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Podcast – Gau Bharat Bharati Vartalaap

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Description Sub-title: Meaningful Conversations on Indian Native Cow Breeds, Social Service, National Interest, and Sanatan Culture “Gau Bharat Bharati Vartalaap” is the official podcast of the national newspaper “Gau Bharat Bharati”. It features deep and meaningful discussions on the conservation of indigenous Indian cow breeds, cow dung and cow urine-based economy, organic farming, social service, national politics, art-culture, and eternal Sanatan life values. The language is Hindi. Category: Society & Culture, News, Religion & Spirituality So Like Share and Subscribe our Social Media Channel

 

 

Gau Bharat Bharati Vartalaap on – Spotify

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Title Gau Bharat Bharati Vartalaap

Description

Sub-title: Meaningful Conversations on Indian Native Cow Breeds, Social Service, National Interest, and Sanatan Culture  “Gau Bharat Bharati  Vartalaap” is the official podcast of the national newspaper “Gau Bharat Bharati”. It features deep and meaningful discussions on the conservation of indigenous Indian cow breeds, cow dung and cow urine-based economy, organic farming, social service, national politics, art-culture, and eternal Sanatan life values. All rights of the podcast are reserved with Sanjay Sharma alias Sanjay Amaan. The language is Hindi. Category: Society & Culture, News, Religion & Spirituality  Email: sanjaymaan6@gmail.com

 

GBB PODCAST – “वार्तालाप”

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राष्ट्रीय समाचारपत्र ‘गऊ भारत भारती’ ने लॉन्च किया अपना आधिकारिक पॉडकास्ट ‘गऊ भारत वार्तालाप’
नई दिल्ली, २६ नवंबर २०२५ देश के प्रमुख राष्ट्रीय समाचारपत्र ‘गऊ भारत भारती’ ने आज औपचारिक रूप से अपने डिजिटल ऑडियो प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। इस नए पॉडकास्ट का नाम है – ‘गऊ भारत वार्तालाप’।पत्रकारिता के 11 वर्ष पूरे कर चुके इस प्रतिष्ठित समाचारपत्र ने डिजिटल युग में कदम बढ़ाते हुए अब पाठकों-श्रोताओं तक अपनी पहुंच को ऑडियो माध्यम से और गहरा करने का निर्णय लिया है।

https://www.facebook.com/gaubharatbharati1/

अरिपिराला योगानंद शास्त्री : जब ११ साल का बालक वेदों को जीने लगे

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– संजय अमान

जरा कल्पना कीजिए – एक ग्यारह साल का बच्चा, जिसके हाथ में स्कूल बैग की जगह पंचांग है, कंधे पर जनेऊ है, और मुंह से निकलते हैं संस्कृत के कठिन सूत्र जो सैकड़ों पंडितों के लिए भी दुर्बोध हैं। वह बच्चा जब यज्ञ-वेदी पर खड़ा होता है, तो अग्नि भी जैसे श्रद्धा से झुक जाती है। यह कोई पौराणिक कथा नहीं, यह आज के भारत की सच्ची घटना है। नाम है – अरिपिराला योगानंद शास्त्री। लोग उन्हें प्यार से “डॉ. योगानंद” कहते हैं, और यह “डॉक्टर” कोई खिलौना उपाधि नहीं – दो मानद डॉक्टरेट धारक हैं ये बाल-ब्रह्मर्षि।

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में जब यह बालक जन्मा, तो घर में जैसे कोई प्राचीन ऋषि फिर लौट आया हो। पिता डॉ. अरिपिराला कल्याण शास्त्री बताते हैं –
“पांच साल की उम्र में योगानंद ने मुझसे पहला सवाल पूछा था : ‘पिताजी, लग्नेश अगर नीच का हो तो क्या उपाय है?’ मैंने हंसकर टाल दिया। दूसरे दिन उसने खुद ‘फलदीपिका’ खोलकर उपाय बता दिया।”तब से लेकर आज तक, योगानंद ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। स्कूल में गणित की कॉपी में जहां बच्चे 2+2 लिखते हैं, वहां योगानंद दशम भाव में गुरु-चांडाल योग की व्याख्या लिखते हैं।

