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धारावी पुनर्विकास परियोजना पर बसपा ने जताई आपत्ति!

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प्रदेश अध्यक्ष सुनील डोंगरे ने की सरकार और अडानी समूह की आलोचना

मुंबई। बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट सुनील डोंगरे ने सोमवार (7 जुलाई) को कहा कि धारावी पुनर्विकास परियोजना आम आदमी के अधिकारों का हनन है और पूरी प्रक्रिया में लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के स्वास्थ्य पर कुठाराघात है। मुंबई में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में एडवोकेट डोंगरे ने अडानी समूह के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिका पर सवाल उठाए। इस अवसर पर प्रदेश महासचिव, पश्चिम महाराष्ट्र क्षेत्र के मुख्य प्रभारी और पुणे के पूर्व नगरसेवक डॉ. हुलगेश चलवाड़ी और पार्टी के अन्य शीर्ष पदाधिकारी उपस्थित थे। इस दौरान, बसपा प्रतिनिधिमंडल ने धारावी पुनर्विकास परियोजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस.वी.आर. श्रीनिवास से मुलाकात की और उन्हें धारावी की समस्याओं से अवगत कराया। इस अवसर पर राज्य सचिव नागसेन माला, इंजी. दादाराव उइके आदि उपस्थित थे।

धारावी से लोगों को जबरन बेदखल करके देवनार डंपिंग ग्राउंड के पास बसाया जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के अनुसार, डंपिंग ग्राउंड के 500 मीटर के दायरे में कोई भी निर्माण कानूनी रूप से गलत है। एडवोकेट डोंगरे ने कहा कि ऐसे जहरीले इलाके में घर बनाना और लोगों को स्थानांतरित करना उनकी जान से खिलवाड़ करने जैसा है। उन्होंने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि धारावी की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जैव विविधता को नष्ट करने और इस क्षेत्र को ‘बीकेसी 2’ में बदलने का व्यावसायिक इरादा है।
एडवोकेट डोंगरे ने कहा कि अडानी समूह समाज सेवा के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए काम कर रहा है। धारावी के लोगों ने वर्षों से मुंबई की अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है। बीएसपी का स्पष्ट रुख है कि उन्हें घर उपलब्ध कराना सरकार का कोई उपकार नहीं, बल्कि एक सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी है।

परियोजना की योजना में केवल घरों का पुनर्वास शामिल है, छोटे उद्योगों का नहीं। धारावी में हज़ारों छोटे उद्योग, खासकर चमड़ा, कपड़ा निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण और मिट्टी के बर्तन बनाने के उद्योग, रोज़गार के स्रोत हैं। अगर इन उद्योगों का पुनर्वास नहीं किया गया, तो बेरोज़गार लोगों को घर देने से और भी गंभीर समस्याएँ पैदा होंगी। परियोजना में पारदर्शिता का अभाव है। नागरिकों, स्थानीय प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को परियोजना के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। अपात्रता के कारण, वित्तीय लेन-देन और पुनर्वास मानदंड, सभी गड़बड़ हैं। बसपा का आरोप है कि यह ‘ऊपर से नीचे’ का रवैया लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है।
धारावी की 60% से ज़्यादा ज़मीन सार्वजनिक संपत्ति है, और इसे निजी कंपनियों को बेचने का मतलब सार्वजनिक संपत्ति का निजीकरण है। धारावी के सभी निवासियों को पात्र माना जाना चाहिए और उन्हें उनके मूल स्थानों पर घर दिए जाने चाहिए। सरकार को किसी भी रियायत के नाम पर वंचितों का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए। बसपा हमेशा शोषित, वंचित, मजदूर वर्ग के साथ खड़ी रहेगी और उनके अधिकारों के लिए लड़ती रहेगी, ऐसा प्रदेश महासचिव डॉ. हुलगेश चलवाड़ी ने कहा।

गायन और नृत्य दोनों में निपुण अनुप्रिया चटर्जी की गायन में रुचि, करती है नियमित रियाज

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बनारस की रहने वाली गायिका और नृत्यांगना अनुप्रिया चटर्जी पिछले कई वर्षों से बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में सक्रिय हैं और अपनी मधुर आवाज़ और बेहतरीन नृत्य द्वारा एक अलग पहचान बना चुकी हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में संगीत और कथक की औपचारिक शिक्षा लेने वाली अनुप्रिया का पारिवारिक माहौल भी गीत-संगीत से रमा हुआ रहा, जिसने उनकी प्रतिभा को बचपन से ही दिशा दी।

अपनी कला के विस्तार के लिए अनुप्रिया मुंबई आईं और यहीं से उनके करियर ने नई उड़ान भरी। शुरुआत में मशहूर संगीतकार प्यारे लाल के शिष्य और प्रख्यात वायलिन वादक सुरेंद्र सिंह अत्रा से उनकी मुलाकात हुई। यहीं से उनके गायन का सिलसिला पेशेवर स्तर पर शुरू हुआ। अनुप्रिया ने दक्षिण भारतीय फिल्मों के हिंदी वर्ज़न के लिए गीत गाए, जिससे उन्हें व्यापक पहचान मिली। उन्ही के सानिध्य में रहकर उनकी मुलाकात आशा भोंसले से भी हुई और आशा ताई ने उनके गायन की खुले दिल से प्रशंसा की।

अनुप्रिया ने फिल्म ’72 ऑवर्स विथ सुखविंदर सिंह’ (एक बायोपिक फिल्म) में गाने गाए। ‘प्यार के दो नाम’ और पंजाबी फिल्म ‘प्रॉपर पटोला’ में भी वह प्लेबैक सिंगर रहीं। टीवी धारावाहिकों में ‘इस प्यार को क्या नाम दूँ’, ‘मधुबाला’, ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’, ‘दो दिल एक जान’, ‘क्रेज़ी स्टुपिड इश्क’ और ‘मायके से बंधी डोर’ जैसे शो में भी उनकी आवाज़ गूंज चुकी है।

