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आचार्य लोकेशजी का 43वां दीक्षा दिवस महातपस्वी आचार्य के सानिध्य में मनाया गया

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आचार्य लोकेशजी जैन शासन के गौरव हैं- आचार्य हंसरत्नसूरीश्वरजी महाराज

दीक्षा दिवस दिव्य तपस्वी आचार्य के सान्निध्य में मेरा परम सौभाग्य – आचार्य लोकेश

गुरुग्राम/ नई दिल्ली,: विश्व शांति दूत जैन आचार्य लोकेश जी के 43 वें दीक्षा दिवस के अवसर पर संत सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें आचार्य हंसरत्नसूरिश्वर महाराज सहित अनेक संतों ने भाग लिया और आचार्य लोकेश जी को शुभकामनाएं दी| 


अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक आचार्य लोकेशजी ने कहा कि उद्देश्य पूर्ण सार्थक जीवन के संकल्प के साथ आज ही के दिन अध्यात्म के मार्ग पर पहला कदम रखा था। प्रभु कृपा, गुरु कृपा और आपके आशीर्वाद से 42 वर्ष सानन्द पूर्ण कर 43वें वर्ष प्रवेश पर कर रहा हूँ उन्होंने कहा कि महातपस्वी आचार्य हंसरत्नसूरीश्वरजी महाराज के सानिध्य में मेरा दीक्षा दिवस परम सौभाग्य का विषय है उन्होंने आज 149वें उपवास की तप साधना में रत आचार्य श्री से कहा कि आप ऐसा मंगल आशीर्वाद दीजिए सत्य सनातन धर्म, अध्यात्म, संस्कृति व मानवता की और अधिक सेवा करने में समर्थ बनूँ।

आचार्य हंससूरिश्वर महाराज कहा कि आचार्यश्री लोकेश जी ने जैन धर्म कि शिक्षाओं और भारतीय संस्कृति को विश्व के कोने कोने में जैन धर्म का प्रचार प्रसार कर मानव कल्याण और विश शांति का अद्भुत कार्य किया है |
इस अवसर पर गाणी धर्म ध्यान महाराज मुनि कश्यप्रत्ना. एमएस साकेत भाई शाह, स्नेहल भाई सवाणी, मिकी भाई जैन सहित अहिंसा विश्व भारती और विश्व शांति केंद्र के सहयोगियों और कार्यकर्ताओं ने आचार्यश्री को शुभकामनाए देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया |

संतान की सुख,समृद्धि और आयुष की कामना का पर्व अहोई अष्टमी

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(विजय कुमार शर्मा – )

अहोई अष्टमी मुख्यतः भारत के उत्तरी क्षेत्रों में मनाया जाता है। यह पवित्र दिन अहोई माता की पूजा के लिए समर्पित है, जो बच्चों की रक्षा करती हैं। इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हुए व्रत करती हैं। अहोई अष्टमी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसमें गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं।
अहोई अष्टमी का व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रमा के दर्शन तक चलता है। इस दिन माताएं निर्जला व्रत करती हैं, यानी पूरे दिन कुछ नहीं खातीं और अपने बच्चों की भलाई के लिए अहोई माता से प्रार्थना करती हैं।
अहोई अष्टमी की कथा एक ऐसी साहूकार की पत्नी की कहानी है, जिसके सात बेटों की मृत्यु हो जाती है क्योंकि उसने अनजाने में एक स्याही के बच्चे को मार दिया था। पश्चाताप के तौर पर उसने अहोई माता की पूजा की और उनके आशीर्वाद से उसके सभी सात बेटे जीवित हो गए, जिसके बाद संतान की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए यह व्रत रखने की परंपरा शुरू हुई।

अहोई अष्टमी की कथा

प्राचीन काल में एक साहूकार रहता था जिसके सात बेटे और सात बहुएं थीं। एक दिन, दीपावली के आसपास घर को लीपने के लिए मिट्टी लेने साहूकार की सात बहुएं और उसकी बेटी जंगल गई। मिट्टी खोदते समय साहूकार की बेटी की खुरपी से गलती से एक स्याही (साही) के बच्चे की मृत्यु हो गई।

इस घटना से स्याही बहुत क्रोधित हुई और उसने साहूकार की बेटी को श्राप दिया, “जिस प्रकार तुमने मेरे बच्चे को मारकर मुझे निसंतान किया, उसी प्रकार मैं भी तुम्हें निसंतान कर दूंगी”। इसके बाद, साहूकार की बेटी की संतान एक-एक करके मर जाती थी, जिससे साहूकार के घर पर दुखों का पहाड़ टूट गया।

इस दुख से दुखी होकर, साहूकार की पत्नी एक सिद्ध महात्मा के पास गई और उन्हें अपनी पूरी कहानी बताई। महात्मा ने उसे अहोई अष्टमी के दिन माता अहोई की आराधना करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि साही और उसके बच्चों का चित्र बनाकर और गलती के लिए क्षमा मांगते हुए माता की पूजा करें।

साहूकार की पत्नी ने महात्मा के कथानुसार अहोई अष्टमी का व्रत रखा और माता की पूजा की। इस व्रत के प्रभाव से उसके सभी सात पुत्र फिर से जीवित हो गए।

