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7 दिवसीय गौ रथ यात्रा का ऋषिकेश में हुआ समापन

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ऋषिकेश के श्रीराम गौधाम सेवा समिति द्वारा निकाली गई सात दिवसीय गौ बचाओ जन जागरण रथ यात्रा” का सोमवार को समापन हो गया है। यात्रा के समापन समारोह में संत समाज और आमजन ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। ऋषिकेश में गढ़वाल मंडल का भ्रमण कर लौटे गौ सेवकों का जोरदार स्वागत किया गया।  यात्रा में बड़ी संख्या में आम जन भी गौ माता की रक्षा का संकल्प लेते हुए अपनी गाय के साथ शामिल हुए। 

आपको बता दें कि ये ऐतिहासिक यात्रा 21 मार्च को श्रीराम गौधाम के संस्थापक जगदीश भट्ट और समिति के संरक्षक मोहन काला की अगुवाई में ऋषिकेश-तपोवन,आनन्द भवन आश्रम से साधु-संतों का आशीर्वाद लेकर शुरू हुई थी। ये यात्र पूरे गढ़वाल मण्डल (उत्तराखंड) क्षेत्र में गौ माता की सेवा,संरक्षण एवं संवर्धन की अभिलाषा में गौ बचाओ जन जागरण निकाली गई। इस गौ रथ यात्रा का उद्देश्य गावं से लेकर शहर के सड़कों पर निराश्रित घूम रही गौमाता एवं गौ वंशो की दशा सुधारने के लिए एक जन जागरण अभियान करना रहा। यात्रा का समापन सोमवार को हरिद्वार से ऋषिकेश पहुंचने पर हुआ। यात्रा के समापन पर श्री भरत मंदिर झंडा चौक ऋषिकेश में भंडारा किया गया। यात्रा में महामंडलेश्वर स्वामी ईश्वर दास जी महाराज, महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद जी महाराज,स्वामी रमेश आनंद महाराज,महंत रवि प्रपंनाचार्य जी,महामंडलेश्वर स्वामी दयाराम दस जी महाराज,महामंडलेश्वर ललितानंद गिरी जी महाराज,महामंडलेश्वर वृंदावन दास महाराज,महामंडलेश्वर हठयोगी जी महाराज,महामंडलेश्वर प्रेमानंद जी महाराज,महामंडलेश्वर विष्णुदास जी महाराज,महामंडलेश्वर डा.रामेश्वर दास जी महाराज,महामंडलेश्वर रविदेव शास्त्री जी महाराज, स्वामी दुर्गादास जी महाराज,आत्मानंद जी महाराज,स्वामी दिनेश दास जी महाराज,महामंडलेश्वर रविदेव शास्त्री जी महाराज।
स्वामी दुर्गादास जी महाराज,आत्मानंद जी महाराज,स्वामी दिनेश दास जी महाराज, स्वामी गोपालाचार्य जी महाराज,स्वानी परमानंद दास जी महाराज, स्वामी हरिहरानंद जी महाराज,स्वामी योगेन्दरानंद जी महाराज,स्वामी लोकेशदास जी महाराज,स्वामी केशव स्वरूप जी महाराज,स्वामी अखंडानंद जी महाराज,स्वामी रामजी महाराज और गौ सेवा समिति के संस्थापक जे पी भट्ट,संरक्षक मोहन काला,अध्यक्ष उषा भट्ट, उपाध्यक्ष सुदेश भट्ट,सचिव सुमन डोभाल,गोधाम सेवा समिति के मुख्य वक्ता शांति प्रसाद भट्ट,मीडिया से हर्षमणि उनियाल,मनीष व्यास,दीपक सिंह,योगी(दिलीप सिंह बिष्ट)नीरज चौधरी,मदन सिंह बिष्ट,संदीप मनोज,डॉक्टर जगत राम भट्ट,सरिता भट्ट,मनोज छाबड़ा, अतुल चावला,ऋषिकेश हरिद्वार की सैकड़ों संत यात्रा में आदि लोग मौजूद रहे।

कवियत्री व साहित्यकार रजनी साहू को मिला महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी द्वारा संत नामदेव पुरस्कार

