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अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच द्वारा आयोजित ‘आजादी का महोत्सव’ पर कवि सम्मेलन संपन्न

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नवी मुंबई। आजादी के महोत्सव के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच द्वारा कोपरखैरने में 19 अगस्त की शाम 4 बजे ऑनलाइन देशभक्ति काव्य संध्या कार्यक्रम का आयोजन सम्पन्न हुआ जिसका विषय था ‘तिरंगा क्या कहता होगा…?
सरस्वती वंदना कर अलका पांडे ने कार्यक्रम की शुरुआत की और मंच का संचालन अलका पांडे और सुरेंद्र हरड़े ने किया। कार्यक्रम के समारोह अध्यक्ष डॉ. कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, मुख्य अतिथि राम राय, विशेष अतिथि जनार्दन सिंह, शिवपूजन पांडे, संतोष साहू, अरविंद अकेला, और पीएल शर्मा थे।
सभी अतिथियों ने देश प्रेम पर अपने मन के उदगार व्यक्त किए, देश प्रेम की ओज भरी कविता से कवियों में जोश भरा और सभी अतिथियों ने देश प्रेम पर अपनी रचनाओं का पाठ किया।
सभी साहित्यिक गुणी जनों के बीच कार्यक्रम शुरू हुआ तथा सबने देश प्रेम से भरी अपनी रचनाएं सुनाई और अंत में नीरजा ठाकुर ने आभार व्यक्त किया। अलका पांडे ने कहा कि हमें आने वाले युवाओं को भी ऐसे ही देश भक्ति के कार्यक्रमों में जोड़ना चाहिए और हर जगह इस तरह के कार्यक्रम करना चाहिए क्योंकि देशभक्ति बहुत जरूरी है। देश है तो हमारा वजूद है और हम उन वीरों को सलाम करते हैं जिन्होंने आज हमें आजादी दिलाई है।
सभी कवियों को अतिथियों ने आशीर्वाद दिया और मंच के अध्यक्ष अलका पांडे ने सुंदर सम्मान पत्र देकर सभी कवि कवियत्रियों का सम्मान किया। कार्यक्रम में शिरकत करने वाले कवि थे रामेश्वर गुप्ता, नीरजा ठाकुर कुमकुम वेद सेन, वैष्णो खत्री, रवि शंकर कोलते, ओमप्रकाश पांडे, सरोज दुग्गल, चंद्रिका व्यास, मीना त्रिपाठी, डॉ कुंवर सिंह मार्तंड, राम राय, अरविंद अकेला, पीएल शर्मा, जनार्दन सिंह, रानी अग्रवाल, रानी नारंग, हीरा सिंह कौशल, डॉ आशा लता नायडू, अलका पांडे, डॉ पुष्पा गुप्ता, बृजकिशोरी त्रिपाठी, डॉ.अंजुल कंसल, अनिता झा, डॉ देवीदीन अविनाशी और सुरेंद्र हरड़े।
प्रस्तुत है कुछ कवियों की पक्तियां
तिरंगा क्या कहता होगा ….?
पंद्रह अगस्त सन सैतालिस 47 को
भारत देश आजाद हुआ था।
देश के गद्दारों के कारण ही भारत देश गुलाम हुआ था।
आजादी का अर्थ तो वीरो ने बताया।
धन्य हुई वो माताएं जिन्होंने अपने लाल खोए।
नमन है उन माताओं को अपना दामन सूना किया।
मस्तक ऊंचा रखकर तिरंगा बचाया।
तिरंगा आज झूम कर कहता है।
दुश्मनों को मार कर मुझे बचाया है।
वीरों ने तिरंगा जान पर खेल कर फहराया।
तिरंगा कहता होगा मैं अब खुश हूं।
हर बलिदानी को याद करना
जान देश पर वार गए।
खून की होली खेल, देश को आजाद कर गए।
बिस्मिल, सुभाष, आजाद, तात्या टोपे, भगत सिंग मस्ताना।
आजादी के ये परवाने कफन बांध कर चले गए।
तिरंगा क्या कहता होगा ….?
तिरंगा कहता है दुश्मन को धूल चटा कर चले गए।
तिरंगे को सम्मान दिला कर चले गए।
स्वर्णिम इतिहास बना कर चले गए।
गौरवशाली दिन दिखा कर चले गए।
तिरंगा यही सब तो कहता होगा …?
– अलका पाण्डेय

यहां का जगा है पहरेदार।
मचा गद्दारों में हाहाकार।
देश की खातिर जीना मरना,
है हरदम ही तैयार।
यहां का जगा है पहरेदार…
– श्री राम राय

वीर खड़े सीमा की रक्षा
करते हैं दिन रात।
झरे बर्फ तूफान चले
बिजली कड़के बरसात।
दुश्मन की ईंटों का बदला
देते हैं पत्थर से
डाल आंख उनकी आंखों में
करते उनसे बात।
कफन तिरंगा ओढ़ वीर
जब घर पर फिरता होगा
सोचो मेरे मीत तिरंगा
तब क्या कहता होगा।
– डॉ कुंवर वीर सिंह मार्तंड

सुनो जी सुनो तिरंगा क्या कहता है। मैं नहीं हूॅं टुकड़ा एक कपड़े का,
मैं जान हूॅं और इज्ज़त हूॅं भारत देश का।
– नीरजा ठाकुर नीर

तिरंगा क्या कहता होगा?
देव, ऋषि, मुनियों, महात्माओं की भूमि पर, कभी दहशतवाद, आतंकवाद का हमला होगा।
तुम्हीं कहो, तब तिरंगा क्या कहता होगा?
वसुधैव कुटुम्बकम मान,
सब एक हो जायेंगे,
जब प्रेम, खुशहाली, भाईचारा,
एकता भरा माहौल होगा,
तुम्हीं कहो, तिरंगा क्या कहता होगा?
– रानी अग्रवाल

देश ने मुझे रखा है बहुत संभाल कर
रक्षा की मेरी इसके बेटों-बेटियों ने
अपनी जान देकर।
मजबूत भुजाओं का मिला है सहारा मुझे। आज भी लहराता हूँ
लाल किले पर शान से।
– ओम प्रकाश पांडे

