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उद्यमियों की उपस्थिति के साथ लोनावला मे “अल्टिमेट मिलियनेयर ब्लूप्रिंट” वर्कशॉप और अवॉर्ड समारोह

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लोनावला। व्यवसाय का असली उद्देश्य केवल मुनाफा नहीं, बल्कि समाज का उत्थान है — इसी विचारधारा पर आधारित “अल्टिमेट मिलियनेयर ब्लूप्रिंट” वर्कशॉप 24 से 27 सितंबर तक लोनावला के हरे–भरे वातावरण में संपन्न हुई।

देविदास श्रावण नाईकरे ने ध्यान, वेदज्ञान और आधुनिक बिजनेस स्ट्रैटेजी का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। उन्होंने उद्यमियों को संदेश दिया कि बड़ा टर्नओवर होने से पहले बड़ा विचार ज़रूरी है और स्थायी सफलता से पहले स्थिर मन।

कार्यशाला के समापन पर महाराष्ट्र के शीर्ष उद्यमियों को अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित रहे बॉलीवुड स्टार मुश्ताक खान ने कहा कि यह अवॉर्ड आपकी सफलता का नहीं, बल्कि आपके सेवाभाव और दृष्टिकोण का सम्मान है।”

अंत में कार्यशाला का मूल संदेश यही रहा, “सच्चा लीडर वही है जो अपने सपनों के साथ-साथ समाज के सपनों को भी पूरा करता है।

पूजा राव हॉरर और रोमांच से भरपूर फिल्म द अनवांटेड गिफ्ट में करेगी धमाल

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झारखंड के बंसीधर नगर से निकलकर मायानगरी मुंबई तक का सफर तय करने वाली अभिनेत्री पूजा राव अब दर्शकों के लिए रोमांच और हॉरर का डबल डोज लेकर आ रही हैं। उनकी आगामी फीचर फिल्म “द अनवांटेड गिफ्ट” हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में बनी है। खास बात यह है कि इस फिल्म में पूजा न सिर्फ मुख्य अभिनेत्री हैं बल्कि बतौर निर्माता भी अपनी नई पारी की शुरुआत कर रही हैं। यह फिल्म नए वर्ष पर रिलीज होगी।

इसके साथ ही पूजा की हिंदी फिल्म “जिला ग्रीडी” की शूटिंग पूरी हो चुकी है, जिसमें उन्होंने एक पाकिस्तानी लड़की का किरदार निभाया है। यह फिल्म लव स्टोरी और ड्रामा से भरपूर है और जल्द ही इसका ट्रेलर रिलीज किया जाएगा।

पूजा राव अब तक 500 से अधिक म्यूजिक वीडियो में नजर आ चुकी हैं। वहीं, वेब सीरीज़ “मुँह दिखाई”, “बंद दरवाजा”, “विधवा” और “खींच मेरी फोटो” में उनके अभिनय को दर्शकों ने सराहा है। भोजपुरी इंडस्ट्री से पूजा ने शुरुआत की थी और छठ गीतों से अपने करियर की पहली पहचान बनाई।

पूजा राव का जीवन सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। एक साधारण परिवार में जन्मी पूजा ने आईटीआई की पढ़ाई की है। वह बचपन से ही टीवी पर अभिनेत्रियों को देखकर सपनों की दुनिया में खो जाती थीं और ठान लिया था कि एक दिन पर्दे पर जरूर नजर आएँगी। अपने बलबूते पर इन्होंने अपनी मंजिल तय की। उनके इस सपने में उनके दादा-दादी का आशीर्वाद और सहयोग रहा। पूजा अपने दादा-दादी को अपना आदर्श मानती हैं।

आज वही साधारण लड़की न सिर्फ अभिनय में बल्कि निर्माता के रूप में भी नई पहचान बना रही है। पूजा को मुंबई ग्लोबल की ओर से अवार्ड मिल चुका है और वह दुबई में मॉडलिंग और रैम्प वॉक भी कर चुकी हैं। वह भोजपुरी और हिंदी सिनेमा के बड़े नामों – रवि किशन, करण ट्रेकर, चिंटू पांडे जैसे सितारों के साथ स्क्रीन शेयर कर चुकी हैं।

पूजा का कहना है, “कभी हार नहीं माननी चाहिए और हमेशा कुछ अलग करने का हौसला होना चाहिए। सपनों का सागर चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, मेहनत और जुनून से उसे पार किया जा सकता है।”