व्रत का महत्व

अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. शाम के समय तारे निकलने पर अहोई माता की पूजा की जाती है, जिसके बाद कथा सुनकर व्रत खोला जाता है।
अहोई के चित्रांकन में अधिकतर आठ कोष्ठक की एक पुतली बनाई जाती है। उसी के पास साही तथा उसके बच्चों की आकृतियाँ बना दी जाती हैं। करवा चौथ के ठीक चार दिन आगे अष्टमी तिथि को देवी अहोई माता का व्रत किया जाता है। यह व्रत सन्तान की लम्बी आयु और सुखमय जीवन की कामना से पुत्रवती महिलाएं करती हैं। कार्तिक मास की अष्टमी तिथि को कृष्ण पक्ष में यह व्रत रखा जाता है इसलिए इसे अहोई अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है।

इस पर्व की पूजा विधि भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अलग अलग हो सकती है, लेकिन मुख्य भाव समान रहता है। माताएं अहोई माता की तस्वीर या मूर्ति के साथ पूजा का चौक सजाती हैं। पूजा में ‘कलश’ रखा जाता है, प्रसाद के लिए आटे और चीनी से बनी मिठाइयों का भी निर्माण किया जाता है।

माताएं अपने बच्चों को अहोई माता से जुड़ी कथाएं और लोककथाएं सुना कर परिवार और समाज के अन्य सदस्यों के साथ चंद्रमा के दर्शन करके अपने व्रत को पूर्ण करती हैं। (विभूति फीचर्स)

सिडान कार से करते थे गाय की चोरी

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महाराष्ट्र के अकोला में पुलिस ने गौ तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 आरोपियों को पकड़ा है। आरोपियों ने एक ही रात में दो जगह पर सिडान कार से गाय चोरी की थी। आरोपियों के पास से तीन सिडान कार समेत 16.97 लाख रुपये का माल जब्त हुआ है। इस मामले में कुल 11 अपराधों का खुलासा हुआ है। अकोला में गोवंश चोरी करने वाली एक संगठित गैंग ने एक ही रात में दो जगहों से सिडान कार के जरिए गाय चोरी की थी।
पुलिस ने एक मारुती सुजुकी स्विफ्ट डिजायर और दो होंडा अमेज कार के साथ 1.52 लाख रुपये कैश भी बरामद किया है। इसके साथ तीन मोबाइल फोन और अन्य सामान समेत कुल 16.97 लाख का माल जब्त किया है।

28 सितंबर को हुई थी चोरी

28 सितंबर की रात कौलखेड चौक स्थित गजानन महाराज मंदिर के पास मुख्य सड़क पर अज्ञात चोरों ने एक गाय को स्विफ्ट डिजायर कार में डालकर चोरी कर लिया था। यह पूरी वारदात पास के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी और फुटेज वायरल हो गया था। उसी रात बालापुर थाना क्षेत्र के व्याळा गांव में प्रकाश नथवाणी के घर के पास से भी चोरों ने सफेद रंग की गाय को एक सफेद रंग की सिडान कार में डालकर चुरा लिया था। लगातार दो वारदातों के वायरल फुटेज से अकोला शहर में सनसनी फैल गई।

मुक्ताईनगर बस स्टैंड पर पकड़े गए आरोपी

गोवंश चोरी की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक ने इन अपराधों को सुलझाने के निर्देश दिए। गोपनीय जानकारी और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस को पता चला कि आरोपी फिलहाल मुंबई में हैं और बाद में उनकी लोकेशन राजस्थान के अजमेर जिले में मिली। जब पता चला कि आरोपी अजमेर से इंदौर मार्ग से अकोला आ रहे हैं, तो पुलिस टीम ने मुक्ताईनगर बस स्टैंड पर जाल बिछाया और चार आरोपियों को दबोच लिया।

सात आरोपी गिरफ्तार

आरोपियों की पहचान शेख रेहान शेख रशीद (22), मिर्झा शोएब बेग मिर्झा अजहर बेग (28), शेख समीर शेख शब्बीर उर्फ मलंग (24) और अरबाज खान फिरोज खान (23) के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने दोनों गोवंश चोरी की वारदातों की कबूलात की और अन्य वारदातों में भी शामिल होने की बात मानी। आरोपियों की निशानदेही पर उनके दो अन्य साथियों (नुरेश खान बहाद्दार खान (34) और शेख अयुब शेख ईल्यास (23)) को अकोला से गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा उनके सातवें साथी शोएब खान शब्बीर खान (21) को भी उसके घर इंदिरा नगर, अकोट फाइल अकोला से पकड़ा गया। सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की जांच जारी है।

(अकोला से गुलाम मोहसिन की रिपोर्ट)

पूर्वोत्तर को मिली पहली पशुधन आईवीएफ प्रयोगशाला

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पीएम धन-धान्य कृषि योजना के तहत स्थानीय स्तर पर शुरू किये जायेंगे पशु स्वास्थ्य अभियान: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी

पूर्वोत्तर को मिली पहली पशुधन आईवीएफ प्रयोगशाला; आंध्र प्रदेश में एकीकृत डेयरी और पशु चारा संयंत्र का शिलान्यास

भारत के पशुधन और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देते हुए 11 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली में 947 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया और 219 करोड़ रुपये मूल्य की अतिरिक्त परियोजना की आधारशिला रखी गई। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई ये पहल कृषि और संबद्ध क्षेत्र के निवेश के एक बड़े पैकेज का हिस्सा हैं।

