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मनोज सिन्हा के साथ “भयमुक्त कश्मीर” कार्यक्रम कर कैलाश मासूम ने रचा इतिहास

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पहलगाम की घटना के बाद जम्मू और कश्मीर में भय का माहौल व्याप्त हो गया था जिसके कारण पर्यटक और अन्य लोग भी वहाँ जाने से डरने लगे हैं जिसके कारण स्थानीय लोगों को रोज़गार की समस्या पैदा होने लगी है तथा वहाँ के पर्यटन को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है ऐसे माहौल में बुद्धांजलि रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष कैलाश कुमार मासूम द्वारा श्रीनगर में “भयमुक्त कश्मीर “ का आयोजन करना काबिले तारीफ़ माना जा रहा है!


भयमुक्त कश्मीर के इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर जम्मू और कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी कैलाश मासूम की जमकर प्रशंसा की और इस अवसर पर आए देश भर की प्रतिभाओं और खासतौर से जम्मू और कश्मीर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और अन्य क्षेत्र से जुड़ी प्रतिभाओं को भारत रत्न डॉ. अंबेडकर अवॉर्ड्स तथा इंटरनेशनल बुद्धा पीस अवार्ड से सम्मानित किया!

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले और पूर्व लोक सभा सांसद नीलम सोनकर भी मौजूद थी !
कैलाश मासूम ने कहा कि जम्मू और कश्मीर में इस तरह का यह पहला कार्यक्रम है, जिसमें सैकड़ों लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया! हमें उम्मीद है कि भयमुक्त कश्मीर का यह कार्यक्रम लोगों को यहाँ आने के लिए प्रेरित करेगा और फिर से यहाँ पर्यटकों की बहार आएगी !

“भयमुक्त कश्मीर” तथा “कश्मीर हमारा, हम कश्मीर के” अभियान के तहत हुआ यह गरिमामयी कार्यक्रम बहुत ही सफल और भव्य माना जा रहा है! इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सीआईएसबी के मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्ण पिम्पले तथा फिल्ममेकर दासबाबू जायसवाल की भी अहम भूमिका रही!

Jaipur: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने “गौ-महाकुंभ 2025” में लिया भाग , साथ में है विश्वशांति दूत गुरु श्री आचार्य लोकेश मुनि जी

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”’ राज्यपाल ने देवरहा बाबा की स्मृति को नमन करते हुए कहा कि वह महान योगी, सिद्ध तो थे ही, गोसेवा को सर्वोपरि-धर्म मानते थे। वह कहते थे, ‘जीवन को पवित्र बनाए बिना, ईमानदारी, सात्विकता-सरसता के बिना भगवान की कृपा प्राप्त नहीं होती। गो सेवा इसका सबसे बड़ा माध्यम है। राज्यपाल ने कहा कि महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म कहते हैं कि गाय हमारी माता है और बैल हमारे पिता हैं। वेदों में सूर्य की एक किरण का नाम कपिला है।
उन्होंने गोपाष्टमी पर्व मनाने, श्री कृष्ण का धेनु से नाता बताते हुए कहा कि गो ने भगवान का अभिषेक किया, उसी दिन से भगवान का एक नाम ‘गोविंद’ पड़ा। गाय विश्वरूपा है। वह अखिल ब्रह्माण्ड का प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए गाय संरक्षण के लिए सबको मिलकर कार्य करना चाहिए। बागडे ने “गो-महाकुम्भ 2025″ में गाय के उत्पादों की लगी प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए गो उत्पादों के प्रभावी विपणन के लिए भी कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने इस अवसर पर गाय का पूजन किया और गो संस्कृति के लिए समर्पित होने की आवश्यकता जताई। ” 

Jaipur – राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि भारतीय संस्कृति गो संस्कृति है। संस्कृति में गो शब्द लग जाता है तो इसका अर्थ है-श्रद्धा के साथ अर्थव्यवस्था का जुड़ना। ऐसी अर्थव्यवस्था से ही सतत् और संतुलित विकास होता है। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए गाय को केन्द्र में रखकर उसके उत्पादों से जन-जन को जोड़े जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गो धन संरक्षण के लिए गौशालाओं की स्थापना संग नंदी शालाएं भी स्थापित की जाए।

इस गौ महाकुंभ में विशेषतौर पर विश्वशांति दूत जैन संत मुनिवर आचार्य लोकेश मुनि जी की भागीदारी ने कार्यक्रम को और गरिमा प्रदान की है। इसके प्रमुख आयोजक भरत राजपुरोहित है। जिन्होंने इसका आयोजन किया।

राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे जी ने “गौ-महाकुम्भ 2025” में गौ उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए उनके के प्रभावी विपणन के लिए कार्य करने पर जोर दिया और कहा कि गाय विश्वरूपा है, वह अखिल ब्रह्माण्ड का प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए गौ संरक्षण के लिए सबको मिलकर कार्य करना चाहिए।

गौ संरक्षण स्क्वायड टीम की रिवीजन खारिज जिम ट्रेनर वसीम मौत केस पर आया नया मोड

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रुड़की: हरिद्वार जिले के रुड़की में जिम ट्रेनर वसीम उर्फ मोनू की मौत के सनसनीखेज मामले में अब नया मोड आ गया है. इस मामले में एडीजे कोर्ट ने प्राथमिकता दर्ज करने पर लगी रोक को हटाते हुए गौ संरक्षण स्क्वायड टीम के रिवीजन को खारिज कर दिया है. जिम ट्रेनर पर आरोप था कि वो प्रतिबंधित मांस लेकर जा रहा था और गौ संरक्षण स्क्वायड की टीम को देखकर जान बचाने के लिए माधोपुर गांव के तालाब में कूद गया था, जिससे तालाब में डूबकर उसकी मौत हो गई थी.

बता दें कि बीती 24-25 अगस्त 2024 को सोहलपुर गाड़ा गांव निवासी जिम ट्रेनर वसीम उर्फ मोनू की माधोपुर गांव के तालाब में डूबने से मौत हो गई थी. जिसके बाद वसीम के परिजनों ने सुनियोजित तरीके से उसकी हत्या करने का आरोप लगाते हुए गौ संरक्षण स्क्वायड टीम को इसका जिम्मेदार ठहराया था. वहीं, परिजनों का आरोप था कि करीब एक साल बीत जाने के बाद भी गौ स्क्वायड की टीम पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया था, जिसको लेकर मृतक वसीम के चचेरे भाई ने कोर्ट का सहारा लिया था.

इसके बाद सीजेएम कोर्ट ने वसीम के चचेरे भाई के प्रार्थना पत्र पर 3 नामजद उपनिरीक्षक शरद सिंह, कांस्टेबल सुनील सैनी, कांस्टेबल प्रवीण सैनी समेत अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ 24 घंटों के भीतर गंगनहर कोतवाली पुलिस को संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे. इसके साथ कोर्ट ने हरिद्वार एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल को इस सनसनीखेज प्रकरण की सीओ रैंक के अधिकारी से निष्पक्ष जांच करने के आदेश भी दिए थे.

उधर, सीजेएम कोर्ट आदेश के खिलाफ सब इंस्पेक्टर शरद सिंह ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरिद्वार की कोर्ट में प्राथमिकी दर्ज न करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया. जिसके बाद सुनवाई करते हुए सीजेएम कोर्ट के आदेश पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरिद्वार की कोर्ट ने अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी थी. हालांकि, अब इस मामले में नया मोड सामने आ गया है.

गौ संरक्षण स्क्वायड टीम की रिवीजन खारिज: दरअसल, इस मामले में गुरुवार यानी 4 सितंबर 2025 को हरिद्वार एडीजे कोर्ट तृतीय राकेश कुमार सिंह की अदालत में मामले की सुनवाई हुई. जिसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं. वहीं, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एडीजे कोर्ट राकेश कुमार सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद गौ संरक्षण स्क्वायड टीम के रिवीजन को खारिज कर दिया. इस बार भी वरिष्ठ अधिवक्ता सज्जाद अहमद की ठोस पैरवी के चलते कोर्ट ने गौ स्क्वायड टीम की रिवीजन को खारिज कर दिया.

पुलिसकर्मियों पर परिजनों ने लगाया था तालाब में डुबोकर मारने का आरोप: गौर हो कि रुड़की गंगनहर कोतवाली क्षेत्र के माधोपुर गांव स्थित एक तालाब में डूबने के कारण सोहलपुर गाड़ा गांव निवासी जिम ट्रेनर वसीम उर्फ मोनू की मौत हुई थी. जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया था. वसीम की मौत के बाद उसके परिजनों ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मियों ने वसीम को तालाब में डुबोकर मार डाला है. हालांकि, पुलिस के अनुसार वो प्रतिबंधित मांस की तस्करी कर रहा था.

चेकिंग के दौरान रोकने पर गिरफ्तारी से बचने के लिए वसीम तालाब में कूद गया, जिससे वसीम की डूबने से मौत हो गई. वहीं, जिम ट्रेनर वसीम उर्फ मोनू की तालाब में डूबने से हुई मौत मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत कांग्रेस अन्य पार्टी के नेता भी उसके गांव पहुंचे थे. साथ ही हरीश रावत ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर धरना दिया था. इस दौरान उन्होंने मामले में सीबीआई जांच की भी मांग की थी.

