Home Blog Page 571

खालिस्तानी आतंकियों का OCI कार्ड होगा रद। एनआईए ने जारी की 19 खालिस्तानी आतंकियों की सूची

0
नई दिल्ली, आईएएनएस। एनआईए द्वारा कनाडा स्थित ‘नामित आतंकी’ गुरपतवंत सिंह पन्नू की संपत्तियों को जब्त करने के एक दिन बाद केंद्र सरकार ने जांच एजेंसियों से विदेश में बैठे भारत में वांछित अन्य आतंकियों की संपत्तियों की पहचान करने को कहा है।

ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया कार्ड होगा रद

सूत्रों ने कहा कि सरकार ने एजेंसियों से अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और आस्ट्रेलिया में बसे खालिस्तान समर्थक आतंकियों की पहचान करने और उनका ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड रद करने को कहा है, ताकि वे भारत न आएं।

एक दिन पहले NIA ने किया था पन्नू की संपत्तियों को जब्त

सरकार की यह योजना एनआईए द्वारा चंडीगढ़ और अमृतसर में पन्नू की संपत्तियों को जब्त करने के एक दिन बाद आई है। इस कदम से सरकार को भारत से इन आतंकवादियों की फंडिंग रोकने में मदद मिलेगी और उन्हें यहां आने की अनुमति भी नहीं मिलेगी।

सरकार की कार्रवाई से आतंकियों से निपटने में मिलेगी मदद

सूत्रों ने कहा कि सरकार की कार्रवाई से ओसीआई कार्ड के साथ विदेश में रह रहे आतंकियों से निपटने में मदद मिलेगी और भारत में उनकी गतिविधियों पर रोक लगेगी। इससे वे भारत में भोले-भाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए निशाना नहीं बना सकेंगे।

साइबरस्पेस का दुरुपयोग कर रहा था पन्नू का संगठन

पन्नू मामले में एनआईए की जांच से पता चला है कि उसका संगठन सिख्स फॉर जस्टिस भोले-भाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें अपराध और आतंकी गतिविधियों की खातिर उकसाने के लिए साइबरस्पेस का दुरुपयोग कर रहा था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पन्नू सिख्स फार जस्टिस का मुख्य संचालक था। भारत सरकार द्वारा 10 जुलाई, 2019 को एसएफजे को ‘गैरकानूनी संगठन’ घोषित किया गया था।

आरोग्य मंथन 2023 का आयोजन , NHA नई दिल्ली में दो दिवसीय आरोग्य मंथन कार्यक्रम की मेजबानी करेगा

0
New Delhi आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जय) के पांच साल और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के दो साल पूरे होने पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) ‘आरोग्य मंथन’ कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में दो दिवसीय कार्यक्रम (25 और 26 सितंबर 2023) के दौरान दोनों योजनाओं से संबंधित चुनौतियों, रुझानों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर ज्ञानवर्धक चर्चाओं और विचार-विमर्श का आयोजन होगा।
आरोग्य मंथन 2023 में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और रसायन और उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया मुख्य भाषण देंगे। एबी पीएम-जय के कार्यान्वयन की पांचवीं वर्षगांठ और एबीडीएम के कार्यान्वयन की दूसरी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में राज्य मंत्री (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी. के. पॉल, सचिव (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण), श्री सुधांश पंत और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) उपस्थित रहेंगे।
राज्य मंत्री (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण), प्रोफेसर एस.पी. सिंह बघेल, 25 सितंबर 2023 को निर्धारित उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करेंगे। उद्घाटन सत्र के दौरान राज्य मंत्री (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण) डॉ. भारती प्रविण पवार वर्चुअल रुप से अपना संबोधन देंगी। इस कार्यक्रम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के नीति निर्माताओं, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ-साथ शिक्षा, थिंक-टैंक, उद्योग और मीडिया के प्रतिनिधियों सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की सक्रिय भागीदारी होगी।
23 सितंबर 2018 को लॉन्च किए गए आयुष्मान भारत पीएम-जय ने स्वास्थ्य, उत्पादकता और समृद्धि की नई गाथा लिखी है। इस योजना के 5.5 करोड़ लाभार्थी नि: शुल्क अस्पतालों में भर्ती हुए जिस पर सरकार द्वारा 69,000 करोड़ रुपये मूल्य का व्यय किया गया। इस योजना ने न केवल करोड़ों गरीबों और वंचित परिवारों के लिए अच्छा स्वास्थ्य सुनिश्चित किया है, बल्कि उनके परिवारों को स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले विनाशकारी व्यय से भी बचाया है।
27 सितंबर 2021 को लॉन्च की गई एबीडीएम सरकार की एक बहुत ही महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य देखभाल पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न हितधारकों को जोड़ने वाला एक डिजिटल मार्ग बनाना है। पिछले 2 वर्षों में 45 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (एबीएचए) बनाए गए हैं। इसके अलावा, 30 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड इन एबीएचए खातों से जुड़े हुए हैं। योजना का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाना है।
दोनों प्रमुख स्वास्थ्य देखभाल योजनाओं का लक्ष्य भारत में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) के दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए सुलभ, उपलब्ध, किफायती और स्केलेबल स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है।
आरोग्य मंथन में एबी पीएम-जय और एबीडीएम के विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक पैनल चर्चा और इंटरैक्टिव सत्र होंगे। उद्घाटन सत्र के बाद ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज, कन्वर्जेंस और डिजिटल हेल्थ’ पर एक पूर्ण सत्र होगा, इसके अलावा दो प्रमुख योजनाओं के कार्यान्वयन से संबंधित विभिन्न सत्र होंगे।
एनएचए इस कार्यक्रम के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी सम्मानित करेगा।

 

प्रधानमंत्री ने युवाओं को जी20 यूनिवर्सिटी कनेक्ट फिनाले में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया

0
File Photo

New Delhi – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं को इस महीने की 26 तारीख को जी20 यूनिवर्सिटी कनेक्ट फिनाले में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने “जी20 यूनिवर्सिटी कनेक्ट-इनकरेजिंग अवर युवा शक्ति” शीर्षक से एक लिंक्डइन पोस्ट भी साझा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया और ट्वीट करते हुए आह्वाहन किया
“मेरे युवा मित्रों,
मैं इस महीने की 26 तारीख को जी20 यूनिवर्सिटी कनेक्ट फिनाले में आपके भाग लेने की प्रतीक्षा कर रहा हूं। पिछले वर्ष, जी20 यूनिवर्सिटी कनेक्ट, भारत की जी-20 प्रेसीडेंसी के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को प्रमुखता से सामने लाने के लिए एक बड़े मंच के रूप में उभरा है।
मैं आपसे विविध मुद्दों पर विचारों के जीवंत आदान-प्रदान की आशा करता हूं।