इन परियोजनाओं को दो प्रमुख कृषि योजनाओं-प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (पीएम-डीडीकेवाई) और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के शुभारंभ के साथ ही राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह शुरुआत ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और कृषि-संबद्ध क्षेत्रों में भारत के आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएम-डीडीकेवाई) के अंतर्गत ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने में पशुधन, मत्स्य पालन और संबद्ध गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना हमारे पशुधन को ध्यान में रख कर शुरू की गई है। आप जानते ही हैं कि पशुओं को खुरपका-मुँहपका जैसी बीमारियों से बचाने के लिए 125 करोड़ से ज़्यादा टीके मुफ़्त लगाए जा चुके हैं। इससे पशु स्वस्थ हुए हैं और किसानों की चिंता भी कम हुई है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत, स्थानीय स्तर पर पशु स्वास्थ्य से जुड़े अभियान भी चलाए जाएँगे।” प्रधानमंत्री ने ग्रामीण समृद्धि के लिए विविधीकरण के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा, “जहाँ खेती संभव नहीं है, वहाँ पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देना होगा। किसानों की आय बढ़ाने के लिए, हमारी सरकार उन्हें पारंपरिक खेती के आलावा अन्य विकल्प भी दे रही है। इसलिए, अतिरिक्त आय के लिए पशुपालन, मछली पालन और मधुमक्खी पालन पर ज़ोर दिया जा रहा है। इससे छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों को भी सशक्त बनाया जा रहा है।”

इस अवसर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहली आईवीएफ प्रयोगशाला का उद्घाटन भी किया गया, जिसे राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) के तहत ₹28.93 करोड़ के निवेश से गुवाहाटी (असम) में स्थापित किया गया है। यह अत्याधुनिक सुविधा पूर्वोत्तर राज्यों में डेयरी विकास और नस्ल सुधार को एक बड़ा प्रोत्साहन देगी।

राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) के अंतर्गत, बड़े पैमाने की कई डेयरी अवसंरचना परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया गया। इनमें मेहसाणा मिल्क यूनियन परियोजना शामिल है, जिसमें ₹460 करोड़ की लागत से विकसित 120 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाला मिल्क पाउडर प्लांट और 3.5 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला यूएचटी प्लांट शामिल है। इसके आलावा कार्यक्रम के तहत  इंदौर मिल्क यूनियन द्वारा ₹76.50 करोड़ की लागत से स्थापित 30 टन प्रतिदिन क्षमता वाला मिल्क पाउडर प्लांट; भीलवाड़ा मिल्क यूनियन द्वारा ₹46.82 करोड़ की लागत से स्थापित 25,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला यूएचटी प्लांट; और नुस्तुलापुर, करीमनगर, तेलंगाना में ₹25.45 करोड़ की लागत से विकसित एक ग्रीनफील्ड डेयरी प्लांट भी शामिल है। डेयरी नेटवर्क का विस्तार करते हुए, एनपीडीडी के तहत 219 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ, आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के कुप्पम मंडल में एक एकीकृत डेयरी संयंत्र और 200 टीपीडी मवेशी चारा संयंत्र की आधारशिला रखी गई।

पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ) के अंतर्गत, कई राज्यों में 303.81 करोड़ रुपये की 10 परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया, जिससे देश में चारा, दूध और पशु उत्पाद के प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ेगी। प्रजनन सेवाओं की अंतिम छोर तक पहुँच को सुदृढ़ करने के लिए, राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से 2,000 नव प्रशिक्षित और दक्ष ‘मैत्री’ (ग्रामीण भारत में बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन) को प्रधानमंत्री द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम में पूरे भारत में 38,000 से अधिक ‘मैत्री’ को शामिल किया गया, जो देश भर में कृत्रिम गर्भाधान कवरेज और पशुधन के आनुवंशिक उन्नयन में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

ये पहलें कृषि संबद्ध क्षेत्रों के एकीकृत और संवहनीय विकास के माध्यम से किसानों के लिए अवसर बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं, जिससे सभी के लिए आर्थिक सुरक्षा और पोषण संबंधी कल्याण सुनिश्चित होगा।

डॉ. मनसुख मांडविया ने साई राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र सोनीपत का दौरा किया

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डॉ. मनसुख मांडविया ने साई राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, सोनीपत का दौरा किया, सुविधाओं की समीक्षा की एवं एथलीटों, कोचों व स्टाफ के साथ संवाद किया

केंद्रीय युवा मामले एवं खेल और श्रम एवं रोजगार मंत्री, डॉ. मनसुख मांडविया ने आज चल रहे प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे की समीक्षा करने और कोचों, एथलीटों तथा सहायक कर्मचारियों के साथ बातचीत करने के लिए सोनीपत स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) का दौरा किया।

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केंद्र में दोपहर में उनके आगमन पर, साई  के वरिष्ठ अधिकारियों ने डॉ. मांडविया का स्वागत किया और उन्हें सोनीपत परिसर में चल रही गतिविधियों, उपलब्धियों और आगामी परियोजनाओं का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

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केंद्रीय मंत्री ने अपने दौरे की शुरुआत तीरंदाजी उत्कृष्टता केंद्र के निरीक्षण के साथ की, जहाँ उन्होंने कोचों और एथलीटों के साथ बातचीत की। उन्होंने उनके समर्पण की सराहना की और जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभा को पोषित करने के लिए वैज्ञानिक प्रशिक्षण विधियों को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

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डॉ. मांडविया ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल के तहत एक वृक्षारोपण गतिविधि में भी भाग लिया।