एआरटी फर्टिलिटी क्लिनीक्स इंडिया अत्याधुनिक तकनीक और स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ आईवीएफ परिदृश्य को बदलने के लिए तैयार

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इंडस्ट्री-लीडिंग फर्टिलिटी चेन ने पेश किया अनोखा, निशुल्क डिजिटल अनुभव – लाइव योग सेशन्स, एक्सपर्ट वेबिनार्स और चुनिंदा मरीजों के लिए अत्याधुनिक एम्ब्रियोलॉजी लैब का दौरा

मुंबई। भारत के अग्रणी आईवीएफ और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट प्रोवाइडर, एआरटी फर्टिलिटी क्लीनिक्स इंडिया, ने अपने नई वेबसाइट के साथ एक इनोवेटिव और निशुल्क “फिजिटल” अनुभवों का पैकेज लॉन्च करने की घोषणा की है। यह प्लेटफॉर्म डिजिटल और इन-पर्सन सेवाओं का संगम है, जो भावी माता-पिता की हर कदम पर मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह प्लेटफॉर्म देश में फर्टिलिटी केयर की दशा-दिशा बदलने के लिए तैयार है।

क्लिनिक अब हर शनिवार को चयनित दंपतियों के लिए निःशुल्क लैब विज़िट्स आयोजित करेगा, जहां वे अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षित प्रक्रियाओं को स्वयं देख सकेंगे, जो उनके भविष्य के एम्ब्रियो की रक्षा करती हैं। इन शैक्षिक दौरों का उद्देश्य आरआई विटनेस टेक्नोलॉजी को समझाना है, जो एम्ब्रियो की पहचान और ट्रैकिंग में पारदर्शिता और विश्वास सुनिश्चित करती है। इस प्रक्रिया से आईवीएफ को लेकर भ्रांतियां दूर होंगी और दंपतियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। अंडाणु संग्रह से लेकर ट्रांसफर और एम्ब्रियो रिट्रीवल तक हर कदम पर दिखाई जाने वाली सटीकता, सुरक्षा और स्वच्छता—क्लिनिक की मेडिकल विशेषज्ञता और हॉलिस्टिक केयर दृष्टिकोण का प्रमाण है। यही वजह है कि एआरटी फर्टिलिटी क्लीनिक्स लगातार भारत में सबसे ऊंचे लाइव बर्थ रेट्स दर्ज कर रहा है।

पेशेंट एक्सपीरियंस के लॉन्च के अवसर परएआरटी फर्टिलिटी क्लीनिक्स इंडिया की रीजनल हेड गुरसिमरन कौर ने कहा,“अपनी स्थापना से ही एआरटी फर्टिलिटी क्लीनिक्स इंडिया ने पेशेंट-फर्स्ट अप्रौच को अपनाया है। यह हमारे मिशन को भी दर्शाता है—जो दुनियाभर की शीर्ष स्तर की फर्टिलिटी केयर को भारत में सभी के लिए सहज और सुलभ बनाने की दिशा में काम कर रहा है। हमारी नई वेबसाइट इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। पेरेंटहुड का निर्णय अक्सर जटिल और चुनौतीपूर्ण होता है। हमारा लक्ष्य है इसे सरल, किफायती और सुलभ बनाना। हम केवल चिकित्सा सेवाएं नहीं दे रहे, बल्कि शिक्षा, तकनीक और संपूर्ण सपोर्ट इकोसिस्टम उपलब्ध करा रहे हैं। हमारा उद्देश्य है अज्ञानता को दूर करना और हर कदम पर भावी माता-पिता का हाथ थामना, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रजनन देखभाल का चुनाव कर सकें।”

यह डेवलपमेंट भारत भर के दम्पतियों के लिए विशेषज्ञ प्रजनन देखभाल को अधिक सुलभ, किफायती और प्रासंगिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे माता-पिता बनना कम कठिन लगता है। इस अनूठे अनुभव के तहत, एआरटी फर्टिलिटी क्लीनिक्स इंडिया हर शनिवार को लाइव ऑनलाइन प्रजनन योग सेशन प्रदान करेगा। सभी प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क उपलब्ध, ये सेशन सौम्य आसनों, श्वास तकनीकों और ध्यान अभ्यासों पर केंद्रित होंगे जो प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और इमोशनल और फिजिकल वेलनेस के लिए सिद्ध हैं। इसके अलावा, हर शुक्रवार को आईवीएफ एक्सपर्ट्स के साथ निःशुल्क एक्सपर्ट वेबिनार भी आयोजित किए जाएँगे, जिससे नए मरीज लागत या जटिलता जैसी पारंपरिक बाधाओं के बिना फर्टिलिटी केयर से संबंधित अपनी शंकाओं और प्रश्नों के बारे में टॉप एक्सपर्ट्स से जुड़ सकेंगे।

