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ताजमहल होटल के आर्ट गैलरी में आयोजित कला उत्सव सम्पन्न

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सेलेब्रेटी कॉलोमिस्ट निशा जामवाल ने कलाकार लता बालकृष्ण के कलाकृतियों को ताजमहल होटल (मुम्बई) में आयोजित कला उत्सव प्रदर्शित की इस क्रम में उन्होंने लता बालकृष्ण के लिए की अद्भुत मेजबानी करते हुये उनके द्वारा बनाये गए  ‘मींडरिंग्स’ भी प्रस्तुत किये। निशा जामवाल द्वारा पेश किया गया ये पांच दिवसीय कला उत्सव, इस साल का कोविड के बाद का सबसे चर्चित कार्यक्रम था। प्रसिद्ध कला संग्रहकर्ता, कला प्रेमी,कौंसुल जनरल, लेखक, शीर्ष पुलिस आयुक्त, कॉर्पोरेट जगत के सीईओ, अभिनेता, गायक, मॉडल, फैशन डिजाइनर, निशा जामवाल के सभी दोस्त, रेका काला घोड़ा में एक ग्रैंड डिनर के साथ शुरू हुए इस शो में शामिल हुए।

इस खास मौके पर जापानी कॉउन्सिल जरनल डॉ फुकाहोरी यासुकाता, कोबी शोशानी इज़राइल कौंसिल जनरल , कॉउन्सिल जनरल तुर्की तोल्गा काया, लेखक अश्विन सांघी, उस्ताद अनूप जलोटा, रूप कुमार राठौड़, सारा खान, तनाज ईरानी, ल्यूक केनी, डिजाइनर ईशा अमीन, एमी बिलिमोरिया,पल्लवी जयकिशन, रोशनी दमानिया, परवेज दमानिया, शशि बंसल, मालती जैन, निदान गोवानी सहित सितारों का मेला लगा हुआ था।

बकौल निशा जामवाल आर्टिस्ट लता बालकृष्ण ने मुझे अपना काम देखने के लिए आमंत्रित किया, जैसा कि दुनिया भर के कई कलाकार इस इच्छा से करते हैं कि मैं उनके लिए एक शो की मेजबानी करूं।

मैं ज्यादा उम्मीद किए बिना चली गयी जैसा कि मैं हमेशा करती हूं।  यह कहना एक अंडर स्टेटमेंट होगा कि मैं उन कैनवस के रूप में व्याख्या करती थी जो रंगीन बारीकियों और अनुभव के दंगे के साथ जीवन के प्रवाह की बात करते हैं। छाया और धूप की चीयरोस्कोरो, बहते पानी में रंगों की बौछार को देख मैं उसकी दुनिया में खींची चली गयी। जहां ‘मैंडरिंग’ का टाइटल मेरे दिमाग में सिर्फ इसीलिए नही आई क्योंकि जलंधर की रहनेवाली, बचपन से ही दुनिया घूमने की अभिलाषी और कुछ अलग ढूंढने की उसकी प्यास थी जबकि मैंने उसके दिमाग मे कला के लिए एक यात्रा भी देखी, जो अपने आप मे अद्भुत हैं। पूरी दुनिया में महिलाओं को मल्टीटास्किंग चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और घर और बाहर के कामों को मैनेज करना होता हैं।यहां तक की चैंपियन को भी जीवन मे आनेवाली चुनौतीपूर्ण बाधाओं के ऊपर चलना होता हैं जी जिंदगी उनको देती हैं। बाहर काम करना, और घर भी चलाना,बच्चे जनना और उनका पालन-पोषण करना, परिवार की जरूरतों की देखभाल और प्रबंधन करना- एक भारतीय और संयुक्त परिवार और जहाँ पुरुषों को सबसे ऊपर समझा जाता हैं उन भावनाओ को खोदना और उसे कैनवास पर उतनी ही खूबसूरती से उभाराना बहुत बड़ी कला है।