खैर यह एक ऐसी बाल प्रतिभा हैं जिन्होंने मात्र 10-11 वर्ष की आयु में ज्योतिष, वास्तु शास्त्र और वैदिक कर्मकांडों में अपनी अद्भुत क्षमता से दुनिया को चकित कर दिया है। आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के निवासी यह बालक न केवल कुंडली पढ़ते हैं, बल्कि यज्ञ और अन्य वैदिक अनुष्ठानों का भी निरीक्षण करते हैं। उनकी कहानी न केवल प्रतिभा की मिसाल है, बल्कि यह दर्शाती है कि उम्र केवल एक संख्या है, जब बात जुनून और समर्पण की हो।

प्रारंभिक जीवन और रुचि का उदय

अरिपिराला योगानंद शास्त्री का जन्म आंध्र प्रदेश के गुंटूर में एक सामान्य परिवार में हुआ। उनके पिता, डॉ. अरिपिराला कल्याण शास्त्री, एक सम्मानित व्यक्ति हैं जिन्होंने योगानंद की प्रतिभा को पहचाना और उसे निखारने में सहयोग किया। मात्र पांच वर्ष की आयु में योगानंद ने कुंडली के आधार पर भविष्यवाणी की जटिलताओं में रुचि दिखाई। उनके पिता के अनुसार, “योगानंद ने बचपन से ही ज्योतिष के रहस्यों को समझने की कोशिश की। वह घंटों पुरानी ग्रंथों को पढ़ते और सवाल पूछते।” यह रुचि धीरे-धीरे इतनी गहरी हो गई कि योगानंद ने न केवल ज्योतिष सीखा, बल्कि वास्तु शास्त्र और वैदिक यज्ञों में भी महारथ हासिल कर ली।स्कूली शिक्षा के साथ-साथ, योगानंद ने अपनी पढ़ाई में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कक्षा पांच के छात्र होने के बावजूद, वे ज्योतिषीय गणनाओं और वैदिक मंत्रों का सटीक उच्चारण करते हैं, जो वयस्कों के लिए भी चुनौतीपूर्ण होता है।

उपलब्धियां और सम्मान

योगानंद शास्त्री की प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल चुकी है। 2022 में, मात्र 10 वर्ष की आयु में, उन्हें दो मानद डॉक्टरेट डिग्रियां प्रदान की गईं – एक ज्योतिष में और दूसरी वास्तु शास्त्र में। यह सम्मान Aura Profile Management Services द्वारा गोवा में आयोजित एक विशेष समारोह में दिया गया, जहां 11 वर्षीय योगानंद को ‘ज्योतिष में असाधारण ज्ञान’ के लिए सम्मानित किया गया।2024 में, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री राम निवास गोयल द्वारा ‘भारत सम्मान निधि पुरस्कार’ से नवाजा गया। इसके अलावा, इन्हें नेशनल ग्लोरियस अवॉर्ड (माननीय जस्टिस डॉ. के.जी. बालाकृष्णन द्वारा) और ‘यंग रिसर्चर इन एस्ट्रोलॉजी अवॉर्ड’ (माननीय श्री सुरेश प्रभु द्वारा) जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। ये सम्मान न केवल उनकी विद्वता को प्रमाणित करते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को प्रेरित भी करते हैं।योगानंद की एक अन्य उपलब्धि है उनका यूट्यूब चैनल ‘संस्कृति प्रोडक्शंस’। इस चैनल के माध्यम से वे लोगों की आध्यात्मिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हैं, पौराणिक कथाओं की व्याख्या करते हैं और वैदिक ज्ञान को सरल भाषा में समझाते हैं। चैनल पर उनके वीडियो लाखों लोगों तक पहुंच चुके हैं, जो उनकी पहुंच की व्यापकता दर्शाते हैं।

योगदान और प्रभाव

डॉ. अरिपिराला योगानंद शास्त्री का योगदान केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। वे वैदिक परंपराओं को आधुनिक संदर्भ में जोड़ते हैं, जिससे युवा वर्ग प्राचीन ज्ञान की ओर आकर्षित होता है। उनके यज्ञ और कुंडली विश्लेषण सत्रों में लोग दूर-दूर से आते हैं, और वे हमेशा जोर देते हैं कि “ज्योतिष विज्ञान है, न कि अंधविश्वास।” इसके अलावा, वे पौराणिक ग्रंथों का अध्ययन करते रहते हैं और अपने माता-पिता से कथाएं सुनना पसंद करते हैं, जो उनकी जड़ों से जुड़ाव को दिखाता है।उनकी कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची प्रतिभा बाधाओं को पार कर जाती है। एक बालक जो स्कूल की किताबों के साथ-साथ वेदों को भी उतनी ही आसानी से पढ़ लेता है, वह निश्चित रूप से भविष्य का सितारा है।