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मुम्बई। हाल ही में महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुम्बई 2021-22 ने संत नामदेव पुरस्कार (काव्य विधा) से रजनी साहू ‘सुधा’ को सम्मानित किया। रजनी साहू को उनका काव्य संग्रह ‘स्वयंसिद्धा’ के लिए रजत पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
रंगशारदा ऑडिटोरियम, बांद्रा (मुम्बई) में आयोजित साहित्यकारों के सम्मान समारोह कार्यक्रम में महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के सदस्यों, प्रतिनिधि और पदाधिकारियों के साथ जाने माने व्यक्ति भी सम्मिलित रहे। साथ ही भजन सम्राट अनूप जलोटा, अभिनेता आशुतोष राणा, प्रगीत रमेश पंडित, मनोज जोशी की भी उपस्थिति रही।
यह कार्यक्रम 23 मार्च की संध्या को बांद्रा पश्चिम में स्थित रंग शारदा सभागार में हुई। जिसमें हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देनेवाले विद्वानों, कलाकारों और विभूतियों को सम्मनित किया गया। इस अवसर पर अकादमी द्वारा हिंदी साहित्य के विविध विधाओं में कुल 123 पुरस्कार दिये गए।
रजनी साहू एम.एस सी. (रसायन शास्त्र) और एम. ए. (हिन्दी) में उत्तीर्ण है, बस्तर पाति मासिक पत्रिका की सह संपादक और आर्ट ऑफ लीविंग में टीचर है। साथ ही सुधा साहित्य समाजिक संस्था की अध्यक्ष है। यह संस्था उन्होंने अपनी माता स्वर्गीय सुधा साहू की स्मृति में बनाई है। इस संस्था के द्वारा वे सामाजिक कार्य के साथ-साथ साहित्य के विकास में ध्यान देती हैं। कई साहित्यिक कार्यक्रमों के साथ-साथ समाजोपयोगी कार्यों के लिए तत्पर रहतीं हैं। उन्हें बचपन से लेखन में रूचि थी उनका मानना है कि जब वे आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़ी तब इनका लेखन कार्य और अधिक फलीभूत हुआ वहाँ से प्रेरणा प्राप्त कर उन्होंने फिर से लिखना प्रारम्भ किया ।
साहित्य की सभी विधाओं में इनका कार्य सराहनीय है।
रजनी साहू की अभी तक तीन काव्य पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है जिसमें प्रथम सहस्त्रधारा, द्वितीय स्वयंसिद्धा और तृतीय सत्यम् शिवम् सुंदरम् है। इनका आलेख और हाइकु , क्षणिकाऍं, कविताऍं आदि अनेक पत्र पत्रिकाओं में छपती रहती है। अविराम साहित्यिकी, बस्तर पाति आदि में इनकी कृतियाॅं छपती रहती है। सेवा सदन की शब्द लिखेंगे इतिहास (साझा लघुकथा संग्रह) में इनकी लघुकथा पुरस्कृत हो चुकी है। महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई में सम्मनित होने पर रजनी साहू बेहद प्रसन्न है। उनका कहना है कि वे सदैव साहित्य के लिए साहित्य के लिए समर्पित रहेंगी। साथ ही समाजसेवा और लोकसेवा का कार्य करती रहेंगी। रजनी साहू की काव्य रचना में शब्दों का संयोजन एक अलग स्तर का रहता है। इनकी कविताओं के भाव भी गूढ़ और प्रभावी होते हैं। यह ज्यादातर प्रकृति,जीवन के रहस्य और ईश्वरीय सत्ता को इंगित करने वाली कविताएं होती है। इनकी कथा और संस्मरण भी गूढ़ तत्वों से भरे होते हैं।

आकांक्षा मामले में नया मोड़, मां बोलीं- समर और उसका भाई तीन साल से कर रहे थे परेशान