बहुमत परीक्षण में शिंदे सरकार पास, 164 विधायकों का मिला समर्थन

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Maharashtra Live news in Hindi: महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से चल रहा सियासी ड्रामा धीरे-धीरे शांत हो रहा है। नई सरकार का गठन हो चुका है। एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। फडणवीस उपमुख्यमंत्री बने हैं। इस बीच विधानसभा के विशेष सत्र का आज दूसरा दिन है। इस दौरान विधानसभा की कार्यवाही शुरू हो गई। पहले ध्वनिमत से बहुमत पर फैसला होना था। हालांकि, विपक्ष ने इस पर एतराज जताया। इसके बाद मतदान के जरिए कार्यवाई शुरू की गई। शिंदे के पक्ष में 164 वोट पड़े, उन्होंने विश्वास मत हासिल कर लिया है।

गौ माता को खिलाने की योजना रहेगी जारी

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जमशेदपुर (ब्यूरो)। जिला मारवाड़ी सम्मेलन साकची शाखा द्वारा पहली रोटी गौ माता की कार्यक्रम के तहत टाटानगर गौशाला में 200 रोटी गौ माताओं को रोजाना खिलाते हुए रविवार को एक साल पूरे हो गये। आज फिर से इस योजना को आगे बढाते हुए शुरू किया गया। रविवार को मारवाड़ी सम्मेलन साकची शाखा द्वारा टाटानगर गौशाला में गौ माताओं को रोटी, गुड, हरी सब्जी, चारा खिलाने के साथ ही एक पोस्टर विमोचन किया गया।

मौके पर बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित समाजसेवी अशोक भालोटिया साकची शाखा के कार्यक्रम से प्रभावित हुए। उन्होंने इस कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए भविष्य में गौ सेवा के लिए हर तरह का सहयोग देने की बात कही। इस दौरान साकची शाखा महासचिव सुरेश कुमार कांवटिया एवं कोषाध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल गोल्डी ने संयुक्त रूप से बताया कि हमारे बुजुर्गों के अनुसार हाथ से फेंका पत्थर 100 फुट दूर जाता है, बन्दूक की गोली 1000 फुट दूर जाती है, तोप का गोला 5 मील दूर जाता है लेकिन एक गौमाता को दिया हुआ रोटी का टुकड़ा तो स्वर्ग के दरवाजे तक जाता है। इसलिए गौमाता की सेवा अवश्य करनी चाहिए।

टाटानगर गौशाला कमेटी अध्यक्ष कैलाश सरायवाला और महासचिव महेश गोयल ने मारवाड़ी सम्मेलन साकची शाखा की सराहना की। इस अवसर पर निर्मल काबरा, अशोक मोदी, नरेश मोदी, प्रकाश मोदी, मनीष अग्रवाल, सन्नी संघी, कमल अग्रवाल, प्रमोद झालुका, सतीश शर्मा, बबलू अग्रवाल, राजेश हरनाथका, रवि भौतिका, पुरुषोत्तम देबूका उपस्थित थे।

 

महाराष्ट्र में विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव आज,

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महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव में एक बार फिर शिवसेना के दोनों गुट आमने-सामने हैं। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने राजन सालवी को उम्मीदवार बनाया है तो भाजपा की तरफ से युवा नेता और पहली बार विधायक चुने गए राहुल नार्वेकर ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। इस चुनाव में शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की तरफ से व्हिप जारी किया गया है। लेकिन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, यह हम पर लागू नहीं होता।

सत्ता परिवर्तन के बाद बुलाए गए दो दिवसीय विधानसभा के विशेष सत्र से पहले शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे खेमे की तरफ से सचेतक सुनील प्रभु ने व्हिप जारी कर दिया है। व्हिप में कहा है, विधानसभा का विशेष सत्र 3-4 जुलाई को है। विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए राजन सालवी उम्मीदवार हैं। इस दौरान शिवसेना के सभी सदस्य सदन में मौजूद रहें।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के प्रवक्ता दीपक केसरकर ने कहा, हम विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के लिए ह्विप जारी करेंगे। मजे की बात यह है कि दोनों गुट (ठाकरे और शिंदे) शिवसेना के सभी विधायकों के वोट के दावे कर रहे हैं। शनिवार को शिंदे गुट के प्रवक्ता दीपक केसरकर ने गोवा में पत्रकारों से कहा, भाजपा के विधानसभा अध्यक्ष पद के उम्मीदवार राहुल नार्वेकर को अग्रिम बधाई देता हूं क्योंकि वे राज्य के सबसे युवा विधानसभा अध्यक्ष होंगे।

