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बजरंग दल ने पशु मांस से भरी हुई चार गाड़ियां पकड़ी

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गुरुग्राम – हरियाणा के गुरुग्राम में बजरंग दल व गौ रक्षा दल (cow protection team) की टीमों ने गौ मांस के साथ तस्करों को काबू किया है। गुरुग्राम में मांस से भरी हुई 4 गाड़ियां पकड़ी गई हैं। बाद में गाड़ियां व इनके ड्राइवरों को पुलिस के हवाले कर दिया गया। मामले में छानबीन चल रही है। एक ड्राइवर इरफान ने पुलिस को गौ मांस तस्करी से जुड़ी कुछ जानकारी दी है।

जानकारी के अनुसार पुलिस द्वारा गो तस्करों पर लगाम लगाने के लिए टीम गठित की गई है। वही गौ रक्षक दल द्वारा टीम के साथ संयुक्त ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में गौ रक्षा दल द्वारा गुरुग्राम के सोहना चौक मस्जिद (Sohna Chowk Mosque) के पास से गौ तस्करों की गाड़ियों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की गई। इनमें पशुओं का मांस भर कर लाया जा रहा था। पुलिस ने सभी गाड़ियों को कब्जे में ले मामले की जांच शुरू कर दी है। मौके से पकड़े गए पिकअप ड्राइवर इरफान ने खुलासा करते हुए बताया कि बिना परमिट के पशुओं के मांस को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने का काम कर रहा था।

उसने अपने साथ काम कर रहे दो और साथियों का नाम उजागर किया है। वही पुलिस ने गाड़ियों को कब्जे में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। गुरुग्राम के गौ रक्षा प्रमुख चमन खटाना के मुताबिक गुरुग्राम में पशुओं के मांस की तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है। बजरंग दल- गौ रक्षक दल द्वारा लगातार मांस तस्करों पर नकेल कसने का काम किया जा रहा हैं। बावजूद इसके तस्करों के हौसले इतने बुलंद है कि वह तस्करी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।

फ़िल्म “गौरैया लाइव” का शानदार प्रीमियर

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केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की मौजूदगी में फ़िल्म “गौरैया लाइव” का शानदार प्रीमियर

मुंबई (अनिल बेदाग) : काफी समय से चर्चा में रही फिल्म “गौरैया लाइव” का प्रीमियर मुंबई में आयोजित किया गया। इस अवसर पर फ़िल्म के निर्माता राहुल रंगारे, निशांत जैन, रोहित राज सिंह चौहान , कलाकार नरेंद्र खत्री, सीमा सैनी, अदा सिंह , विनय झा , निर्देशक गेब्रियल वत्स के साथ ही केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले उपस्थित रहे। “गौरैया लाइव” एक मजदूर पिता के बेटी की कहानी है जो बोरवेल में गिर गई है।

रेयर फिल्म्स और टी एंड पोएट्री फिल्म्स के बैनर तले बनी इस सर्वाइवल ड्रामा को देखने के लिए दर्शक भी काफी उत्सुक है। यह कहानी भोपाल के मजदुर पिता के बेटी की कहानी है। जिसे बड़े ही मार्मिक ढंग से पेश किया गया है। जो एक खुले बोरवेल में गिर जाती है जो कंस्ट्रक्शन साइट पर ही रहती है। फिल्म को देख सभी बहुत इमोशनल भी हुए। इस फिल्म में दिखाया गया सत्य कड़वा है पर सत्य है। ऐसी स्थिति किसी भी माँ बाप पर न आये इसका खास ध्यान रखना चाहिए। यह फ़िल्म, सवाल करती है ऐसी दुखद घटनाएं समाज में दोबारा न हो इसके लिए क्या कदम उठाये जा सकते है इसपर सोच विचार करने की आवश्यकता है।

