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श्रद्धा से किया गया कर्म है श्राद्ध

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(विजय कुमार शर्मा -विभूति फीचर्स)

श्राद्ध की चर्चा होते ही मन में एक पारंपरिक दृश्य उभरता है – पिंडदान, तर्पण, ब्राह्मण भोज,परंतु इन कर्मों के पीछे जो भाव है, वह कहीं अधिक गहरा है। वह है श्रद्धा। श्रद्धा-जो केवल स्मृति नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार है।
श्राद्ध का मूल अर्थ है श्रद्धा से किया गया कर्म। यह कर्मकांड नहीं, एक संवेदनशील संवाद है-हमारे और हमारे पूर्वजों के बीच। यह वह क्षण है जब हम मृत्यु को केवल अंत नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक सेतु मानते हैं।
जब कोई पुत्र अपने पिता के लिए जल अर्पित करता है, तो वह जल केवल एक भौतिक अर्पण नहीं होता। वह उस पुत्र की आत्मा से निकली हुई कृतज्ञता की धारा होती है। जब कोई बेटा अपने दादा के नाम से ब्राह्मण को भोजन कराता है, तो वह भोजन केवल अन्न नहीं होता- वह स्मृति का प्रसाद होता है।
श्राद्ध में श्रद्धा होनी चाहिए। श्रद्धा नहीं तो श्राद्ध केवल एक रस्म बनकर रह जाता है और जब श्रद्धा होती है, तो श्राद्ध एक जीवंत अनुभव बन जाता है,जिसमें मृत्यु भी मौन नहीं, बल्कि संवाद करती है।

पूर्वजों की उपस्थिति: अदृश्य, पर सजीव

भारतीय परंपरा में यह विश्वास है कि पूर्वज केवल शरीर छोड़ते हैं, संबंध नहीं। वे हमारे कर्मों में, हमारे संस्कारों में, हमारी स्मृति में जीवित रहते हैं।
– जब हम श्राद्ध करते हैं, तो हम उन्हें आमंत्रित करते हैं।
– यह एक आत्मिक पुनर्मिलन है, जिसमें हम उन्हें कहते हैं- “आप गए नहीं हैं, आप हमारे भीतर हैं।”

श्राद्ध का यह भाव हमें मृत्यु के भय से मुक्त करता है। यह हमें सिखाता है कि जीवन केवल सांसों का नाम नहीं, बल्कि स्मृति और श्रद्धा का विस्तार है।

श्रद्धा: आत्मा की भाषा

श्रद्धा वह शक्ति है जो हमें हमारे मूल से जोड़ती है। यह केवल भाव नहीं, बल्कि एक आंतरिक प्रकाश है।
– यह हमें विनम्र बनाती है, क्योंकि हम जानते हैं कि हम किसी के त्याग की विरासत हैं।
– यह हमें कृतज्ञ बनाती है, क्योंकि हम समझते हैं कि जो कुछ हमें मिला है, वह किसी के तप का फल है।

श्राद्ध के माध्यम से हम उस श्रद्धा को कर्म में बदलते हैं। यह वह क्षण होता है जब धर्म, संस्कृति और आत्मा एकत्रित होते हैं।

आधुनिक संदर्भ में श्राद्ध

आज की भागदौड़ भरी दुनिया में श्राद्ध को अक्सर एक “अनिवार्य रस्म” के रूप में देखा जाता है। लोग पंडित बुलाते हैं, विधि करवाते हैं, भोज कराते हैं-परंतु श्रद्धा कहीं खो जाती है।

श्राद्ध तब ही सार्थक होता है जब वह भीतर से किया जाए, न कि केवल बाहर से।
– जब हम तर्पण करते हैं, तो वह केवल जल नहीं, बल्कि अश्रु और आत्मा का अर्पण होना चाहिए।
– जब हम मंत्र उच्चारित करते हैं, तो वह केवल ध्वनि नहीं, बल्कि भाव और भक्ति की प्रतिध्वनि होनी चाहिए।

