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चमड़े से भरा ट्रक पकड़ा गोवंशों की खाल होने की आशंका

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महोबा। कानपुर-सागर हाईवे पर डाकबंगला मैदान के पास विश्व हिंदू महासंघ के कार्यकर्ताओं ने रविवार की सुबह चमड़े से भरे ट्रक को रोका। सूचना पर पहुंची पुलिस ने ट्रक को कब्जे में लेकर चालक को हिरासत में लिया है। कार्यकर्ताओं को आशंका है कि ट्रक में गोवंशों की खाल हैं। पुलिस चालक से पूछताछ कर पूरे मामले की जांच कर रही है।

विश्व हिंदू महासंघ के कार्यकर्ता हाईवे से निकल रहे थे। तभी उन्हें ट्रक से तेज बदबू आई। तब उन्होंने ट्रक को रुकवाकर चालक से जानकारी ली। चालक ने बताया कि ट्रक में कपड़ा लदा है। इस पर राहुल शर्मा ने संगठन के अन्य सदस्यों को मौके पर बुलाया। सूचना मिलते ही जिलाध्यक्ष भूपेंद्र द्विवेदी अन्य कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे। ट्रक का दरवाजा खुलवाने पर उसमें पशुओंं की खालें भरी मिलीं। चालक ने बताया कि वह चमड़ा जनपद कानपुर से तमिलनाडु ले जा रहा था। इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही सीओ सिटी अरुण कुमार सिंह व कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंच ट्रक को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ट्रक के कागजात और चालक से पूछताछ कर रही है। कोतवाली प्रभारी मनीष कुमार पांडेय का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। जांच में प्रपत्र वैध मिले हैं। आगे की कार्रवाई की जा रही है।

गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित कराने का लें संकल्प – शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

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Bihar News: मोकामा में रविवार को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का आगमन हुआ, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता हरिओम कुमार गुड्डू के नेतृत्व में बड़ी संख्या में हिंदू धर्मावलंबियों ने शंकराचार्य का स्वागत किया और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। गौरतलब है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद इन दिनों बिहार के दौरे पर हैं और हाल ही में उन्होंने यह घोषणा की थी कि उनकी संस्था बिहार विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारेगी। इसी क्रम में वे राज्य के कई जिलों का भ्रमण कर रहे हैं और लोगों से संपर्क साध रहे हैं।

मोकामा पहुंचने पर स्थानीय श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया। इस दौरान शंकराचार्य ने अपने आशीर्वचन में लोगों से गौ माता की रक्षा और सम्मान को लेकर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि सनातनी हिंदुओं को अब यह संकल्प लेना चाहिए कि गौ माता को “राष्ट्रमाता” का दर्जा दिलाने के लिए संगठित आंदोलन चलाया जाए। उन्होंने बताया कि वे इन दिनों “गौ माता संकल्प यात्रा” के तहत बिहार के विभिन्न जिलों में भ्रमण कर रहे हैं और लोगों से इस मुहिम में जुड़ने का आह्वान कर रहे हैं।

शंकराचार्य ने पहले ही कहा है कि “आज तक किसी भी राजनीतिक दल ने गौ माता की रक्षा का स्पष्ट संकल्प नहीं लिया है। ऐसे में हम सबका कर्तव्य है कि इस पवित्र अभियान को मजबूत बनाएं।”  इससे पहले भी उन्होंने कई सभाओं में विधानसभा चुनाव में गौ भक्तों के समर्थन में मतदान करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि “संस्कृति और सनातन मूल्यों की रक्षा” का चुनाव है। मोकामा में उनका आगमन धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल में हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने उनके चरणों में नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

आचार्य लोकेशजी का 43वां दीक्षा दिवस महातपस्वी आचार्य के सानिध्य में मनाया गया

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आचार्य लोकेशजी जैन शासन के गौरव हैं- आचार्य हंसरत्नसूरीश्वरजी महाराज