उनकी आवाज़ म्यूजिक वीडियो ‘ये जुनून इश्क का’ और ‘रंग शर्बतों का’ में भी सुनने को मिली। इसके अलावा उन्होंने आस्था, संस्कार, दिव्या और इनबॉक्स म्यूजिक जैसे चैनलों के लिए भी कई गीत रिकॉर्ड किए हैं। अनुप्रिया ने हिंदी, मराठी, गुजराती, बंगाली, ओड़िया, कन्नड़, तमिल, भोजपुरी, तेलगु, पंजाबी और राजस्थानी भाषाओं में गाने गाए हैं।

नृत्य में भी अनुप्रिया ने विशिष्ट प्रशिक्षण लिया है। प्रसिद्ध कथक सम्राट बिरजू महाराज की शिष्या रेणु शर्मा से उन्होंने कथक सीखा और उनकी अगुवाई में कई मंचों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने सोमा घोष के म्यूजिक वीडियो बनारसिया में भी नृत्य किया।

गायन और नृत्य दोनों में निपुण अनुप्रिया की खास रुचि गायन में है। वे नियमित रियाज करती हैं और अलग-अलग जॉनर, भाषा और मूड के गाने सुनती हैं। उनका कहना है कि संगीत एक साधना है। बिना अभ्यास के गायन में निपुणता संभव नहीं। लाइव परफॉर्मेंस में आपकी सच्चाई सामने आ ही जाती है। वे अपनी आवाज़ का विशेष ध्यान रखती हैं और इसके लिए खानपान और स्वास्थ्य का भी पूरा ख्याल रखती हैं। प्रतिदिन योगा और मेडीटेशन करती हैं।

गायन में उन्हें खास तौर पर सॉफ्ट और रोमांटिक गीत पसंद हैं। अनुप्रिया ने नवमी कक्षा से ही नृत्य और ग्यारहवीं से गायन सीखना शुरू कर दिया था। बॉलीवुड स्टाइल में भी उन्होंने बाकायदा प्रशिक्षण लिया है।

उन्होंने ललित पंडित, शान, अनूप जलोटा, जावेद अली और कई अन्य बड़े गायकों के साथ लाइव शो किए हैं। वह भारत ही नहीं, विदेशों में भी अपने संगीत शो करती रहती हैं। उनके शो में पंडित हरिप्रसाद चौरसिया जैसे दिग्गज भी मुख्य अतिथि रह चुके हैं।

फिलहाल अनुप्रिया के कई म्यूजिक शो लाइन अप हैं और जल्द ही एक फिल्म में उनका आइटम सॉन्ग भी आने वाला है। संगीत की दुनिया में उनकी यात्रा लगातार जारी है और उनके गीतों की सूची भी लगातार लंबी होती जा रही है।

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता चौहान के हाथों आगरा में लॉन्च हुआ हेटिच HEX स्टोर

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राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता चौहान ने द्वीप प्रज्ज्वलित एवं फीता काट कर किया वहीं उनके साथ प्रमुख समाजसेविका कांता महेश्वरी भी उपस्थित रहीं

आगरा में रणनीतिक शुरुआत, विरासत और आधुनिक जीवनशैली के मेल के लिए चुना गया

आगरा। इंटीरियर फिटिंग समाधानों में अग्रणी, हेटिच इंडिया ने आगरा (उत्तरप्रदेश) में अपना पहला हेटिच एक्सक्लूसिव (HEX) स्टोर लॉन्च किया है।
इस स्टोर की लॉन्चिंग राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता चौहान द्वारा द्वीप प्रज्ज्वलित एवं फीता काट कर की गई वहीं उनके साथ समाजसेविका कांता माहेश्वरी, हेटिच इंडिया के निदेशक (बिक्री) राहुल ठक्कर, यतेंद्र माहेश्वरी (केआरएम इंडस्ट्रीज के निदेशक और HEX आगरा के ऑनर), अंकित कुलश्रेष्ठ (HEX, हेटिच इंडिया के हेड) की भी उपस्थिति रही।

यह एक राष्ट्रव्यापी विस्तार की शुरुआत है जिसके तहत इस साल पूरे भारत में 25 HEX स्टोर खोले जाएँगे।
HEX प्रारूप एक संपूर्ण समाधान-खरीदारी अनुभव प्रदान करता है, जिसमें रसोई, अलमारी, प्रकाश व्यवस्था, दरवाज़े के हार्डवेयर और उपकरणों के पूरी तरह कार्यात्मक प्रदर्शन शामिल हैं। स्टोर में ग्राहक क्यूरेटेड सेटअप देख सकते हैं, विशेषज्ञ से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं, और अपने रहने की जगह को बदलने के लिए सूचित विकल्प चुन सकते हैं। यह सब हेटिच के विश्वसनीय फ़र्नीचर फिटिंग और हार्डवेयर द्वारा संचालित है।
आगरा को सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक गति के अनूठे मिश्रण के लिए चुना गया, जो इसे अगली पीढ़ी के रिटेल प्रारूप की शुरुआत के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है।

इस उपलब्धि के बारे में, हेटिच इंडिया के निदेशक (बिक्री) राहुल ठक्कर ने कहा, “HEX के लॉन्च के साथ, हम भारत की उभरती हुई घरेलू डिज़ाइन प्राथमिकताओं से जुड़ने की एक साहसिक यात्रा शुरू कर रहे हैं। आगरा शहर दशकों के विश्वसनीय जर्मन शिल्प कौशल द्वारा समर्थित इंटीरियर फिटिंग समाधान तैयार करने के लिए हेटिच की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने के लिए एक आदर्श मंच प्रदान करता है।

