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संयुक्त परिवार के लाभ

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सत्य शील अग्रवाल
मनुष्य को अपने विकास के लिए समाज की आवश्यकता हुई, इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए समाज की प्रथम इकाई के रूप में परिवार का उदय हुआ, क्योंकि बिना परिवार के समाज की रचना के बारे में सोच पाना असंभव था। समुचित विकास के लिए प्रत्येक व्यक्ति को आर्थिक, शारीरिक, मानसिक सुरक्षा का वातावरण होना नितांत आवश्यक है। परिवार में रहते हुए परिजनों के कार्यों का वितरण आसान हो जाता है। साथ ही भावी पीढ़ी को सुरक्षित वातावरण एवं पालन-पोषण द्वारा मानव का भविष्य भी सुरक्षित होता है। उसके विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। परिवार में रहते हुए ही भावी पीढ़ी को उचित मार्ग निर्देशन देकर जीवन संग्राम के लिए तैयार किया जा सकता है .
आज भी संयुक्त परिवार को ही सम्पूर्ण परिवार माना जाता है। वर्तमान समय में भी एकल परिवार को एक मजबूरी के रूप में ही देखा जाता है। हमारे देश में आज भी एकल परिवार को मान्यता प्राप्त नहीं है, औद्योगिक विकास के चलते संयुक्त परिवारों का बिखरना जारी है परन्तु आज भी संयुक्त परिवार का महत्व कम नहीं हुआ है। संयुक्त परिवार के महत्व पर चर्चा करने से पूर्व एक नजर संयुक्त परिवार के बिखरने के कारणों एवं उसके अस्तित्व पर मंडराते खतरे पर प्रकाश डालने का प्रयास करते हैं। संयुक्त परिवारों के बिखरने का मुख्य कारण है रोजगार पाने की आकांक्षा। बढ़ती जनसँख्या तथा घटते रोजगार के कारण परिवार के सदस्यों को अपनी जीविका चलाने के लिए गाँव से शहर की ओर या छोटे शहर से बड़े शहरों को जाना पड़ता है और इसी कड़ी में विदेश जाने की आवश्यकता पड़ती है।
परंपरागत कारोबार या खेती-बाड़ी की अपनी सीमायें होती हैं, जो परिवार के बढ़ते सदस्यों के लिए सभी आवश्यकतायें जुटा पाने में समर्थ नहीं होती। अत: परिवार को नए आर्थिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ती है। जब अपने गाँव या शहर में नयी सम्भावनायें कम होने लगती हैं तो परिवार की नयी पीढ़ी को रोजगार की तलाश में अन्यत्र जाना पड़ता है। अब उन्हें जहाँ रोजगार उपलब्ध होता है, वहीँ अपना परिवार बसाना होता है, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह संभव नहीं होता कि वह नित्य रूप से अपने परिवार के मूल स्थान पर जा पाए। कभी-कभी तो सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर रोजगार करना पड़ता है। संयुक्त परिवार के टूटने का दूसरा महत्वपूर्ण कारण नित्य बढ़ता उपभोक्तावाद है, जिसने व्यक्ति को अधिक महत्वाकांक्षी बना दिया है। .अधिक सुविधाएँ पाने की लालसा के कारण पारिवारिक सहनशक्ति समाप्त होती जा रही है और स्वार्थपरता बढ़ती जा रही है। अब वह अपनी खुशियां परिवार या परिजनों में नहीं, बल्कि अधिक सुख-साधन जुटा कर ढूंढता है और कई संयुक्त परिवार के बिखरने का कारण बन रहा है। एकल परिवार में रहते हुए मानव भावनात्मक रूप से विकलांग होता जा रहा है। जिम्मेदारियों का बोझ और बेपनाह तनाव सहन करना पड़ता है, परन्तु दूसरी तरफ उसके सुविधा संपन्न और आत्मविश्वास बढ़ जाने के कारण उसके भावी विकास का रास्ता खुलता है।
बिखराव के वर्तमान दौर में भी संयुक्त परिवारों का महत्त्व कम नहीं हुआ है, बल्कि उसका महत्व आज भी बना हुआ है। उसके महत्व को एकल परिवार में रह रहे लोग अधिक अच्छे से समझ पाते हैं। उन्हें संयुक्त परिवार के फायदे नजर आते हैं, क्योंकि किसी भी वस्तु का महत्व उसके अभाव को झेलने वाले अधिक समझ सकते हैं। अब संयुक्त परिवारों के लाभ पर सिलसिले वार चर्चा करते हैं।
सुरक्षा और स्वास्थ्य