दीक्षा दिवस दिव्य तपस्वी आचार्य के सान्निध्य में मेरा परम सौभाग्य – आचार्य लोकेश

गुरुग्राम/ नई दिल्ली,: विश्व शांति दूत जैन आचार्य लोकेश जी के 43 वें दीक्षा दिवस के अवसर पर संत सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें आचार्य हंसरत्नसूरिश्वर महाराज सहित अनेक संतों ने भाग लिया और आचार्य लोकेश जी को शुभकामनाएं दी| 


अहिंसा विश्व भारती एवं विश्व शांति केंद्र के संस्थापक आचार्य लोकेशजी ने कहा कि उद्देश्य पूर्ण सार्थक जीवन के संकल्प के साथ आज ही के दिन अध्यात्म के मार्ग पर पहला कदम रखा था। प्रभु कृपा, गुरु कृपा और आपके आशीर्वाद से 42 वर्ष सानन्द पूर्ण कर 43वें वर्ष प्रवेश पर कर रहा हूँ उन्होंने कहा कि महातपस्वी आचार्य हंसरत्नसूरीश्वरजी महाराज के सानिध्य में मेरा दीक्षा दिवस परम सौभाग्य का विषय है उन्होंने आज 149वें उपवास की तप साधना में रत आचार्य श्री से कहा कि आप ऐसा मंगल आशीर्वाद दीजिए सत्य सनातन धर्म, अध्यात्म, संस्कृति व मानवता की और अधिक सेवा करने में समर्थ बनूँ।

आचार्य हंससूरिश्वर महाराज कहा कि आचार्यश्री लोकेश जी ने जैन धर्म कि शिक्षाओं और भारतीय संस्कृति को विश्व के कोने कोने में जैन धर्म का प्रचार प्रसार कर मानव कल्याण और विश शांति का अद्भुत कार्य किया है |
इस अवसर पर गाणी धर्म ध्यान महाराज मुनि कश्यप्रत्ना. एमएस साकेत भाई शाह, स्नेहल भाई सवाणी, मिकी भाई जैन सहित अहिंसा विश्व भारती और विश्व शांति केंद्र के सहयोगियों और कार्यकर्ताओं ने आचार्यश्री को शुभकामनाए देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया |

संतान की सुख,समृद्धि और आयुष की कामना का पर्व अहोई अष्टमी

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(विजय कुमार शर्मा – )

अहोई अष्टमी मुख्यतः भारत के उत्तरी क्षेत्रों में मनाया जाता है। यह पवित्र दिन अहोई माता की पूजा के लिए समर्पित है, जो बच्चों की रक्षा करती हैं। इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हुए व्रत करती हैं। अहोई अष्टमी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसमें गहरी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं जुड़ी हुई हैं।
अहोई अष्टमी का व्रत सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रमा के दर्शन तक चलता है। इस दिन माताएं निर्जला व्रत करती हैं, यानी पूरे दिन कुछ नहीं खातीं और अपने बच्चों की भलाई के लिए अहोई माता से प्रार्थना करती हैं।
अहोई अष्टमी की कथा एक ऐसी साहूकार की पत्नी की कहानी है, जिसके सात बेटों की मृत्यु हो जाती है क्योंकि उसने अनजाने में एक स्याही के बच्चे को मार दिया था। पश्चाताप के तौर पर उसने अहोई माता की पूजा की और उनके आशीर्वाद से उसके सभी सात बेटे जीवित हो गए, जिसके बाद संतान की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए यह व्रत रखने की परंपरा शुरू हुई।

अहोई अष्टमी की कथा

प्राचीन काल में एक साहूकार रहता था जिसके सात बेटे और सात बहुएं थीं। एक दिन, दीपावली के आसपास घर को लीपने के लिए मिट्टी लेने साहूकार की सात बहुएं और उसकी बेटी जंगल गई। मिट्टी खोदते समय साहूकार की बेटी की खुरपी से गलती से एक स्याही (साही) के बच्चे की मृत्यु हो गई।

इस घटना से स्याही बहुत क्रोधित हुई और उसने साहूकार की बेटी को श्राप दिया, “जिस प्रकार तुमने मेरे बच्चे को मारकर मुझे निसंतान किया, उसी प्रकार मैं भी तुम्हें निसंतान कर दूंगी”। इसके बाद, साहूकार की बेटी की संतान एक-एक करके मर जाती थी, जिससे साहूकार के घर पर दुखों का पहाड़ टूट गया।

