Home Blog Page 320

म.प्र. स्थापना दिवस (1 नवम्बर) पर विशेष प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में प्रगति पथ पर अग्रसर मध्यप्रदेश

0

 

(सुरेश पचौरी -विनायक फीचर्स)

मध्यप्रदेश राज्य की स्थापना का एक नवम्बर का दिन मध्यप्रदेशवासियों के लिए खास अहमियत रखता है । भारत का हृदय कहा जाने वाला मध्यप्रदेश 1 नवम्बर 1956 को अस्तित्व में आया, जिसका गठन तत्कालीन मध्यभारत,विंध्य प्रदेश, भोपाल रियासत तथा महाकौशल के कुछ हिस्से को एकीकृत कर किया गया था । प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर तथा झीलों की नगरी कहे जाने वाले भोपाल को प्रदेश की राजधानी बनाया गया । 44 वर्षों के बाद प्रदेश का विभाजन हुआ और जनता की मांग पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा नए राज्य म.प्र. का गठन किया गया । अतीत पर नजर डाली जाए तो मध्यप्रदेश ने अपने गठन और विभाजन के दौर में अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं लेकिन अब यह राज्य प्रगति के नये सोपान नाप रहा है। एक ओर जहां इस राज्य को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का विशेष वरदहस्त एवं मार्गदर्शन प्राप्त है, वहीं दूसरी ओर कर्मठ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कुशल नेतृत्व है। डबल इंजन की सरकार में मध्यप्रदेश तरक्की की ठोस बुनियाद पर खड़ा दिखाई दे रहा है।
मध्यप्रदेश राज्य की तस्वीर और तकदीर बदलने की दिशा में केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा जो कल्याणकारी कदम उठाये गये हैं, उनकी सार्थकता ज़मीनी स्तर पर साफ दिखाई देती है । प्रदेश की जनता की खुशहाली और समरस विकास के लिए तमाम जनहितैषी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जो इस बात की गवाह हैं कि मध्यप्रदेश आने वाले दिनों में सर्वश्रेष्ठ राज्य के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहेगा । इस विकासोन्मुखी अभियान के पीछे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की वह दूरगामी सोच है, जिसमें समाज के अंतिम छोर में बैठे व्यक्ति को भी शासन की योजनाओं से लाभान्वित करने का संकल्प है। ख़ुद को प्रधान सेवक कहने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अनेक बार अपनी इस भावना को अभिव्यक्त कर चुके हैं कि विकास के उजाले का लाभ चंद लोगों को नहीं, बल्कि हर देशवासी को मिलना चाहिए । मध्यप्रदेश के निवासियों के लिए यह खुशी की बात है कि हमारे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उनकी पूरी टीम प्रदेशवासियों की सेवा करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रख रही है । अब तो कई राज्य मध्यप्रदेश को माडल मानकर यहां की योजनाओं को अपने यहां लागू कर रहे हैं ।

अतीत के आईने में मध्यप्रदेश के इतिहास, भूगोल और संस्कृति पर दृष्टिपात करें तो यह राज्य अनेक विविधताओं को अपने में समेटे हुए है । प्रचुर वन संपदा, अथाह जल वाली नदियां, विपुल खनिज भंडार, खूबसूरत पर्यटन स्थल, पुरातात्विक धरोहर आदि सब कुछ इस प्रदेश में उपलब्ध है । धार्मिक नगरी उज्जैन में भगवान महाकाल का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, तो ओरछा में राम राजा विराजमान हैं । मध्यप्रदेश अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। नर्मदा, सोन, चंबल, बेतवा, केन, ताप्ती, पेंच, पार्वती, बेनगंगा, रेवा तथा माही आदि नदियों के उद्गम स्थल यहीं पर हैं । ये नदियां प्रदेश की चारों दिशाओं में प्रवाहित होती हैं । नर्मदा को तो मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी माना जाता है । प्रदेश के एक तिहाई भूभाग के निवासियों को नर्मदा आर्थिक रूप से संपन्न बनाती है । नर्मदा नदी पर निर्मित सरदार सरोवर, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर परियोजनाओं से प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि के द्वार खुल गये हैं । भारतीय जनता पार्टी की सरकार के शासन काल में नर्मदा को क्षिप्रा से जोड़ा जा चुका है ।

