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150 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध – केंद्रीय उर्वरक मंत्री

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नई दिल्ली: देश में इस समय 150 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध – केंद्रीय उर्वरक मंत्री की समीक्षा – केंद्रीय रसायन और उर्वरक, डॉ. मनसुख मांडविया ने आज यहां देश में उर्वरकों के इस्तेमाल व उनकी उपलब्धता पर राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ बातचीत की। बैठक के दौरान, उन्होंने नैनो-यूरिया, नैनो-डीएपी और वैकल्पिक उर्वरकों को मैदानी स्तर पर प्रोत्साहन देने की प्रगति तथा इस सिलसिले में राज्यों द्वारा की गई पहलों का जायजा लिया
बातचीत की शुरूआत में ही डॉ. मांडविया ने सभी राज्यों को सूचित कर दिया था कि देश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है और इस समय 150 लाख मीट्रिक टन उर्वरक मौजूद है। यह भंडारण न सिर्फ मौजूदा खरीफ मौसम में काम आयेगा, बल्कि आने वाले रबी के मौसम में भी उसकी उपलब्धता सुनिश्चित रहेगी।
मांडविया ने मिट्टी की उर्वरकता बचाने के लिये रासायनिक उर्वरकों के ज्यादा इस्तेमाल से बचने की जरूरत को उजागर किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पीएम प्रणाम योजना के रूप में इस दिशा में पहले ही कदम उठा लिये हैं। इन प्रयासों में धीरे-धीरे घुलने वाली सल्फर कोटेड यूरिया (यूरिया गोल्ड), नैनो-यूरिया, नैनो-डीएपी आदि के इस्तेमाल को भी शुरू किया जाना शामिल है।
देशभर में पीएमकेएसके पहल पर चर्चा की गई, जो किसानों की सभी जरूरतों को एक ही स्थान पर पूरा करने के लिये ‘वन-स्टॉप-शॉप’ के रूप में काम करेगी। उन्होंने राज्यों के कृषि मंत्रियों और राज्य सरकारों से कहा  कि वे नियमित रूप से इन पीएमकेएसके का दौरा करें तथा किसानों को जागरूक करें।
यूरिया के  गैर-कृषि कामों में इस्तेमाल पर सख़्त कार्यवाही
डॉ. मांडविया ने राज्यों को कहा  कि खेती के लिये उपयोगी यूरिया गैर-कृषि कामों में इस्तेमाल न होने दें। राज्य  इस सिलसिले में जागरूकता अभियान चलायें, ताकि कृषि यूरिया को अन्यत्र स्थानांतरित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाये। याद रहे कि इस मामले में केंद्र सरकार के उर्वरक उड़न दस्ते और विभिन्न कृषि विभागों, राज्य सरकारों ने संयुक्त निरीक्षण किया था, तथा गड़बड़ी करने वाली यूरिया संयंत्रों के खिलाफ 45 एफआईआर की गई थीं। इसके अलावा, 32 मिक्सचर संयंत्रों के लाइसेंस रद्द किये गये और 79 मिक्सचर संयंत्रों से उर्वरक के सारे अधिकार छीन लिये गये। इन सबके खिलाफ चोर बाजारी निवारण और आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की गई। राज्य सरकारों ने भी ऐसी अपराधियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाने की वकालत की।बैठक में विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों, राज्य सरकारों के अफसरों और उर्वरक विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

ICAR- के वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओ का निवारण किया

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नई दिल्ली: आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओ का निवारण किया – आई. सी. ए. आर.-एन. बी. ए. आई. आर. के निदेशक डॉ. एस. एन. सुशील और डॉ. ए. एन. शायलेशा ने प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. ए. कंदन के साथ किसानों की समस्याओं का निवारण करने के लिए अपनी विशेषज्ञता प्रदान की। डॉ एस सुनिल व वैज्ञानिकों ने किसानों को जैव कीटनाशकों की विशेषताओं के बारे में बताया। इस जैविक कीटनाशक से किसानों के सामने आने वाली किसी भी परेशानी को दूर किया जा सकता हैं।

नोडल अधिकारी डॉ सीमा भगत ने बताया कि कार्यक्रम के समापन पर डॉ. एस. एन. सुशील ने उपस्थित किसानों के बीच शतपाड़ा ऑल राउंडर जैव कीटनाशक फॉर्मूलेशन वितरित किया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनके शहतूत के खेतों में कीटों और बीमारियों के प्रबंधन के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के साथ सशक्त बनाना था। “माइक्रोबियल बायो एजेंटों और परजीवी परभक्षी इकाइयों के बड़े पैमाने पर उत्पादन पर ग्रामीण किसान उत्पादक संगठनों के लिए प्रशिक्षण” शीर्षक से यह कार्यक्रम कर्नाटक के देवाहनहल्ली में आयोजित किया गया। शहतूत की खेती और रेशम कीट पालन में लगे 50 से अधिक समर्पित किसानों ने भाग लिया, इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें प्रभावी कीट प्रबंधन के लिए आवश्यक विशेषज्ञता से लैस करना था।

