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संकल्प, साधना, सेवा और समर्पण का प्रतीक है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ

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(विष्णु दत्त शर्मा-विनायक फीचर्स)

देश में संगठन और आंदोलन आते-जाते रहे हैं। कुछ समय के साथ क्षीण हुए तो कुछ परिस्थितियों की आँधियों में बह गए और कुछ अपने मूल ध्येय को भूलकर अस्तित्वहीन हो गए। परंतु विश्व के संगठनात्मक इतिहास में शायद ही ऐसा कोई उदाहरण मिलता हो,जिसने न केवल सौ वर्षों की यात्रा की हो, बल्कि अनेक बार प्रतिबंधों, आलोचनाओं और वैचारिक हमलों के बावजूद अपने मूल ध्येय पर अडिग रहते हुए निरंतर विकास किया हो। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसी अनूठे उदाहरण के रूप में आज शताब्दी वर्ष मना रहा है। संघ के साथ हमेशा अदृश्य चुनौतियां भी रही है। तीन बार प्रतिबंध भी लगाया गया। किंतु, इतिहास साक्षी है कि प्रत्येक अवरोध के बाद संघ पहले से अधिक समर्थ व ऊर्जावान होकर उभरा। यह उसकी संगठनात्मक दृढ़ता और वैचारिक स्पष्टता का प्रमाण है। संघ-यात्रा केवल इस संगठन की ही नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, हिन्दुत्व और सनातन संस्कृति की स्वाभाविक सहयात्रा भी है।
अपनी ध्येय यात्रा में संघ ने सदा ही संवाद और समरसता का मार्ग अपनाया। समरस भावना और आचरण से विरोधी धारणाओं को भी समय के साथ समाप्त किया। आज देशव्यापी शाखाओं में सामाजिक समरसता का प्रत्यक्ष अनुभव किया जाता है। संघ ने सदैव इस बात पर बल दिया कि राष्ट्रीय एकता केवल नारों से नहीं, बल्कि जीवन के आचरण और परस्पर व्यवहार से स्थापित होती है। इस दृष्टि से संघ का कार्य सनातन संस्कृति की गहरी परंपराओं से जुड़ा हुआ है। वह विभेद मिटाकर सभी को एक सूत्र में बाँधने की दिशा में प्रयत्नशील रहा है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि आज भारत के कोने-कोने में लाखों स्वयं सेवक संघ के माध्यम से समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में जुटे हैं।