विधायकों को व्हिप जारी करने के सवाल पर उन्होंने कहा, दूसरे पक्ष को सुप्रीम कोर्ट ने कोई राहत नहीं दी है। इसलिए सचेतक भरत गोगावले व्हिप जारी करेंगे। लेकिन, आदित्य ठाकरे समेत उद्धव गुट के 16 विधायकों की सदस्यता खत्म नहीं की जाएगी।

 

प्लास्टिक पर्यावरण के साथ गोवंश के लिए अभिशाप,

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प्लास्टिक का कचरा पर्यावरण के साथ मवेशियों के लिए अभिशाप बन गया है। फेंकी गई पॉलीथीन जमीन को बंजर बनाने के साथ गोवंश को बीमार कर रही है। गोशाला लाई जाने वाली ज्यादातर गाय पॉलीथीन खाने से बीमार हैं। गाय खाना पीना छोड़ देती है और उनकी मौत हो जाती है। जांच में गायों के पेट में पॉलीथीन पाए जाने के मामले लगातार प्रकाश में आ रहे हैं।

प्लास्टिक की थैलियां का प्रयोग नुकसान दायक है। यह जानते हुए भी धड़ल्ले से इनका इस्तेमाल हो रहा है। मई 2018 को प्रदेश सरकार ने पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगा दिया, बावजूद इसके जिले में पॉलिथीन का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है।

प्लास्टिक बैग से घट रही गायों की उम्र,

घर का बचा हुआ खाना और खाद्य पदार्थ पॉलिथीन में बांध कर कूड़ेदान में फेंक देते है और भोजन खोजने वाली गाएं उसे प्लास्टिक के साथ खा लेती हैं। धीरे-धीरे उनके पेट में प्लास्टिक कचरा एकत्र हो जाता है। चिकित्सकों के मुताबिक मरने के बाद कुछ गायों के पेट से 50 से 75 किलो ग्राम प्लास्टिक कचरा पाया गया है। – कूड़ेदान में भोजन की तलाश में वाले गोवंश खाद्य पदार्थ के साथ प्लास्टिक बैग खा जाती हैं। धीरे धीरे उनके पेट में प्लास्टिक कचरा जमा होता जाता है। उनका पाचन तंत्र बिगड़ने लगता है। गायों को कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियां हो जाती है और समय से पहले उनकी मौत हो जाती है।

प्लास्टिक ज़िंदगी में घोल रही ज़हर

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प्लास्टिक के बढ़ते चलन से भले ही लोग इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहें हैं लेकिन सस्ते प्लास्टिक के नुकसान के बारे में लखनऊ के डॉक्टर विवेक अग्रवाल जनरल फीजिशियन बताते हैं, ”प्लास्टिक के डिब्बों में खाने पीने का सामान रखने से पहले उसे ठंडा रखना चाहिए वरना प्लास्टिक के रासायनिक पदार्थ खाने में मिल जाते हैं और शरीर के अंदर पहुंच कर कैंसर, आंत संबधी कई बीमारी पैदा कर सकते हैं। इन बर्तनों की सफाई का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए इन्हें हमेशा गर्म पानी में धोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए वरना ये नुकसान पहुंचा सकते हैं।”

सस्ते और प्लास्टिक के ज्यादा प्रयोग से पर्यावरण और मानव जीवन पर क्या असर पड़ सकता है, इस विषय पर भीमराव अम्बेडकर के प्रोफेसर और वैज्ञानिक डॉ नवीन अरोड़ा कहते हैं, प्लास्टिक एक पालीमर है, जो कि कई पदार्थों के मिश्रण से बना होता है। प्लास्टिक बनाने में नायलॉन, फिनोलिक, पौलीसट्राइन, पौलीथाईलीन, पौलीविनायल, क्लोराइड, यूरिया फार्मेलीडहाइड व अन्य पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के लिए कुछ तरह के जूते चप्पल पहनने से हमारे पैरों में एलर्जी और त्वचा में खुजली और जलन होती है। ऐसा इसलिए होता है कि उन जूते चप्पलों में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक घटिया किस्म का होता है। इतने सारे रसायनों से बने पदार्थ में जब हम खाने पीने क़ी चीजें रखेंगे तो जाहिर है कि इन रसायनों के कुछ पदार्थ खाने पीने की चीजों में मिल जाएंगे। प्लास्टिक का पुन:चक्रीकरण नहीं हो पाता। कूड़े में पड़े प्लास्टिक को जानवर खाकर मर जाते हैं।

