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गाय के प्रति ऐसा प्रेम कि ढोल-थाली के साथ निकाली अंतिम यात्रा

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पाली के बिजनेसमैन जगदीश रावल ने 15 साल तक अपनी प्रिय गाय ‘काजल’ की सेवा की. उसकी मृत्यु पर उन्होंने शोक संदेश पत्रिका छपवाई और फार्म हाउस में ढोल-थाली के साथ अंतिम यात्रा निकाली. रावल 7 बीघा जमीन पर 12 बेसहारा गायों की देखभाल करते हैं और सभी गायों के नाम परिवार के सदस्यों पर रखते हैं. शोक सभा और प्रसादी में गांव के लोग शामिल हुए और गायों के लिए लापसी बनाई गई. उनका फार्म पूरी तरह गोवंश की सेवा के लिए समर्पित है.

पाली. राजस्थान के पाली जिले में एक ऐसा शोक संदेश सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया. यह शोक संदेश किसी इंसान का नहीं, बल्कि एक गौ माता का था. एक बिजनेसमैन ने इसे अपने परिवार के सदस्य की तरह 15 साल तक सेवा की और फार्म पर मृत्यु के बाद शोक सभा तथा प्रसादी का आयोजन भी किया. यह अनोखा शोक संदेश पत्रिका से लेकर पूरे राजस्थान ही नहीं, देश भर में चर्चा का केंद्र बन चुका है. हम बात कर रहे हैं पाली के बिजनेसमैन और गोसेवक जगदीश रावल की, जिन्होंने 15 साल तक एक गाय की सेवा की.

16 दिसंबर को उनकी सबसे प्रिय गाय ‘काजल’ की मौत हो गई. इसके लिए उन्होंने शोक संदेश की पत्रिका छपवाई. इतना ही नहीं, 26 दिसंबर को अपने फार्म हाउस पर शोक सभा और प्रसादी का आयोजन भी रखा, जिसके लिए गांव के लोगों को निमंत्रण भेजा गया. खास बात यह है कि उन्होंने अपनी बाकी गायों के नाम पत्नी, बेटी, बहू और भाइयों की पत्नियों के नाम पर रखे हैं.  जगदीश कुमार का गुजरात के सिलवासा में इलेक्ट्रिक सामान का बिजनेस है. जगदीश ने बताया कि 15 साल पहले आहोर में रहने वाले उनके भांजे राकेश रावल ने गोतस्करी के लिए ले जाए जा रही गायों में से एक गाय पकड़ी थी. इसमें से एक गाय उन्हें गिफ्ट की गई, जिसका नाम उन्होंने काजल रखा. जगदीश रावल ने बताया कि काजल के आने के बाद उनके मन में गोसेवा का भाव जागृत हुआ. तखतगढ़ गांव के पास बलाना में उनका 7 बीघा का फार्म हाउस है. इसी फार्म हाउस में उन्होंने काजल को रखा और उसकी सेवा शुरू की.

गोवर्धन इको विलेज इस्कॉन में मनाया गया नेटिव फूड डे, पालघर थाली हुआ लॉन्च

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पालघर। इस्कॉन के गोवर्धन इकोविलेज (GEV), पालघर ने अपनी ‘मेरी माटी मेरी थाली’ कैंपेन के तहत नेटिव फूड मैटर्स पहल के हिस्से के रूप में नेटिव फूड डे मनाया, जिसमें पालघर थाली का अनावरण किया गया। यह एक खास खाने का अनुभव है जो इस क्षेत्र की जैव विविधता, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक भोजन ज्ञान पर आधारित है।

इस कार्यक्रम में गोवर्धन इकोविलेज के संस्थापक HH राधानाथ स्वामी उपस्थित थे। जाने-माने वैश्विक लेखक, वक्ता और पर्पस कोच जय शेट्टी, अपनी पत्नी राधी देवलोकिया शेट्टी के साथ, जो एक जानी-मानी प्लांट-बेस्ड पाक विशेषज्ञ और वेलनेस एडवोकेट हैं, इस पहल के समर्थक के रूप में कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

अपनी किताबों, पॉडकास्ट और माइंडफुलनेस और वेलबीइंग पर वैश्विक काम और अरबों व्यूज़ वाले बड़े सोशल मीडिया फॉलोअर्स के लिए व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले जय शेट्टी सचेत और स्थायी जीवन शैली के प्रबल समर्थक रहे हैं। राधी शेट्टी ने अपने पाक कला और वेलनेस प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगातार प्राकृतिक, पारंपरिक और समग्र भोजन प्रथाओं को बढ़ावा दिया है जो नेटिव फूड मैटर्स के विज़न के साथ मेल खाती हैं।
इस्कॉन के गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक और नेटिव फूड मैटर्स पहल के रणनीतिक प्रमुख, गौरांग दास ने कहा, “जय शेट्टी और राधी शेट्टी अपने परोपकारी योगदान के माध्यम से ‘नेटिव फूड मैटर्स’ पहल का उदारतापूर्वक समर्थन कर रहे हैं और इससे इस पहल को पहचान मिली है और भारत की मूल भोजन विरासत से फिर से जुड़ने की प्रासंगिकता को रेखांकित किया गया है।