स्टोर पार्टनर यतेंद्र माहेश्वरी के सहयोग से लॉन्च किया गया यह स्टोर, केंद्रित साझेदारियों के माध्यम से क्षेत्रीय उपस्थिति को मज़बूत करने के हेटिच के दृष्टिकोण को पुष्ट करता है।

HEX स्टोर, हेटिच के एक्सपीरियंस सेंटर्स के साथ मिलकर काम करते हैं, जिन्हें डिज़ाइन विचारों और उत्पाद अनुप्रयोगों की खोज के लिए प्रेरणादायक स्थानों के रूप में डिज़ाइन किया गया है। साथ मिलकर, ये प्रारूप विचार से लेकर क्रियान्वयन तक एक सहज यात्रा प्रदान करते हैं।

HEX के माध्यम से उपलब्ध प्रत्येक समाधान जर्मन इंजीनियरिंग उत्कृष्टता की हेटिच की विरासत द्वारा समर्थित है, और ऐसे उत्पाद प्रदान करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करके डिज़ाइन और निर्मित किया जाता है जो स्मार्ट, टिकाऊ और बदलती जीवनशैली के लिए पूरी तरह से अनुकूल हों। हेक्स स्टोर में कदम रखें और हेटिच के मैजिक का अनुभव करें—जहाँ नवीन फिटिंग्स, प्रेरणादायक जीवनशैली का संगम हैं और नवाचार एवं परिशुद्धता के भविष्य को आकार देते हैं।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया https://hettichindiaonline.com/ पर जाएँ।

हेटिच का नया HEX स्टोर KRM इंडस्ट्रीज, आगरा, 171 नेहरू नगर, बाईपास रोड, दरगाह रोड, अबू लाला के सामने, आगरा, उत्तर प्रदेश 282002 पर स्थित है। यहां ग्राहक और उद्योग जगत जुड़े लोग ब्रांड की प्रीमियम उत्तम क्वालिटी का निरीक्षण कर उपयोग में ला सकते हैं।

हेटिच के बारे में बता दें कि 1.5 बिलियन यूरो से अधिक के वैश्विक राजस्व के साथ, 137 वर्षों से सक्रिय एक पारिवारिक स्वामित्व वाला जर्मन लाइफस्टाइल ब्रांड, हेटिच, दुनिया भर में फर्नीचर फिटिंग के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। हेटिच ने सहस्राब्दी की शुरुआत में भारत में परिचालन शुरू किया और जल्द ही हार्डवेयर और फर्नीचर फिटिंग के क्षेत्र में वैश्विक उद्योग में अग्रणी के रूप में अपनी पहचान बनाई।
इसके अतिरिक्त, अपनी मजबूत ब्रांड इक्विटी और ग्राहकों के अटूट विश्वास के कारण, इसे मार्क्समेन डेली द्वारा “भारत के सबसे विश्वसनीय ब्रांड 2023 और 2024” और इकोनॉमिक टाइम्स द्वारा “सर्वश्रेष्ठ ब्रांड 2022, 2023 और 2024” का खिताब दिया गया।
हेटिच के उत्पाद पोर्टफोलियो में जर्मन-इंजीनियरिंग गुणवत्ता के साथ निर्मित प्रीमियम फर्नीचर फिटिंग और डोर हार्डवेयर का एक संग्रह शामिल है, जिसमें वायर उत्पाद, एल्युमीनियम प्रोफाइल, शेल्विंग सिस्टम, बिल्ट-इन उपकरण और फर्नीचर लाइट शामिल हैं, जिससे सभी आवासीय और वाणिज्यिक जरूरतों के लिए व्यापक फिटिंग समाधान उपलब्ध होते हैं।

स्पा की आड़ में चल रहे देह व्यापार का भंडाफोड़, चेंबूर में पुलिस का छापा, आठ युवतियां मुक्त, छह गिरफ्तार

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मुंबई। मुंबई पुलिस ने चेंबूर के एक स्पा सेंटर में मसाज की आड़ में संचालित हो रहे देह व्यापार रैकेट का भंडाफोड़ किया है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने आठ युवतियों को मुक्त कराया, जबकि स्पा मैनेजर, एक कर्मचारी और चार ग्राहकों सहित कुल छह लोगों को मौके से गिरफ्तार किया गया है।

यह कार्रवाई चेंबूर के कुकरेजा आर्केड स्थित ‘अनंतरा आयुर्वेद एंड वेलनेस सेंटर’ नामक स्पा पर की गई। पुलिस को जानकारी मिली थी कि यहां मसाज सर्विस की आड़ में यौन शोषण का संगठित धंधा चलाया जा रहा है। सूचना की पुष्टि के लिए पुलिस ने एक नकली ग्राहक भेजा, जिसने स्पा मैनेजर से संपर्क किया। ग्राहक को मसाज के लिए 2500 रुपये और शारीरिक संबंध के लिए 7000 रुपये की मांग की गई। तय राशि देने के बाद एक युवती के साथ सौदा होते ही पुलिस टीम ने छापा मारकर सभी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

छापेमारी के दौरान स्पा से आठ युवतियां मुक्त कराई गईं, जिनकी उम्र 22 से 40 वर्ष के बीच है। पूछताछ में यह बात सामने आई कि युवतियों को स्पा में काम दिलाने के बहाने लाया गया था और बाद में उन्हें मजबूरी में इस धंधे में धकेल दिया गया। ग्राहकों को पहले मसाज के बहाने बुलाया जाता और फिर उन्हें एक्स्ट्रा सर्विस का ऑफर देकर लड़कियों से चयन कराया जाता था। डील पूरी होने पर लड़कियों को कमरे में भेजा जाता। इस प्रक्रिया से मिलने वाले पैसों का बड़ा हिस्सा स्पा प्रबंधन के पास जाता था, जबकि युवतियों को मामूली रकम दी जाती थी।

