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NUH में गौ तस्करों और गौ रक्षा दल में मुठभेड़: गोली लगने से एक घायल,

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नूंह (एके बघेल) : नूंह के फिरोजपुर झिरका के पास बीती रात दिल्ली मुंबई बड़ौदा एक्सप्रेसवे पर गौ तस्करों और गौ रक्षा दल के सदस्यों के बीच मुठभेड़ होने का मामला सामने आया है। इस मामले की जैसे ही पुलिस को सूचना मिली तो पुलिस भी मौके पर पहुंची।

डीएसपी सुरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि बीती रात रेवाड़ी जिले के गौ रक्षा दल के सदस्यों को सूचना मिली कि राजस्थान से मेवात में गौ तस्कर एक पिकअप गाड़ी में तीन गायों को लेकर आ रहे हैं। तभी गौरक्षा दल के सदस्यों ने उसे गाड़ी का पीछा किया और उन्होंने पुलिस को भी सूचना दी। फिरोजपुर झिरका के महू चोपड़ा के पास जैसे ही गौ रक्षा दल के सदस्यों से अपने आप को बचाने के लिए गौ तस्करों ने अपनी पिकअप गाड़ी का यूटर्न लिया तो गाड़ी वहीं पलट गई। जिससे मौके पर एक गाय की मौत हो गई और दो गाय जिंदा बच गई। गाड़ी पलटने के बाद गौ रक्षा दल के सदस्य सोनू ने एक गौ तस्कर को पकड़ लिया जिसने अपने आप को घिरा देख सोनू के पेट में गोली मार दी।

सुरेंद्र सिंह ने बताया कि गौ रक्षा दल के सदस्य सोनू के पेट में गोली लगने से उसे पलवल ले जाया गया ,जहां से उसे फरीदाबाद और फरीदाबाद से गुड़गांव के मेदांता अस्पताल के लिए रेफर कर दिया और मेदांता में अब उसका इलाज चल रहा है। डीएसपी ने बताया कि पुलिस ने एक गौ तस्कर को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। जिसका नाम काला पुत्र बलदेव निवासी जयपुर राजस्थान का रहने वाला है और सभी गौ तस्कर राजस्थान के रहने वाले हैं। गौ तस्करों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।

वहीं पुलिस से पहले गौ रक्षा दल के सदस्यों के पास पहुंच रही सूचना से मेवात के लोगों में सवाल उठ रहे हैं। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर रेवाड़ी जिले के गौ रक्षा दल के सदस्यों को नूंह पुलिस से पहले कैसे सूचना मिल जाती है और राजस्थान से नूंह जिले में गौ तस्कर कैसे पुलिस के नाकें और चौकियों को पास कर मेवात में घुस जाते हैं। यह सबसे बड़ा सवाल मेवात के लोगों में देखने को मिल रहा है।

आपको बता दें कि काफी समय से मेवात में गौ तस्करी और गौ हत्या लगभग बंद हो गई है, लेकिन राजस्थान के हिंदू समाज के इन गौ तस्करों से एक बार फिर मेवात में गौ हत्या का मामला उछला है। इससे पहले भी हिंदू समाज के लोगों द्वारा गौ तस्करी का मामला फिरोजपुर झिरका के थाने में सामने आया था, लेकिन आज फिर राजस्थान के रहने वाले लोगों द्वारा गौ तस्करी करना और हिंदू समाज के लोगों ही द्वारा गौ रक्षा करने हुई मुठभेड़ के मामले ने फिर मेवात के लोगों को सतर्क रहने के लिए अलर्ट किया है। एक दिन बाद मेवात ही नहीं बल्कि पूरे देश में बकरा ईद का त्यौहार मनाया जाएगा और इस दौरान मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा जानवरों की कुर्बानी की जानी है।

गौ तस्करी के चलते दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प दो लोग घायल

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एएनआई, मेडक। Telangana Violent clash  तेलंगाना के मेडक में दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प की खबर सामने आई है। हिंसा की वजह एक विशेष समुदाय के लोगों द्वारा  द्वारा की जा रही गौ तस्करी को माना जा रहा है। पुलिस ने बताया कि गायों के कथित अवैध परिवहन को लेकर दो समुदायों के बीच झड़प के बाद, तेलंगाना के मेढक जिले में रामदास चौराहे के पास धारा 144 लगा दी गई है।

मेडक के पुलिस अधीक्षक बी बाला स्वामी ने कहा कि पुलिस ने क्षेत्र में धारा 144 लगा दी है और स्थिति अब नियंत्रण में है। आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144, एक क्षेत्र में चार या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाती है। आमतौर पर किसी भी विरोध प्रदर्शन या दंगे से बचने के लिए ये धारा लागू की जाती है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हिंसा करने वाले कुछ लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है और दोनों पक्षों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

दो लोग घायल, अस्पताल पर भी हमला

पुलिस के अनुसार, यह झड़प तब हुई जब भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के नेताओं ने गायों को ले जाने से रोका और शिकायत दर्ज कराने के बजाय विरोध प्रदर्शन किया।