सह्याद्री की तलहटी में स्थित, गोवर्धन इकोविलेज पारिस्थितिक जीवन के एक मान्यता प्राप्त मॉडल के रूप में उभरा है, जो सौर ऊर्जा संचालित बुनियादी ढांचे, वर्षा जल संचयन प्रणालियों, बायोगैस इकाइयों और एक दुर्लभ बीज बैंक द्वारा समर्थित है। नेटिव फूड मैटर्स के माध्यम से, GEV (गोवर्धन इको विलेज) भारत के पारंपरिक भोजन ज्ञान को पुनर्जीवित करने और एक सचेत खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है जो स्वस्थ, सांस्कृतिक रूप से निहित और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार है।

वैश्विक खाद्य प्रणालियों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। औद्योगिक खाद्य प्रथाओं ने स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र को कमजोर किया है, स्वदेशी खाद्य संस्कृतियों को विस्थापित किया है और दुनिया भर में पोषण संबंधी चुनौतियों को तेज किया है। 733 मिलियन लोगों को वैश्विक स्तर पर भूख का सामना करना पड़ रहा है (FAO, 2023) और कृषि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 26 प्रतिशत का योगदान करती है, यह बढ़ती मान्यता है कि स्वदेशी भोजन ज्ञान लचीले, पौधे-आधारित पोषण और स्थायी खाद्य प्रणालियों की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। इन चुनौतियों का जवाब देते हुए, गोवर्धन इकोविलेज प्रोफेसर रंजन कुमार घोष और उनकी टीम के नेतृत्व में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद और प्रोफेसर अतुल गोखले और उनकी टीम के नेतृत्व में सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ कलिनरी आर्ट्स एंड न्यूट्रिशनल साइंसेज जैसे नॉलेज पार्टनर्स के साथ मिलकर एक समग्र दृष्टिकोण विकसित करने पर काम कर रहा है, जो पाक विरासत, सामुदायिक भागीदारी और नीति स्तर की सोच को एकीकृत करता है।

गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक गौरंगा दास ने कहा, “भोजन सिर्फ पोषण नहीं है। यह पहचान, पारिस्थितिकी, समानता और चेतना का प्रतिनिधित्व करता है। नेटिव फूड मैटर्स का लक्ष्य इस एकीकृत समझ को सार्वजनिक जीवन में कार्रवाई में बदलना है।”

इस कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण पालघर थाली रहा, जिसे स्वदेशी सामग्री, पारंपरिक खाना पकाने की तकनीकों और क्षेत्र के मौसमी भोजन पैटर्न पर लगभग एक साल के शोध के बाद विकसित किया गया था। जय और राधी शेट्टी, अन्य अतिथियों के साथ, थाली का अनुभव करने वाले पहले लोगों में से थे, जो स्थानीय, पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन परंपराओं पर अभियान को दर्शाता है।

पालघर थाली बड़े ‘मेरी माटी मेरी थाली’ आंदोलन का हिस्सा है, जो राज्यों में स्थानीय फसलों और व्यंजनों को फिर से खोजकर भारत की क्षेत्रीय खाद्य विविधता का उत्सव मनाता है। पालघर पायलट में पोषण उत्सव, सामुदायिक आउटरीच और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं, खासकर आदिवासी और ग्रामीण समुदायों की महिलाओं और बच्चों को शामिल किया गया है।

इस कार्यक्रम में पालघर कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया, जिसमें जिले की पाक विरासत, पारंपरिक सामग्री और व्यंजनों का दस्तावेजीकरण किया गया है। गोवर्धन इकोविलेज आने वाले आगंतुक हर सप्ताहांत गोविंदा रेस्टोरेंट में मदन मोहन थाली के माध्यम से क्षेत्रीय व्यंजनों का अनुभव कर सकते हैं, जो पारंपरिक भारतीय भोजन के स्वास्थ्य और पारिस्थितिक मूल्य को उजागर करने वाली एक विशेष पेशकश है।