50 से अधिक किसानों ने लिया कार्यक्रम भाग

देवाहनहल्ली में आयोजित इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम 50 से अधिक किसान भाग लेने के लिए एकत्र हुए। इस कार्यक्रम में उद्देश्य  किसानों की शहतूत में थ्रिप्स और माइट प्रबंधन की अपनी समझ को बढ़ाने पर था, जिसे शतपाड़ा ऑल राउंडर फॉर्मूलेशन के रूप में जानी जाने वाली अभिनव आईसीएआर-एनबीएआईआर तकनीक द्वारा सरल बनाया गया। किसानों ने इसके अनुप्रयोगों, विशेष रूप से थ्रिप्स और माइट्स का मुकाबला करने में इसकी प्रभावकारिता का पता लगाया, जो अक्सर चिंतामणि क्षेत्र में उनकी शहतूत की फसलों को प्रभावित करते हैं।

आई. सी. ए. आर.-एन. बी. ए. आई. आर. के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों ने कार्यक्रम के दौरान सूचनात्मक सत्रों का नेतृत्व किया। डॉ सुनील ने ट्राइकोडर्मा एस्पेरेलम का उपयोग करके खेत की खाद का संवर्धन किया। इस समृद्ध मिश्रण को तब शहतूत की जड़ क्षेत्र में तैनात किया गया था, जो जड़ सड़न और विल्ट के खिलाफ एक मजबूत रक्षा प्रदान करता है।

आई. सी. ए. आर.-एन. बी. ए. आई. आर. के वैज्ञानिकों ने शतपद ऑल राउंडर और शतपद मास्टर ब्लास्टर जैसे जैव कीटनाशकों के उपयोग का प्रदर्शन किया। इन पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को वास्तविक क्षेत्र स्थितियों में थ्रिप्स और माइट्स के प्रबंधन में प्रभावी होने के लिए प्रदर्शित किया गया था। इस कार्यक्रम द्वारा किसानों ने इन जैव कीटनाशकों की विशेषताओं  जानकारी प्राप्त की साथ ही उनकी समस्याओ का भी निवारण किया गया।

आईसीएआर-एनबीएआईआर और केवीके चिंतामणि की इस सहयोगी पहल ने न केवल किसानों के ज्ञान को समृद्ध किया, बल्कि उन्हें अपने कृषि प्रयासों को बढ़ाने के लिए व्यावहारिक समाधानों से भी लैस किया। जैसे ही आजादी के अमृत महोत्सव की प्रतिध्वनि प्रतिध्वनित हुई, इन किसानों के दिलों में सशक्तिकरण और आशावाद की भावना व्याप्त हो गई, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य की आशाओं का पोषण हुआ।

चंद्रयान-3 की सफलता का जश्न और रक्षाबंधन का पर्व एक साथ मनाने की बात बहनें कह रही हैं.

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इस बार रक्षाबंधन का पर्व इसलिए खास होने वाला है, क्योंकि भाइयों की कलाई पर चंद्रयान-3 वाली राखी खूब फबेगी. ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि राखी के बाजार में ‘योगी’-‘मोदी’ के बाद चंद्रयान-3 की राखी की भी धूम है. बहनों की मानें तो वह इस बार रक्षाबंधन का पर्व ISRO के वैज्ञानिक भाइयों को समर्पित करते हुए अपने भाइयों की कलाई पर चंद्रयान-3 की राखी बांधेगी और ISRO को धन्यवाद भी करेंगी. लिहाजा चंद्रयान-3 की सफलता का जश्न और रक्षाबंधन का पर्व एक साथ मनाने की बात बहनें कह रही हैं.
बहनें न केवल बाजार में चंद्रयान-3 की राखी को बड़े चाव से खरीद रही हैं, बल्कि यह भी बता रही हैं कि इस बार रक्षाबंधन का पर्व वे ISRO के वैज्ञानिकों को समर्पित करते हुए और उनको धन्यवाद देते हुए चंद्रयान-3 की राखी बाजार से खरीद रही हैं
शहर के दालमंडी इलाके में लगे राखी बाजार से खरीदारी करने वाली एक बहन निधि गिरी ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन और देश के गौरव यानी चंद्रयान-3 की सफलता को एक साथ सेलिब्रेट करेंगी.
वहीं खरीदारी करती एक अन्य बहन अन्नू ने बताया कि चंद्रयान-3 मिशन की सफलता हमारे लिए गौरव की बात है, इसीलिए वे अपने भाइयों की कलाई पर चंद्रयान-3 वाली राखी बांधकर रक्षाबंधन का पर्व मनाएंगी.
वहीं, राखी दुकानदार मो.आसिफ बताते हैं कि उनकी तरफ से हर बार कोशिश होती है कि बाजार में कुछ नया लाया जाए और इस बार तो चंद्रयान-3 की वजह से चारों ओर गर्व का माहौल है, तो इससे अच्छा और कोई मौका नहीं हो सकता कि बहनें अपने भाइयों की कलाई पर चंद्रयान-3 की राखी बांधें. इसीलिए मोदी-योगी की राखी के बाद सबसे ज्यादा डिमांड चंद्रयान-3 वाली राखियों की है, जिसकी खरीदारी न केवल बनारस, बल्कि पूरे पूर्वांचल से आकर बहनें कर रही हैं.