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Akanksha Dubey News Today Live Updates in Hindi : भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मां मधु दुबे आज वाराणसी पहुंच गई हैं। उन्होंने अपनी बेटी की मौत के लिए सिंगर समर सिंह को दोषी ठहराया है। मधु दुबे का आरोप है कि समर सिंह ने अपने भाई के साथ मिलकर आकांक्षा की हत्या की है। आकांक्षा दुबे आत्महत्या मामले में नई-नई बातें सामने आ रही हैं। अभिनेत्री की मां ने भोजपुरी सिंगर समर सिंह और उसके भाई संजय सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक उनकी बेटी को पिछले तीन साल से गायक व उसके भाई की ओर प्रताड़ित किया जा रहा था।
आकांक्षा दुबे की मौत के बाद एक्ट्रेस की मां ने समर सिंह और उनके भाई पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अभिनेत्री के मां के मुताबिक आकांक्षा को 21 मार्च को समर के भाई संजय सिंह ने जान से मारने की धमकी दी थी। उन्होंने बताया कि इस बारे में खुद उनकी बेटी ने फोन करके बताया था। आकांक्षा दुबे के आत्महत्या करने के बाद अभिनेत्री पूनम दुबे का रिएक्शन सामने आया है। उन्होंने अपने पोस्ट में अमें गुस्सा जाहिर करते हुए इस दुनिया के लोगों को नकली बताया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस दुनिया के फेक लोगों के बारे में नहीं बल्कि अपने मां-पिता के बारे में सोचना चाहिए।
दिवंगत भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मां का रो-रोकल बुरा हाल है। बेटी की मौत का जिम्मेदार वह समर सिंह को ठहरा रही हैं। आकांक्षा की मां मधु दुबे का कहना है कि ‘अभिनय के क्षेत्र में मेरी फूल सी बच्ची आकांक्षा ने अपनी प्रतिभा के दम पर एक अलग मुकाम बनाया था। समर सिंह ने मेरी बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी। वह आकांक्षा से इतनी बेरहमी से पेश आता था कि ऐसा दुश्मन भी नहीं करते हैं।’ यह कहते हुए सोमवार को वाराणसी के सारनाथ थाने में भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मां मधु दुबे दहाड़े मार कर रोने लगीं।
मधु दुबे का कहना है कि आकांक्षा ने रो-रोकर उन्हें सबकुछ बताया था। बीते 21 मार्च को आकांक्षा बस्ती में शूटिंग कर रही थीं, तब मोबाइल पर भोजपुरी गायक समर के भाई संजय सिंह का फोन आया था। फोन पर धमकी दे रहा था कि तुमको जान से मरवा देंगे। आकांक्षा की असिस्टेंट रेखा ने भी बताया कि मैडम सेट पर जोर-जोर से रही थीं। बता दें कि समर सिंह रविवार रात से ही गायब हैं।
एक्ट्रेस की मां ने आरोप लगाया कि आजमगढ़ निवासी भोजपुरी गायक समर सिंह आकांक्षा को बहुत प्रताड़ित करता था। कहा कि समर सिंह चाहता था कि आकांक्षा सिर्फ उसके साथ ही काम करे। साथ में वह एक्ट्रेस को काम करने पर पैसा नहीं देता था। किसी दूसरे की फिल्म या गाने में काम करने पर अकांक्षा के साथ मारपीट की जाती थी। कई बार जब आकांक्षा ने समर सिंह से अपने पैसे मांगे तो उसके साथ मारपीट भी की।
अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मां मधु का कहना है, ‘मेरी बेटी बहुत साहसी थी। वो आत्महत्या नहीं कर सकती।’ एक्ट्रेस की मां ने पुलिस-प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। आकांक्षा दुबे की मां और भाई सोमवार सुबह थाने पहुंचे। पिता छोटेलाल दुबे अभी ट्रेन में हैं। मधु ने बताया कि शनिवार शाम सात बजे मोबाइल से आकांक्षा से बात हुई थी। तब वो खुश थी। कोई परेशानी नहीं बताई। 12 बजे रात में फोन किया था तो उसने फोन नहीं उठाया था। किसी पार्टी में जाने की बात भी नहीं बताई थी।
भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे के आत्महत्या मामले में नया मोड़ आया है। इस मामले में सारनाथ थाने की पुलिस ने भोजपुरी गायक समर सिंह और उनके भाई संजय सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने समेत अन्य धाराओं मुकदमा दर्ज किया है। मुंबई से वाराणसी पहुंची आकांक्षा की मां की तहरीर पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है।
आकांक्षा शनिवार रात आठ बजे के आसपास सारनाथ क्षेत्र स्थित होटल से एक बर्थडे पार्टी में जाने की बात कह कर कैब से निकली थीं। होटल के महाप्रबंधक रीतेश कुमार मेहता ने बताया कि आकांक्षा जब होटल में आईं तो वह लड़खड़ा रहीं थीं।
सच सामने आने तक शहर में ही रहेगी फिल्म की पूरी टीम?
आकांक्षा दुबे फिल्म की शूटिंग के लिए वाराणसी आई हुई थीं। फिलहाल पुलिस ने फिल्म से जुड़े लोगों को शहर छोड़ने से मना किया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही टीम के सदस्य जा सकेंगे।
आकांक्षा दुबे को होटल छोड़ने वाले शख्स ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह और आकांक्षा एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते थे। शनिवार रात आकांक्षा उसे पांडेयपुर में मिली थी और उससे लिफ्ट मांगी थी। इस पर वह उन्हें उनके होटल छोड़ कर चला गया था। फिलहाल, युवक से पुलिस की पूछताछ जारी है।
भोजपुरी एक्ट्रेस के आत्महत्या मामले में नई जानकारी सामने आई है। पुलिस ने उस युवक को ढूंढ निकाला, जिसने आकांक्षा को शनिवार देर रात होटल में छोड़ा था। युवक लगभग 17 मिनट तक आकांक्षा के कमरे में रुका, फिर बाहर निकलकर चला गया था। पुलिस की तलाशी में पता चला है कि युवक लंका थाना क्षेत्र के टिकरी का रहने वाला है।
पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला है। आशंका जताई गई है कि आकांक्षा दुबे ने अवसादग्रस्त होकर आत्महत्या की है। फिलहाल, पुलिस विभिन्न एंगल से जांच कर रही है। फॉरेंसिक टीम ने भी साक्ष्य जुटाए हैं।
बता दें कि आकांक्षा दुबे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव थीं। इंस्टाग्राम पर उनकी तगड़ी फैन फॉलोइंग थी मौत से पहले भी वह इंस्टाग्राम पर लाइव हुई थीं। आत्महत्या से पहले उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शायरों की शायरी पेज की रील को अपना स्टोरी स्टेटस बनाया था। माना जा रहा है कि एक्ट्रेस के मोबाइल की डिटेल्स के आधार पर पुलिस को जल्द कोई सुराग मिल सकता है।