केन्द्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अव्वल

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दिशा-निर्देशन में मध्यप्रदेश तेजी से विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। केन्द्र सरकार की प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन और उनका लाभ पात्र हितग्राहियों को दिलाने में म.प्र. देश में लगातार अग्रणी बना हुआ है । पीएम स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएम आवास योजना, कृषि अवसंरचना निधि, प्रधानमंत्री मातृ-वंदना योजना, पीएम स्वामित्व योजना, नशामुक्त भारत अभियान, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, राष्ट्रीय आजीविका मिशन और स्वच्छ भारत मिशन आदि योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश देश में सबसे अग्रणी है ।
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में मध्यप्रदेश में 8 लाख 50 हजार से ज्यादा आवास बनाए जा चुके हैं । प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में प्रदेश में लगभग 38 लाख आवासों का निर्माण किया जा चुका है । प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत म.प्र. में 89,612 किलोमीटर लंबी सड़कें बन चुकी हैं । किसान क्रेडिट कार्ड योजना में 65.83 लाख से अधिक किसानों के क्रेडिट कार्ड तैयार हो गए हैं । अटल पेंशन योजना में 498,111 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है । पीएम स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में म.प्र. देश में पहले नम्बर पर है ।
यह एक सुखद पक्ष है कि मध्यप्रदेश सरकार की दूरगामी सोच के चलते कृषि क्षेत्र में उन्नति, औद्योगिक विकास, आईटी एवं पर्यटन में बढ़ते सेवा-क्षेत्रों से राज्य के आर्थिक विकास को मजबूती मिल रही है । वित्तीय वर्ष 2024 -2025 में प्रदेश में प्रति व्यक्ति की आय 1 लाख 52 हजार 615 रुपए हो गयी है । म.प्र. की कृषि विकास दर देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है । म.प्र. गेहूं निर्यात के मामले में देश में नम्बर एक पर है । इसी प्रकार 2024-2025 में प्रदेश में 225.75 लाख टन दूध का उत्पादन हुआ,जिससे मध्यप्रदेश देश में दुग्ध उत्पादन में तीसरे नम्बर पर है । यशस्वी प्रधानमंत्री द्वारा मुख्य मंत्री किसान योजना के तहत प्रदेश के 83 लाख से अधिक किसानों के खाते में 17,500 करोड़ रुपए की सहायता राशि का अंतरण किया गया ।
मध्यप्रदेश में बिजली की बात की जाए तो विद्युत उत्पादन की स्थापित क्षमता 23,000 मेगावाट है, जिसमें 17125 मेगावाट बिजली पारंपरिक स्रोत से तथा 5,875 मेगावाट नवकरणीय ऊर्जा स्रोत से उत्पादित हो रही है । प्रदेश में कृषि और उद्योगों को जरूरत के हिसाब से पर्याप्त बिजली मिल रही है । मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार विस्तार कर रही है । प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना में 4.26 करोड़ हितग्रहियों को डिजिटल आयुष्मान कार्ड जारी किये जा चुके हैं । आयुष्मान भारत योजना में सरकार प्रति वर्ष प्रति परिवार 5 लाख रुपए तक अस्पताल में भर्ती व्यय प्रदान करती है। आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन में म.प्र. देश का प्रथम राज्य बन चुका है ।

म.प्र. में बेटी बोझ नहीं, वरदान

मध्यप्रदेश में बेटी अब बोझ न होकर वरदान बन गयी है । प्रदेश की महिलाओं के कल्याणार्थ राज्य सरकार द्वारा तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं । लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्मी, कन्यादान योजनाओं द्वारा महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस कदम है । इन लाभकारी योजनाओं का अनुसरण देश के कई राज्यों ने किया है । इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से महिलाओं के स्वास्थ्य व पोषण स्तर में सुधार आया है । म.प्र में लाड़ली बहना योजना के तहत 1.27 करोड़ महिलाओं को प्रति माह 1500 रुपए दिये जा रहे हैं।
म.प्र. में महिला सशक्तिकरण का नया अध्‍याय मुख्‍यमंत्री के नेतृत्‍व में लिखा जा रहा है । प्रदेश सरकार की अनेक योजनायें महिलाओं के उत्‍थान में सहायक हो रही हैं । मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से प्रदेश में सामूहिक विवाह प्रथा आरंभ हुई है । इस योजना में प्रदेश सरकार नवविवाहितों को आर्थिक सहायता देती है । ‘बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत बेटियों को हायर सेकण्डरी तक निःशुल्क शिक्षा का प्रावधान है ।

अपार संभावनाएं हैं मध्यप्रदेश में

मध्यप्रदेश में जिस तेजी के साथ तरक्की की रफ्तार बढ़ रही है और आम आदमी को सरकारी योजनाओं का भरपूर फायदा मिल रहा है, उसके मद्देनजर यह कहा जा सकता है कि म.प्र. अपार संभावनाओं वाला प्रदेश बन रहा है । इसमें समृद्ध राज्य बनने की क्षमता तथा संसाधन दोनों मौजूद हैं। प्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर हम सबको मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प लेने की जरूरत है । मध्यप्रदेश के निवासियों के लिए यह गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मध्यप्रदेश से आत्मीय लगाव है । उनका जब भी मध्यप्रदेश आगमन होता है तो वे प्रदेश को कोई न कोई बड़ी सौगात देकर ही जाते हैं । उम्मीद की जानी चाहिए कि यशस्वी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश विकास की तीव्र उड़ान भरेगा । मध्यप्रदेश की विकास यात्रा में हमें यथासामर्थ्य अपनी जिम्मेदारी निभाने की आवश्यकता है । यह आत्मबोध हमारे सुनहरे भविष्य का पर्याय बनेगा । मध्यप्रदेश के 70वें स्‍थापना दिवस के सुअवसर पर प्रदेशवासियों की खुशहाली व सुख-समृद्धि के लिए मेरी हार्दिक मंगलकामनायें ।

(विनायक फीचर्स) (लेखक भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री हैं)

मध्यप्रदेश : विकास और समृद्धि की ओर बढ़ते कदम

0

(जगदीश देवड़ा -विभूति फीचर्स)