मौके से पुलिस ने तीन मोबाइल फोन, एक कंप्यूटर, सीसीटीवी डीवीआर, ग्राहकों के लिए दर सूची (रेट कार्ड), नकद रुपये और एक पेन ड्राइव बरामद की। इन सामग्रियों का उपयोग ग्राहकों की पहचान दर्ज करने, लेनदेन और निगरानी के लिए किया जा रहा था। पुलिस को एक लॉकर भी मिला है, जिसमें रखे पैसे को लेकर पूछताछ जारी है, हालांकि उसका पासवर्ड केवल मालिक के पास होने की जानकारी दी गई है।

पुलिस का कहना है कि यह रैकेट पूरी तरह से संगठित ढंग से चल रहा था। मैनेजर और कर्मचारी ग्राहकों को एक्स्ट्रा सर्विस के लिए उकसाते और युवतियों को मजबूरन इसमें शामिल करते थे। पकड़े गए ग्राहकों ने भी पुलिस के समक्ष यह स्वीकार किया कि वे स्पा में ‘शारीरिक सुख’ के लिए पहुंचे थे।

यह छापा चेंबूर पुलिस स्टेशन के क्राइम डिटेक्शन यूनिट, मानखुर्द पुलिस के अधिकारी और आरसीएफ पुलिस के सहयोग से पंचों की उपस्थिति में डाला गया। सभी आरोपियों के विरुद्ध अनैतिक देह व्यापार (रोकथाम) अधिनियम 1956 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

पुलिस ने बताया कि मुक्त कराई गई सभी आठ युवतियों को सुरक्षित सुधारगृह भेज दिया गया है और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मुंबई में मिल गई देहरादून की खुशी

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खुशी प्रसन्नता का शहरों कस्बों से क्या वास्ता ? खुशी तो खुशी है, क्या नगर क्या गांव ? कुछ तो बात है वर्ना मचता भला क्यों हंगामा !
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मुंबई से तो अलग थलग कुछ है उसका मिजाज,
अलग उसका रूप रंगीला अलग उसका अंदाज़!
अलग उसकी मुस्कान मोहिनी नैन में गहरे राज़ !
बोल पड़े तो झंकृत हो इश्क़-ए-तरन्नुम-ए-साज़!
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देहरादून की कली है वह, लहराती लजर गई मुम्बई तक है। खिलेगी बॉलीवुड बगिया में, इंतज़ार बहार के आने तक है।
देहरादून की गोरी चिट्टी छैल छबीली नटखट नवयौवना खुशी अंसारी आजकल मायानगरी मुंबई में है। बचपन से ही ऊधम मचानेवाली खुशी किशोरी होते होते २०१८ में देहरादून में ही “मिस फिटनेस मॉडल” का खिताब जीता और शहर में चर्चा का विषय बन गई। रैम्प वॉक में भी वह अव्वल रहने लगी। फिर तो मन ऊॅंची उड़ान भरने का हुआ और देहरादून की खुशी मुंबई की मुस्कान बन गई। नयनों में बांकपन, बातों में बेबाकपन और व्यवहार में अपनापन लिये हुए खुशी अपने सपनों के शहर में अपनी मंज़िल तलाश कर रही है। नाजों में पली यह कुड़ी एक बेहतर ब्रेक की खोज में है। चैलेंजिंग रोल इसे पसंद हैं, विविधतापूर्ण भूमिकाएं भाती हैं, वही चाहिए। लेकिन, कैरेक्टर रिच रिच फील देने वाला हो अर्थात् उछल कूद ऊधम मचानेवाली स्टाइलिश नकचढ़ी लड़की वा टॉम बॉय जैसा किरदार हो तो मज़ा आ जाए। देहरादून में स्कूल और कॉलेज में किए नाटक और मॉडलिंग का अनुभव उसको प्रोत्साहित करते हैं। खुशी अपने नाम के अनुरूप प्रसन्नचित्त युवती है और अपनी मंज़िल को लेकर आशान्वित है, आश्वस्त है।

हाइवे पर बलात्कार की घटनाएं और रतन वंश की शॉर्ट फिल्म “आवागमन”

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कुछ वर्षों में हाइवे आवागमन से अधिक अपहरण और बलात्कार व हत्या का अड्डा बन गया है। आये दिन दुर्घटनाओं से जान माल की जितनी क्षति होती है उससे अधिक अपहरण और फिर बलात्कार की घटनाएं होने लगी हैं। नवविवाहिताओं के साथ ऐसी घटनाएं बड़ी संख्या में बढ़ी है। नवविवाहिताओं का अपहरण कर उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म कर मरणासन्न अवस्था में फेंक देना आम बात हो गई है। स्त्री के पति / प्रेमी को मार देना या ज़ख्मी कर देना भी इसका ही अंग है। लेखक निर्माता रतन विश्वकर्मा वंश के अनुसार, यह आंतरिक सुरक्षा का विषय है और इसकी रोकथाम सरकार की जिम्मेदारी बनती है। वंश ने अपनी शॉर्ट फिल्म “आवागमन” में यही विषय उठाया है। पटकथा की पृष्ठभूमि राजस्थान का मारवाड़ क्षेत्र है।
“आवागमन” लघु चित्र को आगे फीचर फिल्म के रूप में भी बनाने की योजना है। इस शॉर्ट फिल्म के लेखक निर्माता और मुख्य अभिनेता रतन विश्वकर्मा वंश हैं और उनकी नायिका हैं प्रिया चतुर्वेदी। सहयोगी कलाकार हैं – रमजान डायर, मनीष नाहर, यश सोलंकी, गणेश कुमावत, दिनेश पुरी, जयेश वैष्णव, थिया, वीरेन्द्र आदि। जमना कुमारी द्वारा प्रस्तुत और अरावली फिल्म्स के बैनर तले बनी इस शॉर्ट फिल्म के निर्देशक हैं राकेश प्रभु राठौड़। नृत्य निर्देशक (कोरियोग्राफर ) प्रवीण बारिया और छायाकार (कैमरामैन) राकेश जायसवाल हैं। सह निर्माता अजय सागर व सह निर्देशक भरत कांकरिया और मीडिया कंसल्टेंट अब्दुल क़दीर हैं। “आवागमन” के बाद रतन विश्वकर्मा वंश द्वारा लिखित दूसरी फिल्म का शीर्षक है आज़ाद दोस्तियां।
अब्दुल क़दीर