माफिया अतीक ने बैरक में पहुंचकर मांगा दूध और खाना, अशरफ ने खोला रोजा

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माफिया अतीक अहमद ने सोमवार की शाम नैनी सेंट्रल जेल की अस्थायी जेल बैरक में पहुंचने के बाद बंदी रक्षकों से दूध और खाने की मांग की। इस पर जेल प्रशासन की ओर से उसे दाल, चावल, रोटी और सब्जी दी गई। वहीं, साथ में दूध के साथ ब्रेड व दवा खाने के लिए गर्म पानी भी अतीक को उपलब्ध कराया गया। अशरफ ने भी जेल पहुंचकर अपना रोजा खोला। जेल प्रशासन द्वारा उसे खाने के साथ रोजा रहने वाले बंदियों की तरह दूध, खजूर, केला, ब्रेड दी गई।
सूत्रों की माने तो माफिया अतीक ने दूध व दाल का सेवन किया और बाकी चीजों को उसने नहीं खाया। वहीं, अशरफ ने भी दूध व खजूर ही खाया। 24 घंटे के सफर के बाद वह माफिया अतीक अहमद काफी थका हुआ दिखाई पड़ रहा था और हल्का खाने के बाद वह वह अपनी बैरक में आराम करने लगा।
मंगलवार को उमेश पाल अपहरण मामले में होने वाले फैसले को लेकर वह काफी परेशान दिखा। अपनी बैरक में वह अकेला था और बाहर सुरक्षा के लिए बंदी रक्षकों की तैनाती की गई थी। जेल में पहुंचने के बाद माफिया अतीक को बैरक तक पहुंचाने में बंदी रक्षकों के साथ जेल अधिकारी भी साथ रहे।

जेल के बाहर सुरक्षा के लिए लगाई गई है पुलिस

केंद्रीय कारागार नैनी में माफिया अतीक अहमद व उसके भाई अशरफ के पहुंचने के बाद जेल गेट पर सुरक्षा के लिए सिविल पुलिस को लगाया गया है। गेट में इंट्री प्वाइंट से लेकर मुख्य गेट तक सुरक्षा के लिए कई पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। बता दें कि बाहर की सुरक्षा के लिए जेल गेट पर पीएसी भी तैनात है। वहीं बंदी रक्षक भी जेल गेट के साथ टॉवरों की निगरानी किया करते हैं। मंगलवार को माफिया अतीक अहमद, अशरफ को स्पेशन टीम लेकर कोर्ट रवाना होगी। सुबह साढ़े नौ बजे के बाद जेल से कोर्ट ले जाने के लिए तैयारियां की गई हैं।

