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पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर मंगेशकर परिवार की ओर से एक अनोखा उपहार 

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मुंबई (अनिल बेदाग) : माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर, दीनानाथ मंगेशकर स्मृति प्रतिष्ठान ने एक असाधारण संगीत कार्यक्रम “विश्वशांति दुत – वसुधैव कुटुंबकम” प्रस्तुत किया।  मोदी ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत में विश्वास करते हैं यानी पूरी दुनिया एक परिवार है।  ब्रह्माण्ड को एक मानने की उनकी अभिव्यक्ति असाधारण है।  उनकी अभिव्यक्ति को दिव्य स्वरों एवं काव्य छंदों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
 वसुधैव कुटुंबकम सभी देशों और नागरिकों को सभी सीमाओं के पार शांति के मार्ग पर एकजुट करने का एक प्रयास है। पद्मश्री पंडितजी हृदयनाथ मंगेशकर और उषा मंगेशकर द्वारा प्रस्तुत यह भव्य स्वरांजलि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सद्भाव के अमर संदेश का एक प्रमाण है।  आदिनाथ मंगेशकर और निसर्ग पाटिल द्वारा परिकल्पित, इस परियोजना में रूपकुमार राठौड़ की मंत्रमुग्ध कर देने वाली संगीत रचना शामिल हैं।
कवि डाॅ.दीपक वज़े के स्वरांजलि के अवसर पर  प्रेरक शब्द और पद्मश्री शंकर महादेवन और निसर्ग पाटिल की जादुईआवाज़ें एक साथ आईं।  इन सभी ने मिलकर दुनिया को वैश्विक एकता का संदेश दिया है। इस त्योहार की भावना यह है कि पीएम मोदी देशों के बीच शांति और एकता स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”  भविष्य में विश्व के सभी मनुष्यों को एक होना चाहिए।  विभाजन को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन वसुधैव कुटुंबकम पर विश्वशांति दूत संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया जो एक संगीत कार्यक्रम से कहीं बढ़कर है.  इस कार्यक्रम से पता चला कि संगीत सभी समस्याओं का समाधान है और संगीत का उपयोग दुनिया को एक साथ लाने के लिए किया जा सकता है।
आदिनाथ मंगेशकर और निसर्ग पाटिल का सहयोग, रूपकुमार राठौड़ का संगीत, डॉ.  दीपक वज़े की काव्य प्रतिभा और पद्मश्री शंकर महादेवन और निसर्ग पाटिल के गायन ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।  इस पहल का बीजेपी नेता आशीष शेलार और हितेश जैन ने समर्थन किया है.  यह संगीत समारोह विश्व में शांति की आवश्यकता को उजागर करने के लिए है।  यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान करता है, जिन्होंने पूरी दुनिया को एक साथ लाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, यह सिर्फ एक संगीत कार्यक्रम नहीं है बल्कि पूरी दुनिया को एक सूत्र में जोड़ने का एक पवित्र क्षण है, शांति का बंधन, भारत की सबसे बड़ी प्रतिभा वसुधैव। विश्व शांति दूत अपनी कलात्मकता के माध्यम से कुटुंबकम के सार को दर्शाते हैं।

गाय-भैंसों के सात पुश्तों का इतिहास बताएगी चिप, पीएम मोदी करेंगे लांच

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नई दिल्ली। कृत्रिम गर्भाधान के चलन ने स्वदेसी पशुओं की आनुवंशिकी को अत्यधिक परिवर्तित किया है। इससे दूध की मात्रा में तो वृद्धि हुई है एवं भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बन गया है, लेकिन इसका दूसरा पक्ष है कि दूध की गुणवत्ता में गिरावट आई है।

भारत ने ऐसी जीनोमिक चिप डेवलप किया है, जो गाय-भैंसों के पिछले सात पुश्तों की आनुवंशिक स्थिति को तुरंत बता देगी। यह चिप आत्मनिर्भर भारत के उदाहरण के साथ-साथ देसी नस्लों की मवेशियों के संरक्षण एवं गो-पालकों की आय बढ़ाने में सहायक होगी। चिप तैयार है, जिसे 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लांच कर सकते हैं।

भारतीय पशुओं की स्थितियां भिन्न

जीनोमिक चिप के जरिए किसी जीव के आनुवंशिक इतिहास का अध्ययन किया जाता है। कई विकसित राष्ट्रों ने डेयरी क्षेत्र की समृद्धि के लिए मवेशियों की आनुवांषिकी में काफी सुधार किया है, लेकिन उनके द्वारा तैयार चिप उनके ही पशुओं के अनुकूल है। भारतीय पशुओं की स्थितियां भिन्न हैं। इसलिए पशुपालन मंत्रालय ने गाय-भैंसों की स्वदेसी एवं उत्तम नस्लों के चयन के लिए अपना चिप बनाया है, जिसे गोवंश के लिए ‘गौ चिप’ एवं भैंस के लिए ‘महिष चिप’ नाम दिया गया है।