परिवार के प्रत्येक सदस्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी परिजन मिलजुलकर निभाते हैं। अत: किसी भी सदस्य की स्वास्थ्य समस्या, सुरक्षा समस्या, आर्थिक समस्या पूरे परिवार की होती है। कोई भी अनपेक्षित रूप से आयी परेशानी सहजता से सुलझा ली जाती है। जैसे यदि कोई गंभीर बीमारी से जूझता है तो भी परिवार के सब सदस्य अपने सहयोग से उसको बीमारी से निजात दिलाने में मदद करते हैं उसे कोई आर्थिक समस्या या रोजगार की समस्या आड़े नहीं आती। ऐसे ही गाँव में या मोहल्ले में किसी को उनसे पंगा लेने की हिम्मत नहीं होती। संगठित होने के कारण पूर्णतया सुरक्षा मिलती है। व्यक्ति हर प्रकार के तनाव से मुक्त रहता है।
विभिन्न कार्यों का विभाजन
परिवार में सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण कार्यों का विभाजन आसान हो जाता है। प्रत्येक सदस्य के हिस्से में आने वाले कार्य को वह अधिक क्षमता से कर पाता है और विभिन्न जिम्मेदारियों से भी मुक्त रहता है। अत: तनाव मुक्त हो कर कार्य करने में अधिक ख़ुशी मिलती है। उसकी कार्य क्षमता अधिक होने से कारोबार अधिक उन्नत होता है । परिवार के सभी सदस्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है और जीवन उल्लास पूर्ण व्यतीत होता है।
भावी पीढ़ी का समुचित विकास
संयुक्त परिवार में बच्चों के लिए सर्वाधिक सुरक्षित और उचित शारीरिक एवं चारित्रिक विकास का अवसर प्राप्त होता है। बच्चे की इच्छाओं और आवश्यकताओं का अधिक ध्यान रखा जा सकता है। उसे अन्य बच्चों के साथ खेलने का मौका मिलता है। माता-पिता के साथ साथ अन्य परिजनों विशेष तौर पर दादा-दादी का प्यार भी मिलता है, जबकि एकाकी परिवार में कभी-कभी तो माता-पिता का प्यार भी कम ही मिल पता है। यदि दोनों ही कामकाजी हैं। दादा-दादी से प्यार के साथ ज्ञान ,अनुभव भरपूर मिलता है। उनके साथ खेलने , समय बिताने से मनोरंजन भी होता है, उन्हें संस्कारवान बनाना ,चरित्रवान बनाना एवं स्वस्थ बनाने में अनेक परिजनों का सहयोग प्राप्त होता है। यह एकाकी परिवार में संभव नहीं हो पता।
संयुक्त परिवार में रहकर व्यय कम
बाजार का नियम है कि यदि कोई वस्तु अधिक परिमाण में खरीदी जाती है तो उसके लिए कम कीमत चुकानी पड़ती है अर्थात संयुक्त रहने के कारण कोई भी वस्तु अपेक्षाकृत अधिक मात्र में खरीदनी होती है। अत: बड़ी मात्रा में वस्तुओं को खरीदना सस्ता पड़ता है। दूसरी बात अलग-अलग रहने से अनेक वस्तुएं अलग-अलग खरीदनी पड़ती है, जबकि संयुक्त रहने पर कम वस्तु लेकर काम चल जाता है। उदाहरण के तौर पर एक परिवार तीन एकल परिवारों के रूप में रहता है, उन्हें तीन मकान, तीन कार या तीन स्कूटर, तीन टेलीविजन और तीन फ्रिज इत्यादि प्रत्येक वस्तु अलग-अलग खरीदनी होगी परन्तु वे यदि एक साथ रहते हैं तो उन्हें कम मात्रा में वस्तुएं खरीदकार धन की बचत की जा सकती है। जैसे तीन स्कूटर के स्थान पर एक कार, एक स्कूटर से कम चल सकता है। तीन फ्रिज के स्थान पर एक बड़ा फ्रिज लिया जा सकता है। इसी प्रकार तीन मकानों के स्थान पर एक पूर्णतया सुसज्जित बड़ा सा बंगला लिया जा सकता है टेलीफोन, बिजली, के बिल के अलग-अलग खर्च के स्थान पर बचे धन से कार के मेंटेनेंस का खर्च निकल सकता है। इस प्रकार से उतने ही बजट में अधिक उच्च जीवन शैली के साथ जीवन यापन किया जा सकता है।
भावनात्मक सहयोग
किसी विपत्ति के समय, परिवार के किसी सदस्य के गंभीर रूप से बीमार होने पर, पूरे परिवार के सहयोग से आसानी से पार पाया जा सकता है। जीवन के सभी कष्ट सब के सहयोग से बिना किसी को विचलित किये दूर हो जाते हैं।कभी भी आर्थिक समस्या या रोजगार चले जाने की समस्या उत्पन्न नहीं होती, क्योंकि एक सदस्य की अनुपस्थिति में अन्य परिजन कारोबार को देख लेते हैं। चरित्र निर्माण में सहयोग:- संयुक्त परिवार में सभी सदस्य एक-दूसरे के आचार व्यवहार पर निरंतर निगरानी बनाए रखते हैं। किसी की अवांछनीय गतिविधि पर अंकुश लगा रहता है। अर्थात प्रत्येक सदस्य चरित्रवान बना रहता है। किसी समस्या के समय सभी परिजन उसका साथ देते हैं और सामूहिक दबाव भी पड़ता है। कोई भी सदस्य असामाजिक कार्य नहीं कर पाता। बुजुर्गों के भय के कारण शराब, जुआ या अन्य कोई नशा जैसी बुराइयों से बचा रहता है  उपरोक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि संयुक्त परिवार की अपनी गरिमा एवं अपना ही महत्व होता है। (विनायक फीचर्स)