Indian Cow Economy – गाय खरीदने पर मिलेगी 80 हजार रुपये की सहायता, यूपी सरकार का बड़ा एलान

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 उत्तर प्रदेश के गौ पालकों की आय बढ़ाने, आत्मनिर्भर बनाने एवं स्वदेशी नस्ल की गायों के प्रति उनका रुझान बढ़ाने के लिए यूपी सरकार ने नन्द बाबा दुग्ध मिशन के तहत मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना शुरू की है. इसको लेकर शासनादेश जारी कर दिया गया है. शासनादेश में योजना से संबंधिति पात्रता, सब्सिडी के मानक, योजना का उद्देश्य और स्वरूप को स्पष्ट किया गया है.
गाय खरीदने पर 80 हजार रुपये की सहायता
इसके अनुसार गौ पालक द्वारा दूसरे प्रदेशों से साहिवाल, थारपारकर, गिर एंव संकर प्रजाति की गाय खरीदने पर उन्हे ट्रांसर्पोटेशन, ट्रांजिट इंश्योरेंस एवं पशु इंश्योरेंस समेत अन्य मदों पर खर्च होने वाली धनराशि पर सब्सिडी दी जाएगी. यह सब्सिडी गौ पालकों को अधिकतम दो स्वदेशी नस्ल की गायों की खरीद पर मिलेगी. यह सब्सिडी गौ पालकों को कुल व्यय धनराशि का 40 प्रतिशत यानी 80 हजार रुपये तक दी जाएगी. पहले चरण में यह योजना प्रदेश के 18 मंडल मुख्यालय के जनपदों में लागू की जाएगी. इसके बाद इसे प्रदेश के सभी जनपदों में लागू किया जाएगा.
स्वदेशी गाय की खरीद है अनिवार्य
अपर मुख्य सचिव पशुपालन डॉ. रजनीश दुबे ने बताया कि, ‘नन्द बाबा मिशन के तहत मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना का उद्देश्य प्रदेश में स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायों की संख्या और नस्ल को बढ़ाना है ताकि प्रदेश में दुग्ध उत्पादकता में वृद्धि कर प्रदेश दुग्ध उत्पादन में अग्रणी राज्य बना रहे. साथ ही प्रदेश के ग्रामीण अंचलों के युवाओं और महिलाओं को पशुपालन के व्यवसाय के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्हे रोजगार उपलब्ध कराना है. इसके अलावा योजना का उद्देश्य प्रदेश में प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता में वृद्धि कर राष्ट्रीय औसत दुग्ध उपलब्धता के स्तर पर लाना है. दुग्ध आयुक्त एवं मिशन निदेशक शशि भूषण लाल सुशील ने बताया कि योजना का लाभ उठाने के लिए गौ पालक को दूसरे प्रदेश से स्वदेशी उन्नत नस्ल की गाय खरीदना अनिवार्य है.
इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी की ओर से लाभार्थी को दूसरे प्रदेश से स्वदेशी नस्ल की गाय खरीदने के लिए एक अनुमति पत्र जारी किया जाएगा ताकि उसे गायों के परिवहन में किसी प्रकार की समस्या न हो. वहीं इन गायों का 3 वर्षों का पशु बीमा एकमुश्त कराया जाना आवश्यक है. इसके साथ ही उन्हे दूसरे प्रदेश से अपने प्रदेश में लाने के लिए ट्रांजिट बीमा भी कराना अनिवार्य है.
महिला दुग्ध उत्पादकों को दी जाएगी तरजीह
योजना के तहत लाभार्थी को सब्सिडी गाय की खरीद, उसके परिवहन, पशु ट्रांजिट बीमा, 3 वर्षों का पशु बीमा, चारा काटने की मशीन की खरीद एवं गायों के रखरखाव के लिए शेड के निर्माण पर दिया जाएगा. विभाग की ओर से इन सभी मदों में गौ पालक का खर्च दो स्वदेशी नस्ल की गायों के लिए 2 लाख रुपये माना गया है, जिसका 40 प्रतिशत यानी अधिकतम 80 हजार रुपये सब्सिडी के रूप में दिये जाएंगे. इस योजना का लाभ उठाने के लिए लाभार्थी के पास गौ पालन के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिये. साथ ही उनके पास पहले से 2 से अधिक स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायें न हों. वहीं इस योजना के तहत 50 प्रतिशत महिला दुग्ध उत्पादकों एवं पशुपालकों को तरजीह दी जाएगी जबकि 50 प्रतिशत में अन्य वर्ग के लाभार्थी शामिल हैं.