उत्तराखंड News – स्वच्छ नदियों के लिए प्रदेश भर में चलाया गया स्वच्छता अभियान

0
24सितम्बर 2023,रविवार,  हरिद्वार( उत्तराखंड ),बाहदराबाद के ग्राम औरंगाबाद में स्वच्छता अभियान के माध्यम से लोगों को किया गया जागरूक  उत्तरकाशी में स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत मां गंगा के किनारे एवं घाटों पर चलाया गया स्वच्छता अभियान आवासीय एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिनांक 15 सितम्बर से 02 अक्टूबर तक स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा का आयोजन देशभर में किया जा रहा है। इसी के तहत आज दिनांक 24 सितम्बर को विश्व नदी दिवस के अवसर पर उत्तरखंड राज्य की शहरी निकायों में स्वच्छ नदियांः बेहतर कल का अवसर विशय पर नदी घाटी /किनारों/अमृत सरोवरों/नौलों/अन्य जल स्रोतों के समीप वृह्द स्वच्छता अभियान व जागरूकता अभियान चलाया गया तथा कई निकायों में अभियान चलाया जायेगा।
इस अवसर पर स्थानीय व राष्ट्रीय महत्व की 22 से अधिक नदियों/बरसाती नदियों/गाढ़ यथा भागीरथी, अलकनन्दा, नन्दाकिनी, भिलंगना, रामगंगा, सरयू, गोमती, पिंडर, पूर्वी नायर, आसन, बिन्दाल, रिस्पना, सौंग, सोलानी, षिप्रा, जलकुर, बहला, लपकना, लेवरा, गडरी, कल्याणी, बाउली साहिब, बड़ी नदी, कमल नदी आदि के घाटों/किनारों पर तथा अमृत सरोवोरों, नौलों व अन्य जल स्रोतों के निकट भी नागरिकों के सहयोग से विषेश स्वच्छता अभियान चलाया गया तथा नागरिकों को स्वच्छता की शपथ भी दिलायी गयी।
इस दौरान घाटों/जल स्रोतों के निकट, 100 से अधिक गारबेज वल्नरेबल प्वाईंट की सफाई की गयी और नदियों में मिलने वाले 60 से अधिक नालों में जाल लगाये गये या पुराने खराब जाल बदले गये। 107 से अधिक स्थानों पर कूड़ा फेंकना निषेध है के संदेशात्मक बोर्ड भी लगाये गए। अभियान के दौरान 375 से अधिक हरे/नीले कूड़ेदान (100 ली0 से कम क्षमता के) लगाये गये और 428 से अधिक नागरिकों द्वारा स्वच्छता अभियान की सेल्फी स्वच्छता ही सेवा पोर्टल पर अद्यतन की गयी। ये अभियान नदी घाटों/अन्य जल स्रोतों के निकट 45 वर्ग किलो मीटर से अधिक क्षेत्र में चलाया गया। इस दौरान 2335.50 किलो गीला तथा 6241.50 किलो सूखा कुल 8577 किलो से अधिक कूड़ा एकत्र किया गया। इसमें लगभग 10000 से अधिक युवाओं/नागरिकों/निगम कार्मिकों/स्वयं सहायता समूहों/अन्य के द्वारा स्वेच्छा से इस स्वच्छता अभियान में प्रतिभाग किया गया।
इस अवसर पर देहरादून तथा बागेश्वर द्वारा साईकिल रैली भी निकाली गयी, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं व अन्य नागरिकों द्वारा भाग लिया गया।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं और नागरिकों को नदियों के महत्व के बारे में जागरूक करना, नदियों को कचरा मुक्त करना तथा नदियों को स्वच्छ कर इनकी धारा को अविरल बनाये रखना है। ताकि आने वाला कल इन स्वच्छ नदियों/जल स्रोतों से नई पीढ़ी को बेहतर अवसर प्रदान कर सके।
उत्तरकाशी में जिला गंगा समिति स्वज़ल विभाग एवं नगर पालिका परिषद के तत्वाधान में स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के अंतर्गत मां गंगा के किनारे एवं घाटों पर आज वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया.
हरिद्वार जिले के ब्लॉक बाहदराबाद के ग्राम औरंगाबाद के लाइट हाउस इनिसिटिव ग्राम में निदेशक स्वजल महोदय द्वारा एवं हिमाली जोशी, श्री सुनील तिवारी यूनिट कोऑर्डिनेटर आईटीसी के कार्मिकों और डीपीएमयू हरिद्वार की टीमों द्वारा ग्राम वासियो की उपस्थिति में स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा अवधि मे आयोजित कार्यक्रम में निदेशक महोदय द्वारा स्वच्छता शपथ दिलाई गई साथ ही पर्यवारण मित्रों को सम्मानित किया गया और क्लीन ड्राइव के अंतर्गत लिगेसी वेस्ट का निस्तारण किया भी किया गया। निदेशक महोदय द्वारा समस्त लोगों से अपील की गई कि सभी लोग स्वच्छता को व्यवहार मे लाएं और सप्ताह मे एक घंटे स्वच्छता हेतु श्रमदान करें। ही साथ सूखा और गीला कूड़ा का सेग्रीगेशन अपने अपने घर पर अनिवार्य रूप से करे। कूड़ा वाहन के माध्यम से निस्तारण हेतु कूड़ा वाहन में ही रखें।
ग्राम प्रधान श्रीमती कमलेश देवी की अध्यक्षता में ये कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिला पंचायत सदस्य श्रीमती विमलेश देवी के साथ महिला समहू के सदस्यों और स्कूल के बच्चों व ग्राम वासियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती 25 सितम्बर पर स्मरण-दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद दर्शन