यूपी-बिहार, जम्मू-कश्मीर समेत 14 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

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मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर समेत 14 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। गुजरात में मूसलाधार बारिश के बाद 18 जिलों में बाढ़ का कहर है। मौसम विभाग के मुताबिक गुजरात के लिए रेड अलर्ट है। पीएम मोदी ने मदद का भरोसा दिलाया है। जानिए आपके प्रदेश में मौसम का हाल

मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुजरात, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम राजस्थान, केरल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, झारखंड और जम्मू-कश्मीर समेत 14 राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आस-पास के इलाकों में बुधवार देर रात से ही बारिश हो रही है। बरसात के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के भी कई जिलों में बारिश का पूर्वानुमान जाहिर किया है। बारिश के अलावा गुजरात में बाढ़ के कारण लाखों लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। बारिश और बाढ़ जनित हादसों में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। गुजरात के कई जिलों में सेना तैनात करने की नौबत आ गई है। 10 से अधिक ट्रेनों को रद्द करना पड़ा है।

रामबन में बच्ची का मिला शव
जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में बुधवार को छह साल की बच्ची शाजिया बानो का शव मिला। बच्ची का शव उसके डूंगर धंदला गांव से तीन किमी नीचे बरामद किया गया। इससे बादल फटने की घटना में मृतकों की संख्या तीन हो गई, जबकि शेष चार लोगों की तलाश के लिए अभियान जारी है।

गंगा खतरे के निशान के पार, स्कूल बंद
बिहार के पटना में गंगा के जलस्तर के खतरे के निशान के पार पहुंचने के चलते ग्रामीण इलाकों में 76 सरकारी स्कूलों को 31 अगस्त तक के लिए बंद कर दिया गया है। यह फैसला छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।

मूसलाधार बारिश के बीच प्रधानमंत्री के गृह राज्य का हाल
गुजरात के 18 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में से 8,400 लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से फोन पर बातकर स्थिति का जायजा लिया और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में अहमदाबाद, वडोदरा, जूनागढ़ समेत कई जिलों में बुधवार को भी भारी बारिश हुई। अधिकारी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सेना, भारतीय वायुसेना और भारतीय तटरक्षक बल के साथ मिलकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य चला रहे हैं।

बुधवार को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के कारण दीवारें ढह जाने और पानी में डूबने जैसी घटनाओं में कुल नौ लोगों की मौत हो गई। मृतकों की संख्या 19 तक पहुंच गई है। सोमवार और मंगलवार को दो दिन में करीब 18,000 लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। द्वारका जिले की खंभालिया तालुका में 454 मिलीमीटर (मिमी) वर्षा हुई। इसके बाद जामनगर में 387 मिमी और जामनगर की जामजोधपुर तालुका में 329 मिमी बारिश हुई। राज्य की 251 तालुकाओं में से 13 में 200 मिमी से अधिक और 39 में 100 मिमी से अधिक बारिश हुई। राज्य में 137 जलाशय, झीलें तथा 24 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ आ गई है।

पांच जिलों में सेना तैनात, कई ट्रेनें रद्द
राजकोट, आणंद, मोरबी, खेड़ा, वडोदरा और द्वारका में सेना को तैनात किया गया है। अहमदाबाद, राजकोट, बोटाद, आणंद, खेड़ा, महिसागर, कराच और मोरबी में प्राइमरी-सेकंडरी स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी कर दी गई है। पश्चिम रेलवे ने बताया कि बारिश के कारण सड़कें और रेलवे लाइन जलमग्न हो गईं जिससे यातायात और रेलगाड़ियों की आवाजाही भी बाधित हुई। मुंबई जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस समेत आठ ट्रेनें रद्द कर दी गईं और 10 अन्य ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द कर दी गईं।

Jaipur News: गौमाता की रक्षा के लिए राज्य सरकार का बड़ा कदम

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Jaipur News: अब राजस्थान सरकार गोपालकों को भी ब्याज मुक्त ऋण देगी. सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने ऋण योजना के पोर्टल को लॉन्च किया. इस योजना का उद्देश्य यह है कि गोवंश के लिए गौ पालक जरूरी उपकरण खरीद सके.आखिर कैसे मिल पाएगा गोपालकों को ऋण, चलिए बताते हैं.राजस्थान की भजनलाल सरकार ने गौ माता के लिए योजना शुरू की है.अब गोपालकों को गौ माता के रखरखाव के लिए सरकार से ऋण मिल पाएगा. इस ऋण पर गोपालकों को ब्याज भी नहीं देना होगा.राज्य सरकार 1 लाख तक का अल्पकालीन ऋण एक साल के लिए देगी. सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने इस पोर्टल को लॉन्च किया. सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड ऋण के नाम से ये योजना जानी जाएगी.