पीपली लाइव फेम ओंकार दास मानिकपुरी ने उस छोटी बच्ची गौरैया के मजदूर पिता का रोल किया है और गौरैया बनी छोटी सी नन्ही बालिका का नाम है अदा सिंह। उसने अपनी एक्टिंग के हुनर से लोगों को चौका दिया। इतने घंटो तक मौत और जीवन की जद्दोजहद में जीत आखिर गौरैया की ही हुई। इसमें कई और भी कलाकार है जिन्होंने इसे सफल बनाने के लिए सौ प्रतिशत योगदान दिया है। सीमा सैनी, पंकज झा, शगुफ़्ता अली मुख्य किरदार में नज़र आए साथ में गणेश सिंह, बलराम ओझा, नरेंद्र खत्री और आलोक चटर्जी जैसे प्रतिभाशाली कलाकारों के नाम शामिल है।

फ़िल्म ‘गौरैया लाइव” के निर्माता राहुल रंगारे, डॉ. निशांत जैन, रोहित राज सिंह चौहान और राजीव जैन हैं। फ़िल्म के सह निर्माता सीमा सैनी , गेब्रियल वत्स, ऋषभ कुरैच्या, रणधीर सिंह ठाकुर और गौरव बग्गा हैं। सीमा सैनी इस फ़िल्म की लेखिका, गीतकार, संगीतकार, अभिनेत्री और सह निर्मात्री भी हैं। फ़िल्म के लेखक़ गेब्रियल वत्स और सीमा सैनी हैं और निर्देशन गेब्रियल वत्स ने किया हैं। फ़िल्म का संगीत सुंजॉय बोस और सीमा सैनी की प्रतिभाशाली जोड़ी द्वारा दिया गया है, जिसके भावपूर्ण गीत सीमा सैनी ने लिखे हैं

महंत श्री चेतन रामजी महाराज ने विदेशी धरती पर दिया योग और सनातन धर्म का संदेश

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 श्री भक्ति गोपाल गौशाला एवं श्री भक्ति धाम आश्रम के महंत श्री चेतन रामजी महाराज पिछले 10 दिन से विदेशी धरती सिंगापुर, मलेशिया, हांगकांग, फिलीपींस, मॉरीशस की धरती पर सनातन की अलख जगाते हुए योग साधना शिविर का आयोजन कर जन जागरूकता अभियान में लगे हुए हैं। मॉरीशस में आयोजित एक कार्यक्रम में उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए महंत श्री चेतन रामजी महाराज ने कहा “सभी सनातनी भक्तों को अपने आने वाली पीढ़ी को अध्यात्म से और सनातन संस्कृति से अवगत कराते रहना चाहिए। आज के दौर में नई पीढ़ी के बीच सनातन धर्म से जुड़ी शिक्षा का प्रचार प्रसार अति आवश्यक है। भारतीय संतों का सत्संग और सनातन धर्म ही आपको कर्मपथ पर विचलित नहीं होने देगा एवं आपको कुमार्ग से सन्मार्ग की ओर प्रेरित करेगा।
विदित हो कि संत श्री चेतनराम जी महाराज ने बचपन से ही भक्ति और साधना का रुख अपना लिया था और 6 वर्ष उम्र से ही परम पिता परमेश्वर की भक्ति के प्रति समर्पित हो कर गो सेवा के प्रति अपना जीवन सर्वस्व अर्पण कर दिया और अब जगह जगह भारत के कई राज्यों के अलावा भारत के बाहर विदेशी धरती पर भी भक्ति, गोसेवा, योग और सनातन धर्म का बिगुल बजा रहे हैं। रात दिन जागकर गांव – गांव शहर -शहर जाकर जनमानस के कल्याण के लिए वो तत्पर रहते हैं। महंत श्री चेतन रामजी महाराज ने कहा कि भगवान हमें संत जीवन देता है तो उसके साथ जिम्मेदारी भी देता है जो जन कल्याण के लिए होती हैं और इस धरती पर जन्म लेने वाले सभी जीव परमात्मा का ही अंश हैं। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में कर्म करते हुए परमात्मा की भक्ति करना चाहिए।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

नालासोपारा स्थित ऐतिहासिक बौद्ध स्तूप को भूल चुकी है सरकार!