राष्ट्रीय एकता और जनमत निर्माण में संघ का कार्य अनुकरणीय है। यह केवल शाखा या संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे भारत को एक सूत्र में बाँधने का ध्येय रखता है। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन इसका प्रमुख उदाहरण है। दशकों तक बहसें और संघर्ष चलते रहे, पर संघ ने धैर्यपूर्वक देश का जनमत तैयार किया। अंततः अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण केवल धार्मिक उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना, आत्मगौरव, स्वत्व और जनभावना की विजय बना। यही संघ की विशेषता है कि वह सामाजिक व वैचारिक स्तर पर स्थायी और गहरा असर डालने वाले मुद्दों पर धैर्यपूर्वक आगे बढ़ता है। वास्तव में इसकी कार्यपद्धति अद्वितीय है।
स्थापना काल से ही संघ ने सदैव यह स्पष्ट किया कि राष्ट्र निर्माण का वास्तविक मार्ग व्यक्ति निर्माण से होकर ही जाता है। यही कारण है कि संघ से निकले स्वयंसेवक राजनीति, शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, समाजसेवा और उद्योग हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ रहे हैं। यद्यपि संघ प्रत्यक्ष राजनीति से दूर रहता है, परंतु संघ की प्रेरणा से राजनीति में भी एक नई संस्कृति का प्रवाह हुआ। दीनदयाल उपाध्याय से लेकर नरेंद्र मोदी तक, ऐसे अनेक नेता सामने आए जिन्होंने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का मार्ग माना। आज जब राजनीति में स्वार्थ और अवसरवाद के आरोप आम हो चुके हैं, तब संघ की यह बड़ी देन है कि राजनीति में सुचिता, समर्पण और राष्ट्र सर्वोपरि की धारा निरंतर बह रही है। आज भी संघ ही वह संगठन है जिसका कार्यकर्ता किसी सत्ता की आकांक्षा से प्रेरित नहीं होता, बल्कि वह अपने जीवन को समाज और राष्ट्र के लिए खपा देने की प्रेरणा पाता है। संघ से निकले असंख्य आत्मविश्वासी, अनुशासित और राष्ट्रनिष्ठ स्वयंसेवक समाज के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान कर रहे हैं।
वस्तुतः संघ ने अपने सौ वर्षों में समाज को संगठित करने की साधना की है। संघ का आशय केवल किसी संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि वह संगठन शक्ति का जीवंत प्रतीक है। अकेला व्यक्ति चाहे कितना ही सक्षम क्यों न हो, जब समाज संगठित होता है, तब असंभव भी संभव हो जाता है। संघ कार्य का संदेश है कि संगठित शक्ति ही वास्तविक वैभव दिखाती है और वही राष्ट्र को सही दिशा देती है।
संघ की एक और विशेषता है, नवाचार और युगानुकूलता को आत्मसात करना। इसकी शताब्दी यात्रा केवल परंपराओं के पुनरावर्तन तक सीमित नहीं रही है। हर युग में संघ ने युगानुकूल परिवर्तन को अंगीकार किया है। स्थापना काल से लेकर वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के नेतृत्व तक संगठन ने अनेक नवाचार और आवश्यक बदलाव किए हैं। श्रद्धेय भागवत जी ने बौद्धिक जगत को नई दृष्टि दी, सामाजिक समरसता को केंद्र में रखा और यहाँ तक कि विश्व की धारणा बदलने का प्रयास भी किया। उनके नेतृत्व में संघ ने यह स्पष्ट किया कि हिन्दुत्व कोई संकीर्ण विचार नहीं, बल्कि समग्र मानवता को जोड़ने वाला दृष्टिकोण है और सह-अस्तित्व इसकी नींव है।
आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप संघ के कार्यक्रमों का पुनर्संयोजन हर स्तर पर उसकी युगानुकूलता दिखाई देती है। संघ का आचरण यह बताता है कि उसकी मूल शक्ति समय के साथ कदम मिलाकर चलने और अनुकूलन की क्षमता में है। यह बड़ा कारण है कि हर कालखंड में युवा वर्ग के बीच संघ का आकर्षण लगातार बढ़ता गया है।
वास्तव में मेरे लिए यह सब केवल सैद्धांतिक बातें नहीं हैं, बल्कि प्रत्यक्ष जीवन का अनुभव हैं। लगभग चालीस वर्ष पूर्व मैंने स्वयं इस आकर्षण को अपने भीतर पाया और संघ से जुड़ा। मैं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ा, तो मैं ऐसे क्षेत्र से आता था जहाँ संकीर्णता और जड़ता गहरी थी। यदि युवा काल में संघ से जुड़ाव न हुआ होता, तो संभव है कि मेरी जीवन-दिशा भटक जाती। परंतु संघ के संस्कारों ने मुझे सार्थक जीवन दिया। राष्ट्र सर्वोपरि के विचार ने मुझे देशसेवा की ओर उन्मुख किया और यह सिखाया कि जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के लिए जीना है। यही जुड़ाव मेरे विचार, आचरण और दृष्टिकोण को बदलने वाला सिद्ध हुआ। जीवन के लगभग तीस वर्ष एबीवीपी में कार्य करते हुए संघ की साधना का प्रत्यक्ष साक्षी बनने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ।
हिन्दुत्व संघ का महा संकल्प है। उसका लक्ष्य है ऐसा समाज खड़ा करना, जो राष्ट्र को सर्वोपरि माने। यह अवधारणा एकात्मता पर केंद्रित है। संघ की यही साधना रही है। यद्यपि संघ ने कभी स्वयं को प्रचार के केंद्र में नहीं रखा। स्वयं सेवकों से भी उसकी यही अपेक्षा रही है कि पुरुषार्थ करो, परंतु श्रेय की चिंता मत करो। इस मंत्र से उसकी जड़ें समाज में विश्वास और विश्वसनीयता के साथ गहरी और सुदृढ़ होती गई।
अविरल यात्रा में संघ कभी हिन्दुत्व, भारत और स्वत्व से विमुख नहीं हुआ। चाहे कितनी भी उपेक्षाएं हुई हों, चुनौतियाँ आई हों, संघ इन्हीं तत्वों पर खड़ा रहा। हिन्दुत्व यहाँ संकीर्णता का प्रतीक नहीं, बल्कि वह समग्र मानवता को एक सूत्र में जोड़ने वाली दृष्टि है। यही संस्कृति भारत को सहस्राब्दियों तक जीवित रखती आई है और संघ उसी परंपरा का संवाहक बनकर हिमालय की तरह अडिग खड़ा है।
सौ वर्ष का पड़ाव केवल इतिहास की कोई तारीख नहीं, बल्कि उस संकल्प, साधना, सेवा और समर्पण का प्रतीक है, जिसने करोड़ों स्वयं सेवकों को राष्ट्र सेवा के मार्ग पर अग्रसर किया। संघ ने हम भारतवासियों को यह जीवन-दृष्टि दी है कि अपने लिए नहीं, राष्ट्र के लिए जीना है। यही उसका शताब्दी-संदेश है। संघ केवल एक संगठन नहीं, यह भारत की आत्मा का स्पंदन है। आगामी समय में पंच परिवर्तन स्वबोध, पर्यावरण, सामाजिक समरसता, नागरिक शिष्टाचार और कुटुम्ब प्रबोधन-के आधार पर भारत को सिरमौर बनाने का संकल्प लिया गया है। सतत चलते हुए संघ सनातन संस्कृति, हिन्दुत्व, भारत और स्वत्व का अमर प्रवाह है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी राष्ट्रभक्ति की धड़कन देता रहेगा। (विनायक फीचर्स) (लेखक मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा सदस्य हैं)

कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर गौ तस्करी को बढ़ावा देने का लगाया आरोप

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कवर्धा\बालोद: कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद गौवंश संरक्षण की स्थिति बदतर हो गई है. पार्टी का कहना है कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ से लगभग 5 लाख गौवंश गायब हो गए हैं. वहीं 580 गौवंश सड़क हादसों में मारे गए, 1200 से अधिक भूख-प्यास से मर गए और 200 से ज्यादा जहरीले पदार्थ खाने से मौत के शिकार हुए.

भाजपा पर गौठान बंद करने का आरोप: जिला कांग्रेस प्रवक्ता विकास केसरी ने कहा कि कांग्रेस सरकार में प्रदेशभर में 10,800 गौठान बनाए गए थे, जिनमें 14 लाख से अधिक गौवंश का संरक्षण किया जाता था. वहां चारा-पानी की व्यवस्थित सुविधा उपलब्ध कराई गई थी. लेकिन भाजपा सरकार बनते ही सबसे पहले गांव-गांव के गौठान बंद कर दिए गए, जिसके चलते मवेशी सड़क पर भटकने लगे और उनकी जान पर संकट आ गया.

65 देशों को बीफ निर्यात करने का आऱोप: कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा खुद को गौ पूजक और गौ रक्षक बताकर सिर्फ दिखावा करती है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है. भाजपा शासन में गौ तस्करी के मामले बढ़े हैं. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 2014 में मोदी सरकार आने के बाद भारत 65 देशों को बीफ निर्यात कर रहा है और भाजपा शासित राज्यों में सबसे अधिक स्लॉटर हाउस संचालित हो रहे हैं.

गौठान चालू करने की मांग: कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार प्रदेश से गायब हुए 5 लाख गौवंश के मामले में स्पष्ट जवाब दे और पूर्व में संचालित सभी 10,800 गौठानों को पुनः चालू कर चारा-पानी की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करे.

बालोद में भी कांग्रेस का आरोप: वहीं बालोद जिला कांग्रेस कमेटी ने भी भारतीय जनता पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार गौ-रक्षक का चोला ओढ़कर कत्लखानों से चंदा ले रही है, जबकि प्रदेश में पशुधन की स्थिति बदतर हो चुकी है. जिला कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि पिछले पौने दो साल में राज्य से करीब 5 लाख पशुधन गायब हो गए हैं, वहीं 2,500 से अधिक मौतें दुर्घटनाओं और भूख से हो चुकी हैं. हिरवानी ने बताया कि भाजपा शासनकाल में गौ-तस्करी तेज़ हो गई है और सड़कों पर बेसहारा पशुधन मर रहे हैं. केवल बीते दो वर्षों में 850 से अधिक गाय वाहन दुर्घटनाओं में कुचलकर मारी गईं. कांग्रेस सरकार के समय बनाए गए गौठान बंद कर दिए गए, जिससे रोजगार भी प्रभावित हुआ है. हिरवानी ने कहा कि भाजपा सरकार “गौ-रक्षक” होने का दावा करती है, मगर जमीनी हकीकत बिलकुल विपरीत है.

गौवंश बचेगा तो सनातन बचेगा:अभिनेता विवेक ओबेरॉय

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गौवंश बचेगा तो सनातन बचेगा:अभिनेता विवेक ओबेरॉय
मुंबई (विभूति फीचर्स)। सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता विवेक ओबेराय ने गौवंश और सनातन धर्म पर कहा है कि हमारे देश का आधार गौमाता है। अगर गौवंश रहेगा तो ही सनातन धर्म सुरक्षित रहेगा।

फिल्म अभिनेता विवेक ओबेराय ने गौवंश और सनातन धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि मेरे पिता जी (सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता सुरेश ओबेरॉय) ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक गौमाता की सुरक्षा, संरक्षण और संवर्धन के लिए पदयात्रा निकाली। वे किसानों से मिले और कई महीनों तक सुदूर के गांव – गांव तक गए। उन्होंने गौमाता का देश की आर्थिक संरचना में योगदान बताते हुए समझाया कि कैसे गौमाता का संरक्षण किया जाए। उन्होंने गौ हत्या की रोकथाम के भी सघन प्रयास किए। श्री विवेक ओबेरॉय ने गौमाता और सनातन धर्म पर विस्तृत उद्बोधन दिया।
चर्चित अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने यह बात भारत के पहले गौ वंश पर आधारित राष्ट्रीय समाचारपत्र गऊ भारत भारती की 11वीं वर्षगाँठ पर “राष्ट्र सेवा सम्मान समारोह” के आयोजन में कही। जुहू इस्कॉन सभागार मुंबई में गुरुदेव आचार्य लोकेश मुनि की अध्यक्षता और सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय के मुख्य अतिथित्व में यह कार्यक्रम हुआ। अन्य अति विशिष्ट अतिथियों के रुप में यहां सद्गुरु डॉ. दयानिधि , विनय गोपाल सिंह , महेंद्र संगोई , सुनील सेठ और विशेष तौर पर हैदराबाद से आए ज्योतिषचार्य कल्याण शास्त्री भी उपस्थित थे।