पुलिस ने कहा कि झड़प में दो लोग घायल हो गए। इसके बाद दोनों पक्षों ने सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया। जिस अस्पताल में घायलों का इलाज चल रहा था, उस पर भी हमला किया गया।

आखिर क्यों ढ़हा भाजपा का मजबूत किला*    

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(शिव शरण त्रिपाठी-विनायक फीचर्स)
यदि भाजपा 2024 के आम चुनाव में अपने बलबूते बहुमत न हासिल न कर सकी तो इसका मुख्य कारण उत्तर प्रदेश में भाजपा का किला ढहना माना जा रहा है। जिस उत्तर प्रदेश में भाजपा ने  2014 के आम चुनाव में  71 सीटे जीती हो और 2019 के आम चुनाव में 62 उसी उत्तर प्रदेश में यदि योगी जी के सुशासन में भाजपा की सीटे आधी यानी 33 रह जाये तो यह भाजपा के लिए घोर चिंता का विषय तो है ही। किसी को विश्वास नहीं हो पा रहा है कि भाजपा 71 से 33 सीटों पर कैसे आ सकती है। 
मार्च 2017 में सत्ता की बागडोर संभालने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने जिस तरह प्रदेश को माफियाओं, बाहुबलियों और शातिर अपराधियों से मुक्त कराकर प्रदेश में कानून का राज स्थापित किया उसकी नजीर मिलनी मुश्किल है। जिस मुख्यमंत्री योगी के बुल्डोजर की धमक देश ही नहीं दुनिया में महसूस की गई हो यदि वही मुख्यमंत्री 2024 के आम चुनाव में भाजपा का किला ढहने से ‘अपराध बोध’  से ग्रस्त होने को मजबूर हो तो इसे विडम्बना ही कही जायेगी।
नि:संदेह भाजपा को 2024 के आम चुनाव में अपना किला ढहने के कारणों की तह में जाना ही होगा। आखिर वो कौन से कारक और कारण है जिनकी वजह से उत्तर प्रदेश में भाजपा की नैया डूब गई और केन्द्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार न बन सकी।
चुनाव परिणामों के बाद अब तो सभी राजनीतिक विश्लेषकों का एक समान मत है कि उत्तर प्रदेश में जातिवाद और विपक्षी दलों का मतदाताओं को दिया गया प्रलोभन सिर चढ़कर बोला। जातिवाद की आंधी से प्रभावित और मुफ्त की चाशनी में नहाये मतदाताओं को न तो भव्य राम मंदिर का स्मरण रहा, न राष्ट्रवाद का और न ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस सुशासन का भी जिसके चलते सूबे में माफियाओं, बाहुबलियों, शातिर अपराधियों  द्वारा की जाने वाली वसूली रंगदारी, अपहरण जैसी घटनायें अतीत की बात हो गई हों। और महिलायें देर रात तक घर के बाहर आने जाने में अपने को सुरक्षित महसूस करने लगी हो।
कांग्रेस द्वारा महिलाओं को प्रतिवर्ष खटाखट 1 लाख रुपये दिये जाने के लॉलीपॉप  ने किस हद तक महिलाओं को अपने पक्ष में वोट देने को बाध्य किया उसका प्रमाण इसी से मिल जाता है कि आज हजारों महिलायें लखनऊ में कांग्रेस कार्यालय में एक लाख रुपये दिये जाने की गुहार लगा रही हैं और चीख-चीखकर कह रही है कि उन्होने एक लाख रुपये के लालच में ही कांग्रेस को वोट दिया है।
मजेदार बात यह है कि कोई भी कांग्रेस का नेता, पदाधिकारी उन्हें यह समझाने को तैयार नहीं है कि कांग्रेस की सरकार नहीं बनी है इसलिये अभी एक लाख देना संभव नहीं है। अतएव वे कांग्रेस की सरकार बनने की प्रतीक्षा करें।
अब सवाल यह उठता है कि क्या उत्तर प्रदेश में भाजपा की हार के उपरोक्त कारण ही हैं या और भी कारण हैं जिनसे भाजपा की रीढ़ ही टूट गई। सर्वाधिक चिंता अयोध्या में हार को लेकर जताई जा रही है। वहां के मतदाताओं पर तमाम तरह के आरोप प्रत्यारोप भी मढ़े जा रहे हैं। नि:संदेह अयोध्या में हार को लेकर विदेशों तक में रह रहे हिन्दुओं मे क्षोभ है। अधिकांश हिन्दुओं का यह कहना है कि माना भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह के प्रति मतदाताओं में गहरी नाराजगी थी। माना कि अयोध्या को भव्य बनाने में उसकी जद में आये अनेक दुकानों व मकानों को तोड़ा गया। किन्तु क्या इतनी नाराजगी से अयोध्या में भाजपा सरकार/संगठनों द्वारा किये गये अप्रतिम योगदान को बिसारा जा सकता है।
यदि भाजपा की हार अयोध्या धाम तक ही सीमित होती तो भी प्रत्याशी से नाराजगी और दुकान/मकान तोड़े जाने का कारण माना जा सकता है किन्तु अयोध्या मण्डल की सभी पांच सीटों पर हार के क्या मायने है? अयोध्या के अलावा भाजपा जिन सीटों पर हारी है उनमें अमेठी से मजबूत प्रत्याशी स्मृति ईरानी, सुल्तानपुर से दिग्गज नेत्री मेनका गांधी प्रमुख है।
यही नहीं तीर्थस्थल चित्रकूट और सीतापुर में भाजपा की हुई हार  केवल नाराजगी का परिणाम नहीं मानी जा सकती है। ऐसे ही कई अन्य सीटों की हार भी सवालों के घेरे में है।
फिलहाल भाजपा की हार के जो प्रमुख कारण सामने रहे हैं वे हैं विपक्षी दलों द्वारा जातिवाद की राजनीति तथा मुफ्त की रेवड़ी बांटने की घोषणा करना। बेशक प्रत्याशियों से मतदाताओं की नाराजगी भी हार के कारणों में एक रही है। पार्टी के भितर घात ने कोढ़ में खाज का काम किया है।
ऐसा भी नहीं है कि भाजपा ने जातिवाद का सहारा न लिया हो पर भाजपा के रणनीतिकार अखिलेश यादव के पीडीए समीकरण की न तो काट ढूढ़ सके और न ही मतदाताओं की नाराजगी और भितरघात को ही गंभीरता से ले सके। जिन योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने हर मायने में इतिहास रचा हो यदि उसी उत्तर प्रदेश में भाजपा घुटनों पर आ गई तो योगी जी का क्षुब्ध व अपमानित महसूस करना स्वाभाविक ही है। लेकिन यह भी सत्य है कि प्रदेश की अधिसंख्य जनता योगी जी की दीवानी है और सबकुछ ठीक रहा तो 2027 में होने वाले प्रदेश के विधान सभा के चुनाव में जनता उन्हे नायक सिद्ध करके ही रहेगी।
फिलहाल जरूरत है हार के कारणों की विस्तृत व सघन जांच की। जांच में जो भी दोषी पाया जाये उसे पार्टी से निष्कासन की सजा ही दी जाये। यदि ऐसा न हुआ तो फिर आगे भी ऐसे ही हालातों का सामना करने के लिये कम से कम भाजपा को तैयार रहना ही चाहिये।(विनायक फीचर्स)