प्लास्टिक की बोतल-टिफिन से कैंसर का भी खतरा,

रिसर्च से ये बात सामने आई है कि प्लास्टिक के बोतल और कंटेनर के इस्तेमाल से कैंसर हो सकता है। प्लास्टिक के बर्तन में खाना गर्म करना और कार में रखे बोतल का पानी कैंसर की वजह हो सकते हैं। कार में रखी प्लास्टिक की बोतल जब धूप या ज्यादा तापमान की वजह से गर्म होती है तो प्लास्टिक में मौजूद नुकसानदेह केमिकल डाइऑक्सिन का रिसाव शुरू हो जाता है। ये डाईऑक्सिन पानी में घुलकर हमारे शरीर में पहुंचता है। इसकी वजह से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. वीरसिंह ने एक प्रेस कांफ्रेन्स में बताया कि सिर्फ पन्नी ही नहीं, बल्कि रिसाइकिल किए गए रंगीन या सफेद प्लास्टिक के जार, कप या इस तरह के किसी भी उत्पाद में खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ का सेवन स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। इनमें मौजूद बिसफिनोल ए नामक जहरीला पदार्थ बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक है। प्लास्टिक के घातक तत्वों के खाद्य पदार्थों एवं पेय पदार्थों के माध्यम से शरीर में पहुंचने से मस्तिष्क का विकास बाधित होता है। इसका बच्चों की स्मरण शक्ति पर सर्वाधिक विपरीत असर पड़ता है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने वक्त-वक्त पर प्लास्टिक और पॉलिथीन के इस्तेमाल के बारे में कई आदेश जारी किए हैं। इनमें एक आदेश पिछले साल दिसंबर का है। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए नॉन डिस्पोजेबल प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया था। एनजीटी ने 50 माइक्रोन से पतली प्लास्टिक पर बैन कर दिया है। 50 माइक्रोन से नीचे की प्लास्टिक की न तो मैन्युफैक्चरिंग और न ही सेल की जा सकती है।

इस बैन में प्लास्टिक के वे डिस्पोजेबल कप और गिलास भी आते हैं जिन पर पतली पॉलिथीन की लेयर होती है या पतली प्लास्टिक से बने होते हैं। 50 माइक्रोन से ज्यादा के प्लास्टिक को री-साइकल किया जा सकता है, जबकि 50 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक के साथ ऐसा नही किया जा सकता। इस वजह से पर्यावरण को काफी नुकसान होता है।

जून, 2022 में 1.44 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा GST कलेक्शन

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जून महीने में जीएसटी कलेक्शन 1,44,616 करोड़ रुपये रहा है. अप्रैल 2022 में 1,67,540 करोड़ रुपये जीएसटी कलेक्शन रहा था उसके बाद जून का ये जीएसटी कलेक्शन का आंकड़ा दूसरा सबसे अधिक है. बीते वर्ष 2021 के जून महीने के मुकाबले जीएसटी कलेक्शन में 56 फीसदी का उछाल है. कुल कलेक्शन में सीजीएसटी (CGST) 25,306 करोड़ रुपये रहा तो एसजीएसटी (SGST) 32,406 करोड़ रुपये रहा है. IGST कलेक्शन 75,887 करोड़ रुपये रहा जिसमें 40,102 करोड़ रुपये आयातित सामानों से आया है. सेस कलेक्शन 11,018 करोड़ रुपये रहा है.