बहरहाल वेद आज भी जीवित हैं – इस ११ साल के बच्चे की स्मृति में, उसकी वाणी में, उसके कर्म में।जय हो ऐसे बाल-ऋषि की। जय हो उस भारत की, जो अभी भी अपने बच्चों में भगवान को देखता है।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। ॐ नमः बालयोगानंदाय।

– संजय अमान

सरकार किसानों के लिए नई तकनीकें लेकर आ रही है -केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह

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केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह द्वारा 2024-25 की बागवानी फसलों के क्षेत्रफल व उत्पादन के तृतीय अग्रिम अनुमान जारी


बागवानी क्षेत्रफल बढ़कर 294.88 लाख हेक्टेयर और उत्पादन बढ़कर 3690.55 लाख टन- श्री शिवराज सिंह

फल और सब्जियों के उत्पादन सहित लगभग सभी बागवानी फसलों में बढ़ोतरी- केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कृषि-बागवानी क्षेत्र में अभूतपूर्व उन्नति व किसानों की मेहनत का सुफल- श्री शिवराज सिंह

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज वर्ष 2024-25 की बागवानी फसलों के क्षेत्रफल व उत्पादन के तृतीय अग्रिम अनुमान जारी किए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश के कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हो रही और हमारे किसान भाइयों-बहनों की मेहनत का सुफल परिलक्षित हो रहा है। बागवानी फसल क्षेत्रफल में 4 लाख हेक्टेयर की वृद्धि अनुमानित है, जो गत वर्ष के 290.86 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 294.88 लाख हेक्टेयर है। उत्पादन में 143.11 लाख टन की वृद्धि अनुमानित है, जो 3547.44 लाख टन से बढ़कर 3690.55 लाख टन अनुमानित है।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि ये वृद्धि किसानों की कड़ी मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों के प्रयास, प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई लाभकारी योजनाओं तथा किसान हितैषी नीतियों का सद्परिणाम है, जिसमें बेहतर बीज, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और बाजार तक आसान पहुंच भी शामिल है। उन्होंने बताया कि फल व सब्जियों के उत्पादन में खास प्रगति देखी गई है। फल उत्पादन में लगभग 5.12% (57.82 लाख टन) की वृद्धि होकर 1187.60 लाख टन पहुंचने की उम्मीद है, इसमें केला, आम, तरबूज, कटहल, मंदारिन, पपीता, अमरूद अहम योगदान देते हैं। सब्जियों का उत्पादन 4.09% (84.76 लाख टन) बढ़कर 2156.84 लाख टन होने का अनुमान है, विशेषकर प्याज उत्पादन गत वर्ष के 242.67 लाख टन से बढ़कर 307.89 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है, यानी 26.88% की वृद्धि। आलू उत्पादन में 1.85% की बढ़ोतरी होकर 581.08 लाख टन उत्पादन की उम्मीद है।

वर्ष 2024-25 की बागवानी फसलों के क्षेत्रफल व उत्पादन के तृतीय अग्रिम अनुमान के अनुसार, सुगंधित और औषधीय पौधों का उत्पादन बढ़कर 7.81 लाख टन होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 7.26 लाख टन था, वहीं मसाला उत्पादन लगभग 125.03 लाख टन अनुमानित है, जिसमें लहसुन, अदरक, हल्दी के उत्पादन में वृद्धि हुई है। गत वर्ष मसालों का उत्पादन 124.84 लाख टन हुआ था। टमाटर उत्पादन 194.68 लाख टन होने की उम्मीद है।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि सरकार किसानों के लिए नई तकनीकें लेकर आ रही है, जिससे उनकी कृषि उत्पादकता और आय दोनों बढ़े। बागवानी में नवीनतम तकनीकों के प्रसार, बेहतर बीज उत्पादन और बाजार प्रबंधन में सुधार के साथ भारत कृषि में एक वैश्विक लीडर बनने की दिशा में अग्रसर है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को केंद्र में रखते हुए, कृषि क्षेत्र में निरंतर सुधार और समृद्धि को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे हर किसान का जीवन बेहतर हो।