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पालघर। नालासोपारा पश्चिम में तथागत बुद्ध स्तूप पर सैकड़ों की संख्या में बहुजन सुधारवादी संघ (बीएसएस BSS) संस्था के लोग दर्शन के लिए पहुंचे समाजसेवक डॉ सी आर सरोज ने जानकारी देते हुए बताया कि नालासोपारा स्थित बुद्ध स्तूप ढाई हजार वर्ष पुराना है।

BSS संस्था के प्रमुख देवेंद्र यादव की अध्यक्षता में सभा का आयोजन किया गया जिसमें देवेंद्र यादव ने कहा कि अब यह स्पष्ट हो गया है कि शूद्र बहुजन समाज की जागरूकता से ब्राह्मणी खेमे में हड़कंप मच गया है उनके सभी काल्पनिक वेद पुराडो, ग्रंथों का जिन्हें इतिहास बनाकर बहुजनों के दिलो-दिमाग में बिठा दिया था उनका अब पर्दाफाश हो चुका है। बहुजन एससी, एसटी, ओबीसी उनके सारे षडयंत्रों को समझ चुका है। झूठी कहानियां लिखकर समाज नीति पर एकाधिकार करने की उनकी रणनीति फेल हो चुकी है। अब शूद्र बहुजन समाज के लोग काल्पनिक कपोल कल्पित ब्राह्मणी कहानियों जिनमें कदम कदम पर शूद्रों को अपमानित किया गया है उससे नाता तोड़कर उनके काल्पनिक भगवानों देवी देवताओं अवतारों के काल्पनिक फोटो अपने घरों से बाहर फेंककर अपने असली समतावादी महापुरुषों महानायकों महात्मा बुद्ध, महात्मा फुले, शाहूजी महाराज, बाबासाहेब अम्बेडकर, पेरियार आदि की फोटो घरों में लगाकर उनकी जयंतियां मनाने लगे हैं। काल्पनिक ब्राह्मणी ग्रंथों को घरों से हटाकर मानवता वादी वैज्ञानिकता वादी महापुरुषों की लिखी किताबें घरों में रखने लगे हैं, जिन्हें खुद भी पढ़ रहे हैं, बच्चों को भी पढ़ा रहे हैं।
पहले घरों में सनातनी देवी-देवताओं के फोटो लगाना, ब्राह्मणों से सत्य नारायण कथा से लेकर अनेकों कर्मकांड कराना आदि प्रतिष्ठा का काम माना जाता था।
अब जिस घर में SC, ST, OBC महापुरुषों की फोटो लगी है उनके विचारों से संबंधित साहित्य हैं जिस घर में महापुरुषों की जयंतियां मनाई जाती हैं उस घर को बहुजन समाज में प्रतिष्ठा और मान सम्मान मिलता है उस परिवार को जागरूक परिवार माना जाता है। यह सब देखकर सनातनी ब्राह्मणों के पैर के नीचे से जमीन खिसकने लगी है वे घबराए हुए हैं कि अब उनकी झूठी मनगढ़ंत कहानियों के दम पर टिके सामाजिक राजनीतिक वर्चस्व का क्या होगा ?
आने वाले दस वर्षों में बहुजन संगठनों ने संकल्प लिया है कि 85% एससी, एसटी, ओबीसी के लोगों के घरों में बहुजन समाज के महापुरुषों का फोटो एवं उनके ग्रन्थों का प्रवेश हो जाएगा तब 15% सनातनियों का क्या होगा, जो आज हर जगह धर्म से लेकर प्रशासनिक राजनैतिक उच्चतम पदों पर सौ फीसदी कब्जा किए हैं।
उन ब्राह्मण भक्तों से आग्रह है कि वे मानसिक गुलामी से बाहर निकलें फुले साहू अम्बेडकर पेरियार आदि महापुरुषों के विचारों व उनके संघर्षों का अध्ययन करें तर्कवादी बनें ! स्वाभिमानी बनें ! समाज और देश का भला चाहते हैं तो ब्राह्मणी सनातनी विचारों को छोड़कर बहुजन समाज के क्रांतिकारी संगठनों से जुड़ें और महापुरुषों के सपनों के प्रबुद्ध एवं समृद्ध भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।