श्राद्ध को पुनः श्रद्धा से करना ही आज की आवश्यकता है। तभी यह कर्मकांड नहीं, कर्मयोग बन सकेगा।
संतों ने सदैव कहा है-“जो गया है, वह मिटा नहीं है।” यह वाणी श्राद्ध की आत्मा है।
– जब हम श्राद्ध करते हैं, तो हम उस वाणी को जीते हैं।
– हम मृत्यु को स्वीकारते हैं, परंतु उसे वियोग नहीं, योग मानते हैं।
श्राद्ध वह अवसर है जब हम संतों की वाणी को कर्म में बदलते हैं। यह वह क्षण है जब हम अपने जीवन को धार्मिक नहीं, आध्यात्मिक बनाते हैं। (विभूति फीचर्स)

दृष्टिकोण पड़ोस की आँच पर अराजकता के सपने

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(डॉ. सुधाकर आशावादी-विनायक फीचर्स)

स्वस्थ लोकतंत्र जियो और जीने दो की अवधारणा में विश्वास करता है। वह चाहता है कि उसका पड़ोस भी खुशहाल रहे, किन्तु किसी भी राष्ट्र का प्रत्येक नागरिक स्वस्थ चिंतक हो, ऐसा कहना उचित नहीं कहा जा सकता। वैचारिक दृष्टि से हर किसी की मानसिकता राष्ट्रवाद के प्रति समर्पित नहीं होती। बहुधा अपने देश में ही बुद्धिजीवी प्रबुद्ध कहे जाने वाले विचारकों के बयान सुनें, तो लगता है, कि बिना किसी आधार के अतार्किक बयान देने में भारतीय मुंगेरीलाल अग्रणी रहना चाहते हैं।

विचारकों के भी गुट बन गए हैं, कुछ विचारकों का कार्य ही राष्ट्रविरोधी तत्वों के समर्थन में खड़े रहना है तथा भारत की विकास गति को नकारना है, साथ ही अराजक और राष्ट्र विरोधी तत्वों को भारत में उपद्रव मचाने के लिए प्रेरित करना है।

विगत वर्ष बांग्लादेश में शेख हसीना को अपदस्थ करके वहाँ के हिन्दू मंदिरों को जिस प्रकार से निशाना बनाया गया तथा हिन्दुओं की हत्याएं की गई, उस समय भारत में अराजक तत्वों के समर्थकों ने बंगलादेश के विरूद्ध कोई आवाज नहीं उठाई और न ही मानवता के विरूद्ध किये गए कृत्यों का कोई विरोध किया। ऐसे तत्व भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों के विरुद्ध भी एक शब्द नहीं बोलते। बांग्लादेशी घुसपैठियों के समर्थन में उनकी संवेदनाएं अवश्य प्रकट होती रही हैं।
बहरहाल अब यह सामान्य है कि जब जब विदेशी धरती पर हिन्दुओं के प्रति दोहरा व्यवहार किया जाता है तथा हिन्दू धर्मस्थलों पर हमले होते हैं, तब तब भारत में रहने वाले अराजक तत्व चुप्पी साध लेते हैं तथा यही कामना करते हैं कि भारत में भी अराजकता फैले। फ़िलहाल भारत के छोटे भाई कहे जाने वाले नेपाल में जिस प्रकार से उपद्रव हुए तथा वहाँ के सत्ताधीशों के विरुद्ध जनआक्रोश देखने को मिला, उससे भी भारत में रहने वाले सत्ता विरोधी अराजक तत्व काफी प्रसन्न हैं। सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणियाँ स्पष्ट संकेत दे रही हैं, कि भारत में अराजकता फ़ैलाने में विफल और हताश लोग भारत में भी नेपाल जैसी अराजकता देखना चाहते है।

भारत में रहने वाले ये अराजक तत्व खुशहाली इंडेक्स में नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान , श्रीलंका, म्यांमार और अफगानिस्तान को भारत की अपेक्षा संपन्न सिद्ध करके कई बार भारत को कमतर घोषित कर चुके हैं। इन पड़ोसी देशों में महँगाई, भुखमरी और अराजकता भारतीय अराजक तत्वों के लिए कभी चिंतन का विषय नहीं रही। ऐसे में नेपाल में युवाओं द्वारा किए गए सत्ता विरोध को देखकर अराजक तत्व यह विमर्श प्रसारित करने का प्रयास कर रहे हैं, कि भारत में भी नेपाल जैसे प्रयास हो सकते हैं। मेरा मानना है कि अराजक कौवों के कोसने से किसी का भी अनिष्ट नहीं हो सकता। भारत का आम नागरिक सत्ता से संतुष्ट है। बेरोजगारी अंतरराष्ट्रीय समस्या है। राजनीति में भ्रष्टाचारियों के दिन लद चुके हैं। वंशवादी राजनीति को देश ने अस्वीकार कर दिया है। ऐसे में भारत में अराजक तत्वों के मंसूबे पूरे होने के आसार नजर नहीं आते।