माफिया अतीक व अशरफ के पहुंचने के तीन घंटे बाद अपने क्वार्टर पर पहुंचे जेल अधिकारी

माफिया अतीक अहमद व अशरफ भले ही सात बजे तक जेल में पहुंच गए थे और उन्हें कहां रखा जाएगा इसकी तैयारी पहले ही कर ली गई थी, लेकिन इसके बाद भी रात दस बजे तक जेल अधिकारी जेल में ही डंटे रहे। सारी स्थितियां व पूरी तैयारी पूर्ण होने के बाद जेल अधिकारी अपने क्वाटर में पहुंचे।

मंगलवार को सहरी के बाद रोजा रहेंगे अतीक, अशरफ और अली
अतीक, अशरफ और अली तीनों लोग मंगलवार को सहरी के बाद रोजा रखेंगे। जेल सूत्रों के मुताबिक तीनों ने सहरी के लिए कुछ इंतजाम करने को कहा है।

राहुल गांधी को खाली करना होगा सरकारी बंगला

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मोदी सरनेम को लेकर मानहानि केस में राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता जाने के बाद अब उन्हें दिल्ली का सरकारी बंगला खाली करना होगा. इसके लिए लोकसभा हाउसिंग कमेटी ने सोमवार को राहुल गांधी को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस जारी किया है. कमेटी ने 22 अप्रैल तक 12 तुगलक रोड का सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया है. बतौर सांसद राहुल यहीं रह रहे थे.
गुजरात की सूरत कोर्ट ने आपराधिक मानहानि केस में 23 मार्च को राहुल गांधी को दोषी पाया है. कोर्ट ने उन्हें 2 साल की सजा सुनाई. उनपर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. हालांकि, अदालत ने राहुल गांधी की सजा को 30 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है, ताकि वो ऊपरी अदालतों में अपील कर सके. पिछले शुक्रवार को लोकसभा सचिवालय ने उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी थी.
लोकसभा की वेबसाइट से हटा राहुल गांधी का नाम
लोकसभा की वेबसाइट से भी राहुल का नाम हटा दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी की संसदीय सीट वायनाड को खाली घोषित कर दिया है. इलेक्शन कमीशन अब इस सीट पर इलेक्शन का ऐलान कर सकता है.
कर्नाटक के कोलार में दिया था बयान
राहुल ने 2019 में कर्नाटक की सभा में मोदी सरनेम को लेकर बयान दिया था. उन्होंने कहा था- सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है.
बीजेपी विधायक ने दायर किया मुकदमा
गुजरात में बीजेपी विधायक पुर्णेश मोदी ने इसे लेकर राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस किया था. उन्होंने राहुल गांधी के कर्नाटक में कोलार में दिए गए बयान को 13 करोड़ लोगों के अपमान से जोड़ा था. इसके अलावा पूर्णेश मोदी ने अपनी अर्जी में मानहानि के दर्जनभर से अधिक मामलों के रेफरेंस देकर पुख्ता अर्जी कोर्ट में दाखिल की थी. इसके चलते राहुल गांधी को तीन साल और 11 महीने आठ दिन चले इस केस में कोई राहत नहीं मिल पाई.
स्टे न मिलने पर 8 साल नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
अगर राहुल गांधी की सजा का फैसला ऊपरी अदालतें भी बरकरार रखती हैं, तो वे अगले 8 साल तक चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे. 2 साल की सजा पूरी करने के बाद वह छह साल के लिए अयोग्य रहेंगे. राहुल गांधी अब सूरत कोर्ट के फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकते हैं. कांग्रेस ने एक्शन की वैधानिकता पर भी सवाल उठाया है कि राष्ट्रपति ही चुनाव आयोग के साथ विमर्श कर किसी सांसद को अयोग्य घोषित कर सकते हैं.