जून महीने में केंद्र और राज्य सरकार का रेवेन्यू रेग्युलेर और एडहॉक सेटलमेंट के बाद 68,394 करोड़ रुपये सीजीएसटी के लिए रहा है तो 70,141 करोड़ रुपये एसजीएसटी के लिए रहा है. बीते वर्ष जून में जीएसटी कलेक्शन 92,800 करोड़ रुपये रहा है. उससे 56 फीसदी कलेक्शन जून, 2022 में रहा है. देश में 1 जुलाई 2017 को जीएसटी टैक्स सिस्टम के लागू होने के बाद से ये पांचवा मौका है जब मंथली जीएसटी कलेक्शन का आंकड़ा 1.40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रहा है. वहीं इस वर्ष मार्च महीने से हर महीने लगातार चौथे महीने कलेक्शन 1.40 लाख रुपये से ज्यादा रहा है.

 

2022-23 वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानि अप्रैल से जून के बीच औसत जीएसटी कलेक्शन 1.51 लाख करोड़ रहा है जबकि 2021-22 की पहली तिमाही में जीएसटी कलेक्शन औसतन 1.10 लाख करोड़ रुपया रहा था. यानि पिछले वर्ष की पहली तिमाही के मुकाबले मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीएसटी कलेक्शन 37 फीसदी बढ़ा है. दरअसल आर्थिक गतिविधि में तेजी, जीएसटी चोरी रोकने के लिए उठाये गए कदम खासतौर से फर्जी बिल बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के चलते जीएसटी कलेक्शन बढ़ा है.

देश में सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ महाभियान शुरू,

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हमारे देश में प्लास्टिक के कचरे को लोग गम्भीरता से नहीं लेते. सरकार प्लास्टिक पर बैन तो लगाती है लेकिन लोगों को लगता है कि प्लास्टिक ही तो है, इससे क्या हो जाएगा. हालांकि आज यानी शुक्रवार से हमारे देश में प्लास्टिक से आजादी दिलाने के लिए एक बड़ा आन्दोलन शुरू होने जा रहा है.

19 तरह के सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लागू,

एक जुलाई से भारत में 19 तरह के सिंगल यूज प्लास्टिक (Single Use Plastic) के Items पर बैन लग जाएगा. सिंगल यूज़ प्लास्टिक वो होता है, जिसका इस्तेमाल एक बार ही होता है और फिर उसे फेंक दिया जाता है. सिंगल यूज प्लास्टिक को रिसाइकल भी नहीं किया जा सकता. सरकार ने जिन 19 Items पर रोक लगाने का फैसला किया है, उनमें प्लास्टिक के Straw हैं, जिनसे आप जूस या कोई दूसरी Drink पीते हैं. प्लास्टिक स्टिक्स वाले Earbuds, प्लास्टिक स्टिक्स वाले गुब्बारे, Candy Sticks, Ice Cream Sticks, सजावट में इस्तेमाल होने वाला Thermocol, प्लास्टिक के कप, प्लास्टिक के झंडे, प्लास्टिक के चाकू-छुरी, ट्रे, प्लास्टिक की मिठाई के डिब्बे, शादी के कार्ड पर इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक शीट, मिठाई के डिब्बे पर इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक शीट और सिगरेट के पैकेट पर लगी प्लास्टिक की पन्नी भी इसमें शामिल है.

देश में हर साल निकलता है 35 लाख टन कचरा,

पर्यावरण मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में हर साल 35 लाख टन प्लास्टिक का कचरा पैदा होता है. यानी इस हिसाब से हर भारतीय सालाना ढाई किलोग्राम प्लास्टिक का कचरा पैदा करता है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक (Single Use Plastic) के जिन 19 Items पर प्रतिबंध लगाया है, प्लास्टिक के कुल कचरे में उनकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत है. यानी 40 प्रतिशत कचरा इन 19 Items से ही पैदा होता है. ये कचरा पर्यावरण को कैसे नुकसान पहुंचाता है, इसका अन्दाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि भारत की नदियों और समुद्र में हर साल 15 करोड़ टन प्लास्टिक का कचरा फेंका जाता है. जबकि गंगा नदी में हर साल डेढ़ करोड़ टन प्लास्टिक का कचरा फेंका जाता है.