हताश विपक्ष भी अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने हेतु संघर्ष कर रहा है। अपनी प्रासंगिकता खो चुके राजनीतिक दल और उनके स्वयंभू नेता बार बार जनता की अदालत में जाते हैं, भिन्न भिन्न नारे लगाते हुए पदयात्राएं करने का नाटक रचते हैं, किन्तु निष्कर्ष में अपनी दुर्गति ही कराते हैं।

कहने का आशय यही है कि भारत में अराजकता फ़ैलाने के लिए भले ही देशी विदेशी शक्तियां सत्ता विरोधी विपक्ष के साथ मिलकर कितने ही षड्यंत्र रच लें। भारतीय जनमानस की राष्ट्रवादी विचारधारा के सम्मुख भारत में अराजकता फ़ैलाने का स्वप्न देखने वाले तत्वों के मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे। (विनायक फीचर्स)

डॉ. सुधाकर आशावादी

मुंबई में महिला कौशल विकास एक्सपो का आयोजन, गाय के गोबर से बने उत्पादों ने खींचा ध्यान

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मुंबई में महिला कौशल विकास एक्सपो का आयोजन, गाय के गोबर से बने उत्पादों ने खींचा ध्यान, जैकी श्रॉफ ने की तारीफ

मुंबई, (वार्ता)। लोढा ग्रुप और जैन वुमन ऑर्गेनाइजेशन के संयुक्त तत्वावधान में ग्रांट रोड, मुंबई में एक महिला कौशल विकास एक्सपो का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश की महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना था।

इस एक्सपो में कई संस्थाओं और कंपनियों ने अपने स्टॉल लगाए, जहाँ उन्होंने महिलाओं के लिए विभिन्न प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों की जानकारी साझा की। इस कड़ी में, गिर गौ जतन संस्था द्वारा लगाया गया स्टॉल कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण रहा। इस स्टॉल पर संस्था ने गाय के गोबर और गौमूत्र से निर्मित विभिन्न उत्पादों, जैसे कि अगरबत्ती, धूप, खाद और कीटनाशक आदि, की जानकारी दी और उन्हें बाजार में लाने के उद्देश्य से लोगों को जागरूक किया।

इस महत्वपूर्ण आयोजन में कई गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथियों में लोढा ग्रुप के संस्थापक श्री मंगल प्रभात लोढा कैबिनेट मंत्री महाराष्ट्र सरकार, जाने-माने समाजसेवी श्री बॉलीवुड कलाकार जैकी श्राफ, श्री रमेश भाई रूपारेलिया, श्रीमती मंजू जी लोढा अध्यक्ष जीवो, श्री भारत सिंह राजपुरोहित, सुश्री स्मिता जयकार और श्री अश्वनी पाटिल शामिल रहे।

सभी अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सार्थक कदम हैं।

आचार्य लोकेशजी कज़ाख़िस्तान में विश्व धर्म कांग्रेस को संबोधित करेंगे

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आचार्य लोकेशजी की रूस, यूक्रेन, इज़राइल व फिलिस्तीन के प्रतिनिधियों से युद्ध विराम पर चर्चा होगी

विश्व धर्म कांग्रेस में आचार्य लोकेश सहित 60 देशों के 100 से अधिक धर्माचार्य व जनप्रतिनिधि शामिल

नई दिल्ली 12 सितंबर 2025 : अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक कज़ाख़िस्तान में आयोजित ‘विश्व धर्म कांग्रेस’ को संबोधित करेंगे | युक्रेन-रूस, इज़राइल व फिलिस्तीन के युद्ध व विश्व में बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता के बीच विश्व के पारंपरिक धर्माचार्यों और जनप्रतिनिधियों की आठवीं कांग्रेस राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव की अध्यक्षता में “धर्मों का संवाद: भविष्य के लिए तालमेल” विषय पर आधारित 15 से 18 सितंबर तक कज़ाख़िस्तान की राजधानी आस्ताना में आयोजित हो रही है |