0

विभूति नारायण ओझा –

एकात्म मानववाद मानव जीवन के सम्पूर्ण सृष्टि सम्बन्ध का दर्शन है। एकात्म मानववाद एक ऐसी धारणा है, जो सर्पिलाकार मण्डलाकृति द्वारा स्पष्ट की जा सकती है, जिसके केन्द्र में व्यक्ति, व्यक्ति से जुड़ा हुआ एक घेरा परिवार, परिवार से जुड़ा हुआ घेरा समाज, जाति फिर राष्ट्र, विश्व और फिर अनंत ब्रह्माण्ड को अपने में समाविष्ट किये है। इस अखण्ड मण्डलाकार आकृति में एक घटक में से दूसरे,फिर दूसरे से तीसरे का विकास होता जाता है। सभी एक दूसरे से जुड़कर अपना अस्तित्व साधते हुए एक-दूसरे के पूरक एवं स्वाभाविक सहयोगी हैं। इनमें कोई संघर्ष नहीं है।  एकात्म मानववाद में मानव जाति की मूलभूत आवश्यकताओं और सृजित कानूनों के अनुरुप राजनीतिक कारवाई हेतु एक वैकल्पिक सन्दर्भ दिया गया है।
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय मानव को विभाजित करके देखने के पक्षधर नहीं थे। वे मानव-मात्र का हर उस दृष्टि से मूल्यांकन की बात करते हैं, जो उसके सम्पूर्ण जीवन काल में छोटी अथवा बड़ी जरुरत के रुप में सम्बन्ध रखता है। विश्व के इतिहास में ‘मानव- मात्र‘ के लिए अगर किसी एक विचार दर्शन ने समग्रता में चिंतन प्रस्तुत किया है तो वो ‘एकात्म मानववाद दर्शन‘ है। उनके अनुसार व्यक्ति शरीर में बुद्धि व आत्मा का एक समुच्चय है। अतः मानव के सन्दर्भ में इन चारों को विभाजित करके नहीं देखा जा सकता है, में परस्पर अंर्तसम्बन्ध हैं। एकात्म मानववाद उनके चिन्तन की एक ऐसी मौलिकता है, जो भारतीय इतिहास, परम्परा, राजनीति और भारतीय अर्थनीति के समावेशी धरातल पर स्थित है।
एकात्म मानववाद मानव में संवेदनशीलता की पुर्नस्थापना का एक सशक्त माध्यम हो सकता है।  इसलिए मानववाद जहाँ मानव को सम्पूर्ण सत्ता के केन्द्र में रखता है तो वहीं एकात्म मानववाद मानव मात्र की तात्विक एकता का सिद्धान्त है जो मानव के समग्र विकास का आधार है। उपाध्याय जी का मानना था कि ‘‘भारत में रहने वाला और इसके प्रति ममत्व की भावना रखने वाला मानव समूह एक जन है। उनकी जीवन प्रणाली, कला, साहित्य और दर्शन सब भारतीय संस्कृति है जो राष्ट्रवाद का आधार है। इस संस्कृति में निष्ठा रखे तभी भारत एकात्म होगा।‘‘
भारत में नैतिकता को सिद्धान्तों के अनुसार बदला जाता है, तब हमें संस्कृति और सभ्यता प्राप्त होते हैं। उपाध्याय जी का मानना है कि ‘‘शिक्षा और संस्कार से ही समाज के जीवन मूल्य बनते और सुदृढ़ होते हैं।‘‘ भारत में हमने अपने समक्ष मानव के समग्र विकास के लिए शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा की आवश्यकताओं की पूर्ति उसकी विविध कामनाओं, इच्छाओं तथा एकताओं की सन्तुष्टि और उसके सर्वांगीण विकास की दृष्टि से व्यक्ति के सामने कर्तव्य रूप में भारतीय संस्कृति में चतुर्विध पुरूषार्थ- धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की कल्पना की  है। पुरूषार्थ का अर्थ उन कर्मों से है जिनसे पुरूषत्व सार्थक है।  पुरूषार्थ की कामना मनुष्य में स्वाभाविक होती है और उनके पालन से उसको आनन्द प्राप्त होता है।
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय भारत के सबसे तेजस्वी, तपस्वी एवं यशस्वी चिन्तक रहे हैं।  उनके चिन्तन के मूल में लोकमंगल और राष्ट्र का कल्याण समाहित है। उन्होंने राष्ट्र को धर्म, अध्यात्म और संस्कृति का सनातन पुंज बताते हुये राजनीति की नयी व्याख्या की। वह गांधी जी, तिलक और सुभाष की परम्परा के वाहक थे। वह दलगत एवं सत्ता की राजनीति से ऊपर उठकर वास्तव में एक ऐसे राजनीतिक दर्शन को विकसित करना चाहते थे, जो भारत की प्रकृति एवं परम्परा के अनुकूल हो और राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति करने में समर्थ हो। अपनी व्याख्या को उन्होंने ‘‘एकात्म मानववाद‘‘ का नाम दिया।
दीनदयाल जी का जन्म 25 सितम्बर 1916 को निम्न मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ। दीनदयाल जी की भारतीय लोकतंत्र में गहरी आस्था थी।  उनका मानना था कि लोकतंत्र भारत को पश्चिम की देय नहीं है। भारत की राज्यवधारणा स्वाभाविक रूप से लोकतन्त्रवादी रही है। वे लिखते हैं- ‘‘वैदिक सभा और समिति का गठन जनतंत्रीय आधार पर ही होता था तथा मध्यकालीन अनेक गणराज्य पूर्णतः जनतंत्रीय थे।‘‘
भारतीय

1 अक्टूबर 2023 को सुबह 10 बजे नागरिकों के नेतृत्व में स्वच्छता के लिए एक घंटे के श्रमदान का राष्ट्रीय आह्वान

0
New Delhi – 9 साल पहले माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में स्वच्छता के लिए एक स्पष्ट संदेश देकर आह्वान किया था। सभी क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों ने इसका स्वागत किया और सक्रियता दिखाते हुए स्वच्छ भारत के लिए स्वामित्व लेने में अत्यधिक उत्साह दिखाया। परिणामस्वरूप स्वच्छता एक राष्ट्रीय स्वभाव परिवर्तन बन गया और हर किसी की जुबान पर स्वच्छ भारत मिशन एक घरेलू नाम की तरह बन गया। मन की बात के 105वें एपिसोड में माननीय प्रधानमंत्री ने 1 अक्टूबर को सुबह 10 बजे सभी नागरिकों द्वारा सामूहिक रूप से स्वच्छता के लिए 1 घंटे के श्रमदान की अपील की, जो गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर ही बापू को ‘स्वच्छांजलि’ होगी। स्वच्छता ही सेवा अभियान पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा, “1 अक्टूबर यानी रविवार को सुबह 10 बजे स्वच्छता पर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। आप भी समय निकालकर स्वच्छता से जुड़े इस अभियान में सहयोग करें। आप भी अपनी गली, आस-पड़ोस… किसी पार्क, नदी, झील या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर इस स्वच्छता अभियान में शामिल हो सकते हैं।”
अपने आस-पड़ोस से लेकर रेलवे ट्रैक तक, धार्मिक स्थानों से लेकर राजमार्गों तक, सार्वजनिक स्थानों से लेकर घरों तक, अब कचरा मुक्त भारत का समय है। हर स्थानीय शहरी निकाय और ग्राम पंचायत सफाई अभियान के लिए जगह का चयन करेगी। ये सभी स्थल एक मानचित्र पर उपलब्ध होंगे जिन्हें सभी नागरिक स्वच्छता ही सेवा- सिटिजन पोर्टल https://swachhatahiseva.com/ पर उपलब्ध विकल्पों के माध्यम से देख और चुन पाएंगे। NGO/ RWA और निजी संगठन आदि जो सफाई कार्यक्रम आयोजित करने के इच्छुक हों, वे भी यूएलबी/जिला प्रशासन, जो भी हो, इसी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर पाएंगे। अनुमति मिलने के बाद वे सभी नए इवेंट क्रिएट कर पाएंगे। गतिविधि के समापन के बाद इवेंट क्रिएट करने वाले संगठनों को कार्यक्रम में हुई भागीदारी और उसके मुख्य अंश आदि का विवरण देना होगा। सफाई अभियान स्थल पर ही लोग अपने फोटो क्लिक कर इसी पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। इसके अलावा उन्हें आधिकारिक हैशटैग: #SwachhBharat, #SwachhataHiSeva और हैंडल्स @SwachhBharatGov, @swachhbharat इत्यादि के साथ सोशल मीडिया पर भी साझा कर सकेंगे। स्वच्छता ही सेवा पोर्टल पर नागरिकों और इन्फ्लूएंसर्स को पखवाड़े से जुड़ने और स्वच्छता दूत बनने का निमंत्रण देने का भी प्रावधान है।
स्वच्छ भारत मिशन के 9 साल के उपलक्ष्य में 15 सितंबर से 2 अक्टूबर तक स्वच्छता पखवाड़ा- स्वच्छता ही सेवा 2023 का आयोजन किया जा रहा है। इस पखवाड़े में पुरानी इमारतों की मरम्मत से ले कर जल-निकायों की सफाई, घाटों की सफाई से ले कर दीवारों को रंगने, नुक्कड़ नाटकों से ले कर रंगोली प्रतियोगिताओं जैसे सभी काम हो रहे हैं। पखवाड़े के उद्घाटन से ले कर अब तक स्वच्छता ही सेवा अभियान से 5 करोड़ से भी अधिक नागरिक जुड़ चुके हैं।

ग्वालियर न्यूजः गोवंश तस्करी की सूचना पर मचा बवाल, भड़के लोगों को गौ रक्षकों ने शांत कराया

0
ग्वालियरः नवभारत टाइम्स डिजिटल के संजय चतुर्वेदी की खबर के अनुसार ग्वालियर शहर से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शहर के मुरार थाना क्षेत्र में 6 नंबर चौराहे पर गौ तस्करी की अफवाह को लेकर भयंकर बवाल हो गया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में गौ सेवक ट्रक में जा रहे गोवंश को घेर कर खड़े हो गए। इसके साथ ही ट्रक को भी भीड़ ने क्षतिग्रस्त कर दिया। हालांकि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद भीड़ को संभाला गया और गोवंश को गौशाला में छुड़वाया गया।
दरअसल, शहर के मुरार थाना के नजदीक तकरीबन 6 नंबर चौराहे पर लाल टिपारा गौशाला की तरफ जाने वाले रास्ते पर लगभग देर शाम 6-7 बजे के आसपास ट्रक क्रमांक एमपी 07 एचबी 8505 को कुछ लोगों ने रोका था। जिसमें गोवंश पाया गया था। जिसके बाद हंगामा मच गया था। घटनाक्रम देर रात जारी रहा।
गौ रक्षकों ने गोवंश ले रहे ट्रक ड्राइवर को रोककर पूछताछ की। लेकिन ड्राइवर कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। इसके चलते लोग नाराज हो गए और हंगामा कर दिया। लेकिन मौके पर पुलिस प्रशासन ने पहुंचकर ट्रक ड्राइवर को बचाया और गोवंश को सुरक्षित लाल टिपारा गौशाला में पहुंचा दिया। इसके अलावा वैधानिक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया, तब जाकर मामला शांत हुआ।

निगम के ट्रक को लेकर होगी जांच

मामले को देख रही पुलिस ने बताया कि प्रथम दृश्य में तो यह ट्रक सरकारी बताया जा रहा है। जिसका उपयोग नगर निगम कर रही है। उसी में गोवंश को पड़कर लाया गया था। हालांकि इस मामले में फिलहाल अभी तक किसी भी निगम अधिकारी या कर्मचारी से कोई बात नहीं हो पाई है। इसके अलावा फिलहाल कोई दस्तावेज भी अभी हमारे सामने इस प्रकार का नहीं आया है। वहीं, वाहन को लेकर उनका कहना है कि अभी है जांच का विषय है कि यह ट्रक प्राइवेट है या निगम का है।

मामले में हो एफआईआर

बजरंग दल के गौ रक्षा विभाग प्रमुख भरत राजपूत का कहना है कि हमारे मुरार के कार्यकर्ता को सूचना मिली थी कि एक ट्रक में गोवंश को पैक करके ले जाया जा रहा है। सूचना पर ट्रक को रुकवाया गया। लेकिन ट्रैफिक विभाग ने जब ट्रक को रुकवाने की कोशिश की तो ट्रक नहीं रुका। जिसके बाद गौ रक्षकों ने ट्रक को घेर कर रोकने का प्रयास किया।

भड़के लोगों को गौ रक्षकों ने शांत कराया

किसी तरह ट्रक को रोका गया। जब पुलिस ने भी ड्राइवर से पूछताछ की तो उसने भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। जवाब न मिलने के कारण मौजूद लोगों थोड़ा सा हंगामा किया गया था। लेकिन जब हम लोग वहां पहुंचे तो हमने सभी को समझाइए इस प्रकार का किसी भी उपद्रव को ना करें। साथ ही पूरा मामला समझने की कोशिश की।

गौ रक्षकों ने पूछे ये सवाल

गौ रक्षकों का कहना है कि यदि यह कार्य निगम की तरफ से किया जा रहा था तो उनके पास खुले वाहनों की भी सुविधा है। गोवंश को पैक करके ले जाने की क्या आवश्यकता थी? यदि फिर भी किसी कारणवश गोवंश को पैक करके ले जाया जा रहा था तो उसके कागज और दस्तावेज भी तो ड्राइवर के पास उपलब्ध होने चाहिए थे। लेकिन इस प्रकार के कोई भी डॉक्यूमेंट नहीं बरामद हुए। इन सब के बाद जो बात निकाल कर सामने आई है तो कहा जा रहा था कि हम गोवंश को हाईवे पर छोड़ने जा रहे थे।

किसानों को होगी परेशानी

गौ रक्षकों का कहना है कि यदि हाईवे पर भी छोड़ेंगे तो कहीं ना कहीं हमारे किसान भाइयों को भी इससे परेशानी होगी। गौ सेवकों का कहना है कि कहीं ना कहीं इस पूरी प्रक्रिया में संदिग्धता नजर आ रही है इसलिए प्रशासन से सहयोग मांगा है। कि जो भी दोषी हो उसे पर पूरी कार्रवाई की जाए और मामले में फिर की जाए।

 

नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार अमेरिका के दौरे पर

0
New Delhi – नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने 19 से 22 सितंबर 2023 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में आयोजित 25 वीं अंतर्राष्ट्रीय समुद्री शक्ति संगोष्ठी (आईएसएस) में भाग लिया।
अंतर्राष्ट्रीय समुद्री शक्ति संगोष्ठी (आईएसएस)का आयोजन अमेरिकी नौसेना द्वारा यूएस नेवल वॉर कॉलेज, न्यूपोर्ट, रोड आइलैंड में किया जाता है और भारत-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग बढ़ाने के साझा दृष्टिकोण की दिशा में विदेशी मित्र देशों (एफएफसी) के साथ जुड़ने का अवसर प्रदान करता है।
नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने आईएसएस आयोजन के अवसर पर संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मिस्र, फिजी, इजरायल, इटली, जापान, केन्या, पेरू, सऊदी अरब, सिंगापुर और ब्रिटेन सहित विभिन्न देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की।
राजकीय यात्रा के दौरान आयोजित व्यापक कार्यक्रम स्वतंत्र खुले और समावेशी भारत-प्रशांत क्षेत्रएवं अंतर्राष्ट्रीय नियम आधारित व्यवस्था के विजन को साकार करने की दिशा में भारतीय नौसेना की दृढ़ता का प्रदर्शन है।
यात्रा के दौरान मालाबार, आरआईएमपीएसी, सी ड्रैगन और टाइगर ट्रायम्फ जैसे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यासों में भारतीय नौसेना (आईएन) – संयुक्‍त राज्‍य नौसेना (यूएसएन) परिचालन के जुड़ाव की खोज की दिशा में व्यापक विचार-विमर्श किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में पारस्परिकता को संस्थागत बनाने के लिए दोनों नौसेनाओं के बीच नियमित विषय वस्तु विशेषज्ञ आदान-प्रदान भी होता है।
आईएसएस आयोजन के अवसर पर नौसेना प्रमुख (सीएनएस) ने प्रशिक्षित कर्मियों की भर्ती और प्रतिधारण के विशेष संदर्भ में मानव संसाधन प्रबंधन की चुनौतियों, अग्निपथ योजना, महिलाओं को सशक्त बनाने और भारतीय नौसेना को लिंग-तटस्थ बल में चलाने की दिशा में भारत की पहल के बारे में विस्तार से बात की।
नौसेना प्रमुख (सीएनएस) की संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका की यात्रा ने द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विविध भागीदारों के साथ जुड़ने हेतु नौसेना से नौसेना की शीर्ष स्तर की भागीदारी के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

