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दीपेंद्र कुमार शर्मा की ‘दिल में उतरने लगे हो’ म्यूजिक वीडियो में विशाल पांडेय और सोना मेधी का रोमांस

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मुंबई। डीकेएस प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले एक बेहद ही रोमांटिक म्यूजिक वीडियो सॉन्ग ‘दिल में उतरने लगे हो’ रामजी गुलाटी यूट्यूब चैनल पर लॉन्च हुआ है। इस म्यूजिक वीडियो में बिग बॉस ओटीटी 3 फेम विशाल पांडेय अभिनय कर रहे हैं जो कि एक यूट्यूबर और इंफ्लुएंसर भी हैं। वीडियो में उनके साथ सिंगर और अभिनेत्री सोना मेधी हैं। म्यूजिक वीडियो के निर्माता दीपेंद्र कुमार शर्मा और निर्देशक रामजी गुलाटी हैं। गाने के बोल राजेश निषाद ने लिखे हैं और गाने को अपनी सुंदर आवाज से सजाया है अभय जोधपुरकर और सोना मेधी ने। इस गाने को संगीत से सजाया है संगीतकार आशिक इलाही ने।

डीकेएस प्रोडक्शंस हॉउस के ऑनर दीपेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि यह म्यूजिक वीडियो बतौर निर्माता उनकी पहली शुरुआत है और म्यूजिक वीडियो लॉन्च होते ही इसे जनता का अच्छा सहयोग प्राप्त हो रहा है। दीपेंद्र कुमार शर्मा जयपुर के रहने वाले हैं और पेशे से फैशन डिजाइनर हैं। अक्षय कुमार अभिनीत ‘पृथ्वीराज’ फिल्म में उन्होंने असिस्टेंट डिजाइनर के रूप में दो सालों तक काम किया है। कॉमेडी बचाओ शो में वह काम कर चुके हैं और कई फेमस सेलिब्रिटी जैसे श्रीदेवी, सान्या मल्होत्रा और प्रियांक शर्मा के पर्सनल स्टाइलिस्ट के रूप में वह काम कर चुके हैं। वेब सीरीज सीक्रेट गेम्स, फिल्म ‘फोन भूत’, स्पेशल ओप्स वन पॉइंट फाइव और प्रोडक्शन हाउस फ्राइडे फिल्म वर्क और यशराज फ़िल्म के साथ काम कर चुके हैं।
गीत के बारे में बात करते हुए दीपेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि यह बेहद रोमांटिक सॉन्ग है जो लोगों के दिलों तक आसानी से पहुंच जाएगा। आगामी कुछ म्यूजिक एलबम पर वो काम कर रहे हैं। एक अभिनेता के बजाय निर्माता के रूप में उन्हें इंडस्ट्री से जुड़ने से कई फील्ड्स की जानकारियां और अनुभव प्राप्त हुआ है जैसे मार्केटिंग, फोटोग्राफी, वितरण आदि। जल्द ही वह वेबसीरीज, शॉर्ट फिल्म और फिल्म निर्माण करना चाहते हैं और आगामी समय में अपनी कंपनी डीकेएस को ऊंचाइयों तक लेकर जाना चाहते हैं। अपने प्रोडक्शन हॉउस के द्वारा नए टैलेंट को भी मौका देना चाहते हैं। वह अपने साथ नए लोगों को सेलिब्रिटी के साथ काम करने का मौका देकर उनकी प्रतिभाओं को जनता तक पहुँचाना चाहते हैं।
आसाम की रहने वाली इस म्यूजिक वीडियो की गायिका और अभिनेत्री सोना मेधी ने बताया कि वह एक गायिका के रूप में आगे काम करना चाहती हैं। पिछले 8 वर्ष से वह मुंबई में हैं और एक कंपनी में एचआर के रूप में कार्यरत हैं। उनकी पसंदीदा गायिका सुनिधि, श्रेया घोषाल और पलक मुछाल है जिन्हें देखकर सुनकर वह सिंगिंग के लिए प्रेरित हुई हैं। वह आगे सिंगिंग में अपना कैरियर बनाना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि गाने की शूटिंग दुबई में हुई है जिसमें उनके टीम ने भरपूर सहयोग दिया।

पुलिस की सख्ती के बावजूद गौ तस्करों के हौसले बुलंद, गौ रक्षकों ने 16 गायों को मुक्त कराया

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गौ तस्करी और गौकशी जैसे मामलों पर लगातार अंकुश लगाने के लिए पुलिस प्रशासन और गौ सेवक लगातार काम कर रहे हैं। आज तड़के गौ सेवकों को सूचना मिली कि किसी ट्रक में गौ तस्करी को अंजाम दिया जाने वाला है। सूचना पर गौ सेवकों ने तस्करी करने वाले ट्रक का पीछा करना शुरू किया और साथ ही पुलिस कंट्रोल रूम पर भी सूचना दी ताकि पुलिस की सहायता भी मिल सके। अलवर जिले के अकबरपुर पुलिस थाने के ASI प्रकाश चन्द्र ने जानकारी देते हुए बताया कि कंट्रोल रूम से सूचना मिली थी कि नारायणपुर की तरफ से एक ट्रक में गायें भरकर अलवर शहर की तरफ लाया जा रहा है। जिस पर पुलिस ने नटनी का बारा पर लगाए गए पुलिस बैरिकेड्स पर तत्काल प्रभाव से पुलिस जाब्ता बढ़ाया  लेकिन गौ तस्कर बैरिकेड्स तोड़कर अलवर शहर की तरफ बढ़ने लगे। इसी बीच गौ सेवक लगातार तस्करों के पीछा कर रहे थे। इस दौरान ट्रक में सवार तस्करों ने गौ सेवको पर तीन राउंड फायरिंग की और ढाई पेढ़ी के समीप ट्रक छोड़कर फरार हो गए। गौ सेवकों ने पुलिस की सहायता से ट्रक के अंदर फंसी गायों को बाहर निकालने का काम किया। ट्रक में कुल 16 गायें थीं, जिनमें से तीन गायें मृत मिलीं। जिंदा गायों को अलवर के कांजी हाउस गौशाला में छोड़ा गया, वहीं मृत गायों का पोस्टमार्टम करवाने के बाद गायों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