गुरुदेव आचार्य लोकेश मुनि ने भी गऊ भारत भारती और उसके संस्थापक संजय अमान के कार्यो की सराहना की।
उल्लेखनीय है कि गऊ भारत भारती समाचारपत्र भारत में गौवंश और गौ-आधारित अर्थव्यवस्था पर केंद्रित पहला राष्ट्रीय समाचारपत्र है। “गौ माता राज्य माता,स्वर्णिम भारत-संपन्न किसान-उन्नत महाराष्ट्र” के ध्येय को लेकर यह समाचार पत्र विगत 11वर्षों से प्रयत्नशील है। गौवंश संरक्षण, गौ-आधारित कृषि, और इसके आर्थिक व सांस्कृतिक महत्व को बढ़ावा देने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

यह समाचारपत्र न केवल गौवंश के आर्थिक योगदान पर प्रकाश डालता है, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को भी रेखांकित करता है, जैसे कि गाय को “विश्व की माता” के रूप में मान्यता देना। यह देशव्यापी चर्चा का हिस्सा बनकर गौ-आधारित अर्थव्यवस्था और सतत विकास को प्रोत्साहित कर रहा है।


इस अवसर पर मुख्य अतिथि विवेक ओबेराय ( सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता और उद्योगपति ),विनय गोपाल सिंह (उद्योगपति ),महेंद्र भाई संगोई और सद्गुरु डॉ. दयानिधि (राष्ट्रीय संत) ने गौ भक्तों और गौवंश के लिए कार्य कर रहे लोगों तथा कला , साहित्य , समाजसेवा के क्षेत्र में सराहनीय काम करने वालों को राष्ट्र सेवा सम्मान से सम्मानित किया । इस कार्यक्रम में जीतेश्वर इंफ़्रा की प्रबंध निदेशिका रंजना सिंह , वर्षा चतुर्वेदी,संगीत मासूम , समर्था महालक्ष्मी ,लेखिका ललिता जोगड़ , हरेश वोरा , विजय पहरिया , डॉ लेना गुप्ता , एरीपरला योगानन्द शास्त्री को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जयश्री, विशाल भगत और हिम बहादुर सोनार भी उपस्थित थे। (विभूति फीचर्स)

उद्यमियों की उपस्थिति के साथ लोनावला मे “अल्टिमेट मिलियनेयर ब्लूप्रिंट” वर्कशॉप और अवॉर्ड समारोह

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लोनावला। व्यवसाय का असली उद्देश्य केवल मुनाफा नहीं, बल्कि समाज का उत्थान है — इसी विचारधारा पर आधारित “अल्टिमेट मिलियनेयर ब्लूप्रिंट” वर्कशॉप 24 से 27 सितंबर तक लोनावला के हरे–भरे वातावरण में संपन्न हुई।

देविदास श्रावण नाईकरे ने ध्यान, वेदज्ञान और आधुनिक बिजनेस स्ट्रैटेजी का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। उन्होंने उद्यमियों को संदेश दिया कि बड़ा टर्नओवर होने से पहले बड़ा विचार ज़रूरी है और स्थायी सफलता से पहले स्थिर मन।

कार्यशाला के समापन पर महाराष्ट्र के शीर्ष उद्यमियों को अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित रहे बॉलीवुड स्टार मुश्ताक खान ने कहा कि यह अवॉर्ड आपकी सफलता का नहीं, बल्कि आपके सेवाभाव और दृष्टिकोण का सम्मान है।”

अंत में कार्यशाला का मूल संदेश यही रहा, “सच्चा लीडर वही है जो अपने सपनों के साथ-साथ समाज के सपनों को भी पूरा करता है।

पूजा राव हॉरर और रोमांच से भरपूर फिल्म द अनवांटेड गिफ्ट में करेगी धमाल

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झारखंड के बंसीधर नगर से निकलकर मायानगरी मुंबई तक का सफर तय करने वाली अभिनेत्री पूजा राव अब दर्शकों के लिए रोमांच और हॉरर का डबल डोज लेकर आ रही हैं। उनकी आगामी फीचर फिल्म “द अनवांटेड गिफ्ट” हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में बनी है। खास बात यह है कि इस फिल्म में पूजा न सिर्फ मुख्य अभिनेत्री हैं बल्कि बतौर निर्माता भी अपनी नई पारी की शुरुआत कर रही हैं। यह फिल्म नए वर्ष पर रिलीज होगी।