कभी सोचो, उन शहीदों का, परिवार भी, आज बिलखता होगा।
तुम्हारी रक्षा हेतु, वह नन्हा फूल, पापा कहने को तरसता होगा।
उनको याद कर, दुश्मनों को जड़-मूल से, तुम नष्ट कर देना।
तिरंगा क्या कहता है, इसका सन्देश, तुम घर-घर पहुँचा देना।
– वैष्णो खत्री वेदिका

ए वतन ए वतन हमको तेरी कसम
इस तिरंगे को अब झुकने देंगे नहीं
आएं कैसी भी मुश्किल भरी राहें
खुद का हौंसला टूटने देंगे नहीं
ए वतन ए वतन।
चाहे चीन हो या पाकिस्तान हो
उनका मकसद पूरा होने देंगे नहीं
सर कटा लेंगे हम जान दे देंगे हम
तिरंगे पर नज़र बुरी रखने देंगे नहीं
ए वतन ए वतन
– रानी नारंग

तिरंगे से है स्वतंत्र भारत की शान।
इसकी आन के लिए दे देंगे जान।
स्वतंत्रता बनी रहे तभी भारत महान।
वीर शहीद इस के लिए होते कुर्वान।।
स्वतंत्रता की रक्षा में खड़े हैं वीर जवान।
अन उगाकर फर्ज निभा रहा किसान।
नौजवानों से होगी स्वतंत्रता की पहचान।
नशे की तिलांजलि से बनेगा भारत महान।
स्वतंत्र भारत की संस्कृति है इसकी जान।
संभाल के रखना वीरों की कुर्बानी की शान।
– हीरा सिंह कौशल

डेज़ी शाह – रोहित राज अभिनीत थ्रिलर फिल्म ‘मिस्ट्री ऑफ द टैटू’ का ट्रेलर लॉन्च

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मुम्बई। सलमान खान के साथ फिल्म ‘जय हो’ से अपनी अभिनय कैरियर की शुरुआत करने वाली डेजी शाह रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी में भी थीं और अब वह बड़े पर्दे पर नवोदित अभिनेता रोहित राज के साथ आगामी फिल्म ‘मिस्ट्री ऑफ द टैटू’ में दिखाई देंगी। डेज़ी शाह और रोहित राज अभिनीत इस फिल्म का पोस्टर और ट्रेलर मुंबई के रेड बल्ब स्टूडियो में लॉन्च किया गया, जिसमें अमीषा पटेल, अर्जुन रामपाल और मनोज जोशी भी हैं। यह मर्डर मिस्ट्री 1 सितम्बर को रिलीज हो रही है।
लंदन में शूट की गई इस फिल्म में डेजी शाह नवोदित रोहित राज के साथ रोमांस करती नज़र आएंगी। डेजी ने बताया कि इस फिल्म की कहानी टैटू से जुड़ी हुई है। टैटू के पीछे क्या रहस्य है? इस रहस्य से पर्दा फिल्म की रिलीज के बाद उठेगा। लंदन में कोविड काल के दौरान हमने बहुत कम टीम मेम्बर्स के साथ इसे फिल्माया जो बेहद चैलेंजिंग था लेकिन डायरेक्टर की प्रशंसा करनी होगी कि उन्होंने उस सिचुएशन को बखूबी संभाला।
डेजी शाह ने नवोदित रोहित राज की भी प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने अच्छा काम किया है। एक्टिंग के अलावा उन्होंने कैमरे के पीछे के कई काम भी संभाले हैं और निर्देशक की काफी मदद की है। कोरोना लहर की वजह से लंदन के लिए जितने लोगों की जरूरत थी उतने लोगों का वीजा नहीं मिला उस वजह से कई असिस्टेंट डायरेक्टर की जगह कलाईरसी को एक दो एडी के साथ ही काम चलाना पड़ा जिसमें रोहित एक तरह से असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में भी काम कर रहे थे।
फिल्म ‘मिस्ट्री ऑफ द टैटू’ के द्वारा कलाइरसी सथप्पन ने बॉलीवुड में अपने निर्देशन कैरियर की शुरुआत की है। उन्होंने भी रोहित राज के जज़्बे और काम के प्रति समर्पण भावना की सराहना की और कहा कि रोहित ने इस फिल्म के लिए बहुत मेहनत की है। उन्हें पूरी फिल्म की स्क्रिप्ट, हर एक डायलॉग याद था इसलिए जब कभी मेरे पास पेपर नहीं होता था तो मैं रोहित की ओर देखती थी और वह पूरी लाइन बोल देते थे।
इस फ़िल्म का ट्रेलर जबरदस्त है और थ्रिलर सब्जेक्ट को जस्टिफाई करता है। डेजी शाह किसी रहस्य से पर्दा उठाने की कोशिश में लगी नजर आती हैं और पुलिस से कहती हैं कि जल्द ही एक और मर्डर होने वाला है। फिर अदालत के कुछ दृश्य आते हैं और डेज़ी शाह इंटरनेट पर कुछ झलकियां देखकर आश्चर्यजनक रह जाती हैं। फिर अर्जुन रामपाल एक अलग ही खतरनाक लुक में टैटू बनाते हुए नज़र आते हैं। और उनका अवतार, हावभाव देखकर दर्शक यह संदेह करने लग जाते हैं कि अर्जुन ही कातिल है मगर इस राज़ से पर्दा फिल्म की रिलीज के बाद ही उठेगा।
आईटी इंजीनियर से एक्टर बने रोहित राज इस क्राइम थ्रिलर में एक वकील की भूमिका में हैं। वह कैसे बीस साल पहले के एक मर्डर की गुत्थी सुलझाने की कोशिश करते हैं, उनका चरित्र इसी बारे में है। वह अपने लुक और चेहरे के एक्सप्रेशन्स से प्रभावित करते हैं। बैरी जॉन एक्टिंग स्कूल से अभिनय की कला सीख चुके रोहित राज खुद को बेहद खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्हें अपनी पहली फिल्म में अर्जुन रामपाल, डेजी शाह जैसे मंझे हुए कलकारों के साथ काम करने का अवसर मिला और उनसे उन्हें काफी कुछ सीखने को भी मिला।


