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एमआईटी-डब्ल्यूपीयूः उद्योग जगत के अनुकूल नए दौर के प्रोग्रामों के लिए आमंत्रित किए आवेदन

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मुम्बई। एमआईटी-डब्ल्यूपीयू, पुणे में स्थित भारत का एक उच्च शिक्षा संस्थान है, जो अपनी शुरूआत से ही छात्रों को प्रशिक्षण का आधुनिक अनुभव प्रदान करता रहा है। उच्च शिक्षा क्षेत्र में चार दशकों की धरोहर के साथ, यह युनिवर्सिटी देश की शिक्षा प्रणाली में ज़रूरी बदलाव लाते हुए नई पीढ़ी के विचारकों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एमआईटी-डब्ल्यूपीयू महत्वाकांक्षी एवं गतिशील भारतीय युवाओं की सम्पूर्ण क्षमता का सदुपयोग कर इसे सही अवसर प्रदान करती है।
एमआईटी-डब्ल्यूपीयू ने अकादमिक वर्ष 2023-24 के लिए प्रवेश आमंत्रित किए हैं। छात्र इस युनिवर्सिटी के 12 स्कूलों में उपलब्ध कराए जाने वाले 150 से अधिक अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, डिप्लोमा एवं पीएचडी प्रोग्रामों के लिए आवेदन कर सकते हैं। ये प्रोग्राम इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी, साइंस, मैनेजमेन्ट, पब्लिक पॉलिसी, मीडिया, फार्मेसी, कॉमर्स, डिज़ाइन, पीस स्टडीज़, लॉ, लिबरल आर्ट्स आदि में उपलब्ध कराए जाते हैं।
अपने प्रोग्रामों की व्यापक रेंज के माध्यम से एमआईटी-डब्ल्यूपीयू उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच के अंतर को दूर कर भावी लीडर्स के निर्माण के लिए प्रयासरत है। इसके अलावा युनिवर्सिटी के विशेषज्ञ फैकल्टी सदस्य छात्रों को उचित मार्गदर्शन एवं संरक्षण प्रदान कर उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करते हैं। वे छात्र जो युनिवर्सिटी में पढ़ाई करना चाहते हैं, वे https://bit.ly/3EmlvoU पर विज़िट कर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। अंडरग्रेजुएट एवं पोस्टग्रेजुएट प्रोग्रामों के लिए आवेदन करने के लिए छात्र निर्धारित कोर्स के लिए एमआईटी-डब्ल्यूपीयू सीईटी दे सकते हैं।
राहुल विश्वनाथ करड (कार्यकारी अध्यक्ष, एमआईटी-डब्ल्यूपीयू) ने कहा, ‘‘हमें खुशी है कि हम अकादमिक वर्ष 23-24 के लिए अंडरग्रेजुएट, ग्रेजुएट एवं प्रोफेशनल प्रोग्रामों हेतु आवेदन स्वीकार कर रहे हैं। एमआईटी-डब्ल्यूपीयू में हम छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करने में भरोसा रखते हैं ताकि वे आगे चलकर अपने करियर और अपने समुदाय में सफलता हासिल कर सकें।
एमआईटी-डब्लयूपीयू को शिक्षा के क्षेत्र में बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाने के लिए जाना जाता है, संस्थान अनुसंधान के आधुनिक तरीकों एवं व्यवहारिक लर्निंग के माध्यम से छात्रों के अकादमिक अनुभव में तालमेल बनाता है- यही कारण है कि आज यह संस्थान देश की शीर्ष पायदान की निजी युनिवर्सिटियों में शामिल हो चुका है। छात्रों को सर्वश्रेष्ठ शिक्षा प्रदान करने के प्रयास में युनिवर्सिटी ने कई एमओयू साईन किए हैं और उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ साझेदारियां भी की हैं। युनिवर्सिटी के साझेदार आईटी, इंजीनियरिंग एवं मैनुफैक्चरिंग, ऑटोमोटिव, शिक्षा, डिज़ाइन, एचआर, कन्सलटेन्सी एवं एंटरेप्रेन्युरशिप आदि सभी क्षेत्रों में हैं। इन सभी साझेदारियों के चलते एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के छात्रों को लर्निंग का बेजोड़ व्यवहारिक अनुभव प्राप्त होता है।
युनिवर्सिटी ने उद्योग जगत के अग्रणी प्लेयर्स के साथ साझेदारियां एवं एमओयू किए हैं। इनमें शामिल हैं- टाटा कन्सलटेन्सी सर्विसेज़, टेक महिन्द्रा, मर्सीडीज़ बेंज़ इंडिया, टाटा टेक्नोलॉजीज़, थर्मेक्स लिमिटेड, आईबीएम इंडिया, इन्फोसिस, स्कोडा ऑटो, वॉक्सवेगन इंडिया, एमक्योर फार्मास्युटिकल्स और केपीआईटी टेक्नोलॉजीज़ आदि। उद्योग जगत के नेटवर्क का लाभ उठाते हुए संस्थान छात्रों को उद्योग जगत के लिए तैयार करता है। साथ ही एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के छात्रों को उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ इंटर्नशिप एवं नौकरियों के अवसर भी उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि वे पेशेवर दुनिया में सफलता की नई उंचाईयों तक पहुंच सकें।
इसके अलावा आधुनिक विश्वस्तरीय विचारों एवं इनोवेशन्स को बढ़ावा देने के लिए युनिवर्सिटी ने कई अन्तर्राष्ट्रीय युनिवर्सिटियों जैसे डैकिन युनिवर्सिटी, ईस्टर्न मिशिगन युनिवर्सिटी, जॉन हॉपकिन्स युनिवर्सिटी, युनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन, मैक्वेरी युनिवर्सिटी, वर्जिनियां कॉमनवेल्थ युनिवर्सिटी, नॉटिंघम ट्रेन्ट युनिवर्सिटी के साथ भी समझौता ज्ञापन किए हैं।
एमआईटी-डब्लयूपीयू में सेंटर ऑफ इंडस्ट्री एकेडमिया पार्टनरशिप्स के माध्यम से छात्रों को प्लेसमेन्ट, उच्च शिक्षा, इंटर्नशिप, एंटरेप्रेन्युरशिप तथा करियर में मार्गदर्शन सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के नियमित रिक्रुटर्स में अमेझॉन,रिलायन्स, वॉक्सवैगन, एमडोक्स, बार्कलेज़, टाटा कन्सलटेन्सी सर्विसेज़, एसेन्ट्योरे, माइक्रोसॉफ्ट, मर्सीडीज़-बेन्ज़ और आईबीएम आदि शामिल हैं। 65 एकड़ में फैले एमआईटी-डब्ल्यूपीयू में सभी आधुनिक सुविधाएं हैं। हर साल 18,000 से अधिक छात्र संस्थान के 12 स्कूलों एवं 30 से अधिक अकादमिक विभागों में अपना नामांकन करते हैं।