मंगला पशु बीमा योजना: गाय, भैंस सहित इन पशुओं का बीमा शुरू

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किसान इन जगहों पर करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन और पा सकते हैं बीमा लाभ, जानें पूरी जानकारी 

राज्य सरकार ने पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2025–26 की बजट घोषणा के तहत मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना में गाय, भैंस, भेड़, बकरी और ऊंट जैसे पशुओं का निःशुल्क बीमा शुरू कर दिया गया है। सरकार के निर्देशानुसार पशुओं के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है, जिसमें पशुपालक मोबाइल ऐप या पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत के नेतृत्व में इस योजना को तेजी से लागू किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि पशुपालकों का पशुधन उनके लिए आजीविका का प्रमुख आधार है और आकस्मिक रूप से पशु हानि होने पर परिवार आर्थिक संकट में घिर जाता है। ऐसे में यह बीमा योजना उन्हें बड़ी राहत प्रदान करेगी।

क्या है मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना

पशुपालकों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में बजट घोषणा (बिंदु संख्या 132) के तहत मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना शुरू की। इसके तहत राज्य में 5 लाख दुधारू गाय, 5 लाख भैंस, 5 लाख भेड़, 5 लाख बकरी, 1 लाख ऊंट का निःशुल्क बीमा करवाने की योजना है। इस योजना पर सरकार कुल 400 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बीमा कवरेज से पशुपालकों को पशुओं की आकस्मिक मृत्यु होने पर आर्थिक सहायता मिलेगी जिससे उनकी आजीविका पर अचानक आने वाले संकट से बचाव होगा।

मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना में बीमा कराने पर क्या मिलेगा लाभ

  • पशुपालकों के अमूल्य पशुधन का जोखिम कवरेज मिलेगा।
  • दुर्घटना या बीमारी से पशु की मृत्यु पर आर्थिक सहायता प्राप्त होगी।
  • गरीब व मध्यम वर्ग के पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
  • बीमा पूरी तरह निःशुल्क है, इसका कोई प्रीमियम पशुपालकों को नहीं देना होगा।

एक जनाधार कार्ड पर कितने पशुओं का कराया जा सकता है बीमा

मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना में इस बार पशुपालकों को एक जनाधार कार्ड पर अधिकतम 2 दुधारू गाय या 2 दुधारू भैंस, 10 बकरियां, 10 भेड़ें, 10 ऊंट का बीमा कराने की अनुमति दी गई है। जिलेवार लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं। उदाहरण के लिए एक जिले में 12,000 दुधारू गाय, 14,200 भैंस, 16,000 भेड़, 11,000 बकरियां और 400 ऊंट का लक्ष्य रखा गया है।

योजना के तहत कैसे तय होगी पशु बीमा की कीमत

राजस्थान सरकार ने बीमा राशि निर्धारित करने के लिए पशु श्रेणी के अनुसार अलग-अलग मानक तय किए हैं, जो इस प्रकार से हैं:

क्रमांक पशु का प्रकार बीमा हेतु मूल्य निर्धारण मानक
1 दुधारू गाय प्रति लीटर दूध उत्पादन के आधार पर 3000 रुपए प्रति लीटर प्रतिदिन, अधिकतम 40,000 रुपए
2 दुधारू भैंस 4000 रुपए प्रति लीटर प्रतिदिन के आधार पर, अधिकतम 40,000 रुपए
3 बकरी (मादा) अधिकतम 4000 रुपए प्रति पशु
4 भेड़ (मादा) अधिकतम 4000 रुपए प्रति पशु
5 ऊंट अधिकतम 40,000 रुपए प्रति पशु

ध्यान रहे कीमत निर्धारण पर किसी भी विवाद की स्थिति में पशु चिकित्सक का निर्णय ही अंतिम माना जाएगा।

योजना के तहत पशुपालक किसान कहां और कैसे कराएं रजिस्ट्रेशन

राज्य सरकार ने पशुपालकों की सुविधा के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी है। इच्छुक पशुपालक अपने जनाधार कार्ड के माध्यम से मोबाइल ऐप मंगला पशु बीमा योजना 25-26 या पोर्टल mmpby2526.rajasthan.gov.in पर जाकर स्वयं आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा जिन पशुपालकों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, वे ई-मित्र कियोस्क के माध्यम से भी आवेदन करवा सकते हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार रजिस्ट्रेशन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर स्वीकार किए जाएंगे और लक्ष्य पूरा होते ही पोर्टल स्वतः बंद हो जाएगा।