सिनेबस्टर मैगज़ीन के प्रकाशक रॉनी रॉड्रिग्स ने शिक्षा के क्षेत्र में रखा कदम

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मुम्बई के चर्चित व्यवसायी और सिनेबस्टर मैगज़ीन के प्रकाशक रॉनी रॉड्रिग्स ने पिछले दिनों मुम्बई स्थित डब्ल्यू मेरिएट होटल में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में फिल्म  निर्माता निर्देशक धीरज कुमार, अभिनेता दर्शन कुमार, पंकज बेरी, अभिनेत्री नायरा बनर्जी, आरती नागपाल, संगीतकार दिलीप सेन सहित कई गणमान्य फिल्मी हस्तियों की उपस्थिति में पीबीसी एजुकेशन एंड फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को लॉन्च किया।
डॉ. राजा रॉय चौधरी पीबीसी एजुकेशन एंड फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के प्रमुख सलाहकार हैं। मुम्बई के सांताक्रूज में स्थित पीबीसी एजुकेशन एंड फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद रॉनी रॉड्रिग्स ने डब्ल्यू मेरिएट होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ भव्य रूप से इस कंपनी को लॉन्च किया। कम्पनी के पास कई विशेषज्ञ हैं जैसे श्री रवि राजा, डीन पीजी कैंपस और डायरेक्टर डिपार्टमेंट ऑफ लॉ, प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, इंदौर।
उनके पास शैक्षणिक क्षेत्र में जबरदस्त अनुभव है जो छात्रों के लिए काफी मददगार साबित होगा। कंपनी के सुचारू कामकाज के लिए अमेरिका और सिंगापुर में कंपनियों को जोड़ा गया है। अगली कड़ी में यूके, कनाडा, यूरोप हैं। अमेरिका के कार्यालय के लिए डॉ. किरण कदम स्थानीय निदेशक हैं जो आईआईटी स्नातक हैं। सिंगापुर में, श्री धर्मराज थंगराज संचालन संभालेंगे। वह योग्य इंजीनियर हैं। शैक्षिक क्षेत्र में अच्छा अनुभव रखने वाले श्री थंगराज का ज्ञान और विशेषज्ञता छात्रों के लिए उपयोगी होगी।
रॉनी रॉड्रिग्स अमेरिका और सिंगापुर की कंपनियों अर्थात पीबीसी एजुकेशन एंड फाइनेंशियल सर्विसेज एलएलसी (यूएसए) और पीबीसी एजुकेशन एंड फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, (सिंगापुर) में डायरेक्टर हैं। भारत में निशा वर्मा काम संभालेंगी। कीर्तिकुमार कदम, तीन कंपनियों यानी पीबीसी एजुकेशन एंड फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, पीबीसी एजुकेशन एंड फाइनेंशियल सर्विसेज एलएलसी (यूएसए) और पीबीसी एजुकेशन एंड फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, (सिंगापुर) में निदेशक हैं।
वह मुंबई कार्यालय में कामकाज संभालेंगे। सुश्री नाजनीन बराय एजुकेशनल लोन के संबंध में छात्रों का मार्गदर्शन करेंगी और अभिभावकों को परामर्श देंगी। सुज़ाना अलफोंसो मार्केटिंग विभाग को संभालेंगी और दिपेश सोमैया ट्रैवेल पार्टनर रहेंगे जो वीज़ा, टिकट में सहायता करेंगे।
रॉनी रॉड्रिग्स ने कहा कि आज के समय मे भारी संख्या में भारत के छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने का विकल्प चुनते हैं। लेकिन वहां जाने के बारे में निष्पक्ष और ईमानदार सलाह मिलना मुश्किल होती है जिसके कारण छात्रों और उनके पैरेंट्स, अभिभावकों को अनावश्यक रूप से भारी रकम खर्च करनी पड़ती है। ऐसा भी देखा जा रहा है कि कई कंसल्टेंसी सेवाएँ इच्छुक छात्रों और उनके अभिभावकों को आखिरी समय में ज्यादा पैसे की मांग करते हुए धोखा देती हैं।
खुद मैंने एक स्टूडेंट के साथ ऐसा होता देखा जहां उससे कुछ और रकम का खर्च बताया गया था मगर आखरी लम्हों में और 20-25 लाख रुपए की मांग कर ली गई। ऐसे हालात में अभिभावक एक और लोन के बोझ तले दब जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में हमने पीबीसी एजुकेशन एंड फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड शुरू करने का फैसला लिया, यह कंपनी वास्तविक, प्रामाणिक और साथ ही ईमानदार सेवाएं प्रदान करेगी। हमारा स्लोगन है ‘हम ईमानदारी में विश्वास करते हैं।’ इस सर्विसेज में कोई छिपी हुई लागत नहीं होगी। उनकी सेवाओं के लिए नाममात्र एकमुश्त शुल्क लिया जाएगा। इस कंपनी के द्वारा सक्षम छात्रों को बिना किसी कठोर नियम और शर्तों के लोन देकर सहायता करने की भी योजना है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