तुर्की आपदा की मदद के लिए अपोलो हॉस्पिटल्स – लाइफसाइन्स की साझेदारी

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तुर्की आपदा के लिए 1000 ‘रिमोट पेशेंट मॉनिटरिंग पैच’ प्रदान करेंगे

नवी मुंबई। तुर्की में हाल ही में आई विनाशकारी आपदा के बाद वहां के लोगों को सपोर्ट प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपोलो हॉस्पिटल्स ने लाइफसाइन्स के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत 1000 रिमोट पेशेंट मॉनिटरिंग पैच प्रदान किए जाएंगे। तुर्की में हाल ही में भूकंप के कारण हजारों लोग असमय ही काल के मुंह में समा गए हैं और हजारों अन्य लोग घायल हुए हैं। हालांकि वहां बचाव संबंधी कामकाज का पहला चरण पूरा हो गया है, लेकिन सामान्य स्थिति की बहाली का काम अभी शुरू हो रहा है। भूकंप के कारण अनेक अस्पताल ध्वस्त हो गए हैं और कई अस्पताल ऐसे हैं, जहां कामकाज ठप पड़ा है। इस महत्वपूर्ण समय में तुर्की का समर्थन करने के लिए, अपोलो हॉस्पिटल्स और लाइफसाइन्स ने यह साझेदारी की है। साझेदारी के तहत प्रदान किए जाने वाले 1000 रिमोट पेशेंट मॉनिटरिंग पैच का उपयोग सेटिंग्स में किया जा सकता है, यह सबसे बीमार रोगियों के लिए क्रिटिकल केयर बेड को खाली करने का काम भी करेगा, और जिन्हें अस्पतालों के बाहर या क्षेत्र में देखभाल की आवश्यकता है, वे इस पैच का उपयोग कर सकते हैं।
जीवन को और अधिक नुकसान होने से बचाने के लिए महत्वपूर्ण संकेतों की समय पर निगरानी आवश्यक है, खासकर जब रोगियों को उनकी सामान्य देखभाल और दवाओं तक पहुंच नहीं हो सकती है, और वे अत्यधिक तनाव का सामना कर रहे हों। अपोलो हॉस्पिटल्स के डॉ. साई प्रवीण हरनाथ ने कहा, ‘‘अपोलो हॉस्पिटल्स ज़रूरत की इस घड़ी में तुर्की की सहायता के लिए तैयार है, ताकि हमारी संपूर्ण क्रिटिकल केयर और सब-स्पेशलिस्ट टीमों से चिकित्सा सहायता और मार्गदर्शन मिल सके। यह ऐसी टीम है, जो इन रोगियों की निगरानी में मदद कर सकती है।
हरि सुब्रमण्यम (सीईओ, लाइफसाइन्स) ने कहा कि एक कंपनी के रूप में, हमने हमेशा माना है कि महत्वपूर्ण संकेतों को कहीं भी, कभी भी मॉनिटर करने की आवश्यकता है, और हमारे डिवाइस डॉक्टरों को इसी बात के लिए सक्षम बनाते हैं। इस तरह वे नुकसान को रोकने और उपचार की दिशा में आगे बढ़ते हुए अपने मरीजों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं।
प्रो. वेदत बुलुत (महासचिव-सेंट्रल काउंसिल, टर्किश मेडिकल एसोसिएशन) ने कहा कि हम तुर्की मेडिकल एसोसिएशन की ओर से मानवीय स्वास्थ्य सहायता और अपोलो अस्पताल समूह की एकजुटता के लिए आभारी हैं। भूकंप पीड़ितों की मदद के सभी प्रयास हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अडाना मेडिकल चैंबर अब आपदा क्षेत्र में लॉजिस्टिक सेंटर है, और सभी प्रकार की मेडिकल सप्लाई अडाना से दूसरे शहरों में की जाती है। विशेष रूप से, चार शहर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, और यहां तक कि इन शहरों में चिकित्सा केंद्रों की इमारतें भी ढह गई हैं।
डॉ. सेलाहटिन मेंटेस (अध्यक्ष – रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ, अडाना मेडिकल चैंबर) ने कहा कि इस भीषण कुदरती आपदा के बाद दिखाई गई अंतरराष्ट्रीय एकजुटता के लिए हम आपको धन्यवाद देते हैं। यह एक ऐसी आपदा थी, जिसने 11 प्रांतों में रहने वाले 15 मिलियन लोगों को प्रभावित किया। यह पूरा प्रयास कई देशों में फैले स्वयंसेवकों के एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के माध्यम से संभव हुआ। इसके लिए तुर्की के व्यस्त डॉक्टरों से अत्यधिक समन्वय और सहयोग की आवश्यकता थी जो पहले से ही संकट से संबंधित कई मुद्दों से निपट रहे थे। हमें उम्मीद है कि उपकरणों और विशेषज्ञता के इस दान से इन दो महान देशों के बीच चिकित्सा सेतु बनाने और लोगों की पीड़ा को कम करने में मदद मिलेगी।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला समाज सुधारकों के संघर्ष को याद करते हुए – सावित्री बाई के पत्रों द्वारा हमें फातिमा शेख की जानकारी मिलती है।