वित्तीय अनियमितताओं पर एमबीए के छात्रों को राजीव सिंह से मिला ज्ञान

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सिरमौर आईआईएम के समारोह में राजीव सिंह का सम्मान

मुंबई। आईआईएम द्वारा आमंत्रित वित्तीय पत्रकारिता में महारत रखने वाले, फॉर्च्यून इंडिया पत्रिका के उप संपादक राजीव रंजन सिंह ने ‘आय प्रबंधन’ और वित्तीय अनियमितता में होने वाली हेराफेरी और धोखाधड़ी के मुद्दे पर एमबीए के छात्रों को आंकड़ों के आधार पर विशेष जानकारी दी। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) द्वारा हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में आयोजित इस समारोह में मौजूद छात्रों, प्रोफेसरों व अन्य गणमान्यों के होश फाख्ता हो गए। चूंकि राजीव सिंह ने कुछ ऐसे पहलुओं की जानकारी इस समारोह में साझा किया, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती।

गौरतलब है कि आईआईएम एक प्रतिष्ठित एमबीए संस्थान है। इस संस्था में आला दर्जे की आय प्रबंधन और वित्तीय अनियमितताओं से जुडी शिक्षा दी जाती है। वर्ष 2024 के वार्षिक समारोह में फॉर्च्यून इंडिया पत्रिका के उप संपादक राजीव रंजन सिंह को बतौर मुख्य व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया गया था। समारोह में अपने व्याख्यान के दौरान राजीव सिंह ने हेरा फेरी करने वाली कंपनियों की पोल खोल कर रख दी। उन्होंने कंपनियों द्वारा आंकड़ों में हेरा फेरी कर निवेशकों को गुमराह करने के तौर तरिके पर प्रकाश डाला और एनरॉन, लेहहमन ब्रदर्स और नेटफ्लिक्स अवर्ल्ड कॉम जैसी हेरा फेरी करने वाली कंपनियों के मकड़ जाल पर प्रकाश डाला। इस तरह उन्होंने एक के बाद एक धोखाधड़ी की परतें खोल कर रख दी। उन्होंने छात्रों को सिखाया कि हेरफेर किए गए डेटा और धोखाधड़ी के तरीकों को कैसे पकड़ा जा सकता है। राजीव रंजन सिंह एक वरिष्ठ वित्तीय पत्रकार हैं, जिन्हें वित्तीय पत्रकारिता में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में, वे फॉर्च्यून इंडिया पत्रिका के भारतीय संस्करण के लिए काम कर रहे हैं जो दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित वित्तीय पत्रिका है।

गुणों के अधिपति हैं भगवान गणेश

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(पवन कुमार वर्मा – विनायक फीचर्स)

सर्वप्रथम पूजा के अधिकारी भगवान गणेश की उपासना, आराधना एवं पूजा भारत के कोने-कोने में होती है। शैव मत के धर्मावलम्बी उन्हें भगवान शिव का पुत्र मानते हैं तो वैष्णव एवं शाक्त मतों के धर्मावलम्बी उनकी उपासना एवं आराधना लक्ष्मी के साथ करते हैं। गणेश का शाब्दिक अर्थ होता है गुणों अर्थात् समुदायों के अधिपति (अर्थात् गणपति)। पर व्यावहारिक रूप में भगवान गणेश को गुणों का अधिपति माना जाता है। वे बुद्धि, विवेक, ज्ञान, कौशल, बल एवं साहस के भी देवता माने जाते हैं। गणेशजी का स्वरूप उनके गुणों का ही प्रतिनिधित्व करता है। जैसे वह मूषक (चूहा) पर सवारी करते हैं। चूहे छुपकर अनाज खाकर मानव के खाद्य पदार्थों को क्षति पहुंचाते हैं और इस तरह राष्ट्र की समृद्धि को नुकसान पहुंचाते हैं। गणेश जी की मूषक सवारी का अर्थ यह हुआ कि राष्ट्र की समद्धि को क्षति पहुंचाने वालों पर हमारा पूरा नियंत्रण होना चाहिए। गणेश के कान बड़े होते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि हममें सबकी बातें सुनने का गुण होना चाहिए। गणेश जी को लम्बोदर कहा जाता है, इसका अर्थ यह है कि वे सबकी बात सुनते हैं और इन बातों को उदरस्थ कर जाते हैं, पर जो भी करते हैं अपने बुद्धि और विवेक से करते हैं। गणेश जी मस्तक पर चंद्रमा धारण करते हैं, इसका अर्थ यह है कि हमें किसी बात पर विचार करते समय ठंडे मस्तक से विचार करना चाहिए।

गणराज्य शब्द की उत्पत्ति भी गणेश के बहुत निकट है। पौराणिक संदर्भों के अनुसार उन्हें भगवान शिव के भक्तों का स्वामी माना गया है। गण (प्रजा) के स्वामी के रूप में उनका स्वरूप या आकृति आदर्श है। गणपति या गणेश का विशाल मस्तक उनके बुद्धिमान होने का प्रतीक है। वैसे भी हाथी को सबसे अधिक बुद्धिमान प्राणी माना गया है। गणेश जी का हाथी के समान मस्तक इस बात का प्रतीक है कि प्रजा के नायक को बुद्धिमान होना चाहिए। उनके विशाल कान इस तथ्य के प्रतीक हैं कि गणनायक को प्रत्येक बात की सूचना प्राप्त करने की कुशलता होना चाहिये। गणेश का स्वरूप चतुर्भुज है। वे एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे हाथ में मोदक, तीसरे हाथ में पुस्तक तथा चौथे हाथ में कमल का फूल धारण करते हैं। अब ये चार हाथ और उनमें धारण की गई वस्तुएं भी किसी गुणों का प्रतिनिधित्व करती हैं। त्रिशूल का अर्थ है कि वे रक्षक हैं मोदक का अर्थ है खाद्य साम्रगी, पुस्तक का अर्थ है ज्ञान तथा कमल पुष्प का अर्थ है कोमलता। इसका सीधा अर्थ यह है कि प्रजानायक या गुणनायक को रक्षक, खाद्य पदार्थों का दाता, ज्ञान देने वाला तथा कोमल हृदय का होना चाहिए।