Man Ki Baat – डेयरी सेक्टर हमारे देश के सबसे महत्वपूर्ण सेक्टरों में से एक है – PM Narendra Modi

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PM Modi Mann Ki Baat 104th Episode: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने 27 अगस्त यानी रविवार को ‘मन की बात’ के 104वें संस्करण को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सावन महाशिव, उत्सव और उल्लास का महीना है। चंद्रयान की सफलता ने उत्सव के इस माहौल को कई गुना बढ़ा दिया है। चंद्रयान को चंद्रमा पर पहुंचे तीन दिन से ज्यादा का समय हो रहा है। ये सफलता इतनी बड़ी है कि इसकी जितनी चर्चा की जाए कम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार डेरी और भारतीय पशुधन पर भी चर्चा करते हुए मन की बात में कहा कि ”- वाराणसी दुग्ध संघ हमारे किसानों की आय बढ़ाने के लिए खाद प्रबंधन पर काम कर रहा है। देश में पहला दूध प्रसंस्करण संयंत्र वाराणसी में है जहां थर्मल और विद्युत ऊर्जा दोनों आवश्यकताओं को गोबर धन के माध्यम से पूरा किया जाता है। इसका उद्घाटन हाल ही में किया गया था।

डेयरी सेक्टर हमारे देश के सबसे महत्वपूर्ण सेक्टरों में से एक है। हमारी माताओं और बहनों के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाने में तो इसकी बहुत अहम भूमिका रही है। गुजरात बनास बनास डेयरी की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बनास डेयरी ने अपने ट्रांसपोटेशन की लगत और समय को बचाने के लिए ट्रेनों के उपयोग की सराहना करते हुए कहा कि -” इस से ईधन और समय दोनों बच रहा है।

ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनास डेयरी के नए प्लांट का उद्घाटन 19 अप्रैल को २०२२ को किया था। यह 600 करोड़ की लागत से हुआ है तैयार एक समय पानी की कमी से जूझने वाले गुजरात के बनासकांठा में बनास डेयरी के बनने के कारण अब दूध की नदियां बहनें लगी हैं.
बनास डेयरी 600 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है
वैसे तो बनास में पहले से ही एक डेयरी प्लांट चल रहा था लेकिन आसपास के इलाकों में जितना दूध का उत्पादन हो रहा था वह अब उस प्लांट की क्षमता से ज्यादा होने लगा था और इसी वजह से इस इलाके में दूसरे डेरी प्लांट की मांग भी जोर शोर से उठ रही थी. नया डेयरी प्लांट करीब 600 से 700 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है। और इस नए डेरी प्लांट में पिछले प्लांट की तुलना में कहीं ज्यादा डेरी प्रोडक्ट तैयार हो रहे है।
मन की बात में प्रधानमंत्री ने केरल के सहकारी दूध विपणन महासंघ के तहत मालाबार क्षेत्रीय सहकारी दूध उत्पादक संघ लिमिटेड का ” मिल्मा ‘ के बारे में कहा कि -”आज पशुओ की चिकित्सा के लिए आयुर्वेदिक दवा बनाने में जुटी है।
केरल में, मिल्मा सहकारी क्षेत्र में डेयरी किसानों की पहल का प्रसिद्ध ब्रांड नाम है
केरल में, मिल्मा सहकारी क्षेत्र में डेयरी किसानों की पहल का प्रसिद्ध ब्रांड नाम है। खरीद के प्रारंभिक चरण से दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए, MILMA ने केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता की मदद से ग्राम स्तर पर थोक दूध कूलर स्थापित किए हैं जो दूध की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करते हैं। कम तापमान पर बैक्टीरिया की वृद्धि को रोककर बैक्टीरिया की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए दूध को ठंडा करने के लिए सोसायटियों में बल्क मिल्क कूलर स्थापित किए जाते हैं। ठंडा करने के बाद दूध को इंसुलेटेड टैंकरों में डेयरी संयंत्रों में लाया जाता है और प्रसंस्करण से पहले प्लेटफ़ॉर्म परीक्षण, रासायनिक और सूक्ष्मजीवविज्ञानी परीक्षणों सहित विभिन्न गुणवत्ता परीक्षणों के अधीन किया जाता है। एक बार जब किसानों से खरीदा गया दूध इन सभी गुणवत्ता परीक्षणों से गुजर जाता है, तो इसे पाश्चुरीकरण जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं के अधीन किया जाता है। समरूपीकरण, उत्पाद विविधीकरण, आदि सभी गुणवत्ता जांचों के अनुरूप होने के बाद, सुनिश्चित गुणवत्ता के साथ दूध और दूध उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जा रहे हैं। मिल्मा के विकास मॉडल में अपने स्वयं के व्यावसायिक मुनाफे, केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्विस विकास एजेंसी जैसे लाभार्थियों से आवश्यक धन प्राप्त करके उचित दीर्घकालिक दृष्टि के साथ डेयरी उद्योग के लिए आवश्यक भंडारण-प्रसंस्करण-विपणन निवेश के लिए रणनीतिक योजना शामिल है। MILMA डेयरी किसानों के उत्थान और कल्याण के लिए उपभोक्ताओं से प्राप्त राजस्व का 84 प्रतिशत मूल दूध मूल्य और लाभ मार्जिन के रूप में किसानों को लौटाने में सक्षम है।