विश्व धर्म कांग्रेस में आचार्य लोकेश जी जैन धर्म और भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, साथ में मॉस्को के पैट्रिआर्क किरिल और अल-अजहर के ग्रैंड इमाम शेख अहमद अल-तैयब, ओआईसी के राजनीतिक मामलों के सहायक महासचिव यूसुफ अल-डोबे, विश्व बौद्ध फैलोशिप के अध्यक्ष फलोप थायरी, आदि शामिल होंगे |

विश्व शांति दूत आचार्य लोकेश जी इस दौरान युक्रेन, रूस, इज़राइल, फिलिस्तीन के प्रथिनिधियों के अलावा इस्लाम, ईसाई धर्म, बौद्ध धर्म, यहूदी धर्म, हिंदू धर्म, ताओ धर्म, पारसी धर्म के धर्माचार्यों से युद्ध विराम पर चर्चा कर विश्व शांति के लिए बैठक करेंगे | आचार्य लोकेशजी ‘डिजिटल वास्तविकता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में आध्यात्मिक मूल्य का महत्व’ समसामयिक विषय को संबोधित करेंगे।
शांतिदूत आचार्य लोकेश जी विश्व के विभिन्न देशों के जनप्रतिनिधियों और धर्माचार्यों को भारत के विश्व शांति केंद्र मे शांति व सद्भावना पर आयोजित होने वाली संगोष्ठी के लिए आमंत्रित करेंगे |

समीक्षा गोस्वामी अब साउथ के दर्शकों का दिल जीतने के लिए बेकरार

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राजस्थान के कोटा की रहने वाली उभरती अभिनेत्री समीक्षा गोस्वामी ने हिंदी और भोजपुरी म्यूजिक वीडियो से दर्शकों का दिल जीतने के बाद अब साउथ फिल्मों की ओर कदम बढ़ा दिया है। कई सालों से मायानगरी मुंबई में रह रहीं समीक्षा अब तक पाँच से अधिक म्यूजिक वीडियो में नजर आ चुकी हैं। उनके चर्चित गानों में “एक हसीना थी एक दीवाना था”, “एग्रीमेंट” और “राजनीति” जैसे सांग्स यूट्यूब पर उपलब्ध हैं और दर्शकों द्वारा सराहे गए हैं।

जल्द ही भोजपुरी स्टार प्रमोद प्रेमी यादव के साथ उनका नया वीडियो सांग रिलीज होने जा रहा है। इसके अलावा समीक्षा की पहली साउथ फिल्म की शूटिंग भी लगभग पूरी हो चुकी है और वह अब फिल्मों में अपने अलग अंदाज से पहचान बनाने को तैयार हैं।

खास बात यह है कि समीक्षा केवल सुंदरता ही नहीं बल्कि आत्मविश्वास और बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। बेहद चुलबुली और हँसमुख स्वभाव वाली समीक्षा बतौर अभिनेत्री हर तरह के रोल निभाना चाहती हैं। उन्हें एकता कपूर के सुपरहिट शो “नागिन” का किरदार बेहद पसंद आया था और वह चाहती हैं कि भविष्य में फिल्मों में ऐसा रोल निभाने का मौका मिले। साथ ही गृहणी, अमीर महिला और ग्रे शेड्स वाले रोल्स करने में भी उन्हें खास दिलचस्पी है।

समीक्षा का कहना है कि कभी भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। अगर मेहनत और लगन से काम करें तो अच्छे लोगों का साथ हमेशा मिलता है और मंज़िल भी मिलती है।”

भोजपुरी से लेकर साउथ इंडस्ट्री तक का सफर तय करने जा रहीं समीक्षा गोस्वामी आने वाले समय में दर्शकों को अपने अभिनय से नए रंग और नई कहानियाँ दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा के साथ कंट्री क्लब हॉस्पिटैलिटी एंड हॉलीडेज़ लिमिटेड ने की नवरात्रि बैश की घोषणा