मध्यप्रदेश अपनी स्थापना की 70 वीं वर्षगांठ मना रहा है। सभी नागरिकों को बधाई और शुभकामनाएं। प्रदेश के नागरिकों के लिए यह शुभ अवसर है। उत्साह और उल्लास के साथ यह अवसर प्रदेश की उपलब्धियों पर गर्व करने का है। आज उन सभी महान विभूतियों को याद करने का भी अवसर है, जिन्होंने मध्यप्रदेश के निर्माण में अपना योगदान दिया।
आज हम इस बात को दृढ़ आत्मविश्वास के साथ कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश अब पूरी तरह से बदल चुका है। अब और अधिक ऊंचाइयां तय करने के लिए तैयार है। मध्यप्रदेश के सामने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य है। भारत के अमृतकाल में मध्यप्रदेश ने भी अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए हैं। वर्ष 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का निर्माण करना सर्वोच्च लक्ष्य है। इसे हासिल करते हुए मध्यप्रदेश स्वयं भी पूर्ण रूप से विकसित राज्य बन जाएगा। अर्थव्यवस्था की दृष्टि से मध्यप्रदेश आज महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने के लिये तैयार है। मध्यप्रदेश अपनी युवा शक्ति के साथ आर्थिक विकास को तेज गति से आगे ले जाने की क्षमता रखता है। मध्यप्रदेश की धरा पर हर जरूरी संसाधन है जो विकास के लिए आधार स्तंभ हैं। कृषि क्षेत्र में खाद्यान्न, दलहन उत्पादन में अग्रणी राज्य में है। आधुनिक सिंचाई की आदर्श संरचनाएं स्थापित है। बिजली की भरपूर उपलब्धता है। ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार और पर्याप्त औद्योगिक निवेश है। उद्योगों के लिए 1.2 लाख एकड़ से ज्यादा लैंड-बैंक है। वर्तमान में 112 से ज्यादा औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहे हैं । साथ ही 14 ग्रीन फील्ड औद्योगिक स्थलों की भी पहचान की गई है। उद्योगों के लिए सबसे जरूरी आकर्षक नीतियां मध्यप्रदेश ने बनाई है, जिससे प्रदेश में व्यवसाय करना बहुत आसान हो गया है।
प्राकृतिक संसाधनों की समृद्धि के लिए मध्यप्रदेश विख्यात है। यहां की जमीन उपजाऊ है, जल संसाधनों की कमी नहीं है। भारत की सबसे बड़ी वन संपदा प्रदेश में उपलब्ध है। समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी है। वर्ष 2029 तक राज्य की जीएसडीपी दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने एक ऐसे समाज की कल्पना की है जहां गरीब से गरीब व्यक्ति भी समृद्ध हो।
संपूर्ण विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य को आर्थिक विकास, भौतिक अधोसंरचना, सामाजिक अधोसंरचना निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रयास करने होंगे। इसके लिए इसी वर्ष चार प्रमुख मिशनों को लांच किया गया है। इसका उद्देश्य गरीब, युवा, किसान और नारी शक्ति को सशक्त बनाना है। यह चार मिशन मध्यप्रदेश 2047 के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए आधार स्तंभ साबित होंगे।
मध्यप्रदेश उद्योग और सेवाओं पर आधारित अर्थव्यवस्था की संरचना और रणनीति में बदलाव की योजना बना रहा है। अगले 10 वर्षों में राज्य में उद्योग और सेवाओं में वृद्धि होगी क्योंकि निवेश और उत्पादन मध्यप्रदेश देश के निर्माण क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। वैश्विक स्तर पर उत्पादन बढ़ाने और स्थानीय ग्रामीण उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर को सशक्त बनाने की ओर हम अग्रसर हैं। स्वदेशी की अवधारणा को मध्यप्रदेश में पल्लवित होने का एक अनुकूल वातावरण मिला है। स्वदेशी अर्थव्यवस्था को अपनाकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सक्षम नेतृत्व में हम सभी स्वदेशी अर्थव्यवस्था को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सबसे जरूरी कृषि और संबंधित क्षेत्रों के विकास करना, इसके लिए क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देकर किसानों को मदद की जाएगी। एग्रो प्रोसेसिंग हब, कोल्ड चैन, बाजार संपर्क, उत्पादों के मूल संवर्धन को अधिकतम करते हुए एक विस्तृत रोड मैप तैयार किया जाएगा।

भौतिक अधोसरंचना में सिंचाई एक बड़ा क्षेत्र है। मध्यप्रदेश की तैयारी है कि 2029 तक शुद्ध बोए गए क्षेत्र में सिंचाई का क्षेत्र 85% तक पहुंच जाए। इसी प्रकार वर्ष 2030 तक ऊर्जा क्षेत्र में 50% नवकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। ऊर्जा की वर्तमान स्थापित क्षमता 27109 मेगावाट है जिसे 2029 तक बढ़कर 60,000 मेगावाट करना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में जिस प्रकार से नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश आ रहा है उससे यह लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाएगा। सामाजिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्कूल शिक्षा में सकल नामांकन दर को 2029 तक 90% और उच्च शिक्षा में 35% तक ले जाने का लक्ष्य है।