आवेदक की पात्रता

आवेदक राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्र में निवास होना चाहिए. आवेदक परिवार गोपालन (गाय,भैंस) का कार्य करता हो. एक गोपालक परिवार से एक सदस्य को ऋण मिल सकेगा. आवेदक द्वारा दुग्ध का बेचान डेयरी सहकारी समिति को किया जाना अनिवार्य है.आवेदक द्वारा पूर्व में दो से अधिक ऋण नहीं ले रखें हो. इसके लिए जन आधार,आधार कार्ड की प्रति, पासपोर्ट साईज फोटो,प्राथमिक डेयरी समिति से निर्धारित प्रारूप में अनुशंषा पत्र होना जरूरी होगा. प्राथमिक डेयरी समिति द्वारा जिस बैंक खाते में दुग्ध का भुगतान किया जाता है,उस खाते की पासबुक की प्रति भी देनी होगी.

कैसे और कहां करें आवेदन

ऋण के लिए गोपालक ऑनलाइन आवेदन कर सकते है. क्षेत्र की पैक्स के व्यवस्थापक द्वारा दस्तावेजों की पूर्ति और सूचनाएं चाहे जाने पर व्यवस्थापक से सम्पर्क करे. ऋण स्वीकृत होने पर केन्द्रीय सहकारी बैंक की शाखा में खाता खुलवाकर आवश्यक दस्तावेज निर्धारित राशि के नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पत्रो पर निष्पादित करने होंगे. ब्याज मुक्त ऋण का लाभ लेने के लिए एक वर्ष या उससे पहले सम्पूर्ण ऋण को चुकाना जरूरी होगा. यदि समय पर ऋण नहीं चुकाया तो 10.25 प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज और 2 प्रतिशत दण्डनीय ब्याज उस गोपालक को देना होगा.

कृषि अनुसंधान संस्थान 1 एकड़ भूमि में “मातृ वन” स्थापित करेगा

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और मंत्रालय के अधिकारी कल नई दिल्ली के पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान परिसर में पौधारोपण करेंगे

मंत्रालय भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान परिसर में लगभग 1 एकड़ भूमि में “मातृ वन” स्थापित करेगा

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत 800 से अधिक संस्थानों के भाग लेने की संभावना है और इस कार्यक्रम के दौरान 3000-4000 पौधे लगाए जाएंगे

New Delhi ( National Desk )  नरेन्द्र मोदी ने 5 जून 2024 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वैश्विक अभियान #एक_पेड़_मां_के_नाम #प्लांट4मदर की शुरूआत की थी।   वैश्विक अभियान के हिस्से के रूप में, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बताया कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि सितंबर 2024 तक देश भर में 80 करोड़ पौधे और मार्च 2025 तक 140 करोड़ पौधे लगाए जाएं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 20 जून, 2024 को दिल्ली के असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में वृक्षारोपण गतिविधि शुरू की, जिसमें लोगों ने अपनी मां के सम्मान में पौधे लगाए।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय इस अभियान के एक भाग के रूप में,  29 अगस्त 2024 को भारत सरकार के माननीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की गरिमामय उपस्थिति में #एक_पेड़_माँ_के_नाम #प्लांट4मदर अभियान का आयोजन कर रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत, मंत्रालय भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) परिसर में लगभग 1 एकड़ भूमि में “मातृ वन” स्थापित करेगा जहां केंद्रीय कृषि मंत्री और मंत्रालय के लगभग 200 अधिकारी/कर्मचारी पौधे लगाएंगे। वृक्षारोपण कार्यक्रम 29 अगस्त 2024 को सुबह 10:00 बजे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) परिसर, पूसा, नई दिल्ली में शुरू होगा। देश में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीए एंड  एफडब्ल्यू), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) संस्थानों, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (सीएयू), कृषि विकास केंद्र (केवीके) और दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (एसएयू) के सभी अधीनस्थ कार्यालयों को भी उसी दिन और समय पर अपने-अपने स्थानों पर इसी तरह का वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सूचित किया गया है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत 800 से अधिक संस्थानों के भाग लेने की संभावना है और इस कार्यक्रम के दौरान 3000-4000 पौधे लगाए जाएंगे।

#एक_पेड़_माँके_नाम #प्लांट4मदर अभियान एक जन आंदोलन है और लोग पौधे लगाकर अपनी माँ और धरती माँ के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए भाग ले रहे हैं।  पौधे लगाने से सरकार द्वारा शुरू किए गए मिशन लाइफ यानी पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली का उद्देश्य भी पूरा होता है जो पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवन शैली का एक जन आंदोलन है। कृषि में, टिकाऊ खेती हासिल करने के लिए पौधे लगाना एक महत्वपूर्ण कदम है। पेड़ मिट्टी, पानी की गुणवत्ता में सुधार और जैव विविधता को बढ़ाकर कृषि उत्पादकता में सुधार करने में सहायता करते हैं। पेड़ किसानों को लकड़ी और गैर-लकड़ी उत्पादों से अतिरिक्त आय का स्रोत भी प्रदान करते हैं। इस अभियान में भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण को रोकने और समाप्त करने की अपार संभावनाएं हैं।

