाण्डवों की माता कुंती के प्रथम पुत्र थे, लेकिन कुमारी अवस्था में उनका जन्म होने के कारण उन्हें एक दलित मां-बाप के बेटे के रूप में जाना गया। उनकी माता का नाम राधा और पिता का नाम अधिरथ था। अधिरथ राजा धृतराष्ट्र के यहां सारथी का काम करते थे। एक कथा के अनुसार राजा पृथु की पुत्री कुन्ती को महर्षि दुर्वासा के आदर-सत्कार का मौका मिला और उनके सत्कार से प्रसन्न हो ऋषि ने उन्हें ऐसा आशीर्वाद दिया कि वे किसी भी दिव्य शक्ति को अपने पास बुला सकतीं थीं। ऋषि से प्राप्त आशीर्वाद का प्रयोग कौतुहलवश कुन्ती ने सूर्य के आह्नवान से किया। सूर्य तुरंत उपस्थित हो गए और दोनों के ससंर्ग से कर्ण जैसा तेजस्वी और जन्मजात कवचकुण्डधारी पुत्र उत्पन्न हुआ। चूंकि कर्ण का जन्म कुन्ती की कुमारी अवस्था में ही हुआ अत: कुन्ती ने उसे नदी में प्रवाहित कर दिया जिसका राधा और अधिरथ के यहां पालन पोषण हुआ। इसी कारण कर्ण को सूत पुत्र तथा राधेय नामों से भी जाना गया। राजघराने का वारिस नहीं होने के कारण कर्ण को कई अवसर पर अपमान एवं तिरस्कार का सामना करना पड़ा। पांडवों की शिक्षा पूरी होने के उपरान्त शस्त्र विद्या के प्रदर्शन के समय कर्ण द्वारा दी गयी चुनौती इस कारण स्वीकार नहीं की गयी कि वह सूत पुत्र है। दुर्योधन ने इसी अवसर पर कर्ण को अंगदेश का राजा घोषित करते हुए उसके सिर पर राजमुकुट रख दिया। दुर्योधन के इस व्यवहार से कर्ण उनके ऋणी बन गए और जीवनपर्यन्त कर्ण ने इस कृतज्ञता का ज्ञापन मैत्री,समर्थन एवं सदैव सहयोग के लिए तत्पर रहकर किया ही, अपना बलिदान देकर भी अपने सत्चरित्र का परिचय दिया।
कर्ण और अर्जुन के बीच बैर भाव की नींव भी उसी समय पड़ गयी। मत्स्य भेदन के समय यह बैर और गहरा गया जब उसे सूतपुत्र कहकर द्रोपदी ने विवाह करने से इंकार कर दिया। फिर अर्जुन द्वारा मत्स्य भेदन करने पर द्रोपदी ने उनका वरण किया।
कर्ण की आराध्य देवी दशभुजी थीं। यह स्थान मुंगेर के मंगल बाजार में अवस्थित है। जन श्रुति है कि यहां स्थापित प्रतिमा महाभारतकाल की है, यह मूर्ति दानवीर राजा कर्ण की अधिष्ठात्री देवी की है। वर्तमान स्थिति में मूर्ति की स्थापना के लगभग तीन सौ वर्ष हो चुके हैं। पूरी मूर्ति काले रंग के एक ही पत्थर की बनी हुई है। नवरात्रि में लाखों भक्त यहां पूजा अर्चना करते हैं। यहां पर बलि प्रथा वर्जित है। पहले यह मूर्ति पूरबसराय के किसी स्थान पर थी जहां यह वर्षो तक अज्ञात पड़ी रही। कालान्तर में इसे अंग्रेजों के शासनकाल में बैलगाड़ी में छुपाकर ले जाया जा रहा था, परन्तु वर्तमान स्थान पर जहां मूर्ति स्थापित है उससे आगे बैलों ने चलना बंद कर दिया, परिणामस्वरूप लोगों ने इसे दैवी कृपा मानते हुए उस स्थान पर ही मूर्ति को स्थापित कर दिया, जहां एक विशाल मंदिर बनाया गया। मुंगेर स्थित शक्तिपीठ चण्डिका स्थान में कर्ण प्रतिदिन अपने को एक जलते तेल कड़ाह में डालते हुए देवी की आराधना करता था। इससे देवी प्रसन्न होकर कर्ण को सवा मन सोना देती थी तथा उसकी हर मनोकामना पूर्ण करने का वरदान देकर उसे श्री सम्पन्न बना देतीं थी। आज भी दशभुजी देवी, चण्डिका स्थान तथा मां गंगा के बीच एक त्रिकोण है जिसे एक तांत्रिक स्थल के रूप में जाना जाता है। यहीं पर कर्णचौरा के रूप में विख्यात स्थान मुंगेर बिहार योग विद्यालय बना है जो उसके तांत्रिक स्वरूप को और समृद्ध बना देता है। दशभुजी मंदिर का जीर्णोद्धार कर नया रूप दिया गया है। मंदिर का उत्तरोतर विकास हो रहा है। यहां साल भर लोग पूजा के लिए आते हैं लेकिन शारदीय नवरात्र पर भक्तों की जबरदस्त भीड़ उमड़ती है।