उत्तर से लेकर दक्षिण तक तथा पूर्व से लेकर पश्चिम तक जिन गणेश जी की उपासना, आराधना एवं वंदना की जाती है तथा प्रत्येक शुभ एवं मंगल कार्य में सर्वप्रथम जिनकी पूजा की जाती है, उनकी उत्पत्ति, स्वरूप, गुण, धर्म एवं कर्म की अनेक गाथाएं भारतीय ग्रंथों में मिलती हैं। उन्हें शिव एवं पार्वती का पुत्र मानते हुए जहां कुछ विद्वान उन्हें द्रविड़ों का देवता मानते हैं, वहीं आर्यों के प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वेद एवं यजुर्वेद में भी उनकी वंदना की गई है। गणेश जी को गुणों का स्वामी माना जाता है, इसलिए उन्हें बुद्धि का दाता कहा जाता है। उनकी पत्नियों के नाम भी बुद्धि और सिद्धि कहे गए हैं। महाभारत को लिपिबद्ध करने के बारे में एक कथा है कि वेद व्यास ने इसे बोला तथा भगवान गणेश ने लिपिबद्ध किया। तब महाभारत के श्लोकों को समझने में बुद्धि ने ही अपने पति गणेश जी की सहायता की थी। गणेश जी के दो पुत्र भी माने जाते हैं, शुभ और लाभ। गणेश सिर्फ हिन्दुओं के ही देवता नहीं हैं। जैन धर्म में भी उनकी वंदना की गई है। बौद्ध तांत्रिकों के भी वे आराध्य देव हैं। भारत के बाहर नेपाल, तिब्बत, जावा, बाली, चीन तथा जपान में भी उनकी पूजा होती रही है।

गणेश जी के नाम भी अनेक हैं। पुराणों में उनके अनेक नाम मिलते हैं। गणेश सहस्त्र नाम से यह सिद्ध होता है कि उनके एक हजार नाम हैं। उनके प्रसिद्ध नामों में गणपति, वक्रतुण्ड, महाकाय, एकदन्त, गणदेवता, गणेश्वर, विनायक आदि मुख्य हैं। उनके एकदंत और गजानन होने के संबंध में पुराणों में अनेक कथाएं हैं। एक दंत होने की कथा इस प्रकार है कि एक बार परशुराम शिवजी से मिलने गए। दरवाजे पर गणेश रक्षक के रूप में बैठे थे। गणेश ने परशुराम को प्रवेश करने से रोका इस पर दोनों में विवाद हुआ और बात लड़ाई तक पहुंच गई। इस लड़ाई में परशुराम ने फरसे से प्रहार किया, जिसमें गणेश का एक दांत टूट गया। इस कारण उन्हें एकदंत कहा जाता है।

गजानन के बारे में स्कन्ध पुराण की एक कथा के अनुसार एक समय पार्वती ने शनि को बुलाया कि वह गणेश को देखने आए। शनि आए तो किन्तु वे सिर नीचे करके बैठे रहे। पार्वती ने पूछा कि मेरे पुत्र को आप क्यों नहीं देख रहे हैं। शनि ने कहा कि यदि मैं इस बच्चे को देखूंगा तो इसका सिर नष्ट हो जाएगा। यह कहकर शनि ने गणेश को देखा और गणेश का सिर जलकर भस्म हो गया। इस पर ब्रह्मा ने कहा कि सबसे पहले जो प्राणी मिले उसका सिर काटकर गणेश के सिर के स्थान पर लगा दिया जाए। पार्वती को सबसे पहले हाथी मिला, जिसका सिर उन्होंने काट कर गणेश के सिर पर रख दिया। इस कारण ये गजानन कहलाए।

एक दूसरी कथा के अनुसार पार्वती एक बार स्नान करने के लिए गई और अपने घर के दरवाजे पर गणेश को रक्षक के रूप में बैठा गई। इसी बीच शिवजी आए और उन्होंने घर में प्रवेश करना चाहा। गणेश ने उन्हें प्रवेश करने से रोका। इस पर क्रोध में आकर शिवजी ने गणेश जी का सिर काट दिया। जब पार्वती को पता लगा। तब शिवजी ने हाथी का सिर काटकर गणेश के सिर के स्थान पर जोड़़ दिया।

उनकी सर्वप्रथम पूजा होने के संबंध में भी कथाएं मिलती हैं। इस बारे में प्रचलित एक कथा यह है कि एक बार देवताओं में यह विवाद हुआ कि सर्वप्रथम किस देवता की पूजा हो। विवाद बढ़ा तो निर्णय भगवान शिव को सौंप दिया गया। भगवान शिव ने कहा कि जो देवता सबसे पहले तीनों लोकों की परिक्रमा कर लेगा, उसकी पूजा सबसे पहले होगी। सब देवता अपने-अपने वाहनों से तीनों लोकों की परिक्रमा के लिए रवाना हो गए। पर गणेशजी ने भगवान शिव की ही परिक्रमा कर डाली। भगवान शिव ने जब उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि तीनों लोक आप में ही हैं। आप की परिक्रमा का ही अर्थ है तीनों लोकों की परिक्रमा। इस उत्तर से भगवान शिव इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने गणेश जी की पूजा सर्वप्रथम करने का निर्णय दे दिया। यह कथा कुछ और स्वरूपों में भी प्रचलित है। पर निष्कर्ष यही है कि सर्वप्रथम पूजा गणेशजी की ही होती है। हर मंगल कार्य का शुभारंभ गणेश जी की पूजा से ही होता है। यात्रा का आरंभ गणेश जी का नाम लेकर किया जाता है। खाता-बहियों की शुरुआत भी श्री गणेशाय नम: से होती है और आज तो किसी काम को प्रारंभ करने को ही श्री गणेश करना कहा जाता है। ऋग्वेद के मंत्र गणनां त्वा गणपति ऊं हवामहे तथा यजुर्वेद के मंत्र नमो गणेम्यो गणपतिम्यदा वो नमो नम: से जिन गणेश औैर गणपति की वंदना और आराधना शुरू हुई थी वह आज भी जारी है। बीसवीं शताब्दी में तो भगवान गणेश ने राष्ट्रीय चेतना की भावना का श्री गणेश किया था। गणेशोत्सवों ने इस देश में राष्ट्रीय चेतना की जो ज्वाला प्रज्ज्वलित की थी, वह हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की आधारशिला बन गई थी। ऋग्वेद से लेकर आज तक भगवान गणेश अनेक गुणों को लेकर अवतरित हुए और उनकी अनंत कथाएं भी प्रचलित रहीं।