नए साल में पूजा राव की एक के बाद एक फिल्में और म्यूजिक वीडियो रिलीज होंगी। दर्शकों को उनके इस नए अंदाज और नए सफर का बेसब्री से इंतजार है।

दमदार एक्टिंग से दर्शकों की फेवरेट रही हैं मृणाल देशराज

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मुंबई। “इश्कबाज़”, “नागिन”, “कहीं तो होगा” जैसे सुपरहिट सीरियल्स से टीवी पर अपनी पहचान बनाने वाली हॉट और ग्लैमरस अदाकारा मृणाल देशराज एक बार फिर सुर्खियों में हैं। ग्रे शेड्स की क्वीन कहे जाने वाली मृणाल अपने बोल्ड अंदाज़ और दमदार एक्टिंग से दर्शकों की फेवरेट रही हैं।

एक ब्रेक के बाद मृणाल अब अपनी दूसरी पारी की तैयारी कर रही हैं और इस बार उनका निशाना है ओटीटी। स्टाइल और एटीट्यूड में बेमिसाल मृणाल का कहना है कि वह नए प्लेटफॉर्म पर अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाना चाहती हैं।

मृणाल सिर्फ़ कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि फिटनेस और स्पोर्ट्स की दुनिया में भी बेहद एक्टिव हैं। योगा, जिम्नास्टिक, स्क्वैश, लॉन टेनिस, किक बॉक्सिंग, स्विमिंग, रनिंग, स्पिनिंग और हैवी वेट लिफ्टिंग… इन सबमें उनका जलवा देखने लायक है। यही वजह है कि उनकी फिट और टोंड बॉडी फैंस को हमेशा इंप्रेस करती है।

थिएटर से शुरुआत करने वाली मृणाल ने परितोष पेंटर के “ये क्या हो रहा है”, “अमर, अकबर और टोनी”, विपुल मेहता के “हम ले गए तुम रह गए”, रमेश तलवार के “डॉ. मुक्ता” और नादिरा बब्बर के “यहूदी लड़की” जैसे नाटकों से अपने टैलेंट का लोहा मनवाया। वहीं छोटे पर्दे पर “कहीं तो होगा” की शिप्रा, “सुजाता” की पद्मिनी, “डोली सजा के”, “छोटी सी ज़िंदगी”, “महाराणा प्रताप” की महारानी उमादेवी जैसे नेगेटिव रोल्स में छा गईं। और फिर “इश्कबाज़” की जाह्नवी ओबेरॉय और “नागिन” की रोहिणी बनकर फैंस के दिलों पर राज किया।

ग्लोबल एक्सीलेंस अवॉर्ड जीत चुकीं और कई मैगज़ीन कवर रह चुकी मृणाल का कहना है – “पैशन और डेडिकेशन ही मेरी ताकत है। काम के पीछे भागो, पैसे के पीछे नहीं, मंज़िल खुद चलकर आपके पास आएगी।”

अब देखना यह होगा कि ओटीटी पर मृणाल अपने ग्लैमरस और दमदार अंदाज़ से क्या नया धमाल मचाती हैं।

गौ-हत्यारों की रिश्तेदार है कांग्रेस’, गौ-मांस टैक्स के आरोप पर सीएम मोहन यादव का पलटवार

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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बालाघाट में कांग्रेस पर गौ-मांस कर और गौ-हत्या के मुद्दे पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का गौमाता से कोई लेना-देना नहीं है उनकी सरकार ने गौ-हत्या पर सख्त प्रतिबंध लगाए हुए है। उन्होंने कांग्रेस पर साधु-संतों पर गोलियां चलवाने का भी आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने गौशाला योजना का उल्लेख करते हुए गौ-पालकों को प्रति गाय 40 रुपये देने की बात कही।

भोपाल/बालाघाट। कांग्रेस ने गौ-मांस के टैक्स को लेकर मध्यप्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस आरोप पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबरदस्त पलटवार किया है। उन्होंने 24 सितंबर को बालाघाट के कटंगी में कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हमारी मान्यता है गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। हम गौ-हत्या की सोच भी नहीं सकते।