समाजसेवी डॉ. सी.आर.सरोज ने बताया कि नालासोपारा को एक समय में शूर्पारका कहा जाता था – ‘शूर’ का अर्थ बहादुर और शहर के लिए ‘पराका’ होता है। इसे इसका नाम सदियों से मेसोपोटामिया, मिस्र, ग्रीस, रोम, अरब और पूर्वी अफ्रीका की प्राचीन दुनिया के साथ व्यापार करने वाले मुख्य बंदरगाहों में से एक होने के साहसी कार्य के कारण मिला।
यह एक प्रमुख बौद्ध क्षेत्र भी था, जिसकी पुष्टि अशोक (304-232 ईसा पूर्व) द्वारा अपने धम्म का प्रचार करने के लिए बनवाए गए दो शिलालेखों, 8वीं और 9वीं की उपस्थिति से होती है। अशोक ने अपने जीवनकाल में पूरे साम्राज्य में 14 प्रमुख शिलालेख लगवाए।
9वें शिलालेख की खोज 2,500 साल पुराने बौद्ध स्तूप में की गई थी, जिसे एक धनी स्थानीय व्यापारी और व्यापारी पूर्ण मैत्रायनिपुत्र ने अपने नए विश्वास को चिह्नित करने के लिए बनवाया था। चंदन से सजाया गया यह स्तूप, जो अब एक राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक है, साँची की तर्ज पर ही बनाया गया था। इसका उद्घाटन स्वयं गौतम बुद्ध ने किया था।
1882 में स्तूप के केंद्र से एक बड़े खजाने की खुदाई की गई थी जिसमें बुद्ध की 8वीं शताब्दी की आठ कांस्य मूर्तियों के साथ-साथ अवशेष ताबूत, सोने के फूल, एक चांदी का सिक्का और एक भिक्षापात्र के टुकड़े थे। 9वां शिलालेख, मौर्यकालीन ब्राह्मी लेखन से ढका पत्थर का एक बड़ा अष्टकोणीय खंड, अब दक्षिण मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय की मूर्तिकला गैलरी में स्थित है।
नालासोपारा में एक अज्ञात संरक्षित स्थल के अंदर, जिसे सरकार भी भूल चुकी है, एक बौद्ध स्तूप है, जो इस तथ्य का प्रमाण है कि सोपारा या शूरपारका, जैसा कि इसे ऐतिहासिक रूप से जाना जाता है, उस समय बौद्ध धर्म का केंद्र था।

लुब्रिज़ोल कॉर्पोरेशन ने पुणे में नया ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर शुरू किया