Udaipur News: गोबर से निर्मित कागज पर तैयार किए गए प्रशस्ति पत्र

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उदयपुर. सिटी पैलेस के ऐतिहासिक जनाना महल के लक्ष्मी चौक में महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन का 39वां वार्षिक विद्यार्थी सम्मान समर्पण समारोह हुआ. फाउंडेशन के ट्रस्टी महाराज कुमार साहिब डाॅ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने समारोह का विधिवत शुभारंभ किया. खास बात यह है कि समारोह में पहली बार गौ संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया. इसके चलते प्रशस्ति पत्रों को गौ माता के गोबर से निर्मित करवा गया. फाउंडेशन के ट्रस्टी डाॅ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने भामाशाह सम्मान से 57, महाराणा राज सिंह सम्मान से 8 और महाराणा फतह सिंह सम्मान से 117 विद्यार्थियों को सम्मानित किया.

 

फरीदाबाद में गौ तस्करी के मामले में इनामी आरोपी गिरफ्तार

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फरीदाबाद। क्राइम ब्रांच सेक्टर-56 की टीम ने गौ तस्करी के मामले में फरार चल रहे पांच हजार रुपये के इनामी दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने सोमवार काे बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में ताहिर और मुस्तकीम उर्फ मटका का नाम शामिल है। आरोपी ताहिर पलवल जिले के गांव उटावड़ का तथा आरोपी मुस्तकीम उर्फ मटका गांव टाई नूंह का रहने वाला है।
आरोपी ताहिर थाना डबुआ के गौ तस्करी,हत्या के प्रयास, अवैध हथियार के 4 जनवरी वर्ष 2021 के मामले में नूंह के टाई गांव से गिरफ्तार किया है। इस मामले में पहले 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है तथा आरोपी मुस्तकीम गौ तस्करी,हत्या के प्रयास, अवैध हथियार के थाना धौज के 19 सितम्बर 2020 के मामले में फरार चलने, के मामले में पलवल के उटावड से गिरफ्तार किया है।
इस मामले में छह आरोपियों को पहले गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपियों पर 5-5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया हुआ है। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया। मामले में फरार चल रहे अन्य आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