इस दुख से दुखी होकर, साहूकार की पत्नी एक सिद्ध महात्मा के पास गई और उन्हें अपनी पूरी कहानी बताई। महात्मा ने उसे अहोई अष्टमी के दिन माता अहोई की आराधना करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि साही और उसके बच्चों का चित्र बनाकर और गलती के लिए क्षमा मांगते हुए माता की पूजा करें।

साहूकार की पत्नी ने महात्मा के कथानुसार अहोई अष्टमी का व्रत रखा और माता की पूजा की। इस व्रत के प्रभाव से उसके सभी सात पुत्र फिर से जीवित हो गए।

व्रत का महत्व

अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखती हैं. शाम के समय तारे निकलने पर अहोई माता की पूजा की जाती है, जिसके बाद कथा सुनकर व्रत खोला जाता है।
अहोई के चित्रांकन में अधिकतर आठ कोष्ठक की एक पुतली बनाई जाती है। उसी के पास साही तथा उसके बच्चों की आकृतियाँ बना दी जाती हैं। करवा चौथ के ठीक चार दिन आगे अष्टमी तिथि को देवी अहोई माता का व्रत किया जाता है। यह व्रत सन्तान की लम्बी आयु और सुखमय जीवन की कामना से पुत्रवती महिलाएं करती हैं। कार्तिक मास की अष्टमी तिथि को कृष्ण पक्ष में यह व्रत रखा जाता है इसलिए इसे अहोई अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है।

इस पर्व की पूजा विधि भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अलग अलग हो सकती है, लेकिन मुख्य भाव समान रहता है। माताएं अहोई माता की तस्वीर या मूर्ति के साथ पूजा का चौक सजाती हैं। पूजा में ‘कलश’ रखा जाता है, प्रसाद के लिए आटे और चीनी से बनी मिठाइयों का भी निर्माण किया जाता है।

माताएं अपने बच्चों को अहोई माता से जुड़ी कथाएं और लोककथाएं सुना कर परिवार और समाज के अन्य सदस्यों के साथ चंद्रमा के दर्शन करके अपने व्रत को पूर्ण करती हैं। (विभूति फीचर्स)

सिडान कार से करते थे गाय की चोरी

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महाराष्ट्र के अकोला में पुलिस ने गौ तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 आरोपियों को पकड़ा है। आरोपियों ने एक ही रात में दो जगह पर सिडान कार से गाय चोरी की थी। आरोपियों के पास से तीन सिडान कार समेत 16.97 लाख रुपये का माल जब्त हुआ है। इस मामले में कुल 11 अपराधों का खुलासा हुआ है। अकोला में गोवंश चोरी करने वाली एक संगठित गैंग ने एक ही रात में दो जगहों से सिडान कार के जरिए गाय चोरी की थी।
पुलिस ने एक मारुती सुजुकी स्विफ्ट डिजायर और दो होंडा अमेज कार के साथ 1.52 लाख रुपये कैश भी बरामद किया है। इसके साथ तीन मोबाइल फोन और अन्य सामान समेत कुल 16.97 लाख का माल जब्त किया है।

28 सितंबर को हुई थी चोरी

28 सितंबर की रात कौलखेड चौक स्थित गजानन महाराज मंदिर के पास मुख्य सड़क पर अज्ञात चोरों ने एक गाय को स्विफ्ट डिजायर कार में डालकर चोरी कर लिया था। यह पूरी वारदात पास के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी और फुटेज वायरल हो गया था। उसी रात बालापुर थाना क्षेत्र के व्याळा गांव में प्रकाश नथवाणी के घर के पास से भी चोरों ने सफेद रंग की गाय को एक सफेद रंग की सिडान कार में डालकर चुरा लिया था। लगातार दो वारदातों के वायरल फुटेज से अकोला शहर में सनसनी फैल गई।