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मुंबई (अनिल बेदाग): स्पेशलिटी केमिकल्स में अग्रणी, लुब्रीज़ोल ने कई मार्केट और इंडस्ट्री में क्षेत्रीय और वैश्विक सफलता हासिल करने के लिए और लोकल टैलेंट का लाभ उठाने के लिए ग्राहकों और कर्मचारियों के साथ मिलकर काम करने के लिए, एक रणनीतिक केंद्र के रूप में पुणे में एक नया ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) शुरू किया है।
एम्बेसी टेक जोन, हिंजेवाड़ी, पुणे में स्थित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर लुब्रीज़ोल के नई सुविधा का हिस्सा है। जीसीसी कैम्पस लीड गोल्ड प्रमाणित है और एक सुरक्षित, स्वस्थ और पर्यावरण के प्रति जागरूक कार्यस्थल को सक्षम बनाने के लिए उपयुक्त है। एक अच्छी तरह से डिज़ाइन किए गए और एर्गोनोमिक वर्कस्पेस के अलावा, 42,000 वर्ग फुट की सुविधा में वेलनेस रूम, एक मनोरंजक क्षेत्र, एक प्रशिक्षण क्षेत्र और प्राकृतिक रोशनी वाले हडल रूम शामिल हैं। ग्राहक अनुभव केंद्र लुब्रिज़ोल के विज्ञान बारे में जानकारी देता है। इंजीनियरिंग, सप्लाय चेन, टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, प्रोक्योरमेंट, लीगल आणि ह्यूमन रिसोर्स के क्षेत्र में काम करने वाले 200 से अधिक क्षेत्रीय कर्मचारियों को अगले वर्ष जीसीसी में नौकरी मिलने की उम्मीद है।
जेटी जोन्स, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, हाई ग्रोथ रीजन ने कहा, “भारत निस्संदेह हमारे सबसे तेजी से बढ़ते मार्केट में से एक है और क्षेत्रीय और वैश्विक ग्राहकों के लिए सफलता और नवाचार प्राप्त करने के लिए आवश्यक टैलेंट का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।”
भावना बिंद्रा, मैनेजिंग डायरेक्टर – भारत, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका, लुब्रिज़ोल ने कहा, “जीसीसी हमारी वैश्विक टीम का एक एकीकृत विस्तार है। यह व्यावसायिक प्रक्रिया और डिजिटल क्षमताएं उपलब्ध करने वाले एक क्षेत्रीय और वैश्विक केंद्र के रूप में कार्य करता है जो लुब्रिज़ोल को जटिल समस्याओं को हल करने और बेहतर व्यावसायिक परिणाम खोजने में मदद करेगा। आज हमारे लिए एक खुशी का दिन है क्योंकि हम भविष्य की कई अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।”
अभिषेक जैन, इंडिया जीसीसी लीडर, लुब्रिज़ोल ने कहा, “पुणे में जीसीसी का उद्घाटन हमारी टीम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो हमें अपनी तकनीकी क्षमताओं और परिचालन उत्कृष्टता को बढ़ाने के लिए वर्ल्ड-क्लास टैलेंट तक पहुंचने और विकसित करने में सक्षम बनाता है। इससे हम भारत और दुनिया भर में अपने ग्राहकों को और भी अधिक नवीन तरीकों से सेवा देने में सक्षम होंगे।”

भारत सरकार के पूर्व उप सचिव एवं वरिष्ठ भाजपा नेता को चुनाव लड़ाना चाहती है बसपा

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अंकित मिश्रा
जौनपुर। वरिष्ठ भाजपा नेता व राष्ट्रवादी लेखक बसंत कुमार जिन्होंने उप सचिव पद से स्वैक्षिक सेवा निर्वित्ति के बाद वर्ष 2011 मे भाजपा जॉइन की और विगत 14 वर्षो मे बड़े मनोयोग से सेवा की और राष्ट्रवाद और हिंदुत्व पर दर्जनों किताबे लिखी।कलराज मिश्र के चुनाव प्रचार से लेकर उनके सलाहकार का काम किया, पर भाजपा ने उन्हे जातीय समीकरण की आड़ मे कभी भी लोकसभा का टिकट नही दिया। ऐसी खबर है की बसपा उन्हे अपने टिकट पर जौनपुर या मछली शहर से लड़ाना चाहती है, और बसपा के नेता बसंत कुमार की बसपा सुप्रीमो मायावती से मुलाकात करवाना चाहते है। जिससे उन्हे बसपा जॉइन करा कर प्रत्याशी बनाया जा सके।
यह सर्व विदित है कि बसंत कुमार पुराने भाजपाई है,और भाजपा कार्यकर्ता उन्हे बहुत सम्मान देते है।
यदि वह मछलीशहर सीट से बसपा टिकट पर चुनाव लड़ते है,तो भाजपा प्रत्याशी बी पी सरोज की मुश्किल बढ़ सकती है। और जौनपुर की सीट वर्ष 2019 मे बसपा के खाते मे गयी थी।मछलीशहर लोकसभा में भाजपा प्रत्याशी बी पी सरोज भी मात्र 181 मतो से जीत पाए थे। देखना यह है कि बसपा बसंत कुमार को अपने पाले मे लाने मे सफल हो पाती हैं या नहीं ?