अपनी निःशुल्क सेवाओं के साथ, एआरटी फर्टिलिटी क्लीनिक्स इंडिया केवल ₹1,199 से शुरू होने वाले व्यापक कपल फर्टिलिटी स्क्रीनिंग पैकेज भी पेश कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आर्थिक बाधाएँ दम्पतियों को आवश्यक डायग्नोस्टिक सर्विसेस तक पहुँचने से कभी न रोक पाएँ।

एआरटी फर्टिलिटी क्लीनिक्स इंडिया की व्यापक सेवाओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए, https://artfertilityclinics.in/ पर जाएँ या सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर @artfertilityclinicsindia को फ़ॉलो करें।

बनारस कोकिला की उपाधि प्राप्त कर चुकी है सुरभि सिंह

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गायिका सुरभि सिंह ने अब तक 1000 से अधिक गाने गाए हैं, 50 से अधिक म्यूज़िक वीडियो सॉन्ग्स और ढेरों लाइव शो देश और विदेशों में कर चुकी हैं। खासकर अफ्रीका, दुबई, कंबोडिया और भारत भर में उनके लाइव शो होते रहते हैं।

सुरभि ने सबसे पहले बप्पी लहरी के संगीत निर्देशन में फिल्म राष्ट्रपुत्र से बॉलीवुड में गायन की शुरुआत की और हाल ही में भुज- द प्राइड ऑफ इंडिया और सीरीज़ ऑड कपल में उनके गाने आए हैं। वह यशराज कंपनी की आने वाली फिल्म में गाना गाने वाली हैं। उनके कुछ और गाने भी रिलीज़ होंगे।

वह एक बेहतरीन बैडमिंटन प्लेयर रही हैं, मगर उन्होंने सिंगिंग को अपना करियर चुना। ‘बनारस कोकिला’ नाम से उन्हें उपाधि मिली है। ईटीवी उत्तर प्रदेश के रियलिटी शो फोक जलवा की वह विनर रह चुकी हैं। हिंदी, मराठी, पंजाबी जैसी कई भाषाओं में वह गायन कर चुकी हैं और आगे भी गाती रहेंगी।

सुरभि ने बताया कि वह बतौर गायक मंज़िल के इस पड़ाव तक कैसे पहुँचीं। वह वाराणसी की रहने वाली हैं और उनकी प्रारंभिक शिक्षा भी वहीं हुई है। बचपन से ही उन्हें गाने का शौक रहा। जब वह लता, रफ़ी और अनूप जलोटा जैसे दिग्गज गायकों के गीत सुनती, तो स्वतः ही गाने लगती। स्कूल प्रोग्राम में भी वह गायन में भाग लेती और उनकी इस कला को खूब सराहा जाता, जिससे उनका यह शौक जुनून बन गया।

बचपन में ही उन्हें दूरदर्शन में बच्चों के सीरियल के लिए गाने का मौका मिला। उसके बाद आकाशवाणी में गाने का अवसर मिला, जिसके लिए आकाशवाणी की परीक्षा भी पास की। उन्होंने क्लासिकल गीत-संगीत सीखा और महात्मा गांधी विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, प्रयागराज से संगीत में उपाधि प्राप्त की।

साल 2005 में उन्हें उदित नारायण के साथ मुंबई में पहला शो करने का अवसर मिला और फिर वह यहीं रह गईं। इसके बाद मुंबई में बतौर सिंगर अपने करियर पर पूरी तरह फोकस करना शुरू किया।

उनका कहना है कि प्रत्येक माता-पिता को अपने बच्चों के करियर पर फोकस तो करना चाहिए, मगर बच्चों पर दबाव नहीं डालना चाहिए। उन्हें मार्गदर्शन दें, परंतु करियर का चुनाव उनके स्किल या सपनों के हिसाब से उन्हें स्वयं करने दें। क्योंकि जिसमें उनका शौक होगा, वह काम वे लगन से करेंगे। जबरदस्ती से किए गए चुनाव में वे खुद को बंधा हुआ महसूस करेंगे, जो उनकी सफलता और जीवन दोनों के लिए कष्टप्रद होगा।