मुक्ताईनगर बस स्टैंड पर पकड़े गए आरोपी

गोवंश चोरी की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक ने इन अपराधों को सुलझाने के निर्देश दिए। गोपनीय जानकारी और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस को पता चला कि आरोपी फिलहाल मुंबई में हैं और बाद में उनकी लोकेशन राजस्थान के अजमेर जिले में मिली। जब पता चला कि आरोपी अजमेर से इंदौर मार्ग से अकोला आ रहे हैं, तो पुलिस टीम ने मुक्ताईनगर बस स्टैंड पर जाल बिछाया और चार आरोपियों को दबोच लिया।

सात आरोपी गिरफ्तार

आरोपियों की पहचान शेख रेहान शेख रशीद (22), मिर्झा शोएब बेग मिर्झा अजहर बेग (28), शेख समीर शेख शब्बीर उर्फ मलंग (24) और अरबाज खान फिरोज खान (23) के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने दोनों गोवंश चोरी की वारदातों की कबूलात की और अन्य वारदातों में भी शामिल होने की बात मानी। आरोपियों की निशानदेही पर उनके दो अन्य साथियों (नुरेश खान बहाद्दार खान (34) और शेख अयुब शेख ईल्यास (23)) को अकोला से गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा उनके सातवें साथी शोएब खान शब्बीर खान (21) को भी उसके घर इंदिरा नगर, अकोट फाइल अकोला से पकड़ा गया। सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की जांच जारी है।

(अकोला से गुलाम मोहसिन की रिपोर्ट)

पूर्वोत्तर को मिली पहली पशुधन आईवीएफ प्रयोगशाला

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पीएम धन-धान्य कृषि योजना के तहत स्थानीय स्तर पर शुरू किये जायेंगे पशु स्वास्थ्य अभियान: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी

पूर्वोत्तर को मिली पहली पशुधन आईवीएफ प्रयोगशाला; आंध्र प्रदेश में एकीकृत डेयरी और पशु चारा संयंत्र का शिलान्यास

भारत के पशुधन और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देते हुए 11 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली में 947 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया और 219 करोड़ रुपये मूल्य की अतिरिक्त परियोजना की आधारशिला रखी गई। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई ये पहल कृषि और संबद्ध क्षेत्र के निवेश के एक बड़े पैकेज का हिस्सा हैं।

इन परियोजनाओं को दो प्रमुख कृषि योजनाओं-प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (पीएम-डीडीकेवाई) और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के शुभारंभ के साथ ही राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह शुरुआत ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और कृषि-संबद्ध क्षेत्रों में भारत के आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएम-डीडीकेवाई) के अंतर्गत ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने में पशुधन, मत्स्य पालन और संबद्ध गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना हमारे पशुधन को ध्यान में रख कर शुरू की गई है। आप जानते ही हैं कि पशुओं को खुरपका-मुँहपका जैसी बीमारियों से बचाने के लिए 125 करोड़ से ज़्यादा टीके मुफ़्त लगाए जा चुके हैं। इससे पशु स्वस्थ हुए हैं और किसानों की चिंता भी कम हुई है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत, स्थानीय स्तर पर पशु स्वास्थ्य से जुड़े अभियान भी चलाए जाएँगे।” प्रधानमंत्री ने ग्रामीण समृद्धि के लिए विविधीकरण के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा, “जहाँ खेती संभव नहीं है, वहाँ पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देना होगा। किसानों की आय बढ़ाने के लिए, हमारी सरकार उन्हें पारंपरिक खेती के आलावा अन्य विकल्प भी दे रही है। इसलिए, अतिरिक्त आय के लिए पशुपालन, मछली पालन और मधुमक्खी पालन पर ज़ोर दिया जा रहा है। इससे छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों को भी सशक्त बनाया जा रहा है।”

इस अवसर पर पूर्वोत्तर क्षेत्र की पहली आईवीएफ प्रयोगशाला का उद्घाटन भी किया गया, जिसे राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) के तहत ₹28.93 करोड़ के निवेश से गुवाहाटी (असम) में स्थापित किया गया है। यह अत्याधुनिक सुविधा पूर्वोत्तर राज्यों में डेयरी विकास और नस्ल सुधार को एक बड़ा प्रोत्साहन देगी।

राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) के अंतर्गत, बड़े पैमाने की कई डेयरी अवसंरचना परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया गया। इनमें मेहसाणा मिल्क यूनियन परियोजना शामिल है, जिसमें ₹460 करोड़ की लागत से विकसित 120 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाला मिल्क पाउडर प्लांट और 3.5 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला यूएचटी प्लांट शामिल है। इसके आलावा कार्यक्रम के तहत  इंदौर मिल्क यूनियन द्वारा ₹76.50 करोड़ की लागत से स्थापित 30 टन प्रतिदिन क्षमता वाला मिल्क पाउडर प्लांट; भीलवाड़ा मिल्क यूनियन द्वारा ₹46.82 करोड़ की लागत से स्थापित 25,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला यूएचटी प्लांट; और नुस्तुलापुर, करीमनगर, तेलंगाना में ₹25.45 करोड़ की लागत से विकसित एक ग्रीनफील्ड डेयरी प्लांट भी शामिल है। डेयरी नेटवर्क का विस्तार करते हुए, एनपीडीडी के तहत 219 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ, आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के कुप्पम मंडल में एक एकीकृत डेयरी संयंत्र और 200 टीपीडी मवेशी चारा संयंत्र की आधारशिला रखी गई।

पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ) के अंतर्गत, कई राज्यों में 303.81 करोड़ रुपये की 10 परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया, जिससे देश में चारा, दूध और पशु उत्पाद के प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ेगी। प्रजनन सेवाओं की अंतिम छोर तक पहुँच को सुदृढ़ करने के लिए, राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से 2,000 नव प्रशिक्षित और दक्ष ‘मैत्री’ (ग्रामीण भारत में बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन) को प्रधानमंत्री द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम में पूरे भारत में 38,000 से अधिक ‘मैत्री’ को शामिल किया गया, जो देश भर में कृत्रिम गर्भाधान कवरेज और पशुधन के आनुवंशिक उन्नयन में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

ये पहलें कृषि संबद्ध क्षेत्रों के एकीकृत और संवहनीय विकास के माध्यम से किसानों के लिए अवसर बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं, जिससे सभी के लिए आर्थिक सुरक्षा और पोषण संबंधी कल्याण सुनिश्चित होगा।

डॉ. मनसुख मांडविया ने साई राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र सोनीपत का दौरा किया

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डॉ. मनसुख मांडविया ने साई राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, सोनीपत का दौरा किया, सुविधाओं की समीक्षा की एवं एथलीटों, कोचों व स्टाफ के साथ संवाद किया

केंद्रीय युवा मामले एवं खेल और श्रम एवं रोजगार मंत्री, डॉ. मनसुख मांडविया ने आज चल रहे प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे की समीक्षा करने और कोचों, एथलीटों तथा सहायक कर्मचारियों के साथ बातचीत करने के लिए सोनीपत स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) का दौरा किया।

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केंद्र में दोपहर में उनके आगमन पर, साई  के वरिष्ठ अधिकारियों ने डॉ. मांडविया का स्वागत किया और उन्हें सोनीपत परिसर में चल रही गतिविधियों, उपलब्धियों और आगामी परियोजनाओं का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।

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केंद्रीय मंत्री ने अपने दौरे की शुरुआत तीरंदाजी उत्कृष्टता केंद्र के निरीक्षण के साथ की, जहाँ उन्होंने कोचों और एथलीटों के साथ बातचीत की। उन्होंने उनके समर्पण की सराहना की और जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभा को पोषित करने के लिए वैज्ञानिक प्रशिक्षण विधियों को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

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डॉ. मांडविया ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ पहल के तहत एक वृक्षारोपण गतिविधि में भी भाग लिया।