धनुर्विद्या में प्रवीणता के साथ कर्ण महादानी भी थे। उनकी दानशीलता अपने चरमोत्कर्ष पर तब पहुंची जब इंद्र द्वारा मांगे जाने पर उन्होंने अपने शरीर से छीलकर कवच और कुण्डल का दान किया और महाभारत युद्ध के समय कुन्ती की याचना पर उन्होंने अर्जुन को छोड़कर सभी पाण्डव पुत्रों के जीवन का अभयदान दे दिया। कर्ण का जीवनादर्श बड़ा उच्च कोटि का था। वे त्याग और मैत्री को सर्वाधिक महत्व देते थे और यही जीवन आदर्श उनको अति उच्च कोटि का मानव बनाता है। मैत्री को सर्वाधिक महत्व देने वाले कर्ण को महाभारत युद्ध से पहले कृष्ण ने उन्हें दुर्योधन को छोउ़कर युधिष्ठिर के साथ आने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन दिए। पांडवों का अग्रज बताकर सम्राट बनाने की बात कही, भारत का चक्रवर्ती राजा बनाने का वादा किया परन्तु कर्ण पर इस प्रलोभन का कोई असर नहीं पड़ा। वो तो हिमालय के समान अडिग थे, उन्हें दुर्योधन के हित के सिवा कुछ भी नहीं प्रिय नहीं था। एक बार का दुर्योधन द्वारा दिया गया सम्मान उन्हें चक्रवर्ती बनने से ज्यादा प्रिय लगा। राष्ट्रकवि रामधारी सिहं दिनकर ने अपनी रचना रश्मिरथी में कर्ण के संबंध में उल्लेख किया है:
हृदय का निष्कपट, पावन क्रिया का,
दलित तारक, समुद्धारक त्रिया था।
बड़ा बेजोड़ दानी था, सदैव था,
युधिष्ठिर ! कर्ण का अद्भुत हृदय था।।
कर्ण की दानशीलता ने महाभारत युद्ध की दिशा ही बदल दी। एक बार इंद्र को कवच कुण्डल देना और दूसरी ओर युधिष्ठिर, भीम, नकुल, सहदेव को अभयदान देकर उन्होंने अपनी दानशीलता पर होने वाले आक्षेप से अपने को बचाया। कर्ण को भगवान कृष्ण के वास्तविक रूप का ज्ञान था,फिर भी अंत तक वे अपने सिद्धांत पर डटे रहे और उनके प्रतिपक्ष में ही बोलते रहे। महाभारत युद्ध की दो घटना कर्ण के चरित्र को और उद्धात बनाती है। अश्वसेन नामक सर्प जिसके पूर्वजों ने अर्जुन को समाप्त करने के लिए कर्ण के बाण से अर्जुन के पास भेजने का अनुरोध किया तो कर्ण ने ऐसी विजय से मृत्यु का वरण करना श्रेष्ठ माना और अश्वसेन को भगा दिया। इसी तरह युधिष्ठिर के मामा शल्य जो कर्ण के सारथी थे, भगवान कृष्ण की सीख पर बार-बार उन्हें दुर्वचनों से हतोत्साहित करते रहे ताकि कर्ण की ओजस्विता और रणकौशल धूमिल हो परन्तु इसका कोई प्रभाव उन पर नहीं पड़ा और वे अंत तक अपने पराक्रम के बल पर अपराजेय बने रहे। कर्ण का वध छलपूर्वक किया गया। गड्डे में फंसे अपने रथ के चक्के को बाहर कर रहे थे तो कृष्ण के उकसावे पर अर्जुन ने अनीति से उसका वध कर दिया। इस प्रकार अंग देश सम्प्रति मुंगेर के सत्यनिष्ठ, पराक्रमी, दानशील एवं तेजोमय व्यक्तित्व का अंत हुआ। (विभूति फीचर्स)