कलाइरसी साथप्पन द्वारा निर्देशित इस फिल्म को कशिश खान, अनुश्री शाह, गजीनाथ जयकुमार ने मिलकर प्रोड्यूस किया है। फिल्म ‘मिस्ट्री ऑफ द टैटू’ 1 सितंबर, 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म की कहानी पटकथा कलाईरसी साथप्पन ने लिखी है जबकि संवाद नदीमउद्दीन और राजन अग्रवाल ने लिखे हैं। पिकल एंटरटेनमेंट फिल्म का डिस्ट्रीब्यूशन कर रहे हैं और ज़ी म्यूजिक कंपनी ने फिल्म का संगीत रिलीज़ किया है।

– संतोष साहू

भारत का मेडिकल वैल्यू सेक्टर 2026 तक 13 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान: डॉ. मनसुख मांडविया

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अनिल बेदाग, मुंबई
भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज कहा कि भारत स्वास्थ्य सेवा की एक जन-केंद्रित मूल्य-आधारित प्रणाली बनाने की दिशा में काम कर रहा है। भारत के चिकित्सा मूल्य यात्रा क्षेत्र की क्षमता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र के 2026 तक 13 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, और इसे संगठित प्रणाली में योगदान करने के लिए उच्च योग्य और कुशल कार्यबल, कार्यबल की गतिशीलता के साथ-साथ एक सीमाहीन दुनिया बनाने के वर्षों द्वारा समर्थित किया जाएगा। ।”
    स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय,  भारत सरकार और फिक्की द्वारा आयोजित ‘वन अर्थ, वन हेल्थ – एडवांटेज हेल्थकेयर इंडिया 2023 (एएचसीआई)’ को संबोधित करते हुए, डॉ मांडविया ने कहा, “भारत को दुनिया की फार्मेसी के रूप में जाना जाता है। यह वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा प्रदाता है और वैश्विक आपूर्ति का 20 प्रतिशत और वैश्विक वैक्सीन में 60 प्रतिशत का योगदान है। यह वैश्विक समुदाय के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एएचसीआई 2023 चिकित्सा मूल्य यात्रा के माध्यम से मूल्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगा। प्रसिद्ध चिकित्सा विशेषज्ञों और अत्याधुनिक सुविधाओं से विशेष उपचार प्राप्त करने के लिए मरीज दुनिया के किसी भी हिस्से की यात्रा कर सकते हैं।
    डॉ. मांडविया ने रोगी गतिशीलता और स्वास्थ्य कार्यबल गतिशीलता के सिद्धांतों के आधार पर मूल्य-आधारित स्वास्थ्य उपचार को बढ़ावा देने के लिए ‘एडवांटेज हेल्थकेयर इंडिया पोर्टल’ भी लॉन्च किया। उन्होंने कहा, “भारत के वन-स्टॉप डिजिटल पोर्टल का लॉन्च न सिर्फ भारत के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि हमारी वैश्विक जिम्मेदारियों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
     भारत सरकार के आयुष मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “स्वास्थ्य की चिंताजनक समस्या से निपटने का एकमात्र तरीका प्रभावी प्रशासन के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा के सामंजस्यपूर्ण और समन्वित अध्ययन को लागू करना है। चिकित्सा की पारंपरिक प्रणाली में एक नरम शक्ति होने के नाते भारत स्वास्थ्य देखभाल में इस खतरनाक भावना को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।”
     विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनोम घेबियस ने कहा कि डिजिटल तकनीक में निवेश करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि जो सेवाएं भारत से प्रदान की जा सकती हैं, वे टेलीमेडिसिन के माध्यम से भी सभी के लिए उपलब्ध हो सकती हैं। इससे उन मरीजों को मदद मिलेगी जो लंबी दूरी की यात्रा करने में सक्षम नहीं हैं। डिजिटल तकनीक के माध्यम से दुनिया को सेवाएँ उपलब्ध हो सकती हैं।
    भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री (बीपीपी) डॉ भारती प्रवीण पवार ने कहा, “सभी के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने के लिए, सरकार सक्रिय रूप से सभी अस्पतालों में एकीकृत चिकित्सा विंग की स्थापना कर रही है। पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा का संयोजन महत्वपूर्ण है, और यह एकीकरण दूरदराज के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है।
    भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री (एसपीएसबी) प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने कहा, “मेडिकल वैल्यू ट्रैवल मरीजों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच एक कड़ी है और हमारा लक्ष्य वैश्विक स्वास्थ्य पर्यावरण के साथ तालमेल बनाना है।” प्रणाली।”
     भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव श्री सुधांश पंत ने कहा, “एएचसीआई 2023 को सीमा पार सहयोगात्मक स्वास्थ्य देखभाल प्रयासों, देशों और विभिन्न स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच ज्ञान साझा करने और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने की उम्मीद है।”
     फिक्की के पूर्व अध्यक्ष और ज़ाइडस लाइफसाइंसेज के अध्यक्ष श्री पंकज पटेल ने कहा, “किसी मरीज के इलाज में दो महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं: दवा या सर्जरी जैसे चिकित्सा हस्तक्षेप प्रदान करना, और उतना ही महत्वपूर्ण, उनके मनोवैज्ञानिक कल्याण पर ध्यान देना।”
     डॉ संगीता रेड्डी, पूर्व अध्यक्ष, फिक्की और संयुक्त प्रबंध निदेशक, अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने कहा, “हमारा मानना है कि आज मरीजों के प्रभावी इलाज के लिए और भविष्य के उपचार और प्रगति के लिए अपने देशों में आवश्यक बुनियादी ढांचे और संसाधनों को विकसित करने के लिए साझेदारी स्थापित करना आवश्यक है। इसलिए, हमें सहयोग और पारस्परिक समर्थन के पुल बनाने का प्रयास करने की आवश्यकता है जिससे सभी शामिल पक्षों को लाभ होगा।
     भारत सरकार के सचिव और एफएसएसएआई के सीईओ श्री जी कमला वधना राव और भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री आराधना पटनायक ने भी कार्यक्रम के दौरान अपने विचार व्यक्त किए।