MP News: मंडला में गौ तस्करों के ठिकानों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

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मध्य प्रदेश के मंडला पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. भैंसवाही इलाके में पुलिस और प्रशासन ने 11 आरोपियों के अवैध निर्माण, घर और कत्ल खानों पर एक साथ बुल्डोजर चलाकर उन्हें जमींदोज कर दिया है. एसपी रजत सकलेचा को सूचना मिली थी कि नैनपुर थाना क्षेत्र के गांव भैंसवाही में गौंवंश की हत्या कर उनके मांस की तस्करी की जा रही है, जिसके बाद ये एक्शन लिया गया है.

 

मध्य प्रदेश के मंडला पुलिस ने गौ तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जिले के नैनपुर थाना अंतर्गत भैंसवाही गांव में पुलिस और प्रशासन ने 11 आरोपियों के अवैध निर्माण घरों पर एक साथ बुलडोजर चलाकर उन्हें जमींदोज कर कर दिया है। कार्रवाई के लिए भैंसवाही गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया।

दरअसल, शुक्रवार को देर रात पुलिस ने जिले के नैनपुर थाना अंतर्गत भैंसवाही गांव में दबिश दी। यहां पर घरों की तलाशी के दौरान मृत गोवंश के अवशेष फ्रिज व अन्य जगहों से पुलिस ने जब्त किए। गौवंश वध पर 11 आरोपियों के खिलाफ 11 एफआईआर दर्ज कर लगभग 150 जीवित गौवंश को मुक्त कराया है। इन गोतस्करों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शासकीय भूमि पर अवैध रूप से निर्मित 11 घरों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई कर रही है।

बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश

यहां पुलिस टीम ने गौ तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया. पुलिस टीम को यहां 11 घरों में अवैध कत्ल खाने मिले. दबिश में पुलिस को आरोपियों के घरों से 150 से ज्यादा गोवंश के अवशेष मिले हैं. पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया है. बाकी सभी रात का फायदा उठाकर फरार हो गए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है.

150 से ज्यादा गौवंश मुक्त

इसके साथ ही पुलिस ने घरों के आसपास खेतों और तबेलों में लगभग 150 की संख्या में जीवित गौवंश को मुक्त कराकर प्रशासन के सहयोग से सुरक्षित गौशाला पहुंचाया. इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने 11 एफआईआर दर्ज की हैं. पुलिस की इस कार्रवाई के बाद भैसवाही गांव के 11 कत्ल खानों को गिरा दिया गया है. ये पूरा एक्शन तीन जेसीबी की मदद से किया गया. फिलहाल इन घरों को जमींदोज कर दिया गया है.