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इसके बाद, मंत्री ने तीरंदाजी रेंज, कबड्डी कोर्ट, मेडिकल सेंटर, कुश्ती हॉल, स्पोर्ट्स साइंस विभाग, और स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग हॉल का दौरा किया, जहाँ उन्होंने उपलब्ध प्रशिक्षण और खेल विज्ञान सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने एथलीटों की तैयारी में प्रौद्योगिकी और स्पोर्ट्स साइंस के समन्वय की सराहना की और नियमित स्वास्थ्य एवं प्रदर्शन मूल्यांकन के महत्व पर जोर दिया।

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डॉ. मांडविया  ने बहुउद्देशीय हॉल (एमपीएच), निर्माणाधीन हाई परफार्मेंस सेंट (एचपीसी) और इंडोर कबड्डी हॉल का भी निरीक्षण किया, और इस बात पर ध्यान दिया कि भारत के एथलीटों को विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।

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दौरे का समापन कोचों और कर्मचारियों के साथ बातचीत से हुआ, जहाँ मंत्री ने भारत के खेल ईकोसिस्टम में उनके योगदान की सराहना की और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए एक मजबूत खेल संस्कृति के निर्माण के सरकारी दृष्टिकोण को दोहराया।

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पुलिस मुठभेड़ में 5 शातिर गौ-तस्कर गिरफ्तार

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर  की कोतवाली नगर पुलिस ने देर रात की गई एक बड़ी कार्रवाई में पांच शातिर और वांछित गौकशों को गिरफ्तार किया है. इस दौरान हुई पुलिस मुठभेड़ में 3 अभियुक्त गोली लगने से घायल हो गए. पुलिस ने मौके से दो मोटरसाइकिल, अवैध हथियार और गौकशी के उपकरण भी बरामद किए हैं.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन, पुलिस अधीक्षक नगर सत्यनारायण प्रजापत तथा क्षेत्राधिकारी नगर सिद्धार्थ के. मिश्रा के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक उमेश रोरिया के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई की प्रशंसा की जा रही है.

सूचना पर पहुंची पुलिस

घटना के अनुसार, गुरुवार (9 अक्टूबर) को ग्राम खंजापुर के जंगल में गौकशी की सूचना पर पुलिस ने मौके से तीन क्विंटल गौमांस और फर्जी नंबर प्लेट लगी एक क्रेटा कार बरामद की थी. मामले में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कर टीम गठित की गई थी.

10 और 11 अक्टूबर की दरमियानी रात पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि वही गौकश बाननगर अंडरपास के पास फिर से गौकशी की तैयारी में हैं. पुलिस ने घेराबंदी की तो बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी. आत्मरक्षा में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में तीन आरोपी सोनू उर्फ फरीद, फुन्ना उर्फ नजर और मुजफ्फर उर्फ काला घायल हो गए, जबकि फैसल और तनवीर को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस ने बरामद किए अवैध हथियार

पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से दो तमंचे, एक मस्कट, दो नाजायज चाकू, जिंदा और खोखे कारतूस, दो मोटरसाइकिल और गौकशी के उपकरण बरामद किए हैं.प्रारंभिक पूछताछ में अभियुक्तों ने खंजापुर में हुई गौकशी की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है.

पुलिस के अनुसार, सभी अभियुक्त गौकशी के मामलों में पूर्व से वांछित और शातिर प्रवृत्ति के अपराधी हैं. उनके अपराधिक इतिहास की जांच की जा रही है. पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास और गौकशी पर रोकथाम के प्रयासों को बल मिला है.

अविमुक्तेश्वरानंद सभी सीटों पर लड़ाएंगे निर्दल गौ भक्त प्रत्याशी

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Bihar Election: स्वामी ने यह भी बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से आग्रह किया था कि वे संसद में गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के पक्ष में मतदान करें, लेकिन किसी भी दल ने इस मुद्दे पर स्पष्ट विचार नहीं किया।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बिहार में सनातनी राजनीति का शंखनाद किया है। शेखपुरा पहुंचकर उन्होंने कहा कि बिहार की सभी विधानसभा सीटों पर वे ऐसे प्रत्याशियों को समर्थन देंगे, जो अपने घोषणा पत्र में गौ हत्या रोकने का संकल्प शामिल करेंगे।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के 78 वर्षों बाद भी कोई राजनीतिक दल इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीरता से काम नहीं कर रहा है। केंद्र में कई दलों की सरकारें बनीं, लेकिन किसी ने गौ संरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी।
इस स्थिति को देखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ मतदाता संकल्प यात्रा शुरू की है, जिसके तहत वे बिहार के सभी जिलों में जाकर मतदाताओं को गौ-रक्षा और सनातन धर्म के महत्व के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गौ माता की रक्षा करना केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति और समाज की आधारशिला है।

एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विधानसभा चुनाव में केवल उन्हीं उम्मीदवारों को वोट दें जो गौ संरक्षण को लेकर स्पष्ट और दृढ़ संकल्पित हों। स्वामी ने यह भी बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से आग्रह किया था कि वे संसद में गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के पक्ष में मतदान करें, लेकिन किसी भी दल ने इस मुद्दे पर स्पष्ट विचार नहीं किया।

इसी कारण उन्होंने स्वयं गौ भक्त उम्मीदवारों को चुनाव में उतारने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि बिहार की सभी विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार खड़े किए जाएंगे और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद औपचारिक रूप से सूची जारी की जाएगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गौ भक्त मौजूद थे।

जल जीवन मिशन के अंतर्गत निगरानी

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जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने उन्नत ग्रामीण पाइप जल आपूर्ति योजनाओं के मॉड्यूल: सतत एवं उत्तरदायी ग्रामीण जल सेवाओं की दिशा में एक कदम के प्रदर्शन के साथ विचार-विमर्श का समापन किया

 पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने के लिए उन्नत मॉड्यूल

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने आज जमीनी स्तर पर सेवा वितरण और स्थिरता को मजबूत करने पर कई सप्ताह तक चले गहन विचार-विमर्श का समापन किया। इसमें उन्नत ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना (आरपीडब्ल्यूएसएस) मॉड्यूल का प्रदर्शन किया गया, जो ग्रामीण जल प्रशासन में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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बैठक की अध्यक्षता डीडीडब्ल्यूएस के सचिव श्री अशोक के. के. मीणा ने की और इसमें राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (एनजेजेएम) के अपर सचिव और मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोन और संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति मीणा नाइक के साथ मंत्रालय और कर्नाटक, पंजाब, लद्दाख, सिक्किम और लक्षद्वीप जैसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,000 से अधिक प्रतिभागी, जिनमें उनके मिशन निदेशक भी शामिल थे, वर्चुअल माध्यम से इस सत्र में शामिल हुए।

अपने संबोधन में डीडीडब्ल्यूएस सचिव ने कहा कि नया आरपीडब्ल्यूएसएस मॉड्यूल जल जीवन मिशन के तहत पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता की आधारशिला के रूप में काम करेगा। आरपीडब्ल्यूएसएस ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजनाओं (आरपीडब्ल्यूएसएस) के लिए डिजिटल रजिस्ट्री के रूप में कार्य करेगा और अद्वितीय आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी की शुरुआत करेगा – जो ग्रामीण जल अवसंरचना के अधिक कुशल संचालन एवं रखरखाव की दिशा में एक कदम है। उन्होंने आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी को प्रत्येक पाइप जल आपूर्ति योजना के लिए एक विशिष्ट डिजिटल पहचान टैग के रूप में वर्णित किया जो प्रभावी निगरानी, संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) और डेटा-संचालित शासन के लिए पारदर्शिता, ट्रेसेबिलिटी, जियो-टैगिंग डेटा को सक्षम बनाता है। उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों से आग्रह किया कि वे डेटा की पूर्णता और कवरेज सुनिश्चित करते हुए नवंबर 2025 तक आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी के निर्माण को प्राथमिकता दें और पूरा करें।

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एनजेजेएम के अपर सचिव एवं मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोन ने कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक योजना के लिए अद्वितीय आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी बनाने के महत्व को दोहराया। उन्होंने सभी स्तरों पर कुशल संचालन और रखरखाव (ओ एंड एम) के लिए एक सत्यापित, डेटा-ड्रिवन तंत्र स्थापित करने के सचिव के दृष्टिकोण को भी दोहराया। एनजेजेएम की संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति मीना नाइक ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और ग्रामीण जल प्रबंधन के लिए एक संरचित डिजिटल आधार स्थापित करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि सभी ग्रामीण जल आपूर्ति परिसंपत्तियां पोर्टल पर सटीक रूप से प्रतिबिंबित हों, जिससे ग्रामीण जल प्रणालियों के लिए एक विश्वसनीय और सत्यापन योग्य राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने में उनकी साझा जिम्मेदारी रेखांकित होती है।

उन्नत आरपीडब्ल्यूएसएस मॉड्यूल ग्रामीण जल आपूर्ति क्षेत्र के लिए डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) के निर्माण की दिशा में एक बड़े कदम को दर्शाता है। यह प्रणाली जीआईएस-आधारित डिजिटल एसेट रजिस्ट्री के निर्माण की सुविधा प्रदान करती है, जिसमें जल स्रोत और उपचार संयंत्र से लेकर पाइपलाइनों, वितरण नेटवर्क और घरेलू नल कनेक्शन तक पाइप जल आपूर्ति योजना के प्रत्येक घटक को कैप्चर किया जाता है और उन्हें पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्थानिक रूप से जोड़ा जाता है।

पंचायतों को सशक्त बनाना और स्थानीय शासन को मजबूत करना

आरपीडब्ल्यूएसएस ढांचे के माध्यम से, पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) को जल प्रणालियों पर वास्तविक समय, सत्यापित डेटा तक पहुंच प्राप्त होगी, जिससे वे कार्यक्षमता की निगरानी कर सकेंगे, जल गुणवत्ता पर नज़र रख सकेंगे और ओएंडएम पर तथ्यपरक निर्णय ले सकेंगे। डिजिटल उपकरणों और जानकारियों के साथ स्थानीय संस्थानों को सशक्त बनाकर, प्रणाली का उद्देश्य विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत करना और ग्रामीण जल अवसंरचना के वास्तविक सामुदायिक स्वामित्व को सुनिश्चित करना है।

नया प्लेटफॉर्म ग्रामीण डब्ल्यूएएसएच क्षेत्र में डेटा प्रबंधन और परिसंपत्ति मानचित्रण से लेकर पूर्वानुमानित रखरखाव और विश्लेषण तक स्थानीय आजीविका के अवसर और कौशल विकास के रास्ते बनाने के लिए भी डिज़ाइन किया गया है।ये उभरते कौशल क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने, सेवा विश्वसनीयता बढ़ाने और आत्मनिर्भर प्रणालियों के निर्माण में मदद करेंगे।

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प्रौद्योगिकी के माध्यम से दक्षता बढ़ाना