यानी एक तरफ हमारे देश के लोग गंगा नदी की सौगंध खाते हैं. दूसरी तरफ उसी गंगा में प्लास्टिक का कचरा भी फेंकते हैं. अगर सिर्फ दिल्ली की बात करें तो दिल्ली में हर रोज 1 हज़ार 140 टन प्लास्टिक का कचरा पैदा होता है, जिसमें से 632 टन प्लास्टिक का कचरा सिंगल यूज़ प्लास्टिक Items का होता है.

सेहत को नुकसान पहुंचा रहा प्लास्टिक,

हालांकि एक सच ये भी है कि आज बड़ी बड़ी कम्पनियां और लोग प्लास्टिक पर इस कदर निर्भर हो चुके हैं कि ऐसा लगता है कि एक बार के लिए भारत अंग्रेजों से आजाद हो गया. लेकिन प्लास्टिक से आजाद होना बड़ा मुश्किल है. लेकिन सरकार ने इसके खिलाफ आजादी के जैसी ही मुहिम शुरू की है. इसके लिए एक ऐप भी बनाया गया है. ये आपके काम की ख़बर तो है ही, साथ ही ये आपकी जान से जुड़ी ख़बर भी है. प्लास्टिक सिर्फ पर्यावरण के स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि ये अब इंसानों के खून, फेफड़े और Liver तक पहुंच चुका है.

भारत की बड़ी कामयाबी, देश के पहले पालयट रहित लड़ाकू विमान का डीआरडीओ ने किया सफल परीक्षण

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मानव रहित लड़ाकू विमान विकसित करने की दिशा में भारत को एक बड़ी सफलता मिली है। डीआरडीओ ने शुक्रवार को ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्सट्रेटर के पहले एयरक्राफ्ट का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। इस विमान की खासियत यह है कि ये बिना पायलट के उड़ान भर सकता है। टेकऑफ से लेकर लैंडिंग तक का पूरा काम बिना किसी मदद के अंजाम दे सकता है।

चित्रदुर्ग स्थित एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में सफल परीक्षण,

डीआरडीओ ने एक बयान में बताया कि इस परीक्षण को शुक्रवार को कर्नाटक के चित्रदुर्ग स्थित एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। मानव रहित हवाई वाहन यानी अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) को ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्सट्रेटर कहा जाता है। वहीं रक्षा  मंत्रालय ने कहा कि विमान पूरी तरह से ऑटोनॉमस मोड में संचालित हुआ था। एयरक्राफ्ट ने एक सफल उड़ान भरी जिसमें टेक ऑफ, वे प्वाइंट नेविगेशन और स्मूथ टचडाउन शामिल हैं। ये विमान भविष्य की बिना पायलट के चलने वाले विमानों को विकसित करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। साथ ही आत्मनिर्भरता की दिशा में एक जरूरी कदम भी है।

डीआरडीओ ने कहा कि एयरक्राफ्ट ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी। खुद ही इस परीक्षण को अंजाम दिया। यह सामरिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भता की दिशा में अहम कदम है। इस एयरक्राफ्ट को बेंगलुरू स्थित एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एडीई) ने डिजायन और विकसित किया है। एडीई डीआरडीओ के तहत एक प्रमुख रिसर्च लोबोरेटरी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ को बधाई दी है।

 

एशिया महादेश का सबसे पुराना निरंतर प्रकाशित एवं प्रसारित दैनिक समाचार -पत्र ‘मुंबई समाचार’

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१ जुलाई १८२२ को पहला अंक प्रकाशित हुआ था ,यह अखबार अपने आपमें इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज तो है ही, इसकी यह इमारत भी अब हैरिटेज बिल्डिंग का दर्जा पा चुकी है। इसके चार साल पहले १८१८ में देश की क्षेत्रीय भाषाओं में पहला अखबार ‘समाचार दर्पण’ बंगला भाषा में ‘ प्रकाशित होना शुरु हुआ था। आज उस बंगाली अखबार का कोई अता -पता नहीं है किन्तु मगर मुंबई समाचार न सिर्फ मौजूद है बल्कि लगातार नयी-नयी मंजिलें तय कर रहा है।
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– राजेश झा