कृत्रिम गर्भाधान के चलते अपने देश की लगभग दो तिहाई से ज्यादा स्वदेसी गोवंश की पीढि़यां संकर नस्ल की हो चुकी हैं। वैज्ञानिक तरीके से देसी नस्ल के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गोकुल मिशन की शुरुआत 2014 में की गई थी।

देश में पहली बार बोवाइन आइवीएफ को प्रोत्साहित किया गया। किंतु सब्सिडी के बावजूद यह तकनीक किसानों की जेब पर भारी पड़ रही है। अन्य तकनीक है सेक्स सार्टेड सीमेन, जो प्रति डोज दो सौ रुपये में उपलब्ध है। एक गाय के लिए एक बार में तीन डोज लेना पड़ता है। इसके जरिए गायों को 90 प्रतिशत मामलों में सिर्फ बछिया पैदा होती है। किंतु इससे नस्ल का पता नहीं चल पाता।

कैसे काम करेगी चिप

गायों की देसी नस्ल जैसे गिर, कांकरेज, साहीवाल एवं ओंगोल का संरक्षण बड़ी चुनौती है। चिप के जरिए उच्च आनुवंशिक देसी गुणों वाले पशुओं का चयन कम उम्र में ही कर लिया जाएगा। ब्लड का ड्राप चिप पर डालते ही तुरंत पता चल जाएगा कि बछड़े की कौन सी नस्ल है। ब्लड स्पॉट में कुछ ज्ञात जीन के साथ कई अज्ञात जीन भी दिख सकते हैं।

पशुपालन एवं डेयरी मंत्री ने कही ये बात

मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के मुताबिक आमतौर पर सात पीढि़यों के बाद नस्ल में बड़ा बदलाव आ जाता है। यह पता चलने पर कि बछिया या बछड़े का स्वदेसी मूल कितना बचा है, उसका इस्तेमाल उसी के अनुरूप किया जाएगा। बच्चे बड़े हो जाएंगे तो श्रेष्ठ गुणवत्ता के सांड के सीमेन को उत्तम नस्ल की गाय में फर्टाइल करने पर सर्वोत्तम नस्ल की स्वस्थ बछिया पैदा होगी, जिससे अधिक मात्रा में दूध (ए2) लिया जा सकेगा।

आगे कहा कि यह संकर नस्ल की गायों की तुलना में महंगा भी होगा, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी। चिप के आंकड़ों के विश्लेषण से गाय-भैंसों पर दवाओं का असर एवं बीमारियों का भी पता लग सकेगा, जिससे स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

गणेश भक्तों की श्रद्धा को पीयूष गोयल ने सराही और दी गणपति बप्पा को विदाई

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मुंबई। मुंबई में मंगलवार का पूरा दिन गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू-जल्दी आ जैसी जयकारों से गुंजायमान रही और कुछ ऐसे ही भक्तिमय माहौल में केंद्रीय मंत्री और उत्तर मुंबई से सांसद पीयूष गोयल भी नजर आए जब उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र मलाड में विसर्जन के मौके पर गणपति बप्पा को विदाई दी। इस दरमियान बीएमसी और स्थानीय बीजेपी ईकाई पुलिस की ओर से काफी इंतजाम किए गए थे और हर गली मोहल्ले और सड़कों पर भक्तों की भारी भीड़ दिखाई दे रही थी। गणेश भगवान की शानदार सजी धजी मूर्तियों को भक्त बैंड-बाजे, ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते गाते हुए शानदार विदाई देते हुए दिखाई दिए। इस मौके पर गोयल ने महिलाओं, बच्चों और सभी गणेश भक्तों का हौसला अफजाई करने के साथ साथ पार्टी के अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का अभिनंदन किया और उनकी प्रतिबद्धता को सराहा। मलाड विधान सभा अध्यक्ष सुनील कोली द्वारा भुजाले तलाव में आयोजित विसर्जन समारोह में उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव महज एक त्यौहार ही नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों, खासकर युवाओं को एक कड़ी में पिरोने वाला उत्सव है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा, “भूले भटकों को राह दिखाते, बप्पा बिगड़े काम बनाते।आज विधि अनुसार बप्पा हमसे विदा जरूर ले रहे हैं लेकिन उनके आशीर्वाद से अगले बरस पुनः जोरदार स्वागत के साथ गणेश उत्सव मनाएंगे।” इस मौके पर उन्होंने दर्जनों विसर्जन स्थलों का दौरा किया और जगह जगह गणेश भक्तों के साथ सेल्फी खिंचवाई और 50 से अधिक पंडालों का दौरा किया।