दिल्ली बनेगा खालिस्तान: G-20 की तैयारियों के बीच 5+ मेट्रो स्टेशनों पर देश-विरोधी नारे

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New Delhi – (GBB) ऑपइंडिया न्यूज़ पोर्टल स्टाफ़ रिपोर्ट के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली मे जहाँ G-20 सम्मेलन की तैयारियाँ चल रही हैं वहीं दिल्ली के पाँच मेट्रो स्टेशनों पर खालिस्तान समर्थक नारे लिखे हुए पाए गए हैं। दिल्ली में 5 से अधिक मेट्रो स्टेशनों की दीवारों पर लिखा गया है, “खालिस्तान भारत का हिस्सा है और पीएम मोदी के खिलाफ है, खालिस्तान जिंदाबाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिखों का नर-संहार करवा रहे हैं
इस मामले की खबर लगते ही दिल्ली पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। वहीं दिल्ली में जी-20 सम्मेलन से ठीक पहले हुई इस हरकत से दूसरी तरफ खुफिया एजेंसियाँ भी सक्रीय हो गई हैं।

बता दें कि दिल्ली में G-20 सम्मेलन 8 से 10 सितंबर तक होने वाला है लेकिन दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धमकियाँ देते हुए का एक और वीडियो सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने जारी किया है।

आतंकी पन्नू ने वीडियो में कहा, “सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए SFJ के खालिस्तान समर्थकों ने दिल्ली के शिवा जी पार्क से लेकर पंजाबी बाग तक कई मेट्रो स्टेशनों पर खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे हैं।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह स्लोगन शिवाजी पार्क, मादीपुर, पश्चिम विहार, उद्योग नगर, महाराजा सूरजमल स्टेडियम, सरकारी सर्वोदय बाल विद्यालय नांगलोई, पंजाबी बाग और नांगलोई मेट्रो स्टेशन के बाहर लिखे गए हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले खालिस्तानी आतंकी पन्नू ने 15 अगस्त को भी माहौल खराब करने का प्रयास किया था। पन्नू ने खालिस्तान का नाम लेकर सिखों को उकसाया और दिल्ली आने के लिए कहा था।

Chandrayaan-3 अधिकतर वैज्ञानिक मिशन उद्देश्य अब पूरे होने जा रहे हैं – इसरो प्रमुख एस सोमनाथ