 

LIVE: PM Narendra Modi Mann Ki Baat with Nation Live Broadcast | Mann ki Baat 105th Episode

0

मेरे प्यारे परिवारजनों, नमस्कार।‘मन की बात’ के एक और एपिसोड में मुझे आप सभी के साथ देश की सफलता को, देशवासियों की सफलता को, उनकी inspiring life journey को, आपसे साझा करने का अवसर मिला है।इन दिनों सबसे ज्यादा पत्र, सन्देश,जो मुझे मिले हैं वो दो विषयों पर बहुत अधिक है।पहला विषय है, चंद्रयान-3 की सफल landing और दूसरा विषय है दिल्ली में G-20 का सफल आयोजन। देश के हर हिस्से से, समाज के हर वर्ग से, हर उम्र के लोगों के, मुझे, अनगिनत पत्र मिले हैं। जब चंद्रयान-3 का Lander चंद्रमा पर उतरने वाला था, तब करोड़ों लोग अलग-अलग माध्यमों के जरिए एक साथ इस घटना के पल-पल के साक्षी बन रहे थे। ISRO के YouTube Live Channel पर 80 लाख से ज्यादा लोगों ने इस घटना को देखा -अपने आप में ही एक record है। इससे पता चलता है कि चंद्रयान-3 से करोड़ों भारतीयों का कितना गहरा लगाव है। चंद्रयान की इस सफलता पर देश में इन दिनों एक बहुत ही शानदार Quiz Competition भी चल रहा है -प्रश्नस्पर्धा और उसे नाम दिया गया है –‘चंद्रयान-3 महाक्विज’।MyGov portal पर हो रहे इस competition में अब तक 15 लाख से ज्यादा लोग हिस्सा ले चुके हैं।MyGov की शुरुआत के बाद यह किसी भी Quiz में सबसे बड़ा participation है। मैं तो आपसे भी कहूँगा कि अगर आपने अब तक इसमें हिस्सा नहीं लिया है तो अब देर मत करिए, अभी इसमें, छः दिन और बचे हैं। इस Quiz में जरुर हिस्सा लीजिये।

मेरे परिवारजनों, चंद्रयान-3 की सफलता के बाद G-20 के शानदार आयोजन ने हर भारतीय की खुशी को दोगुना कर दिया। भारत मंडपम तो अपने आप में एक celebrity की तरह हो गया है। लोग उसके साथ selfie खिंचा रहे हैं और गर्व से post भी कर रहे हैं। भारत ने इस summit में African Union को G-20में Full Member बनाकर अपने नेतृत्व का लोहा मनवाया है। आपको ध्यान होगा, जब भारत बहुत समृद्ध था, उस ज़माने में, हमारे देश में, और दुनिया में,Silk Route की बहुत चर्चा होती थी। ये Silk Route, व्यापार-कारोबार का बहुत बड़ा माध्यम था। अब आधुनिक ज़माने में भारत ने एक और Economic Corridor ,G-20 में सुझाया है। ये है India-Middle East-Europe Economic Corridor। ये Corridor आने वाले सैकड़ों वर्षों तक विश्व व्यापार का आधार बनने जा रहा है, और इतिहास इस बात को हमेशा याद रखेगा कि इस Corridor का सूत्रपात भारत की धरती पर हुआ था।

साथियो, G-20 के दौरान जिस तरह भारत की युवाशक्ति, इस आयोजन से जुड़ी, उसकी आज, विशेष चर्चा आवश्यक है। साल-भर तक देश के अनेकों universities में G-20 से जुड़े कार्यक्रम हुए। अब इसी श्रृंखला में दिल्ली में एक और exciting programme होने जा रहा है –‘G-20 University Connect Programme’। इस programme के माध्यम से देश-भर के लाखों University students एक-दूसरे से जुड़ेंगे। इसमें IITs, IIMs, NITs और Medical Colleges जैसे कई प्रतिष्ठित संस्थान भी भाग लेंगे। मैं चाहूँगा कि अगर आप college student हैं, तो, 26 सितम्बर को होने वाले इस कार्यक्रम को जरुर देखिएगा, इससे जरुर जुड़िएगा। भारत के भविष्य में, युवाओं के भविष्य पर, इसमें, बहुत सारी दिलचस्प बातें होने वाली हैं। मैं खुद भी इस कार्यक्रम में शामिल होऊंगा। मुझे भी अपने college student से संवाद का इंतजार है।

मेरे परिवारजनों, आज से दो दिन बाद, 27 सितम्बर को ‘विश्व पर्यटन दिवस’ है। पर्यटन को कुछ लोग सिर्फ सैर-सपाटे के तौर पर देखते हैं, लेकिन पर्यटन का एक बहुत बड़ा पहलू‘रोजगार’ से जुड़ा है। कहते हैं, सबसे कम Investment में, सबसे ज्यादा रोजगार, अगर कोई sector पैदा करता है, तो वो,Tourism Sector ही है।Tourism Sector को बढ़ाने में, किसी भी देश के लिए goodwill,उसके प्रति आकर्षण बहुत matter करता है। बीते कुछ वर्षों में भारत के प्रति आकर्षण बहुत बढ़ा है और G-20 के सफल आयोजन के बाद दुनिया के लोगों का interest भारत में और बढ़ गया है।

साथियो, G-20 में एक लाख से ज्यादा delegates भारत आए। वो यहाँ की विविधता, अलग-अलग परम्पराएं, भांति-भांति का खानपान और हमारी धरोहरों से परिचित हुए। यहाँ आने वाले delegates अपने साथ जो शानदार अनुभव लेकर गए हैं, उससे tourism का और विस्तार होगा।आप लोगों को पता ही है कि भारत में एक से बढ़कर एक world Heritage sites भी हैं और इनकी संख्या लगातार बढती जा रही है। कुछ ही दिन पहले शान्तिनिकेतन और कर्नाटक के पवित्र होयसड़ा मंदिरों को world Heritage sites घोषित किया गया है।मैं इस शानदार उपलब्धि के लिए समस्त देशवासियों को बधाई देता हूँ। मुझे 2018 में शान्तिनिकेतन की यात्रा का सौभाग्य मिला था। शान्तिनिकेतन से गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का जुड़ाव रहा है। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शान्तिनिकेतन का Motto संस्कृत के एक प्राचीन श्लोक से लिया था।वह श्लोक है –

“यत्र विश्वम भवत्येक नीडम्”

अर्थात, जहाँ एक छोटे से घोंसले में पूरा संसार समाहित हो सकता है|

कर्नाटक के जिन होयसड़ा मंदिरों को UNESCO ने विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है, उन्हें,13वीं शताब्दी के बेहतरीन architecture के लिए जाना जाता है। इन मंदिरों को UNESCO से मान्यता मिलना, मंदिर निर्माण की भारतीय परंपरा का भी सम्मान है। भारत में अब World Heritage Properties की कुल संख्या 42 हो गई है। भारत का प्रयास है कि हमारे ज्यादा-से-ज्यादा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जगहों को World Heritage Sites की मान्यता मिले। मेरा आप सबसे आग्रह है कि जब भी आप कहीं घूमने जाने की योजना बनाएं तो ये प्रयास करें कि भारत की विविधता के दर्शन करें। आप अलग-अलग राज्यों की संस्कृति को समझें, Heritage Sites को देखें। इससे, आप अपने देश के गौरवशाली इतिहास से तो परिचित होंगे ही, स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने का भी आप अहम माध्यम बनेंगे।

मेरे परिवारजनों, भारतीय संस्कृति और भारतीय संगीत अब Global हो चुका है। दुनियाभर के लोगों का इनसे लगाव दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। एक प्यारी सी बिटिया द्वारा की गई एक प्रस्तुति उसका एक छोटा सा audio आपको सुनाता हूँ……

### (MKB EP 105 AUDIO Byte 1)###

इसे सुनकर आप भी हैरान हो गए न! कितनी मधुर आवाज है और हर शब्द में जो भाव झलकते हैं, ईश्वर के प्रति इनका लगाव हम अनुभव कर सकते हैं। अगर मैं ये बताऊँ कि ये सुरीली आवाज जर्मनी की एक बेटी की है, तो शायद आप और अधिक हैरान होंगे। इस बिटिया का नाम – कैसमी है।21 साल की कैसमी इन दिनों Instagram पर खूब छाई हुई है। जर्मनी की रहने वाली कैसमी कभी भारत नहीं आई है, लेकिन, वो, भारतीय संगीत की दीवानी है, जिसने, कभी भारत को देखा तक नहीं, उसकी भारतीय संगीत में ये रूचि, बहुत ही Inspiring है। कैसमी जन्म से ही देख नहीं पाती है, लेकिन, ये मुश्किल चुनौती उन्हें असाधारण उपलब्धियों से रोक नहीं पाई।Music और Creativity को लेकर उनका Passion कुछ ऐसा था कि बचपन से ही उन्होंने गाना शुरू कर दिया।African Drumming की शुरुआत तो उन्होंने महज 3 साल की उम्र में ही कर दी थी।भारतीय संगीत से उनका परिचय 5-6 साल पहले ही हुआ। भारत के संगीत ने उनको इतना मोह लिया-इतना मोह लिया कि वो इसमें पूरी तरह से रम गई। उन्होंने तबला बजाना भी सीखा है। सबसे Inspiring बात तो यह है कि वे कई सारी भारतीय भाषाओं में गाने में महारत हासिल कर चुकी हैं। संस्कृत, हिंदी, मलयालम, तमिल, कन्नड़ या फिर असमी, बंगाली, मराठी, उर्दू, उन्होंने इन सबमें अपने सुर साधे हैं। आप कल्पना कर सकते हैं, किसी को दूसरी अनजान भाषा की दो-तीन लाइने बोलनी पड़ जाए तो कितनी मुश्किल आती है, लेकिन कैसमी के लिए जैसे बाएं हाथ का खेल है। आप सभी के लिए मैं यहाँ कन्नड़ा में गाए उनके एक गीत को शेयर कर रहा हूँ।

###(MKB EP 105 AUDIO Byte 2)###

भारतीय संस्कृति और संगीत को लेकर जर्मनी की कैसमी के इस जुनून की मैं ह्रदय से सराहना करता हूँ। उनका यह प्रयास हर भारतीय को अभिभूत करने वाला है।

मेरे परिवारजनों, हमारे देश में शिक्षा को हमेशा एक सेवा के रूप में देखा जाता है। मुझे उत्तराखंड के कुछ ऐसे युवाओं के बारे में पता चला है, जो, इसी भावना के साथ बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रहे हैं। नैनीताल जिले में कुछ युवाओं ने बच्चों के लिए अनोखी घोड़ा Library की शुरुआत की है। इस Library की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि दुर्गम से दुर्गम इलाकों में भी इसके जरिए बच्चों तक पुस्तकें पहुँच रही हैं और इतना ही नहीं, ये सेवा, बिल्कुल निशुल्क है। अब तक इसके माध्यम से नैनीताल के 12 गाँवों को Cover किया गया है। बच्चों की शिक्षा से जुड़े इस नेक काम में मदद करने के लिए स्थानीय लोग भी खूब आगे आ रहे हैं। इस घोड़ा Library के जरिए यह प्रयास किया जा रहा है, कि दूरदराज के गाँवों में रहने वाले बच्चों को स्कूल की किताबों के अलावा ‘कविताएँ’, ‘कहानियाँ’ और ‘नैतिक शिक्षा’ की किताबें भी पढ़ने का पूरा मौका मिले। ये अनोखी Library बच्चों को भी खूब भा रही है।

साथियो, मुझे हैदराबाद में Library से जुड़े एक ऐसे ही अनूठे प्रयास के बारे में पता चला है। यहाँ, सातवीं Class में पढ़ने वाली बिटिया ‘आकर्षणा सतीश’ ने तो कमाल कर दिया है। आपको यह जानकार आश्चर्य हो सकता है कि महज 11 साल की उम्र में ये बच्चों के लिए एक-दो नहीं, बल्कि, सात-सात Library चला रही है। ‘आकर्षणा’ को दो साल पहले इसकी प्रेरणा तब मिली, जब वो अपने माता-पिता के साथ एक कैंसर अस्पताल गई थी। उसके पिता जरूरतमंदों की मदद के सिलसिले में वहाँ गए थे। बच्चों ने वहाँ उनसे ‘Colouring Books’ की माँग की, और यही बात, इस प्यारी-सी गुड़िया को इतनी छू गई कि उसने अलग-अलग तरह की किताबें जुटाने की ठान ली। उसने, अपने आस-पड़ोस के घरों, रिश्तेदारों और साथियों से किताबें इकट्ठा करना शुरू कर दिया और आपको यह जानकार खुशी होगी कि पहली Library उसी कैंसर अस्पताल में बच्चों के लिए खोली गई। जरूरतमंद बच्चों के लिए अलग-अलग जगहों पर इस बिटिया ने अब तक जो सात Library खोली हैं, उनमें अब करीब 6 हजार किताबें उपलब्ध हैं। छोटी-सी ‘आकर्षणा’ जिस तरह बच्चों का भविष्य संवारने का बड़ा काम कर रही है, वो हर किसी को प्रेरित करने वाला है।

साथियो, ये बात सही है कि आज का दौर Digital Technology और E-Books का है, लेकिन फिर भी किताबें, हमारे जीवन में हमेशा एक अच्छे दोस्त की भूमिका निभाती है। इसलिए, हमें बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