कांग्रेसियों का गौमाता से कोई लेना देना नहीं। वह तो गौमाता के हत्यारों की रिश्तेदार है। उसने ही दशकों पहले करपात्री महाराज और साधु संतों पर गोलियों तक चलवाईं। कांग्रेस ने अपना गाय-बछड़े का चुनाव चिन्ह बदलकर पंजा कर दिया। कांग्रेस के इस पाप को जनता कभी माफ नहीं करेगी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज बालाघाट के कटंगी पहुंचे। उन्होंने यहां किसानों को बोनस की राशि दी। इसी दौरान उन्होंने मंच से कहा कि जब हमने लाड़ली बहनों को एक हजार रुपये देने शुरू किए तो कांग्रेसियों ने कहा कि पैसा नहीं है, यह केवल चुनाव की बात है, बाद में कुछ नहीं होगा।

लेकिन, हम सबने देखा कि बहनों को चुनाव के पहले एक हजार, पिछले साल 1250, रक्षाबंधन पर 250 रुपये अलग से दिए। नालायक कांग्रेसी कहते हैं कि बहनों को पैसे दो तो शराब पी जाती हैं। सीएम डॉ. मोहन ने बहनों से कहा कि कोई कांग्रेसी गली-मोहल्ले आए तो उनका हिसाब चुकता करना। अपने इन्हीं कर्मों की वजह से कांग्रेस 20 साल से सत्ता से बाहर है।

कांग्रेसी पहले लाड़ली बहनों को गाली दे रहे थे, अब नई कहानी शुरू की है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में गौ-मांस को टैक्स फ्री कर दिया। अब कोई इन मूर्खों से पूछे कि 2004 के पहले तुम्हारी सरकार थी। उस वक्त जो तुमने किया तो उसका हिसाब लेंगे। हमारे यहां कोई भी गौ-हत्या संभव नहीं है।

गौवंश को लेकर प्रदेश में सख्त कानून
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने गौ-हत्या पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। हम गौ-माता के प्रति ऐसी बात तो सोच भी नहीं सकते। कोई गौ-माता को काटने की तो छोड़ो, अगर उसको परेशान भी करेगा तो हमारी सरकार उसे उठाकर जेल में डाल देती है। हमने कानून बनाया है। हमने कई ट्रक और गाड़ियां जब्त की हैं, जिनमें भरकर गौवंश की तस्करी की जा रही थी। हम जब गौ-हत्यारों को पकड़ने जाते हैं तो कांग्रेसी हाय रे-हाय रे चिल्लाने लगते हैं।

कांग्रेस को गौमाता से कोई लेना-देना नहीं। इनकी गौ-हत्यारों से रिश्तेदारी है। कांग्रेसी किसी के नहीं हो सकते। भगवान राम के मामले में भी कांग्रेस ने शपथ पत्र दिया था कि कहां राम, किसने देखे, कहां पैदा हुए, राम का कोई अस्तित्व नहीं है, वो तो काल्पनिक है। लेकिन, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राम मंदिर बना तो कांग्रेसी कहने लगे ही राम हमारे भी हैं। राम मंदिर को लेकर सारे अड़ंगे कांग्रेस ने ही लगाए।

अपने पाप देखे कांग्रेस
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने गौशाला के लिए योजना बनाई है। गौ-पालकों को प्रति गाय 40 रुपये प्रदान किए जा रहे हैं। कांग्रेस से पूछो कि उसका इतिहास क्या है। 1960-65 के आसपास करपात्री महाराज साधु संतों को लेकर नई दिल्ली आए थे। उन्होंने सरकार से कहा था कि गौ-माता की हत्या बंद करो और सबको साथ लेकर चलो।

लेकिन, कांग्रेसियों ने निहत्थे साधु-संतों पर गोलियां चलवाकर उनकी हत्या का पाप किया। देश इस पाप के लिए कभी कांग्रेस को क्षमा नहीं करेगा। करपात्री महाराज ने अंशन करते-करते शरीर छोड़ दिया। महात्मा गांधी के समय कांग्रेस ने अपना चुनाव चिन्ह गाय-बछड़ा रखा। इसके बाद इन्हें गाय-बछड़े से नफरत हो गई और उन्होंने अपना चुनाव चिन्ह हाथ रख लिया।

गाय माता कांग्रेसियों को पसंद नहीं और सर्टिफिकेट हमसे ले रहे हैं। कांग्रेस अपने अंदर के पाप देखे। ये पाप उसको खा जाएंगे। हमारी सरकार में जो 25 गाय पालेगा और 40 लाख निवेश करेगा तो हम उसको दस लाख का अनुदान देंगे। हमारी सरकार गौ-माता को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