 

 

वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन से सम्मानित हुए डॉ निकेश जैन माधानी

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मुंबई। पिछले दिनों मुंबई के युवा बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी मध्यप्रदेश राज्य के इंदौर शहर में डीएलएफ क्लब में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन से सम्मानित हुए। उनके सम्मान के अवसर पर फिल्म अभिनेता बिंदु दारासिंह भी उपस्थित थे।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग के सदस्य चंद्रशेखर रायकवार के आवास पर आयोजित एक भव्य सम्मान समारोह में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता रंजीत, फिल्म निर्माता विनोद बच्चन, जवाहर मोंगा और उस्मान खान को भी वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। उसी अवसर पर इंदौर हाईकोर्ट के जज अनिल वर्मा, इंदौर संभाग के कमिश्नर दीपक सिंह, आईबी के उपनिदेशक सूर्यरंजन दास, सुप्रीम कोर्ट के वकील संतोष शुक्ला, अल्मा टाइम्स के प्रमुख संपादक डॉ सुचिता शुक्ला, डॉ भरत शर्मा और अल्मा टाइम्स के निदेशक राजेश शुक्ला उपस्थित रहे।

उसी दिन इंदौर में डॉ निकेश जैन माधानी को श्री अटल सेवा रत्न सम्मान 2024 इंटरनेशनल प्रेस्टीजियस अवार्ड 2024 की ट्रॉफी देकर शैतान सिंह पाल (एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड), डॉ विजय बजाज, अभिनेता रंजीत और बिंदु दारासिंह ने सम्मानित किया।
विदित हो कि डॉ. निकेश जैन माधानी को ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ब्रेटली के हाथों इंडिया बीआई ब्रांड आइकॉन अवार्ड्स एंड कांफ्रेंस 2024, एक्ट्रेस नीलम कोठारी के हाथों इंडियाज टॉप बिजनेस एंड इंटरप्रेन्योर्स अवार्ड्स 2024, एक्ट्रेस मंदाकिनी (राम तेरी गंगा मैली फेम) के हाथों इंटरनेशनल कंटेंट क्रिएटर अवॉर्ड 2024, महिमा चौधरी के हाथों ग्लैमर एंड लाइफ स्टाइल अवॉर्ड 2024, प्रीति झंगियानी के हाथों नेशनल इंपैक्ट अवार्ड 2024, फिल्म तेरे नाम की अभिनेत्री भूमिका चावला के हाथों तमस आईकॉनिक अवॉर्ड्स 2024, अभिनेता निर्माता निर्देशक धीरज कुमार, गदर 2 के एक्शन डायरेक्टर टीनू वर्मा और डिस्को डांसर गीत के गायक विजय बेनेडिक्ट एवं शो ओर्गेनाइजर संजीव कुमार के हाथों राष्ट्रीय अचीवर अवार्ड 2024, रामायण धारावाहिक में सीता की भूमिका निभाने वाली दीपिका चिखलिया के हाथों दादासाहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवार्ड 2024, पार्श्वगायक उदित नारायण के हाथों अखंड भारत गौरव अवार्ड 2024, अभिनेता सोनू सूद के हाथों एशियन एक्सीलेंस अवार्ड 2024, अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे, एसीपी संजय पाटिल के हाथों दादासाहेब फाल्के अवार्ड प्रस्तुत आईआईएफए अवार्ड 2023, अभिनेत्री काजल अग्रवाल एवं भारतीय पहलवान नरसिंह पंचम यादव के हाथों ऑनरेरी डॉक्टरेट डिग्री एवं बिजनेस अवार्ड और विंदू दारा सिंह के हाथों आत्मनिर्भर एक्सीलेंस अवार्ड भी मिल चुका है।
इसके साथ ही 2022 में निकेश जैन माधानी को महाराष्ट्र राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों गऊ भारत भारती अवार्ड तथा कैबिनेट मंत्री परषोत्तम रूपाला (मत्स्य, दुग्ध व उद्योग मंत्री) के हाथों से गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2023 प्राप्त हो चुका है। उन्हें नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुरस्कार 2023 और छत्रपति शिवाजी महाराज गौरव पुरस्कार 2021 भी मिल चुका है। ब्राइट आउटडोर के सीएमडी योगेश लखानी अपने जन्मदिन पर निकेश जैन को बिज़नेस आइकॉनिक ब्राइट अवार्ड एवं ब्राइट आउटडोर बी.एस.सी. आईपीओ आने की खुशी में बिज़नेस अवार्ड 2023 से सम्मानित कर चुके हैं।

– संतोष साहू

अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित फिल्म “सरफिरा” का फर्स्ट पोस्टर हुआ रिलीज़

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भारत के सबसे बड़े सितारों में से एक अक्षय कुमार अपनी नई फिल्म ‘सरफिरा’ से एक बार फिर दर्शकों को इंस्पायर करने के लिए तैयार हैं। एक इन्स्पिरिंग ड्रामा जो स्टार्ट-अप और एविएशन की डायनामिक वर्ल्ड पर प्रकाश डालता है, ‘सरफिरा’ 12 जुलाई को रिलीज के लिए तैयार है। यह फिल्म दर्शको को आम आदमी को बड़े सपने देखने चाहिए और अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए इंस्पायर करती है।