नेटिव फूड मैटर्स एक साल से अधिक समय से सक्रिय है और अब पूरे भारत में अपने शोध और कार्यान्वयन प्रयासों का विस्तार करने की तैयारी कर रहा है, जिसका दीर्घकालिक लक्ष्य सचेत भोजन को एक मुख्यधारा और महत्वाकांक्षी जीवन शैली बनाना है।

सद्भावना से ही होगा विश्व कल्याण, हृदय-परिवर्तन से राष्ट्र निर्माण -सतपाल जी महाराज

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सिलीगुड़ी 31 दिसंबर : मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में स्थानीय सालूगाड़ा के निकट मझुआ ग्राम में आयोजित दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन के प्रथम दिन मानव धर्म के प्रणेता सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज ने देश–विदेश से पधारे संत–महात्माओं, भक्तों एवं श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संसार को बदलने से पहले स्वयं के भीतर परिवर्तन आवश्यक है। व्यक्ति के हृदय में आया परिवर्तन ही समाज, राष्ट्र और अंततः विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

इस अवसर पर सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज ने नववर्ष 2026 के उपलक्ष्य में देश-विदेश में रह रहे समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नया वर्ष मानवता, शांति, सद्भावना और नैतिक मूल्यों के नव जागरण का वर्ष बने। उन्होंने कामना की कि नववर्ष प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और आत्मिक उन्नति लेकर आए।
श्री हंसी जी महाराज की 125वीं जयंती के पावन अवसर पर उनके आध्यात्मिक, सामाजिक एवं मानव कल्याणकारी विचारों का स्मरण करते हुए श्री गुरुमहाराज जी ने कहा कि संतों की ज्ञान केवल सुनने की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन में उतारने की साधना हैं। इन्हीं मूल्यों को आत्मसात करना गुरुओं के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

श्री सतपाल जी महाराज ने ऐतिहासिक जन-जागरण पदयात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि बागडोगरा से प्रारंभ हुई 14 दिवसीय यह पदयात्रा लगभग 250 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हुए दार्जिलिंग के मार्ग से गंगटोक पहुंची थी। इस पदयात्रा का उद्देश्य सामाजिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता का विस्तार था। उन्होंने विशेष रूप से नेपाली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने के लिए किए गए इस जन-जागरण अभियान को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और इसमें सहभागी सभी साथियों के योगदान की सराहना की।

सम्मेलन के दौरान मानव सेवा दल की परेड की प्रशंसा करते हुए श्री गुरुमहाराज जी ने कहा कि मानव सेवा दल के सदस्यों एवं सेविकाओं ने अनुशासन, समर्पण और एकता का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया। साथ ही विभिन्न तहसीलों से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत झांकी, नृत्य, बैंड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को उन्होंने भावपूर्ण साधना का स्वरूप बताया।
देश और समाज की वर्तमान परिस्थितियों पर विचार व्यक्त करते हुए श्री गुरुमहाराज जी ने कहा कि नववर्ष का संदेश “नव जीवन, नव उत्कर्ष” होना चाहिए। राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए आंतरिक आत्मिक शक्ति का जागरण अनिवार्य है। गीता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जैसे अर्जुन मोहग्रस्त हुआ, वैसे ही आज समाज भी दुविधा में है, और ऐसे समय में आध्यात्मिक ज्ञान ही कर्तव्य पथ का मार्गदर्शन करता है। जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब अधर्म के नाश हेतु शक्ति का उदय होता है।

उन्होंने कहा कि परिवार से लेकर समाज, नगर, जिला और राष्ट्र—सभी स्तरों पर सद्भावना का विस्तार आवश्यक है। सद्भावना से ही विश्व कल्याण संभव है। इसी भाव के साथ उन्होंने संदेश दिया— “धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो और प्राणी मात्र में सद्भावना हो।”

उल्लेखनीय है कि अपराह्न सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज ने मानव सेवा दल की परेड का निरीक्षण किया। इसके उपरांत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सम्मेलन की भव्यता को और अधिक गरिमा प्रदान की।

सद्भावना सम्मेलन का प्रथम दिन आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और मानव मूल्यों के सशक्त संदेश के साथ संपन्न हुआ।

सिलीगुड़ी पहुंचे सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज

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भव्य स्वागत से गूंज उठा मानव धर्म आश्रम, आज से दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन
देश–विदेश से उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, कड़ाके की ठंड भी नहीं रोक सकी आस्था
सिलीगुड़ी (हिम बहादुर सोनार), 30 दिसंबर : मानव एकता, शांति, सद्भाव और चरित्र निर्माण का संदेश लेकर मानव धर्म के प्रणेता, पूज्य सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज मंगलवार देर शाम सिलीगुड़ी पहुंचे। मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से आयोजित बहुप्रतीक्षित दो दिवसीय सद्भावना सम्मेलन में भाग लेने के लिए उनके आगमन पर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। 

बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचने के बाद पूज्य सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज सीधे सालूगाड़ा के मझुआ ग्राम स्थित मानव धर्म आश्रम पहुंचे। आश्रम परिसर में मानव सेवा दल के अनुशासित कार्यकर्ताओं द्वारा उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। परेड निरीक्षण के पश्चात सलामी ग्रहण कर सद्गुरुदेव दिव्य आवास की ओर प्रस्थान कर गए।

आश्रम पहुंचते ही वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो उठा। विभिन्न सांस्कृतिक टोलियों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और आकर्षक बैंड की प्रस्तुतियों के बीच श्री महाराज जी का भव्य स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच श्रद्धालु “सद्गुरुदेव की जय” के गगनभेदी जयकारे लगाते नजर आए। श्रद्धालुओं की अपार खुशी और श्रद्धा देखते ही बन रही थी।
मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित यह सद्भावना सम्मेलन 31 दिसंबर और 1 जनवरी को आयोजित किया जाएगा, जिसमें पूज्य सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज हजारों श्रद्धालुओं को अपने दिव्य आशीर्वचनों से कृतार्थ करेंगे। सम्मेलन को लेकर विशाल, सुसज्जित एवं भव्य पंडाल का निर्माण किया गया है, जहां एक साथ हजारों श्रद्धालु बैठकर सत्संग का लाभ ले सकेंगे।

कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। उत्तर बंगाल के विभिन्न जिलों के अलावा सिक्किम, बिहार से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। वहीं पड़ोसी देश नेपाल और भूटान सहित अन्य देशों से भी श्रद्धालुओं का आगमन जारी है। आश्रम परिसर श्रद्धालुओं से पूरी तरह गुलजार हो चुका है।

व्यवस्थाओं को लेकर मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं। स्वच्छता, सुरक्षा, आवागमन, पेयजल एवं भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है। जगह-जगह स्वयंसेवकों की टीमें तैनात हैं, जिन्हें अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। समिति के अनुसार श्रद्धालुओं की सुविधा और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
मानव धर्म आश्रम परिसर में इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा, सेवा और सद्भाव का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। श्रद्धालुओं को विश्वास है कि सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज के प्रवचन समाज में प्रेम, भाईचारे और मानवता के भाव को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।

“मेरे कृष्ण” नाट्य में श्रीकृष्ण की भूमिका में सौरभ राज जैन

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मुंबई। “मेरे कृष्ण” — श्रीकृष्ण की दिव्य यात्रा को दर्शाने वाला एक भव्य रंगमंचीय नाट्य प्रस्तुति दी जाएगी।
इस नाटक में सौरभ राज जैन श्रीकृष्ण की भूमिका में, पूजा बी. शर्मा राधा एवं महामाया के रूप में, तथा अर्पित रांका दुर्योधन एवं कंस की भूमिकाओं में दिखाई देंगे।
नाटक का निर्देशन राजीव सिंह दिनकर ने किया है। इसका निर्माण विवेक गुप्ता, राजीव सिंह दिनकर एवं विष्णु पाटिल द्वारा किया गया है। नाटक के लेखक डॉ. नरेश कात्यायन हैं तथा इसका मौलिक संगीत उद्भव ओझा द्वारा रचित है।
2 घंटे 45 मिनट की अवधि वाला “मेरे कृष्ण” एक गहन रंगमंचीय अनुभव है, जो श्रीकृष्ण के जीवन के दिव्य, मानवीय और दार्शनिक आयामों की यात्रा कराता है।
यह नाटक 20 जीवंत दृश्यों में प्रकट होता है, जिनमें श्रीकृष्ण के जीवन के प्रमुख अध्यायों को दर्शाया गया है — वृंदावन में उनके बाल्यकाल से लेकर द्वारका में उनके अंतिम क्षणों तक।
शाश्वत दर्शन में निहित होते हुए भी, इसकी कथा शैली मनोरंजक, दृश्यात्मक रूप से समृद्ध और भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है — जिसमें नाट्यकला, संगीत, नृत्य और मल्टीमीडिया का सुंदर समन्वय है।
यह नाटक श्रीकृष्ण के जीवन के कुछ कम ज्ञात प्रसंगों और दृष्टिकोणों को भी उजागर करता है।
निर्देशक राजीव सिंह दिनकर के अनुसार, निर्देशन की शैली अभिनयात्मक कथा-वाचन को इमर्सिव विज़ुअल्स और प्रतीकात्मक मंच-भाषा के साथ जोड़ती है — जहाँ स्थान, ध्वनि और प्रकाश का उपयोग कर भावनाओं को अनुभव में बदला जाता है।
नाटक का स्वर काव्यात्मक होने के साथ आधुनिक है, दार्शनिक होते हुए भी मनोरंजक है।
प्रत्येक दृश्य को गतिमान चित्रकला की तरह परिकल्पित किया गया है — जहाँ रंगमंच, दृश्य कला और आध्यात्मिक अन्वेषण एक-दूसरे से मिलते हैं।
इस नाटक के माध्यम से निर्देशक एक संवाद जागृत करना चाहते हैं — पूजा के बारे में नहीं, बल्कि जागरूकता के बारे में।
उद्देश्य यह है कि हर दर्शक यह प्रश्न लेकर न जाए कि “श्रीकृष्ण कौन हैं?” बल्कि यह अनुभूति लेकर जाए कि “श्रीकृष्ण मेरे भीतर हैं।”
प्रत्येक कलाकार का व्यक्तिगत लुक शीघ्र ही जारी किया जाएगा।