गौरतलब है कि गणेशोत्सव के 10 दिनों के दौरान केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आस्था और भक्ति की भावना को मजबूत करने के लिए लगभग 50 गणेश पंडालों का दौरा किया जिनमें से अधिकांश उत्तर मुंबई में हैं। दो पहले उन्होंने अपने परिवार के साथ मुंबई के प्रसिद्ध गणेश पंडाल लालबागचा राजा में भगवान गणेश को पूजा अर्पित की और मुंबई तथा देश की समृद्धि और विकास के लिए आशीर्वाद मांगा था।

PM आवास में गाय ने बछिया को जन्म दिया:मोदी ने दीपज्योति नाम रखा;

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दिल्ली में लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास में एक गाय ने बछिया को जन्म दिया है। पीएम मोदी ने शनिवार (14 सितंबर) को X पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बछिया को दुलार करते हुए अपना एक वीडियो भी शेयर किया है।

कैप्शन में उन्होंने लिखा, ‘हमारे शास्त्रों में कहा गया है- गाव: सर्वसुख प्रदा:। लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास परिवार में एक नए सदस्य का शुभ आगमन हुआ है। प्रधानमंत्री आवास में गौ माता ने एक नव वत्सा को जन्म दिया है, जिसके मस्तक पर ज्योति का चिह्न है। इसलिए, मैंने इसका नाम दीपज्योति रखा है।’

राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास का लॉन। मकर संक्रांति पर खिली धूप में PM मोदी कुछ गायों से घिरे हुए हैं। उनके हाथ में तिल-गुड़ और हरा चारा है। वो गायों को खिला रहे हैं और उन्हें दुलार रहे हैं। जिसने भी ये वीडियो देखा उसका ध्यान छोटी-छोटी गायों की तरफ जरूर गया।

ये आंध्र प्रदेश की पुंगनूर गायें हैं। संकटग्रस्त नस्ल की कैटेगरी में आने वाली इन गायों की कीमत 3 से 20 लाख रुपए के बीच है। इनके दूध में कई औषधीय गुण होते हैं। इन गायों का जिक्र पुराणों में भी मिलता है। लगभग खत्म हो चुकी इन गायों को 2019 में नया जीवन मिला।

रीवा के गौ सेवक, 25,000 गायों को रेस्क्यू कर बना चुके हैं मिसाल

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रीवा जिले के इटौरा बाईपास के निवासी गौरव पांडेय गाय माता को अपनी मां की तरह स्नेह करते हैं. उनके अनुसार, गाय हिंदू धर्म में पूज्यनीय मानी जाती है. उनकी सेवा करना जीवन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है. गौरव ने अपने जीवन का उद्देश्य गौ सेवा को बनाया है. अब तक 25,000 से अधिक गायों का रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित किया है. वह किसी से कोई अनुदान नहीं लेते, बल्कि अपने व्यक्तिगत खर्च पर ही यह सेवा करते हैं.

गौरव रीवा जिले की सभी तहसीलों में गौवंश की सेवा कर रहे हैं. वह कहीं भी गायों के साथ गलत व्यवहार नहीं होने देते और घायल गायों का इलाज कराते हैं. उन्होंने गायों के प्रति संवेदनशीलता की प्रेरणा अपने माता-पिता से प्राप्त की है, जो बचपन से ही गौ सेवा में लगे हुए थे.

दोस्त का एक्सीडेंट हुआ गाय के कारण
उनके दोस्त के साथ हुए हादसे के बाद उन्होंने ठान लिया. वह गायों और उनसे हो रही दुर्घटनाओं को रोकने का प्रयास करेंगे. उनके दोस्त का एक्सीडेंट गाय के कारण हुआ, जिसके बाद उन्होंने 6 महीने तक गायों के गले में रेडियम पट्टी बांधने का काम किया, ताकि वाहन चालक सुरक्षित रह सकें.

गाय समृद्धि का मूल स्रोत
गौरव कहते हैं, “रोड पर पड़ी घायल गायों का इलाज करता हूं. इस काम को करते हुए डेढ़ साल हो चुका है.” उन्हें पंच दिवसीय गौ संसद के दौरान जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज और गुरुदेव गोपालमणि महाराज द्वारा गौ सांसद रीवा लोकसभा से नियुक्त किया गया है. उनका उद्देश्य आजीवन निस्वार्थ भाव से गौ सेवा करना है. गौरव पांडेय बताते हैं कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए. उनका मानना है कि गाय समृद्धि का मूल स्रोत है. हमारे जीवन का पोषण करती है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, गाय वह एकमात्र प्राणी है जो ऑक्सीजन ग्रहण करने के साथ-साथ उसे छोड़ता भी है, जो इसे और भी अद्वितीय बनाता है.

मुंबई में 18 सीटों पर उतरेंगे एआईएमआईएम पार्टी के उम्मीदवार

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मुंबई। एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन) AIMIM पार्टी के मुम्बई अध्यक्ष और वरिष्ठ समाज सेवक रईस लश्करिया और उनकी पार्टी के सदस्यों के द्वारा दक्षिण मुम्बई के नागपाड़ा स्थित एआईएमआईएम के दफ़्तर में 14 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। उसी दौरान पार्टी के उम्मीदवारों की सूची तैयार कर उन्हें विधानसभा चुनाव में 18 सीटों पर विशेष रणनीति तैयार कर उतारा जाएगा। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर के सम्मान और उनको श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु की गई। डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर के सुपौत्र समाजसेवक और राजनीतिज्ञ आनंदराज अम्बेडकर के हाथों डॉक्टर अम्बेडकर की तस्वीर का अनावरण हुआ और दलित समुदाय के विशेष सदस्यों को AIMIM पार्टी में शामिल किया गया। कार्यक्रम में AIMIM पार्टी के सदस्य, मीडिया, मुस्लिम और दलित समाज के सदस्यों की भारी संख्या में उपस्थिति रही।

इसी कार्यक्रम मजलिस आर्मी के गठन की घोषणा भी की गई। इसके अंतर्गत किसी भी दलित या असहाय मुस्लिम को विपत्ति के समय सहयोग पहुंचाई जाएगी। और किसी अल्पसंख्यक पर अत्याचार होगा तो मजलिस आर्मी उसके मदद के लिए हमेशा खड़ी रहेगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया गया कि आगामी 22 सितंबर को मुम्बई के जोगेश्वरी वेस्ट में ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) पार्टी के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य असद्दुदीन ओवैसी का आगमन होगा। जहाँ वे जनसमूह को संबोधित करेंगे, वक्फ़ बोर्ड बिल पर गहन चर्चा होगी। साथ ही जनता से जुड़े मुद्दों पर विशेष चर्चा की जाएगी।
23 सितंबर को AIMIS पार्टी के मुम्बई अध्यक्ष रईस लश्करिया और उनकी टीम की अगुवाई में औरंगाबाद से तिरंगा रैली शुरू होकर महाराष्ट्र मुख्यमंत्री के ऑफिस, मंत्रालय तक तिरंगा सुरक्षा रैली की जाएगी। जहाँ मुलुंड नाका से मुम्बई की टीम इस कार्यक्रम में शामिल होगी। इस तिरंगा सुरक्षा रैली में सभी भारतीय मुस्लिम दल और जनता शामिल होंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य रामगिरि महाराज और बीजेपी विधायक नीतीश राणे के विवादित बयानों के खिलाफ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन सौंपा जाना है।

सुनील राणे द्वारा आयोजित “भक्तिरास नवरात्र महोत्सव 2024” के लिए भूमि पूजन संपन्न

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मुंबई। नवरात्रि उत्सव के लिए मुंबई के साथ ही पूरे देश में बोरीवली बहुत प्रसिद्ध है। बोरीवली में कोरा केंद्र ग्राउंड में दुर्गा देवी नवरात्र उत्सव समिति द्वारा आयोजित होने वाले “भक्तिरास नवरात्र महोत्सव 2024” के लिए भूमि पूजन, वास्तु पूजन और कलश पूजन का आयोजन किया गया। बोरिवली के विधायक सुनील राणे के द्वारा प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाले “भक्तिरास नवरात्र महोत्सव 2024” के लिए भूमि पूजन के अवसर पर गोपाल शेट्टी (पूर्व सांसद, उत्तर मुंबई) उपस्थित रहे।

विधायक सुनील राणे के द्वारा प्रस्तुत और दुर्गा देवी नवरात्रि उत्सव समिति द्वारा आयोजित “भक्तिरास नवरात्र महोत्सव 2024” के भव्य आयोजन में अधिक से अधिक बोरीवली की स्थानीय जनता के साथ ही मुंबईकर को आकर्षित करने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही है।
इस अवसर पर सुनील राणे ने बताया कि भक्तिरास नवरात्र महोत्सव में नवरात्रि के त्यौहार का उत्साह और गीत संगीत की धूम रहेगी। बोरिवली गुजराती समाज संस्कृति और परंपरा का केंद्र है। इस वर्ष भी बॉलीवुड गीतों के साथ ही पारंपरिक संगीत पर नवरात्रि के त्यौहार के रंग दोगुना करने की तैयारी लगभग पूरी हो गई है।

15 सितंबर को जीसीसीआई का गोचर विकास की समस्याओ पर परिचर्चा होगी

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15 सितंबर को जीसीसीआई का गोचर विकास की समस्याओ पर परिचर्चा होगी, देशभर की सभी गौशाला प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया…

जीसीसीआई द्वारा “चारागाह संरक्षण और विकास” पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन 15-09-2024, रविवार को सुबह 11:00 बजे से 01:00 बजे तक करने का निर्णय लिया गया है जिसमें देश के विशेषज्ञो द्वारा पेपर पढ़ा जाएगा। यह बता दे कि गोपालन से लेकर गौशाला पशुओं के रखरखाव में कौशल विकास का महत्वपूर्ण योगदान है । देश के हर प्रांत में गोचर की जमीन को या तो नाजायज तौर पर कब्जा किया गया है जमीन को गोचर के कार्यों में प्रयोग नहीं किया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि पशुओं के लालन पालन में गोचर भूमि का बहुमूल्य योगदान है।

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के पूर्व अध्यक्ष और जीसीसीआई के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया के मार्गदर्शन में, जीसीसीआई ने 15-09-2024 रविवार को सुबह 11:00 बजे से 01 बजे तक राष्ट्रीय स्तर पर “चारागाह संरक्षण और विकास” पर एक वेबिनार का आयोजन किया। वेबिनार तीन सत्रों में आयोजित किया गया है। जिसमें पहला सत्र 11:00 बजे से 11:45 बजे तक होगा जिसमें जीसीसीआई के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया और जीसीसीआई के राष्ट्रीय सलाहकार और राजस्थान के पूर्व मंत्री श्री देवी सिंह भाटी गौचर भूमि के संरक्षण और विकास पर अपने विचार रखेंगे।

दूसरा सत्र 11:45 से 12:30 बजे तक होगा जिसमें वर्षों से “चारागाह संरक्षण एवं विकास” के क्षेत्र में कार्य कर रही समस्त महाजन संस्था के प्रबंध न्यासी डाॅ. गिरीशभाई शाह भाषण देंगे। इस सत्र में गौचर संरक्षण एवं विकास के क्षेत्र में कार्य कर रहे अग्रणी लोग अपने अनुभव एवं विचार प्रस्तुत करेंगे।

तीसरा सत्र दोपहर 12:30 बजे से 01:00 बजे तक होगा. जिसमें “चारागाह संरक्षण एवं विकास” के क्षेत्र में आने वाली समस्याओं का निराकरण एवं शंकाओं का समाधान किया जायेगा।

संगोष्ठियों के माध्यम से गौचर भूमि के संरक्षण एवं विकास हेतु क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय नीतियों का निर्माण से लेकर गौचर भूमि पर कार्य कर रहे विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों को संगठित करने तथा अन्य संस्थाओं को इस दिशा में प्रोत्साहित करने पर व्यापक चर्चा होगी।

वेबिनार में किसान, गाय पालक, शोधकर्ता और विद्वान, सरकारी अधिकारी और नीति निर्माता, पर्यावरणविद् और संरक्षणवादी, गाय संरक्षण संगठन और गाय कार्यकर्ता, कृषि और पशु चिकित्सा छात्र, गाय सेवा उत्साही और व्यवसायी, कृषि व्यवसाय उद्यमी और स्टार्ट-अप भाग लेंगे। साथ ही जनता को इस वेबिनार में शामिल होने के लिए आमंत्रित करने के लिए जीसीसीआई के संस्थापक डॉ. वल्लभभाई कथीरिया ने अपील की है।

इस वेबिनार के माध्यम से, जीसीसीआई एक व्यापक चर्चा के लिए एक मंच प्रदान कर रहा है, जहां विशेषज्ञ, नीति निर्माता और गौचर संरक्षण में काम करने वाले लोग इस दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए एक साथ आ सकते हैं। वेबिनार न केवल विचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि देहाती संस्कृति की बहाली और इसके प्रचार-प्रसार के लिए आवश्यक रणनीतियों की ठोस कार्रवाई के लिए एक मंच भी होगा।

इस वेबिनार में हमारी सक्रिय भागीदारी चारागाह संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान होगी। आइए हम सब मिलकर गौचर भूमि के महत्व को बहाल करें और इसे भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करें।

आयोजन समिति ने बताया है कि पूरे वेबिनार का संचालन श्री हेम शर्मा, संस्थापक, राजस्थान गौ सेवा परिषद और जीसीसीआई राजस्थान संयोजक, बीकानेर द्वारा किया जाएगा।

आयोजन के संबंध में विशेष जानकारी देते हुए बताया गया है कि इस वेबिनार से जुड़ने के लिए आप Google meet लिंकhttps://meet.google.com/ghh-ddby-oz j से जुड़ सकते हैं। पूरे वेबिनार को जीसीसीआई के फेसबुक पेज https://www.facebook.com/OfficialGCCI/ पर लाइव देखा जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए जीसीसीआई के महासचिव श्री मित्तलभाई खेतानी और तेजस चोटलिया एम.डी. संपर्क सूची में 94269 18900 अंकित है।

कॉर्पोरेट नेतृत्व में परिवर्तन: असुर से सुर तक राणा जी, प्रोफेसर, गितम स्कूल ऑफ बिजनेस, गितम यूनिवर्सिटी, हैदराबाद

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कॉर्पोरेट नेतृत्व में परिवर्तन: असुर से सुर तक
राणा जी, प्रोफेसर, गितम स्कूल ऑफ बिजनेस, गितम यूनिवर्सिटी, हैदराबाद कैंपस, rjee@gitam.edu;
कस्तूरी आर नाइक, एसोसिएट प्रोफेसर, यूनिवर्सल एआई यूनिवर्सिटी, करजत कैंपस, kasturi.naik@universalai.in

कॉर्पोरेट नेतृत्व की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच, असुर (दैत्यों) के गुणों से सुर (देवताओं) के गुणों की ओर संक्रमण आवश्यक हो गया है। असुर गुण, जैसे अहंकार और आत्म-केंद्रित उपलब्धि, आर्थिक सफलता तो ला सकते हैं, लेकिन वे दीर्घकालिक दृष्टि और नैतिकता की कमी के कारण गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकते हैं। इसके विपरीत, सुर गुण नैतिकता, दीर्घकालिक दृष्टिकोण और समाज के कल्याण के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं, जो न केवल आर्थिक सफलता लाते हैं, बल्कि एक स्थायी और व्यापक लाभकारी विरासत भी छोड़ते हैं।

कॉर्पोरेट नेतृत्व में असुर और सुर गुणों का द्वंद्व :
असुर गुण अक्सर धन (अर्थ) और इच्छा (काम) की खोज में नैतिक सीमाओं या सामूहिक हित की परवाह किए बिना प्रकट होते हैं। इन गुणों में अहंकार, पाखंड, अहंकार और अनैतिक व्यवहार शामिल हैं, जो अल्पकालिक रणनीतियों के रूप में प्रकट होते हैं जो दीर्घकालिक परिणामों की उपेक्षा करते हैं। सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज़ का उदाहरण इस बात का प्रमाण है, जहाँ अनैतिक प्रथाओं ने एक बड़े वित्तीय घोटाले को जन्म दिया, जिससे गंभीर कानूनी और प्रतिष्ठात्मक नुकसान हुआ।

वहीं, सुर गुण, जो नैतिक अखंडता, दीर्घकालिक दृष्टि और समाज के कल्याण के प्रति समर्पण के साथ होते हैं, टाटा समूह द्वारा प्रदर्शित किए गए हैं। 1868 में स्थापित, टाटा ने लगातार नैतिक व्यावसायिक प्रथाओं, सामुदायिक कल्याण और सतत विकास को प्राथमिकता दी है। यह दिव्य दृष्टिकोण न केवल टाटा की प्रतिष्ठा को मजबूत करता है, बल्कि व्यापक सामाजिक विकास में भी योगदान देता है।

आध्यात्मिक साहित्य से सीख: परिवर्तन का परिचालन करना
भगवद गीता से प्रेरणा लेते हुए, हम कर्तव्य को ईमानदारी और विनम्रता के साथ निभाने के महत्व पर जोर देते हैं, बिना फल की इच्छा के। यह सिद्धांत सुर नेताओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो नैतिक अखंडता और समाज के कल्याण को व्यक्तिगत उपलब्धियों से अधिक प्राथमिकता देते हैं।

जो संगठन असुर से सुर नेतृत्व में परिवर्तन करना चाहते हैं, वे अपनी कॉर्पोरेट रणनीतियों में नैतिक सिद्धांतों (धर्म) को शामिल कर सकते हैं। इसमें मजबूत शासन ढांचे बनाना, निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करना और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति प्रतिबद्धता शामिल है।

चिंतनशील प्रश्न और भविष्य की दिशाएँ :
इस परिवर्तन को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए, संगठनों को अपने वर्तमान नेतृत्व गुणों का आकलन करना चाहिए, नैतिक प्रथाओं को शामिल करने के लिए विशिष्ट मील के पत्थर स्थापित करने चाहिए, और एक ऐसी विरासत की कल्पना करनी चाहिए जो वित्तीय सफलता से परे हो। “क्या आपका नेतृत्व अधिक असुर या सुर गुणों को प्रदर्शित करता है?” और “आपका संगठन किस दीर्घकालिक विरासत की दिशा में काम कर रहा है?” जैसे चिंतनशील प्रश्न इस आत्मनिरीक्षण में मार्गदर्शन कर सकते हैं।

असुर से सुर नेतृत्व में परिवर्तन न केवल सतत व्यापारिक सफलता की दिशा में एक मार्ग है, बल्कि यह एक न्यायसंगत और समान समाज बनाने की प्रतिबद्धता भी है। इस परिवर्तन को जारी रखते हुए, हम संगठनों को दिव्य गुणों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनके कार्य व्यापक वैश्विक व्यावसायिक नैतिकता परिदृश्य में बड़े लाभ के साथ जुड़ते हैं और समाज के लिए सकारात्मक योगदान देते हैं।

“नेतृत्व केवल पद और शक्ति का नाम नहीं है, यह ज़िम्मेदारी और सेवा का नाम है।”

विदेशी धरती पर भारत की गरिमा को धूमिल करते राहुल गांधी

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*डॉ राघवेन्‍द्र शर्मा-
ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष और राहुल गांधी के नजदीकी सहयोगी सैम पित्रोदा ने दावा किया है कि राहुल गांधी पप्पू नहीं है। उल्लेखनीय है कि सैम पित्रोदा अमेरिका के टेक्सास शहर में भारतीय मूल के छात्रों के समक्ष राहुल गांधी का परिचय प्रस्तुत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी उच्च शिक्षित, पढ़े लिखे और किसी भी विषय पर गहन सोच रखने वाले रणनीतिकार हैं। राहुल गांधी उच्च शिक्षित, पढ़े-लिखे और रणनीतिकार हैं, इस विषय पर भी बात कर लेंगे। फिलहाल शुरुआत इस सवाल से करते हैं कि राहुल गांधी पप्पू हैं अथवा नहीं। बेशक इस मुद्दे पर सैम पित्रोदा के साथ हमारी वैचारिक सहमति है कि जिस राहुल गांधी का परिचय सैम पित्रोदा टैक्सास के छात्रों से करा रहे थे, वह पप्पू कतई नहीं हैं। सहमति यह कि जो राहुल गांधी अमेरिका के टेक्सास में छात्रों से रूबरू कराए जा रहे थे वे पप्पू तो बिल्कुल नहीं है और उन्हें पप्पू कहा जाना भी नहीं चाहिए। क्योंकि जो उन्हें पप्पू कहता है, दरअसल वह राहुल गांधी की अनेक खूबियों के साथ एक पक्षीय अन्याय कर बैठता है।
मसलन राहुल गांधी पप्पू हैं ही नहीं, बल्कि वे राजनीति के एक ऐसे मंझे हुए खिलाड़ी हैं, जो समयानुकूल रणनीति को अपनाते हुए सिर्फ इस बात को ध्यान में रखते हैं कि येन केन प्रकारेण आम आदमी के बीच अपना सियासी उल्लू सीधा होना चाहिए। फिर भले ही ऐसा करने से भारत की छवि वैश्विक स्तर पर धूमिल ही क्यों ना करनी पड़ जाए। जैसा कि अक्सर होता रहता है, राहुल गांधी जब कभी भी विदेश यात्रा पर जाते हैं तब भारतीय गरिमा और उसके दैदीप्यमान आभामंडल को धूल-धुसरित करना नहीं भूलते। इस बार भी राहुल गांधी जब चार दिवसीय अमेरिकी यात्रा पर गए तो हमेशा की तरह इस बार भी अपने कर्तव्यों की इति श्री करना नहीं भूले। विदेशी धरती पर उन्होंने बड़ी बेबाकी के साथ कहा कि भारत में रोजगार की समस्या है। जबकि चीन में निश्चित रूप से रोजगार की समस्या नहीं है। इसके अलावा वर्जीनिया के हर्नडान में कह बैठे कि भारत में सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता पर सवालिया निशान हैं। इस बात को लेकर लड़ाई है कि सिखों को पगड़ी, कड़ा आदि पहनने और गुरुद्वारा जाने की इजाजत दी जाएगी या नहीं? साथ में यह भी कह दिया कि यह समस्या भारत में केवल सिखों के लिए ही नहीं, सभी धर्मों के लिए मुंह बाए खड़ी हुई है।
बड़ा आश्चर्य होता है राहुल गांधी के इस बयान को सुनकर कि भारत में सिखों को उनकी धार्मिक अभिव्यक्तियों को व्यक्त करने पर भी सवालिया निशान अंकित हैं। यह बात भी वह राहुल गांधी कह रहे हैं जिनकी दादी की उन्हीं के अंगरक्षकों द्वारा हत्या कर दिए जाने पर कांग्रेस भारत भर के सिखों के खून की प्यासी हो गई थी। वह राहुल गांधी, जिनके पिता ने सिखों के सामूहिक नरसंहार पर यह कहा था कि जब कोई बड़ा बरगद का वृक्ष गिरता है तो धरती थोड़ी बहुत हिलती ही है। जबकि मुझे लिखते हुए बेहद संतोष होता है की तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हो अथवा भारतीय जनता पार्टी, हम सब उन बेहद प्रतिकूल हालातों के बीच भी सिखों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए थे, आज भी खड़े हुए हैं और आगे भी खड़े रहेंगे।
 यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने भारत विरोधी मानसिकताओं को प्रोत्साहित करते हुए और भारत की नकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करने वाले बयान विदेशी मंचों पर  दिये हों। एक बार तो वे भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिका से दखल करने की गुजारिश भी कर चुके हैं। हद तो यह हो गई कि इस बार राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा पर ठीक उसी प्रकार के आरोप लगाए जैसे अनेक भारत विरोधी संगठन लंबे अरसे से इन दोनों राष्ट्रभक्त संगठनों के बारे में गाल बजाते रहे हैं। जैसे – राहुल गांधी ने कहा कि आरएसएस महिलाओं को घर पर और एक खास भूमिका तक सीमित रखना चाहती है। स्पष्ट करना उचित रहेगा कि इस तरह के शातिराना बयान देने वाले व्यक्ति को पप्पू तो कतई नहीं माना जा सकता।
राहुल गांधी का यह गुण तो ऐसी उच्च कोटि का है जिसे ध्यान में रखते हुए उन्हें घर का भेदी ही कहा जा सकता है। वह घर का भेदी जो विदेश की धरती पर अपने ही देश के बारे में नकारात्मक बातें करता हो और चीन जैसे शत्रु देश की तारीफ करने का एक भी अवसर हाथ से जाने देना नहीं चाहता हो। निसंकोच लिखा जा सकता है कि वैश्विक स्तर पर जितने भी देश के नेता विदेश यात्राओं पर जाते हैं, तब वह अपने घरेलू मामलों को बाहरी नेताओं अथवा मीडिया के सामने नहीं रखते। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर केवल उन्हीं मसलों को रखा जाता है, जिन्हें उठाने पर या तो हमारे देश को नुकसान पहुंचाने वाली शक्तियां आहत होती हों अथवा जिन मसलों को उठाए जाने पर हमारे देश को किसी भी प्रकार का लाभ अर्जित होता हो। यहां इस बात का उल्लेख करना उचित रहेगा कि भारत में लंबे समय तक कांग्रेस का ही शासन बना रहा। जाहिर है आज जिसे भाजपा कहा जाता है, कल वह भारतीय जनसंघ हुआ करती थी। तब और अब, जब कभी भी उक्त दल के नेता पक्ष अथवा विपक्ष में रहते हुए विदेश यात्राओं पर गए, तब तब उन्होंने भारत के अंदरूनी मामलों का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जिक्र तक नहीं किया। तब भी जबकि 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान की हत्या करते हुए देश पर जबरन आपातकाल थोप दिया था और विरोधी दल के नेता चुन चुन कर जेलों में ठूंसे जा रहे थे। लेकिन वाह रे राहुल गांधीजी, यह जब कभी भी विदेश जाते हैं तो संभवत लिखकर ले जाते हैं कि इस बार भारतीय अस्मिता और उसकी गरिमा को किस प्रकार तार तार करना उचित रहेगा। अब यदि ऐसे व्यक्ति को यदि कोई पप्पू कहता है तो फिर सैम पित्रोदा का असहज होना स्वाभाविक है। उन सैम पित्रोदा का, जो कालांतर में भारतीय नागरिकों को केंद्र में रखकर नस्लीय टिप्पणी करने के कारण ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटाए जा चुके हैं। यह और बात है कि कांग्रेस में उन्हें चुनावी नुकसान से बचने की गरज से पदावनत किया था। किंतु जैसे ही चुनाव संपन्न हुए, उन्हें पुनः इस पद पर बहाल कर दिया गया। जाहिर है उनका यह पुनर्वसन राहुल गांधी के आदेश पर ही किया गया होगा।
तो फिर उनका इतना फर्ज तो बनता ही है कि वे राहुल गांधी की पप्पू वाली छवि को कुछ हद तक तो कम करने का उद्यम करें, सो वे कर भी रहे हैं। बेशक यह उनके द्वारा अपने ऊपर चढ़े हुए एहसानों को उतारने की एक प्रक्रिया भर ही है। लेकिन फिर भी उनकी जुबान से निकले हुए सत्य को नकारा नहीं जा सकता। यह सत्य ही है कि जो राहुल गांधी इस वक्त विदेशी दौरे पर हैं वह पप्पू तो नहीं हैं। क्योंकि पप्पू भारतीय समाज में उस सरल सहज और बाल सुलभ बुद्धि के बच्चे को कहा जाता है, जो पानी से पप्पा और रोटी से अट्टा ही कह पाता है। लेकिन राहुल गांधी तो ऐसे नहीं हैं! उन्हें पूरी सुनियोजित रणनीति के साथ संविधान खत्म करने का हऊआ खड़ा करना बखूबी आता है। वे चुनावी फायदा लेने के लिए पूरे आत्मविश्वास के साथ लोगों के खातों में हजारों नहीं लाखों रुपए भेजने का झूठ “ठकाठक ठकाठक” वाली शैली में सफलता के साथ बोलना जानते हैं और चुनाव पश्चात उसे भली भांति भूल जाना भी जानते हैं। अब यदि कोई ऐसे चालक दिमाग के धनी राहुल गांधी को पप्पू कहे तो फिर वह अपनी अपरिपक्वता ही जाहिर करेगा और कुछ नहीं।(विनायक फीचर्स)
(लेखक मध्यप्रदेश भाजपा कार्यालय मंत्री हैं)