नौ दिन कन्या पूजकर, सब जाते है भूल

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नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत  शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति  देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के नौ रातों में तीन देवियों – महालक्ष्मी, महासरस्वती या सरस्वती और दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति  देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है।  भारतीय नारीवादियों और आधुनिक भारतीय महिलाओं ने इस परित्यक्त देवी प्रतीकवाद पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है क्योंकि इसे पितृसत्तात्मक उत्पीड़न के एक सक्रिय उपकरण के रूप में भी इस्तेमाल किया गया है। अन्य संस्कृतियों और पौराणिक कथाओं में भी कुछ सबसे प्रमुख देवी माताएँ रही हैं और आदर्श मातृत्व के जीवन के प्रतीक हैं – उदाहरण के लिए, मिस्र के आइसिस, ग्रीक डेमेटर या कैथोलिक धर्म में, मैरी यीशु की माँ के रूप में। लेकिन किसी अन्य संस्कृति में छोटी लड़कियों को देवी के रूप में नहीं पूजा जाता जैसा कि भारत में किया जाता है।
आधुनिक देवी आंदोलन महिलाओं की एक नई पीढ़ी के लिए कई प्रारंभिक परंपराओं के पुनर्निर्माण की ओर मुड़ गया, जो लगातार अपने पितृसत्तात्मक समाजों के साथ संघर्ष में थे, जो देवी की पूजा करते थे, लेकिन उनके वास्तविक हाड़-मांस वाली महिलाओं के साथ भेदभाव और शोषण करते थे। कई पश्चिमी नारीवादी और विश्व स्तर पर बहुत सारी महिलाएं हिंदू देवी-देवताओं को प्रेरणादायक और आंतरिक शक्ति प्रदान करने वाली मानती हैं।
नवरात्रि के आठवें और/या नौवें दिन जिन छोटी-छोटी पूर्व-यौवन लड़कियों की पूजा की जाती है, उनके साथ अक्सर दुर्व्यवहार और भेदभाव किया जाता है। ऐसे कई देवी मंदिर हैं जहां रजस्वला महिलाओं या कथित निचली जाति की महिलाओं को प्रवेश करने की भी मनाही है, देवी के बहुत सारे पूजा स्थल हैं जहां केवल पुरुषों को आंतरिक गर्भगृह में जाने की अनुमति है और महिलाओं को नहीं। नवरात्रि के आठवें और/या नौवें दिन कंजक या कन्या के रूप में पूजी जाने वाली छोटी पूर्व-यौवन लड़कियों को अक्सर बाकी दिनों के लिए लड़कियों के रूप में जन्म लेने के लिए गाली दी जाती है, उनके साथ भेदभाव किया जाता है और उन्हें ‘अपवित्र’ माना जाता है। मासिक धर्म शुरू होने के बाद उनकी पूजा की जानी चाहिए।
बदलते दौर में देवी की समकालीन समझ की आवश्यकता है, हम अत्यधिक ध्रुवीकृत दुनिया में रह रहे हैं और यौन भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ आंदोलनों के साथ हाल ही में #MeToo जो पश्चिम में उभरा लेकिन भारत में जमीन हासिल की, यह देवी की अवधारणा में विविधता लाने का समय है। लगभग सभी संस्कृतियाँ जो पृथ्वी को माता मानती हैं, उन्हें अपने आसपास के पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए कुछ करना चाहिए। वास्तव में, कुछ लोग महसूस करते हैं, “देवी नारीत्व की पुरुष कल्पना का एक प्रक्षेपण हो सकती है, लेकिन महिलाएं, पूरे इतिहास की तरह, प्रतीक में जो चाहती हैं उसे खोजने के लिए तोड़फोड़ और उलटफेर के औजारों का उपयोग कर सकती हैं।”
कुछ साल पहले, टैप रूट इंडिया ने एक अभियान विकसित किया जिसमें तीन मुख्य हिंदू देवियों – दुर्गा, सरस्वती, और लक्ष्मी की छवियों को प्रस्तुत किया गया था, लेकिन उनके चेहरे पर चोट और चोट के निशान थे जो महिलाओं के खिलाफ हिंसा का संकेत देते थे। अब समय आ गया है, हो सकता है कि देवी से संबंधित इन सभी प्रतीकों को वर्तमान वातावरण के अनुरूप फिर से कल्पना करने की आवश्यकता हो और छाती ठोकने वाली “जय माता दी, माता की जय” की देवी पूजा को यदि प्रतिस्थापित नहीं किया जाता है तो इसका लड़कियों और महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और अधिक सम्मान करने की आवश्यकता है।
बहुत से घरों में लड़कियों को वह स्थान और सम्मान नहीं जो परिवार के बेटों को है।  हमारे समाज के कुछ प्रमुख व्यक्ति और राजनीतिक नेता भी केवल कागजी भाषण देने में तो शेर है,  पर घर के अंदर प्रवेश करते ही या भूल जाते हैं कि बाहर महिला अधिकार के लिए क्या-क्या भाषण देकर आए हैं? कितना अफसोस है कि जो संविधान महिला को राष्ट्रपति बना सकता है वह किसी मंदिर की मुखिया नहीं बना सकता।  आज भी कुछ मंदिर ऐसे हैं जहाँ  महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया जाता।   परिवार के मुखिया पुरुष की मृत्यु के समय पगड़ी बेटियों के सिर पर रख दी जाती है।  जब महिला की मृत्यु होती है उसकी बेटियां या बहू ऐसा अधिकार नहीं रखती जो बेटे या पति को रहता है।   बहुत से समुदाय में तो बिरादरी में बाँधी जा रही पगड़ी को महिलाएं हाथ भी नहीं लगा सकती।  अब धीरे-धीरे थोड़ा परिवर्तन आ  रहा है
कन्या पूजन के साथ हमें यह संकल्प लेना होगा कि जिस लड़की की हम पूजा कर रहे हैं मंदिर की पुजारी क्यों नहीं बन सकती?  कम से कम जो देवियों के मंदिर है वहां की पूजा तो महिलाएं करें।  इसमें तर्क भी है समाज सोचे तो सही?  मंदिर के अध्यक्ष क्यों नहीं बन सकती? ढोलक बजा सकती है, लंगर पका सकती है।  लेकिन कुछ विशेष मंदिरों में उसी देव मूर्ति के दर्शन नहीं कर सकती जिनके गीत गाकर  वो गला फाड़ लेती है या उनके लिए खाना बना कर भोग लगाती है।   याद रखना होगा कि समाज को तो मानसिकता बदलनी है ही पर पहले महिलाओं को मानसिकता बदलनी होगी।
नवरात्रों में भारत में कन्याओं को देवी तुल्य मानकर पूजा जाता है।  पर कुछ लोग नवरात्रि के बाद यह सब भूल जाते हैं।  कई जगह कन्याओं का शोषण होता है और उनका अपमान किया जाता है।  आज भी भारत में बहूत सारे गांवों में कन्या के जन्म पर दुःख मनाया जाता है।  कन्याओं और महिलाओं के प्रति हमें अपनी सोच बदलनी पड़ेगी।  देवी तुल्य कन्याओं का सम्मान करें।  इनका आदर करना ईश्वर की पूजा करने जितना ही पुण्य प्राप्त होता है।  शास्त्रों  में भी लिखा है कि जिस घर में स्त्रियों  का सम्मान किया जाता है वहां भगवान खुद वास करते हैं।