गांवों में विशेष बीमा शिविर का किया जाएगा आयोजन

पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील घीया ने बताया कि इस बार रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद बीमा एजेंट और पशु चिकित्सक संयुक्त रूप से गांवों में विशेष शिविर आयोजित करेंगे। एक दिसंबर से जिले के विभिन्न राजस्व ग्रामों में बीमा शिविर शुरू होंगे, जहां पशुपालक मौके पर भी रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे शीघ्र अपने पशुओं का पंजीकरण करवाकर इस योजना का लाभ लें, क्योंकि लक्ष्य पूरा होने पर पोर्टल बंद हो जाएगा।

योजना से लाखों पशुपालक परिवारों को मिलेगी राहत

राजस्थान सरकार की यह योजना उन लाखों पशुपालक परिवारों के लिए राहत लेकर आई है जो पशुधन पर ही अपनी आजीविका निर्भर रखते हैं। रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं और सरकार लगातार गांवों तक इस योजना की जानकारी पहुंचा रही है। पशुपालनों से अपील है कि निर्धारित लक्ष्य पूरा होने से पहले अपने पशुओं का बीमा अवश्य करा लें, ताकि किसी भी आकस्मिक नुकसान की स्थिति में उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके।

 

गौ-तस्करों को पकड़ने वाले युवाओं पर एफआइआर दर्ज होने से फूटा जनाक्रोश

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भोरे. भोरे में मंगलवार को गौ-रक्षा दल के सदस्यों सहित स्थानीय युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा. युवाओं ने पुलिस पर फर्जी प्राथमिकी दर्ज करने का आरोप लगाते हुए भोरे-मीरगंज मुख्य सड़क को चारमुहानी पर जाम कर दिया.

पुलिस के खिलाफ जमकर की नारेबाजी

करीब एक घंटे तक आवागमन ठप रहा और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गयी. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. स्थिति विस्फोटक बन गयी. प्रत्याक्षदर्शियों ने बताया कि गौ-रक्षा दल के सदस्यों को इस प्राथमिकी की जानकारी मिली, तो वे भड़क उठे. दल के सदस्यों ने आरोप लगाया कि गौ-तस्करों को बचाने के लिए पुलिस ने निर्दोष युवाओं पर फर्जी केस दर्ज कर दिया है. इसके विरोध में वे जिम्मेनामा पर ली गयीं गायों को लेकर चारमुहानी पहुंचे और सड़क जाम कर दिया. स्थिति थोड़ी देर के लिए तनावपूर्ण हो गयी.

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर कराया शांत

सूचना मिलते ही भोरे पुलिस, उप प्रमुख दीपू मिश्रा, समाजसेवी चंदन यादव और संकेश जायसवाल मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया. अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच करायी जायेगी और यदि प्राथमिकी फर्जी पायी गयी, तो उसे रद्द करने की कार्रवाई की जायेगी. आश्वासन के बाद जाम हटाया गया और यातायात सामान्य हुआ.

गौ तस्करी रोकने के लिए बनाया दल

भोरे सहित आसपास के गांवों के युवाओं ने मिलकर एक गौ-रक्षा दल का गठन किया है, जो क्षेत्र में लगातार हो रही पशु तस्करी पर नजर रखता है. इसी क्रम में 19 नवंबर की देर रात करीब 11 बजे दल के सदस्यों ने भोरे चारमुहानी के पास एक पिकअप वैन को रोका, जिस पर सात गायें लदी थीं. युवाओं ने इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी. पुलिस मौके पर पहुंची और पशुओं को जिम्मेनामा के आधार पर सौंप दिया.

अगले दिन दर्ज हो गयी प्राथमिकी

अगले ही दिन यानी 20 नवंबर को श्रीपुर थाना क्षेत्र के शाह बतरहां निवासी मोहम्मद वजीम ने भोरे थाने में एक प्राथमिकी दर्ज करा दी. इसमें आरोप लगाया गया कि उसका बेटा सेराज आलम पिकअप वैन से गाय खरीद कर घर लौट रहा था. इसी दौरान तेजप्रताप सिंह (खजुराहां पोखरा), अजय कुमार गोंड, अनूप कुमार गोंड (भोरे), राकेश जायसवाल सहित सात लोगों ने मारपीट की, सिर फोड़ दिया, हाथ तोड़ दिया और 35 हजार रुपये व मोबाइल फोन छीन लिया.