पंजाब के राज्यपाल एवं आचार्य लोकेशजी के मध्य राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा

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आचार्य लोकेशजी की जन्मभूमि में अस्पताल निर्माण सेवा का सराहनीय प्रयास- राज्यपाल कटारिया

पचपदरा राजस्थान मेरी जन्मभूमि है इसकी सेवा करना मेरा सौभाग्य – आचार्य लोकेश

नई दिल्ली, 24 सितंबर 2025: अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक आचार्य लोकेशजी ने पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया से भेंट कर समाज सेवा एवं राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर दिल्ली के कपूरथला भवन में विस्तृत चर्चा की।

विश्व शांतिदूत आचार्य लोकेशजी ने राज्यपाल की पंजाब में बाढ़ से प्रभावित लोगों की तन मन धन से सहायता करने के प्रयास की प्रशंसा करते हुए बताया कि उनकी जन्मभूमि राजस्थान के पचपदरा में आचार्य लोकेश सेवा सद्भावना ट्रस्ट द्वारा प्रस्तावित सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल का निर्माण करना चाहते हैं | आचार्य लोकेश ने बताया कि मेरी जन्मभूमि पचपदरा में ग्राम पंचायत द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे भूखंड पर स्मार्ट विलेज मूवमेंट के एक्सिक्यूटिव चेयरमैन डॉ अनिल वी शाह के सहयोग निर्माण होने वाले सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल से आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को विश्व स्तरीय चिकित्सा उपलब्ध हो सकेंगी |

पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने पचपदरा में आचार्य लोकेशजी के मार्गदर्शन में स्पेशलिस्ट अस्पताल के निर्माण के संकल्प को सराहनीय प्रयास बताया | उन्होंने कहा कि राजस्थान उनकी भी जन्मभूमि है, इसकी सेवा करना मेरा सौभाग्य है | श्री कटारिया ने आचार्य लोकेशजी को अस्पताल निर्माण के संकल्प के लिए शुभकामनायेँ देते हुये कहा कि इसके लिए हर प्रकार का सहयोग करने के लिए वो सदैव उपलब्ध रहेंगे | उन्होने कहा कि आचार्य लोकेशजी के मानवतावादी कार्य बेहद प्रशंसनीय है |

त्योहार का आनंद तभी परफेक्ट है जब उसमें तड़क-भड़क के साथ जिम्मेदारी भी हो : पूनम झावर

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मुंबई। बॉलीवुड की सदाबहार अदाकारा पूनम झावर ने अपने ग्लैमर, शालीनता और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर न सिर्फ हिंदी सिनेमा, बल्कि फैशन और इवेंट इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। अभिनेत्री, मॉडल, गायिका, फिल्ममेकर और इवेंट ऑर्गेनाइज़र हर रूप में उन्होंने यह साबित किया है कि वह सिर्फ एक ग्लैमरस चेहरा नहीं, बल्कि एक सक्षम और दूरदर्शी कलाकार भी हैं।

नवरात्रि और ग्लैमर का संगम:

पूनम झावर का मानना है कि नवरात्रि केवल धार्मिक उत्सव भर नहीं, बल्कि आज के समय में यह फैशन, म्यूजिक और युथफुल एनर्जी का त्योहार बन चुका है। गरबा और डांडिया को लेकर उनकी सोच अनोखी है। उनके अनुसार, गरबा स्त्री शक्ति और पॉज़िटिव एनर्जी का महान उत्सव है, जिसमें हर स्टेप ग्रेस, स्टाइल और पावर का प्रतीक होता है। वहीं, डांडिया युवाओं के लिए ट्रेंड, फैशन और मस्ती का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है, जिसमें ड्रेसिंग सेंस से लेकर म्यूज़िक तक सबकुछ आधुनिक हो चुका है।

अपने फैंस को संदेश देते हुए वह कहती हैं कि त्योहार का मज़ा तभी परफेक्ट है जब उसमें तड़क-भड़क के साथ जिम्मेदारी भी हो। सेहत और सुरक्षा का ख्याल रखते हुए हर किसी को गरबा और डांडिया का भरपूर आनंद लेना चाहिए।

अभिनय और करियर की यात्रा:

मुंबई में जन्मीं पूनम झावर ने 1994 की सुपरहिट फिल्म “मोहरा” से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की। इस फिल्म के सदाबहार गीत “ना कजरे की धार” में उनकी मौजूदगी ने उन्हें रातों-रात लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद उन्होंने “ओएमजी! ओह माय गॉड”, “आंच”, “संसारची माया”, और “एका लग्नाची गोष्ट” जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। साथ ही उनके म्यूजिक अलबम “पू फॉर यू”, “टेक मी होम बेबी” और “पू क्या जलवा” ने भी दर्शकों का दिल जीता।

आज भी उनकी सुंदरता और फैशन सेंस उन्हें चर्चा में बनाए रखते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी मज़बूत फैन फॉलोइंग है, जहाँ लोग उनके स्टाइल और व्यक्तित्व से प्रेरणा लेते हैं।

आने वाले प्रोजेक्ट्स और उपलब्धियाँ:

पूनम झावर इन दिनों एक महिला प्रधान हिंदी फिल्म पर काम कर रही हैं, यह राजस्थान और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों के बीच की जा रही है। यह फिल्म हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में रिलीज़ होगी और इसमें उनके अभिनय का नया पहलू दर्शकों के सामने आएगा।

इसके अलावा, उनकी इवेंट कंपनियाँ “दादासाहेब फाल्के एक्सीलेंस अवार्ड्स” और “ड्रीम कैचर” पिछले सात वर्षों से बॉलीवुड के बड़े इवेंट्स और शो सफलतापूर्वक आयोजित कर रही हैं।

ग्लैमर और अभिनय के साथ-साथ समाजसेवा और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी से पूनम झावर आज भी दर्शकों की पहली पसंद बनी हुई हैं। फैंस को उम्मीद है कि वह जल्द ही अपने “सेक्सी साध्वी” वाले इमेज से आगे बढ़कर नए और दमदार किरदारों के साथ बड़े पर्दे और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर फिर से चमक बिखेरेंगी।

पूनम झावर की यात्रा यह साबित करती है कि वह केवल 90 के दशक की स्टार नहीं, बल्कि एक सदाबहार और बहुआयामी कलाकार हैं, जिनका जादू आने वाले वर्षों तक दर्शकों को मोहित करता रहेगा।

ग्रामीण बच्चों की शिक्षा व विकास के लिए लाइट ऑफ लाइफ ट्रस्ट द्वारा “सुर संगम” का आयोजन

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मुंबई। लाइट ऑफ लाइफ ट्रस्ट ने अपनी 20वीं वर्षगांठ का उत्सव मुंबई के जमशेद भाभा रंगमंच, राष्ट्रीय केंद्र प्रदर्शन कला (एनसीपीए) में संगीतमय कार्यक्रम “सुर संगम” के साथ मनाया। इस सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री गायक सुरेश वाडकर, गायिका संजीवनी भेलांडे, गायक मुख्तार शाह तथा चिराग पांचाल के नेतृत्व में 23 साज़ समूह ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में अभिनेता फिल्मकार राजकपूर को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी फिल्मों के गीतों की प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र सरकार के कौशल विकास, रोजगार, शिक्षा और नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढा रहे। उन्होंने ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना की और सरकार की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया। विशिष्ट अतिथियों में हर्षिता नर्वेकर, मंजी लोढा, अमला रूइया, मालती जैन और आभा सिंह शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त मिलिंद देवड़ा, मकरंद नर्वेकर और हर्षिता नर्वेकर की शुभकामनाएँ भी प्राप्त हुईं।
ट्रस्ट की स्थापना वर्ष 2005 में विली डॉक्टर ने 25 ग्रामीण बच्चों से की थी। आज यह संस्था पच्चीस हज़ार से अधिक बच्चों और उनके परिवारों तक पहुँच चुकी है तथा छह लाख से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित कर चुकी है।
इस संगीतमय आयोजन का उद्देश्य ट्रस्ट की 20 वर्ष की यात्रा का उत्सव मनाना और ग्रामीण बच्चों की शिक्षा व विकास के लिए सहयोग जुटाना था। इस कार्यक्रम से प्राप्त धनराशि ट्रस्ट के शैक्षिक और सामाजिक कार्यक्रमों में उपयोग की जाएगी।

राष्ट्रीय एकता के लिए सर्वधर्म सद्भाव एवं संवाद की आवश्यकता – आचार्य लोकेश

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गुरु तेग बहादुरजी के बलिदान दिवस पर प्रमुख जत्थेदार, आचार्य लोकेश, स्वामी चिदानन्द आदि संतो ने सर्वधर्म सम्मेलन को संबोधित किया