गणेशजी इतने गुणों के स्वामी हैं कि उनके इन गुणों एवं स्वरूप के आधार पर ही उनके एक हजार नाम प्रचलित हैं। पर मुख्य रूप से उनके द्वादश नाम प्रचलित हैं, जिनके नियमित पाठ से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं तथा सभी मनोरथों की सिद्धि होती है। इस संबंध में यह मंत्र प्रचलित है-

ओम सुमुख श्चैक दंतश्च कपिलौ गजकर्णक:

लम्बोदरश्च विकटो विध्ननाशो विनायक:

धूम्र केतू गणध्ययक्षो भाल चंद्रो गजानन:

द्वादशैतानि नामानि य पठच्धुणु यदापि।

गणेश जी की उपासना एवं आराधना इतनी प्राचीन है कि उनके अनेक अवतारों के वर्णन भी धर्मग्रथों में मिलते हैं। उनके जो मुख्य अवतार हुए हैं वे है- वक्रतुण्डावतार, एकदंतावतार, महोदरावतार, गजाननावतार, लम्बोदरावतार, विकटावतार, विघ्नराजावतार में मत्सरासुर से एकदंतावतार में मदासुर से, महोदरावतार में मोहासुर से, गजाननावतार में लोभासुर से, लम्बोदरातार में क्रोधासुर से विकटावतार में कामासुर से, विघ्नराजावतार में ममतासुर से, धूम्रवर्णवतार में अभिमानानुसार से देवताओं और मानव जाति को मुक्ति दिलाई। इन अवतारों की कथा से एक और तथ्य स्पष्ट होता है कि भगवान गणेश गुणों के देवता ही नहीं है, अपितु अवगुणों से विशेषकर मद, मोह, लोभ, क्रोध, काम, माया एïवं अभिमान से भी मुक्ति दिलाते हैं।

इसी दिन सारे देश में ग्यारह दिवसीय गणेशोत्सव मनाने का क्रम प्रारंभ हो जाता है, पर गणेश जी की उपासना एवं आराधना वर्ष भर ही चलती रहती है। हर मंगल कार्य में यहां तक कि दैनिक उपासना एवं आराधना में गणेश जी को सर्वप्रथम स्मरण किया जाता है। माह में दो बार आने वाली चतुर्थी को भी गणेश जी की उपासना की जाती है। इन चतुर्थी में से कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट नाशक चतुर्थी तथा शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इन चतुर्थी पर हजारों भारतवासी गणेश जी की आराधना एवं उपासना करते हैं तथा उपवास रखते हैं। संकट नाशक चतुर्थी को गणेश जी की आराधना करने एवं उपवास करने से हर प्रकार के संकटों का नाश हो जाता हैं। (विनायक फीचर्स)

Maharashtra: गौ तस्कर होने की शक में मुस्लिम कारोबारी की मॉब लिंचिंग

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बीड: महाराष्ट्र के बीड जिले में एक 28 वर्षीय मुस्लिम जूता कारोबारी पर एक भीड़ ने गाय चोर होने का इलज़ाम लगाकर उसपर अचानक हमला कर दिया. इस हमले में जूता कारोबारी गंभीर रूप से घायल हो गया है. इस हादसे के बाद बीड पुलिस ने इस सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. ये घटना हरियाणा के उस घटना के हफ्ते भर के अन्दर सामने आई हैं, जिसमें आर्यन मिश्रा नाम के एक नौजवान को गौ तस्कर और मुसलमान होने के संदेह में गौ रक्षकों ने गोली मार दी थी

पुलिस की जानकारी के मुताबिक, 28 वर्षीय जूता कारोबारी मोहम्मद हजेक पर हमला गुरुवार की रात करीब 12:15 बजे हुआ. पीड़ित मोहम्मद हजेक, बीड शहर के मसरत नगर का निवासी था, और अपने घर के पास एक दुकान पर पान खाने गया था. पान खाने के बाद मोहम्मद हजेक अपने घर लौटते वक़्त फोन पर किसी से बात कर रहा था. उसी वक़्त उसने देखा कि एक तेज रफ्तार वाहन ने एक गाय को टक्कर मारकर वहां से भाग गया था. हादसे के बाद उसने वाहन की तस्वीर लेने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें नाकाम रहा. इसके बजाय उसने घायल गाय की तस्वीर खींची और अपनी मंगेतर को फ़ोन पर भेज दिया. जब वह घर जा रहा था, तभी लाठी-डंडों से लैस कुछ लोगों ने अपने आप को गौ रक्षक बताकर उसपर गाय चोरी का इल्जाम लगाकर लाठी डंडों से पिटाई कर दी. उसकी आवाज सुनकर उसके परिवार कुछ लोग वहां आ गए और समझा बूझकर मामला शांत कराया, फिलहाल मोहम्मद हजेक को एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है.