स्वीकृति शर्मा ने पीएस फाउंडेशन के डॉक्टर्स डे समारोह और चलता फिरता मुफ्त दवाखाना के एक वर्ष की सफलता के उत्सव का किया नेतृत्व

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मुंबई। कई वर्षों से निरंतर समाज में अपना बड़ा योगदान देने वाला पी एस फाउंडेशन (प्रदीप शर्मा फाउंडेशन) लगातार अंधेरी पूर्व विधानसभा के गली मोहल्ले में जाकर एंबुलेंस के जरिए मुफ्त में लोगों का इलाज करा रहा है। यह संस्था रक्तदान शिविर के अलावा मोतियाबिंद, कैंसर और अन्य प्रकार के बीमारियों के इलाज में अपना योगदान करती आ रही है। हाल ही में पी एस फाउंडेशन द्वारा स्वास्थ्य शिविर के आयोजन को सफल बनाने वाले डॉक्टरों को सम्मानित करके उनका उत्साह बढ़ाया गया।
मुंबई जैसे महानगर में यह एक ऐसी पहली संस्था है जो अंधेरी विधानसभा में सभी जनमानस को मिली हुई है। लगभग डेढ़ वर्षो से लगातार लोगों के बीच में जाकर के लोगों का मुफ्त में इलाज किया जाता है जिसकी देखरेख प्रदीप शर्मा एवं स्वीकृति प्रदीप शर्मा की निगरानी में की जाती है।
संस्था के वालंटियर अंधेरी पूर्व विधानसभा के सभी वॉर्ड में जाकर स्थानीय नागरिकों का इलाज मुफ्त में कराते हैं।
चलता फिरता मुफ्त दवाखाना की विशेषता यह है कि सर्दी जुखाम, बुखार, खुजली, आंखों में समस्या, डायबिटीज जैसी बीमारियों के इलाज के लिए एंबुलेंस में डॉक्टर उपलब्ध रहते हैं।
पीएस फाउंडेशन द्वारा 80 से 90 हजार लोगों का इलाज मुफ्त में किया जा चुका है। मोतियाबिंद का ऑपरेशन लगभग 1300 लोगों का किया जा चुका है। कैंसर जैसी बीमारियों का भी लोगों का इलाज मुफ्त में करवाया जा चुका है।
कई सामाजिक कार्यों में पी एस फाउंडेशन ने अपना योगदान दिया जैसे कि बिजली मीटर की गड़बड़ी को लेकर आवाज उठाई गई। दसवीं और बारहवीं के बच्चों को उत्तीर्ण होने पर सम्मानित कर उत्साहवर्धन किया गया।
पिछले 8 वर्ष से लगातार पी एस फाउंडेशन द्वारा रक्तदान शिविर आयोजित किया जाता है।
अनेकों बार निःशुल्क चश्मा वितरण का कैम्प का आयोजन अंधेरी में किया गया। फुल बॉडी चैकअप का शिविर कई बार लगाया गया।
पी एस फाउंडेशन के संस्थापक प्रदीप शर्मा एवं स्वीकृति प्रदीप शर्मा ने डॉक्टरों को सम्मानित करते हुए फाउंडेशन की पूरी टीम को धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि यह पूरा परिवार मेरा सदैव इसी तरह जनता की सेवा के लिए खड़ा रहेगा।

साहित्यिक सफर जारी है हेमलता त्रिपाठी का

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डॉ जीतेन्द्र पांडेय

लखनऊ की कवयित्री व पत्रकार सुश्री हेमलता त्रिपाठी गऊ भारत भारती समाचार पत्र, मुंबई की लखनऊ ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं। उनकी पत्रकारिता, साहित्य व लेखन की यात्रा जारी है। वे कहती हैं कि, “मैं मूल रूप से कवयित्री हूं। पर मेरे मन में पत्रकारिता और लेखन में करियर बनाने का सपना एक लम्बे समय से बसा है। मैं सन 2016 से मुंबई से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक अखबार “ विकलांग की पुकार” की रिपोर्टर तथा देश की प्रथम मीडिया डायरेक्टरी ‘पत्रकारिता कोश’ के ‘लखनऊ सूचना ब्यूरो’ के रूप में कार्यरत हूँ। वैसे, मेरी कविताएं, कहानियां व लेख मुक्ता, सरिता, सरस सलिल, दोपहर का सामना, विकलांग की पुकार, अवध 24, अग्निशिला, चारभुजा टाइम्स, वृत्त मित्र, राष्ट्रीय अधिकार, कर्म कसौटी, द मोरल, संगठन भारत, जन सामना, सरयूपारीण समाचार, मुंबई मित्र, नई पीढी, दो बजे दोपहर, खबरें पूर्वांचल, हिंद स्वाभिमान, गऊ भारत भारती, मुंबई अमरदीप टाइम्स, समरस चेतना, हिंदी विवेक, प्रदेश विस्तार, शिखर सत्ता, हमारा मुंबई मित्र, सिटी चैनल, क्राइम स्कैन आदि पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। मेरी कविताओं का संग्रह “ये आसमां गुडिया का” को भारत पब्लिकेशन, मुंबई ने 3 दिसंबर 2018 को प्रकाशित किया है। मेरी अन्य उपलब्धियों में- मेरी जीवनी डॉ शिवम तिवारी के ग्रंथ “सुधियों के दस्तावेज” ( विश्व पुस्तक प्रकाशन, नई दिल्ली ) में शामिल की गई है। मेरी कविताएं श्री राम कुमार, डा प्रमोद पांडेय तथा डा शिवम तिवारी द्वारा संपादित “काव्य तरंगिणी” ( आर के पब्लिकेशन, मुंबई ) में समाहित हैं। मेरी कविताएं डॉ जितेंद्र पांडेय द्वारा संपादित “चार पीढ़ी के कवि” (भारत पब्लिकेशन, मुंबई ) में समाहित हैं।”