सभी मुसलमान पहले हिंदू ही थे ,1500 साल पहले ही आया है इस्‍लाम – Gulam Navi Azad

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Jammu: ‘क्‍योंक‍ि मुसलमान भी कभी हिंदू थे’, पूर्व मुख्‍यमंत्री गुलाम नबी बोले- 1500 साल पहले ही आया है इस्‍लाम
Ghulam Nabi Azad जम्‍मू कश्‍मीर के पूर्व मुख्‍यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सभी मुसलमान पहले हिंदू ही थे। गुलाम नबी आजाद ने गत दिनों डोडा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस्लाम लगभग 1500 साल पहले ही आया है। कश्मीर में भी 600 साल पहले तक सिर्फ कश्मीरी हिंदू ही थे फिर लोग मतांतरित होकर मुसलमान बन गए।

केंद्रीय पशुपालन मंत्री श्री रुपाला ने गुवाहाटी में आठगांव स्थित गौशाला का दौरा किया

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नई दिल्ली -केंद्रीय पशुपालन मंत्री इन दिनों असम के दौरे पर है , माँ कामाख्या के दर्शन के बाद उन्होंने असम सरकार के कृषि एवं पशुपालन मंत्री अतुल बोरा सहितअसम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के आज गुवाहाटी में आठगांव स्थित गौशाला का दौरा कर यहां की उत्तम व्यवस्थाओं और कार्यप्रणाली का जायजा लिया। केंद्रीय मंत्री श्री रुपाला ने ट्वीट कर यह जानकारी दी।

साथ ही केंद्रीय मंत्री श्री रुपाला ने गुवाहाटी में एनडीडीबी द्वारा प्रबंधित पूरबी डेयरी का भी दौरा किया , और उनकी विस्तार योजना की समीक्षा की, ज्ञात हो कि असम डेयरी विकास परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गुवाहाटी में एनडीडीबी के प्रांगण में श्री रुपाला का भव्य स्वागत किया गया।

गणेश आचार्य ने लॉन्च किया संगीता तिवारी व अमन कुमार अभिनीत म्युज़िक वीडियो ‘इश्क अमीरन’ 

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म्यूजिक लॉन्च इवेंट में संगीता तिवारी ने अपने जन्मदिन के उपलक्ष्य में केक काटा और एसटी सीरीज की शॉर्ट फिल्म “साइको ब्राइड” का टीजर भी लॉन्च किया

मुम्बई। सिनेमा जगत की मशहूर अदाकारा संगीता तिवारी एक और बेहतरीन म्युज़िक वीडियो ‘इश्क अमीरन’ लेकर आई हैं। मुम्बई के टॉकीज कॉकटेल में इस गाने के लॉन्च पर संगीता तिवारी के साथ एक्टर डांसर अमन कुमार भी मौजूद रहे। वहीं मुख्य अतिथि गणेश आचार्या ने इस वीडियो को लॉन्च किया जो इस सॉन्ग के कोरियोग्राफर और डायरेक्टर भी हैं। इस गाने में संगीता तिवारी के साथ अमन कुमार का परफॉर्मेंस शानदार लग रहा है।
इस म्युज़िक अल्बम के म्युज़िक डायरेक्टर और गीतकार लक्ष्मीनारायण हैं। इस डुएट सॉन्ग को लक्ष्मीनारायण और जमना शर्मा ने मिलकर गाया है।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर यह गीत लॉन्च किया गया जिसे सभी ने खूब सराहा। यह काफी भव्य रूप से शूट किया गया है और किसी बड़ी फिल्म का एक मेगाबजट सॉन्ग नज़र आ रहा है।
इस मौके पर संगीता तिवारी का जन्मदिन भी मनाया गया। शानदार केक काटकर उनकी फैमिली, फ्रेंड्स, को स्टार अमन कुमार, डांस मास्टर गणेश आचार्य, सुनील पाल, निर्देशक राजीव रुइया सहित उपस्थित सभी मेहमानों ने संगीता तिवारी को बधाई और शुभकामनाएं दी।
इश्क अमीरन को लेकर उत्साहित संगीता तिवारी ने बताया कि यह एक भव्य गीत है जिसमें अमन कुमार के साथ मेरी केमिस्ट्री बड़ी प्यारी है। इसकी शूटिंग का अनुभव भी यादगार और कमाल का रहा है। मुझे उम्मीद है कि दर्शकों को यह वीडियो खूब पसन्द आएगा। इश्क करने वाला खुद को सबसे अमीर समझता है, उसे लगता है कि उसे सारी दुनिया की दौलत मिल गई है। यह गीत इसी सोच को दर्शाता है। मेरा सपना था कि नम्बर वन डांस डायरेक्टर गणेश आचार्य के निर्देशन में मुझे एक बार काम करने का मौका मिले, और मैं बेहद सौभाग्यशाली मानती हूं कि इस गाने के माध्यम से मेरा सपना साकार हुआ है। उन्हें मैं कैसे शुक्रिया अदा करूँ, मेरे पास शब्द नहीं हैं।
संगीता तिवारी ने आगे कहा कि वैसे तो मैंने कई स्टार्स के साथ काम किया मगर गणेश आचार्य जी ने मुझे इस गाने में जिस तरह पेश किया वह बेमिसाल है। मैं उनकी सदैव आभारी रहूंगी वास्तव में वह हमारे देश और हमारी फिल्म इंडस्ट्री के अव्वल दर्जे के कोरियोग्राफर हैं।
गणेश आचार्य ने भी संगीता तिवारी और अमन कुमार को अपना आशीर्वाद दिया और कहा कि गाना चार्टबस्टर सिद्ध होगा। दोनों प्रतिभाशाली कलाकार हैं और खूब मेहनत करते हैं। संगीता के एक्सप्रेशन्स बहुत ही अच्छे और प्रभावी हैं, बहुत कम ऎक्ट्रेस में यह खूबी होती है। संगीता ने ये गीत देखकर खुद कहा कि आज तक किसी ने उन्हें ऐसे स्क्रीन पर प्रेजेंट नहीं किया।
बता दें कि एसटी सीरीज को एक साल पूरे हो गए हैं और अब तक संगीता तिवारी के इस म्युज़िक लेबल से कई गाने रिलीज होकर लोकप्रिय हो चुके हैं। संगीता तिवारी के कई सांग सुपर हिट रहे हैं। इश्क अमीरन भी एक लाजवाब गीत है जिसमें संगीता तिवारी का आकर्षक लुक और अलग सा जलवा नजर आ रहा है।
इस सॉन्ग लॉन्च के अवसर पर एसटी सीरीज के अगले प्रोजेक्ट “साइको ब्राइड” का टीजर भी लॉन्च किया गया, जिसमें संगीता तिवारी और अमन कुमार की जोड़ी दिखाई देगी। इस शॉर्ट फिल्म के डायरेक्टर बॉलीवुड निर्देशक राजीव एस रुइया हैं।
अमन कुमार अपने मास्टरजी गणेश आचार्य के साथ स्टेज शेयर करते हुए इमोशनल हो गए। जब एंकर ने उनसे मास्टरजी के साथ काम करने का अनुभव पूछा तो उनकी आंखें भर आईं और उन्होंने कहा कि गणेश आचार्य जैसे डांस मास्टर के निर्देशन में काम करना किसी भी एक्टर या डांसर के लिए सबसे गौरवपूर्ण लम्हा होता है।
उल्लेखनीय है कि संगीता तिवारी ने हिंदी सहित भोजपुरी, साउथ की कई फिल्मों में अभिनय किया है।
भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार रविकिशन के साथ उन्होंने डेब्यू किया था। उनका लुक, डांस और उनकी मनमोहक अदाएं दर्शकों के दिलों को जीत लेती हैं।