पशु तस्करी लंबे समय से समस्या

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पशु तस्करी लंबे समय से समस्या बनी हुई है, ऐसे में गौ-रक्षा दल द्वारा पकड़े गये युवकों पर कार्रवाई से ईमानदार प्रयासों पर पानी फिर जाता है. प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच की मांग दोहरायी. पुलिस अधिकारी पर भी कार्रवाई की बात पर वे अड़े रहे.

अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस मध्यप्रदेश में मोहन यादव का सख्त संकेत

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(पवन वर्मा-विभूति फीचर्स)
मध्यप्रदेश की कानून-व्यवस्था पर पिछले कुछ दिनों से उठ रहे सवालों ने अंततः सत्ता के शीर्ष को हिला दिया है। मंगलवार रात को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अचानक पुलिस मुख्यालय पहुँचना, और वहाँ दिए गए तीखे तेवरों वाले निर्देश,यह साफ कर गए कि सरकार अब चेतावनी की मुद्रा में नहीं, बल्कि कार्रवाई के मोड में है।
मध्यप्रदेश के रायसेन व भोपाल में हुई हालिया आपराधिक घटनाएँ भले अलग-अलग प्रकृति की हों, पर एक बात दोनों में समान थी, राज्य की पुलिस व्यवस्थाओं पर सीधे सवाल। रायसेन में जो कुछ हुआ, वह केवल किसी स्थानीय तंत्र की चूक नहीं थी, बल्कि कानून-व्यवस्था पर एक गंभीर धब्बा था। सबसे वीभत्स घटना गौहरगंज की रही, जहाँ छह साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म ने न केवल ज़िले, बल्कि पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया। यह वह बिंदु था, जहाँ मुख्यमंत्री का धैर्य टूटा और उनका रुख स्पष्टतः कड़ा हो गया।
मुख्यमंत्री की नाराज़गी सिर्फ शब्दों तक नहीं रही। रायसेन एसपी को तत्काल प्रभाव से हटाकर उन्होंने पुलिस महकमे को एक ठोस और निर्विवाद संदेश दिया कि “सुरक्षा में असफलता की कोई गुंजाइश नहीं, और ऐसी असफलता का मूल्य पद से चुकाना होगा।” यह निर्णय केवल एक अधिकारी का तबादला भर नहीं है, यह उन सभी जिलों के लिए संकेत है जहाँ अपराधियों का मनोबल पुलिस की सुस्ती से बढ़ने लगा है।
गौहरगंज कांड पर मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया में वह बेचैनी साफ झलकती है, जो किसी भी जागरूक शासन प्रमुख में होनी चाहिए। छह साल की बच्ची के साथ हुई यह अमानवीय वारदात केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि राज्य की सामूहिक सुरक्षा प्रणाली की परीक्षा भी है। मुख्यमंत्री ने इसे पुलिस की “निगरानी की विफलता” करार दिया, जो मुख्यमंत्री की एक सही और आवश्यक टिप्पणी थी। क्योंकि यह प्रश्न लंबे समय से अनुत्तरित है कि छोटे जिलों में इस प्रकार की घटनाएँ अचानक कैसे बढ़ रहीं हैं, और अपराधी अवसर कैसे पा रहे हैं?
राजधानी भोपाल की घटनाओं पर भी मुख्यमंत्री ने सख्ती दिखाई। राजधानी में बढ़ती लापरवाही का अर्थ पूरे प्रदेश के लिए खतरे का संकेत है। राजधानी वह आइना है जिसमें सरकार की प्राथमिकताएँ और पुलिस की सतर्कता स्पष्ट दिखती है। यह बात मुख्यमंत्री ने मीटिंग में साफ कर दी है कि “राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था अनुकरणीय होनी चाहिए, असुरक्षा का प्रतीक नहीं।”
मुख्यमंत्री के तेवरों का सार एक ही था, कि अपराध रोकना अब पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, केवल अपराधियों को पकड़ लेना ही उसका ‘काम’ नहीं है। यह सोच वर्षों से चली आ रही उस कार्यशैली को भी चुनौती देती है जिसमें पुलिस प्रायः ‘घटना के बाद की कार्रवाई’ पर जोर देती रही है, रोकथाम पर नहीं। मुख्यमंत्री का यह दृष्टिकोण स्वागत योग्य है, क्योंकि अपराधियों का मनोबल तब तक नहीं टूटता, जब तक उन्हें यह भरोसा रहता है कि पुलिस की चौकसी में कहीं न कहीं ढील है।
रायसेन एसपी का हटाया जाना आने वाले समय के लिए एक निर्णायक मोड़ होगा। यह पुलिस कप्तानों और जिलों के अधिकारियों को यह समझा रहा है कि अब आंकड़ों की रिपोर्ट नहीं, जमीन पर ठोस नतीजे मायने रखेंगे। महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों की सुरक्षा और संगठित अपराधों पर नियंत्रण,इन मोर्चों पर सरकार अब प्रत्यक्ष निगरानी करेगी और लापरवाही की कीमत तुरंत चुकानी पड़ेगी।
इस पूरी घटना का बड़ा संदेश यह है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव अब कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर राजनीतिक जोखिम लेने को भी तैयार हैं। प्रशासनिक फेरबदल हो या सख्त निर्णय,वे यह दिखा रहे हैं कि “अपराध के प्रति शून्य-सहनशीलता” केवल नारा नहीं, बल्कि क्रियान्वयन का सिद्धांत होगा।
प्रदेश की जनता यही चाहती है कि शासन की संवेदनशीलता सिर्फ बयान या दौरे तक सीमित न रहे, बल्कि धरातल पर महसूस हो। जिस तरह रायसेन की मासूम बच्ची की वेदना ने सबको झकझोरा, उसी तरह मुख्यमंत्री की कार्रवाई ने पुलिस तंत्र को जगाया है। यह जागरण तभी सार्थक होगा जब हर जिले में अपराधियों के मन में यह भय जन्म ले कि इस सरकार में गलती की नहीं, ‘अपराध की सोच’ की भी सजा है।
मध्यप्रदेश आज कानून-व्यवस्था के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। मुख्यमंत्री का यह लौह-मुष्टि वाला रुख उम्मीद जगाता है कि आने वाला समय अपराधियों के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित होगा। (विभूति फीचर्स)