पुलिस ने हमलावरों का किया बचाव

मोहम्मद हजेक की शिकायत के बाद बीड पुलिस थाने में 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. बीड पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर शीतलकुमार बल्लाल ने बताया कि हमलावरों को गलती से लगा कि पीड़ित गाय का ट्रांसपोर्टर या तस्कर है. उन्होंने कहा कि पहले भी इस इलाके में एक गाय चोरी होने की सूचना मिली थी, जिससे भीड़ का शक और बढ़ गया होगा. ऐसा लगता है कि हमला तब हुआ जब हज़ेक ने घायल गाय की तस्वीर खींची, जिससे भीड़ को गलत तरीके से लगा कि वह मवेशी तस्करी में शामिल है. एफआईआर में दर्ज आठ लोगों में से पुलिस ने अब तक चार हमलावरों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मंदार देशपांडे (30), ओमकार लांडे (23), अनिल घोडके (26), और रोहित लोलगे (20), सभी बीड से गिरफ्तार किया गया, और इन्हें आज अदालत में पेश किया गया था. बीड शहर पुलिस ने संदिग्धों पर भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया

नारायण राणे के साथ उर्वशी रौतेला ने 7 लाख का लहंगा पहना

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मुंबई (अनिल बेदाग) :  उर्वशी रौतेला हमेशा उत्कृष्टता के लिए प्रयास करती हैं और यह निश्चित रूप से कल्पना से परे तरीकों से प्रेरणादायक है। मंत्रमुग्ध कर देने वाली और खूबसूरत दिवा को निश्चित रूप से किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। उनकी इंस्टाग्राम फैन फॉलोइंग 73 मिलियन से अधिक के सर्वोच्च वर्चस्व वाले आंकड़े के साथ कोई सीमा नहीं जानती है, जो बॉलीवुड की ‘खान ट्रिनिटी’ से बहुत अधिक है और पीएम नरेंद्र मोदी और विराट कोहली के बराबर है। इस तथ्य को देखते हुए कि वह पूरी दुनिया में ‘मिस यूनिवर्स इंडिया’ का खिताब एक बार नहीं बल्कि दो बार जीतने वाली एकमात्र भारतीय हैं, यह निश्चित रूप से आश्चर्य की बात नहीं है।
उर्वशी रौतेला के बारे में सबसे अद्भुत और आकर्षक गुण यह तथ्य होना चाहिए कि वह सहज रूप से स्टाइलिश है जिसके कारण वह जो कुछ भी पहनती है वह ‘शहर की चर्चा’ बन जाती है। एक सेलिब्रिटी और सार्वजनिक व्यक्ति के रूप में, जिन्हें न केवल भारतीयों बल्कि दुनिया भर के लोगों द्वारा बहुत प्यार और अनुसरण किया जाता है, उर्वशी रौतेला ने हमेशा उन्हें फॉलो करने के बजाय फैशन स्पेस में खुद को ट्रेंड सेट करने में विश्वास किया है।
उर्वशी रौतेला ने हाल ही में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे की उपस्थिति में एक कार्यक्रम में एक सर्वोच्च सौंदर्य और सुंदर लहंगा पहना था। उर्वशी रौतेला को हेतल शाह के एक शानदार ‘रॉयलियम’ लहंगे में मंत्रमुग्ध कर देने वाला देखा गया, जो भव्यता की एक सिम्फनी के बारे में था। दुल्हन का लहंगा किसी को भी परंपरा के साथ भव्यता का अनुभव कराएगा जो क्रिस्टल, कुंदन स्टोर, कटाना और फूलों के बीड्स के साथ जटिल अलंकरण के बारे में था। इसके अलावा, ब्लाउज में एक आकर्षक कट-आउट नेकलाइन और हाल्टर-प्रेरित पट्टियाँ हैं जो कालातीत डिजाइन में समकालीन निपुणता जोड़ती हैं। लहंगा निश्चित रूप से शानदार और सुपर महंगा है और इसकी कीमत 7 लाख रुपये है और इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि कार्यक्रम की पूरी अवधि के दौरान, उर्वशी रौतेला सुर्खियों का स्रोत बन गईं क्योंकि उनकी भव्य सुंदरता के लिए सभी की नज़रें उन पर थीं।