प्रिंट मीडिया के लड़खड़ाते परिवेश में दो सौ वर्ष पुराना हुआ दैनिक ‘मुंबई समाचार ‘नामक गुजराती अखबार अपने आपमें एक करिश्मा है । एक ऐसे दौर में जब खबरों की तरह ही प्रिंट मीडिया विशेषकर अखबारों की भी उम्र लगातार कम हो रही हो ,एक -से -बढ़कर एक स्थापित अखबारों से लगातार पत्रकारों की छंटनियों, उनके साप्ताहिक परिशिष्टों के खात्मे के साथ-साथ खुद उनके अस्तित्व पर मंडराते संकट की सूचनाएं मिल रही हों इतना ही नहीं मीडिया के राजस्व में प्रिंट मीडिया की हिस्सेदारी पिछले एक दशक में लगातार कम हो रही है – ऐसी असंख्य निराशाजनक बातों के बीच मुंबई से प्रकाशित गुजराती अखबार ‘मुंबई समाचार’ के प्रकाशन के २०१ वें वर्ष में प्रवेश की बात अनूठी है।‘मुंबई समाचार’ अकेले हिंदुस्तान का ही नहीं बल्कि पूरे एशिया का लगातार प्रकाशित सबसे पुराना अखबार है। यह सब देश की भाषाई पत्रकारिता के लिए किसी गौरवगाथा से कम नहीं है।

यह तथ्य सुनने में ही बहुत रोमांचक लगता है कि २०१ वर्ष पहले यानी १ जुलाई १८२२ को मुंबई समाचार, मुंबई के जिस हार्निमन सर्कल स्थित बिल्डिंग से छपना शुरु हुआ था, आज भी यह इसी दो मंजिल की लाल रंग वाली बिल्डिंग से छप रहा है। बिल्डिंग के एक हिस्से में आज भी वे मशीनें रखी हुई हैं जिनसे एक सदी पहले अखबार छपा करता था। यह अखबार अपने आपमें इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज तो है ही, इसकी यह इमारत भी अब हैरिटेज बिल्डिंग का दर्जा पा चुकी है। अपने आपमें दो सदियों का इतिहास समेटे मुंबई समाचार १८२२ में एक पारसी कारोबारी फर्दूंजी मर्जबान के द्वारा साप्ताहिक ‘मूंबिना समाचार’ के रूप में प्रकाशित होना शुरु हुआ था। जब गुजराती भाषा में यह साप्ताहिक प्रकाशित होना शुरु हुआ। इसके चार साल पहले १८१८ में देश की क्षेत्रीय भाषाओं में पहला अखबार ‘समाचार दर्पण’ बंगला भाषा में ‘ प्रकाशित होना शुरु हुआ था। हालांकि आज इस बंगाली अखबार का कोई नामोनिशान नहीं बाकी। मगर मुंबई समाचार न सिर्फ मौजूद है बल्कि लगातार नयी-नयी मंजिलें तय कर रहा है।

इस तरह देखा जाए तो मुंबई समाचार सिर्फ इतिहास ही नहीं है,अपने आपमें एक सतत इतिहास है, जो इस बात की गवाही होता है कि वह कुछ खास है तभी अभी तक उसका अस्तित्व है। जिस दौर में देश के बड़े से बड़े अखबारों ने अपनी तमाम साप्ताहिक परिशिष्टों को अखबार के नियमित पन्नों में बदल दिया हो, उस दौर में भी मुंबई समचार अकेला ऐसा अखबार है जो आज भी सप्ताह के सातों दिन मुख्य अखबार के साथ एक साप्ताहिक परिशिष्ट का प्रकाशन करता है, जिसमें सिर्फ गुजराती भाषा के ही तमाम प्रतिष्ठित लेखक, पत्रकार और विद्वान ही नहीं छपते बल्कि अलग-अलग भाषाओं के विद्वान भी यहां नियमित रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। यह अखबार की पाठकीय साख का प्रमाण है कि डेढ़ लाख से अधिक की संख्या में हर दिन छपने वाले इस अखबार को गुजराती समाज में न सिर्फ बहुत गंभीरता से लिया जाता है बल्कि आज भी जब सूचनाओं के अनंत माध्यम विकसित हो गये हैं, मुंबई समाचार के पाठक सूचना पाने के लिए अपने इस प्रिय अखबार पर भरोसा करते हैं।