इसके साथ ही पूजा की हिंदी फिल्म “जिला ग्रीडी” की शूटिंग पूरी हो चुकी है, जिसमें उन्होंने एक पाकिस्तानी लड़की का किरदार निभाया है। यह फिल्म लव स्टोरी और ड्रामा से भरपूर है और जल्द ही इसका ट्रेलर रिलीज किया जाएगा।

पूजा राव अब तक 500 से अधिक म्यूजिक वीडियो में नजर आ चुकी हैं। वहीं, वेब सीरीज़ “मुँह दिखाई”, “बंद दरवाजा”, “विधवा” और “खींच मेरी फोटो” में उनके अभिनय को दर्शकों ने सराहा है। भोजपुरी इंडस्ट्री से पूजा ने शुरुआत की थी और छठ गीतों से अपने करियर की पहली पहचान बनाई।

पूजा राव का जीवन सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। एक साधारण परिवार में जन्मी पूजा ने आईटीआई की पढ़ाई की है। वह बचपन से ही टीवी पर अभिनेत्रियों को देखकर सपनों की दुनिया में खो जाती थीं और ठान लिया था कि एक दिन पर्दे पर जरूर नजर आएँगी। अपने बलबूते पर इन्होंने अपनी मंजिल तय की। उनके इस सपने में उनके दादा-दादी का आशीर्वाद और सहयोग रहा। पूजा अपने दादा-दादी को अपना आदर्श मानती हैं।

आज वही साधारण लड़की न सिर्फ अभिनय में बल्कि निर्माता के रूप में भी नई पहचान बना रही है। पूजा को मुंबई ग्लोबल की ओर से अवार्ड मिल चुका है और वह दुबई में मॉडलिंग और रैम्प वॉक भी कर चुकी हैं। वह भोजपुरी और हिंदी सिनेमा के बड़े नामों – रवि किशन, करण ट्रेकर, चिंटू पांडे जैसे सितारों के साथ स्क्रीन शेयर कर चुकी हैं।

पूजा का कहना है, “कभी हार नहीं माननी चाहिए और हमेशा कुछ अलग करने का हौसला होना चाहिए। सपनों का सागर चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, मेहनत और जुनून से उसे पार किया जा सकता है।”

नए साल में पूजा राव की एक के बाद एक फिल्में और म्यूजिक वीडियो रिलीज होंगी। दर्शकों को उनके इस नए अंदाज और नए सफर का बेसब्री से इंतजार है।

दमदार एक्टिंग से दर्शकों की फेवरेट रही हैं मृणाल देशराज

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मुंबई। “इश्कबाज़”, “नागिन”, “कहीं तो होगा” जैसे सुपरहिट सीरियल्स से टीवी पर अपनी पहचान बनाने वाली हॉट और ग्लैमरस अदाकारा मृणाल देशराज एक बार फिर सुर्खियों में हैं। ग्रे शेड्स की क्वीन कहे जाने वाली मृणाल अपने बोल्ड अंदाज़ और दमदार एक्टिंग से दर्शकों की फेवरेट रही हैं।

एक ब्रेक के बाद मृणाल अब अपनी दूसरी पारी की तैयारी कर रही हैं और इस बार उनका निशाना है ओटीटी। स्टाइल और एटीट्यूड में बेमिसाल मृणाल का कहना है कि वह नए प्लेटफॉर्म पर अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाना चाहती हैं।

मृणाल सिर्फ़ कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि फिटनेस और स्पोर्ट्स की दुनिया में भी बेहद एक्टिव हैं। योगा, जिम्नास्टिक, स्क्वैश, लॉन टेनिस, किक बॉक्सिंग, स्विमिंग, रनिंग, स्पिनिंग और हैवी वेट लिफ्टिंग… इन सबमें उनका जलवा देखने लायक है। यही वजह है कि उनकी फिट और टोंड बॉडी फैंस को हमेशा इंप्रेस करती है।

थिएटर से शुरुआत करने वाली मृणाल ने परितोष पेंटर के “ये क्या हो रहा है”, “अमर, अकबर और टोनी”, विपुल मेहता के “हम ले गए तुम रह गए”, रमेश तलवार के “डॉ. मुक्ता” और नादिरा बब्बर के “यहूदी लड़की” जैसे नाटकों से अपने टैलेंट का लोहा मनवाया। वहीं छोटे पर्दे पर “कहीं तो होगा” की शिप्रा, “सुजाता” की पद्मिनी, “डोली सजा के”, “छोटी सी ज़िंदगी”, “महाराणा प्रताप” की महारानी उमादेवी जैसे नेगेटिव रोल्स में छा गईं। और फिर “इश्कबाज़” की जाह्नवी ओबेरॉय और “नागिन” की रोहिणी बनकर फैंस के दिलों पर राज किया।