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– मुख्तार खान

समाज के विकास और उत्थान में महिलाओं और पुरुषों का समान योगदान रहा है।अक्सर पुरुषों के योगदान की चर्चा होती है, लेकिन महिलाओं द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों की उतनी चर्चा नहीं की जाती। महिला दिवस के अवसर पर हम आज दो ऐसी ही महान नारियों के जीवन और कार्य के बारे में जानेंगे, जिन्होंने आज से पौने दो सौ वर्ष पहले स्त्री और दलितों की शिक्षा के क्षेत्र में कार्य किया। ये दो महिलाएँ सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख अपने समय की क्रांतिकारी महिलाएं थीं। दोनों ने एक साथ मिलकर शिक्षा और समाज सुधार के लिये कार्य किया। सावित्री बाई फुले के योगदान से तो हम परिचित हैं। लेकिन फातिमा शेख के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। सावित्री बाई के पत्रों द्वारा हमें फातिमा शेख की जानकारी मिलती है।

सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिल्हे में नायगांव नाम में हुआ था। 1840 में सावित्री बाई का विवाह जोतिबा फुले से हुआ।  जोतिबा अपनी मौसेरी बहन सगुना बाई के साथ रहते थे। विवाह के बाद जोतिबा फुले ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। खुद की पढाई के साथ साथ जोतिबा घर पर सावित्री बाई को भी पढ़ाने लगे। बहुत जल्द ही सावित्रीबाई ने मराठी व अंग्रेज़ी पढ़ना लिखना सीख लिया। इस के बाद सावित्री बाई ने स्कूली परीक्षा पास कर ली। सावत्रि बाई शिक्षा का महत्तव जान गयी थीं। सावित्रीबाई और जोतिबा चाहते थे कि उन्हीं की तरह समाज के पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी पढ़ने लिखने का अवसर मिले। उस समय दलित व पिछड़ी जातियों के लिए शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी ।

जोतिबा और सावित्रीबाई ने अपने मन में लडकियों के लिये विद्यालय खोलने का निश्चय कर लिया।  लेकिन समस्या यह थी कि लड़कियों को पढ़ाने के लिए महिला अध्यापिका कहां से लाये? जहां चाह होती है वहां राह निकल ही आती है। इस महान कार्य की ज़िम्मेदारी   सावित्री बाई ने संभाली। उन्होंने मिशनरी कॉलेज से टीचर ट्रेनिग का कोर्स पूरा किया। अब वे एक प्रशिक्षित अध्यापिका बन गयीं थीं। इस तरह जोतीबा और सावित्री बाई ने पूना में सन 1848 में पहले महिला विद्यालय की नीव रखी। महिलाओं के लिये विद्यालय चलाना आसान काम ना था। शुरुआत में अभिभावक अपनी लडकियों को विद्यालय में भेजने के लिए तैयार नहीं हुए। लोग लड़कियों को पढ़ाने के पक्ष में ही नहीं थे। अज्ञानतावश उन्होंने यह धारणा बना ली थी कि यदि लडकियों को पढ़ाया गया तो उनकी सात पीढियाँ नरक की भागीदार बन जायेगी। ऐसी स्थिति में लोगों को समझना बड़ा कठिन था।

इसके बावजूद सावित्री बाई ने हिम्मत नहीं हारी। वे लोगो के घर-घर जाती,उन्हें प्यार से समझती। शिक्षा का महत्त्व बताती। उनके इस कार्य से प्रेरित होकर पूना की एक और साहसी महिला शिक्षिका फातिमा शेख सामने आयीं। फातिमा शेख के साथ आ जाने से सावित्री बाई का हौसला दुगुना हो गया। फातिमा शेख का सम्बंध एक सामान्य मुस्लिम परिवार से था। उनका जन्म 9 जनवरी 1831 को हुआ था। । अपनी बिरादरी की वह पहली पढ़ी लिखी महिला थीं। फातिमा शेख बड़े भाई उस्मान शेख के साथ पूना में ही रहती थीं। उस्मान शेख महात्मा फुले के बचपन के मित्र थे। महात्मा फुले की तरह वे भी खुले विचारों के थे। उन्हीं के प्रयास से फातिमा भी पढ़ लिख पाई थीं। फातिमा शेख के साथ जुड़ जाने से लडकियों के स्कूल में जान आ गयी ।

अब लड़कियों के स्कूल का काम बड़े उत्साह के साथ चलने लगा।  फातिमा और सावित्री बाई दोनों सवेरे जल्दी उठ जातीं। पहले अपने घर का काम पूरा करतीं। इसके बाद पूरा समय अपने स्कूल को देती। जोतिबा और उस्मान शेख का सहयोग भी इन्हें बराबर मिलता रहता। शुरुआत में विद्यालय में केवल छह ही लड़कियां थीं। धीरे धीरे यह संख्या बढ़ने लगी। सब कुछ योजना अनुसार चल रहा था। लेकिन शहर के संभ्रांत वर्ग को लडकियों का यूं पढ़ना लिखना ठीक ना लगा। इस कार्य को शास्त्र विरोधी बताकर उन्होंने फुले परिवार का विरोध किया। इसके बावजूद सावित्री बाई अपने कार्य में जुटी रही। विरोध करने वालों ने जोतिबा के पिता गोविंदराव पर दबाव बनाया। गोविंदराव को सामाज से बहिष्कृत करने की धमकी दी गयी।

इस विरोध के चलते गोविन्दराव ने जोतिबा से विद्यालय बन्द करने या घर छोड़ देने की शर्त रखी। जोतिबा और सावित्री बाई किसी भी सूरत में अपना मिशन जारी रखना चाहते थे। पिता की बात उन्होंने नहीं मानी। अंत में उन्हें अपना घर छोड़कर जाना ही पड़ा।