उन्नत मॉड्यूल वास्तविक समय डैशबोर्ड, स्रोत स्थिरता के लिए पूर्वानुमान विश्लेषण, रखरखाव शेड्यूलिंग और ओएंडएम के लिए निर्णय-समर्थन प्रणालियों को एकीकृत करता है। आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी पहल ग्रामीण जल आपूर्ति के लिए डीपीआई का आधारभूत स्तर बनाती है, जिससे जीआईएस आधारित निगरानी, ​​परिसंपत्ति प्रबंधन, विश्लेषण डैशबोर्ड, पूर्वानुमानित रखरखाव, निर्णय समर्थन तथा बेहतर संचालन एवं रखरखाव दक्षता के लिए डिजिटल ट्विन्स का निर्माण संभव हो पाता है।

बैठक का समापन राज्यों और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को नए डिजिटल ढांचे को अपनाने में सहायता करने के लिए क्रमिक प्रशिक्षण सत्रों और कार्यशालाओं की घोषणा के साथ हुआ, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि आरपीडब्ल्यूएसएस प्रणाली जल जीवन मिशन के तहत निरंतर सेवा वितरण के लिए एक मजबूत आधार के रूप में विकसित हो।

आज प्रधानमंत्री दलहन की खेती में लगे किसानों से बातचीत करेंगे

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प्रधानमंत्री 11 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में विशेष कृषि कार्यक्रम में भाग लेंगे

New Delhi – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 11 अक्टूबर 2025 को सुबह 10:30 बजे नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में विशेष कृषि कार्यक्रम में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री किसानों से बातचीत करेंगे। श्री मोदी उसके बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे, जहाँ वे इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करेंगे।

यह कार्यक्रम किसान कल्याण, कृषि आत्मनिर्भरता और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने के प्रति प्रधानमंत्री की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, किसानों का समर्थन करने और किसान-केंद्रित प्रयासों में महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उत्सव मनाने पर केंद्रित होगा।

प्रधानमंत्री कृषि क्षेत्र में 35,440 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली दो प्रमुख योजनाओं का शुभारंभ करेंगे।  वह 24,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना का शुभारंभ करेंगे। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता में वृद्धि, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसलोत्तर भंडारण क्षमता में वृद्धि, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और चयनित 100 जिलों में दीर्घकालिक और अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता को सुगम बनाना है।

प्रधानमंत्री 11,440 करोड़ रुपये के परिव्यय वाले “दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिशन” का भी शुभारंभ करेंगे। इसका उद्देश्य दलहन उत्पादकता के स्तर में सुधार, दलहन की खेती के रकबे का विस्तार, मूल्य श्रृंखला – खरीद, भंडारण, प्रसंस्करण – को मजबूत करना और नुकसान को कम करना सुनिश्चित करना है।

प्रधानमंत्री कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में 5,450 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाओं का उद्घाटन और राष्ट्र को लोकार्पण करेंगे। प्रधानमंत्री लगभग 815 करोड़ रुपये की अतिरिक्त परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे।

प्रधानमंत्री जिन परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे उनमें बेंगलुरु और जम्मू-कश्मीर में कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण केंद्र; अमरेली और बनास में उत्कृष्टता केंद्र; राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत असम में आईवीएफ लैब की स्थापना; मेहसाणा, इंदौर और भीलवाड़ा में दूध पाउडर संयंत्र; तेजपुर, असम में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली चारा संयंत्र; कृषि प्रसंस्करण क्लस्टरों के लिए बुनियादी ढांचा, एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्यवर्धन अवसंरचना, आदि शामिल हैं।

प्रधानमंत्री जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे उनमें कृष्णा, आंध्र प्रदेश में एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्यवर्धन अवसंरचना (विकिरण); उत्तराखंड में ट्राउट मत्स्य पालन; नागालैंड में एकीकृत एक्वा पार्क; कराईकल, पुडुचेरी में स्मार्ट और एकीकृत मत्स्य पालन बंदरगाह;  और ओडिशा के हीराकुंड में अत्याधुनिक एकीकृत एक्वापार्क, आदि।

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्रमाणित किसानों, मैत्री तकनीशियनों और प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों (पीएसीएस) को क्रमशः प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (पीएमकेएसके) और सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) में परिवर्तित होने के प्रमाण पत्र वितरित करेंगे।

यह कार्यक्रम सरकारी प्रयासों के तहत हासिल की गई महत्वपूर्ण उपलब्धियों को भी चिह्नित करेगा। इसमें 10,000 एफपीओ में 50 लाख किसान सदस्यता शामिल है, जिनमें से 1,100 एफपीओ ने 2024-25 में ₹1 करोड़ से अधिक का वार्षिक कारोबार दर्ज किया। अन्य उपलब्धियों में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 50,000 किसानों का प्रमाणन; 38,000 मैत्री (ग्रामीण भारत में बहुउद्देशीय एआई तकनीशियन) का प्रमाणन; कम्प्यूटरीकरण के लिए 10,000 से अधिक बहुउद्देशीय और ई-पीएसीएस की मंजूरी और संचालन; तथा पैक्स, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों का गठन और सुदृढ़ीकरण शामिल हैं। 10,000 से अधिक पैक्स ने अपने कार्यों का विविधीकरण करके उन्हें प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (पीएमकेएसके) और सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) के रूप में कार्य करना शुरू कर दिया है।