ग्लोबल एक्सीलेंस अवॉर्ड जीत चुकीं और कई मैगज़ीन कवर रह चुकी मृणाल का कहना है – “पैशन और डेडिकेशन ही मेरी ताकत है। काम के पीछे भागो, पैसे के पीछे नहीं, मंज़िल खुद चलकर आपके पास आएगी।”

अब देखना यह होगा कि ओटीटी पर मृणाल अपने ग्लैमरस और दमदार अंदाज़ से क्या नया धमाल मचाती हैं।

गौ-हत्यारों की रिश्तेदार है कांग्रेस’, गौ-मांस टैक्स के आरोप पर सीएम मोहन यादव का पलटवार

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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बालाघाट में कांग्रेस पर गौ-मांस कर और गौ-हत्या के मुद्दे पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का गौमाता से कोई लेना-देना नहीं है उनकी सरकार ने गौ-हत्या पर सख्त प्रतिबंध लगाए हुए है। उन्होंने कांग्रेस पर साधु-संतों पर गोलियां चलवाने का भी आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने गौशाला योजना का उल्लेख करते हुए गौ-पालकों को प्रति गाय 40 रुपये देने की बात कही।

भोपाल/बालाघाट। कांग्रेस ने गौ-मांस के टैक्स को लेकर मध्यप्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस आरोप पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबरदस्त पलटवार किया है। उन्होंने 24 सितंबर को बालाघाट के कटंगी में कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हमारी मान्यता है गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। हम गौ-हत्या की सोच भी नहीं सकते।

कांग्रेसियों का गौमाता से कोई लेना देना नहीं। वह तो गौमाता के हत्यारों की रिश्तेदार है। उसने ही दशकों पहले करपात्री महाराज और साधु संतों पर गोलियों तक चलवाईं। कांग्रेस ने अपना गाय-बछड़े का चुनाव चिन्ह बदलकर पंजा कर दिया। कांग्रेस के इस पाप को जनता कभी माफ नहीं करेगी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज बालाघाट के कटंगी पहुंचे। उन्होंने यहां किसानों को बोनस की राशि दी। इसी दौरान उन्होंने मंच से कहा कि जब हमने लाड़ली बहनों को एक हजार रुपये देने शुरू किए तो कांग्रेसियों ने कहा कि पैसा नहीं है, यह केवल चुनाव की बात है, बाद में कुछ नहीं होगा।

लेकिन, हम सबने देखा कि बहनों को चुनाव के पहले एक हजार, पिछले साल 1250, रक्षाबंधन पर 250 रुपये अलग से दिए। नालायक कांग्रेसी कहते हैं कि बहनों को पैसे दो तो शराब पी जाती हैं। सीएम डॉ. मोहन ने बहनों से कहा कि कोई कांग्रेसी गली-मोहल्ले आए तो उनका हिसाब चुकता करना। अपने इन्हीं कर्मों की वजह से कांग्रेस 20 साल से सत्ता से बाहर है।

कांग्रेसी पहले लाड़ली बहनों को गाली दे रहे थे, अब नई कहानी शुरू की है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में गौ-मांस को टैक्स फ्री कर दिया। अब कोई इन मूर्खों से पूछे कि 2004 के पहले तुम्हारी सरकार थी। उस वक्त जो तुमने किया तो उसका हिसाब लेंगे। हमारे यहां कोई भी गौ-हत्या संभव नहीं है।

गौवंश को लेकर प्रदेश में सख्त कानून
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने गौ-हत्या पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। हम गौ-माता के प्रति ऐसी बात तो सोच भी नहीं सकते। कोई गौ-माता को काटने की तो छोड़ो, अगर उसको परेशान भी करेगा तो हमारी सरकार उसे उठाकर जेल में डाल देती है। हमने कानून बनाया है। हमने कई ट्रक और गाड़ियां जब्त की हैं, जिनमें भरकर गौवंश की तस्करी की जा रही थी। हम जब गौ-हत्यारों को पकड़ने जाते हैं तो कांग्रेसी हाय रे-हाय रे चिल्लाने लगते हैं।

कांग्रेस को गौमाता से कोई लेना-देना नहीं। इनकी गौ-हत्यारों से रिश्तेदारी है। कांग्रेसी किसी के नहीं हो सकते। भगवान राम के मामले में भी कांग्रेस ने शपथ पत्र दिया था कि कहां राम, किसने देखे, कहां पैदा हुए, राम का कोई अस्तित्व नहीं है, वो तो काल्पनिक है। लेकिन, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राम मंदिर बना तो कांग्रेसी कहने लगे ही राम हमारे भी हैं। राम मंदिर को लेकर सारे अड़ंगे कांग्रेस ने ही लगाए।

अपने पाप देखे कांग्रेस
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने गौशाला के लिए योजना बनाई है। गौ-पालकों को प्रति गाय 40 रुपये प्रदान किए जा रहे हैं। कांग्रेस से पूछो कि उसका इतिहास क्या है। 1960-65 के आसपास करपात्री महाराज साधु संतों को लेकर नई दिल्ली आए थे। उन्होंने सरकार से कहा था कि गौ-माता की हत्या बंद करो और सबको साथ लेकर चलो।