वर्सटाइल एक्टर ने अपने सोशल मीडिया पर फिल्म का पहला पोस्टर जारी किया। रौबदार लुक और शानदार टैग लाइन “सपना इतना बड़ा देखो ,की वो तुम्हे पागल कहे” पोस्टर रिलीज़ किया। यह फिल्म “सरफिरा” जो अपने सपने को देखते है और जो नहीं देखते उनके लिए यह फिल्म है।

‘बेबी’, ‘एयरलिफ्ट’ और ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ शानदार प्रदर्शन देने के बाद, अब अक्षय कुमार तैयार है एक और हिट देने के लिए तैयार हैं। फिल्म सरफिरा में परेश रावल, राधिका मदन और सीमा बिसवास जैसे शानदार कलाकार भी नज़र आएंगे। यह इनक्रेडिबल स्टोरी तैयार है आम आदमी को इंस्पायर करने लिए और सपनो के पीछे भागने चाहे फिर लोग भले ही तुम्हे पागल कहे।

‘बेबी’, ‘एयरलिफ्ट’ और ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ जैसी समीक्षकों द्वारा प्रशंसित हिट फिल्मों में शानदार प्रदर्शन करने के बाद, उनकी यह फिल्म स्टार्टअप और एविएशन  की दुनिया पर आधारित एक अविश्वसनीय कहानी है, सरफिरा आम आदमी को बड़े सपने देखने और अपने सपनों को पूरी  करने के लिए निश्चितरूप से  प्रेरित करेगा भले ही दुनिया आपको पागल कहे।
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक सुधा कोंगारा द्वारा निर्देशित, जो सूरराई पोत्रू  जैसी फिल्मों में अपनी असाधारण कहानी कहने के लिए प्रसिद्ध हैं, जिन्होंने सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशन और पटकथा के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीता, द्विभाषी ‘इरुधि सुत्रु’ (तमिल) और ‘साला खड़ूस’ ( हिंदी), ‘सरफिरा’ एक सिनेमाई अनुभव सुनिश्चित करती है जो मनोरंजक होने के साथ-साथ प्रेरणादायक भी है, जिससे यह फिल्म साल की सबसे प्रतीक्षित रिलीज में से एक बन गई है। सुधा और शालिनी उषादेवी द्वारा लिखित, पूजा तोलानी के डायलॉग  और जी.वी. प्रकाश कुमार म्यूजिक के साथ, सरफिरा का निर्माण अरुणा भाटिया (केप ऑफ गुड फिल्म्स), साउथ सुपरस्टार सूर्या और ज्योतिका (2डी एंटरटेनमेंट) और विक्रम मल्होत्रा (अबुंदंतिया एंटरटेनमेंट) द्वारा किया गया है।

यह फिल्म १२ जुलाई को रिलीज़ होने के लिए तैयार है।

सरगुन मेहता और रवि दुबे की ‘वे हानियां’ इंस्टाग्राम पर निकली माइली साइरस की ‘फ्लावर्स’ से आगे

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सरगुन मेहता और रवि दुबे के प्रोडक्शन हाउस ड्रीमियाता म्यूज़िक द्वारा प्रोड्यूस सॉन्ग ‘वे हानियां’ ने इंस्टाग्राम पर पॉपुलैरिटी के मामले में माइली साइरस के ‘फ्लावर्स’ को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि उस समय मिली है, जब इस सॉन्ग ने यूट्यूब पर भी 100 मिलियन से ज़्यादा व्यूज़ का आंकड़ा अपने नाम कर लिया है।

‘वे हानियां’ की सफलता इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा माइलस्टोन है, जो इंडियन आर्टिस्ट्स की ग्लोबल अपील और इनफ्लुएंस को प्रदर्शित कर रहा है। इस सॉन्ग में खूबसूरत विजुअल्स दिल को छू लेने वाले बोल और बेहद प्यारी धुन है, जो दुनिया भर में मौजूद म्यूजिक लवर्स के दिलों के छू रहा है। ऐसे में यह गाना अपनी पॉपुलैरिटी को दिन ब दिन बढ़ते हुए देखने के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। रिलीज के बाद से ही, नेटिज़ेंस ने सरगुन मेहता और रवि दुबे के ‘वे हनियां’ की रील तेजी से बनाई है। ऐसे में अब, इस सॉन्ग ने इंस्टाग्राम पर माइली साइरस के फ्लावर्स’ को पीछे छोड़ दिया है।

इस सॉन्ग की सफलता ने न सिर्फ सरगुन मेहता और रवि दुबे के टेलेंट पर रोशनी डाली है, बल्कि ग्लोबल लेवल पर प्रतिस्पर्धा करने की इंडियन म्यूजिक की क्षमता को भी पेश किया है। जैसे-जैसे ‘वे हानियां’ पॉपुलैरिटी हासिल कर रहा है, यह इंडियन म्यूजिक वीडियो के लिए एक नया स्टैंडर्ड सेट कर रहा है, साथ ही कई दूसरे आर्टिस्ट्स को ग्लोबल पहचान हासिल करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