इसी प्रकार स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना को भी निरंतर मजबूत बनाने के प्रयास हैं। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 8000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश करने की योजना बना रहे हैं। मध्यप्रदेश खुद को एक क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है जिसमें उज्जैन मेडिसिटी जैसी पहल शामिल है। इसी प्रकार शहरों की अधोसंरचना सुधारने के लिए स्थानीय निकायों को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाया जा रहा है। ग्राम पंचायत को निरंतर सक्षम बनाने का काम चल रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मूल मंत्र है सबका साथ सबका विकास। इसे आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश विकास की नई ऊंचाइयां छूने के लिए तैयार है। नागरिकों के सहयोग से विकास के नए लक्ष्यों को प्राप्त करना कठिन नहीं है। भारत देश परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और साथ ही मध्यप्रदेश भी तेजी से बदल रहा है। एक बार पुनः मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। (विभूति फीचर्स) *(लेखक मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री हैं)

अपोलो कैंसर सेंटर्स ने स्तन कैंसर जागरूकता के लिए की ‘चेक-ओलेट’ नामक एक अनूठी पहल

0

 

मुंबई। स्तन कैंसर जागरूकता माह में अपोलो कैंसर सेंटर्स ने ‘चेक-ओलेट’ नामक एक अनूठी पहल शुरू की है, जो खानपान को जागरूकता के साथ जोड़ती है एक मीठा उपहार जो एक और भी मीठा संदेश देता है अपने लिए एक पल निकालें। ग्लोबोकैन के अनुसार, भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर मृत्यु दर का प्रमुख कारण बना हुआ है, जो सभी नए कैंसर मामलों का 13.5% और कुल कैंसर से होने वाली मौतों का 10.6% है। इस बढ़ते बोझ के बावजूद, स्क्रीनिंग दरें चिंताजनक रूप से कम हैं 30 से 69 वर्ष की आयु वर्ग की केवल 1.6% महिलाओं ने ही कभी स्क्रीनिंग करवाई है (NCBI)। अधिक जागरूकता और सक्रिय रोकथाम की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, अपोलो कैंसर सेंटर्स का उद्देश्य ‘चेक-ओलेट’ के माध्यम से आत्म-देखभाल को सामान्य बनाना और महिलाओं को स्तन आत्म-परीक्षा को मासिक अनुष्ठान बनाने के लिए सशक्त बनाना है, ताकि वे शुरुआती चरण में ही अपने स्वास्थ्य की ज़िम्मेदारी ले सकें।

डॉ. प्रीथा रेड्डी (कार्यकारी उपाध्यक्ष, अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज लिमिटेड) ने कहा,“जब महिलाएं स्वस्थ होती हैं, तो राष्ट्र समृद्ध होते हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य अंतर को कम करने से 2040 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में हर वर्ष लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर का इज़ाफा हो सकता है। ‘चेक-ओलेट’ पहल इस मिशन में एक और सार्थक कदम है, जो महिलाओं को याद दिलाती है कि आत्म-देखभाल कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि शक्ति है जो एक स्वस्थ, मजबूत और अधिक समृद्ध भारत को आगे बढ़ाती है।”

अभिनेत्री-लेखिका टिस्का चोपड़ा ने कहा,“हर कोई चॉकलेट पसंद करता है। ‘चेक-ओलेट’ को खास बनाता है कि यह किसी ऐसी चीज़ को लेता है जिसे हर कोई पसंद करता है, और उसे महिलाओं को खुद की देखभाल करने के लिए एक सौम्य अनुस्मारक में बदल देता है। मुझे लगता है, जागरूकता को कार्रवाई में बदलने और महिलाओं को अपने स्वास्थ्य को बेहतर समझने के लिए सशक्त बनाने का यह एक रचनात्मक और विचारशील तरीका है।

डॉ. नीता नायर (लीड कंसल्टेंट-ब्रेस्ट ऑन्कोलॉजिस्ट, अपोलो कैंसर सेंटर्स, नवी मुंबई) ने कहा,“डार्क चॉकलेट, जो अपने एंटीऑक्सीडेंट और मूड-बढ़ाने वाले फायदों के लिए जानी जाती है, देखभाल का एक सुकूनभरा संदेश बन जाती है यह याद दिलाते हुए कि हर महीने कुछ मिनटों की एक साधारण आत्म-परीक्षा बहुत बड़ा फर्क ला सकती है।

NCBI के अनुसार, डार्क चॉकलेट एंटीऑक्सीडेंट और फ्लेवोनोइड्स से भरपूर होती है, जो सूजन को कम करने, हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और मूड को ठीक करने में मदद करती है। शोध यह भी दर्शाता है कि यह त्वचा, हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे यह केवल स्वाद के लिए नहीं बल्कि एक सार्थक अनुस्मारक बन जाती है कि अपने स्वास्थ्य की देखभाल करना भी एक सुकूनदायक अनुभव हो सकता है। ‘चेक-ओलेट’ सिर्फ स्तन कैंसर जागरूकता माह की पहल नहीं है; यह एक आंदोलन है जो महिलाओं को सरल और सार्थक अनुष्ठानों के माध्यम से अपने स्वास्थ्य पर फिर से नियंत्रण पाने में मदद करता है। खानपान के एक पल को आत्म-देखभाल के प्रेरक संकेत में बदलकर, अपोलो कैंसर सेंटर्स यह परिभाषित कर रहा है कि स्वास्थ्य सेवा संवाद किस प्रकार सहानुभूति, रचनात्मकता और उद्देश्य के साथ जुड़ सकता है। ‘चेक-ओलेट’ की हर डार्क चॉकलेट पट्टी पर एक QR कोड होता है, जिसे स्कैन करने पर स्तन आत्म-परीक्षा की चरण-दर-चरण गाइड दिखाने वाला एक एनिमेटेड वीडियो खुलता है।