सिख समाज का गौरवशाली इतिहास युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत – स्वामी चिदानन्द

दिल्ली सरकार के मंत्री मनिंदर सिंह सिरसा, कपिल मिश्रा व DSGMC के अध्यक्ष कालका ने सर्वधर्म संतों को सम्मानित किया

नई दिल्ली, 20 सितंबर 2025 : अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य लोकेशजी, अकाल तख्त के प्रमुख जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह जी, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वतीजी, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री श्री मंजिन्दर सिंह सिरसा, सांस्कृतिक मंत्री श्री कपिल मिश्रा, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष श्री हरमीत सिंह कालका, सहित विभिन्न धर्मों के गुरुओं ने श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी, गुरु सिख भाई मति दास जी, भाई दियाला जी के 350 वें शहीदी दिवस को समर्पित सर्वधर्म सम्मेलन को संबोधित किया |

दिल्ली सरकार के मंत्री श्री मंजिन्दर सिंह सिरसा एवं श्री कपिल मिश्रा ने सर्वधर्म संतों का स्वागत करते हुए कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म की रक्षा व अन्याय के विरुध्द जरूरतमंदों और कमज़ोरों की रक्षा करने का संदेश दिया उन्होंने दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष श्री कालका जी के साथ मिलकर सभी संतों का शाल ओढ़ाकर व प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया

विश्व शांतिदूत जैन आचार्य लोकेशजी ने कहा कि राष्ट्रीय एकता के लिए सर्वधर्म सद्भाव और संवाद आवश्यक है| उन्होंने कहा कि सभी को वसुधैव कुटुम्बकम् (विश्व एक परिवार है) के विचार को अपनाना चाहिए, विकास के लिए शांति आवश्यक है |

आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर जी ने अपने विडियो संदेश में कहा कि सिख समाज का गौरवशाली इतिहास युवाओं के लिए प्रेरणा का स्तोत्र है | उनकी शिक्षाएं आज भी समानता, न्याय और सद्भाव के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरणा का स्थायी स्रोत हैं।

अकाल तख्त के प्रमुख जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी रघुबीर सिंह जी ने कहा कि देश की आन बान शान के लिए सिख समाज सदैव प्रथम पंक्ति में खड़ा रहा है |

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी को बलिदान को राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता |

दिल्ली सरकार एवं दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी द्वारा आई.सी.ए.आर. कन्वेशन सेंटर नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन को गोस्वामी सुशील जी महाराज, बौद्ध धर्म से भिक्खु संघसेना जी, अजमेर दरगाह से सैयद सलमान चिश्ती, यहूदी धर्म से श्री इजेकील इसाक मालेकर, राजयोगिनी डॉ बिन्नी सरीन जी, श्री रवींद्र पंडिता जी, ईसाई धर्म से श्री अनिल थॉमस टूटू जी स्वामी भव्यतेज जी आदि ने भी संबोधित किया |

अब्दुल अहद और असद सIबरी की सIरंगी विरासत

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अब्दुल अहद सIबरी और असद सIबरी भारतीय शास्त्रीय संगीत की उस गौरवशाली परंपरा के प्रतिनिधि हैं जिसने सरंगी को केवल एक वाद्ययंत्र नहीं, बल्कि आत्मा की आवाज़ बना दिया है। वे मोरादाबाद घराने की आठवीं पीढ़ी से संबंध रखते हैं—एक ऐसा घराना जिसने चार शताब्दियों से भी अधिक समय तक संगीत की साधना और परंपरा को जीवित रखा है। यह वंश परंपरा अपने आप में विश्व संगीत के इतिहास में अनोखी है, क्योंकि इतने लंबे समय तक किसी एक परिवार ने एक ही वाद्य को इतनी निष्ठा और उत्कृष्टता के साथ संरक्षित और संवर्धित किया हो, यह विरल ही है।

इन दोनों का जन्म ऐसे घराने में हुआ जहाँ संगीत जीवन का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन स्वयं है। उनके दादा, सIरंगी सम्राट उस्ताद सIबरी ख़ाँ, ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने सरंगी को उस ऊँचाई पर पहुँचाया जहाँ इसे न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति का प्रतीक माना जाने लगा। दूसरी ओर, उनके पिता उस्ताद कमाल सIबरी, जिन्हें आज “सIरंगी सुल्तान” भी कहा जाता है, ने इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सIरंगी को आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया और उसमें अनेक नवाचार कर उसकी सीमाओं को और विस्तृत किया।