प्रियंका चोपड़ा को अपना प्रेरणास्रोत मानती है रुचि गुर्जर 

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अभिनेत्री रुचि गुर्जर इन दिनों ग्लैमरस लुक, आत्मविश्वास और अपने काम के प्रति समर्पण के कारण लगातार सुर्खियों में हैं। 2025 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में उन्होंने ऐसा प्रभाव छोड़ा, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाला उनका स्टेटमेंट नेकलेस सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ और फैशन जगत ने उनके इस अनोखे आइडिया को साहसिक तथा क्रिएटिव बताया। रुचि ने भी बताया कि यह कॉन्सेप्ट उनकी खुद की सोच थी, जिसे डिजाइनर ने खूबसूरती से तैयार किया।

कान्स के बाद रुचि 56वें आईएफएफआई गोवा फिल्म फेस्टिवल में भी नजर आईं, जहाँ उनका ग्लैमरस और एलीगेंट अंदाज़ हर किसी का ध्यान खींचता रहा। रेड कार्पेट पर उनकी आत्मविश्वास भरी एंट्री को दर्शकों, फोटोग्राफर्स और मीडिया ने खुले दिल से सराहा। कई फैशन विशेषज्ञों ने उनकी स्टाइलिंग को “क्लासी, ग्रेसफुल और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड” तक कहा।

रुचि गुर्जर उन कलाकारों में हैं, जो सिर्फ सुंदरता या ग्लैमर से नहीं, बल्कि अपने प्रोफेशनल रवैये और मेहनत से पहचानी जाती हैं। वह कई वर्षों से मुंबई में मॉडलिंग और एक्टिंग कर रही हैं। अभिनेता अमन वर्मा के साथ उनका म्यूजिक वीडियो “एक लड़की” काफी पसंद किया गया। इसके अलावा वह कई हिंदी और हरियाणवी वीडियो में भी नजर आ चुकी हैं। उनकी कुछ वेबसीरीज़ और फिल्में जल्द शूटिंग फ्लोर पर जाने वाली हैं, जिनसे उन्हें और भी बड़ा पहचान मिलने की उम्मीद है।

रुचि का सफर प्रेरणादायक रहा है। राजस्थान के एक छोटे से गाँव से निकलकर उन्होंने मिस हरियाणा का ताज जीता, पढ़ाई की, सॉफ्टवेयर कंपनी में काम किया और फिर अपने सपनों की दुनिया मुम्बई का रुख किया। छोटे शहर से आने वाली लड़कियों के लिए वह आज एक मजबूत उदाहरण बन चुकी हैं कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से हर सीमित दायरा तोड़ा जा सकता है।

उनका कहना है कि “फैशन हो, अभिनय हो या जीवन, जो भी करो, उसमें एक नियम, एक मर्यादा और एक अनुशासन होना जरूरी है।”
रुचि इस बात पर भी जोर देती हैं कि नए कलाकारों को जल्दबाजी में कोई भी प्रोजेक्ट स्वीकार करने से बचना चाहिए, क्योंकि गलत चुनाव भविष्य में रुकावट बन सकता है।

रुचि निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्मों की बड़ी प्रशंसक हैं और मानती हैं कि उनकी फिल्में भव्यता, संस्कृति और शानदार अभिनय का बेहतरीन संगम हैं। प्रियंका चोपड़ा को वह अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। अगर अवसर मिला तो वह “जब वी मेट” की ‘गीत’ जैसा खुशमिजाज़ और बिंदास किरदार निभाना चाहेंगी, क्योंकि वह खुद भी वास्तविक जीवन में काफी पॉज़िटिव, जिंदादिल और आत्मनिर्भर हैं।