स्मृतियों में उजाला बनकर सदैव जीवंत रहेंगे धर्मेन्द्र

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(विवेक रंजन श्रीवास्तव -विनायक फीचर्स)

धर्मेन्द्र जी के जाने की खबर सुनते ही हम सब के मन पर जैसे एक पुरानी रोशनी बुझने का दुख उतर आया है। वे सिर्फ फिल्मों का चेहरा नहीं थे बल्कि उन दुर्लभ कलाकारों में से थे जिनकी उपस्थिति भर से पर्दा जीवंत हो उठता था। उनमें रोमांस की कोमलता थी तो एक्शन की दृढ़ता भी थी और सबसे बढ़कर एक सरल मनुष्य की गर्मजोशी थी ।
उनकी हर भूमिका में उनके व्यक्तित्व की विशेषताएं अनायास छलक जाती थी। पंजाब के एक छोटे से कस्बाई वातावरण से उठकर मुंबई की चमक तक पहुंचने की उनकी यात्रा किसी प्रेरक गाथा से कम नहीं लगती। उन्होंने शुरुआती दौर से ही यह साबित कर दिया था कि अभिनय किसी एक खांचे में नहीं रहता बल्कि अपने भीतर कई रंगों की समृद्ध फुहार लिए कथा के नायक के अनुसार चलता है।
उनकी फिल्मों में एक सहज अपनापन दिखाई देता था। कभी वे दोस्ती की मिट्टी में लिपटे धूप जैसे लगते तो कभी पारिवारिक रिश्तों की महक में भीगे किसी बरगद की छांव जैसे। एक ओर उनका दमकता हुआ व्यक्तित्व दर्शकों को रोमांच से भर देता था और दूसरी ओर उनका भावनात्मक रूप से एक्टिंग का प्रभावी पक्ष उन्हें एक सम्पूर्ण कलाकार के रूप में स्थापित करता था। वर्षों तक वे दर्शकों के दिलों में बने रहे और पीढिय़ां उन्हें अपने अपने तरीके से याद करती रहीं।
फिल्मों से परे उनका जीवन भी उतना ही सहज और संजीदा था। उन्होंने समाज और राजनीति दोनों में अपनी भूमिका निभाई और यह साबित किया कि लोकप्रियता केवल तालियों से नहीं मापी जाती बल्कि जिम्मेदारियों से भी पहचानी जाती है। उनके चेहरे की बुझती मगर स्नेहिल मुस्कान में एक ऐसा अपनापन था जो आज भी स्मृतियों में उजाला फैलाता है।
धर्मेन्द्र जी केवल एक अभिनेता नहीं थे बल्कि एक फिल्मी युग थे जो अपनी विशालता में अनेक भावनाओं को समेटे रहा। उनकी विदाई फिल्मों के इतिहास में एक गहरी रिक्तता छोड़ गई है। वे अब इस संसार में नहीं हैं पर उनकी छवि और उनके किरदार सदैव हमारे साथ रहेंगे। ईश्वर उन्हें शांति प्रदान करे। (विनायक फीचर्स)