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नई दिल्ली में पशु संक्रामक रोग प्राथमिकता कार्यशाला का उद्घाटन

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पशुपालन आयुक्त ने रोग प्राथमिकता प्रक्रिया में जैव विविधता हानि को एक महत्वपूर्ण मानदंड के रूप में शामिल करने की पैरवी की

New  Delhi – By National Desk  भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अधीन पशुपालन और डेयरी विभाग के तहत संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) की ओर से आयोजित पशु संक्रामक रोग प्राथमिकता पर तीन दिवसीय कार्यशाला आज नई दिल्ली में शुरू हुई।

इस कार्यशाला का उद्घाटन पशुपालन और डेयरी विभाग के पशुपालन आयुक्त (एएचसी) डॉ. अभिजीत मित्रा ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात को रेखांकित किया कि रोग को प्राथमिकता देने की प्रक्रिया में आर्थिक हानि एक महत्वपूर्ण मानदंड है। डॉ. मित्रा ने आगे जोर दिया कि संक्रामक रोगों के आर्थिक प्रभाव, विशेष रूप से पशुधन, मुर्गीपालन और वन्यजीवों को प्रभावित करने वाले रोगों को, रोकथाम व नियंत्रण प्रयासों के लिए किन रोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, यह निर्धारित करते समय नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। डॉ. मित्रा ने रेखांकित किया कि इन रोगों से संबंधित वित्तीय बोझ- जिसमें उत्पादकता में कमी से लेकर उपचार और नियंत्रण उपायों पर होने वाली लागत शामिल है- न केवल कृषि क्षेत्र के लिए बल्कि, समग्र रूप से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी दूरगामी परिणाम उत्पन्न करता है।

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पशुपालन आयुक्त ने आर्थिक हानि के अलावा रोग प्राथमिकता प्रक्रिया में जैव विविधता के नुकसान को एक महत्वपूर्ण मानदंड के रूप में शामिल करने की पैरवी की। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि जैव विविधता की हानि, जो आम तौर पर वन्यजीवों व अन्य प्रजातियों में संक्रामक रोगों के फैलने के कारण होती है, के इकोसिस्टम और उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता प्रक्रिया अधिक समग्र हो जाती है। साथ ही, पशु स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्थिरता और मानव कल्याण के बीच आपसी निर्भरता को मान्यता प्रदान की जाती है।

एफएओ इंडिया के महामारी विज्ञान, एएमआर और जूनोसिस (एक रोग जो कशेरूक पशुओं से दूसरे में फैलता है) विशेषज्ञ डॉ. राज कुमार सिंह ने पशु संक्रामक रोग प्राथमिकताकरण की प्रक्रिया और इसमें शामिल विभिन्न समितियों की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी।

इस कार्यशाला में डीएएचडी, आईसीएआर, राज्य पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों, राज्य पशुपालन विभागों, यूएसएआईडी, जेपीआईजीओ और एफएओ इंडिया की ईसीटीएडी टीम के विशेषज्ञों के रूप में विविध समूह एक मंच पर साथ आया।

इस एआईडीपी कार्यशाला का प्राथमिक लक्ष्य प्रमुख पशु संक्रामक रोगों का व्यापक मानचित्रण, पहचान और प्राथमिकता निर्धारण करना है। यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण पशु संक्रामक रोगों के मानचित्रण के साथ शुरू हुई, जिसमें उनके आर्थिक व रोग संबंधी प्रभावों का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ परामर्श और द्वितीयक अनुसंधान का उपयोग किया गया। इसके बाद एक गहन पहचान प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें विशेषज्ञों ने व्यापकता, आर्थिक प्रभाव और पशु व मनुष्यों, दोनों के लिए स्वास्थ्य से संबंधित जैसे कारकों के आधार पर रोगों का मूल्यांकन किया।

अगले दो दिनों के दौरान विशेष रूप से चिंताजनक रोगों, जिनमें पशुधन, मुर्गीपालन और वन्यजीव जैसे स्थलीय जानवरों को प्रभावित करने वाले रोगों, साथ ही मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करने की क्षमता रखने वाले जूनोटिक रोग शामिल हैं, को उनके महत्व के अनुरूप क्रमबद्ध किया जाएगा और प्राथमिकता दी जाएगी।

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यह कार्यशाला न केवल निगरानी प्रयासों को सुदृढ़ करेगी बल्कि, अधिक प्रभावी रोग नियंत्रण कार्यक्रमों के डिजाइन और उनके कार्यान्वयन के बारे में भी जानकारी देगी। अर्थव्यवस्था और जैव विविधता के लिए सबसे बड़ा खतरा उत्पन्न करने वाले रोगों को प्राथमिकता देकर राष्ट्रीय थिंकटैंक रणनीति तैयार कर सकता है और संसाधनों को समान रूप से केंद्रित कर सकता है, जिससे भारत में अधिक टिकाऊ और लचीली पशु स्वास्थ्य प्रणाली विकसित हो सके।