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री दलहन की खेती में लगे किसानों से बातचीत करेंगे, जिन्हें कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन में मूल्य-श्रृंखला-आधारित दृष्टिकोण स्थापित करने के उद्देश्य से विभिन्न सरकारी योजनाओं से लाभ हुआ है। इन किसानों को किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की सदस्यता और कृषि अवसंरचना कोष के तहत सहायता भी प्राप्त हुई है।

नये भारत के शिल्‍पकार प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नाम एक और कीर्तिमान

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(सुरेश पचौरी-विनायक फीचर्स)

भारत के यशस्‍वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने अपने राजनैतिक जीवन में एक और कीर्तिमान रच दिया । वह है – मुख्‍यमंत्री तथा प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 24 वर्षों तक देशवासियों की सेवा करने का। श्री मोदी का 7 अक्‍टूबर 2001 को गुजरात के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ लेने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक का सफर अनगिनत उपलब्धियों से भरपूर है । लोकप्रियता के शिखर पर विराजमान मोदी जी का प्रभामंडल आज इतना व्‍यापक बन चुका है कि वे अब ‘वर्ल्‍ड लीडर’ बन चुके हैं । उनके नेतृत्‍व में भारत चहुंमुखी विकास कर रहा है और हमारी अर्थव्‍यवस्‍था कई गुना छलांग लगा चुकी है। देश के चतुर्दिक हिस्‍से स्‍वयमेव विकास की गवाही दे रहे हैं । कश्‍मीर से लेकर कन्‍याकुमारी तक सड़कों, रेलमार्गों, हवाई अड्डों, औद्योगिक इकाइयों, विद्युत परियोजनाओं, मेडिकल कालेजों आदि का तेजी से विस्‍तार हो रहा है । देश में आतंकवाद व नक्‍सलवाद की जड़ें खोखली होती जा रही है, साथ ही आतंकवाद के प्रति भारत की जीरो टॉलरेंस की नीति से अब संपूर्ण विश्‍व प्रेरणा ले रहा है । आत्‍मनिर्भरता और सुरक्षा के मद्देनजर मोदी जी द्वारा उठाए गए कदमों से जनमानस में निश्चिंतता के भाव जागृत हुए हैं ।

‘नये भारत’ के शिल्‍पकार नरेन्‍द्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्‍वास और सबका प्रयास’ की अवधारणा के साथ विश्‍व को भारत की शक्ति से परिचित कराया । भारतीय लोकतंत्र में अनुशासन व अन्‍त्‍योदय के महत्‍व को नये सिरे से परिभाषित कर उसे व्‍यवस्‍था का मूल आधार बनाया ।
साढ़े बारह वर्षों तक गुजरात के मुख्‍यमंत्री रहे श्री मोदी ने गुजरात राज्‍य को औद्योगिक क्रांति का केन्‍द्र बनाकर सर्वांगीण विकास का ऐसा सिलसिला शुरू किया, जो कालांतर में ‘गुजरात मॉडल’ के रूप में जाना गया और देश के विभिन्‍न प्रदेशों ने उसे अपने-अपने राज्‍यों में अपनाकर उसे विकास का संप्रेरक माना । गुजरात में हरित क्रांति लाने का श्रेय भी मोदी जी को ही जाता है। गांव-गांव पानी पहुंचाकर लाखों एकड़ बेकार पड़ी भूमि को खेती योग्‍य बनाने के परिणाममूलक कार्य मोदी जी के ही मुख्‍यमंत्रित्‍व काल में हुए, जिससे लाखों किसान आज खुशहाली का जीवन जी रहे हैं । गुजरात की तुलना समृद्ध व विकसित राज्‍य के रूप में होने के पीछे मोदी जी का कुशल नेतृत्‍व, दूरदर्शी सोच व समर्पण अन्‍तर्निहित है ।

पार्टी के एक सामान्‍य कार्यकर्ता से शुरू हुई नरेन्‍द्र मोदी की सामाजिक व राजनैतिक यात्रा परिश्रम, त्‍याग, एकनिष्‍ठा व राष्‍ट्रप्रेम का जीता-जागता उदाहरण है । साधारण कार्यकर्ता से लेकर देश के प्रधान सेवक के रूप में उनके कालखंड पर दृष्टिपात करें तो यह अवधि सेवा, समर्पण और राष्‍ट्र प्रथम के अद्भुत समागम से परिपूर्ण मिलेगी। 17 वर्ष की आयु में उनके कदम जनसेवा के लिए जो आगे बढ़े, वे फिर कभी रूके नहीं । ‘इदं राष्‍ट्राय, इदं न मम्’ की उदात्त भावना से ओतप्रोत होकर उन्‍होंने अपना जीवन राष्‍ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया । मोदी जी राजनीति में नैतिकता और शुचिता के पक्षधर हैं । राजनीति को वे सेवा का एक जरिया मानते हैं, धनार्जन का माध्‍यम नहीं ।