फैशन शो में रुचि हमेशा से आकर्षण का केंद्र रही हैं। आगे चलकर वह फैशन इंडस्ट्री में अपना खुद का बिज़नेस शुरू करना चाहती हैं। उनकी ऊर्जा, आत्मविश्वास, और लगातार बेहतर करने की चाह उन्हें बॉलीवुड की उभरती हुई प्रतिभाओं में मजबूती से शामिल करती है।

BJP Candidate List BMC Election 2026

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1. वॉर्ड क्रमांक  २ – तेजस्वी घोसाळकर
2. वॉर्ड क्रमांक ३ – प्रकाश दरेकर
3. वॉर्ड क्रमांक ७ – गणेश खणकर
4. वॉर्ड क्रमांक ८ – योगिता पाटील
5. वॉर्ड क्रमांक ९ – शिवानंद शेट्टी
6. वॉर्ड क्रमांक १० – जितेंद्र पटेल
7. वॉर्ड क्रमांक १३ – राणी त्रिवेदी
8. वॉर्ड क्रमांक १४ – सीमा शिंदे
9. वॉर्ड क्रमांक १५ – जिग्ना शाह
10. वॉर्ड क्रमांक १६ – श्वेता कोरगावकर
11. वॉर्ड क्रमांक १७ – शिल्पा सांगोरे
12. वॉर्ड क्रमांक १९ – दक्षता कवठणकर
13. वॉर्ड क्रमांक २० – बाळा तावडे
14. वॉर्ड क्रमांक २१ – लीना देहरेकर पटेल
15. वॉर्ड क्रमांक २२ – हेमांशू पारेख
16. वॉर्ड क्रमांक २३ – शिवकुमार झा
17. वॉर्ड क्रमांक २४ – स्वाती जैस्वाल
18. वॉर्ड क्रमांक २५ – निशा परुळेकर
19. वॉर्ड क्रमांक २७ – नीलम गुरव
20. वॉर्ड क्रमांक ३० – धवल वोरा
21. वॉर्ड क्रमांक ३१ – मनिषा यादव
22. वॉर्ड क्रमांक ३५ – योगेश वर्मा
23. वॉर्ड क्रमांक ३६ – सिद्धार्थ शर्मा
24. वॉर्ड क्रमांक ३७ – प्रतिभा शिंदे
25. वॉर्ड क्रमांक ४३ – विनोद मिश्रा
26. वॉर्ड क्रमांक ४४ – संगीता ग्यानमुर्ती शर्मा
27. वॉर्ड क्रमांक ४६ – योगिता कोळी
28. वॉर्ड क्रमांक ४७ – तेजिंदर सिंह तिवाना
29. वॉर्ड क्रमांक ५० – विक्रम राजपूत
30. वॉर्ड क्रमांक ५२ – प्रीती सातम
31. वॉर्ड क्रमांक ५४ – विप्लव अवसरे
32. वॉर्ड क्रमांक ५५ – हर्ष पटेल
33. वॉर्ड क्रमांक ५६ – राजूल समीर देसाई
34. वॉर्ड क्रमांक ५७ – श्रीकला पिल्ले
35. वॉर्ड क्रमांक ५८ – संदीप पटेल
36. वॉर्ड क्रमांक ५९ – योगिता दाभाडकर
37. वॉर्ड क्रमांक ६० – सयाली कुलकर्णी
38. वॉर्ड क्रमांक ६३ – रुपेश सावरकर
39. वॉर्ड क्रमांक ६४ – सरिता राजापुरे
40. वॉर्ड क्रमांक ६५ – विठ्ठल भंडेरे
41. वॉर्ड क्रमांक ६७ – दिपक कोतेकर
42. वॉर्ड क्रमांक ६८ – रोहन राठोड
43. वॉर्ड क्रमांक ६९ – सुधा सिंह
44. वॉर्ड क्रमांक ७० – अनिश मकवानी
45. वॉर्ड क्रमांक ७२ – ममता यादव