उत्तर भारतीय नेता सुरजीत सिंह का आनंद चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा सम्मान

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अंकित मिश्रा
मुंबई। उत्तर भारतीय युवा नेता,उद्योगपति एवं समाजसेवी सुरजीत सिंह का सांसद राजन बिचारे की संस्था आनंद चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा सुरजीत सिंह के द्वारा समाज में किए गए सामाजिक,धार्मिक कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। सुरजीत सिंह एक हिंदुवादी संस्था सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष है, हिंदुत्व के प्रचार प्रसार को लेकर पूरे देश में इनके लाखों कार्यकर्ता काम कर रहे है। ज्ञात हो कि सुरजीत सिंह महाराष्ट्र कांग्रेस कामगार सेल के प्रदेश अध्यक्ष है। कामगारों के हित के लिए हमेशा आवाज़ उठाते रहते हैं। सिंह टॉप ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन भी है।

बीजेपी ने तेजस्वी को कहा ‘मौसमी सनातनी’

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पटना: बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं RJD नेता तेजस्वी यादव बुधवार को सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक कथित वीडियो को लेकर आलोचनाओं के घेरे में आ गए। इस वीडियो में वह कथित रूप से नवरात्र के दौरान हेलीकॉप्टर में मछली खाते नजर आ रहे हैं। RJD नेता ने वीडियो पोस्ट करते वक्त इसका दिनांक भी लिखा था। सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर पोस्ट किए गए उक्त वीडियो में पूर्व उपमुख्यमंत्री यादव विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी के साथ हेलीकॉप्टर में दोपहर का भोजन करते नजर आ रहे हैं।

बीजेपी ने तेजस्वी को कहा ‘मौसमी सनातनी’

हेलीकॉप्टर में तेजस्वी और सहनी वीडियो में मछली और रोटी खाते दिखे। RJD नेता ने 8 अप्रैल को उक्त वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा था, ‘चुनावी भागदौड़ एवं व्यस्तता के बीच हेलीकॉप्टर में भोजन। चुनाव प्रचार के दौरान जो 10-15 मिनट मिलते हैं, उसमें वह खाना खा लेते हैं।’ वीडियो में सहनी ने मिर्च दिखाकर विरोधियों पर तंज कसते हुए कहा, ‘हमारा वीडियो देखकर बहुतों को मिर्ची लगेगी।’ केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने यादव को ‘मौसमी सनातनी’ बताते हुए उनपर ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ करने का आरोप लगाया।

वे तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं’

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को एक वीडियो संदेश में ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ करने के लिए तेजस्वी की आलोचना की और उन्हें ‘मौसमी सनातनी’ कहा। सिन्हा ने कहा, ‘वे मौसमी सनातनी हैं और यह नहीं जानते कि सनातन धर्म की प्रथाओं का पालन कैसे किया जाए। मुझे लोगों के खान-पान पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन श्रावण मास में मटन और नवरात्रि में मछली का सेवन करना एक सच्चे सनातनी का खान-पान नहीं हो सकता। यह सब करके वे तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं।’

‘IQ का टेस्ट लेने के लिए वीडियो डाला था’

सिन्हा ने पिछले साल की एक घटना का भी जिक्र किया जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लालू प्रसाद के दिल्ली आवास पर भोजन (श्रावण के महीने के दौरान मटन की दावत) किया था। बीजेपी नेताओं की उक्त टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, ‘भाजपाइयों और गोदी मीडिया के भक्तों के आईक्यू का टेस्ट लेने के लिए ही हमने यह वीडियो डाला था और हम अपनी सोच में सही भी साबित हुए। ट्वीट में ‘दिनांक’ लिखा हुआ है, लेकिन बेचारे अंधभक्तों को क्या मालूम। आखिर में सहनी जी द्वारा मिर्ची लगने का भी जिक्र किया गया है।’