कई म्यूजिक वीडियो में अपना जलवा दिखा चुकी है शुभति दास

0

 

बंगाल की प्रतिभाशाली अभिनेत्री शुभति दास अब बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में अपने अभिनय का जलवा बिखेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अपनी बेहतरीन अदाकारी से बांग्ला और बांग्लादेशी म्यूज़िक वीडियो, वेब सीरीज़ और टीवी शोज़ में दर्शकों का दिल जीत चुकी शुभति अब मायानगरी मुंबई की ओर कदम बढ़ा चुकी हैं।

शुभति सिर्फ एक बेहतरीन एक्ट्रेस ही नहीं, बल्कि एक सफल मॉडल और इन्फ्लुएंसर भी हैं। सोशल मीडिया पर उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है — इंस्टाग्राम पर एक लाख छब्बीस हजार से अधिक फॉलोअर्स उनके टैलेंट और लोकप्रियता का सबूत हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इवेंट्स और अवॉर्ड शोज़ में वह अक्सर बतौर चीफ गेस्ट आमंत्रित की जाती हैं। दुबई, लंदन और थाईलैंड जैसे देशों में इवेंट्स को कवर करते हुए उन्होंने अपनी ग्लोबल पहचान बनाई है।

ज़ी बांग्ला के सुपरहिट टीवी शो ‘की कोरो बोलबो तुमाय’ में शुभति के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। इसके बाद उन्होंने कई हिंदी और बांग्ला म्यूज़िक वीडियो सांग्स और कई हिंदी वेब सीरीज़ में दमदार भूमिकाएं निभाईं। अभी तक वह चार से अधिक म्यूज़िक वीडियो में अपनी अदाकारी का जलवा दिखा चुकी हैं।

शुभति ने बीएससी ऑनर्स और पैरामेडिकल की पढ़ाई की है। उनके करियर की शुरुआत एक मॉडल के रूप में हुई, जब उन्होंने अपने रिश्तेदार के ब्यूटी पार्लर और स्पा के लिए मॉडलिंग की और वहीं से उनकी लोकप्रियता का सफर शुरू हुआ। लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने उन्हें प्रेरित किया और फिर उन्होंने सोशल मीडिया पर मोटिवेशनल, ग्लैमरस और ब्यूटी वीडियोस बनाना शुरू किया, जो वायरल हो गए।

एक कलाकार होने के साथ-साथ शुभति एक बेहतरीन गिटार प्लेयर हैं और उन्हें पेंटिंग व गार्डनिंग का भी बेहद शौक है। अभिनय उनके लिए सिर्फ करियर नहीं, बल्कि जुनून है। वह कहती हैं — “सपने देखो और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करो। हार मत मानो, सफलता जरूर मिलेगी।”

शुभति को निर्देशक राजामौली, संजय लीला भंसाली, करण जौहर और मोहित सूरी की फिल्में बेहद पसंद हैं, और वह भविष्य में इन निर्देशकों के साथ काम करने का सपना देखती हैं। उनके पसंदीदा अभिनेता शाहरुख खान, और पसंदीदा अभिनेत्रियाँ माधुरी दीक्षित व ऐश्वर्या राय हैं। उन्हें ‘तारे ज़मीन पर’, ‘पद्मावत’, ‘मर्दानी’, ‘आर्टिकल 15’ और ‘चंदू चैंपियन’ जैसी प्रेरणादायक व सस्पेंस-थ्रिल से भरपूर फ़िल्में देखना पसंद है। वह कहती हैं कि वह हर तरह के किरदार निभाने में सक्षम हैं, लेकिन उनका सपना एक मजबूत और प्रभावशाली महिला किरदार निभाने का है।

फिलहाल शुभति का नया टी-सीरीज़ म्यूज़िक वीडियो रिलीज़ होने वाला है, जिसे लेकर वह बेहद उत्साहित हैं। आने वाले समय में वह हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में अपने बेहतरीन अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने को तैयार हैं।

शुभति एक ऐसा नाम है जो जल्द ही बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के आसमान में चमकता सितारा बनने जा रहा है।

आरएसडब्ल्यूए और रियल्टी क्वॉर्टर्स द्वारा “इंडियन रियल एस्टेट शिखर सम्मेलन और लीडरशिप अवॉर्ड 2025” आयोजित

0

 

मुंबई। आरएसडब्ल्यूए और रियल्टी क्वार्टर ने 15 अक्टूबर को मुंबई के लेमन ट्री में “इंडियन रियल एस्टेट शिखर सम्मेलन और लीडरशिप अवॉर्ड 2025” का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह कार्यक्रम आदिराज इंडस्ट्रीज, ओम गायत्री बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, सोहा ग्रुप और मिड टाउन द्वारा प्रायोजित था।