– संतोष साहू

अनाजों के एमएसपी, मंडी में बिचौलियों की भूमिका के बीच पिसते किसानों के संघर्ष की कहानी है  दिनेशलाल अभिनीत ‘फ़सल’

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भारत सरकार की नई स्किम के तहत जो प्रत्येक किसानों के खाते में हर चार महीने के अंतराल पर ₹ 2000 रुपये की तीन किस्तों के रूप में ₹ 6000 साल भर में डाली जा रही है क्या वह रकम किसानों की स्थिति को सुधारने के लिए पर्याप्त है ? क्या आज की तारीख़ में मंडियों में जो बिचौलिए किसानों की फसल के दाम औने पौने लगाकर अपनी जेबें भर रहे हैं उसपर सरकार का कोई अंकुश काम कर रहा है ? क्या किसानों को उनके फसल की वास्तविक कीमत उनको मिल रही है ? ऐसी कौन सी योजना है जो आगामी कुछ सालों में किसानों की आय दुगनी कर किसानों की स्थिति को सुदृढ कर सकती है ? भारत का किसान अन्नदाता है और उसके उपजाने के बाद ही किसी नेता, अभिनेता, मंत्री, संतरी अधिकारी और व्यापारी के पेट मे अन्न जाता है तो आज की तारीख में इसी अन्नदाता के तन पर वस्त्र और सर पर छत की कमी क्यों है ? ऐसे ही ना जाने कितने अनगिनत सवालों की फेहरिस्त लिए हुए भोजपुरी के मल्टीस्टार दिनेशलाल यादव निरहुआ की फ़िल्म फसल का ट्रेलर वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के यूट्यूब चैनल पर रिलीज़ हुआ है। यह फ़िल्म आज के तारीख में किसानों की वास्तविक स्थिति , किसानों के परिवार के ऊपर पड़ने वाली प्राकृतिक मार और उससे संघर्ष की गाथा के रूप में आगामी कुछ सालों तक याद की जाएगी। आपको याद होगा कि विगत साल दिल्ली की सरहद पर बैठकर इसी किसान हित के मुद्दे पर कुछ लोग सरकार और सिस्टम से टकरा गए थे, उनके दबाव में सरकार ने कुछ बिलों को वापस भी ले लिया था, असल मे इस फसल के ट्रेलर को देखकर तो यही लगता है कि वे किसानों के हितैषी नहीं बल्कि किसानों के दुश्मनों के नुमाइंदे थे जिन्होंने सरकार को उनके हक में फैंसला करने के लिए मजबूर कर दिया ताकि आगामी कुछ सालों तक यूँ हीं किसानो पर जुल्मों सितम की ये कहानी बदस्तूर जारी रह सके। किसानों के हक़ में फैसला ना हो सके, किसानों की स्थिति बेहतर ना हो सके। फ़िल्म का ट्रेलर जब इतना धांसू है तो फ़िल्म की परिकल्पना आप स्वयं कर सकते हैं।
निर्माता प्रेम राय के श्रेयश फिल्म्स के बैनर तले बनी फिल्म फसल के लेखक निर्देशक हैं पराग पाटिल, जिन्होंने इस फसल और उसके उत्पादक के संघर्ष का ताना बाना बुना है। ट्रेलर को देखने के बाद यही लगता है कि पराग पाटिल ने इस फ़िल्म को बनाने में अपना सम्पूर्ण निर्देशकीय कौशल को झोंक दिया है ताकि एक बेहतर फ़िल्म बन सके। निर्देशक ने फ़िल्म के विषय को विषयांतर नहीं होने दिया है जो इस फ़िल्म का प्लस प्वॉइंट साबित हो सकती है।
फ़िल्म फसल में दिनेश लाल यादव के साथ आम्रपाली दुबे, संजय पाण्डेय , विनीत विशाल, अयाज खान, अरुणा गिरी, और तृषा ( छोटी ) ने अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश किया है । एक किसान के तौर पर निरहुआ ने एक मील का पत्थर साबित करने वाला किरदार निभाया है , हर एक फ्रेम में उनका रिएक्शन , घटनाओं के अनुरूप उसका बदलता एक्सप्रेशन और उसका सामने वाले पर पड़ने वाले प्रभाव सहित हर एक सीन की बारीकियों से परिचय कराते हुए निरहुआ ने इस फ़िल्म में जान फूंक दिया है। उन्होंने अपने अभिनय की बारीकियों को इतना बखूबी निखारा है कि जिसके कारण उन्हें आज भी भोजपुरी फ़िल्म जगत का मल्टीस्टार कहा जाता है। उन्होंने अपने अभिनय के दम पर मिले तमगे को इस फ़िल्म में और चमकाने का काम किया है। दिनेशलाल के साथ आम्रपाली दुबे ने भी इस फ़िल्म में एक आदर्श पत्नी का किरदार काफी संजीदगी से निभाया है। उन्होंने दिखाया है कि एक पति के सुख दुःख की सहभागी होने के नाते पत्नी का क्या क्या कर्त्तव्य हो सकता है। उन्होंने अपने अभिनय कौशल को इस फ़िल्म में और भी निखारा है। ट्रेलर के शुरुआत में ही गाने पर नृत्य और उसके बाद के रिएक्शन तो कमाल का है। बाकी कलाकारों में संजय पांडेय हर बार की तरह इस किरदार में भी अपनेआप को फिट कर लिए हैं, अभिनय की कसौटी पर संजय पांडेय भोजपुरी फ़िल्म इंडस्ट्री में एक मिसाल के तौर पर ही याद किये जाएंगे । छोटी बच्ची के रूप में तृषा ने भी सधा हुआ अभिनय किया है, उसको अभी से ही कैमरे के सामने फोकस देना और सम्वाद की प्रस्तुति देना जैसी बारीकियां समझना अच्छा फील दे रहा है।
ओम झा और आर्या शर्मा के प्रयासों से फ़िल्म फसल में गीत संगीत भी जबरदस्त बन पड़ा है। ट्रेलर के शुरुआत में ही इस गीत संगीत ने जो शमां बांधने का काम किया वो अंत तक कानों में गुंजायमान रहा है। इस फ़िल्म में गीत के बोल भी शानदार लिखे गए हैं जिन्हें शब्दों से सजाया है प्यारेलाल यादव, अरबिंद तिवारी, विजय चौहान और विमल बावरा ने, जिन्हें सुरों साधा है नीलकमल सिंह, प्रिया सिंह राजपूत, ममता राउत, और शिल्पी राज ने। फ़िल्म फसल के सह निर्माता हैं सतीश आसवानी। फाइट मास्टर हैं हीरा यादव जिन्होंने फ़िल्म में हर एक एक्शन सीन को घटना के अनुरूप ही रखा है। किसी किसान को आप हवा में उड़कर मार करते हुए तो देखना पसंद भी नहीं करेंगे और यही बारीकियां आपको एक स्तरीय तकनीशियन बनाती है । हीरा यादव ने इन बातों को ध्यान में रखा है । फ़िल्म के एडिटर हैं सन्तोष हरावड़े व प्रचार प्रसार के प्रभारी हैं संजय भूषण पटियाला।