संगठन पर्व: राष्ट्र निर्माण का संकल्प सिद्धि अभियान*

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*( विष्णुदत्त शर्मा-विभूति फीचर्स )*
लोकतंत्र की भावना भारतीय जनता पार्टी संगठन की पंच निष्ठाओं में से एक है। यह भावना सिर्फ वैचारिक स्तर पर ही नहीं, अपितु पार्टी के आचरण और उसकी कार्यपद्धति में भी स्पष्ट दिखाई देती है। संगठन पर्व भाजपा का सदस्यता अभियान इसी लोकतांत्रिक कार्य पद्धति का महत्वपूर्ण अंग है, जिसके माध्यम से नए सदस्य भाजपा परिवार से जुड़ते हैं और विचार को विस्तार देते हैं। ऐसे ही विशिष्ट कार्यशैली वाले अभियानों के बल पर भाजपा दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बन चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा सदस्यता ग्रहण किए जाने के उपरांत देश में 2 सितंबर से संगठन पर्व प्रांरभ हो चुका है। हमारे पूर्वजों ने पार्टी संगठन तथा कार्यकर्ताओं को गढ़ने और तराशने के लिए जो त्याग और परिश्रम किया है, उसी के बल पर वर्तमान में मध्यप्रदेश के पार्टी संगठन को पूरे देश में आदर्श माना जाता है। प्रदेश के लाखों-लाख कार्यकर्ता अपनी इस पहचान को कायम रखते हुए संगठन पर्व में पार्टी के विस्तार को नई ऊंचाईयां प्रदान करने को तैयार हैं। 
*पंचनिष्ठाओं पर आधारित हमारा विचार और आधार*
भाजपा ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित ‘एकात्म-मानवदर्शन’ को अपने वैचारिक, दर्शन के रूप में अपनाया है तथा सुशासन, विकास एवं सुरक्षा भाजपा की प्राथमिकताएं हैं। पार्टी ने पांच प्रमुख सिद्धांतों के प्रति भी अपनी निष्ठा व्यक्त की है, जिन्हें ‘पंचनिष्ठा’ कहते हैं। यह पंचनिष्ठाएं राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय अखंडता, लोकतंत्र, सकारात्मक पंथ-निरपेक्षता (सर्वधर्म समभाव), गांधीवादी समाजवाद (सामाजिक-आर्थिक विषयों पर गाँधीवादी दृष्टिकोण द्वारा शोषण मुक्त समरस समाज की स्थापना) तथा मूल्य आधारित राजनीति है। भाजपा अकेली ऐसी पार्टी है, जो वैचारिक प्रतिष्ठान और अधिष्ठान पर चलती है, और जो राष्ट्रवादी विचारों से जुड़ी है।
हमें गर्व है कि हमारा दल देश का ऐसा एकमात्र राजनीतिक दल है, जिसने राष्ट्रहितों के साथ कभी समझौता नहीं किया, अन्य सभी दलों ने सत्ता प्राप्ति एवं स्वार्थ सिद्धि के लिए एक नहीं, अनेक बार समझौता किया। भाजपा के लिए राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का साधन नहीं है, समाज को अपेक्षित दिशा में प्रगति पथ पर ले जाना भी उसका पहला कार्य है। इसके लिये संगत दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, जो संगत विचारधारा से प्राप्त होता है। भाजपा को छोडकर आज भारत के सभी राजनैतिक दल विचारधारा की शून्यता के शिकार हैं। भाजपा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, एकात्म मानववाद तथा पंचनिष्ठाओं की संगत विचारधाराओं के आधार पर संगठन का नियमन कर रही है। शासन की नीति में भी इनका समुचित प्रतिबिम्बन होगा। भाजपा राष्ट्र प्रथम के साथ शोषित, वंचित, पीड़ित का उत्थान और सेवा कर रही है।
*राष्ट्र सर्वोपरि के भाव से अनेकानेक ऐतिहासिक निर्णय हुए* 
हमारे विचार की संकल्प शक्ति की वजह से ही लगभग पांच सौ वर्षों की प्रतीक्षा के पश्चात आज अयोध्या में भव्य व दिव्य राम मंदिर के निर्माण का सपना वास्तविकता बना है। हमारे पार्टी के संस्थापकों एवं असंख्य कार्यकर्ताओं ने श्रीरामलला को अपने मंदिर में विराजमान देखने हेतु अपनी चुनी हुई सरकारें भी न्यौछावर कर दीं, यह अपनी विचारधारा पर अडिग रहने का एक उदाहरण मात्र है। हमारे पितृपुरुषों का संकल्प एवं एक देश में “दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे की पूर्ति स्वरूप अनुच्छेद 370 को हटाने का ऐतिहासिक निर्णय हमारी ध्येय पूर्ति की यात्रा का और एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार एवं हमारे पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं देश के वर्तमान गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के कार्यकाल में भाजपा ने श्रद्धेय अटलजी की सरकार तथा तत्कालीन संगठन की नीतियों को दिशा देने के प्रयास के साथ ही अपनी विचारधारा अनुरूप “राष्ट्र सर्वोपरि मानकर अनेकानेक ऐतिहासिक निर्णय किये हैं जो हमारी विचारों की स्पष्टता को प्रतिलक्षित करते हैं। हमारे संस्थापकों ने भारत को विश्व गुरू बनाने का जो सपना देखा था आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में उस ओर हम कर्तव्यपरायणता के साथ अग्रसर हैं।
*अंत्योदय का सपना साकार कर रही मोदी सरकार*
हमारी ध्येय यात्रा में पूर्ण बहुमत की सरकार आते ही तीन तलाक कानून, नागरिकता संशोधन कानून, आपराधिक न्यायिक कानूनों में बदलाव के साथ ही पंडित दीनदयाल जी के अंत्योदय पर आधारित गरीब-कल्याण की योजनाओं के द्वारा करोड़ों गरीब लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने का काम भी हुआ है। हमारी केंद्र की सरकार ने अंत्योदय के सिद्धांत अनुरूप ही 50 करोड़ से अधिक लोगों के जनधन खाते खुलवाए और आयुष्मान, उज्ज्वला और पीएम आवास जैसी अनुकरणीय योजनाएं संचालित की गईं और देश खुले में शौच से मुक्त हुआ। घर-घर बिजली पहुंचाई गई, 10 करोड़ से अधिक परिवारों को गैस कनेक्शन दिए गए और हर घर शुद्ध पेयजल पहुँचाया। कुछ प्रमुख आधारभूत कार्य हैं जो देश की पूर्ववर्ती सरकारों के 50 वर्षों के शासनकाल की प्राथमिकता होनी चाहिए थी, किन्तु वोट बैंक की राजनीति की वजह से किसी एक वर्ग विशेष की चिंता ही उनकी राजनीति की प्राथमिकता रही है। वे तुष्टीकरण करते रहे, हमने संतुष्टीकरण करने का ईमानदार प्रयास किया। वास्तव में, केंद्र और राज्यों की हमारी सरकारें सुशासन के प्रति समर्पित रहती हैं क्योंकि यही लोकतंत्र की आवश्यकता है। भाजपा समाज के आखिरी छोर पर खड़े व्यक्ति के विकास की बात ही नहीं करती, बल्कि उसे चरितार्थ भी करती है। भाजपा के सिद्धांतों के अनुरूप प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने पारदर्शिता के शासन से देश के लोकत्रंत को मजबूती दी है, जिससे सामान्य व्यक्ति आज गरिमा के साथ जीवनयापन कर रहा है।
*सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के साथ विश्व में एक बड़ी ताकत बनकर उभरा भारत*
आज भारत ही नहीं पूरा विश्व देख रहा है कि एक राजनीतिक दल और उसका नेतृत्व किस प्रकार अपने उन संकल्पों को पूरा करने में सफल सिद्ध हुआ है, जिन्हें पूरा करना कभी असंभव सा लगता था। भाजपा सरकार में अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ विश्व में एक बड़ी ताकत बनकर उभरे भारत ने अपने पुराने स्वाभिमान और आत्मगौरव को भी वापस हासिल किया है। राष्ट्रीय संकट में जनकल्याण की कसौटी पर भी भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में भाजपा के नेतृत्व ने एक अनूठा उदाहरण विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया है। कोरोना संकट में दुनिया के अनेक देशों ने जहाँ अपने नागरिकों को अपने हाल पर छोड़ दिया, वहीं भारत में भाजपा की मोदी सरकार ने अपने हर नागरिक के जीवन को अमूल्य मानते हुए उनके लिए अनाज के साथ दवाओं और अन्य वस्तुओं को उपलब्ध कराया। स्वदेशी वैक्सीन के आविष्कार में प्रेरक भूमिका तो निभाई और हर नागरिक के लिए उसे मुफ्त उपलब्ध कराने हेतु विश्व का सबसे बड़ा वैक्सिनेशन अभियान चलाकर दुनिया से अपने सामर्थ्य का लोहा भी मनवा लिया है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास ही भाजपा का मूलमंत्र बन गया है।
*विकसित भारत हेतु सदस्यता अभियान*
लगभग 44 वर्षों की इस यात्रा में आज हमारी भाजपा भारतीय राजनीति के जिस शीर्ष पर पहुंची है, वो हमारी विचारधारा के प्रति एकनिष्ठ और समर्पित भाव से बढ़ते रहने के कारण ही संभव हुआ है। अपने 45 वें वर्ष में दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल ने चार दशक पूर्व जो सपने देखे, वह तो साकार हुए ही हैं, साथ ही स्वाधीनता के अमृत वर्ष में मोदी जी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को अपना दिशा-सूत्र बना चुका है, जिसको पूरा करने का दारोमदार भी भारतीय जनता पार्टी के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं के कंधों पर है। देश की सेवा के लिए अधिकाधिक लोगों को आव्हान और प्रेरित करना भाजपा का संगठन पर्व है।
भारतीय जनता पार्टी का यह संगठन पर्व केवल सदस्यता आंकड़ों को बढ़ाने और सत्ता सुख भोगने के लिए नहीं है, बल्कि जनता का दुख-दर्द दूर करने के साथ देश का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने कहा था कि “आज का विरोधी कल हमारा मतदाता बने, कल का मतदाता परसों भारतीय जनता पार्टी का सदस्य बने और परसों का सदस्य हमारा सक्रिय कार्यकर्ता बने“। निश्चित ही भाजपा अपनी संकल्प शक्ति, निष्ठा और नियति से इस लक्ष्य को पूरा करेगी तथा हमारे सदस्य देश के भविष्य-निर्माण की प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभाते हुए संकल्प सिद्धि की ओर अग्रसरता में अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगे।
*(लेखक भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद हैं।)(विभूति फीचर्स)*

अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर पर काबू पाने के लिए अपोलो नवी मुंबई में सफलतापूर्वक पूरी की गई रीनल डिनर्वेशन प्रक्रिया

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नवी मुंबई। डॉ. ब्रजेश कुमार कुंवर ने 42 वर्षीय रोगी के खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) को आम तौर पर उपयोगी उपचार के ज़रिये नियंत्रित करने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने एक इनोवेटिव समाधान की ओर रुख किया और वह था, रीनल डीनर्वेशन। नवी मुंबई में इस न्यूनतम इन्वेसिव प्रक्रिया का उपयोग पहली बार अपोलो हॉस्पिटल्स, नवी मुंबई के वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. ब्रजेश कुंवर ने किया। यह प्रक्रिया हाइपरटेंशन (एचटी) प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को रेखांकित करती है, जो केवल दवा के ज़रिये हाइपरटेंशन को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे रोगियों के लिए उम्मीद की किरण है। रायगढ़, उरण के चेतन वाज़ेकर, यात्रा करने के शौकीन हैं और उनकी साहसिक गतिविधियों में रुचि है। वह अनियंत्रित हाइपरटेंशन से जूझ रहे थे। यह ऐसी स्थिति है जिसमें, कई एंटीहाइपरटेंसिव (उच्च रक्तचाप रोधी) दवाओं के सेवन के बावजूद हाई ब्लड प्रेशर अनियंत्रित रहता है। सक्रिय जीवनशैली के बावजूद, उनका ब्लड प्रेशर खतरनाक रूप से ऊपर रहता है, जिससे उन्हें दिल के दौरे, स्ट्रोक, किडनी फेलियर का काफी अधिक खतरा था, जो उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता था। रेज़िस्टेंट हाइपरटेंशन जटिल स्थिति है जो आनुवंशिकी, जीवनशैली और विभिन्न दवाओं के सेवन जैसे कारकों से प्रभावित हो सकती है।