पूणे शहर में कोई उन्हें सहारा देने को तैयार नहीं था। सावित्री बाई को अपने घर से अधिक लडकियों के पढ़ाई की चिंता सताये जा रही थी। इधर संभ्रांत वर्ग ने फुले दंपति का सामजिक बहिष्कार कर रखा था। सामजिक बहिष्कार के डर से कोई उनकी सहयता के लिये आगे नहीं आया। फुले परिवार को धर्म विरोधी घोषित कर दिया गया था। ऐसी संकट की घड़ी में महात्मा फुले के बचपन के मित्र उस्मान शेख फरिश्ता बनकर सामने आये। उस्मान शेख ने अपना निजी बाड़ा फुले परिवार के लिये खोल दिया। शेख परिवार ने सावित्री बाई और जोतिबा को सहारा ही नहीं दिया बल्कि अपने घर का एक हिस्सा स्कूल चलाने के लिये भी दे दिया। इस तरह लड़कियों का विद्यालय अब फातिमा शेख के घर से ही चलने लगा।  उस्मान शेख और फातिमा को भी अपने समाज के भीतर लगातार विरोध झेलना पड़ रहा था।

सावित्री बाई की तरह ही फातिमा शेख को भी बुरा-भला कहा जाता। उन पर ताने कसे जाते, गालियां दी जाती।  उन पर कीचड़, गोबर फेंका जाता, उनके कपड़े गंदे हो जाया करते। दोनों महिलाएं चुपचाप ये यातनाएँ सहती रहीं। फातिमा शेख और सावित्री बाई दोनों बड़ी निडर और साहसी  महिलाएँ थीं। दोनों ने हार नहीं मानी, वे दूनी लगन और मेहनत के साथ लड़कियों का भविष्य संवारने में जुटी रहीं। उन्होंने 1850 में उन्होंने ‘द नेटिव फीमेल स्कूल। पुणे’ नामी संस्था बनाई। इस संस्था के अंतर्गत पुणे शहर के आस पास 18 विद्यालय खोल गये। उस ज़माने में महिलाओं की तरह ही दलित बच्चों के लिये भी शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी। इस समस्या को दूर करने के लिये महात्मा फुले ने‘सोसायटी फ़ॉर द प्रमोटिंग एजुकेशन ऑफ़ महार एन्ड मांग’ नामक संस्था की स्थापना की इस तरह महिलाओं के साथ-साथ वंचित समाज के बच्चों के लिए भी विद्यालय की शुरुआत हुई।

फातिमा शेख ऐसी पहली मुस्लिम महिला बनी जिसने मुस्लिम महिलाओं की शिक्षा के साथ साथ बहुजन समाज की शिक्षा के लिए भी काम किया। फातिमा शेख के बारे में बहुत कम जानकारी प्राप्त है। सावित्री बाई के पत्रों से हमें उनकी जानकारी मिलती है। हम समझ सकते हैं, आज से दो सौ वर्ष पूर्व किसी मुस्लिम महिला का इस तरह घर की चार दीवारी से बाहर आकर समाज कार्य करना, कितने साहस का काम रहा होगा? फातिमा शेख ने सावित्री बाई के मिशन को आगे ही नहीं बढ़ाया ब्लकि संकट की घड़ी में सदा उनके साथ खड़ी रही। सावित्री बाई की अनुपस्थिति में स्कूल प्रशासन की सारी जिम्मेदारी फातिमा शेख ही संभाला करती थी। विद्यालय में छात्राओं की संख्या बढ़ने लगी। शिक्षा ग्रहण करने के बाद उनकी छात्राएँ भी अध्यापिका की भूमिका निभाने लगी। आगे चलकर सावित्री बाई ने अपने सामाजिक कार्य को और विस्तार दिया।

उन दिनों समाज में बाल विवाह प्रथा का चलन आम था। बहुत सी लड़कियां छोटी उम्र में ही विधवा हो जाया करती। इसके अतिरिक्त ऐसी अविवाहित माताएँ जिन्हें समाज पूरी तरह से बहिष्कृत कर देता, ऐसी पीड़ित महिलाओं के सामने सिवाय आत्महत्या के कोई और मार्ग नहीं रहता।  महात्मा फुले और सावित्री बाई ने ऐसी पीडित महिलाओं के लिये 28 जनवरी 1853 को ‘बाल हत्या प्रतिबंधक गृह’ नाम से एक आश्रम खोला। देश में महिलाओं के लिए इस तरह का यह पहला आश्रम था। इस आश्रम में महिलाओं को छोटे-मोटे काम सिखाए जाते, उनके बच्चों की देख भाल की जाती। बड़े होने पर उन्हें स्कूल में दाखिल कराया जाता।

एक दिन आश्रम में काशीबाई नाम की एक अविवाहित गर्भवती महिला आई।  सावित्री बाई ने उसे सहारा दिया, आगे चलकर उस महिला के पुत्र को ही उन्होंने गोद लिया। यह बालक बड़ा हो कर डॉ. यशवंत कहलाया। सावित्री बाई ने यशवंत को पढ़ा लिखा कर एक सफल डॉक्टर बनाया। 1896 की बात है मुंबई, पुणे में उन दिनों प्लेग फैला हुआ था। सावित्री बाई लोगों की सेवा में जुटी रहती। इसी दौरान वे भी प्लेग की चपेट में आ गयीं। और 10 मार्च 1897 को इस महान समाज सेविका ने अपने प्राण त्याग दिए।

सावत्री बाई और फातिमा शेख ने सैकड़ों महिलाओं के जीवन में शिक्षा और ज्ञान की ज्योत जलाई।  शिक्षा के द्वारा शूद्रों, स्त्रियों को स्वाभिमान के साथ जीने का रास्ता दिखाया। आज महिलाएं प्रगति के मार्ग पर अग्रसर हैं, पहले से अधिक स्वतंत्र हैं। महिलाओं के उत्थान में महत्मा फुले, सावित्री बाई और फातिमा शेख जैसी महान विभूतियों का संघर्ष और त्याग छिपा है। 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सावित्री बाई और फातिमा शेख जैसी महान नारियों के योगदान को याद करना हम सब के लिये गर्व की बात है।