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इसके बाद, मंत्री ने तीरंदाजी रेंज, कबड्डी कोर्ट, मेडिकल सेंटर, कुश्ती हॉल, स्पोर्ट्स साइंस विभाग, और स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग हॉल का दौरा किया, जहाँ उन्होंने उपलब्ध प्रशिक्षण और खेल विज्ञान सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने एथलीटों की तैयारी में प्रौद्योगिकी और स्पोर्ट्स साइंस के समन्वय की सराहना की और नियमित स्वास्थ्य एवं प्रदर्शन मूल्यांकन के महत्व पर जोर दिया।

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डॉ. मांडविया  ने बहुउद्देशीय हॉल (एमपीएच), निर्माणाधीन हाई परफार्मेंस सेंट (एचपीसी) और इंडोर कबड्डी हॉल का भी निरीक्षण किया, और इस बात पर ध्यान दिया कि भारत के एथलीटों को विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।

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दौरे का समापन कोचों और कर्मचारियों के साथ बातचीत से हुआ, जहाँ मंत्री ने भारत के खेल ईकोसिस्टम में उनके योगदान की सराहना की और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए एक मजबूत खेल संस्कृति के निर्माण के सरकारी दृष्टिकोण को दोहराया।

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पुलिस मुठभेड़ में 5 शातिर गौ-तस्कर गिरफ्तार

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर  की कोतवाली नगर पुलिस ने देर रात की गई एक बड़ी कार्रवाई में पांच शातिर और वांछित गौकशों को गिरफ्तार किया है. इस दौरान हुई पुलिस मुठभेड़ में 3 अभियुक्त गोली लगने से घायल हो गए. पुलिस ने मौके से दो मोटरसाइकिल, अवैध हथियार और गौकशी के उपकरण भी बरामद किए हैं.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन, पुलिस अधीक्षक नगर सत्यनारायण प्रजापत तथा क्षेत्राधिकारी नगर सिद्धार्थ के. मिश्रा के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक उमेश रोरिया के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई की प्रशंसा की जा रही है.

सूचना पर पहुंची पुलिस

घटना के अनुसार, गुरुवार (9 अक्टूबर) को ग्राम खंजापुर के जंगल में गौकशी की सूचना पर पुलिस ने मौके से तीन क्विंटल गौमांस और फर्जी नंबर प्लेट लगी एक क्रेटा कार बरामद की थी. मामले में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कर टीम गठित की गई थी.

10 और 11 अक्टूबर की दरमियानी रात पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि वही गौकश बाननगर अंडरपास के पास फिर से गौकशी की तैयारी में हैं. पुलिस ने घेराबंदी की तो बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी. आत्मरक्षा में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में तीन आरोपी सोनू उर्फ फरीद, फुन्ना उर्फ नजर और मुजफ्फर उर्फ काला घायल हो गए, जबकि फैसल और तनवीर को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

पुलिस ने बरामद किए अवैध हथियार

पुलिस ने अभियुक्तों के कब्जे से दो तमंचे, एक मस्कट, दो नाजायज चाकू, जिंदा और खोखे कारतूस, दो मोटरसाइकिल और गौकशी के उपकरण बरामद किए हैं.प्रारंभिक पूछताछ में अभियुक्तों ने खंजापुर में हुई गौकशी की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है.

पुलिस के अनुसार, सभी अभियुक्त गौकशी के मामलों में पूर्व से वांछित और शातिर प्रवृत्ति के अपराधी हैं. उनके अपराधिक इतिहास की जांच की जा रही है. पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास और गौकशी पर रोकथाम के प्रयासों को बल मिला है.

अविमुक्तेश्वरानंद सभी सीटों पर लड़ाएंगे निर्दल गौ भक्त प्रत्याशी

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Bihar Election: स्वामी ने यह भी बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से आग्रह किया था कि वे संसद में गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के पक्ष में मतदान करें, लेकिन किसी भी दल ने इस मुद्दे पर स्पष्ट विचार नहीं किया।

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बिहार में सनातनी राजनीति का शंखनाद किया है। शेखपुरा पहुंचकर उन्होंने कहा कि बिहार की सभी विधानसभा सीटों पर वे ऐसे प्रत्याशियों को समर्थन देंगे, जो अपने घोषणा पत्र में गौ हत्या रोकने का संकल्प शामिल करेंगे।