मेरे परिवारजनों, हमारे शास्त्रों में कहा गया है –

जीवेषु करुणा चापि, मैत्री तेषु विधीयताम्।

अर्थात्, जीवों पर करुणा कीजिए और उन्हें अपना मित्र बनाइए। हमारे तो ज्यादातर देवी-देवताओं की सवारी ही पशु-पक्षीहैं। बहुत से लोग मंदिर जाते हैं, भगवान के दर्शन करते हैं, लेकिन जो जीव-जंतु उनकी सवारी होते हैं, उस तरफ़ उतना ध्यान नहीं देते। ये जीव-जंतु हमारी आस्था के केंद्र में तो रहने ही चाहिए, हमें इनका हर संभव संरक्षण भी करना चाहिए। बीते कुछ वर्षों में, देश में, शेर, बाघ, तेंदुआ और हाथियों की संख्या में उत्साहवर्धक बढ़ोत्तरी देखी गई है। कई और प्रयास भी निरंतर जारी हैं, ताकि इस धरती पर रह रहे दूसरे जीव-जंतुओं को बचाया जा सके। ऐसा ही एक अनोखा प्रयास राजस्थान के पुष्कर में भी किया जा रहा है। यहाँ, सुखदेव भट्ट जी और उनकी Team मिलकर वन्य जीवों को बचाने में जुटे हैं, और जानते हैं उनकी Team का नाम क्या है? उनकी Team का नाम है – कोबरा। ये ख़तरनाक नाम इसलिए है क्योंकि उनकी Team इस क्षेत्र में खतरनाक साँपों का Rescue करने का काम भी करती है। इस Team में बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं, जो सिर्फ एक Call पर मौके पर पहुंचते हैं और अपने Mission में जुट जाते हैं। सुखदेव जी की इस Team ने अब तक 30 हजार से ज्यादा जहरीले साँपों का जीवन बचाया है। इस प्रयास से जहाँ लोगों का खतरा दूर हुआ है, वहीँ प्रकृति का संरक्षण भी हो रहा है। ये Team अन्य बीमार जानवरों की सेवा के काम से भी जुड़ी हुई है।

साथियो, तमिलनाडु के चेन्नई में Auto Driver एम.राजेंद्र प्रसाद जी भी एक अनोखा काम कर रहे हैं। वो पिछले 25-30 साल से कबूतरों की सेवा के काम में जुटे हैं। खुद उनके घर में 200 से ज्यादा कबूतर हैं। वहीँ पक्षियों के भोजन, पानी, स्वास्थ्य जैसी हर जरुरत का पूरा ध्यान रखते हैं। इस पर उनका काफी पैसा भी खर्च होता है, लेकिन वो, अपने काम में डटे हुए हैं। साथियो, लोगों को नेक नीयत से ऐसा काम करते देखकर वाकई बहुत सुकून मिलता है, काफी खुशी होती है। अगर आपको भी ऐसे ही कुछ अनूठे प्रयासों के बारे में जानकारी मिले तो उन्हें जरुर Share कीजिए।

मेरे प्यारे परिवारजनों, आजादी का ये अमृतकाल, देश के लिए हर नागरिक का कर्तव्यकाल भी है। अपने कर्तव्य निभाते हुए ही हम अपने लक्ष्यों को पा सकते हैं, अपनी मंजिल तक पहुँच सकते हैं। कर्तव्य की भावना, हम सभी को एक सूत्र में पिरोती है। यू.पी.के सम्भल में, देश ने कर्तव्य भावना की एक ऐसी मिसाल देखी है, जिसे मैं आपसे भी Share करना चाहता हूँ। आप सोचिए, 70 से ज्यादा गाँव हों, हजारों की आबादी हो और सभी लोग मिलकर, एक लक्ष्य, एक ध्येय की प्राप्ति के लिए साथ आ जाएँ, जुट जाएँ ऐसा कम ही होता है, लेकिन, सम्भल के लोगों ने ये करके दिखाया। इन लोगों ने मिलकर जन-भागीदारी और सामूहिकता की बहुत ही शानदार मिसाल कायम की है। दरअसल, इस क्षेत्र में दशकों पहले, ‘सोत’ नाम की एक नदी हुआ करती थी। अमरोहा से शुरू होकर सम्भल होते हुए बदायूं तक बहने वाली ये नदी एक समय इस क्षेत्र में जीवनदायिनी के रूप में जानी जाती थी। इस नदी में अनवरत जल प्रवाहित होता था, जो यहाँ के किसानों के लिए खेती का मुख्य आधार था।समय के साथ नदी का प्रवाह कम हुआ, नदी जिन रास्तों से बहती थी वहां अतिक्रमण हो गया और ये नदी विलुप्त हो गई। नदी को माँ मानने वाले हमारे देश में, सम्भल के लोगों ने इस सोत नदी को भी पुनर्जीवित करने का संकल्प ले लिया।पिछले साल दिसंबर में सोत नदी के कायाकल्प का काम 70 से ज्यादा ग्राम पंचायतों ने मिलकर शुरू किया। ग्राम पंचायतों के लोगों ने सरकारी विभागों को भी अपने साथ लिया। आपको ये जानकर खुशी होगी कि साल के पहले 6 महीने में ही ये लोग नदी के 100 किलोमीटर से ज्यादा रास्ते का पुनरोद्धार कर चुके थे। जब बारिश का मौसम शुरू हुआ तो यहां के लोगों की मेहनत रंग लाई और सोत नदी, पानी से, लबालब भर गई। यहां के किसानों के लिए यह खुशी का एक बड़ा मौका बनकर आया है। लोगों ने नदी के किनारे बांस के 10 हजार से भी अधिक पौधे भी लगाए हैं, ताकि इसके किनारे पूरी तरह सुरक्षित रहें। नदी के पानी में तीस हजार से अधिक गम्बूसिया मछलियों को भी छोड़ा गया है ताकि मच्छर न पनपें।साथियो, सोत नदी का उदाहरण हमें बताता है कि अगर हम ठान लें तो बड़ी से बड़ी चुनौतियों को पार कर एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आप भी कर्तव्य पथ पर चलते हुए अपने आसपास ऐसे बहुत से बदलावों का माध्यम बन सकते हैं।