 दिव्यांगों सहित सेना, एयरफोर्स, पुलिस, एनएसजी कमांडो के साथ नीलोत्पल मृणाल ने किया “तिरंगा यात्रा” का आयोजन

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मुम्बई। दिव्यांग समाजसेवी और परोपकारी नीलोत्पल मृणाल ने स्वतंत्रता दिवस के जश्न के अवसर पर दिव्यांग, भारतीय सेना, एयरफोर्स, पुलिस और एनएसजी कमांडो के साथ “तिरंगा वॉकथन रैली” का आयोजन मुम्बई के कलीना मिलिट्री कैम्प में किया। इस अवसर पर दिव्यांगों को राशन किट दिये गए। साथ ही भारतीय सेना, एयरफोर्स और एनएसजी कमांडो के आदर के लिए फूल भी बरसाए गए और उन्हें उपहार दिया गया।
यह तिरंगा यात्रा दो किलोमीटर तक की रही। इस दौरान ढोल ताशे भी बजे, देशभक्ति गीत भी बजते रहे साथ ही महिलाओं ने भारतीय परंपरा को आगे बढ़ाया। नीलोत्पल मृणाल इस तिरंगा यात्रा में साथ साथ रहे।
बता दें कि नीलोत्पल मृणाल स्वयं एक दिव्यांग हैं लेकिन उन का मानना है कि वो जब दूसरे को दौड़ते और चलते देखते हैं तो उन्हें लगता है कि वह दौड़ रहे हैं इसलिए उन्होंने पिछले एक दशक में 100 से भी ज़्यादा मैराथन रैली का आयोजन पूरे देश भर में किया है।
नन्ही गूंज फाउंडेशन के ट्रस्टी नीलोत्पल मृणाल के द्वारा आयोजित यह वॉकथन एक ऐतिहासिक यात्रा बन गई। इसमे सैकड़ों लोग सम्मिलित हुए, यह रैली अपने आप में एक अनोखा वॉकथन था। इस तिरंगा यात्रा की शुरुआत से पहले देश के लिए बलिदान देने वाले तमाम फौजियों और सभी शहीद हिंदुस्तानियों की आत्मा की शांति के लिए एक मिनट का मौन धारण किया गया, उसके बाद राष्ट्र गान को एक साथ सैकड़ों लोगों ने गाया।
यह तिरंगा यात्रा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सिडबी, भारत इलेक्ट्रॉनिकस और Gorgio प्रोफेशनल्स के सहयोग से आयोजित की गई थी।
नीलोत्पल मृणाल ने ऐसे कार्यक्रम से युवाओं और समाज को फौजियों का आदर करने का सन्देश दिया, साथ ही तमाम दिव्यांग की हौसला अफजाई भी की। उनके जज़्बे को सलाम किया।
उन्होंने कहा कि दिव्यांग देश का सबसे कमजोर वर्ग है, जो देश के सबसे मजबूत वर्ग भारतीय सेना के साथ इस स्वतंत्रता दिवस पर वीर शहीदों को शतशत नमन करता है। आइए हम सब मिलकर इस स्वतंत्रता दिवस पर दिव्यांगता से आजादी लें।
उन्होंने कहा कि यह आज़ादी हमें ऐसे नहीं मिली है। वीर शहीदों की कुर्बानियां इस स्वतंत्रता में शामिल रही हैं। देश और मुम्बई पर कई बार मुसीबत आई है मगर हमारी सेना ने हमारे फौजियों ने हमेशा उन मुश्किलों का सामना डटकर किया है। हम सब को तमाम वीर शहीदों, उनके परिवार को याद रखना चाहिए, उनका सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि समाज का सबसे कमजोर वर्ग दिव्यांग और देश का सबसे मजबूत वर्ग भारतीय सेना, पुलिस सब एक साथ स्वतंत्रता दिवस को मनाने के लिए इस तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। दिव्यांग भी अपने जीवन मे काफी मुश्किलों का सामना करते हैं। हमारे फौजी माइनस 45 डिग्री सेल्सियस में देश की रक्षा में लगे रहते हैं। इस तिरंगा यात्रा में शामिल सेना के सभी अधिकारियों, जवानों, दिव्यांगों का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। यह तिरंगा यात्रा दरअसल भारत के उन 140 करोड़ लोगों की ओर से हमारी बहादुर सेना को ट्रिब्यूट देने का एक प्रयास था। भारतीय सेना का मनोबल हमेशा ऊंचा रहना चाहिए, उनके मनोबल को बढ़ाने के लिए उन्हें आदर सम्मान देने के लिए इस तिरंगा यात्रा का सफल आयोजन हुआ।