अब्दुल अहद और असद, इस संगीत-मय वातावरण में बचपन से ही रचे-बसे हैं। सरंगी की मधुर ध्वनियाँ उनके जीवन का हिस्सा रही हैं। वे जब छोटे थे तब से ही सुर, ताल और राग उनके दैनिक जीवन के अभिन्न अंग बन गए। उनके लिए संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि साधना, अनुशासन और आत्मिक शुद्धि का साधन है। पिता के मार्गदर्शन में वे कठोर अभ्यास और रियाज़ करते हैं, जिससे उनमें न केवल वादन की दक्षता आती है, बल्कि संगीत का गहरा भाव भी विकसित होता है।
इन दोनों में अपने पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ाने का जोश और जिम्मेदारी का भाव स्पष्ट झलकता है। वे समझते हैं कि सIरंगी केवल एक वाद्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा का स्वरूप है। इसलिए वे परंपरा के सम्मान के साथ-साथ इसे आधुनिक पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बनाने की दिशा में भी अग्रसर हैं। उनके दृष्टिकोण में यह विश्वास निहित है कि यदि शास्त्रीय संगीत को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है तो उसे समकालीन प्रयोगों और नई तकनीकों से भी जोड़ना होगा।
मोरादाबाद घराने की यह परंपरा केवल वाद्य का ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन भी सिखाती है। अब्दुल अहद और असद इस मशाल को थामे हुए हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी साधना, ज्ञान और संगीत की रोशनी फैलाती रही है। उनकी उपस्थिति यह सुनिश्चित करती है कि सरंगी की आत्मीय और गहन ध्वनि, जो कभी उस्ताद सबरी ख़ाँ और फिर उस्ताद कमाल सबरी की उंगलियों से विश्वभर में गूँजी, आने वाले समय में भी उतनी ही जीवंत और प्रभावशाली बनी रहेगी।
इस प्रकार, अब्दुल अहद और असद केवल अपने घराने के उत्तराधिकारी नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की उस अमूल्य विरासत के संरक्षक और भविष्य के धरोहर-वाहक हैं। उनकी साधना और संकल्प से आने वाली पीढ़ियाँ प्रेरणा लेंगी, और सIरंगी की ध्वनि सदा अमर बनी रहेगी।

समाज व संस्कृति की भी आधारशिला है गौ रक्षा : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

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पूर्णिया. अपने गौ रक्षा अभियान को लेकर यात्रा पर निकले जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार को पूर्णिया पहुंचे. एक सभा को संबोधित करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा तभी संभव है जब हम गौ माता का संरक्षण करेंगे. गौ रक्षा हमारी आस्था का विषय ही नहीं, बल्कि यह हमारे समाज और संस्कृति की भी आधारशिला है. उन्होंने सभी से आगामी विधानसभा चुनाव में गौ रक्षा को केंद्र में रखते हुए लोगों से मतदान करने की अपील की. शंकराचार्य जी ने बताया कि गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के लिए उन्होंने विभिन्न राजनैतिक दलों से बात भी की लेकिन इस मुद्दे पर उनसभी की उदासीनता को देखते हुए बिहार विधानसभा चुनाव में गौ भक्त प्रत्याशी उतारने का मन बनाया है. उन्होंने यह भी घोषणा की कि आगामी विधानसभा चुनावों में सभी विधानसभा क्षेत्रों से अपने उम्मीदवार खड़े करेंगे. उन्होंने कहा कि नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद औपचारिक रूप से बताया जाएगा कि कौन-कौन उम्मीदवार उनकी तरफ से चुनाव लड़ रहे हैं. उनके पूर्णिया प्रवास के दौरान आयोजन स्थल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल से परिपूर्ण रहा. भक्तों ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के संदेश को श्रद्धा और उत्साह के साथ आत्मसात किया. इस मौके पर वीवीआईटी के निदेशक राजेश मिश्रा, राणाप्रताप सिंह, आतीश सनातनी आदि उपस्थित रहे. उक्त जानकारी शंकराचार्य जी महाराज के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने दी है.