एक्शन फिल्म ‘चेंगिज़’ 21अप्रैल को रिलीज होगी

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जीत फिल्मवर्क एवं ए ए फिल्म्स के संयुक्त तत्वाधान में निर्मित हाई-ऑक्टेन, हाई-एनर्जी एक्शन एंटरटेनर फिल्म ‘चेंगिज़’ बांग्ला और हिंदी में एक साथ 21 अप्रैल को ईद के अवसर पर रिलीज होगी। फिल्म अंडरवर्ल्ड के इर्द-गिर्द घूमती है जिसमे बंगाल फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार जीत पहली बार
अंडरवर्ल्ड डॉन की भूमिका निभा रहे हैं।
 जीत, गोपाल मदनानी और अमित जुमरानी द्वारा संयुक्तरूप से निर्मित इस फिल्म का निर्देशन राजेश गांगुली ने किया है। नीरज पांडे और राजेश गांगुली की कहानी पर आधारित इस फिल्म का एक्शन से भरपूर ट्रेलर सिनेप्रेमियों के बीच पहले से ही हिट हो चुका है। ‘साथी’, ‘नाटेर गुरु’, ‘संगी’, ‘बंधन’, ‘युद्धो’, ‘जोर’, ‘वांटेड’, ‘दुई पृथ्वी’, ‘नट गुरु’, ‘बॉस: बॉर्न टू रूल’, ‘द रॉयल बंगाल टाइगर’, ‘बच्चन’ और ‘बादशा- द डॉन’ जैसी कई हिट फिल्मों में काम कर चुके बंगाली सुपरस्टार जीत ‘चेंगिज’ में बिल्कुल नए अवतार में नजर आएंगे। इस फिल्म में रोहित बोस रॉय और सुष्मिता चटर्जी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

गाय से टकराकर पलटते-पलटते बची माफिया अतीक की वैन

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गाय से टकराकर पलटते-पलटते बची माफिया अतीक की वैन

शिवपुरी जिले से होकर गुजरे गैंगस्टर अतीक अहमद का काफिला जैसे ही खराई चेकपोस्ट से होकर गुजरा वहां, अचानक अतीक अहमद की वैन के सामने एक गाय आ गई और वैन से टकरा गई। हादसे में गाय की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि वैन पलटने से बच गई। उसके बाद पूरे काफिले को कुछ देर के लिए रोका गया और फिर काफिला यूपी के प्रयागराज के लिए रवाना हुआ। उत्तर प्रदेश का माफिया डॉन अतीक अहमद का काफिला सोमवार सुबह मध्यप्रदेश की सीमा में प्रवेश करते हुए शिवपुरी के रामनगर टोल प्लाजा से गुजरा। यहां सुबह करीब 6:30 बजे अतीक अहमद को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वैन से वॉशरूम के लिए नीचे उतारा गया। इस दौरान अतीक ने मूंछ पर ताव दिया और पहले कुछ भी कहने से मना दिया। लेकिन जब उससे दोबारा पूछा गया कि जिस तरह की खबरें चल रही है क्या आपको डर लग रहा है तो उसने जवाब देते हुए कहा कि मुझे कोई डर नहीं लग रहा है। इसके बाद हाथ हिलाते हुए वह वैन की तरफ बढ़ गया। शिवपुरी के जिस रास्ते से अतीक का काफिला गुजरा उसके दोनों और उसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा थे।