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चंद्रमा पर चंद्रयान-3 की अब तक की यात्रा
इसरो ने बुधवार को शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’ से लैस ‘लैंडर मॉड्यूल’ की सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिग कराई। इसी के साथ चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत पहला देश बन गया। इसके अलावा, भारत चांद पर पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। इससे पहले, अमेरिका, चीन और सोवियत संघ यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के कुछ समय बाद ही इसरो के मून मिशन चंद्रयान-3 के लैंडर ने चांद की तस्वीरें भेजीं। यह तस्वीर उस समय ली गई थीं, जब लैंडर विक्रम बुधवार को चांद की सतह पर उतर रहा था। इसके बाद लैंडर ने एक और तस्वीर भेजी, जिसमें लैंडिंग साइट दिख रही थी। इसके अलावा, लैंडर का एक पैर और उसके साथ की परछाई दिखाई दी। बता दें, चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर अपेक्षाकृत समतल क्षेत्र चुना है।
इसरो ने बताया था कि Ch-3 लैंडर और MOX-ISTRAC, बेंगलुरु के बीच संचार लिंक स्थापित किया गया है। तस्वीरें लैंडर विक्रम के हॉरिजोन्टल वेलोसिटी कैमरे से ली गईं, जब यह धीरे-धीरे नीचे उतर रहा था।
इसरो ने 24 अगस्त की सुबह एक वीडियो साझा की। इसमें बताया गया कि रोवर लैंडर से बाहर निकल गया है और चांद पर चहलकदमी कर रहा है।
इसरो ने बताया था कि सभी गतिविधियां निर्धारित समय पर हैं। सभी प्रणालियां सामान्य हैं। लैंडर मॉड्यूल पेलोड ILSA, RAMBHA और ChaSTE ने काम करना शुरू कर दिया है। रोवर की गतिशीलता संचालन शुरू हो गया है। इसरो ने बताया कि प्रॉपल्शन मॉड्यूल पर SHAPE पेलोड रविवार को चालू किया गया था।
25 अगस्त को विक्रम लैंडर से बाहर निकलने और चंद्रमा की सतह पर चलने वाले प्रज्ञान रोवर का एक वीडियो इसरो द्वारा जारी किया गया था।
इसरो ने एक और वीडियो जारी कर बताया कि कैसे दो खंडों वाले रैंप ने रोवर के रोल-डाउन में सुविधा प्रदान की। इसमें बताया गया कि एक सौर पैनल ने रोवर को बिजली पैदा करने में सक्षम बनाया।
इसरो ने शुक्रवार शाम को बताया था कि चंद्रयान-3 के रोवर ‘प्रज्ञान’ ने चांद की सतह पर लगभग आठ मीटर की दूरी सफलतापूर्वक तय कर ली है। इसके उपकरण चालू हो गए हैं। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा था कि सभी नियोजित रोवर गतिविधियों को सत्यापित कर लिया गया है। रोवर के उपकरण एलआईबीएस और एपीएक्सएस चालू हैं। बेंगलुरु मुख्यालय वाली राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा था कि प्रोपल्शन मॉड्यूल, लैंडर मॉड्यूल और रोवर पर सभी पेलोड सामान्य प्रदर्शन कर रहे हैं।
  1. इसरो ने शनिवार को बताया था कि चंद्रयान -3 मिशन के तीन उद्देश्यों में से दो हासिल कर लिए गए हैं, जबकि तीसरे पर काम चल रहा है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ने यह भी कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के सभी पेलोड सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
  2. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस स्थान का नाम शिव शक्ति पॉइंट रखने की घोषणा की, जहां विक्रम लैंडर ने सॉफ्ट लैंडिंग की थी। वहीं, 2019 में जिस जगह पर चंद्रयान -2 लैंडर चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था उसका नाम तिरंगा पॉइंट रखने का निर्णय लिया। 
  3. इसके अलावा, पीएम मोदी ने एलान किया कि 23 अगस्त को जिस दिन चंद्रयान -3 लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरा, उसे ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा

14 दिन बहुत खास

इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने शनिवार को कहा था कि चंद्रयान-3 के अधिकतर वैज्ञानिक मिशन उद्देश्य अब पूरे होने जा रहे हैं। लैंडर और रोवर सभी चालू हैं। उन्होंने कहा था कि अभी तक बहुत डाटा प्राप्त हुए हैं। 14 दिनों तक मिलने वाले डाटा को लेकर सभी उत्साहित हैं। 

Today 11 am – Live Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज करेंगे ‘मन की बात’, सुबह 11 बजे होगा

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New Delhi ( GBB ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिये देशवासियों से बात करेंगे। 27 अगस्त को सुबह 11 बजे ‘मन की बात’ का प्रसारण किया जाएगा। आज ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 104वां एपिसोड है। पीएम मोदी ने एक्स पर ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रेरक जीवन यात्राओं को उजागर करने में हमेशा खुशी होती है।
अप्रैल में पूरा हुआ ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 100वां एपिसोड
30 अप्रैल 2023 को पीएम मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 100 एपिसोड पूरे हुए थे। ऐतिहासिक क्षण को यादगार बनाने के लिए पूरे देश में इसकी लाइव स्क्रीनिंग की गई थी। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भी ‘मन की बात’ के 100वें एपिसोड का सीधा प्रसारण किया गया था। दिल्ली में 6530 स्थानों पर कार्यक्रम को लाइव सुना गया। दिल्ली के अलावा पूरे देश में भी कार्यक्रम की लाइव स्क्रीनिंग की गई थी। 
11 विदेशी भाषाओं में होता है प्रसारण
‘मन की बात’ कार्यक्रम 22 भारतीय भाषाओं और 29 बोलियों के अलावा फ्रेंच, चीनी, इंडोनेशियाई, तिब्बती, बर्मी, बलूची, अरबी, पश्तू, फारसी सहित 11 विदेशी भाषाओं में प्रसारित किया जाता है। यह कार्यक्रम आकाशवाणी के 500 से अधिक केंद्रों से प्रसारित होता है।
यहां सुन सकते हैं ‘मन की बात’ कार्यक्रम 
  1. ऑल इंडिया रेडियो
  2. दूरदर्शन
  3. नरेंद्र मोदी मोबाइल ऐप