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मुंबई। कंट्री क्लब हॉस्पिटैलिटी एंड हॉलीडेज़ लिमिटेड (CCHHL), जिसके पास दुनियाभर में 35 से अधिक ओन्ड क्लब और 50 से अधिक फ्रैंचाइज़ क्लब हैं, ने एशिया का सबसे भव्य नवरात्रि उत्सव आयोजित करने की घोषणा की है। इस शानदार कार्यक्रम की खासियत होंगी बॉलीवुड अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा, जो अपने ग्लैमर और स्टार पॉवर से कार्यक्रम की शान बढ़ाएँगी। यह आयोजन CCHHL के 20 लाख से अधिक सदस्यों के लिए अविस्मरणीय अनुभव देने के प्रयासों का हिस्सा है।

कंट्री क्लब के मैनेजिंग डायरेक्टर और “किंग ऑफ क्लब” कहे जाने वाले राजीव रेड्डी ने इस अवसर पर शर्लिन चोपड़ा को वीआईपी गोल्ड मेंबरशिप कार्ड प्रदान किया। उसी अवसर पर एंकर सिमरन आहूजा भी उपस्थित रहीं। फिर दोनों सुंदरियों के साथ राजीव रेड्डी ने गरबा नृत्य किया।

शर्लिन ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले कंट्री क्लब में ठहरना शुरू किया था और अब इस सदस्यता के तहत वह हर 10 दिनों में एक दिन रुककर स्विमिंग पूल, जिम और बैडमिंटन जैसी बेहतरीन सुविधाओं का आनंद ले सकती हैं। शर्लिन ने कहा कि कंट्री क्लब का वातावरण बेहद पारिवारिक है और यहां का माहौल वाकई शानदार है। मैं फ्री टाइम में सभी क्लबों में चिल करना चाहती हूं क्योंकि यहां समय बिताना सचमुच फैंटास्टिक फील देता है।

कंट्री क्लब के लगभग 2 मिलियन सदस्य हैं और यह संस्था न केवल वैश्विक स्तर पर गतिविधियाँ आयोजित करती है बल्कि भारत के हर त्यौहार को भी बड़े उत्साह से मनाती है।

बॉलीवुड सितारे गोविंदा, विवेक ओबेरॉय और मल्लिका शेरावत पहले से ही कंट्री क्लब से जुड़े हुए हैं। वहीं सलमान खान, शाहरुख खान, ऋतिक रोशन और सुष्मिता सेन भी कई मौकों पर क्लब के मालिक राजीव रेड्डी की तारीफ कर चुके हैं।

राजीव रेड्डी ने बताया कि इस बार हमारे क्लब में एशिया का सबसे बड़ा नवरात्रि बैश इवेंट होगा जिसमें 9 दिन तक चलने वाला संगीत, नृत्य और पारंपरिक उत्सवों से भरा भव्य आयोजन रहेगा। वहीं अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा कार्यक्रम में ग्लैमर और उत्साह जोड़ेगी।
इस नवरात्रि बैश इवेंट में दुनियाभर के 35 से अधिक ओन्ड क्लब और 50 से अधिक फ्रैंचाइज़ क्लब के सदस्य भाग लेकर विशेष लाभ उठा सकेंगे।

कंट्री क्लब हॉस्पिटैलिटी एंड हॉलीडेज़ लिमिटेड के बारे में बता दें कि 1989 से कंट्री क्लब भारत में संपूर्ण मनोरंजन, अवकाश और हॉस्पिटैलिटी सेवाएँ प्रदान करने वाला अग्रणी संस्थान है। लक्ज़री, किफ़ायती सेवाएँ और बेहतरीन अनुभव उपलब्ध कराने पर केंद्रित, कंट्री क्लब अपने सदस्यों को हाई-एंड क्लबिंग हब्स, आकर्षक हॉलीडे डेस्टिनेशन, अत्याधुनिक फिटनेस सेंटर्स और सितारों से सजे कार्यक्रमों का विशेष आनंद देता है।

कंट्री क्लब संभावित पार्टनर्स को फ्रैंचाइज़ अवसरों की खोज करने के लिए आमंत्रित करता है, जिससे सदस्य दुनियाभर में विशेष लाभ और इवेंट्स का हिस्सा बन सकें। हॉस्पिटैलिटी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में मजबूत उपस्थिति के साथ, कंट्री क्लब लगातार लक्ज़री और मनोरंजन के नए मानक स्थापित कर रहा है।