74 करोड़ से प्रदेश के गौ पालकों को स्वावलंबी बनाएगी योगी सरकार

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UP News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के गौ पालकों की आय बढ़ाने, आत्मनिर्भर बनाने एवं स्वदेशी नस्ल की गायों के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए नन्द बाबा दुग्ध मिशन के द्वितीय चरण को हरी झंडी दे दी है। ऐसे में योगी सरकार मिशन के तहत विभिन्न योजनाओं को परवान चढ़ाने के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में 74 करोड़ 21 लाख रुपये खर्च करेगी। इससे प्रदेश के दस हजार से अधिक गौ पालकों को लाभ मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।

2566 लाभार्थियों को मिलेगा मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन का लाभ, खर्च होंगे 2052.40 लाख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गौ पालकों की आय बढ़ाने एवं स्वदेशी नस्ल की गायों के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए पिछले वर्ष नन्द बाबा दुग्ध मिशन को लांच किया था। सीएम योगी ने इस पंचवर्षीय मिशन के लिए 1 हजार करोड़ रुपये के फंड का प्राविधान किया था। इसी के तहत सीएम योगी ने मिशन के दूसरे चरण को हरी झंडी दे दी है। सीएम योगी के इस कदम से वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2566 लाभार्थियों को मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना का लाभ मिलेगा। इसके लिए 2052.40 लाख का बजट प्राविधानित है।

इसी तरह मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना का 7028 लोगों को लाभ मिलेगा। इसके लिए 790 लाख रुपये खर्च किये जाएंगे। वहीं नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना का 90 लाभर्थियों को लाभ मिलेगा। इस योजना में 1015 लाख रुपये खर्च किये जाएंगे। इसके अलावा 330 प्रारंभिक दुग्ध सहकारी समितियों के गठन का लक्ष्य रखा गया है। इस मद में 722.70 लाख रुपये खर्च किये जाएंगे। गौ पालकों को पशु स्वास्थ्य एवं दुग्ध गुणवत्ता के लिए 621 परीक्षण किट वितरित की जाएंगी। इसके लिए 25 लाख की धनराशि आवंटित की गयी है। प्रदेश के डेयरी हित धारकों की डेयरी की क्षमता बढ़ाने के लिए 1447 डेयरी धारकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके लिए 64.30 लाख रुपये खर्च किये जाएंगे।

नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना पर खर्च किये जाएंगे 1730.08 लाख

मिशन के तहत साएलेज / हे / टीएमआर मेकिंग के अध्ययन एवं ट्रेनिंग नीड एसेसमेंट (टीएनए) की योजना के लिए 35 लाख आवंटित किये गये हैं। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत संचालित एबीआईपी-आईबीएफ ईटीटी योजना का 200 लोगों को लाभ दिया जाएगा, जिस पर 25 लाख खर्च किये जाएंगे। नन्द बाबा दुग्ध मिशन पोर्टल को विकसित करने के लिए 60 लाख रुपये खर्च किये जाएंगे। वहीं नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना (नवीन योजना) का 294 लोगों को लाभ दिया जाएगा। इस मद में 1730.08 लाख खर्च किये जाएंगे। इसके अलावा स्टेट प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (एसपीएमयू) के संचालन के लिए 237.60 लाख, डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (डीपीएमयू) के 18 जनपदों में संचालन के लिए 214 लाख आवंटित किये गये हैं। इसके अलावा अति हिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र, रहमानखेड़ा लखनऊ में बोवाइन पशुओं में सेक्स्ड सार्टेड सीमेन उत्पादन की परियोजना में प्रयोगशाला निर्माण के लिए 450 लाख खर्च किये जाएंगे।

गौ पालन से हो रही है अच्छी कमाई

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जहानाबाद: जिले के काको प्रखंड के महमदपुर काजीसराय के 25 वर्षीय युवा किसान बिट्टू ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और बड़े पैमाने पर गौ पालन शुरू कर एक सफल किसान बने. बिट्टू आज 17 गायों का पालन कर रहे हैं, जिनमें एचएफ, क्रॉस साहिवाल, गिर और देसी नस्ल की गायें शामिल हैं. उन्होंने 2023 में बड़े पैमाने पर गौ पालन की शुरुआत की और अब इससे अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं.

15 साल की उम्र में माता-पिता को खोया
बिट्टू ने अपने संघर्ष की कहानी बताते हुए कहा, जब मैं 15 साल का था, तब मेरे माता-पिता का निधन हो गया. 2014 में एक सड़क दुर्घटना में मां की मृत्यु हो गई और एक साल के भीतर पिता भी गुजर गए. हम चार भाई-बहन थे और सबसे बड़ा होने के कारण घर की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई. उस वक्त आर्थिक तंगी के कारण मैंने प्राइवेट नौकरी करनी शुरू की, लेकिन उससे बहुत ज्यादा आमदनी नहीं होती थी. कुछ सालों तक नौकरी की, फिर छोड़ दी और पूरा ध्यान पशुपालन पर केंद्रित कर दिया.