पढ़ाई के दौरान ही अभिनय करने लग गई थी सुचंद्रा एक्स वानिया

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बंगाल फिल्म इंडस्ट्री में अपनी कला से दर्शकों को प्रभावित करने वाली अभिनेत्री सुचंद्रा एक्स वानिया ने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन और फिल्म निर्माण में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी खुद की वानिया ग्रुप ऑफ कंपनी है जिसके बैनर तले फिल्मों का निर्माण होता है। बतौर अभिनेत्री उन्होंने कई बंगाली फिल्मों, वेब सीरीज़ और शॉर्ट फिल्मों में काम किया है जिनमें डाइट (हॉटस्टार), पथ जदि ना सेश होय (क्लिक्क), बालुकाबेला.कॉम (ज़ी5), बोंकु बाबु (ज़ी5), जमाई बोरन, नॉट अ डर्टी फिल्म (क्लिक्क), चोतुष्कोण (प्राइम वीडियो), कंडीशन्स अप्लाई (प्राइम वीडियो), कोलकाताय कोलंबस (सोनी लिव), नीलाचले किरीटी, सूर्यो पृथिबीर चारिदिके घोरे और पूरब पश्चिम दक्षिण उत्तर आशबेई प्रमुख हैं।

निर्देशन में उन्होंने सबसे पहले अपने प्रोडक्शन की फिल्म पूरब पश्चिम दक्षिण उत्तर आशबेई का क्रिएटिव डायरेक्शन किया, जो एक बड़े बजट की बंगाली स्पिरिचुअल थ्रिलर फिल्म थी और बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। इसके बाद उन्होंने सूर्पनखा आगोमोन (The Arrival of Shurpanakha) का निर्देशन किया। यह फिल्म 2022 में कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में चुनी गई और अलग-अलग कैटेगरी में 10 से भी अधिक पुरस्कार जीत चुकी है। 17 मिनट की इस शॉर्ट फिल्म में माता सीता और शूर्पणखा के संवाद और भावनाओं को दिखाया गया है। इसकी शूटिंग पुरुलिया और बांकुड़ा जिलों में हुई और इसमें छाऊ कलाकारों, आदिवासी और नए कलाकारों को अवसर दिया गया।

सुचंद्रा एक्स वानिया ने निर्देशन की पढ़ाई न्यूयॉर्क फिल्म अकेडमी से की है और सुजीत रॉय इंस्टीट्यूट से निर्देशन की बारीकियों को भी सीखा है। वर्तमान में वह बंगला प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ दो हिंदी फिल्मों पर काम कर रही हैं। इनमें से एक का नाम द गरुणा है जो रहस्य, रोमांच, प्राचीन इतिहास, दंतकथाओं और मायथोलॉजी से जुड़ी संदेशात्मक कहानी है। इस फिल्म की शूटिंग अक्टूबर से शुरू होगी।

दक्षिण कोलकाता की पृष्ठभूमि से आने वाली सुचंद्रा को बचपन से ही कला और फिल्म निर्माण का वातावरण मिला। उनके पिता को फोटोग्राफी का शौक था और उनके आसपास फिल्म और स्क्रिप्ट पर चर्चाएँ होती थीं। बारहवीं कक्षा के दौरान उन्होंने एक शॉर्ट फिल्म में अभिनय किया और वहीं एक निर्देशक ने उन्हें देखा और अपनी फिल्म का हिस्सा बनाया जहाँ से उनके फिल्मी कैरियर की शुरुआत हुई। हालांकि वह पहले अभिनेत्री बनना चाहती थीं, लेकिन निर्देशन और फिल्म निर्माण की इच्छा हमेशा उनके मन में रही।

आज सुचंद्रा एक्स वानिया बतौर अभिनेत्री और निर्देशक कई पुरस्कारों से सम्मानित हैं। वह समाज सेवा में भी सक्रिय रहती हैं और गरीबों व ज़रूरतमंदों की सहायता करती हैं। उनका मानना है कि फिल्मों में मनोरंजन के साथ संस्कृति, इतिहास और परंपरा का समावेश होना चाहिए ताकि सिनेमा के माध्यम से लोगों को नई और वास्तविक जानकारियाँ मिलें।

सुचंद्रा एक्स वानिया कहने से ज़्यादा करने में विश्वास रखती हैं। उनका कहना है कि अभी तो सफर की शुरुआत है, मंज़िल तक पहुँचना बाकी है और वहाँ वे अपने स्वाभिमान और शर्तों के साथ पहुँचेंगी। फिलहाल वह अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं।

गाइए गणपति जगवंदन, शंकर सुवन भवानी के नंदन

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(पवन वर्मा – विभूति फीचर्स)

हमारे लोकजीवन, लोकाचार और लोकसाहित्य में गणेशजी को मंगलदाता एवं विघ्न-विनाशक के रूप में स्मरण किया जाता है। मंगलमूर्ति गणेशजी हमारे लोकजीवन में पूर्णरूप से रमे हुए हैं। सर्वपूज्य, परम पूज्य और कुशलता के प्रतीक हैं। वे समस्त ऋद्धियों और सिद्धियों के दाता हैं। मोदकप्रिय होने से उन्हें ‘मोदकप्रिय मुद मंगलदाता’ कहा गया है। लोकजीवन में गणेशजी इतने समाविष्ट हैं कि हम कोई भी कार्य को प्रारंभ करने के लिए ‘श्री गणेश कीजिये’ कहते हैं। ‘श्री गणेश करना’ एक मुहावरा बन गया है। यात्रा पर जाते समय ‘जय सिद्धि गणेश’ कहते हैं और गणेशजी हमारी यात्रा मंगलमय करते हैं। गृहप्रवेश, विद्या आरंभ करते समय गणेशजी का स्मरण, पूजन और अर्चना की जाती है, उनकी स्थापना की जाती है।

ऐसा लोकविश्वास है कि गणेशजी की पूजा करने से हमारी समस्त विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। अत: अनेक शुभकारी नामों को धारण करने वाले गजानन गणेश के पूजन की परम्परा भारतीय लोकजीवन में सनातन और अखंड है। समाज में, परिवार में या मंदिरों में उनकी पूजा-अर्चना को मांगलिकता का प्रतीक माना जाता है। यह लोकमान्यता है कि वह शीघ्र शुभ फलदाता देवता हैं और उनके दर्शन मात्र से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। अत: पर्वो, समारोहों, सहभोजों, यात्रागमन आदि अवसरों पर प्रथम पूज्य गणेशजी की पूजा-अर्चना की जाती है। यद्यपि दीपावली पर लक्ष्मीजी की पूजा का विधान है, लेकिन शुभ और लाभ के दाता तो गणेशजी ही हैं, अत: लक्ष्मीजी के साथ गणेशजी की मूर्ति मिलती है तथा युगलमूर्ति की पूजा की जाती है। संस्कार समारोहों में जहां माता गौरी की स्थापना की जाती है, वहीं जलभरे कलश या मंगल कलश में गणेशजी की प्रतिमा रखी जाती है। यह प्रतिमा मिट्टी या गौ के गोबर से बनायी जाती है। इस प्रकार गौरी-गणेश पूजन के बाद ही मंगल कार्य सम्पन्न किया जाता है। विद्या आरंभ करते समय बालक से ‘श्री गणेशाय नम:’ लिखवाया जाता है। सेठ-साहूकार अपने बहीखातों में भी प्रारंभ में ‘श्री गणेशाय नम:’ लिखते हैं।

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पावन पर्व गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश में उसे ‘बहुल चौथ’ के रूप में मनाया जाता है। अवधी भाषा में बहुरा या बहुला का अभिप्राय: ‘गया हुआ’ होता है, अर्थात जिसके आने की उम्मीद न हो। गणेशजी की उत्पत्ति भी इसी प्रकार हुई थी। उनका सिर कट गया था और फिर हाथी का सिर लगाये जाने पर पुनर्जीवित हुए। लोकमानस ने इस पर्व का नाम इस प्रकार रखकर गणेश जन्म के पौराणिक तथ्य को सहजता से निरूपित किया है। स्कंदपुराण में श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर संवाद के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी की विशेष महिमा है। उस दिन की आराधना से गणेशजी अपने आराधकों के समस्त कार्यकलापों में सिद्धि प्रदान करते हैं।

अत: उनका नाम ‘सिद्धि-विनायक’ हो गया है-
सिद्धियन्ति सर्व कार्यणि मनसा चिन्तिातन्यपि।
तेन ख्याति गतो लोके, नाम्ना सिद्धि विनायक॥
महात्मा तुलसीदास जी कृत गणेश स्तुति तो समस्त जनजीवन में व्याप्त है।
गाइए गणपति जगवंदन, शंकर सुवन भवानी के नंदन।
सिद्धि सदन गजवदन विनायक, कृपा सिन्धु सुंदर सब लायक।

गणेशजी पांच तत्वों से समन्वित रूप हैं। ये पांच तत्व हैं- पराक्रम, आनंद, बुद्धि, कृषि और व्यवसाय। नेतृत्व के गुणों के कारण उन्हें गणपति, गणाधिपति, गणधिप, गणेश आदि नामों से पुकारा जाता है। उनका दूसरा रूप विघ्नहर्ता और मंगलदाता है। वे बुद्धि के निधान और पराक्रम के पुंज हैं। बुद्धिबल से ही वे विश्व में प्रथम पूज्य हैं। वे जल तत्व के अधपति हैं और जल ही जीवन हुआ करता है। अत: लोकजीवन में उनकी महान प्रतिष्ठा है। वाणिज्य व्यवसाय के प्रबंधन के रूप में उनकी मान्यता है, इसीलिए वणिक व्यवसाय के लोग उन्हें अधिक पूजते हैं
गणेशजी की पूजा न केवल भारत में प्रचलित हैं, बल्कि पड़ोसी देशों में, अतिरिक्त सुदूर देशों में भी समान रूप से प्रचलित है। गणेशोत्सव इसीलिए हमारे देश के जनगण की धार्मिक आस्था का प्रतीक है। गणपति सर्वाधिक लोकमान्य और सर्वप्रिय देवता हैं। वे सर्व सुखदाता-दुखहर्ता, सांसारिक सम्पदा देने वाले हैं। वे समाज का नेतृत्व करने वाले कुशल संगठक तथा महासेनापति भी हैं। पौराणिक युग में गण के नाम से जाने जाते समाज के विभिन्न बिखरे हुए हिस्सों को एकत्र कर उनमें एकता का गणेशजी ने सफल प्रयास किया। श्री गणेशजी हमारे सामाजिक संगठन और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक-पुरुष रहे हैं।

श्री गणेशजी हमारे आद्यदेव और सर्वमान्य गणनायक के रूप में हमेशा पूज्य और प्रतिष्छित रहे हैं। लोकमान्य तिलक ने गणेशजी की सामाजिक महत्ता को पहचानकर और गणेश पूजा को व्यापक रूप देकर राष्ट्रीय चेतना जगाने का सफल प्रयास किया। उन्होंने गणेशोत्सव को सामाजिक और राष्ट्रीय संदर्भों से जोड़ा। ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष से सारा राष्ट्र गुंजायमान हो जाता हैं। गणेशोत्सव पर सांस्कृतिक आयोजनों से हमें राष्ट्र की अखंडता, एकता और प्रभुता सम्पन्न गणराज्य की समृद्धि से अभिवृद्धि करने की प्रेरणा मिलती है। मंगलमूर्ति गणेश हमारे लोकजीवन में समन्वय के प्रतीक हैं। वे हमारे दैनिक जीवन के आस्था-विश्वासों में इतने घुल-मिल गये हैं कि मंगलदायक गणेशजी के प्रति हमारी श्रद्धाभक्ति अनन्यता की सीमा लांघ चुकी है। आद्यकवि वाल्मीकि जी ने गणेशजी का स्तवन इस प्रकार किया है- हे गणेश्वर। आप चौंसठ कोटि विद्याओं के दाता हैं, ज्ञाता हैं। देवताओं के आचार्य बृहस्पति को भी विद्या प्रदान करने वाले हैं। कठोपनिषद् रूपी अभीष्ठ विद्या के दाता हैं। आप विघ्नराज हैं, विघ्ननाशक हैं। आप गजानन हैं, वेदों के सारतत्व हैं। असुरों का संहार करने वाले हैं।

इस प्रकार हमारे लोकाचार से लेकर लोक व्यवहार में श्री गणेशजी समाहित हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराण में लोकदेवता गणेशजी की स्तुति में कहा गया है- ‘जो परमधाम, परमब्रह्म, परेश, परमेश्वर, विघ्नों के विनाशक, शान्त, पुष्ट, मनोहर एवं सुर-असुर और सिद्ध जिनका स्तवन करते हैं, जो देवरूपी कमल के लिए सूर्य और मंगल के समान हैं, उन पर परात्पर गणेश की मैं स्तुति करता हूं।’ (विभूति फीचर्स)

गौ हत्या पर बिलासपुर में बवाल

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CG Crime: बिल्हा नगर पंचायत के वार्ड 11 में गौहत्या की सूचना पर पहुंचे गोसेवकों पर अचानक हमला हो गया। बुधवार को हुई इस घटना में महिलाएं भी शामिल थीं। इस हमले में एक महिला समेत चार लोग घायल हुए, जिनमें एक की हालत गंभीर है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया और पुलिस बल तैनात कर दिया है।

जानकारी के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ता और गोसेवक आकांक्षा कौशिक को जानकारी मिली थी कि उडिय़ा मोहल्ले में लंबे समय से बूचडख़ाना चल रहा है। इसकी पुष्टि करने वह दोपहर लगभग 2 बजे शत्रुघ्न राजपूत, राहुल यादव, सिद्धार्थ शर्मा, कान्हा कौशिक और जीतू के साथ मौके पर पहुंचीं। तो महिलाओं समेत मोहल्ले के लोगों ने अचानक हमला कर दिया। हमले में आकांक्षा सहित चार लोग घायल हो गए। राहुल यादव की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे रायपुर रेफर किया गया है। बाकी घायलों को बिलासपुर सिम्स में भर्ती कराया गया है।

बिल्हा क्षेत्र के उडिय़ा मोहल्ले में गौ हत्या और मारपीट की शिकायत मिली है। मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। आरोपियों की तलाश जारी है।-अनुज कुमार, एएसपी

कोर्ट ने कहा है कि गाय पूजनीय है और उसके वध से शांति भंग हो सकती है

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Rajasthan News: राजस्थान और हरियाणा की सीमा पर गौतस्करी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गौतस्करी के एक आरोपी को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करते हुए एक बड़ा और सख्त संदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि गाय का एक ‘विशिष्ट दर्जा’ है और उसके वध से किसी बड़ी आबादी की आस्था को ठेस पहुंचती है, जिससे शांति भंग हो सकती है.

यह मामला हरियाणा के नूंह जिले का है, जहां आसिफ नाम के आरोपी पर इस साल अप्रैल में गायों को वध के लिए राजस्थान ले जाने का आरोप लगा था. आसिफ और उसके दो साथियों पर हरियाणा गोवंश संरक्षण एवं गोसंवर्धन अधिनियम, 2015 और क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत केस दर्ज किया गया था. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने आसिफ की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है.

‘गाय हमारी आस्था का प्रतीक’

जस्टिस संदीप मौदगिल ने अपने फैसले में सिर्फ कानूनी पहलुओं पर ही बात नहीं की, बल्कि भारतीय समाज में गाय की स्थिति को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा, ‘यह अदालत इस तथ्य से अनभिज्ञ नहीं रह सकती कि हमारे जैसे बहुलवादी समाज में कुछ कृत्य जो वैसे तो निजी होते हैं लेकिन तब सार्वजनिक शांति पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं जब वे किसी बड़ी आबादी वाले समूह की गहरी आस्थाओं को ठेस पहुंचाते हैं.’ कोर्ट ने साफ कहा कि गाय न सिर्फ पूजनीय है, बल्कि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न अंग भी है. इस तरह के अपराध, खासकर जब बार-बार किए जाते हैं, तो यह संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) और सामाजिक व्यवस्था की मूल भावना पर सीधा हमला है.

क्यों खास है ये फैसला?

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में गौतस्करी के बढ़ते मामलों को देखते हुए आया है. इन राज्यों की सीमाएं अक्सर गौतस्करों का गढ़ बन जाती हैं. इस मामले में भी आरोपी गायों को हरियाणा से राजस्थान ले जा रहा था, जो दिखाता है कि गौतस्करी का नेटवर्क अंतर-राज्यीय है. सरकारी वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि आरोपी आसिफ पहले भी ऐसे ही मामलों में शामिल रहा है और उसे पहले भी जमानत मिली थी, जिसका उसने दुरुपयोग किया. कोर्ट ने भी इस बात पर गौर किया कि आसिफ पर इसी तरह के तीन और मामले दर्ज हैं. कोर्ट ने साफ कहा कि उन निर्दोष लोगों के लिए होती है, जिन्हें जानबूझकर फंसाया जाता है, न कि उन लोगों के लिए जो बार-बार कानून का उल्लंघन करते हैं.

संवैधानिक नैतिकता पर भी दिया जोर

न्यायालय ने अपने आदेश में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51ए(जी) (Article 51A(G)) का भी जिक्र किया, जिसके तहत हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह सभी जीवित प्राणियों के प्रति करुणा दिखाए. इस संदर्भ में, कोर्ट ने कहा कि गोहत्या (Cow Slaughter) का कार्य, जिसे बार-बार और जानबूझकर अंजाम दिया गया, हमारे संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है.

शिवगंज में हिट एंड रन मामला: गौ सेवकों पर कार चढ़ाई

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सिरोही: जिले के शिवगंज से चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां गोवंश को बचाने के लिए रेस्क्यू कार्य में जुटे गौ सेवकों पर एक तेज रफ्तार कार ने चढ़ाई कर दी. हादसा इतना भीषण था कि मौके पर हड़कंप मच गया. इस घटना में तीन गौ सेवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से दो की हालत नाजुक बताई जा रही है. स्थानीय लोगों और गौसेवा कार्यकर्ताओं ने घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें उच्च स्तरीय इलाज के लिए रेफर कर दिया गया. हादसे के तुरंत बाद कार चालक मौके से फरार हो गया.

शिवगंज थानाधिकारी बाबूलाल राणा ने बताया कि पुलिस ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपी चालक की पहचान कर उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके. इस घटना ने पूरे क्षेत्र में रोष और आक्रोश का माहौल खड़ा कर दिया है स्थानीय निवासियों और गौ सेवकों का कहना है कि जो लोग निस्वार्थ भाव से गोवंश की सेवा और उनके जीवन को बचाने में लगे रहते हैं, उन पर इस तरह का हमला बेहद शर्मनाक और निंदनीय है. घटना के बाद से ही शिवगंज और आसपास के इलाकों में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. गौ सेवा संस्थाओं ने भी प्रशासन से मांग की है कि दोषी चालक को जल्द से जल्द पकड़कर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. स्थानीय प्रशासन ने घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और पीड़ितों के परिजनों को सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है.