आरएसडब्ल्यूए और रियल्टी क्वार्टर ने पहली बार वीवीएमसी और पालघर जिले की रियल एस्टेट विकास की कहानी को इस कार्यक्रम के माध्यम से आगे बढ़ाया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सुभाष दलवी, डॉ. अजय लक्ष्मीकांत दुबे, दिलशाद एस. खान, चिंतन वासानी और अधिवक्ता वी. विश्वनाथन थे। और अन्य सम्मानित अतिथि रूपल सिंह, डॉ. गरिमा आनंदानी, अभिनेत्री और मॉडल मुस्कान जैन और विशाल चूवाला थे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अधिवक्ता वी. विश्वनाथन और कीर्ति मोहन सिंह वक्ता थीं।

पैनल का विषय “वीवीएमसी और पालघर जिला रियल एस्टेट की विकास गाथा और सरकार द्वारा भविष्य में किए जाने वाले बुनियादी ढाँचे के विकास के अनुसार निवेश के अवसर” था।

कार्यक्रम के संचालक सिद्धांत ठाकुर थे। वहीं डॉ. सुभाष दलवी, डॉ. अजय एल. दुबे, चिंतन वसानी, रमेश मुकुंद, जगदीश खड़तरे, नीलेश शाह, मौलिक वीरेंद्र शाह, सतीश चव्हाण पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए।

पुरस्कार निम्नलिखित श्रेणियों में दिए गए हैं :-

• “वर्ष 2025 का सर्वश्रेष्ठ किफायती प्रोजेक्ट” – अब्दुल शेख द्वारा सोहा ग्रुप को प्राप्त हुआ।

• “वर्ष 2025 के सबसे युवा रियल एस्टेट सलाहकार” का पुरस्कार विवेक अजय दुबे को दिया गया।

• “वर्ष 2025 का सर्वश्रेष्ठ किफायती लक्जरी प्रोजेक्ट” टेकटन/अखंड ग्रुप को महेंद्र मोरे द्वारा प्राप्त हुआ।

• “वर्ष 2025 का सर्वश्रेष्ठ अल्ट्रा लक्ज़री प्रोजेक्ट” आदिराज सिग्नेचर, परेश किनी द्वारा प्राप्त किया गया।

• “वर्ष 2025 का सर्वश्रेष्ठ दूसरा घरेलू और किफायती प्रोजेक्ट” ओम गायत्री बिल्डर्स एंड डेवलपर्स, मौलिक वीरेंद्र शाह और अमित सतीश वाधवा द्वारा प्राप्त किया गया।

• सर्वश्रेष्ठ मीडिया में मराठी दैनिक समाचार पत्र ऑफ द ईयर 2025″ मीडिया वार्ता समाचार, भागूराम यशवंत सावंत को प्राप्त हुआ।

•”सर्वश्रेष्ठ रियल एस्टेट युवा उद्यमी ऑफ द ईयर 2025” करण ठाकर को प्रदान किया गया।

• “वर्ष 2025 के लक्जरी प्रोजेक्ट में सर्वश्रेष्ठ उन्नयन” से रमेश मुकुंद को सम्मानित किया गया।

• “वर्ष 2025 का सर्वश्रेष्ठ प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट” मिड टाउन, नेहा को प्राप्त हुआ।

• “सर्वश्रेष्ठ उभरता हुआ वर्ष 2025 की सर्वश्रेष्ठ उभरती और सबसे तेज़ परियोजना बिक्री वाली कंपनी” का पुरस्कार राजेश नायर द्वारा FIA ​​डेवलपर को प्रदान किया गया।

• वर्ष 2025 के सर्वश्रेष्ठ नवोन्मेषी रणनीतिकार का पुरस्कार सिद्धांत डी. ठाकुर को प्रदान किया गया।

• वर्ष 2025 की सर्वश्रेष्ठ सहायक इवेंट कंपनी का पुरस्कार नमः इवेंट्स को प्रदान किया गया।

• वर्ष 2025 के सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफर का विशेष श्रेणी पुरस्कार गैरी सर को प्रदान किया गया।

• वर्ष 2025 के युवा उपलब्धि पुरस्कार का पुरस्कार अज़हर करारी को प्रदान किया गया।

• वर्ष 2025 की सबसे विश्वसनीय रियल एस्टेट कंपनी का पुरस्कार इंद्रजीत डीप ग्रुप को प्रदान किया गया।

• “वर्ष 2025 का सर्वश्रेष्ठ रियल एस्टेट कंसल्टेंट – पालगहर जिला” का पुरस्कार मोहन सिंह को प्रदान किया गया।
पवन चौहान, सतीश चव्हाण और संजय पड़वा इस कार्यक्रम के आयोजक थे।

गन्ना किसानों को योगी सरकार का बड़ा उपहार

0

 

मुंबई। योगी सरकार ने एक बार फिर गन्ना किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुन्तल की वृद्धि की गई है। उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी के अनुसार अब अगेती गन्ना प्रजाति का मूल्य 400 रुपये प्रति कुन्तल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य 390 रुपये प्रति कुन्तल निर्धारित किया गया है। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान होगा। योगी सरकार के कार्यकाल में यह चौथी बार है जब गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। यह निर्णय न केवल गन्ना किसानों की आमदनी में वृद्धि करेगा, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा भी भरेगा।

मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि किसानों के परिश्रम का सम्मान करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। गन्ना किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था के सशक्त स्तंभ हैं। गन्ना हमारे ग्रामीण जीवन और अर्थव्यवस्था का आधार है और हर किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य सही समय पर उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है।