गाय के इन 108 नामों का जप करने से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न हो जाते हैं। जानें गौमाता के कौन से 108 नाम

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हिन्दू धर्म में गाय को माता, कामधेनू, कल्पवृक्ष और सभी कामनाओं की पूर्ति करने वाली बताया गया है। गाय माता के संपूर्ण शरीर में तैतीस कोटी देवी-देवताओं का वास होने का उल्लेख भी शास्त्रों में मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण गौ सेवा के अन्नय प्रेमी थे। शास्त्रों में गाय माता के 108 नाम बताएं गए है। कहा जाता है कि गाय के इन 108 नामों का जप करने से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न हो जाते हैं। जानें गौमाता के कौन से 108 नाम का जप करने से सभी कामनाएं पूरी होने के साथ मनवांछित फल की प्राप्ति भी होती है।

।। दोहा ।।

श्री गणपति का ध्यान कर जपो गौ मात के नाम।
इनके सुमिरन मात्र से खुश होवेंगे श्याम।।

1- कपिला, 2- गौतमी, 3- सुरभी, 4- गौमती, 5- नंदनी, 6- श्यामा, 7- वैष्णवी, 8- मंगला, 9- सर्वदेव वासिनी, 10- महादेवी, 11- सिंधु अवतरणी, 12- सरस्वती, 13- त्रिवेणी, 14- लक्ष्मी, 15- गौरी, 16- वैदेही, 17- अन्नपूर्णा, 18- कौशल्या, 19- देवकी, 20- गोपालिनी। 21- कामधेनु, 22- आदिति, 23- माहेश्वरी, 24- गोदावरी, 25- जगदम्बा, 26- वैजयंती, 27- रेवती, 28- सती, 29- भारती, 30- त्रिविद्या, 31- गंगा, 32- यमुना, 33- कृष्णा, 34- राधा, 35- मोक्षदा, 36- उतरा- 37- अवधा, 38- ब्रजेश्वरी, 39- गोपेश्वरी, 40-कल्याणी।

41- करुणा, 42- विजया, 43- ज्ञानेश्वरी, 44- कालिंदी, 45- प्रकृति, 46- अरुंधति, 47- वृंदा, 48- गिरिजा, 49- मनहोरणी, 50- संध्या, 51- ललिता, 52- रश्मि, 53- ज्वाला, 54- तुलसी, 55- मल्लिका, 56- कमला, 57- योगेश्वरी, 58- नारायणी, 59- शिवा, 60- गीता।

61- नवनीता, 62- अमृता अमरो, 63- स्वाहा, 64- धंनजया, 65- ओमकारेश्वरी, 66- सिद्धिश्वरी, 67- निधि, 68- ऋद्धिश्वरी, 69- रोहिणी, 70- दुर्गा, 71- दूर्वा, 72, शुभमा, 73- रमा, 74- मोहनेश्वरी, 75- पवित्रा, 76- शताक्षी, 77- परिक्रमा, 78- पितरेश्वरी, 79- हरसिद्धि, 80- मणि। 81- अंजना, 82- धरणी, 83- विंध्या, 84- नवधा, 85- वारुणी, 86- सुवर्णा, 87- रजता, 88- यशस्वनि, 89- देवेश्वरी, 90- ऋषभा, 91- पावनी, 92- सुप्रभा, 93- वागेश्वरी, 94- मनसा, 95- शाण्डिली, 96- वेणी, 97- गरुडा, 98- त्रिकुटा, 99- औषधा, 100- कालांगि।
101- शीतला, 102- गायत्री, 103- कश्यपा, 104- कृतिका, 105- पूर्णा, 106- तृप्ता, 107- भक्ति, 108- त्वरिता।

।। दोहा ।।

अनंत नाम गौ मात के सब देवो का वास।
सब भक्तो का आपके चरणों में विश्वास।।
इन नामो को नित्य पठन से रिद्धि सिद्धि घर आयेगी।
श्री कृष्ण राम कृपा से,सर्व देव कृपा हो जायेगी।।