गणगौर : भारतीय नारी की आस्था और विश्वास का पर्व

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अंजनी सक्सेना – विनायक फीचर्स
भारत में प्रत्येक त्यौहार मानव मन की आस्था और अटूट विश्वास से जुड़ा हुआ है।  भारतीय नारियों के भी अपने कुछ व्रत हैं, जो उनके आस्था और विश्वास से गहरे जुड़े हुए हैं। भारतीय समाज में स्त्री का पतिव्रता और सौभाग्यवती होना सम्मान माना जाता है। इसी पविर्त धर्म और सौभाग्य की रक्षा के लिए भारतीय नारियां अनेक व्रत भी करती हैं। करवा चौथ, हरतालिका तीज, वट सावित्री, अमावस्या और गणगौर ऐसे ही प्रमुख व्रत हैं जिनके द्वारा भारतीय नारी अच्छे पति और सौभाग्य की कामना करती हैं।
गणगौर का व्रत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को किया जाता है।  इस दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती को और देवी पार्वती ने अनेक स्त्रियों की पतिव्रता और सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद दिया था। मान्यता है कि गणगौर के दिन देवी पार्वती ने पहले पूजा करने वाली निर्धन स्त्रियों को वस्त्र, आभूषण तथा सौभाग्यवती होने का वरदान दिया था तथा बाद में आने वाली संपन्न स्त्रियों को रक्त सुहाग देते हुए पतिव्रता एवं सौभाग्यशाली होने का आशीर्वाद दिया। इसी दिन देवी पार्वती की पूजा से प्रसन्न होकर महादेव ने पार्वती को वरदान दिया कि आज के दिन जो स्त्री मेरा पूजा तथा तुम्हारा व्रत करेगी उसके पति चिरंजीव रहेंगे तथा अंत में उन्हें मोक्ष मिलेगा। पार्वती ने शिव की यह पूजा एवं व्रत छिपाकर किया था इसलिए आज भी इस व्रत में पूजन पुरुषों के सामने नहीं की जाती है।
गणगौर मुख्य रूप से राजस्थानी महिलाओं का पर्व है, जिसमें वे भगवान शिव एवं पार्वती की पूजा अर्चना करती हैं। इस तरह गणगौर, शिव पार्वती की पूजा का पर्व है।  गण यानि शिव और गौर यानि पार्वती, कुल मिलाकर गणगौर भगवान शंकर और पार्वती के ही दूसरे नाम हैं। देवी पार्वती ने भगवान शंकर को काफी तपस्या के बाद पति के रूप में पाया था, इसलिए पार्वती के समान सदा सौभाग्यवती रहने के लिए युवतियां और महिलाएं गौर की पूजा करती हैं। वे गौर से आशीर्वाद स्वरूप अमर सुहाग की कामना करती हैं।
गणगौर का पर्व राजस्थान में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।  यहां गणगौर के सोलह दिन पहले यानि होलिका दहन के दूसरे दिन होली की राख से गौर मूर्ति बनाकर स्थापित की जाती है। कई जगह गौर प्रतिमा लकड़ी की भी बनायी जाती है। इस प्रतिमा की सोलह दिन तक लगातार पूजा-अर्चना की जाती है। सुबह सबेरे गौर को झूला झुलाया जाता है। इसे मालवा अंचल में गौर झुलाना भी कहते हैं।
राजस्थानी युवतियां गणगौर पूजा के लिए सोलह दिन तक प्रात: काल सात कलश सिर पर रखकर ले जाती हैं और उन्हें नजदीक के नदी, तालाब या कुएं से भरकर लाती हैं। इसी जल एवं दूब के साथ गणगौर की पूजा की जाती है। सोलहवां दिन (चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया) गौर की विदा का दिन होता है।  माना जाता है कि इस दिन भगवान शंकर गौर को लेने आते हैं और गौर अपनी सखियों से बिछुड़कर महादेव के साथ चली जाती है। गणगौर की विदा शोभा यात्रा के रूप में होती है।