हेमलता त्रिपाठी की दो पुस्तकें प्रकाशकाधीन हैं पहला कहानी संग्रह “सिर्फ तुम” (भारत पब्लिकेशन, मुंबई) और आलेख संग्रह “हम किसी से कम नहीं”(भारत पब्लिकेशन, मुंबई)। इसके अलावा उन्होंने आई ई एन चैनल, मुंबई की डाक्युमेंटरी फिल्म “ये जो हैं हस्ती” ( सुप्रसिद्ध गजलकार हस्तीमल हस्ती के व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित) के लिए शोध किया है। उनकी विशेष उपलब्धियों में राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन-वाजा इण्डिया की महाराष्ट्र इकाई की तरफ से मुंबई में 8 अक्टूबर 2017 को ‘काव्य गौरव सम्मान’-2017 से सम्मानित, जनवरी 2018 में हिंदुस्तानी भाषा अकादमी, नई दिल्ली द्वारा सम्मनित, अप्रैल 2018 में मुंबई में “लोकायन काव्य रत्न सम्मान”, “साहित्य मिलन सम्मान” तथा “विकलांग की पुकार विशिष्ट सम्मान” के साथ गऊ भारत भारती अखबार द्वारा सम्मानित। सितंबर 2018 में आशीर्वाद युवा लेखन पत्रकारिता प्रतिभा पुरस्कार प्राप्त। मार्च 2021में मुंबई में महाराष्ट्र के राज्यपाल महामहिम भगत सिंह कोश्यारी ने राजभवन में राष्ट्रीय सेवा सम्मान से सम्मानित किया। 2023 में संगठन भारत साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित। सितंबर 2023 में शिवसेना के मुखपत्र हिंदी सामना ने काव्य रत्न-2023 से सम्मानित किया। सामना के निवासी संपादक श्री अनिल तिवारी ने उन्हें सामना भवन, मुंबई में ट्राफी व शॉल प्रदान कर सम्मानित किया है।

गऊ माता के रक्षण के लिए भारत के सभी गऊ प्रेमियों और संगठनों को एक मंच पर आने की जरुरत – गौभक्त , भगवत चिंतक श्री एमएल सोनी

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परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज जी का दिव्य भव्य चातुर्मास्य मुंबई में।

 

गऊ माता के रक्षण के लिए भारत के सभी गऊ प्रेमियों और संगठनों को एक मंच पर आने की जरुरत – गौभक्त , भगवत चिंतक श्री एमएल सोनी

मुंबई – महानगर मुंबई के कोरा केंद्र में दिनाँक १० जुलाई से ७ सितंबर होने जा रहे परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज जी का दिव्य भव्य चातुर्मास्य कोरा केंद्र मैदान नंबर २ और ३ में होने जा रहा है। जहा गऊ माता को राष्ट्र माता के का दर्जा दिलवाने तथा श्री गो -प्रतिष्ठा महायज्ञ ३३ करोड़ आहुतियों का महायज्ञ का आयोजन तो होगा ही अन्य वैदिक अनुष्ठान और कार्यक्रम जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज जी के आशीर्वाद से संपन्न होगा।
दिनाँक १० जुलाई से ७ सितंबर तक चलने वाले इस दिव्य चातुर्मास्य में लाखो गौभक्तो और सनातनियों के भाग लेने की संभावना है। इस दिव्य चातुर्मास्य आयोजन में अपनी प्रमुख भूमिका निभा रहे परम गौभक्त सनातन धर्म के ध्वजारक्षक भगवत चिंतक समाजसेवी श्री एमएल सोनी से दिव्य चातुर्मास्य आयोजन के कुछ विशेष बिंदुओं और गौमाता पर चर्चा की है प्रस्तुत है।

१- एमएल सोनी जी परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज जी का दिव्य भव्य चातुर्मास्य मुंबई में करवा रहे है क्या कहेंगे आप ?

– महाराष्ट्र की पवन धरा का यह शौभाग्य है कि परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर गद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज जी ने दिव्य भव्य चातुर्मास्य के लिए मुंबई को चुना मेरे लिए और मेरे परिवार के लिए यह शौभाग्य है कि हमें सेवा का मौका मिला। गौमाता की सेवा के लिए हम कृतज्ञ हैं। और सब से बड़ी बात यह भी है कि जगद्गुरु शंकराचार्य जी का दिव्य भव्य चातुर्मास्य मुम्बईकरो का कल्याण करने और उन्हें गौमाता की सेवा के लिए प्रेरित करने के लिए हो रहा है। सैकड़ो वर्षो से गौमाता की लड़ाई लड़ी जा रही है स्वामी करपात्री जी महाराज ने जिस तरह से गौ माता की लड़ाई लड़ी और गोलियां खाई आप को पता होगा स्वामी करपात्री जी महाराज ने गौ माता की रक्षा के लिए बहुत संघर्ष किया। उन्होंने 1966 में हुए गौरक्षा आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसमें उन्होंने और हजारों साधुओं ने दिल्ली में प्रदर्शन  किया। इस दौरान, सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं, जिसमें कई साधु मारे गए और घायल हुए थे। आज हमारे परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु  शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज जी ने उसी काम को आगे बढ़ाते हुए गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा सरकार दे उसके लिए संघर्ष कर रहे है। हमें भी सेवा का अवसर मिल रहा है यही हमारे लिए गर्व की बात है।

२- दिव्य भव्य चातुर्मास्य की अन्य रुपरेखा ?