–      मुख्तार खान

(जनवादी लेखक संघ, महाराष्ट्र)

(9867210054)

mukhtarmumbai@gmail.com

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गोरेगांव -असमी कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग , ५ गाड़ियां जल कर राख

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गोरेगांव -असमी कॉम्प्लेक्स में लगी भीषड़ आग , पांच गाड़िया जल कर राख

मुंबई । गोरेगांव राममंदिर असमी कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लग गई, जिससे वहां हुई पार्क पांच गाड़ियां आग की चपेट में आ जाने से जल कर राख हो गई।
समाचार के अनुसार असमी कॉम्पलेक्स बिल्डिंग आर ५  के सामने अवैध रूप से कब्जाये गए जगह पर भारी मात्रा में सूखी लकड़ियां जमा कर के रखी गयी थी। वहीं पास में ही परम्परा के अनुसार होलिका दहन का कार्यक्रम किया गया था। अभी तक आग के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है। चश्मदीदों के अनुसार तेज हवा के कारण आग की चिंगारी भीषण आग की वजह हो सकती है। ज्ञात हो कि राम मंदिर में बहुत से अबैध शेड बने हुए है, जहां यदा कदा घटनाएं होती रहती हैं। सोसायटी से लगे इस अवैध लकड़ा जमाखोरों पर पुलिस प्रशासन द्वारा नकेल कसना चाहिए।

नगालैंड में नहीं होगा कोई विपक्ष?: चुनाव जीतने वाले ज्यादातर दलों ने NDPP-BJP गठबंधन को दिया समर्थन

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ये पहली बार नहीं है, जब नगालैंड में बिना विपक्ष वाली सरकार बनी है। इसके पहले 2015 और 2021 में सरकार के चालू कार्यकाल के दौरान विपक्ष-रहित सरकारें बनीं। हालांकि यह पहली ऐसी विधानसभा होगी, जो सदन के शपथ लेने से पहले ही विपक्ष-रहित होने वाली है।

नगालैंड विधानसभा एक बार फिर से विपक्षविहीन होने की तरफ आगे बढ़ रहा है। यहां चुनाव में बहुमत हासिल करने वाली एनडीपीपी-भाजपा गठबंधन को चुनाव जीतने वाले लगभग सभी दलों ने बिना शर्त समर्थन दिया है। पिछली बार यानी 2018 में भी यही हुआ था। तब भी नगालैंड के सारे 60 विधायक सरकार में शामिल थे।

इस बार नगालैंड में सबसे ज्यादा राजनीतिक दलों ने जीत हासिल की है। दो मार्च को चुनाव के नतीजे आए थे। आंकड़ों के अनुसार, NDPP को 25, भाजपा को  12 सीटों पर जीत मिली थी। इन दोनों पार्टियों ने चुनाव से पहले ही गठबंधन कर लिया था। एनसीपी तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इनके सात सदस्यों ने चुनाव में जीत हासिल की थी। इसके अलावा  एनपीपी के पांच, चार निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी। लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास), एनपीएफ, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के दो-दो सदस्यों ने जीत हासिल की थी। जेडीयू के टिकट पर एक प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी। ये पहली बार है जब इतने सारे राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने चुनाव में जीत हासिल की हो।

बिना शर्त इन पार्टियों ने भाजपा-एनडीपीपी गठबंधन का दिया समर्थन 

एनडीपीपी-भाजपा गठबंधन को लगभग सभी दलों ने बिना शर्त समर्थन दिया है। सूत्रों के अनुसार, लोजपा (रामविलास), आरपीआई (अठावले), जद (यू) पहले ही गठबंधन सहयोगियों को समर्थन पत्र सौंप चुके हैं। एनसीपी ने शनिवार को नेफ्यू रियो के नेतृत्व वाली एनडीपीपी को ‘बिना शर्त’ समर्थन देने वाला एक पत्र सौंपा। इसी तरह, एनपीएफ के महासचिव अचुम्बेमो किकोन ने कहा कि उनकी पार्टी भी एनडीपीपी-भाजपा गठबंधन को समर्थन दे सकती है। हालांकि अभी इसपर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। एनपीएफ के समर्थन देते ही नागालैंड में सर्वदलीय सरकार बन जाएगी।

पहले भी बिना विपक्ष वाली सरकार बनी है
ये पहली बार नहीं है, जब नगालैंड में बिना विपक्ष वाली सरकार बनी है। इसके पहले 2015 और 2021 में सरकार के चालू कार्यकाल के दौरान विपक्ष-रहित सरकारें बनीं। हालांकि यह पहली ऐसी विधानसभा होगी, जो सदन के शपथ लेने से पहले ही विपक्ष-रहित होने वाली है।

 