प्रधानमंत्री ने 44वें प्रगति संवाद की अध्यक्षता की

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नई दिल्ली – ( नेशनल डेस्क ) प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रगति के 44वें संस्करण की बैठक की अध्यक्षता की। प्रगति केन्‍द्र और राज्य सरकारों की भागीदारी वाली सक्रिय शासन व्यवस्था और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए आईसीटी आधारित बहु-मॉडल प्लेटफॉर्म है। यह तीसरे कार्यकाल की पहली बैठक थी।

इस बैठक में सात महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की गई, जिसमें सड़क संपर्क से संबंधित दो परियोजनाएं, दो रेल परियोजनाएं और कोयला, बिजली एवं जल संसाधन क्षेत्र की एक-एक परियोजना शामिल थी। इन परियोजनाओं की कुल लागत 76,500 करोड़ रुपये से अधिक है और ये 11 राज्यों एवं केन्‍द्र शासित प्रदेशों अर्थात उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, ओडिशा, गोवा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और दिल्ली से संबंधित हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केन्‍द्र या राज्य स्तर पर सरकार के प्रत्येक अधिकारी को इस बात के प्रति संवेदनशील होना चाहिए कि परियोजनाओं में देरी से न केवल लागत बढ़ती है बल्कि जनता को परियोजना के अपेक्षित लाभ से भी वंचित होना पड़ता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान परियोजना विकास के दौरान पर्यावरण की सुरक्षा में मदद कर सकता है।

बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री ने अमृत 2.0 और जल जीवन मिशन से संबंधित सार्वजनिक शिकायतों की भी समीक्षा की। ये परियोजनाएं अन्य बातों के साथ-साथ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्याओं का समाधान करती हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पानी एक बुनियादी मानवीय जरूरत है और राज्य सरकारों को जिला स्तर के साथ-साथ राज्य स्तर पर शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निपटान सुनिश्चित करना चाहिए। जल जीवन परियोजनाओं का पर्याप्त संचालन और रखरखाव तंत्र इसकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण है और प्रधानमंत्री ने जहां संभव हो वहां महिला स्वयं सहायता समूहों को शामिल करने और संचालन एवं रखरखाव कार्यों में युवाओं को कुशल बनाने का सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने जिला स्तर पर जल संसाधन सर्वेक्षण कराने की बात दोहराई और स्रोत स्थिरता पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने मुख्य सचिवों को अमृत 2.0 के तहत कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने की सलाह दी और कहा कि राज्यों को शहरों की विकास क्षमता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरों के लिए पेयजल योजनाएं बनाते समय, शहर से लगे क्षेत्रों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए क्योंकि समय के साथ ये क्षेत्र भी शहर की सीमा में शामिल हो जाते हैं। देश में तेजी से हो रहे शहरीकरण को देखते हुए शहरी शासन, व्यापक शहरी नियोजन, शहरी परिवहन नियोजन और नगर निगम वित्त में सुधार समय की महत्वपूर्ण मांग है। उन्होंने कहा कि शहरों की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना जैसी पहलों का लाभ उठाने की ज़रूरत है। प्रधानमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि शहरीकरण और पेयजल के इन पहलुओं में से कई पर मुख्य सचिवों के सम्मेलन में चर्चा की गई थी और दी गई प्रतिबद्धताओं की समीक्षा मुख्य सचिवों द्वारा स्वयं की जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत सरकार के मुख्य सचिवों और सचिवों से मिशन अमृत सरोवर कार्यक्रम पर काम जारी रखने को कहा। उन्होंने कहा कि अमृत सरोवरों के जलग्रहण क्षेत्र को साफ रखा जाना चाहिए और आवश्यकतानुसार ग्राम समिति की भागीदारी से इन जल निकायों की सफाई की जानी चाहिए।

प्रगति बैठकों के 44वें संस्करण तक, 18.12 लाख करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 355 परियोजनाओं की समीक्षा की गई है।

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Bhilwara News: गाय की पूंछ काटने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार

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भीलवाड़ा शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में जन्माष्टमी से एक दिन पहले हनुमान मंदिर के बाहर गाय की पूंछ काटने की घटना में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। पुलिस ने इस वारदात को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी के अलावा चार संदिग्धों को भी हिरासत में लिया है। इन संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है।

बता दें कि रविवार (25 अगस्त) को गांधीसागर तालाब के पास वीर हनुमान मंदिर के परिसर में गाय की कटी पूंछ मिलने की सूचना से पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी। इस घटना से धार्मिक भावनाएं भड़काने और साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की आशंका बढ़ गई थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और पुलिस ने तुरंत हरकत में आकर मामले की जांच शुरू कर दी। इसको लेकर शहर में तनाव का माहौल बन गया था। हिंदू संगठनों की ओर से मामले में आरोपियों को पकड़ कर कार्रवाई करने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन हुआ। इसमें लाठी चार्ज तक किया गया। इस दौरान प्रदर्शन कर तोड़फोड़ करने के मामले में दो दर्जन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।

जिला पुलिस अधीक्षक राजन दुष्यंत ने बुधवार देर शाम मामले का खुलासा करते हुए कहा कि इस वारदात के मुख्य आरोपी हुसैन कॉलोनी भीलवाड़ा निवासी बबलू शाह पुत्र निसार मोहम्मद शाह फकीर को आज गिरफ्तार कर लिया गया है। इसी मामले में चार अन्य को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। एसपी ने बताया कि पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में आरोपी ने घटना को अंजाम देने की बात कबूल कर ली है। पुलिस ने आरोपी के पास से घटना के समय पहने गए कपड़े और वारदात में इस्तेमाल किए गए चाकू को भी बरामद कर लिया है। जिला पुलिस अधीक्षक राजन दुष्यंत ने कहा कि इस मामले की जांच को बेहद गंभीरता से लिया गया। क्योंकि यह एक संवेदनशील मामला था। उन्होंने बताया कि सभी टीमें सक्रियता से काम कर रही हैं और हम सुनिश्चित करेंगे कि इस मामले में दोषी किसी भी प्रकार से बच न पाएं। उन्होंने बताया कि आगे की जांच जारी है और पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि इस घटना के पीछे छिपे हर मंसूबे को बेनकाब किया जाए।

जिला पुलिस अधीक्षक राजन दुष्यंत (आईपीएस) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विमल सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया। टीम में वृत्ताधिकारी अशोक जोशी, श्यामसुंदर, और सुश्री मेघा गोयल सहित शहर के विभिन्न थानों के अधिकारी और साईबर सेल के सदस्य शामिल थे। एसपी दुष्यंत ने बताया कि मामले के खुलासे के लिए गठित टीमों ने सबसे पहले घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और घटना स्थल के आसपास लगे 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के पिछले दो दिनों के फुटेज का विश्लेषण किया। इसके अलावा पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों के मोबाइल बीटीएस डेटा को भी खंगाला ताकि घटना के समय के संदिग्धों की आवाजाही का पता लगाया जा सके।

घटना स्थल और उसके आस-पास के क्षेत्रों में गोवंश को नुकसान पहुंचाने वाले पहले से ही सूचीबद्ध अपराधियों की भी पहचान की गई। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले संदिग्धों की पहचान के लिए डोर-टू-डोर सर्वे करवाया गया। इसके साथ ही पारंपरिक पुलिसिंग के तहत मुखबिरों से भी सूचना संकलित की गई। पुलिस ने चार अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया है और उनकी भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन संदिग्धों का इस अपराध में क्या योगदान था और क्या इस घटना के पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र था।

हेलो बिटिया के समर्थन में नामी हस्तियां

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मुंबई। एआईएम ट्रस्ट की नई पहल “हेलो बिटिया” कल इसकी बैठक मुंबई के सी प्रिंसेस व्यू होटल में हुआ जिस मौके पर हेलो बिटिया को सपोर्ट करने के लिए कई हस्तियां सामने आई और अपना महत्वपूर्ण सुझाव साझा किया। इस अवसर पर हेलो बिटिया की संपादक प्रीति उपाध्याय ने सबका स्वागत करते हुए हेलो बिटिया के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार हम सब मिलकर अपने छोटे-छोटे प्रयासों से एक और पड़ा बदलाव ला सकते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि विभिन्न सरकारी आकड़ों जैसे नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे नेशनल सैंपल सर्वे आदि के अनुसार लगभग 50% लड़कियां एनीमिक है, कई राज्यों में जनगणना के अनुसार बाल विवाह से प्रभावित है। आर्थिक गतिविधियों में मुख्य धारा से बाहर है जो भारत के विकास में नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है तथा असुरक्षित वातावरण के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में किशोरियों का ड्रॉप आउट रेट 30% से ज्यादा है। जिससे उनका स्वांगीर विकास प्रभावित है इसके लिए हम सभी को अपनी भूमिका निभानी होगी।

उसी अवसर पर लेखक कुमार मंजुल डायरेक्टर संजीव कुमार राजपूत, सूर्यकांत त्यागी प्रोड्यूसर विजय, सोशल वर्कर मयंक शेखर, पत्रकार अभिषेक, बॉलीवुड के अभिनेता शाजी चौधरी, जुबीन अभिनेत्री रोशनी रस्तोगी, मोनिका रस्तोगी राष्ट्रीय स्तर की बास्केटबॉल एवं स्वर्ण पदक विजेता निशा गुप्ता सोशल वर्कर चंद्रशेखर, चार्ल्स राव, प्रफुल्ल पवार कॉर्पोरेट प्रोफेशनल अशोक शर्मा फिटनेस एक्सपर्ट एंड न्यूट्रीशनिस्ट दीपा सप्रे जैसे नामी लोग अपना विचार व्यक्त किया तथा हेलो बिटिया को समर्थन दिया।

भाजपा महाराष्ट्र के आध्यात्म प्रकोष्ठ में सरचिटणीस राकेश आचार्या ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की दीं शुभकामनाएं

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भाजपा महाराष्ट्र के आध्यात्म प्रकोष्ठ में सरचिटणीस राकेश आचार्या ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की दीं शुभकामनाएं

भाजपा महाराष्ट्र के आध्यात्म प्रकोष्ठ में सरचिटणीस राकेश आचार्या एक उदार व्यक्ति हैं जो समाजसेवी भी हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर उन्होंने अपने कार्यालय में पूजा रखी और कहा कि मैं भाजपा महाराष्ट्र की ओर से सभी को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देता हूँ। आप जितना भी दुख हो उसे भूलकर भगवान की शरण मे चले जाएं, अपने आप को भगवान के प्रति समर्पित कर दें देखें वो दुःख नष्ट हो जाएगा। ये पूरी धरती महादेव ने बनाई है। मैं भाजपा से जुड़ा हूँ, यह एक ऐसी पार्टी है जो सनातन धर्म को आगे ला रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सनातन धर्म अर्थात मानव धर्म को आगे बढ़ाने का प्रयत्न कर रहे हैं। हम उनके प्रयत्न को सपोर्ट करते हैं, इसी दिशा में मैं भी प्रयास कर रहा हूँ। मैं एक सोशल वर्कर के रूप में हमेशा काम करता रहूंगा। जरूरतमंद लोगों की मदद करूंगा।

राकेश आचार्या ने कहा कि आज जन्माष्टमी का पर्व है। आज के दिन भगवान विष्णु कृष्णा का अवतार लेकर धरती पर आए थे। श्रीमद्भागवत में कृष्ण भगवान की लीलाओं का वर्णन है और श्रीमद्भगवदगीता में कुल 18 अध्याय हैं जिन्हें पढ़कर आप बहुत कुछ सीख सकते हैं, उनके अनुसार कर्म करके, उसके अनुसार अपना जीवन गुजारकर कभी दुखी नहीं होंगे, हमेशा सफल और संतुष्ट रहेंगे।

आध्यात्मिक विचार रखने वाले और लोगों को अध्यात्म से जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रहे राकेश आचार्या सनातन धर्म की महत्ता के बारे में लोगों को लगातार बता रहे हैं।

इस शुभ अवसर पर निर्देशक पी चंद्रकांत भी उपस्थित थे जो फ़िल्म इंडस्ट्री में काफी अनुभव रखते हैं। वह राकेश आचार्या के प्रोडक्शन हाउस राज रागिनी प्रोडक्शंस के सीईओ हैं और वह इस बैनर तले जल्द ही एक फ़िल्म का निर्देशन करने जा रहे हैं।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर गौशाला में अध्यक्ष ने की गाय की पूजा

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यूपी के कौशाम्बी जिले के नगर पालिका मंझनपुर में सोमवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाया गया, लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण की विधि विधान से पूजा अर्चना किए। नगर पालिका अध्यक्ष ने कान्हा गौशाला में गौवंशो की पूजा अर्चना कर जन्माष्टमी का पर्व मनाया। जन्माष्टमी के पर्व पर भगवान श्री कृष्ण से जुड़े होने के कारण इस दिन गौ-माता की भी विशेष पूजा अर्चना किए जाने की परंपरा रही है।
कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर सोमवार को गौ-माता की पूजा हुई। तथा लोगों ने गौ रक्षा का संकल्प लिया। नगर पालिका परिषद मंझनपुर स्थित कान्हा गौशाला में गौ पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष वीरेंद्र फौजी ने विधि विधान से पूजा अर्चना करने के बाद गौं माता के फल आदि खिलाया, इस दौरान बरसात शुरू हो गई। बरसात होने के बावजूद गौ-माता की पूजा अर्चना का कार्यक्रम सम्पंन कराया गया।

इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष बीरेन्द्र फौजी ने कहा कि गौ जीवन जीने का एक महत्वपूर्ण आधार है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी गौ-पालन व गौ चारण किया था। गौ सेवा के पीछे गौ की उपयोगिता एवं भावना प्रदर्शित होती है। उन्होने कहा कि गौ सेवा का फल हमेशा लाभकारी होता है। गौ सेवा सदैव प्राणदायी है। गाय स्वास्थ्य की रक्षा के साथ-साथ आजीविका का भी माध्यम है। ऐसे में माता कहे जाने वाली गायों का खुलेआम वध देश एवं मानव जाति के लिए दुर्भाग्यजनक है।

इस मौके पर गोशाला की गायों को स्नान कराकर विधि विधान के साथ पूजन किया गया। साथ ही लड्डू और फल खिलाया। इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष बीरेन्द्र फौजी ने कहा कि गौ-शाला में जो गाय है, उनको चारा पानी में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, अगर गायों के रख रखाव में जिम्मेदार लापरवाही करेगे, तो उनके खिलाफ काररवाई किया जायेगा। इस लिए गायों की सेवा करे। इस मौके पर विजय तिवारी रिंवूâ मौर्य अंशुल केशरवानी निरंजन चौधरी, ज्ञानेन्द्र तिवारी आदि मौजूद रहे।