– इस दिव्य भव्य चातुर्मास्य में नाना प्रकार के वैदिक अनुष्ठानो के साथ भव्य श्री गो प्रतिष्ठा महायज्ञ ३३ करोड़ आहुतियों का कार्यक्रम है जो गौमाता के प्राण प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए है इस में कोई भी गौभक्त भाग ले सकता है। इस आयोजन में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज जी की जयंती , परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज जी १००८ जी का वर्धापन दिवस , २६ जुलाई को होगा। अन्य होने वाले कार्यक्रम की पूरी जानकारी निमंत्रण पत्रिका में दी गई है आप देख सकते है।

३- गऊ माता की रक्षा के लिए आप के विचार से और क्या क्या कार्य होने चाहिए ?

– मेरे विचार से तो मैं यही कहूंगा की भारत की सभी गौमाता की रक्षा करने वाली संस्थाए एक मंच पर आ कर काम करे तभी ये सरकार भी हमारी सुनेगी नहीं तो हमें और भी लड़ाई लड़नी पड़ेगी। सभी देश के लोगो और समस्त सनातनियों को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज जी १००८ जी का साथ देना चाहिए क्योकि एक वही है वर्तमान में जो हमारी गौमाता को बचा सकते है और गौमाता के वैभव को अमर करने की शक्ति यदि भगवान् ने दी है तो वो है हमारे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज जी १००८ जी महाराज।

४ – और क्या – क्या किया जा सकता है ?

– बहुत कुछ किया जा रहा है , खासकर मैं आप के अखबार के माध्यम से यह भी कहूंगा की गौआधारित अर्थव्यवस्था को और मजबूती देने की जरुरत है गाय आधारित अर्थव्यवस्था की ताकत , गायें दूध का प्राथमिक स्रोत हैं, जो भारतीय आहार का प्रमुख हिस्सा हैं। हमारी गायें स्थानीय डेयरी उद्योग में योगदान देती हैं, जिससे ताजा और पौष्टिक दूध मिलता है। जैविक खेती – गाय का गोबर और मूत्र शक्तिशाली प्राकृतिक उर्वरक और कीटनाशक हैं। वे जैविक कृषि प्रथाओं की सुविधा प्रदान करते हैं जो मिट्टी के स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं, रासायनिक उपयोग को कम करते हैं और फसल की उपज को बढ़ाते हैं। जैविक खेती तकनीकों को अपनाकर आज किसानो ने अपनी अर्थव्यवस्था बढ़ाई है।
आयुर्वेद और गाय आधारित उत्पाद आज पुरे देश में माँगा जा रहा है।आयुर्वेदिक दवाओं और हर्बल उपचारों में अक्सर गाय से प्राप्त सामग्री जैसे घी और गोमूत्र शामिल होते हैं। इन उत्पादों ने अपने समग्र स्वास्थ्य लाभों के लिए लोकप्रियता हासिल की है और ये आर्थिक विकास के संभावित स्रोत हैं।
इको-पर्यटन – गाय आधारित अर्थव्यवस्था भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का अनुभव करने में रुचि रखने वाले पर्यावरण-पर्यटकों को भी आकर्षित कर सकती है। आगंतुक गाय पालन प्रथाओं, गाय-आधारित उत्पादों के उपयोग के पारंपरिक तरीकों के बारे में सीख सकते हैं और स्थानीय जीवन शैली में डूब सकते हैं।
यैसे बहुत सारे श्रोत है जिस से गौ आधारित रोजगार कर के गौमाता को बचाया जा सकता है। सरकार को और ध्यान देने की जरुरत है। महाराष्ट्र में गौमाता को राज्य माता का दर्जा दिया गया। इस से भी काफी फर्क पड़ा है। अंत में मैं यही कहूंगा – गऊ आधारित अर्थव्यवस्था भारत को समृद्ध बनाएगा। और गौमाता की रक्षा भी होगी।
खैर महानगर मुंबई के कोरा केंद्र में दिनाँक १० जुलाई से ७ सितंबर होने जा रहे परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज जी का दिव्य भव्य चातुर्मास्य में श्री सोनी जी के साथ गणपत कोठरी , जयकांत शुक्ल , डॉ भरत शाह , शैलेश परसरामपुरिया , हर्ष गुप्ता , गुनीश गर्ग शामिल है। और अपना सहयोग दे रहे है।

 

श्री शैलेश परसरामपुरिया , उद्योगपति ,समाजसेवी ,  आयोजन समिति सदस्य

भारत की एकता- अखंडता को समर्पित युगपुरुष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

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(हेमन्त खण्डेलवाल-विनायक फीचर्स)

कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने विचारों, संघर्षों और बलिदानों से समय की धारा को मोड़ने का संकल्प रखते हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऐसे ही युगपुरुष थे, जिनकी राष्ट्रभक्ति, दूरदृष्टि और दृढ़ संकल्प ने भारत की एकता-अखंडता को सुदृढ़ किया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऐसे ही एक युगदृष्टा थे, जिनका जीवन भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए समर्पित था। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि शिक्षाविद्, समाज सुधारक और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रबल प्रवक्ता भी थे। 6 जुलाई को उनका जन्मदिवस केवल एक स्मरण तिथि नहीं, बल्कि राष्ट्रनिष्ठा, त्याग और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