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के 78 वर्षों बाद भी कोई राजनीतिक दल इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीरता से काम नहीं कर रहा है। केंद्र में कई दलों की सरकारें बनीं, लेकिन किसी ने गौ संरक्षण को प्राथमिकता नहीं दी।
इस स्थिति को देखते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ मतदाता संकल्प यात्रा शुरू की है, जिसके तहत वे बिहार के सभी जिलों में जाकर मतदाताओं को गौ-रक्षा और सनातन धर्म के महत्व के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गौ माता की रक्षा करना केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति और समाज की आधारशिला है।

एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विधानसभा चुनाव में केवल उन्हीं उम्मीदवारों को वोट दें जो गौ संरक्षण को लेकर स्पष्ट और दृढ़ संकल्पित हों। स्वामी ने यह भी बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से आग्रह किया था कि वे संसद में गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के पक्ष में मतदान करें, लेकिन किसी भी दल ने इस मुद्दे पर स्पष्ट विचार नहीं किया।

इसी कारण उन्होंने स्वयं गौ भक्त उम्मीदवारों को चुनाव में उतारने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि बिहार की सभी विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार खड़े किए जाएंगे और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद औपचारिक रूप से सूची जारी की जाएगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गौ भक्त मौजूद थे।

जल जीवन मिशन के अंतर्गत निगरानी

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जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने उन्नत ग्रामीण पाइप जल आपूर्ति योजनाओं के मॉड्यूल: सतत एवं उत्तरदायी ग्रामीण जल सेवाओं की दिशा में एक कदम के प्रदर्शन के साथ विचार-विमर्श का समापन किया

 पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने के लिए उन्नत मॉड्यूल

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने आज जमीनी स्तर पर सेवा वितरण और स्थिरता को मजबूत करने पर कई सप्ताह तक चले गहन विचार-विमर्श का समापन किया। इसमें उन्नत ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना (आरपीडब्ल्यूएसएस) मॉड्यूल का प्रदर्शन किया गया, जो ग्रामीण जल प्रशासन में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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बैठक की अध्यक्षता डीडीडब्ल्यूएस के सचिव श्री अशोक के. के. मीणा ने की और इसमें राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (एनजेजेएम) के अपर सचिव और मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोन और संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति मीणा नाइक के साथ मंत्रालय और कर्नाटक, पंजाब, लद्दाख, सिक्किम और लक्षद्वीप जैसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,000 से अधिक प्रतिभागी, जिनमें उनके मिशन निदेशक भी शामिल थे, वर्चुअल माध्यम से इस सत्र में शामिल हुए।

अपने संबोधन में डीडीडब्ल्यूएस सचिव ने कहा कि नया आरपीडब्ल्यूएसएस मॉड्यूल जल जीवन मिशन के तहत पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता की आधारशिला के रूप में काम करेगा। आरपीडब्ल्यूएसएस ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजनाओं (आरपीडब्ल्यूएसएस) के लिए डिजिटल रजिस्ट्री के रूप में कार्य करेगा और अद्वितीय आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी की शुरुआत करेगा – जो ग्रामीण जल अवसंरचना के अधिक कुशल संचालन एवं रखरखाव की दिशा में एक कदम है। उन्होंने आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी को प्रत्येक पाइप जल आपूर्ति योजना के लिए एक विशिष्ट डिजिटल पहचान टैग के रूप में वर्णित किया जो प्रभावी निगरानी, संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) और डेटा-संचालित शासन के लिए पारदर्शिता, ट्रेसेबिलिटी, जियो-टैगिंग डेटा को सक्षम बनाता है। उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों से आग्रह किया कि वे डेटा की पूर्णता और कवरेज सुनिश्चित करते हुए नवंबर 2025 तक आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी के निर्माण को प्राथमिकता दें और पूरा करें।