राजस्थान के जयपुर की गणगौर यात्रा तो इतनी प्रसिद्ध है कि उसे देखने के लिए देश के कोने- कोने से लोग एकत्रित होते हैं। बैंडबाजों से सजी गणगौर यात्रा में हाथी, घोड़े और ऊंट के साथ-साथ बाराती भी होते हैं और पालकी में होती है गणगौर।
राजस्थानी और मालवी स्त्रियां गणगौर का पूजन अलग-अलग रूपों में करती हैं।  विवाहित महिलाएं आशीर्वाद स्वरूप अमर सुहाग की कामना करती है, तो कन्याएं गौर से अपने लिए अच्छे पति की कामना करती हैं। युवतियां गौर की पूजा सखी रूप में करती हैं। गौर का यही रूप गणगौर पूजन में मुख्य माना गया है।
सोलह दिनों तक गौर को सखी मानकर पूजा की जाती है, इसलिए गौर के समक्ष हंसी ठिठौली भी पूजा में शामिल रहती है। गौर पूजा में लोकगीतों का भी भरपूर उपयोग किया जाता है।  इन लोकगीतों में जहां भक्ति का पुट होता है, वहीं शिकायतें और हंसी मजाक भी।
गणगौर की पूजा में गौर को सखी माना गया है।  जब पूजा सखी भाव से की जा रही है, तो उन्हें भोजन कराना भी आवश्यक है। जब गौर  को भोजन करा दिया तो पानी भी पिलाना पड़ेगा। गौर को पानी पिलाना आसान नहीं है। जब तक गौर को पानी पिलाने वाली सखी अपने पति का नाम नहीं बता दे वह पानी नहीं पिला सकती। पुराने समय में युवतियां शर्म और संकोच के कारण अपने पति का नाम लेने में झिझकती थी, इसलिए वे अपने पति का नाम दोहों में पिरोकर लेती थीं और गौर को पानी पिलाती थी। अब यह परंपरा सी ही बन गयी है।
घर की बड़ी-बूढ़ी महिलाएं गणगौर को घर की बेटी की तरह विदा करती है।  गौर को पूरे जेवर पहनाये जाते हैं और राह के लिए नाश्ता भी साथ रखा जाता है। अब प्रतीक रूप में घर में बेसन के आभूषण बनाकर गौर को पहनाये जाते हैं जो अंत में गौर के साथ ही विसर्जित कर दिये जाते हैं।
गौर के विसर्जन के पूर्व एक शोभा यात्रा निकाली जाती है, फिर नजदीकी नदी, तालाब या कुएं में गौर विसर्जन किया जाता है।  विसर्जन करते समय महिलाएं भाव विह्वल हो उठती हैं और गौर की निशानी के रूप में उसकी चुनरी का एक छोर फाड़कर अपने पास रख लेती है।
आधुनिक समाज में समय की तेज रफ्तार के आगे गणगौर की पूजा भी सिमट चली है।  पहले सोलह दिनों तक चलने वाला यह उत्सव कई स्थानों पर एक या दो दिन में सिमटकर रह गया है। अब तो गणगौर की मुख्य पूजा वाले ही दिन बाजार से मिट्टी की बनी गणगौर प्रतिमा मंगा ली जाती है, और उसे पूजन के उपरांत विसर्जित कर दिया जाता है। प्रतीक रूप में आज भी गणगौर की पूजा बरकरार है और आज भी अनेक युवतियां और महिलाएं बड़े ही श्रद्धा और विश्वास के साथ गौर की मित्रवत पूजा अर्चना करती है। और गणगौर को विसर्जित करते समय इस तरह भावुक हो उठती हैं जैसे उनका कोई आत्मीय जन उनसे बिछुड़ रहा हो। (विनायक फीचर्स)