देश की प्रिंट मीडिया और खासकर क्षेत्रीय भाषाओं की प्रिंट मीडिया इस ऐतिहासिक अखबार से क्या सीख सकते हैं? निश्चित रूप से अपना अस्तित्व बनाये रखने की कला जो कि एक नियमित अनुशासन से आती है। अखबार के मौजूदा युवा संपादक नीलेश दवे का कहना है, ‘निश्चित रूप से यह गर्व का विषय है कि मुंबई समाचार दुनिया के उन गिने -चुने अखबारों में से है, जिन्होंने यह इतिहास बनाया है। लेकिन महत्वपूर्ण सिर्फ अखबार का अस्तित्व होना भर नहीं है बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि इतने साल गुजर जाने के बाद आज भी ‘ मुुंबई समाचार ‘ अत्यंत प्रासंगिक है। उनके मुताबिक, ‘हम आज भी अपने संस्थापकों की उन नीतियों का पालन करते हैं, जिन नीतियों को मजबूत बनाने के लिए इस अखबार की दो शताब्दियों पहले नींव पड़ी थी। आज जब ज्यादातर अखबार बड़े कार्पोरेट विज्ञापनदाताओं को अपने प्रथम पेज में जगह देते हैं, तब भी हम अपने छोटे विज्ञापनदाताओं को अपने पहले पेज में जगह देते हैं। यह महज कारोबार नहीं है, यह उनके और हमारे बीच एक सम्मान और भावनाओं का रिश्ता है।

हमारे अखबार की संपादकीय नीति हमेशा से सनसनीखेज मामलों को उछालने से बचने की रही है। हम कभी भी हंगामों पर भरोसा नहीं करते। हमने हमेशा अपनी स्वतंत्र संपादकीय नीति को महत्व दिया है। हम घटनाओं की ईमानदारी से तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पर बल देते हैं।’देश की आजादी के लिए लड़े गये पहले स्वतंत्रता संग्राम १८५७ से भी पहले प्रकाशित होना शुरु हुए ‘मुंबई समाचार’ की हमेशा से प्राथमिकता, गुजराती भाषा, समाज और संस्कृति को मजबूती देना रहा है।अखबार शुरु में १०साल तक साप्ताहिक के रूप में निकला था और फिर अगले लगभग दो दशकों तक पाक्षिक रूप में निकला था। अखबार का वर्तमान स्वरूप १८५५ से अभी तक एक समान है, जो न केवल संस्थान की नीतियों में स्थिरता बल्कि पाठकों के साथ विश्वसनीयता भरे रिश्तों का भी सबूत है। अखबार की स्थापना एक पारसी कारोबारी ने किया था और आज भी संस्थान के मालिक कामा परिवार के लोग हैं जो पारसी समुदाय से रिश्ता रखते हैं।

मुंबई समाचार से देश के तमाम अखबार खासकर क्षेत्रीय भाषाओं के अखबार बहुत कुछ सीख सकते हैं। सबसे पहली बात तो उन्हें मुंबई समाचार से यह मजबूत सीख मिलती है कि कोई भी अखबार अपने पाठकों के विश्वसनीय रिश्ते के बिना स्थिरता और मजबूती नहीं हासिल कर सकता। पाठकों के बीच किसी भी मीडिया प्रकाशन की विश्वसनीयता तभी बनती है, जब वह उन्हें लगातार सजग रहते हुए ईमानदार सूचनाएं और विश्लेषण मुहैय्या कराता है। अपने तात्कालिक कारोबारी फायदों के लिए जब मीडिया प्रकाशन अपने पाठक समुदाय का ख्याल नहीं रखते, उनके साथ इज्जत और ईमानदारी का बरताव नहीं करते तो किसी भी प्रकाशन का चाहे वह जिस माध्यम का प्रकाशन हो, उसके पाठक भी उसके साथ स्थायी रिश्ता नहीं रखते।