चेतन धुंधला दिखने, चक्कर, घबराहट, सिरदर्द और थोड़ी सी मेहनत से सांस लेने में तकलीफ और 240 एमएमएचजी के खतरनाक स्तर के ब्लड प्रेशर जैसे लक्षणों के साथ अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई (एएचएनएम) पहुंचे। डॉ. कुंवर ने गहन आकलन के बाद, समाधान के रूप में रीनल डिनर्वेशन की सिफारिश की। रीनल डीनर्वेशन एक नई न्यूनतम इन्वेसिव प्रक्रिया है जिसका उपयोग रेज़िस्टेंट हाइपरटेंशन के इलाज के लिए किया जाता है। रेज़िस्टेंट हाइपरटेंशन ऐसा हाई ब्लड प्रेशर है जो आम तौर पर उपयोगी उपचारों से ठीक नहीं होता। रीनल आर्टरी के आसपास की नसों में रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन पहुंचाने के लिए कैथेटर का उपयोग कर, हाई ब्लड प्रेशर में योगदान देने वाले सिम्पेथेटिक नब्ज़ के संकेतों को बाधित किया जाता है। सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम की गतिविधि में कमी से ब्लड प्रेशर कम करने में मदद मिलती है और संभावित रूप से कई दवाओं की ज़रूरत कम कर सकती है।
डॉ. ब्रजेश कुमार कुंवर (वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, अपोलो हॉस्पिटल्स, नवी मुंबई) ने कहा कि हाइपरटेंशन वाले रोगियों में से 10% से 20% तक को रेज़िस्टेंट हाइपरटेंशन होता है। 42 वर्ष की कम उम्र के रोगी को अनियंत्रित हाइपर टेंशन होने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। वह एक सक्रिय जीवन शैली वाला बहुत उत्साही व्यक्ति है। यदि हम समय पर इलाज नहीं कर पाते तो मुश्किल होती। रीनल डिनर्वेशन ने उनके ब्लड प्रेशर को प्रभावी ढंग से कम करने और दीर्घकालिक स्तर पर दवा पर उनकी निर्भरता को कम करने के लिए एक आशाजनक समाधान पेश किया।
चेतन वाज़ेकर ने कहा कि इस प्रक्रिया से पहले, मेरे लिए हाई ब्लड प्रेशर के कारण रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल था और मैं लगातार अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहता था। अब, डॉ. कुंवर और अपोलो हॉस्पिटल्स की टीम का मैं आभारी हूं। मेरा ब्लड प्रेशर नियंत्रण में है, और मैं आखिरकार निडर होकर अपना जीवन जी सकता हूं। अब मैं अपने स्वास्थ्य की चिंता के बगैर फिर से सड़क पर आने और नई ऊंचाइयों को छूने के लिए उत्साहित हूं।

भगवान श्री गणेश को समर्पित म्यूजिक वीडियो ‘गजानन सत सत करूँ प्रणाम’ रिलीज

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                        ‘मुंबई ग्लोबल’ समाचार पत्र और ‘मुम्बई ग्लोबल म्यूजिक’ के सीईओ राजकुमार तिवारी और मयूरी मीडिया वर्क के सीईओ पुनीत आर खरे द्वारा संयुक्तरूप से निर्मित म्यूजिक वीडियो ‘गजानन सत सत करूँ प्रणाम’ को बॉलीवुड के मशहूर संगीत निर्देशक दिलीप सेन के द्वारा रिलीज कर दिया गया है। भगवान श्री गणेश को समर्पित इस म्यूजिक वीडियो के निर्देशक अजहर हुसैन और लिरिक्स राइटर हरि ओम वर्मा हैं और संगीतबद्ध किया है प्रदीप रंजन ने। इस म्यूजिक लांच के अवसर पर बॉलीवुड के कई जाने माने कलाकर भी उपस्थित रहे। निर्माता राजकुमार तिवारी ने  कहा कि यह बेहद सुखद अनुभव रहा और पूरी टीम का उन्होंने आभार व्यक्त किया। मयूरी मीडिया वर्क के सीईओ और इस एलबम के निर्माता पुनीत आर खरे ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि भगवान गणपति के म्यूजिक वीडियो सॉन्ग से हमारी शुरुआत हुई है और हम आगे भी नए प्रोजेक्ट लाते रहेंगे। इस म्यूजिक वीडियो में सुनीता बावा (अर्पिता), सुनील पाल और राजकुमार कन्नौजिया ने काम किया है।
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

टॉलिन्स टायर्स लिमिटेड की आरंभिक सार्वजनिक पेशकश 9 सितंबर को खुलेगी

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मुंबई (अनिल बेदाग): टॉलिन्स टायर्स लिमिटेड (“टीटीएल” या “कंपनी”) सोमवार, 09 सितंबर, 2024 को इक्विटी शेयरों की अपनी आरंभिक सार्वजनिक पेशकश के संबंध में अपनी बोली/प्रस्ताव खोलेगी।
इक्विटी शेयरों (प्रत्येक का अंकित मूल्य ₹5) का कुल प्रस्ताव आकार 230 करोड़ रुपये तक है, जिसमें 200 करोड़ रुपये तक का नया निर्गम और 30 करोड़ रुपये तक का बिक्री प्रस्ताव शामिल है।
एंकर निवेशक बोली की तिथि शुक्रवार, 06 सितंबर, 2024 होगी और बोली प्रस्ताव बुधवार, 11 सितंबर, 2024 को बंद हो जाएगा  प्रस्ताव का मूल्य बैंड 215 से 226 रुपये प्रति इक्विटी शेयर तय किया गया है।
न्यूनतम 66 इक्विटी शेयरों के लिए और उसके बाद 66 इक्विटी शेयरों के गुणकों में बोलियां लगाई जा सकती हैं। टॉलिन्स टायर्स लिमिटेड, विविध उत्पाद रेंज के साथ पूरे भारत में मौजूद उद्योग में अग्रणी खिलाड़ियों में से एक है और यह उन कंपनियों में से एक है जो दोनों क्षेत्रों में मौजूद है – नए टायर और ट्रेड रबर का निर्माण (स्रोत: कंपनी कमीशन क्रिसिल रिपोर्ट)। यह मुख्य रूप से वाहनों की व्यापक श्रेणी (हल्के वाणिज्यिक, कृषि और दो/तीन पहिया वाहनों सहित) के लिए बायस टायर और प्रीक्योर्ड ट्रेड रबर के निर्माण में लगी हुई है और बॉन्डिंग गम, वल्केनाइजिंग सॉल्यूशन, टायर फ्लैप और ट्यूब जैसे सहायक उत्पादों के निर्माण में भी शामिल है। यह तीन विनिर्माण सुविधाओं से संचालित होता है, जिनमें से दो केरल के कलाडी में मट्टूर में स्थित हैं और तीसरी यूएई के रस अल खैमाह में अल हमरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है।