उन्होंने बताया कि गन्ना किसानों को अब तक 2,90,225 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो वर्ष 2007 से 2017 के बीच सपा और बसपा सरकारों में किसानों को कुल मात्र 1,47,346 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था। इस प्रकार सरकार ने मात्र साढ़े आठ वर्षों में पिछली सरकारों के मुकाबले 1,42,879 करोड़ रुपये अधिक भुगतान कर नया इतिहास रचा है।

मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 122 चीनी मिलें संचालित हैं, जिससे उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में जहां 21 मिलें औने-पौने दामों पर बेची गई थीं, वहीं सरकार के पारदर्शी प्रबंधन और निवेशोन्मुख नीतियों से इस उद्योग में 12,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ है। पिछले आठ वर्षों में 4 नई चीनी मिलें स्थापित की गईं, 6 बंद मिलें पुनः शुरू की गईं और 42 मिलों की उत्पादन क्षमता में विस्तार हुआ। इससे प्रदेश में 8 नई बड़ी मिलों के बराबर उत्पादन क्षमता में वृद्धि दर्ज हुई है। साथ ही, 2 मिलों में सीबीजी संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिससे गन्ना क्षेत्र में वैकल्पिक ऊर्जा उत्पादन को भी बल मिला है।

प्रदेश सरकार की अभिनव पहल ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली के माध्यम से गन्ना क्षेत्रफल, सट्टा, कैलेंडरिंग और पर्ची जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। अब किसानों को उनकी गन्ना पर्ची सीधे मोबाइल पर प्राप्त होती है और भुगतान डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में पहुंचता है। इस प्रणाली को भारत सरकार ने ‘मॉडल सिस्टम’ घोषित किया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है।

एथेनॉल उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि सरकार के प्रयासों से राज्य में एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है और आसवनियों की संख्या 61 से बढ़कर 97 हो गई है। गन्ना क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में गन्ना क्षेत्रफल 20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 29.51 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है, जिससे उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर आ गया है।

नगर के राठौर कॉलोनी में घुस आई नील गाय गौसेवकों ने वन विभाग के साथ बचाव कार्य किया

0

 

मुरैना:- थाना कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत राठौर कॉलोनी में एक नील गाय घुस आई जिसके पीछे कुत्ते पड़ गए और मोहल्ले में भगदड़ मच गई,जिसको स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत करके काबू किया और एक घर में बंद कर दी। फिर स्थानीय लोगों ने गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह को सूचना दी सूचना मिलते ही गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह मौके पर पहुंचे और स्थानीय गौसेवक महेश राठौर भी मौके पर आ गए फिर गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह ने वन विभाग को कॉल किया जहां वनरक्षक संतोष कुशवाह व संजय कुमार आए और गौसेवकों की मदद से उसे लोडिंग वाहन में लादा फिर क्वारी नदी के बीहड़ में छोड़ कर आए।
मौके पर गौ रक्षा दल के गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह,महेश राठौर के अलावा राजू राठौर,हर्ष गौड़,अक्षय,सौरभ कुशवाह,राहुल राठौर आदि मौजूद रहे।

करंट से चिपककर 2 गौवंश की हुई मौत

0

, कार्यवाही नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन, वर्ष भर में सैकड़ों गौवंश की करंट लगने से हो चुकी है मौत

मुरैना:- थाना कोतवाली क्षेत्र के दत्तपुरा और पीपल वाली माता मंदिर चौराहे पर गौवंश की करंट से चिपककर मौत हो गई। सूचना मिलते ही गौसेवक महेश राठौर व अभिषेक गौड़ मौके पर पहुंचे और दत्तपुरा से गौवंश को उठवाकर नगर निगम भेजा फिर गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह अपनी टीम के साथ पीपल वाली माता के पास पहुंचे और गौवंश को बुलडोजर मशीन से उठवाकर बिजली घर लेकर पहुंचे जहां बिजली विभाग का घेराव किया और नारेबाजी की जिसके बाद बिजली विभाग के उपमहाप्रबंध यशपाल सचदेवा आए और गौसेवकों से बात की लेकिन बात नहीं बनी फिर महाप्रबंधक राकेश मौर्य से गौसेवकों की बातचीत हुई जिन्होंने आश्वाशन दिया कि जल्द ही ट्रांसफार्मरों को जालियों से सुरक्षित करेंगे।
गौसेवक रुद्रप्रताप सिंह ने कहा कि जल्द कार्यवाही नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा व पहले भी कई बार कई जगह सैकड़ों गौवंश की करंट से चिपककर मौत हो चुकी है लेकिन प्रशाशन गहरी नींद में सोया हुआ है नगर निगम की भी बड़ी लापरवाही है क्योंकि जहां ट्रांसफार्मर रखे है वहीं कचरे के डंपिंग स्टॉप बनाए है जिससे गौवंश कचरा खाते हैं और करंट से चिपककर मर जाते है। घेराव करने वालो में गौ रक्षा दल के प्रदेश महामंत्री रुद्रप्रताप सिंह,पवन गुर्जर,महेश राठौर,अक्षय गौड़,गौतम,संजय बजरंगी,आलोक आदि मौजूद रहे

गोपाष्टमी के दिन गाय को क्या खिलाएं?