उत्तर प्रदेश में  भा.ज.पा की अप्रत्याशित हार के कारण*

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(सत्यशील अग्रवाल-विभूति फीचर्स)

यद्यपि भाजपा समर्थकों के लिए यह संतोष का विषय है कि मोदी सरकार ने तीसरी बार सत्ता संभाल ली है ,परन्तु जो लक्ष्य लेकर चुनाव लड़ा गया था, उससे बहुत नीचे मिली सफलता ने आम भाजपाइयों को निराश अधिक किया है। क्या जनता को एक देशभक्त, कर्मठ, विकास पुरुष पसंद नहीं आया? शायद ऐसा नहीं है,लेकिन जिस प्रकार से विरोधी पक्ष की पार्टियों ने प्रचार  किया  वे अपने मिशन में काफी हद तक सफल होते दिखे। कहीं न कहीं संगठनात्मक खामियां भी इस अप्रत्याशित हार के लिए  जिम्मेदार दिखीं। विशेषकर उत्तर प्रदेश के नतीजे तो यही बता रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों ने भा.ज.पा को कमजोर किया है। भा.ज.पा में संगठनात्मक खामियों के कारण ही इस तरह के चुनाव परिणाम मिले हैं।

वर्तमान चुनावों (2024 के लोकसभा चुनाव) के नतीजों ने मुझे झकझोर कर रख दिया है। आखिर ऐसे नतीजे क्यों आए जब मैंने कारणों का अध्ययन और विश्लेषण किया तो जो सामने आया वह कुछ ऐसा था-

*संगठन में  कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान नहीं मिलना*
संगठन के उच्च अधिकारी अथवा चुने गए प्रतिनिधि, चुनावों के पश्चात् कार्यकर्ता को अक्सर पहचानते भी नहीं हैं और न ही उनके किसी कार्य में मदद करते हैं। चुनावों के बाद आभार व्यक्त करना भी उचित नहीं समझते। माना कि चुना हुआ प्रतिनिधि प्रत्येक कार्यकर्ता से संपर्क नहीं कर सकता परन्तु निचले स्तर का नेता तो छोटे कार्यकर्ता से संपर्क रख सकता है,उसका हौसला बढ़ा सकता है। उपेक्षा और अनदेखी के कारण कार्यकताओं ने न तो पूरे मन से प्रचार किया न ही समर्पित वोटरों को मतदान केंद्र तक लाने का काम किया।अब क्योंकि कार्यकर्ता का कोई सम्मान नहीं बचा यहां तक कि कोई धन्यवाद के दो शब्द भी नहीं बोलता तो,वह भी उदासीन होकर घर बैठ गया।  वैसे भाजपा का कल्चर माना जाता है कि कार्यकर्ता का पार्टी के लिए योगदान कोई आभार नहीं होता, बल्कि वह विचारधारा  के लिए काम करता है।अब यह उसकी मजबूरी है,कि वह भाजपा के लिए कार्य करे।वह अपने देश को सुशासन देने के लिए अपना योगदान देना चाहता है यही उसका स्वार्थ होता है। जिसका लाभ उच्च पदाधिकारी उठाते है, और साधारण कार्यकर्ता की  उपेक्षा करते हैं।

*मौसम की मार*
चिलचिलाती गर्मी में उपेक्षा का शिकार कार्यकर्ता और भाजपा का समर्पित वोटर दोनों ही बाहर निकलने में कतराते रहे।

*स्थानीय मुद्दों से दूरी*

जनता के स्थानीय मुद्दे समझ पाने में हाई कमान असफल रहा । उसे भनक भी नहीं लग पाई कि जनता में क्या आक्रोश पनप रहा है? जिससे  विरोधी पक्ष को लाभ मिला। यह भी  मंडल स्तरीय कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता का परिणाम रहा,जहां उन्होंने जनता के बीच न तो अपनी बात रखी और न ही उनकी सुनी ।

*सत्ता विरोधी प्रशासन*
कुछ सरकारी अधिकारी वर्तमान सत्ता के विरोधी हैं,उनकी कार्य शैली वर्तमान सरकार को बदनाम करने की  है,  ऐसे अधिकारियों की अति सक्रियता भी भाजपा पर भारी पड़ गयी।

*मुख्यमंत्री की सख्ती*

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ योगी  द्वारा  विकास कार्यों के लिए उठाये गए सख्त कदमों  से प्रभावित जनता में आक्रोश पनपा।  सम्बंधित अधिकारियों ने भी जनता की उपेक्षा करते हुए मनमाने  ढंग से काम किया। परिणामस्वरूप आक्रोश भाजपा प्रत्याशी को ही झेलना पड़ा।

*मंत्रियों की निष्क्रियता*
उत्तर प्रदेश  में सात केन्द्रीय मंत्रियों की हार यही प्रदर्शित करती है, कि उन लोगों ने अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया। अपने क्षेत्र के विकास के लिए कोई कार्य नहीं किया तथा लंबे समय से पनप रहे जनता के आक्रोश को समझकर उसके निदान का प्रयास नहीं किया। क्योंकि लोकतंत्र में जनता का दुःख दर्द सुनने वाला ही चुनाव जीत सकता है।

*मुआवजे का असंगत वितरण*
ऐसा कह पाना असम्भव लगता है कि संगठन में शीर्ष पर बैठे लोगों को पता नहीं चल पाया  कि बनारस और अयोध्या जहाँ पर अभूतपूर्व विकास कार्य किये जाने के दौरान विस्थापित किये गए परिवार और दुकानदार को दिए जा रहे मुआवजा तर्क संगत थे ।वे उन्हें संतुष्ट कर पाए  या फिर या उनके हितों को हानि पहुंचा कर विकास कार्यों को आगे बढाया गया?यदि समय रहते संगठन इस समस्या को समझ उनका हल निकाल लेता तो बेहतर परिणाम मिल सकते थे।
*आरक्षण समाप्त करने का भ्रम*
चुनावी रैलियों में बार बार नारा दिया गया , ‘अबकी बार चार सौ पार’। विपक्षियों द्वारा इसी नारे को मुद्दा बना कर कहा गया कि, मोदी जी की चार सौ सीटें आने का अर्थ होगा कि संविधान में संशोधन कर आरक्षण समाप्त कर दिया जाए।  भाजपा नेताओं ने स्थानीय तौर पर फैलाये जा रहे  इस भ्रम को समय रहते दूर करने का प्रयास नहीं किया। न  चुनाव से पूर्व किसी बड़े नेता ने इस बात पर कोई स्पष्टीकरण दिया जो भाजपा के लिए आत्मघाती सिद्ध हुआ। ( *लेखक  शास्त्री नगर, मेरठ उत्तर प्रदेश में 1992 से भाजपा के कार्यकर्ता-भवन प्रभारी, एजेंट, बूथ प्रभारी   के रूप में सक्रिय रहे हैं।)(विभूति फीचर्स)*

क्या शमा सिकंदर हीरामंडी के लिए उपयुक्त हो सकती थीं?

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मुंबई (अनिल बेदाग) : शमा सिकंदर भारतीय मनोरंजन उद्योग में उन दुर्लभ प्रदर्शन करने वाले कलाकारों में से एक हैं, जो प्रतिभा, अच्छे लुक और फैशन की त्रुटिहीन समझ का सही मिश्रण हैं। जिस सहजता और कुशलता से वह किसी भी किरदार में ढल जाती हैं वह वास्तव में उल्लेखनीय है और यही बात उन्हें एक स्टार कलाकार बनाती है।  वह कई वर्षों से मनोरंजन जगत में अपना जलवा बिखेर रही हैं।
चाहे वह फैशन की उनकी सौम्य समझ हो या किसी भी किरदार को निभाते समय वह जो विवरण सामने लाती हैं, सब कुछ बड़े पैमाने पर सामने आता है। फिल्मों के पाठकों में सिर्फ ऑन-स्क्रीन ही नहीं, शमा सिकंदर एक ऐसी शख्स हैं जो अक्सर अपने सोशल मीडिया हैंडल के लिए भी अपने अभिनय खेल में अपने ‘ओजी’ तत्वों को लाती हैं। वह छोटी-छोटी बारीकियों पर ध्यान देती हैं और इसीलिए, जब भी वह स्क्रीन पर कुछ व्यक्त करना चाहती हैं, तो उनके लुक से लेकर उनके हाव-भाव और शिष्टता तक सब कुछ सामने आ जाता है।
कुछ दिन पहले, हमने उसे कुछ ऐसा ही करते हुए देखा था जब उसने एक उत्तम दर्जे का और सुरुचिपूर्ण लहंगा पहने हुए खुद का एक खूबसूरत वीडियो पोस्ट किया था और हम उससे अपनी नज़रें नहीं हटा पा रहे थे। गहरे गले का चमकदार ब्लाउज और उस पर बढ़िया मिरर-वर्क उनकी जातीयता और रॉयल्टी को दर्शकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाता है। इसके अलावा, उसके लुक को सही दिखाने के लिए मिनिमलिस्टिक मेकअप की ज़रूरत थी क्योंकि वह एक प्राकृतिक सुंदरता है। उन्होंने परम शाही रानी की तरह अपने जातीय अवतार को प्रदर्शित किया और हीरामंडी फिल्म का पृष्ठभूमि गीत वीडियो के लिए उपयुक्त था।  वास्तव में, उस आकर्षक और सम्मोहक जातीय अवतार में उनका आकर्षण और ऑन-स्क्रीन उपस्थिति ऐसी थी कि नेटिज़न्स को तुरंत लगने लगा कि वह संजय लीला भंसाली की हाल ही में रिलीज़ हुई ‘हीरामंडी’ में एक आदर्श दिवा होतीं। बहुत से नेटिज़न्स को लगता है कि उनकी सौम्य और करिश्माई अपील उन कुछ अभिनेत्रियों से भी आगे निकल गई जो मूल रूप से इस परियोजना का हिस्सा थीं और कोई आश्चर्य नहीं, लोगों को लगता है कि वह हीरामंडी के लिए एक आदर्श कलाकार हो सकती थीं, बस उस शांति और सुखदायक अपील के कारण अपने एथनिक फैशन से मेज पर लाती है।
आश्चर्य है कि हम ऐसा क्यों महसूस करते हैं?  हेयर यू गो।  नज़र रखना -खैर, उम्मीद है कि वह शख्स जो वास्तव में मायने रखता है यानी संजय लीला भंसाली इस पर ध्यान दे रहे हैं और शायद अगली बार शमा को इसी तरह की किसी फिल्म के लिए कास्ट करने पर विचार कर रहे हैं।  उन्हें इतने खूबसूरत अवतार में स्क्रीन पर देखना वाकई सुखद होगा।  काम के मोर्चे पर, शमा सिकंदर वर्तमान में कुछ परियोजनाओं पर काम करने में व्यस्त हैं, जिनकी आधिकारिक घोषणा जल्द ही आदर्श समयसीमा के अनुसार होगी।