बिजनेसमैन को प्रोत्साहित हेतु प्रदान किया गया एम्पॉवर अवार्ड

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दिल्ली। एम्पॉवर सोशल एंड एज्युकेशन ट्रस्ट के माध्यम से कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया न्यू दिल्ली में 10वाँ एम्पावर अवॉर्ड आयोजित हुआ। उसी अवसर पर मुख्य अतिथी के रूप में देश ओमान के डायरेक्टर ऑफ फायनान्स मोहम्मद अतिफ हुसैन, दीपक सिंह (कल्चरल अम्बेडकर ऑफ सेशल्स गवर्नमेंट), साध्वी मृदुला दीदी, डॉ नरेश बोडके (डायरेक्टर कॉम्पिटिशन कमिशन ऑफ इंडिया दिल्ली), पवन वासुदेव (संयोजक हिमाचल प्रदेश भाजपा दिल्ली प्रदेश प्रेसिडेंट), महाराष्ट्र सदन के चौगुले, मंगला सुरेश अंगाडी (पार्लियामेंट लोकसभा की प्रथम महिला सदस्य) डॉ. अमजद पठाण (रिसर्च साइंटिस्ट, मुम्बई), ज़िया अउ रहमान (जकात फाउंडेशन दिल्ली के जनरल सेक्रेटरी), मोहम्मद नजहत अली सिद्दीकी (डायरेक्टर सिंगापुर ग्रुप सऊदी अरब), दीपक शर्मा (तिहाड़ जेलर, एएसपी), नीरज शर्मा (फिल्म प्रोड्यूसर), प्रसुम मुखर्जी (सिंगर), डॉ मोहम्मद रियाज (नेशनल प्रेसिडेंट आल इंडिया कांग्रेस सोशल ऑर्गनाइजेशन), कुंवर अफजल चौधरी (जोनल चेयरमैन टीएफ, मिनिस्टर ऑफ फूड इंडस्ट्री गवर्नमेंट ऑफ इंडिया), जितेंद्र शर्मा (प्रदेश कार्यकारणी सदस्य भाजपा), आचार्य डॉक्टर तुषार तरटे की उपस्थिति रही।
एम्पॉवर सोशल एन्ड एज्युकेशन ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी घनश्याम कोलंबे 30 साल से कार्यरत हैं और उन्होंने ट्रेनिंग के माध्यम से पांच लाख से ज्यादा लोगों के जीवन में परिवर्तन लाया है। अच्छे बिजनेसमैन को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने 10 साल से एम्पॉवर सोशल एज्युकेशन ट्रस्ट माध्यम से डायरेक्ट सेलिंग एंड बिजनेस आयकॉन अवॉर्ड शुरू किया। 10वां अवॉर्ड समारोह दिल्ली में सम्पन्न हुआ जहाँ सोशल बिजनेसमैन डायरेक्ट सेलिंग अलग अलग क्षेत्र के लोगों को अमेरिकन युनिवर्सिटी से हॉनररी डॉक्टरेट डिग्री देकर सम्मानित किया गया। आर एम पावर के माध्यम से अलग अलग कंपनी के सीएमडी डायरेक्टर लीडर्स को प्रोत्साहित करने के लिए लाईफ टाईम अचीवमेंट अवॉर्ड, टॉप अचीवमेंट अवॉर्ड, सोशल अवॉर्ड, बिजनेसमैन अवॉर्ड दिया गया। इसमें मिलने वाले प्रॉफिट से हर शनिवार को मुंबई में केईम हॉस्पिटल, कैंसर पीड़ितों और उनके रिश्तेदार तथा बेघर बच्चों की शिक्षा और वृद्धाश्रम की सहायता किया जाता है। एम्पॉवर सोशल एंड एज्युकेशन ट्रस्ट के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाई भी करायी जाती है।
एम्पॉवर कमिटी मेंबर श्रुती कोलंबे (ट्रस्टी), अविष्कार कोलंबे (ट्रस्टी), सोनाली मेमाने (सीईओ), डॉक्टर राज काले (सीनियर नेशनल प्रेसिडेंट), डॉ सोम शेखर के (नेशनल प्रेसिडेंट), राजेश वारणकर (इवेंट कॉर्डिनेटर), संतोष हंकारे (मीडिया पार्टनर), राजशेकर के (नेशनल गवर्नर), डॉ दीपक डे (नेशनल कन्वेनर), जय कार्या (नेशनल कन्वेनर), अरुण कुमार (नेशनल गवर्नर), दिनेश मोरे (एंकर), सचिन वारसे, विवेक लोखंडे एम्पॉवर के सदस्य हैं।

उमेश पाल हत्याकांड में शामिल शूटर उस्मान को पुलिस ने किया ढेर

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प्रयागराज: बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल की हत्या में शामिल शातिर शूटर उस्मान को सोमवार सुबह पुलिस ने मुठभेड़ मार गिराया। इसी ने पहली गोली उमेश पाल और सिपाही को मारी थी। सोमवार सुबह कौंधियारा में क्राइम ब्रांच से इसकी मुठभेड़ हो गई ।पुलिस के साथ हुई फायरिंग के दौरान उस्मान मारा गया। बताया जा रहा है कि उसका नाम विजय उर्फ उस्मान था। इस पर पुलिस ने 50 हजार का इनाम रखा था। पुलिस का कहना है कि घायल शूटर को स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई।

सिपाही भी हुआ जख्मी

पुलिस और उस्मान के बीच हुई इस मुठभेड़ में कौंधियारा थाना का सिपाही नरेंद्र भी जख्मी हो गया। जिसे तुरंत सीएससी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।इस हत्याकांड में शामिल एक और अपराधी अरबाज को पुलिस ने प्रयागराज के नेहरू पार्क में मार गिराया था। एनकाउंटर कर चुकी है, जिसमें अतीक अहमद के करीबी अरबाज को मार गिराया था। उमेश पाल के हत्याकांड के दौरान अरबाज क्रेटा कार चला रहा था। जिस नेहरू पार्क में बदमाश का एनकाउंटर हुआ था, वह उमेश पाल के घर से करीब दो किमी दूर है।

24 फरवरी को हुई थी उमेश पाल की हत्या

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बसपा विधायक रहे राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल और उसके दो गनर की हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद योगी सरकार हरकत में आई और माफिया के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। माफिया अतीक अहमद के करीबी रहे सभी लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है।

देवरिया से भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट कर कहा-“कहा था ना कि मिट्टी में मिला देंगे !! उमेश पाल और संदीप निषाद पर पहली गोली चलाने वाला खूंखार हत्यारा उस्मान भी आज पुलिस मुठभेड़ में ढेर”।