श्री नरेन्‍द्र मोदी एक ऐसे कर्मयोगी हैं, जिनका जीवन सेवा की संकल्‍पबद्धता तथा राष्‍ट्रबोध की दृढ़ता से ओतप्रोत है । वे ऐसे जननेता हैं, जिनके लिए संपूर्ण वसुधा कुटुम्‍बवत् है । वे भारत की 140 करोड़ जनता को अपना परिवार मानकर उसे मनसा, वाचा, कर्मणा व्‍यवहार में लाते हैं । उनके नेतृत्‍व में आज केवल आर्थिक रूप से ही नहीं वरन् सामरिक रूप से भी हमारा देश शक्तिशाली बना है । अमेरिका, रूस, चीन जैसे देश भारत का लोहा मानने लगे हैं । पड़ोसी देश चीन दोस्‍ती के लिए बेताब है । ‘आपरेशन सिंदूर’ की गाथा तो पूरे विश्‍व में गूंज रही है । दुनिया ने देखा है कि पाकिस्‍तान कैसे ‘त्राहिमाम्-त्राहिमाम्’ की स्थिति में आकर भारत के आगे गिड़गिड़ाया था । पहलगाम की घटना के बाद पाकिस्‍तान को सबक सिखाने का मोदी जी ने जो संकल्‍प लिया था, उसे पूरा कर देशवासियों को यह भरोसा दिलाया कि मोदी जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं । ‘मोदी है तो मुमकिन है’, यह कथन अब पुराना हो चुका है, अब तो ‘मोदी है तो देश सुरक्षित है’, यह विश्‍वास देशवासियों के दिलों में रच-बस गया है ।

प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को सदैव प्राथमिकता में रखा है, उनका मानना है कि हम सुरक्षित तभी रह सकते हैं, जब हमारे पास रक्षा संसाधन भरपूर मात्रा में उपलब्‍ध हों । इसी परिप्रेक्ष्‍य में केन्‍द्र सरकार ने देश के रक्षा बजट में काफी बढ़ोत्‍तरी की । रक्षा बजट 2014 में 46,429 करोड़ रूपये था, वह 2024 में 1.27 लाख करोड़ रूपये हो चुका है । देश में पहले 65-70 प्रतिशत रक्षा उपकरण आयात किये जाते थे वहीं अब 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण भारत में ही तैयार हो रहे हैं । आज भारत लगभग 100 देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है और भारत का निर्यात 2013-14 में 686 करोड़ रूपये का था जो बढ़कर 23,000 करोड़ रूपये हो गया है ।

अंतर्राष्‍ट्रीय संदर्भों में बात की जाए तो आज पूरे विश्‍व में हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी की धाक जम चुकी है । विश्‍व मंच पर उनका कद बहुत ऊंचा हो चुका है, उनका नाम दूरदर्शी व अग्रणी नेताओं में शुमार हो चुका है । वे दुनिया के जिस भी देश में जाते हैं, वहां के राष्‍ट्राध्‍यक्ष अपने देश के सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान से उन्‍हें नवाजने में गर्व का अनुभव करते हैं । विगत साढ़े ग्‍यारह वर्षों के दौरान मोदी जी ने अनेक देशों की यात्रा की, उन देशों के साथ विभिन्‍न क्षेत्रों में हुए एमओयू इस बात के संकेत हैं कि मोदी जी ऐसे हर देश के लिए भारत का दरवाजा खोल रहे हैं, जो यहां आकर हमारी नीतियों और शर्तों के अनुसार निवेश करें, जिससे भारत समृद्धशाली बने । उल्‍लेखनीय है कि भारत के मित्र देशों की संख्‍या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है, जो उभयपक्षीय व्‍यावसायिक हितों के मद्देनजर एक सुखद संकेत हैं।

मोदी जी के व्‍यक्तित्‍व में भारत, भारतीयता और भारतीय संस्‍कृति का समुच्‍चय समाहित है । उनका विजन है कि भारत तरक्‍की करे, भारतीयता बरकरार रहे और भारतीय संस्‍कृति का संरक्षण-संवर्धन हो। इस दिशा में उनके निर्देशन में राजनैतिक, सामाजिक, सांस्‍कृतिक तथा आर्थिक क्षेत्रों में हुए कार्य स्‍तुत्‍य हैं । उनके नेतृत्‍व में आज ‘नया भारत’ दुनिया के सामने सर ऊंचा कर चल रहा है । भारत मजबूत तो बना ही है, अब वह ‘अजेय’ बन चुका है ।

श्री मोदी जी के नेतृत्व में आज का भारत विश्‍वगुरू बनने की ओर अग्रसर है। अपने आत्‍मबल के सहारे हमारा देश दुनिया का प्रेरक बन चुका है। श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पिछले 24 वर्षों में देश दुनिया की सोच बदल दी । उनकी विकासोन्‍मुखी व जनहितैषी योजनाओं एवं समाज के सर्वहारा वर्ग के कल्‍याण के लिए उठाए गए कदमों की वजह से जो आमूल-चूल बदलाव आए हैं, उससे नये भारत की नई तस्‍वीर बहुत साफ देखी जा सकती है। साढ़े बारह साल मुख्‍यमंत्री के रूप में और साढ़े ग्‍यारह साल प्रधानमंत्री के रूप में सेवारत श्री नरेन्‍द्र मोदी के कार्यकाल पर विहंगम दृष्टि डाली जाए तो सुस्‍पष्‍ट नजर आता है कि उन्‍होंने भारत के मान-सम्‍मान, गौरव, गरिमा और अस्मिता से कभी समझौता नहीं किया । उन्‍होंने सदैव राष्‍ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए उसे वरीयता दी । भारत को उत्‍कर्ष,तरक्‍की व खुशहाली के सर्वोच्‍च पायदान पर ले जाने का उनका स्‍वप्‍न नि:संदेह पूरा होगा। भारत को विश्‍वगुरू बनाने के लिए अहर्निश काम करने वाले ऐसे कर्मयोगी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के प्रति हम हृदय से सद्भभावना व्‍यक्‍त करते हुए यह सद्इच्‍छा रखते हैं कि उनके नेतृत्‍व में भारत सदैव आलोकित होता रहे।

(विनायक फीचर्स) (लेखक भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री हैं)