– संतोष साहू

गौ-शालाएं स्वावलंबी बनाना जरूरी

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आत्मनिर्भर गौशालाएं प्रदेश की अर्थव्यवस्था में नई ताकत बन सकती हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि गौशालाओं में गोबर, गोमूत्र और दुग्ध उत्पादों से आय के साधन विकसित किए जाएं और सौर ऊर्जा उत्पादन जैसी पहलें की जाएं। साथ ही, देसी नस्ल के गोपालन को बढ़ावा देने और पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय में गौसंवर्धन बोर्ड की समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा है कि आत्मनिर्भर गोशाला, प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। गौ-शालाएं गोबर, गोमूत्र आदि अपशिष्ट से धन अर्जित कर संपन्न बन सकती हैं। अतः स्वावलंबी गौशालाएं विकसित करने के लिए गौशालाओं में दुग्ध उत्पादों सहित गोमूत्र-गोबर आदि से निर्मित सामग्री के विक्रय की व्यवस्था विकसित की जाए। इसके साथ ही गौशालाओं में उपलब्ध स्थान का उपयोग सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन के लिए भी किया जाए। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में स्थानीय परिवेश के अनुरूप देसी नस्ल के गोपालन को प्रोत्साहित किया जाए। गौशालाओं के प्रबंधन में धार्मिक संस्थाओं और दानदाताओं को जोड़ा जाए। प्रदेश में उपलब्ध पशुधन के अनुपात में पशु चिकित्सकों की संख्या कम है। गोवंश के बेहतर प्रबंधन और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए पशु चिकित्सकों की संख्या में बढ़ोतरी आवश्यक है। इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।

आध्यात्मिक गुरु डॉ. राजेन्द्र जी महाराज हुए ब्रह्मलीन

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मुंबई। मालाड, मुंबई में निवासरत संत शिरोमणि आध्यात्मिक गुरु डॉ. राजेन्द्र जी महाराज रविवार, 7 सितम्बर 2025 को प्रातः ब्रह्मलीन होकर परमधाम को प्रस्थान कर गए। उनका जीवन धर्म, अध्यात्म और करुणा का अनुपम उदाहरण रहा। वे पिछले पचास वर्ष से अमृत वाणी कर जनमानस का कल्याण कर रहे थे। उन्होंने मलाड पश्चिम में ऑरलम स्थित अमोघ धाम की स्थापना सन 2001 में की थी जहां प्रत्येक रविवार को सत्संग किया जाता है। वहां भक्त राम नाम जप करते हैं और अपने जीवन में सकारात्मक विचारों का संचार करते हैं। उनकी अमृत वाणी को सुनने के लिए दूर दूर से सभी धर्म और समाज के लोग पहुंचते रहे हैं।

आध्यात्मिक गुरु राजेंद्र महाराज के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए पीयूष गोयल, गोपाल शेट्टी, विद्या ठाकुर, विनोद शेलर, असलम शेख तथा कई व्यवसायी और समाजसेवक पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किए। सोमवार, 8 सितम्बर 2025 को प्रातः 9 बजे उनके निवास “गुरु महिमा”, साई बाबा पार्क, मालाड (पश्चिम) से हिंदू श्मशान भूमि, मालाड पश्चिम तक शोभा यात्रा निकाली गई जिसमें हजारों भक्त और अनुयायी सम्मिलित रहे।

डॉ. राजेन्द्र जी महाराज ने मुंबई के वी.जे.टी.आई. इंजीनियरिंग कॉलेज से बीई की डिग्री प्राप्त की और शिक्षा व विज्ञान को अध्यात्म से जोड़ा। उन्होंने पाँच हजार से अधिक सत्संग सभाओं के माध्यम से लाखों श्रद्धालुओं को साधना और सेवा का संदेश दिया। “अमृतवाणी सत्संग” कार्यक्रम द्वारा उनका मार्गदर्शन देश और विदेश तक पहुँचता रहा है जहां उनके भक्त और अनुयायी सफल जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अपने मंत्र “हैव फेथ इन योर फेथ” के माध्यम से उन्होंने पूरे संसार को संदेश दिया है। साथ ही “व्हाइट फ्लावर” और “बिखरो अनमोल होकर” ग्रंथ का लेखन किया है। उनके समाजसेवा कार्यों में गरीबों को भोजन, निर्धन विद्यार्थियों की सहायता, वृक्षारोपण और पशु-पक्षियों की सेवा प्रमुख रही। अनुयायी प्रति वर्ष 3 जनवरी उनके जन्मदिन को इंटरनेशनल डे फॉर फीडिंग द पुअर्स के रूप में मनाते हैं और अपने गुरु के कहेनुसार जगह जगह उत्तम प्रकार के खाद्य सामग्री और विशिष्ट पकवान बनाकर गरीबों को बांटते हैं।

आध्यात्मिक गुरु राजेंद्र महाराज को सन 2019 में राजस्थान के जगदीश झाबरमल तिबड़ेवाल यूनिवर्सिटी, झुंझुनूं द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने अपने राजनीतिक कार्यकाल के दौरान राजभवन में गुरु राजेंद्र महाराज को भारत गौरव सम्मान प्रदान किया था और गुरु के सत्संग का आनंद प्राप्त किया।

एक परोपकारी गुरु के ब्रह्मलीन होने से आध्यात्मिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है, परंतु उनकी शिक्षाएँ अनुयायियों के लिए सदैव मार्गदर्शन और प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।

– संतोष साहू

स्वर्ग जैसी सुन्दर जगहों पर वैवाहिक उत्सव के लिए श्रीलंका टूरिज़म का भारत को आमंत्रण 

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मुंबई। श्रीलंका टूरिज़म ने डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए आधिकारिक तौर पर अपने दरवाज़े खोल दिए हैं। दुनिया के एक सबसे लुभावने स्थान में अपने ज़िन्दगी की सबसे खास ख़ुशी मनाने के लिए भारतीय कपल और परिवारों को हार्दिक निमंत्रण दिया है। इस अवसर पर, श्रीलंका टूरिज़म ने भारत भर में मल्टी-सिटी लक्ज़री वेडिंग शो की एक श्रृंखला का सफलतापूर्वक समापन किया, इस शो में यह दर्शाया गया कि, अविस्मरणीय विवाह अनुभवों चाहने वाले कपल के लिए यह द्वीप एक प्रमुख विकल्प बन सकता है।

इन शोकेस में श्रीलंका के प्रमुख होटल, रिसॉर्ट, हेरिटेज स्थल और वेडिंग सर्विसेस प्रोवाइडर, भारत के बड़े-बड़े वेडिंग प्लानर, ट्रैवल एजेंट और मीडिया प्रतिनिधि एक साथ आए। प्रत्येक कार्यक्रम में विशेष नेटवर्किंग सत्र, इमर्सिव अनुभव और विशेष रूप से तैयार की गई वेडिंग कॉन्सेप्ट्स प्रस्तुत की गईं — जो पारंपरिक भारतीय समारोहों और आधुनिक लक्ज़री समारोहों, दोनों की मेजबानी करने की श्रीलंका की बेजोड़ क्षमता को प्रदर्शित करती हैं।

बुद्धिका हेवावासम (चेयरमैन, श्रीलंका टूरिज्म डेवलपमेंट अथॉरिटी और श्रीलंका टूरिज़म प्रमोशन ब्यूरो) ने बताया कि श्रीलंका अब डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए खुल गया है, और हम भारत को आमंत्रित कर रहे हैं कि वे अपने प्यार का जश्न हमारे साथ मनाएं। भारत भर में मिली ज़बरदस्त प्रतिक्रिया ने हमारे इस विश्वास को मज़बूत किया है कि, श्रीलंका भारतीय जोड़ों के दिलों में एक ख़ास जगह बनाएगा। प्राचीन समुद्र तटों और चाय बागानों से लेकर कोलोनियल हवेलियों और विरासती किलों तक, यह द्वीप शादियों को यादगार बनाने के लिए ज़रूरी हर चीज़ प्रदान करता है।