46. वॉर्ड क्रमांक ७४ – उज्ज्वला मोडक
47. वॉर्ड क्रमांक ७६ – प्रकाश मुसळे
48. वॉर्ड क्रमांक ८४ – अंजली सामंत
49. वॉर्ड क्रमांक ८५ – मिलिंद शिंदे
50. वॉर्ड क्रमांक ८७ – महेश पारकर
51. वॉर्ड क्रमांक ९७ – हेतल गाला
52. वॉर्ड क्रमांक ९८ – अलका केळकर
53. वॉर्ड क्रमांक ९९ – जितेंद्र राऊत
54. वॉर्ड क्रमांक १०० – स्वप्ना म्हात्रे
55. वॉर्ड क्रमांक १०३ – हेतल गाला मोर्वेकर
56. वॉर्ड क्रमांक १०४ – प्रकाश गंगाधरे
57. वॉर्ड क्रमांक १०५ – अनिता वैती
58. वॉर्ड क्रमांक १०६ – प्रभाकर शिंदे
59. वॉर्ड क्रमांक १०७ – नील सोमय्या
60. वॉर्ड क्रमांक १०८ – दिपिका घाग
61. वॉर्ड क्रमांक १११ – सारिका पवार
62. वॉर्ड क्रमांक ११६ – जागृती पाटील
63. वॉर्ड क्रमांक १२२ – चंदन शर्मा
64. वॉर्ड क्रमांक १२६ – अर्चना भालेराव
65. वॉर्ड क्रमांक १२७ – अलका भगत
66. वॉर्ड क्रमांक १२९ – अश्विनी मते
67. वॉर्ड क्रमांक १३० – धर्मेश गिरी
68. वॉर्ड क्रमांक १३१ – राखी जाधव
69. वॉर्ड क्रमांक १३२ – रितू तावडे
70. वॉर्ड क्रमांक १३५ – नवनाथ बन
71. वॉर्ड क्रमांक १४४ – बबलू पांचाळ
72. वॉर्ड क्रमांक १५२ – आशा मराठे
73. वॉर्ड क्रमांक १५४ – महादेव शिगवण
74. वॉर्ड क्रमांक १५७ – आशाताई तायडे
75. वॉर्ड क्रमांक १५८ – आकांक्षा शेट्ये
76. वॉर्ड क्रमांक १६४ – हरिष भांदिर्गे
77. वॉर्ड क्रमांक १७२ – राजश्री शिरवडकर
78. वॉर्ड क्रमांक १७४ – साक्षी कनोजिया
79. वॉर्ड क्रमांक १७७ – कल्पेशा जेसल कोठारी
80. वॉर्ड क्रमांक १८५ – रवी राजा
81. वॉर्ड क्रमांक १८९ – मंगला गायकवाड
82. वॉर्ड क्रमांक १९० – शितल गंभीर देसाई
83. वॉर्ड क्रमांक १९५ – राजेश कांगणे (वरळी मतदारसंघ)
84. वॉर्ड क्रमांक १९६ – सोनाली सावंत
85. वॉर्ड क्रमांक २०० – संदीप पानसांडे
86. वॉर्ड क्रमांक २०२ – पार्थ बावकर
87. वॉर्ड क्रमांक २०५ – वर्षा गणेश शिंदे
88. वॉर्ड क्रमांक २०७ – रोहिदास लोखंडे
89. वॉर्ड क्रमांक २१४ – अजय पाटील
90. वॉर्ड क्रमांक २१५ – संतोष ढोले
91. वॉर्ड क्रमांक २१८ – स्नेहल तेंडुलकर
92. वॉर्ड क्रमांक २१९ – सन्नी सानप
93. वॉर्ड क्रमांक २२१ – आकाश पुरोहित
94. वॉर्ड क्रमांक २२२ – रिटा मकवाना
95. वॉर्ड क्रमांक २२५ – हर्षिता नार्वेकर
96. वॉर्ड क्रमांक २२६ – मकरंद नार्वेकर
97. वॉर्ड क्रमांक २२७ – गौरवी शिवलकर-नार्वेकर