0

गोपाष्टमी का त्यौहार गाय माता के प्रति हमारी श्रद्धा और सम्मान को दर्शाता है क्योंकि हिंदू धर्म में गाय को ‘गौ माता’ कहा जाता है और उसमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व के दिन भगवान श्री कृष्ण ने पहली बार गौ-चारण लीला शुरू की थी। इसलिए इस पवित्र दिन पर गायों की सेवा और उन्हें कुछ खास चीजें खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है, सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और जीवन से दरिद्रता दूर होती है। गोपाष्टमी के अवसर पर गौ माता को विशेष रूप से खिलाने वाली ये 5 चीजें आपके जीवन में सकारात्मकता और शुभता ला सकती हैं। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।

गोपाष्टमी के दिन गाय को क्या खिलाएं?

गाय को हरा चारा, खासकर हरी मटर खिलाना सबसे उत्तम माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि गाय को हरा चारा खिलाने से बुध ग्रह मजबूत होता है जिससे बुद्धि, व्यापार और वाणी में वृद्धि होती है। यह बच्चों के जीवन में खुशहाली और तरक्की सुनिश्चित करने के लिए भी एक अच्छा उपाय है।गोपाष्टमी के दिन गाय को गुड़ खिलाने का विशेष महत्व है। गुड़ खिलाने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति को समाज में यश, मान-सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है। यह आपकी किस्मत को चमकाने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने में भी मदद करता है।

गौ माता को रोटी, विशेषकर घी लगी रोटी या उबले हुए चावल में मीठा मिलाकर खिलाने से घर में धन की देवी मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। यह उपाय आपके परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाता है और पारिवारिक समस्याओं को दूर करने में सहायक होता है।

अगर आप अपने धन में वृद्धि चाहते हैं, तो 1 साबुत हल्दी और 5 सफेद कौड़ियों को गाय के माथे से छूकर अपने घर के पूजा स्थान या तिजोरी में रख लें। हालांकि, कौड़ी सीधे खिलाई नहीं जाती बल्कि उसे छूकर गाय माता का आशीर्वाद लिया जाता है।

गोपाष्टमी के दिन गौ माता की पूजा के बाद उन्हें पंचामृत अर्पित करना या पंचामृत से बनी किसी चीज का भोग लगाना शुभ माना जाता है। यह उपाय सभी तरह के पापों से मुक्ति दिलाता है और आपके मन तथा शरीर को पवित्र करता है।

गोपाष्टमी पर इस विधि से करें गौ माता की पूजा

0

Gopashtami Puja Vidhi at Home: हर साल गोपाष्टमी का त्योहार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल गोपाष्टमी का त्योहार 30 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस अवसर पर भगवान श्री कृष्ण और गौ माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और साथ में प्रिय भोग भी अर्पित किए जाते हैं। गोपाष्टमी पर्व को लेकर एक मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण और बलराम को गायों को चराने के लिए पहली बार भेजा गया था। इस दिन से ही श्री कृष्ण ने गोचारण लीला शुरू की थी।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गौ माता और श्री कृष्ण की उपासना करने से जातक को आशीर्वाद प्राप्त होता है और साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। यह त्योहार मुख्य रूप से वृंदावन, ब्रज और मथुरा में उत्साह के साथ मनाया जाता है। आइए जानते है कि गोपाष्टमी पर गौ पूजा कैसे करें और इसके क्या नियम हैं।

Gau Puja Vidhi: गोपाष्टमी पूजा एवं सेवा विधि

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, उसके बाद गौ माता को स्नान करवाएं।
  2. पूजा स्थल को गोबर, फूलों, दीपक और रंगोली से सजाएं।
  3. मंदिर में गौ माता और श्री कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें।
  4. फिर गौ माता के माथे पर रोली और चन्दन लगाएं, पुष्प अर्पित करें।
  5. उनके खुरों पर हल्दी और तेल लगाकर आरती करें।
  6. इसके बाद गाय की परिक्रमा भी करें।
  7. “गोपाल गोविंद जय जय” और “गोमाता की जय” मंत्र का जाप करें।
  8. गाय को हरी घास, चारा और गुड़ खिलाएं।

Ghar Par Gau Puja Kaise Karen: जानें कैसे करें पूजा

  • अगर आपके घर पर गाय नहीं है, तो आप मंदिर में गौ माता की प्रतिमा स्थापित करके पूजा-पाठ करें।
  • गौशाला जाकर गाय की सेवा कर सकते हैं।
  • गौशाला में गायों को भोजन करा सकते हैं, दान दे सकते हैं और उनकी देखभाल भी कर सकते हैं।
  • अपनी क्षमतानुसार गौसेवा करें, इससे श्री कृष्ण भी प्रसन्न होंगे।
  • अगर गोशाला नहीं है, तो आपके आस-पास इलाके में आपको कई आवारा गाय दिख जाएंगी। आप उनकी भी सेवा कर सकते हैं।

Gau Seva: गौ सेवा के लाभ

मान्यता है कि गोपाष्टमी पर की गई गौ सेवा से पापों से मुक्ति मिलती है। इससे परिवार में शांति, आर्थिक सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। यह दिन विशेष विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ माना जाता है, जिनके जीवन में कई बाधाएं आती हैं और मानसिक तनाव रहता है। जो भी साधक सच्चे मन से गौ माता की सेवा करता है, उसे श्री कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।