देश की स्वतंत्रता के पश्चात जम्मू-कश्मीर को लेकर जो परिस्थितियाँ निर्मित हुईं, वे राष्ट्र की एकता के लिए चुनौती बन गईं थी। अनुच्छेद 370 और 35 ए जैसे प्रावधानों ने जम्मू-कश्मीर को भारत से पृथक करने का प्रयास किया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इस वैचारिक विभाजन का डटकर विरोध किया। उनका स्पष्ट मत था कि “एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चल सकते।” यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि उनका जीवन दर्शन था। उन्होंने कहा था कि जब कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, तो वहाँ भी भारत के समान संविधान और शासन होना चाहिए। अपने इस सिद्धांत को सत्य सिद्ध करने के लिए उन्होंने अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया, वर्षों बाद उनका सपना साकार हुआ जब 2019 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 और 35 ए को निरस्त किया गया। यह कदम केवल एक संवैधानिक सुधार नहीं था, बल्कि यह भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करने का ऐतिहासिक संकल्प था। इस निर्णय के पीछे डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवाद की विचारधारा स्पष्ट रूप से झलकती है।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय राजनीति में एक स्पष्ट और सशक्त राष्ट्रीय विचारधारा प्रस्तुत की। जब पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में वैचारिक प्रतिबद्धताएँ राष्ट्रहित से टकराने लगीं, तब उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। यह केवल पद का त्याग नहीं था, बल्कि राष्ट्रहित के लिए एक साहसिक और कर्त्तव्यनिष्ठ कदम था। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जो भविष्य में भारतीय जनता पार्टी के रूप में विकसित होकर देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बनी। डॉ. मुखर्जी का सबसे बड़ा संघर्ष जम्मू-कश्मीर की ‘परमिट प्रणाली’ के खिलाफ था। यह व्यवस्था कश्मीर में भारतीय नागरिकों की स्वतंत्र आवाजाही को सीमित करती थी, जिससे भारत के अंदरूनी हिस्सों को एक-दूसरे से जोड़ना मुश्किल हो रहा था। 1953 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर की यात्रा करने का साहस दिखाया, जिसके पश्चात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। श्रीनगर की जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु 23 जून 1953 को हुई। अत्यंत पीड़ादायक है कि न उन्हें समुचित चिकित्सा प्रदान की गई और न ही उनकी मौत की निष्पक्ष जांच की गई। उनकी माता श्रीमती योगमाया देवी ने इसे ‘मेडिकल मर्डर’ करार दिया, पर सत्ता तंत्र मौन रहा। डॉ. मुखर्जी का यह बलिदान व्यर्थ नहीं गया। उनके निधन के कुछ सप्ताहों के भीतर ही कश्मीर की परमिट प्रणाली समाप्त कर दी गई और धीरे-धीरे वह व्यवस्था बदली, जिसने देश के भीतर अलगाव और तनाव पैदा किया था। हालांकि कांग्रेस सरकारों ने दशकों तक उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया, परन्तु उनकी विचारधारा आज भी भारतीय राष्ट्रवाद का आधार है।

2004 के बाद जब देश में कांग्रेस की सत्ता रही, तब जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता देने की बातें पुनः उठी। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 2010 में जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता की बात कहकर भारत की जनता के हितों के साथ खिलवाड़ किया। कांग्रेस ने पीडीपी की कठपुतली बनकर आतंकवादियों के प्रति नरमी बरती, जिससे कश्मीर में दशकों तक हिंसा और विस्थापन हुआ। हजारों नागरिक शरणार्थी बने और उनकी जिंदगी कठिन हुई। इस दौरान अलगाववादी शक्तियों को बढ़ावा मिला और भारत विरोधी गतिविधियां फलने-फूलने लगीं। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के बाद जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद और अलगाववाद को दफन कर देश की एकता को मजबूत किया। डॉ. मुखर्जी के संघर्ष और बलिदान के कारण ही जम्मू-कश्मीर आज भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारतीय जनसंघ से भाजपा तक की राजनीति का मूल राष्ट्रवाद रहा है, जिसने देश की अखंडता और सुरक्षा को सर्वोपरि रखा।
शिक्षा के क्षेत्र में भी डॉ. मुखर्जी ने अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने उच्च शिक्षा को भारतीय संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि देश की युवा पीढ़ी अपने सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आधुनिक ज्ञान प्राप्त कर सके। आज नई शिक्षा नीति में भी उनके विचारों की परछाई मिलती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाएं प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, तीन तलाक विरोधी कानून, डॉ. मुखर्जी के सामाजिक दृष्टिकोण और राष्ट्रहित के विचारों का प्रतिफल हैं। ये योजनाएं देश के गरीब और पिछड़े तबकों को सशक्त बनाने का प्रयास करती हैं, जिसका डॉ. मुखर्जी ने सदैव समर्थन किया था।

डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी भारत के महान राष्ट्रवादी नेता थे, जिनका जीवन देशभक्ति और समर्पण की मिसाल है। वे पद, प्रतिष्ठा या स्वार्थ से ऊपर उठकर केवल देश की सेवा में लगे रहे। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा राष्ट्रवाद केवल सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि सिद्धांतों और न्याय के लिए निरंतर संघर्ष है। आज जब भारत 2047 में स्वावलंबी और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है, तब उनकी शिक्षाएं और भी प्रासंगिक हो जाती हैं। डॉ. मुखर्जी का आदर्श और बलिदान हमारे लिए एक अमर प्रेरणा हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को एकजुट, मजबूत और आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए प्रेरित करते रहेंगे। (विनायक फीचर्स) (लेखक मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष व बैतूल विधायक हैं।)