अतीक अहमद पर साजिश का आरोप

इस हत्याकांड में साजिश रचने के लिए माफिया अतीक अहमद का नाम भी सामने आ रहा है। पुलिस को शक है कि अतीक ने ही इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए साजिश रची थी। प्रयागराज पुलिस ने अतीक के भाई, पत्नी शाइस्ता परवीन, अतीक अहमद के दो बेटों और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। फिलहाल अतीक साबरमती जेल में बंद है।

होलिका दहन 2023 – होलिका दहन का महत्व

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Holika Dahan 2023 Date Time Shubh Muhurat Puja Vidhi: पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है। लेकिन इस साल होलिका दहन की तिथि को लेकर थोड़ा असमंज है। क्योंकि इस साल दो दिन पूर्णिमा तिथि पड़ रही है। इस साल इस साल देशभर में  कहीं 6 मार्च की रात को तो कहीं पर 7 मार्च को होलिका दहन किया जा रहा है। जानिए होलिका दहन की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि।पंचांग के अनुसार, इस साल पूर्णिमा तिथि दो दिन होने के कारण होलिका दहन की तिथि को लेकर काफी समस्या उत्पन्न हो रही है। कई जगहों पर 6 को तो कई जगहों पर 7 मार्च को होलिका दहन किया जा रहा है।

दरअसल, होलिका दहन का मुहूर्त तीन चीजों पर निर्भर करता है। पूर्णिमा तिथि, प्रदोष काल और भद्रा न हो। ऐसा बहुत ही कम होता है कि होलिका दहन इन तीनों चीजों के साथ होने पर हो। लेकिन पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन का होना बेहद जरूरी है। पूर्णिमा के रहते हुए पुच्छ काल में यानी भद्रा के आखिरी समय में होलिका दहन  करना शुभ माना जाता है।

होलिका दहन  6 और 7 मार्च के बीच रात 12 बजकर 40 मिनट से 2 बजे तक करना शुभ होगा। क्योंकि 7 मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 6 बजकर 10 मिनट तक ही है। लेकिन कई जगहों पर 7 मार्च को भी होलिका दहन किया जा रहा है।

होलिका दहन 2023 शुभ मुहूर्त (Holika Dahan 2023 Muhurat)

फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि आरंभ- 06 मार्च, सोमवार को शाम 04 बजकर 17 मिनट से आरंभ

फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि का समापन- 7 मार्च,  मंगलवार को शाम 06 बजकर 09 मिनट पर

भद्रा- 6 मार्च को  शाम 04 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर 7 मार्च को भद्रा सुबह 5 बजकर 15 मिनट तक

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त- 07 मार्च, मंगलवार को शाम 06 बजकर 12 मिनट से रात 08 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।

Holika Dahan 2023 Mantra: होलिका दहन के समय करें इन मंत्रों का जाप, पाएं सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

होलिका पूजन का सही समय

होली की पूजा पूर्णिमा तिथि के दिन सूर्यास्त के समय करने का विधान है। पंचांग के अनुसार इस साल 6 मार्च की शाम पूर्णिमा तिथि के साथ गोधूलि बेला भी है। इसलिए शाम 6 बजकर 24 मिनट से  6 बजकर 48 के बीच होलिका पूजन करना शुभ होगा।

होलिका दहन का महत्व

हिंदू धर्म के अनुसार होलिका दहन का पौराणिक और धा4मिक महत्व दोनों ही है। क्योंकि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाती है। इसके साथ ही इस दिन होलिका दहन की विधिवत पूजा करते हैं और अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इतना ही नहीं इसके साथ ही बसंत ऋतु का स्वागत करते हुए अग्नि देवता को धन्यवाद देते हैं।

होलिका दहन 2023 पूजा विधि (Holika Dahan 2023 Puja Vidhi)

होलिका की पूजा से पहले भगवान नरसिंह और प्रहलाद का ध्यान करें। इसके बाद होलिका में फूल, माला, अक्षत, चंदन, साबुत हल्दी, गुलाल, पांच तरह के अनाज, गेहूं की बालियां आदि चढ़ा दें। इसके साथ ही भोग लगा दें। फिर कच्चा सूत लपेटते हुए होलिका के चारों ओर परिवार के साथ मिलकर परिक्रमा कर लें। इसके बाद होलिका में जल का अर्घ्य दें और सुख-समृद्धि की कामना करें।  फिर सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होलिका दहन करें। होलिका दहन के समय अग्नि में कंडे, उबटन, गेहूं की बाली, गन्ना, चावल आदि अर्पित करें। इसके साथ ही होलिका दहन के अगले दिन होलिका दहन की राख माथे में लगाने के साथ पूरे शरीर में लगाएं। ऐसा करने से व्यक्ति को हर तरह के रोग-दोष से छुटकारा मिलेगा।

Tripura CM: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के नाम पर BJP में मंथन शुरू, नगालैंड-मेघालय में मंत्रियों के नामों को लेकर भी चर्चा

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Nagaland-Tripura-Meghalaya Government Formation: पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों में बीजेपी (BJP) गठबंधन की सरकार बनने जा रही है. त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड के नतीजे गुरुवार (2 मार्च) को जारी किए गए थे. त्रिपुरा (Tripura) और नगालैंड (Nagaland) में बीजेपी गठबंधन को बहुमत मिला तो मेघालय में पार्टी ने कोनराड संगमा की एनपीपी (NPP) को समर्थन दिया है. तीनों राज्यों में सरकार के गठन को लेकर कवायद शुरू हो गई है. जिसके लिए रविवार (5 मार्च) को दिल्ली में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व की अहम बैठक हुई.

ये बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर हुई. इस बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी मौजूद रहे. बीजेपी में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के नाम को लेकर मंथन हो रहा है. शुक्रवार को मुख्यमंत्री माणिक साहा ने राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य को अपनी सरकार का इस्तीफा भी सौंप दिया था.

त्रिपुरा में मुख्यमंत्री के नाम पर फंसा पेंच?