Atal Bihari Vajpayee – एनडीए नेताओं को भी न्योता , अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर बीजेपी का कार्यक्रम

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Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पांचवीं पुण्यतिथि के मौके पर बीजेपी ने कार्यक्रम रखा है, जिसमें पूर्व बीजेपी नेता को याद किया जाएगा. इस मौके पर बीजेपी के तमाम बड़े नेता पहुंच रहे हैं. खास बात ये है कि बीजेपी की तरफ से पहली बार पुण्यतिथि कार्यक्रम में एनडीए के घटक दलों को न्योता दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला समेत तमाम बड़े बीजेपी नेता वाजपेयी की पुण्यतिथि पर आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर अटल समाधि पर पहुंचकर फूल चढ़ाए और पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी इस कार्यक्रम में नजर आईं, उन्होंने भी इस मौके पर वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी.

पहुंच रहे एनडीए के तमाम नेता 
बीजेपी की तरफ से न्योता मिलने के बाद एनडीए के तमाम बड़े नेता भी इस पुण्यतिथि कार्यक्रम में पहुंच रहे हैं. एनडीए के घटक दल के नेता जीतन राम मांझी, सुदेश महतो, थंबी दुरई, शिवसेना से राहुल शेवाले, प्रफुल्ल पटेल, अगाथा संगमा, अनुप्रिया पटेल भी इस कार्यक्रम में पहुंचे. इनके अलावा भी कुछ और एनडीए के नेता कार्यक्रम में पहुंच सकते हैं.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजयेपी की पांचवीं पुण्यतिथि पर उनकी समाधि स्थल सदैव अटल पर कार्यक्रम रखा गया है. इस मौके पर अटल बिहारी वाजपेयी की बेटी नमिता भट्टाचार्य और दामाद रंजन भट्टाचार्य भी कार्यक्रम में पहुंचे. केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी पुण्यतिथि कार्यक्रम में पहुंचे.

बिहार के सीएम और एनडीए के पूर्व सहयोगी नीतीश कुमार भी दिल्ली पहुंचकर अटल बिहारी वाजपेयी के समाधि स्थल पर पहुंच रहे हैं, जहां वो उनकी पुण्यतिथि के मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे.

 

 

आज पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 5वीं पुण्यतिथि है-समाधि ‘सदा अटल’ पर पीएम मोदी पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी

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श्री अटल बिहारी वाजपेयी
1980 1986
श्री अटल बिहारी वाजपेयी 16 से 31 मार्च, 1996 तक और फिर 19 मार्च, 1998 से 13 मई, 2004 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। श्री वाजपेयी जी जवाहर लाल नेहरू के बाद लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता बन गए थे। श्रीमती इंदिरा गांधी के बाद लगातार तीन बार अपने नेतृत्वन में पार्टी को जीत दिलाने वाले इकलौते प्रधानमंत्री का गौरव श्री वाजपेयी जी के नाम है।
संक्षिप्त जीवन परिचय

25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी और श्रीमती कृष्णा देवी के घर जन्मे श्री वाजपेयी जी के पास चार दशक से अधिक समय का संसदीय अनुभव था। वे 1957 से संसद सदस्य रहे हैं। वे 5वीं, 6वीं, 7वीं लोकसभा और फिर उसके बाद 10वीं, 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा में चुनाव जीतकर पहुंचे। इसके अलावा 1962 और 1986 में दो बार वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे। वर्ष 2004 में वे पांचवी बार लगातार लखनऊ से चुनाव जीतकर लोक सभा पहुंचे।

वाजपेयी जी इकलौते नेता हैं जिन्हें चार अलग-अलग राज्यों (उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और दिल्ली) से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचने का गौरव हासिल है। एक प्रधानमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल इतना गौरवशाली रहा कि एक दशक के बाद भी उस कार्यकाल को न सिर्फ याद किया जाता है, बल्कि उस पर अमल भी किया जाता है। इसमें पोखरण परमाणु परीक्षण, आर्थिक नीतियों में दूरदर्शिता आदि शामिल हैं। आधारभूत संरचना के विकास की बड़ी योजनाएं जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग और स्वर्णिम चतुर्भुज योजनाएं भी इनमें शामिल हैं। बहुत ही कम ऐसे प्रधानमंत्री हुए जिन्होंने समाज पर इतना सकारात्मक प्रभाव छोड़ा।

अटल जी ने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मीबाई कॉलेज) से स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीतिशास्त्र में परास्नाएतक की डिग्री हासिल की। शिक्षा के दौरान कई साहित्यिक, कलात्मक और वैज्ञानिक उपलब्धियां उनके नाम रहीं। उन्होंने राष्ट्रधर्म (मासिक पत्रिका), पाञ्चजन्य (हिंदी साप्ताहिक) के अलावा दैनिक अखबारों जैसे स्वदेश और वीर अर्जुन का संपादन किया। इसके अलावा भी उनकी बहुत सी किताबें प्रकाशित हुईं जिनमें मेरी संसदीय यात्रा-चार भाग में, मेरी इक्यावन कविताएं, संकल्प काल, शक्ति से शांति, फोर डीकेड्स इन पार्लियामेंट 1957-95 (स्पीचेज इन थ्री वॉल्यूम), मृत्यु या हत्याध, अमर बलिदान, कैदी कविराज की कुंडलियां (इमरजेंसी के दौरान जेल में लिखी गई कविताओं का संकलन), न्यू डाइमेंसंस ऑफ इंडियाज फॉरेन पॉलिसी आदि प्रमुख हैं।