लेकिन, कांग्रेसियों ने निहत्थे साधु-संतों पर गोलियां चलवाकर उनकी हत्या का पाप किया। देश इस पाप के लिए कभी कांग्रेस को क्षमा नहीं करेगा। करपात्री महाराज ने अंशन करते-करते शरीर छोड़ दिया। महात्मा गांधी के समय कांग्रेस ने अपना चुनाव चिन्ह गाय-बछड़ा रखा। इसके बाद इन्हें गाय-बछड़े से नफरत हो गई और उन्होंने अपना चुनाव चिन्ह हाथ रख लिया।

गाय माता कांग्रेसियों को पसंद नहीं और सर्टिफिकेट हमसे ले रहे हैं। कांग्रेस अपने अंदर के पाप देखे। ये पाप उसको खा जाएंगे। हमारी सरकार में जो 25 गाय पालेगा और 40 लाख निवेश करेगा तो हम उसको दस लाख का अनुदान देंगे। हमारी सरकार गौ-माता को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

पंजाब के राज्यपाल एवं आचार्य लोकेशजी के मध्य राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा

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आचार्य लोकेशजी की जन्मभूमि में अस्पताल निर्माण सेवा का सराहनीय प्रयास- राज्यपाल कटारिया

पचपदरा राजस्थान मेरी जन्मभूमि है इसकी सेवा करना मेरा सौभाग्य – आचार्य लोकेश

नई दिल्ली, 24 सितंबर 2025: अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक आचार्य लोकेशजी ने पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया से भेंट कर समाज सेवा एवं राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर दिल्ली के कपूरथला भवन में विस्तृत चर्चा की।

विश्व शांतिदूत आचार्य लोकेशजी ने राज्यपाल की पंजाब में बाढ़ से प्रभावित लोगों की तन मन धन से सहायता करने के प्रयास की प्रशंसा करते हुए बताया कि उनकी जन्मभूमि राजस्थान के पचपदरा में आचार्य लोकेश सेवा सद्भावना ट्रस्ट द्वारा प्रस्तावित सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल का निर्माण करना चाहते हैं | आचार्य लोकेश ने बताया कि मेरी जन्मभूमि पचपदरा में ग्राम पंचायत द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे भूखंड पर स्मार्ट विलेज मूवमेंट के एक्सिक्यूटिव चेयरमैन डॉ अनिल वी शाह के सहयोग निर्माण होने वाले सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल से आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को विश्व स्तरीय चिकित्सा उपलब्ध हो सकेंगी |

पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने पचपदरा में आचार्य लोकेशजी के मार्गदर्शन में स्पेशलिस्ट अस्पताल के निर्माण के संकल्प को सराहनीय प्रयास बताया | उन्होंने कहा कि राजस्थान उनकी भी जन्मभूमि है, इसकी सेवा करना मेरा सौभाग्य है | श्री कटारिया ने आचार्य लोकेशजी को अस्पताल निर्माण के संकल्प के लिए शुभकामनायेँ देते हुये कहा कि इसके लिए हर प्रकार का सहयोग करने के लिए वो सदैव उपलब्ध रहेंगे | उन्होने कहा कि आचार्य लोकेशजी के मानवतावादी कार्य बेहद प्रशंसनीय है |

त्योहार का आनंद तभी परफेक्ट है जब उसमें तड़क-भड़क के साथ जिम्मेदारी भी हो : पूनम झावर

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मुंबई। बॉलीवुड की सदाबहार अदाकारा पूनम झावर ने अपने ग्लैमर, शालीनता और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर न सिर्फ हिंदी सिनेमा, बल्कि फैशन और इवेंट इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। अभिनेत्री, मॉडल, गायिका, फिल्ममेकर और इवेंट ऑर्गेनाइज़र हर रूप में उन्होंने यह साबित किया है कि वह सिर्फ एक ग्लैमरस चेहरा नहीं, बल्कि एक सक्षम और दूरदर्शी कलाकार भी हैं।

नवरात्रि और ग्लैमर का संगम:

पूनम झावर का मानना है कि नवरात्रि केवल धार्मिक उत्सव भर नहीं, बल्कि आज के समय में यह फैशन, म्यूजिक और युथफुल एनर्जी का त्योहार बन चुका है। गरबा और डांडिया को लेकर उनकी सोच अनोखी है। उनके अनुसार, गरबा स्त्री शक्ति और पॉज़िटिव एनर्जी का महान उत्सव है, जिसमें हर स्टेप ग्रेस, स्टाइल और पावर का प्रतीक होता है। वहीं, डांडिया युवाओं के लिए ट्रेंड, फैशन और मस्ती का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है, जिसमें ड्रेसिंग सेंस से लेकर म्यूज़िक तक सबकुछ आधुनिक हो चुका है।

अपने फैंस को संदेश देते हुए वह कहती हैं कि त्योहार का मज़ा तभी परफेक्ट है जब उसमें तड़क-भड़क के साथ जिम्मेदारी भी हो। सेहत और सुरक्षा का ख्याल रखते हुए हर किसी को गरबा और डांडिया का भरपूर आनंद लेना चाहिए।

अभिनय और करियर की यात्रा:

मुंबई में जन्मीं पूनम झावर ने 1994 की सुपरहिट फिल्म “मोहरा” से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की। इस फिल्म के सदाबहार गीत “ना कजरे की धार” में उनकी मौजूदगी ने उन्हें रातों-रात लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद उन्होंने “ओएमजी! ओह माय गॉड”, “आंच”, “संसारची माया”, और “एका लग्नाची गोष्ट” जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। साथ ही उनके म्यूजिक अलबम “पू फॉर यू”, “टेक मी होम बेबी” और “पू क्या जलवा” ने भी दर्शकों का दिल जीता।

आज भी उनकी सुंदरता और फैशन सेंस उन्हें चर्चा में बनाए रखते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी मज़बूत फैन फॉलोइंग है, जहाँ लोग उनके स्टाइल और व्यक्तित्व से प्रेरणा लेते हैं।

आने वाले प्रोजेक्ट्स और उपलब्धियाँ:

पूनम झावर इन दिनों एक महिला प्रधान हिंदी फिल्म पर काम कर रही हैं, यह राजस्थान और मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों के बीच की जा रही है। यह फिल्म हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में रिलीज़ होगी और इसमें उनके अभिनय का नया पहलू दर्शकों के सामने आएगा।

इसके अलावा, उनकी इवेंट कंपनियाँ “दादासाहेब फाल्के एक्सीलेंस अवार्ड्स” और “ड्रीम कैचर” पिछले सात वर्षों से बॉलीवुड के बड़े इवेंट्स और शो सफलतापूर्वक आयोजित कर रही हैं।

ग्लैमर और अभिनय के साथ-साथ समाजसेवा और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी से पूनम झावर आज भी दर्शकों की पहली पसंद बनी हुई हैं। फैंस को उम्मीद है कि वह जल्द ही अपने “सेक्सी साध्वी” वाले इमेज से आगे बढ़कर नए और दमदार किरदारों के साथ बड़े पर्दे और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर फिर से चमक बिखेरेंगी।

पूनम झावर की यात्रा यह साबित करती है कि वह केवल 90 के दशक की स्टार नहीं, बल्कि एक सदाबहार और बहुआयामी कलाकार हैं, जिनका जादू आने वाले वर्षों तक दर्शकों को मोहित करता रहेगा।

ग्रामीण बच्चों की शिक्षा व विकास के लिए लाइट ऑफ लाइफ ट्रस्ट द्वारा “सुर संगम” का आयोजन

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मुंबई। लाइट ऑफ लाइफ ट्रस्ट ने अपनी 20वीं वर्षगांठ का उत्सव मुंबई के जमशेद भाभा रंगमंच, राष्ट्रीय केंद्र प्रदर्शन कला (एनसीपीए) में संगीतमय कार्यक्रम “सुर संगम” के साथ मनाया। इस सांस्कृतिक संध्या में पद्मश्री गायक सुरेश वाडकर, गायिका संजीवनी भेलांडे, गायक मुख्तार शाह तथा चिराग पांचाल के नेतृत्व में 23 साज़ समूह ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में अभिनेता फिल्मकार राजकपूर को श्रद्धांजलि देते हुए उनकी फिल्मों के गीतों की प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाराष्ट्र सरकार के कौशल विकास, रोजगार, शिक्षा और नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढा रहे। उन्होंने ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना की और सरकार की ओर से निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया। विशिष्ट अतिथियों में हर्षिता नर्वेकर, मंजी लोढा, अमला रूइया, मालती जैन और आभा सिंह शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त मिलिंद देवड़ा, मकरंद नर्वेकर और हर्षिता नर्वेकर की शुभकामनाएँ भी प्राप्त हुईं।
ट्रस्ट की स्थापना वर्ष 2005 में विली डॉक्टर ने 25 ग्रामीण बच्चों से की थी। आज यह संस्था पच्चीस हज़ार से अधिक बच्चों और उनके परिवारों तक पहुँच चुकी है तथा छह लाख से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित कर चुकी है।
इस संगीतमय आयोजन का उद्देश्य ट्रस्ट की 20 वर्ष की यात्रा का उत्सव मनाना और ग्रामीण बच्चों की शिक्षा व विकास के लिए सहयोग जुटाना था। इस कार्यक्रम से प्राप्त धनराशि ट्रस्ट के शैक्षिक और सामाजिक कार्यक्रमों में उपयोग की जाएगी।