उन्होंने कहा था कि नई सरकार आठ मार्च को शपथ लेगी. इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे. हालांकि, अभी तक त्रिपुरा के सीएम के नाम का ऐलान नहीं किया गया है. पार्टी के सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि एक पक्ष निवर्तमान मुख्यमंत्री माणिक साहा के पक्ष में है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब के समर्थकों वाला एक अन्य गुट केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक के पक्ष में है.

बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व साहा के पक्ष में 

पार्टी के अंदरुनी सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय नेतृत्व साहा के पक्ष में है क्योंकि वह अभी तक विवादों में नहीं रहे हैं और वह आदिवासी इलाकों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. जिन्होंने ग्रेटर टिपरालैंड राज्य की मांग को लेकर व्यापक पैमाने पर टिपरा मोथा को वोट दिया. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री भौमिक ने आसान अंतर से धनपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल की है.

बीजेपी-आईपीएफटी को मिला है बहुमत

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि विधायक दल के नेता का चुनाव करने के लिए बीजेपी के नव निर्वाचित विधायकों की एक बैठक होगी, लेकिन अभी इसकी तारीख तय नहीं है. बीजेपी ने 60 सदस्यीय विधानसभा में 32 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है जबकि उसके सहयोगी दल आईपीएफटी ने एक सीट जीती है. राज्य विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 16 फरवरी को हुआ था और नतीजों की घोषणा दो मार्च को की गई थी. बहरहाल अब देखना होगा कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व किसके नाम पर मुहर लगाता है.

नगालैंड में एनडीपीपी-बीजेपी की सरकार

वहीं दूसरी ओर नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने सात मार्च को होने वाले शपथ ग्रहण से पहले शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. प्रदेश की 60 सदस्यीय विधानसभा में रियो की एनडीपीपी ने 25 सीटों पर जीत हासिल की है जबकि उसकी सहयोगी बीजेपी 12 सीटों पर जीती है. शपथ ग्रहण समारोह से पहले वह सोमवार को नई सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं. नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी शामिल होंगे. बीजेपी ने पहले ही साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ही होंगे.

मेघालय में कोनराड संगमा को दिया समर्थन

मेघालय में मुख्यमंत्री कोनराड संगमा के नेतृत्व में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) नीत गठबंधन ने अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया है. गठबंधन ने 32 विधायकों के समर्थन होने का दावा किया है. संगमा ने कहा कि उन्हें बीजेपी, एचएसपीडीपी और दो निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि आने वाले दिनों में समर्थन करने वाले विधायकों की कुल संख्या बढ़ सकती है.

उन्होंने कहा कि नई सरकार सात मार्च को सुबह 11 बजे शपथ लेगी. मेघालय के चुनाव नतीजों में एनपीपी को 26 सीटें, यूडीपी को 11 सीटें, कांग्रेस और टीएमसी को 5-5 और बीजेपी को दो सीटों पर जीत मिली है. बीजेपी (BJP) में नगालैंड और मेघालय में मंत्रियों के नामों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है.

भाजपा गौवंश का पालन पोषण और संरक्षण करने में असमर्थ : अखिलेश

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लखनऊ:   समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा चुनावी मुद्दा बनाकर जबसे सत्ता में आई है गौ-वंश के पालन पोषण और उसके संरक्षण के लिए कोई समुचित व्यवस्था करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है।

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शुक्रवार को अपने जारी बयान में कहा कि गौ-माता के खुले आम सड़कों पर घूमने से सड़क दुर्घटनाओं के कारण तमाम निर्दोष लोगों की जाने जा रही है और गौ-माता भी कई बार दुर्घटनाओं की शिकार हो जाती हैं। कहा कि भाजपा इनका संरक्षण करने में असमर्थ है।

अखिलेश ने कहा कि मुख्यमंत्री यदाकदा गोशालाओं में जाकर ही अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लेते है। गौवंश के नाम पर भ्रष्टाचार पनप रहा है। सांड़ों की धमाचौकड़ी से प्रदेश के विभिन्न चौक चौराहों पर लोग घायल हो रहे हैं।

रायबरेली के बछरावां में मवेशी से बाइकें टकराई चाचा भतीजे व छात्र की मौत हुई। औरैया में नेशनल हाई-वे पर आवारा पशु से टकराई कार, तीन लोग गंभीर घायल हो गए।

सपा मुखिया ने कहा कि गौ-माता और सांड़ दोनों के पालन पोषण की भाजपा सरकार कोई व्यवस्था नहीं कर पाई है। बाराबंकी में निर्धारित समय में 47 गौशालाएं बननी थीं, वे नहीं बन सकी। यहां 12 ब्लाकों में 47 की जगह सिर्फ 3 ब्लाकों में 12 गौशालाएं बनी है। सबसे शर्मनाक बात तो यह है कि कुछ अस्पतालों को ही गौशालाओं में तब्दील कर दिया जा रहा है। कहीं पशु बांधे जा रहे हैं तो कहीं कंडे पाथे जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान आवारा पशुओं से बुरी तरह परेशान है। रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करने को मजबूर है। भाजपा सरकार में किसानों की आय दोगुनी करने के बजाय उल्टा उनकी आय आधी हो गई है। किसान की आय घटने और कृषि लागत बढ़ने से किसान आत्महत्या करने को मजबूर है।

अखिलेश ने दावा किया कि केवल गंज मुरादाबाद में ही करीब 300 छुट्टा पशुओं के सड़कों पर घूमने का समाचार है। बागपत समेत पूरे यूपी की सड़कों, गलियों, मोहल्लों में छुट्टा पशुओं का उत्पात मचा हुआ है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी सिर्फ झूठे आश्वासनों और खोखले दावों से प्रदेश के विकास का सपना दिखाते रहते हैं। गौ-रक्षा के नाम पर कुछ अराजक तत्व प्रदेश में कानून व्यवस्था को धता बता रहे हैं। सत्ता का संरक्षण मिलने से वे और ज्यादा अनियंत्रित हो चले हैं। प्रदेश के लिए यह स्थिति अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है।

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.