मृत गाय लेकर पशु चिकित्सालय के गेट पर किया प्रदर्शन

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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। नगर परिषद संतोषगढ़ के पशु चिकित्सालय में वीरवार सुबह उस वक्त माहौल गरमा गया, जब स्थानीय प्राचीन गोशाला को संचालित कर रही कमेटी के पदाधिकारियों ने मृत गाय को लेकर चिकित्सालय स्टॉफ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कमेटी का आरोप है कि घायल एवं बीमार गाय को उचित जांच एवं उपचार नहीं दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
इस संबंधी स्टाफ कर्मियों को बताया गया तो वे दुर्व्यवहार पर उतारू हो गए। फार्मासिस्ट पर गाली-गलौज करने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि फार्मासिस्ट की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है और मृत गाय को चिकित्सालय लेकर आना तर्कहीन बताया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर पुलिस चौकी की टीम भी पहुंच गई। चिकित्सालय की प्रभारी डॉ. दीप शिखा सैनी ने पुलिस की मौजूदगी में गोशाला कमेटी संग बैठक कर मामले को सुलझाया।

वहीं, विरोध प्रदर्शन कर रहे संतोषगढ़ की वार्ड चार की पार्षद मंजू सैनी, गोशाला कमेटी के अध्यक्ष दिलबाग सैनी, महासचिव पंडित प्यार लाल शास्त्री, डॉ. राम नारायण प्रभाकर, सतीश चब्बा, कमल किशोर ने बताया कि गोशाला में बीमार गाय को इलाज देने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ न भेजकर ट्रेनिंग स्टाफ से दवा दिलाई गई। इसके कुछ देर बाद गाय की मौत हो गई। सरकार और उच्च विभाग के सीधे निर्देश हैं कि किसी भी पशु का इलाज डॉक्टर मौके पर जाकर करेंगे, लेकिन स्थानीय चिकित्सालय टीम ने ऐसा नहीं किया। जब गाय की मौत के बारे में यहां बताया गया तो उल्टा फार्मासिस्ट शाम लाल गाली-गलौज पर उतारू हो गए। इस वजह से मजबूरन प्रदर्शन किया गया।
उन्होंने मांग की है कि ऐसे अधिकारियों को यहां से तत्काल बदला जाए और इसकी जांच होनी की जाए। इस मौके पर पुलिस ने भी दोनों पक्षों को शांत कराया। हालांकि चिकित्सालय की प्रभारी डॉ दीप शिखा सैनी ने कमेटी संग बैठक कर सभी संशय स्पष्ट किए तथा गाय को इलाज सही मिलना बताया। इसके अलावा भविष्य में स्वयं जाकर गोशाला में गऊओं की जांच का आश्वासन दिया। उधर, गोशाला के अध्यक्ष दिलबाग सैनी ने बताया कि फार्मासिस्ट के दुर्व्यव्हार के खिलाफ आगामी कार्रवाई करेंगे।

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बीते रोज फार्मासिस्ट सहित कुछ स्टाफ छुट्टी पर था और अस्पताल में मेरे पास केस था। फिर भी गोशाला में गाय की जांच के लिए टीम भेजी और उपचार बिल्कुल सही दिया गया है। फार्मासिस्ट के दुर्व्यवहार के संबंध में मुझे पता नहीं है, इसलिए कुछ कहना गलत होगा।
-दीपशिखा सैनी, प्रभारी, पशु चिकित्सालय, संतोषगढ़

पूरे मामले को लेकर स्थानीय प्रभारी की ओर से विवाद सुलझाया गया है। फार्मासिस्ट की ओर से गाली-गलौज को लेकर विभागीय जांच के निर्देश दे दिए गए हैं।
-डाॅ. विनय शर्मा, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग, ऊना