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एनजेजेएम के अपर सचिव एवं मिशन निदेशक श्री कमल किशोर सोन ने कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक योजना के लिए अद्वितीय आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी बनाने के महत्व को दोहराया। उन्होंने सभी स्तरों पर कुशल संचालन और रखरखाव (ओ एंड एम) के लिए एक सत्यापित, डेटा-ड्रिवन तंत्र स्थापित करने के सचिव के दृष्टिकोण को भी दोहराया। एनजेजेएम की संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति मीना नाइक ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और ग्रामीण जल प्रबंधन के लिए एक संरचित डिजिटल आधार स्थापित करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि सभी ग्रामीण जल आपूर्ति परिसंपत्तियां पोर्टल पर सटीक रूप से प्रतिबिंबित हों, जिससे ग्रामीण जल प्रणालियों के लिए एक विश्वसनीय और सत्यापन योग्य राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने में उनकी साझा जिम्मेदारी रेखांकित होती है।

उन्नत आरपीडब्ल्यूएसएस मॉड्यूल ग्रामीण जल आपूर्ति क्षेत्र के लिए डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) के निर्माण की दिशा में एक बड़े कदम को दर्शाता है। यह प्रणाली जीआईएस-आधारित डिजिटल एसेट रजिस्ट्री के निर्माण की सुविधा प्रदान करती है, जिसमें जल स्रोत और उपचार संयंत्र से लेकर पाइपलाइनों, वितरण नेटवर्क और घरेलू नल कनेक्शन तक पाइप जल आपूर्ति योजना के प्रत्येक घटक को कैप्चर किया जाता है और उन्हें पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्थानिक रूप से जोड़ा जाता है।

पंचायतों को सशक्त बनाना और स्थानीय शासन को मजबूत करना

आरपीडब्ल्यूएसएस ढांचे के माध्यम से, पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) को जल प्रणालियों पर वास्तविक समय, सत्यापित डेटा तक पहुंच प्राप्त होगी, जिससे वे कार्यक्षमता की निगरानी कर सकेंगे, जल गुणवत्ता पर नज़र रख सकेंगे और ओएंडएम पर तथ्यपरक निर्णय ले सकेंगे। डिजिटल उपकरणों और जानकारियों के साथ स्थानीय संस्थानों को सशक्त बनाकर, प्रणाली का उद्देश्य विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत करना और ग्रामीण जल अवसंरचना के वास्तविक सामुदायिक स्वामित्व को सुनिश्चित करना है।

नया प्लेटफॉर्म ग्रामीण डब्ल्यूएएसएच क्षेत्र में डेटा प्रबंधन और परिसंपत्ति मानचित्रण से लेकर पूर्वानुमानित रखरखाव और विश्लेषण तक स्थानीय आजीविका के अवसर और कौशल विकास के रास्ते बनाने के लिए भी डिज़ाइन किया गया है।ये उभरते कौशल क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने, सेवा विश्वसनीयता बढ़ाने और आत्मनिर्भर प्रणालियों के निर्माण में मदद करेंगे।

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प्रौद्योगिकी के माध्यम से दक्षता बढ़ाना

उन्नत मॉड्यूल वास्तविक समय डैशबोर्ड, स्रोत स्थिरता के लिए पूर्वानुमान विश्लेषण, रखरखाव शेड्यूलिंग और ओएंडएम के लिए निर्णय-समर्थन प्रणालियों को एकीकृत करता है। आरपीडब्ल्यूएसएस आईडी पहल ग्रामीण जल आपूर्ति के लिए डीपीआई का आधारभूत स्तर बनाती है, जिससे जीआईएस आधारित निगरानी, ​​परिसंपत्ति प्रबंधन, विश्लेषण डैशबोर्ड, पूर्वानुमानित रखरखाव, निर्णय समर्थन तथा बेहतर संचालन एवं रखरखाव दक्षता के लिए डिजिटल ट्विन्स का निर्माण संभव हो पाता है।

बैठक का समापन राज्यों और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं को नए डिजिटल ढांचे को अपनाने में सहायता करने के लिए क्रमिक प्रशिक्षण सत्रों और कार्यशालाओं की घोषणा के साथ हुआ, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि आरपीडब्ल्यूएसएस प्रणाली जल जीवन मिशन के तहत निरंतर सेवा वितरण के लिए एक मजबूत आधार के रूप में विकसित हो।