मेरे परिवारजनों, जब इरादे अटल हों और कुछ सीखने की लगन हो, तो कोई काम, मुश्किल नहीं रह जाता है। पश्चिम बंगाल की श्रीमती शकुंतला सरदार ने इस बात को बिल्कुल सही साबित करके दिखाया है। आज वो कई दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। शकुंतला जी जंगल महल के शातनाला गांव की रहने वाली हैं। लंबे समय तक उनका परिवार हर रोज मजदूरी करके अपना पेट पालता था। उनके परिवार के लिए गुजर-बसर भी मुश्किल थी। फिर उन्होंने एक नए रास्ते पर चलने का फैसला किया और सफलता हासिल कर सबको हैरान कर दिया। आप ये जरुर जानना चाहेंगे कि उन्होंने ये कमाल कैसे किया! इसका जवाब है – एक सिलाई मशीन। एक सिलाई मशीन के जरिए उन्होंने ‘साल’ की पत्तियों पर खूबसूरत design बनाना शुरू किया। उनके इस हुनर ने पूरे परिवार का जीवन बदल दिया। उनके बनाए इस अद्भुत craft की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। शकुंतला जी के इस हुनर ने, न सिर्फ उनका, बल्कि, ‘साल’ की पत्तियों को जमा करने वाले कई लोगों का जीवन भी बदल दिया है। अब, वो, कई महिलाओं को training देने का भी काम कर रही हैं। आप कल्पना कर सकते हैं, एक परिवार, जो कभी, मजदूरी पर निर्भर था, अब खुद दूसरों को रोजगार के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने रोज की मजदूरी पर निर्भर रहने वाले अपने परिवार को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया है। इससे उनके परिवार को अन्य चीजों पर भी focus करने का अवसर मिला है। एक बात और हुई है, जैसे ही शकुंतला जी की स्थिति कुछ ठीक हुई, उन्होंने बचत करना भी शुरू कर दिया है। अब वो जीवन बीमा योजनाओं में निवेश करने लगी हैं, ताकि उनके बच्चों का भविष्य भी उज्जवल हो। शकुंतला जी के जज्बे के लिए उनकी जितनी सराहना की जाए वो कम है। भारत के लोग ऐसी ही प्रतिभा से भरे होते हैं – आप, उन्हें अवसर दीजिए और देखिए वे क्या-क्या कमाल कर दिखाते हैं।

मेरे परिवारजनों, दिल्ली में G-20 Summit के दौरान उस दृश्य को भला कौन भूल सकता है, जब कई World Leaders बापू को श्रद्धासुमन अर्पित करने एक साथ राजघाट पहुंचे। यह इस बात का एक बड़ा प्रमाण है कि दुनिया-भर में बापू के विचार आज भी कितने प्रासांगिक है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि गांधी जयंती को लेकर पूरे देश में स्वच्छता से सम्बंधित बहुत सारे कार्यक्रमों का plan किया गया है। केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों में ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान’ काफी जोर-शोर से जारी है।Indian Swachhata League में भी काफी अच्छी भागीदारी देखी जा रही है। आज मैं ‘मन की बात’ के माध्यम से सभी देशवासियों से एक आग्रह भी करना चाहता हूं – 1 अक्टूबर यानि रविवार को सुबह 10 बजे स्वच्छता पर एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। आप भी अपना वक्त निकालकर स्वच्छता के जुड़े इस अभियान में अपना हाथ बटाएं। आप अपनी गली, आस-पड़ोस, पार्क, नदी, सरोवर या फिर किसी दूसरे सार्वजनिक स्थल पर इस स्वच्छता अभियान से जुड़ सकते हैं और जहाँ-जहाँ अमृत सरोवर बने हैं वहाँ तो स्वच्छता अवश्य करनी है। स्वच्छता की ये कार्यांजलि ही गांधी जी को सच्ची श्रद्दांजलि होगी।मैं आपको फिर से याद दिलाना चाहूँगा कि इस गाँधी जयंती के अवसर पर खादी का कोई ना कोई Product ज़रूर ख़रीदें।

मेरे परिवारजनों, हमारे देश में त्योहारों का season भी शुरू हो चुका है। आप सभी के घर में भी कुछ नया खरीदने की योजना बन रही होगी। कोई इस इंतजार में होगा कि नवरात्र के समय वो अपना शुभ काम शुरू करेगा। उमंग, उत्साह के इस वातावरण में आप vocal for local का मंत्र भी जरुर याद रखें। जहां तक संभव हो, आप, भारत में बने सामानों की खरीदारी करें, भारतीय Product का उपयोग करें और Made in India सामान का ही उपहार दें। आपकी छोटी सी ख़ुशी, किसी दूसरे के परिवार की बहुत बड़ी ख़ुशी का कारण बनेगी। आप, जो भारतीय सामान खरीदेंगे, उसका सीधा फ़ायदा, हमारे श्रमिकों, कामगारों, शिल्पकारों और अन्य विश्वकर्मा भाई-बहनों को मिलेगा।आजकल तो बहुत सारे Start-ups भी स्थानीय Products को बढ़ावा दे रहे हैं। आप स्थानीय चीजें खरीदेंगे तो start-ups के इन युवाओं को भी फ़ायदा होगा।

मेरे प्यारे परिवारजनों, ‘मन की बात’ में बस आज इतना ही।अगली बार जब आपसे ‘मन की बात’ में मिलूंगा तो नवरात्रि और दशहरा बीत चुके होंगे। त्योहारों के इस मौसम में आप भी पूरे उत्साह से हर पर्व मनाएँ, आपके परिवार में खुशियां रहें – मेरी यही कामना है। इन पर्वों की आपको बहुत सारी शुभकामनायें। आपसे फिर मुलाकात होगी, और भी नए विषयों के साथ, देशवासियों की नई सफलताओ के साथ।आप, अपने संदेश मुझे ज़रूर भेजते रहिए, अपने अनुभव शेयर करना ना भूलें। मैं प्रतीक्षा करूँगा।

 

“मन की बात से “विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने की मिलती है प्रेरणा- मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी

0
24 सितम्बर 2023,रविवार ,देहरादून , रविवार, देहरादून स्थित डी.ए.वी पी.जी कॉलेज में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात के 105वें संस्करण के श्रवण कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डी.ए.वी पी.जी कॉलेज के स्मार्ट लाइब्रेरी स्थापना के कार्यों का शुभारंभ किया!
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मन की बात एक ऐसा कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से देश के दूर -दराज व ग्रामीण आंचलों के लोगों द्वारा सामान्य परिस्थितियों में विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे सराहनीय कार्यों को आगे लाया जाता है। इससे न सिर्फ उन क्षेत्रों को नई पहिचान मिलती है बल्कि अन्य लोगों को भी कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।
इसी प्रकार के प्रेरणादायी कार्यों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने नैनीताल के युवाओं द्वारा बच्चों के लिए शुरू की गई अनोखी घोड़ा लाइब्रेरी का भी जिक्र किया। जिसके माध्यम से नैनीताल जनपद के दुर्गम 12 गांवों में रहने वाले बच्चों को स्कूल की किताबों के अलावा ‘कविताएँ’, ‘कहानियाँ’ और ‘नैतिक शिक्षा’ की किताबें आसानी से उपलब्ध हो पा रही हैं । निश्चित ही इस प्रकार का प्रयास बच्चों को भी खूब भा रहा है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। देश में मातृशक्ति के उत्थान व प्रगति के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अनेकों महत्वपूर्ण कार्य किये जा रहे हैं।
हाल ही में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण विधेयक पारित होना ऐतिहासिक निर्णय रहा है। उत्तराखड में भी महिला सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से कार्य किये जा रहे हैं।
सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई। राज्य में सभी प्रतियोगी परीक्षाएं पूर्ण पारदर्शिता के साथ हो इसके लिए सख्त नकल विरोधी कानून लाया गया है। समान नागरिक संहित लागू करने की दिशा में उत्तराखंड तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के अतरिक्त स्थानीय विधायक खजानदास, प्रधानाचार्य डी.ए.वी पी.जी कॉलेज डॉ. के.आर. जैन ,शिक्षक वर्ग एवं अधिकादिक विद्यार्थी गण उपस्थि