श्री वाजपेयी ने बहुत सी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। वे 1961 से राष्ट्रीय एकता परिषद के सदस्य रहे हैं। ऐसी ही कुछ अन्य जगहें जहां वे जुड़े रहे-

अध्यक्ष, ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एंड असिस्टेंट स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन 1965-70
पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मारक समिति 1968-84
दीनदयाल धाम, फराह, मथुरा, उत्तर प्रदेश
जन्मभूमि स्मारक समिति, 1969
श्री वाजपेयी 1951 में जनसंघ के संस्थायपक सदस्य और फिर 1968-1973 में भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष और 1955-1977 तक जनसंघ संसदीय पार्टी के नेता रहे। वह 1977 से 1980 तक जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य के रूप में और 1980 से 1986 तक भाजपा के अध्यक्ष रहे। साथ ही 1980-1984, 1986, 1993-1996 में वे भाजपा संसदीय दल के नेता रहे। ग्यारहवीं लोक सभा के दौरान वह नेता विपक्ष के पद पर रहे। इससे पहले मोरार जी देसाई की सरकार में उन्होंने 24 मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979 तक विदेश मंत्री का पदभार भी संभाला।

श्री वाजपेयी के 1998-99 के प्रधानमंत्री के कार्यकाल को ”दृढ़निश्चकय के एक साल” के रूप में जाना जाता है। इसी दौरान 1998 के मई महीने में भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया था जिन्होंने परमाणु परीक्षण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। फरवरी 1999 में पाकिस्तान बस यात्रा ने उपमहाद्वीप की परेशानियों को सुलझाने के लिए एक नए दौर का सूत्रपात किया। इसे चहुंओर प्रशंसा मिली। इस मामले में भारत की ईमानदार कोशिश ने वैश्विक समुदाय में अच्छा प्रभाव छोड़ा। बाद में जब मित्रता का यह रूप धोखे के रूप में कारगिल के तौर पर परिलक्षित हुआ तब भी श्री वाजपेयी जी ने विषम परिस्थितियों का सफलतापूर्वक मुकाबला किया और घुसपैठियों को बाहर खदेड़ने में सफलता हासिल की।

श्री वाजपेयी जी को राष्ट्र के प्रति उनके सेवाओं के मद्देनजर वर्ष 1992 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उन्हें लोकमान्य तिलक पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ संसद सदस्य आदि पुरस्कार से नवाजा गया। इससे पहले 1993 में कानपुर विश्वदविद्यालय ने मानद डॉक्ट्रेट की उपाधि से नवाजा था। वर्ष 2014 में उन्हें भारत रत्न देने की घोषणा की गयी और मार्च 2015 में उन्हें भारत रत्न से प्रदान किया गया। उन्हें 2015 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ की उपाधि से अलंकृत किया गया।

संभाले गए पद-
1951 – संस्थापक सदस्य, भारतीय जनसंघ (बी.जे.एस)
1957 – भारतीय जनसंघ संसदीय पार्टी से दूसरे लोकसभा चुनाव में चुने गए
1957-77 – भारतीय जनसंघ संसदीय दल के नेता
1962 – राज्यसभा सदस्य
1966-67 – सरकारी आश्वाससनों संबंधी समिति के अध्यक्ष
1967 – चौथे लोक सभा चुनाव में दोबारा चुने गए
1967-70 – लोक लेखा समिति के अध्यक्ष
1968-73 – भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष
1971 – पांचवे लोक सभा चुनाव में अपने तीसरे कार्यकाल के लिए फिर चुने गए
1977 – छठवें लोक सभा चुनाव में अपने चौथे कार्यकाल के लिए चुने गए
1977-79 – केंद्रीय विदेश मंत्री रहे
1977-80 – जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे
1980 – सातवें लोकसभा चुनाव में अपने पांचवें कार्यकाल के लिए चुने गए
1980-86 – भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे
1980-84, 1986 और 1993-96 में भाजपा संसदीय दल के नेता रहे
1986 – राज्यसभा के सदस्य और सामान्य प्रयोजन समिति के सदस्य रहे
1988-90 – गृह समिति के सदस्य और कार्यमंत्रणा समिति के सदस्य रहे
1990-91 – याचिका समिति के अध्यक्ष
1991 – 10वें लोकसभा चुनाव में अपने छठवें कार्यकाल के लिए चुने गए
1991-93 – लोकलेखा समिति के अध्यक्ष रहे
1993-96 – विदेशी मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे
1996 – 11वें लोकसभा चुनाव में अपने सातवें कार्यकाल के लिए चुने गए
16 मई से 31 मई 1996 – भारत के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, कई मंत्रालयों के प्रभारी, कोयला, संचार, ऊर्जा, स्टील, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर, रेलवे, ग्रामीण विकास, परमाणु ऊर्जा, कपड़ा, परिवहन आदि
1996-97 – लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष रहे
1997-98 – विदेशी मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे
1998 – 12वीं लोक सभा चुनाव में अपने आठवें कार्यकाल के लिए चुने गए
1998-99 – भारत के प्रधानमंत्री रहे, इस दौरान विदेश मंत्रालय समेत अन्य मंत्रालय ( जो किसी मंत्री को आवंटित नहीं हुए थे) के प्रभार संभाले
1999 – 13वीं लोकसभा चुनाव में अपने नौवें कार्यकाल के लिए चुने गए
13 अक्टूबर 1999 से 13 मई 2004 – भारत के प्रधानमंत्री रहे, इस दौरान अन्य मंत्रालय ( जो किसी मंत्री को आवंटित नहीं हुए थे) के प्रभार संभाले