गौ-महाकुंभ -राजस्थान बनेगा बड़ा डेयरी हब CM भजनलाल शर्मा

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Jaipur Gau-Mahakumbh: अब देश भर में पलने वाली गायों की दुर्दशा नहीं होगी। गायें अब चाहे दुधारू हों या फिर सामान्य, कोई भी गौ-वंश अब किसी पशुपालक के लिए घाटे का सौदा नहीं साबित होगा, बल्कि वह आर्थिक तरक्की का जरिया बनेंगे। आप यह सुनकर चौंक सकते हैं कि आने वाले समय में गायें भी अब देश की जीडीपी का हिस्सा बन सकती हैं। आप सोच रहे होंगे कि भला ये कैसे हो सकता है। मगर ये सच है। जयपुर में आयोजित “गौ-महाकुंभ” में विशेषज्ञों ने जब गायों से हो सकने वाली आमदनी का फार्मूला बताया राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी इसके कायल हो गये। वह “गौ-महाकुंभ” में शनिवार को बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। इसके बाद मुख्यमंत्री ने राजस्थान को भारत का सबसे बड़ा ‘डेयरी हब’ बनाने का ऐलान कर डाला।

गौ-वंश और गोपालकों के लिए राजस्थान सरकार का बड़ा कदम

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को ‘गौ-महाकुंभ’ को संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान को केवल कृषि प्रधान राज्य नहीं, बल्कि आने वाले समय में समूचे भारत का सबसे बड़ा ‘डेयरी हब’ बनाएंगे। उन्होंने कहा कि यह हमारा सपना है। इस कार्यक्रम का आयोजन देवराहा बाबा गौ सेवा परिवार द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री ने कहाकि हमारी सरकार ने गौवंश, गोपालक और किसानों के कल्याण के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए हैं।

राजस्थान में गौ-संरक्षण और संवर्धन के लिए 2971 करोड़ का आवंटन

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य में गौ संरक्षण व संवर्धन योजनाओं के लिए 2,791 करोड़ रुपये की अनुदान राशि दी गई है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक पंजीकृत गौशाला को प्रति गाय 50 रुपये और बछड़ों के लिए 25 रुपये रोजाना की सहायता प्रदान करना शामिल है। शर्मा ने कहा कि प्रदेश की 100 गौशालाओं को गौ काष्ठ मशीनें विशेष रियायती दर पर उपलब्ध कराई गई हैं और अब तक 341 गौशालाओं में आधारभूत सुविधाओं का निर्माण कराया गया है।

इसके साथ ही नंदीशाला सहभागिता योजना के तहत पंचायत स्तर पर आधारभूत संपत्तियों के निर्माण के लिए 62 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आवंटित की गई है। शर्मा ने कहा कि किसान और पशुपालक हमारे अन्नदाता व पोषणदाता है इसलिए हमें किसानों को आधुनिक तकनीक, सही दाम और सुरक्षित जीवन देकर सशक्त करना है।

दूध न देने वाली गायें भी बहुत फायदे का सौदाः एसबी नवरंग

“गौ-महाकुंभ” के राष्ट्रीय संयोजक एसबी नवरंग ने कहा कि गौ-हत्या रोकने का एकमात्र उपाय गायों को व्यावसायिक रूप से लाभप्रद बनाना है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से दूध न देने वाली गायों और गौ-वंशों के गोबर और मूत्र से आश्चर्यजनकरूप से लाभ अर्जित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज गोबर से कॉमर्शियल इस्तेमाल हो रहा है। गोबर से पेंट बनाया जा रहा है और सनफॉर्मा वाले मेडिसिन बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि गायों को लाभप्रद बनाने वाले सभी व्यावसायिक उपाय अपनाने होंगे तभी गौ-हत्या भी रुकेगी और इससे आम लोगों की आमदनी भी बढ़ाई जा सकेगी।

बनेंगे गोकुल-ग्राम

वहीं राष्ट्रीय गौ-सेवा प्रचारक संजय शर्मा ने कहा कि यह ईवेंट नहीं एक विचारधारा है। देवराहा बाबा गौ-सेवा परिवार ने गायों की बड़ी सेवा की है। उन्होंने गोकुल ग्राम का मॉडल रखा, जहां 10 हजार गायें होंगी। इस तरह सैकड़ों गो-कुल ग्राम बनाने की योजना है। इस तरह से पूरे देश में गौ-चेतना अभियान चलाया जाएगा। इस कार्यक्रम में तमाम गौ-सेवक, सामाजिक कार्यकर्ता और साधु-संतों व विद्वानों की मौजूदगी रही।