गुजरात के जूनागढ़ में सात गौ माताओं की संदिग्ध मौत

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गुजरात के जूनागढ़ जिले की केशोद तहसील के फागली गांव में एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। गांव के बाहरी हिस्से में स्थित पुराने कूड़ाघर के पास एक साथ सात गायों के शव मिलने से ग्रामीणों और गौ सेवकों में भारी आक्रोश फैल गया है।

इस घटना का पता उस समय चला जब गांव के कुछ बच्चे मैदान में पतंग उड़ा रहे थे। पतंग बबूल के पेड़ में फंसने पर जब वे उसे निकालने पहुंचे, तो झाड़ियों और कचरे के ढेर के पास कई गायों के शव पड़े दिखे। बच्चों ने तुरंत गांव के सरपंच भगवानजी देवधरिया को इसकी सूचना दी।

सरपंच ने बिना देरी किए पुलिस, गौ रक्षा दल और पशु चिकित्सकों को मौके पर बुलाया। हालात की गंभीरता को देखते हुए संबंधित टीमें तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं। पुलिस और पशु चिकित्सकों ने संयुक्त रूप से पंचनामा तैयार किया और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। घटनास्थल पर पहुंचे लायन नेचर क्लब के सदस्य नीरव लक्ष्मी समेत अन्य गौ रक्षकों ने इसे सामान्य मौत मानने से इनकार किया है। उनका आरोप है कि गायों को जानबूझकर जहरीला पदार्थ खिलाया गया। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले भी केशोद के वेरावल रोड इलाके में 8–9 नंदी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए जा चुके हैं, जिससे किसी संगठित गिरोह की आशंका गहराई है।

पशु चिकित्सकों ने मौके पर ही गायों के आंतरिक अंगों के सैंपल एकत्र किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए पशु सेवा विभाग (FSL) भेजा जा रहा है। पुलिस ने फिलहाल मामले में आकस्मिक मृत्यु का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पशुधन मंत्री ने गौ आश्रय स्थलों के निरीक्षण के दिए निर्देश

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लखनऊ। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने सोमवार को प्रदेश के गौ आश्रय स्थलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि ठंड से किसी भी गोवंश की मृत्यु न होने पाए।

इसके लिए पशु चिकित्साधिकारी गौ आश्रय स्थलों पर पहुंचकर गोवंश के उत्तम स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं औषधि की व्यवस्था सुनिश्चित करें। नोडल अधिकारी गौ आश्रय स्थलों का नियमित रूप से निरीक्षण कर चारा, भूसा, पानी प्रकाश आदि व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें।

धर्मपाल सिंह ने विभाग के बजट की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवंटित बजट शत प्रतिशत व्यय करने के लिए कहा। व्यय में लापरवाही व उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही की जायेगी। सभी अवस्थापना संबंधी कार्य माह फरवरी 26 तक पूर्ण कर लिए जाए। कार्यदायी संस्था द्वारा मानक के अनुरूप तथा लेआउट के अनुसार कार्य किया जाए। अवस्थापना संबंधी कार्यों में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाए।

उन्होंने गोवंश शेड, पानी पीने की चराहिया, खडंजा आदि मजबूत एवं व्यवस्थित तरीके से बनाने का निर्देश दिया। दुग्ध विकास के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पराग के उत्पादों की मार्केटिंग को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। पशुधन विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट रखा।

शादी के महज 24 घंटे में तलाक

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पुणे: आम धारणा है कि प्रेम विवाह एक-दूसरे को समझने का अच्छा मौका है। हालांकि, पुणे में एक दिलचस्प मामला सामने आया है। एक हाई एजुकेटेड कपल ने जो किया उसने सोशल मीडिया पर बहस भी छेड़ दी। पुणे के इक डॉक्टर कपल का अफेयर था। दोनों ने लव मैरेज की और शादी के महज 24 घंटे में ही दोनों ने तलाक भी ले लिया। उनके बीच शादी के दूसरे दिन सुबह से झगड़ा हुआ और उन्होंने अलग रहने का फैसला लिया।

इस कपल शादी के 24 घंटे में हुए तलाक का दिलचस्प पहलू है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद महज 8 दिन में ही उन्हें तलाक भी मिल गया। पुणे फैमिली कोर्ट के जज बी डी कदम ने यह अहम नतीजा सुनाया।

तलाकशुदा जोड़ा समाज के सम्मानित वर्ग से है। पति एक जहाज पर बड़े पद पर कार्यरत है, जबकि पत्नी पेशे से डॉक्टर है। दोनों एक दूसरे से कई साल पहले मिले थे। उनके बीच अफेयर चला। प्यार परवान चढ़ा और उन्होंने शादी करने का फैसला लिया। दोनों की शादी हुई। उनके परिवार और रिश्तेदार इस शादी समारोह में शामिल हुए।

शादी के अगले दिन सुबह दोनों के बीच झगड़ा हुआ। झगड़ा इतना बढ़ गया कि लड़की घर छोड़कर चली गई। दोनों ने अलग रहने का फैसला लिया। मामला कोर्ट तक पहुंचा। उन्होंने वकील से बात की और कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर कर दी।

3 दिसंबर को वकील रानी कांबले-सोनावणे ने आपसी सहमति से तलाक के लिए आवेदन किया था। आम तौर पर तलाक के लिए छह महीने की प्रतीक्षा अवधि अनिवार्य है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार, यदि पति-पत्नी 18 महीने से अधिक समय से अलग हो गए हैं, तो इस अवधि में छूट दी जा सकती है। अदालत ने 10 दिसंबर को तलाक पर मुहर लगा दी क्योंकि दंपति डेढ़ साल से अलग रह रहे थे और पति को काम के लिए तत्काल विदेश जाने की जरूरत थी।