2023 में बड़े पैमाने पर शुरू किया गौ पालन
बिट्टू बताते हैं, शुरुआत में कुछ सालों तक 2-3 गायों से ही परिवार का खर्च चलाता था. फिर मैंने कृषि विज्ञान केंद्र गंधार से पशुपालन की ट्रेनिंग ली और 2023 में बड़े पैमाने पर गौ पालन शुरू किया. आज मेरे पास उन्नत नस्ल की 17 गायें हैं. इनमें 3 एचएफ (होल्सटीन फ्रिसियन) नस्ल की गायें शामिल हैं. इसके अलावा, मेरे पास गिर, क्रॉस साहिवाल और कुछ देसी नस्ल की गायें भी हैं.

गौ पालन से हो रही है अच्छी कमाई
बिट्टू का कहना है कि गौ पालन से अच्छी कमाई की जा सकती है. वर्तमान में उनकी गायें रोजाना लगभग 70 लीटर दूध दे रही हैं और आने वाले समय में यह उत्पादन और बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि कई गायें गाभिन हैं. उनकी एक गाय रोजाना 20 लीटर तक दूध देती है और जैसे-जैसे अन्य गायें तैयार होंगी, दूध उत्पादन बढ़ेगा. बिट्टू ने अपने गायों के लिए शेड तैयार किया है और उन्हें चोकर दर्रा, सरसों खल्ली खिलाते हैं. एक गाय पर सालाना लगभग 65,000 रुपये का खर्च आता है, लेकिन इससे होने वाली कमाई उससे कहीं अधिक है. बिट्टू की कहानी न केवल संघर्ष की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि पशुपालन में संभावनाओं की कोई कमी नहीं है. उनका यह सफर अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा है.

25 अक्टूबर को देहरादून में गौ ध्वज यात्रा, अविमुक्तेश्वरानंद करेंगे शिरकत

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देहरादून: 25 अक्टूबर को देहरादून में गौ ध्वज को स्थापित किया जाएगा. इसमें गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने का संकल्प लिया जाएगा. इस कार्यक्रम के लिए स्वामी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद देहरादून पहुंचेंगे. देहरादून में जगदगुरु शंकराचार्य और गोपाल मणि महाराज गौ ध्वज की स्थापना कर गौ महासभा को संबोधित करेंगे. इसके बाद गौ ध्वज यात्रा दिल्ली रवाना हो जाएगी.

भारतीय गौ क्रांति मंच के पदाधिकारियों ने कहा गाय को पशु नहीं बल्कि माता की प्रतिष्ठा दी गई है. यही सनातन धर्मी हिंदुओं की पवित्र भावना है, इसी धार्मिक आस्था को लेकर और कानून में गाय को राज्य सूची से हटकर केंद्रीय सूची में प्रतिष्ठित कर गौ माता को राष्ट्र माता का सम्मान दिलाने के साथ ही गौ हत्या मुक्त भारत बनाने के उद्देश्य से गौ प्रतिष्ठा आंदोलन चलाया जा रहा है. ऐसे में ज्योतिष पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मार्गदर्शन में समूचे भारत में गौ प्रतिष्ठा आंदोलन के तहत गौ ध्वज स्थापना यात्रा 22 सितंबर से 26 अक्टूबर तक होनी तय हुई है. ये यात्रा भारत के सभी 36 प्रदेशों की राजधानियों में पहुंचकर एक गौ ध्वज की स्थापना कर रही है.

यात्रा के राष्ट्रीय सहसंयोजक और उत्तराखंड राज्य के प्रभारी गौ भक्त विकास पाटनी ने कहा राज्य की हर राजधानी में विशाल गौ प्रतिष्ठा सम्मेलन का भव्य आयोजन किया जाएगा. जिसकी शुरुआत अयोध्या से होगी. उसके बाद पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण होते हुए 26 अक्टूबर को देश की राजधानी दिल्ली में यात्रा पहुंचेगी. 27 अक्टूबर को यह यात्रा वृंदावन में विराम लेगी. इस यात्रा के माध्यम से जगदगुरु शंकराचार्य भारत के सभी गौ भक्तों को सम्मानित भी करेंगे.

इसी कड़ी में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जगदगुरु शंकराचार्य और गोपाल मणि महाराज 25 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से 3 तक गौ ध्वज की स्थापना करके गौ महासभा को संबोधित करने जा रहे हैं. इसके बाद यात्रा के समापन दिल्ली में होगा. 7,8 और 9 नवंबर को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी गौ प्रतिष्ठा महासम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा, जो गाय को राष्ट्र माता की प्रतिष्ठा दिलाने के लिए निर्णायक होगा.