अन्वेषा घोष योग और जिम के जरिए खुद को रखती है एक्टिव

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अभिनेत्री अन्वेषा घोष अपने बेबाक अंदाज़ और अद्भुत अभिनय कौशल को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार है। मायानगरी मुंबई में वह बतौर अभिनेत्री काम करना चाहती हैं। इससे पहले वह कोलकाता में मॉडलिंग करती थीं और आज भी मॉडलिंग व इवेंट्स में सक्रिय हैं। ‘स्पंदन’ कंपनी में वाइस प्रेसीडेंट के रूप में काम करते हुए उन्होंने नए कलाकारों, क्रिएटिव आर्टिस्ट्स और मेकअप आर्टिस्ट्स के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अन्वेषा प्रिंट, कैलेंडर और कैटलॉग शूट में लगातार निखरती रहती हैं, और अब वह फिल्म इंडस्ट्री में बतौर अभिनेत्री अपनी मजबूत पहचान बनाना चाहती हैं। उन्हें म्यूज़िक वीडियो और आइटम सॉन्ग्स करना बेहद पसंद है। वह प्रशिक्षित कथक डांसर हैं और बॉलीवुड डांसिंग में भी उन्हें महारत हासिल है। बचपन से ही उन्हें स्टाइलिश और ग्लैमरस रहना अच्छा लगता था, और अभिनेत्री बनने का उनका सपना अब सच होने की दहलीज़ पर है।

फिटनेस के प्रति सजग अन्वेषा योग और जिम के जरिए खुद को एक्टिव रखती हैं। भाषा पर उनकी पकड़ मजबूत है और वह अपने संवादों पर खास ध्यान देती हैं। अभिनय की बात करें तो वह शाहरुख़ ख़ान और कृति सेनन की बड़ी प्रशंसक हैं, जबकि अरिजीत सिंह की गायकी उन्हें बेहद भाती है। निर्देशकों में उन्हें राजकुमार हिरानी, संजय लीला भंसाली, अनुराग बसु और इम्तियाज़ अली की फिल्में बेहद पसंद हैं, और एक दिन वह इन दिग्गजों के साथ काम करने की इच्छा रखती है।

डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म—फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम—पर अन्वेषा बेहद सक्रिय हैं। वह आधुनिक सोच रखने के साथ-साथ एक स्वाभिमानी और आत्मनिर्भर शख़्सियत हैं। उनका मानना है कि कुछ पाने के लिए मेहनत जरूरी है; सही लगन और निरंतर प्रयास से फल देर-सबेर अवश्य मिलता है। उनका विश्वास है कि शॉर्टकट से मिली कामयाबी ज़्यादा देर टिक नहीं सकती। वे मानती हैं कि माता-पिता और परिवार का सम्मान करना और उनका साथ पाना ही असली प्रेरणा है, जो इंसान को आगे बढ़ने की शक्ति देता है।

अन्वेषा घोष जैसी प्रतिभाशाली, समर्पित, आत्मविश्वासी और बहुमुखी कलाकार आज के मनोरंजन जगत में एक चमकता हुआ सितारा बनने की पूरी क्षमता रखती हैं—और उनकी मेहनत, निखार और जुनून उन्हें निश्चित ही नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे।