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असरानी यानि हंसी का खजाना

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(राकेश अचल – विभूति फीचर्स)

मैंने जबसे हिंदी फिल्में देखना शुरू कीं तभी से असरानी को फिल्मों मे काम करते देख रहा था। मैने हिंदी सिनेमा के लगभग सभी हास्य अभिनेताओं की फिल्में देखीं हैं, अनेक से मिला भी हूँ, लेकिन असरानी पर किसी हास्य अभिनेता की छाप नजर नहीं आई। वे अपने आप में खास थे 1 जनवरी 1941 को जन्मे असरानी का असली नाम बहुत कम लोग जानते होंगे।
गुलाबी नगरी जयपुर, में असरानी की गर्भनाल थी। वे जयपुर से स्नातक परीक्षा पास कर भारतीय फिल्म और टेलिविज़न संस्थान, पुणे में पढने आ गये। असरानी को 1967 में फिल्मी दुनिया में प्रवेश मिला लेकिन वे पहचाने बहुत बाद में गए।
फिल्म गुड्डी के एक बेहद मामूली रोल के बाद मनोज कुमार की नज़र असरानी पर पड़ गई। उनको लगा कि इसको भी ले सकते हैं, ऐसा करते-करते चार-पांच फ़िल्में मिल गईं और यहीं से असरानी का कैरियर शुरू हुआ। फ़िल्म शोले में ‘अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर’ का किरदार निभाने के लिए उन्हें हिटलर की मिसाल दी गई थी।अंग्रेजों के जमाने का ये जेलर रातों रात सितारा बन गया ।
असरानी कभी गायक बनना चाहते थे। उन्होने 1977 में फ़िल्म आलाप में दो गाने गाए जो उन्ही पर फ़िल्माए गए थे। अगले साल उन्होंने फ़िल्म फूल खिले हैं गुलशन गुलशन में प्रसिद्ध पार्श्वगायक किशोर कुमार के साथ एक गाना गाया। मैंने असरानी की कितनी फिल्में देखीं, मुझे याद नहीं। वे वे ढोल में भी थे और धमाल में भी। वे शाका लाका बूम -बू म में भी थे और भूल भुलैया में भी। मुझे याद है कि असरानी ने फौज में मौज,फुल एन फाइनल, लालवानी,मालामाल वीकली, रॉनी और जॉनी,भागम भाग,चुपके चुपके,गरम मसाला,मैक के मामा,एलान,क्योंकि,खुल्लम खुल्ला प्यार करें,दीवाने हुए पागल,अंधा आदमी,इन्सान,शर्त,सुनो ससुर जी औरएक से बढ़कर एक जैसी शताधिक फिल्मों में काम किया।
मेरी नजर में असरानी को काम की कमी कभी नहीं रही। वे जीवन के अंतिम दिनों तक सक्रिय रहे। गुजरात सरकार ने “सात कैदी” (गुजराती) के लिए असरानी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता व सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। उनके नाम तमाम श्रेष्ठ पुरस्कार और सम्मान दर्ज हैं। वे हर अभिनेता और अभिनेत्री के साथ फिट हो जाते थे। असरानी भूमिकाओं के चयन को लेकर लापरवाह रहे।
असरानी न भगवान दादा थे, न धुमाल, न मेहमूद, न केस्टो मुखर्जी, न आई एस जौहर, न जानी वाकर। वे सिर्फ असरानी थे। असरानी आम आदमी के हास्य अभिनेता थे। उनके पास कद काठी नहीं थी लेकिन उन्हे कभी हीन ग्रंथि का शिकार होते नहीं देखा गया। असरानी सबको हंसते-हंसाते चुपचाप चले गये। वे सुर्खियों से दूर रहने वाले शख्स थे। असरानी हमेशा याद किए जाएंगे। दुनिया गोवर्धन असरानी की नहीं बल्कि खालिस असरानी की मुरीद है।विनम्र श्रद्धांजलि। (विभूति फीचर्स)

रास्ते पर लेट जाते हैं लोग ऊपर से दौड़ती हैं गायें

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संजीव जाट की रिपोर्ट

Strange Tradition : भारत देश अपने त्योहारों के साथ-साथ उनसे जुड़ी परंपराओं के लिए भी दुनियाभर में अपनी एक खास पहचान रखता है। बात करें हालिया देश के सबसे बड़े त्योहार दीपावली की तो इसे भी देशभर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया है। दीपों के इस त्योहार से जुड़ी अलग-अलग इलाकों की अलग-अलग परम्पराएं है। एक ऐसी ही अनोखी परम्परा मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के अंतर्गत आने वाली बदरवास तहसील के ग्राम खैराई में दीपावली के अगले दिन मनाई जाती है।

यहां ग्रामीणों की पूरे साल में कभी भी मन्नत पूरी होती है तो वो दीपावली के अगले दिन यहां के लोग गाय की पूजा करते हैं। यही नहीं, पूजा के बाद परम्परा के नाम पर वो उन पूजी जाने वाली गायों को अपने ऊपर से भी गुजारते हैं। इस अनोखी परम्परा को ‘गौ-गाय पर्व’ के रूप में मनाया जाता है।

दरअसल, शिवपुरी जिले के बदरवास विकास खंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम खैराई में बीते सवा सौ साल से ये परम्परा मनाई जाती आ रही है। इस अनोखी और रोमांचित कर देने वाली परम्परा को स्थानीय ग्रामीणों ने इस बार भी बड़े हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया। मंगलवार को सबसे पहले ग्रामीणों ने गाय की पूजा अर्चना कर पर्व मनाया। इसके बाद गांव के वो लोग एक मार्ग पर इकट्ठे हुए। इनमें वो लोग एक स्थान पर आ गए, जिनकी सालभर में मांगी गई कोई मन्नत पूरी हुई है। ये लोग संबंधित मार्ग पर में लेट गए। इसके बाद उस सड़क से दर्जनों की संख्या में गायें दौड़ते हुए गुजरी और मार्ग पर लेटे लोगों के ऊपर से गुजर गईं। खास बात ये है कि, ये पूरा घटनाक्रम इतना हैरतंगेज होता है कि, कुछ देर के लिए मन्नत मांगने वालों से लेकर उन्हें देखने वालों तक की सांसें थम जाती हैं।

गौ माता को पाले और करें सेवा : उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा

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उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने मंगलवार को मंदसौर में गुरूदेव कमलमुनि चिन्मयानंद गौशाला लामगरी-नगरी में गोवर्धन पूजा की। उन्होंने गौ माता को गुड़ एवं रोटी खिलाई और गाय-बछड़ों को दुलारा।

उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने सभी को दीपावली और गोवर्धन पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम सभी को गौमाता की सेवा और गौपालन करना चाहिए। हमारी सनातन संस्कृति हमें प्रकृति से जुड़ना सिखाती है। गौमाता अपने बछड़े के साथ हम सबका भी ध्यान रखती हैं। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गौशाला में बिजली की व्यवस्था शीघ्र कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि सोयाबीन के लिए भावांतर भुगतान योजना प्रारंभ की गई है, जो किसानों और व्यापारियों के बीच सेतु का कार्य करेगी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने गौशाला सेवादारों का सम्मान कर अन्नकूट प्रसाद ग्रहण किया।

श्री देवड़ा ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मार्ग स्वदेशी से होकर जाता है। छोटे एवं कुटीर उद्योगों से निर्मित वस्तुएं खरीदें, हर घर स्वदेशी और घर-घर स्वदेशी का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, इसके लिए हमें स्वदेशी चीजों को अपनाना होगा।

इस अवसर पर लोकसभा सांसद श्री सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

साक्षात् श्रीकृष्ण भगवान का दर्शन है गोवर्धन परिक्रमा

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(डॉ. दौलतराज थानवी – विभूति फीचर्स)

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म होने से ब्रजभूमि की रज को आज भी कृष्णमयी मानकर लोग मस्तक पर लगाते हैं। कहते हैं यह तो रमण देती है। बड़े-बड़े लक्ष्मी के लाल और सुदामा मंडल के निर्धन भी यहां आकर अपने को धन्य मानते हैं। उनका भक्त हृदय यहां के टुकड़ों के लिए तरसता है। ओड़छे के व्यास बाबा गिड़गिड़ा कर कहते हैं-
ऐसो कब करिहौ मन मेरो।
कर करवा हरवा गुंजन की कुंजन माहि बसेरो॥
भूख लगै तब मांगि खाउंगो, गिनौ न सांझ सवेरो।
ब्रज बासिन के टूक-जूंठ अरू घर-घर छाछ महेरो।
ब्रजभूमि को भगवान कृष्ण गौ लोक से साथ लाए थे। ब्रज में आते ही ब्रजभूमि की शान बढ़ गई। गोपी गीत में गोपियां कहते हैं-
जयति ते अधिकं जन्मना व्रज: श्रयत इंदिरा शश्वदत्र हि।
दयति दृश्यता दिक्षुतावकास् तवयि धृता सवम् तवां विचिन्वते।
जिस प्रकार देवी-देवता, ऋषि-मुनि, श्रुतियों आदि ने आकर गोप-गोपिकाओं का जन्म ग्रहण किया, उसी प्रकार पुराणों और वेदों में इस भूमि को सृष्टि और प्रलय से मुक्त बताया है। यह वह भूमि है जिस पर उद्धवजी ने लोट-पोट होकर रमण रेती को मस्तक लगा दिया। ऐसा इसलिए है कि यहां पर बड़े-बड़े देवता यहां के निवासियों की जूठन खाना, प्रसाद ग्रहण करने की तरह समझते थे। सूरदासजी ने तभी तो लिखा है-
ब्रजवासी पट तर कोउ नाहि
ब्रह्म सनक सिवध्यान न पावत, इनकी जूठनि लै लै खाहि।
हलधर कहयौ, छाक जेंवत संग, मीठो लगत सराहत जाहि।
सूरदास प्रभु जो विश्वम्भर, तो ग्वाल के कौर अधाहि।
ब्रजभूमि को मथुरा और वृन्दावन में आसपास 84 कोस में फैली बताया है। वाराह पुराण के अनुसार भगवान ने कहा कि मथुरा मण्डल 20 योजन में है। यहां के तीर्थ स्थल पर स्नान करना मनुष्यों के लिए अपने पापों का नाश करना है-
विशतिर् योज नानां च माथुरं मम मण्डलम्।
यत्र-तत्र न: स्नात्वा मुच्यते सर्व पात कै:॥

इस 90 कोस में 12 महावन और 24 उपवन थे। सात सरिताएं थीं। 5 सरोवर थे। पांच पर्वत थे, जिसमें गोवर्धन सर्वाधिक पूजनीय माना गया है। भगवान कृष्ण ने जब गोवर्धन की पूजा का प्रस्ताव रखा तो समस्त देवता, अप्सराएं, नाग, कन्याएं और ब्रजवासियों के झुण्ड आने लगे। गंगाधर शिवजी भी पधारे। राजर्षि, ब्रह्यर्षि, देवर्षि, सिद्धेश्वर, हंस आदि मांगेश्वर तथा हजारों ब्राह्मण वृन्द गिरिराज के दर्शन को पधारे। (गर्ग संहिता)।
भगवान की बताई विधि से गिरिराज की पूजा प्रारंभ की गई। नन्द, उपनन्द, वृषभानु, गोपी वृन्द तथा गोप गण नाचने, गाने और बाजे बजाने लगे। उन सबके साथ हर्ष से भरे हुए श्रीकृष्ण ने गिरिराज की परिक्रमा की।
श्रीकृष्ण ब्रज स्थित शैल गोवर्धन के बीच से एक दूसरा विशाल रूप धारण करके निकले और ‘मैं गिरिराज गोवर्धन हूं’ यह कहते हुए वहां का सारा अन्नकूट का भोग लगा गए। कुछ समय बाद अन्तर्ध्यान हो गये।
देवराज इन्द्र इससे क्रोधित हो गए। उन्होंने सांवतर्क, मेघगणकों को पानी बरसाने को कहा। घबराये गोपों ने कृष्ण भगवान से कहा- ब्रजेश्वर कृष्ण, तुम्हारे कहने से हम लोगों ने इन्द्र योग छोड़कर गोवर्धन पूजा का उत्सव मनाया, इन्द्र का कोप बहुत बढ़ गया। अब शीघ्र बताओ, हमें क्या करना चाहिए। भगवान कृष्ण ने विश्वास दिलाया कि डटे रहें। समस्त परिकरों के साथ गिरिराज तट पर चलें। जिन्होंने तुम्हारी पूजा ग्रहण की है, वे ही तुम्हारी रक्षा करेंगे। भगवान ने गोवर्धन पर्वत को उखाड़कर एक ही हाथ की एक अंगुली पर खेल-खेल में ही धारण कर लिया। इन्द्र देव ने माफी मांगी।
भगवान ने पुन: पर्वत गिरिराज को धरती पर रख दिया। इसी से गोवर्धन गिरिराज पवित्र तीर्थ हो गया है। भगवान ने अपना हाथ गिरिराज पर रखा वहां का स्थान हस्तचिन्ह- उनके साथ चरण चिन्ह से पवित्र हो गया।
आकाश गंगा ने भगवान का अभिषेक किया। इसी से यहीं पर मानसी गंगा प्रकट हो गई जो सम्पूर्ण पापों का नाश करने वाली है। दुग्ध से भगवान का अभिषेक हुआ, जिसमें वहां गोविन्द कुण्ड प्रकट हो गया। यहां पर भी भक्तजन स्नान करते हैं। भण्डारी वन में ब्रह्माजी ने वृषभानुवन में पुत्री राधिका और श्रीकृष्ण का विवाह सम्पन्न कराया। समीप में ही नन्द नन्दन श्री हरि ने राधा पर मोती न्यौछावर किए थे, जिससे वहां मुक्ता (मोती) सरोवर प्रकट हो गया। यह सरोवर भोग और मोक्ष का दाता है। इस तरह गिरिराज सम्पूर्ण जगत में शिखरों के मुकुट का दर्जा पा सका।
गिरिराज पर भगवान के मुकुट से स्पर्श पाई शिला मुकुट है। जहां की शिला पर बालपन के चित्र बनाए वह चित्र शिला है। जहां बालकों के साथ खेल किया और शिला को बजाया वो वादिनी शिला के रूप में पूजनीय है। साथ में ही कन्दुक क्षेत्र (खेल क्षेत्र) है। यहीं पर शक्रपद और ब्रह्मपद के चिन्ह भी हैं। यहीं पर सभी गोपों की पगडिय़ां चुराई थीं वह स्थान औष्णीष नाम से प्रसिद्ध हो गया। जहां गोपियों से दही लूटा था और गोवर्धन की घाटी में कदम्ब और पलाश के पेड़ों के पत्तों से दोने बनाए थे, वह द्रौण स्थान भी नमस्कार करने पर फल देने वाला हो गया।
कदम्ब खण्ड, श्रृंगार मंडल में श्री नाथ जी सदा लीला करते हैं। श्री रंगनाथ, श्री द्वारकानाथ और श्री बद्रीनाथ प्रसिद्ध पांच नाथ देवताओं के पांच स्तम्भ।
चार स्तम्भों की परिक्रमा होती है। पर्वत बने चिन्ह, कुण्ड और मंदिर तो गिरिराज के जीवित स्वरूप हैं। इस प्रकार श्री गोवर्धन तो भगवान के मुख हैं। मानसी गंगा, भगवान के दो नेत्र हैं। चन्द्रसरोवर नासिका है। गोविन्द कुण्ड अधर हैं। श्रीकृष्ण कुण्ड भगवान का चिबुक है। राधाकुण्ड भगवान की जिव्हा है, ललिता सरोवर, भगवान के कपोल हैं, गोपाल कुण्ड, भगवान के कान हैं, कुसुम सरोवर, भगवान के कर्णान्त भाग हैं। पर्वत पर चित्रशिला भगवान का मस्तक है। वादिनी शिखा उनकी गर्दन है। कुन्दक तीर्थ भगवान का पार्श्व भाग (पीठ) है।
उष्णीष तीर्थ भगवान का कटि भाग है। द्रौण तीर्थ पिछली पसलियां हैं। लौकिक तीर्थ भगवान का पेट है। कदम्ब खण्ड भगवान का हृदय है। श्रृंगार मण्डप में जीवात्मा बसती है। श्रीकृष्ण चरण चिन्ह भगवान का मन है। हस्त चिन्ह तीर्थ बुद्धि है। ऐरावत चरणचिन्ह भगवान के चरण हैं। सुरभि के चरण गोवर्धन के पंख है।
पुच्द कुण्ड उस पर्वत राज की पूंछ है। वत्सकुण्ड उसका बल है। रूद्र कुण्ड क्रोध है। इन्द्र सरोवर काम वासना है। कुबेर तीर्थ उद्योग स्थल कर्म क्षेत्र है। ब्रह्म तीर्थ प्रसन्नता का प्रतीक है। यम तीर्थ गोवर्धन का अहंकार है।
यह गोवर्धन पर्वत श्री हरि के वक्ष स्थल से प्रकट हुआ है। पुलस्तय मुनि के तेज से यह ब्रज मण्डल में स्थित हो गया। यह साक्षात् श्रीकृष्ण ही है। इसकी परिक्रमा साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण की परिक्रमा है। यहां यह भी संदेश मिलता है कि जीवन का तथ्य जल है। पहाड़ों-पहाडिय़ों पर सरोवर और कुण्ड बनाना, कदम्ब जैसे वृक्षों से उन पर्वतों को श्रृंगार करना जीवन को जल से तृप्त करता है तथा भगवान की छाया का अनुभव होता है।
वर्तमान में हजारों श्रद्धालु इस तीर्थ की परिक्रमा करते हैं। भगवत कृपा से यहां पर चोरी-चकारी, लूट-खसोट और अन्य वारदातें नहीं सुनी हैं। हां कुछ स्वार्थी धन लोलुप यहां पर पर्वतराज के पास खनन कार्य की चेष्टा करते हैं।
इस तरह गिरिराज भगवान की परिक्रमा मात्र एक पर्वत खण्ड की परिक्रमा नहीं है, साक्षात् भगवान की परिक्रमा है जो कहते हैं गौरक्षा करो, जल संग्रहण करो, पेड़-पौधे लगाकर हरा-भरा क्षेत्र बनाओ, जहां राधा कृष्ण का विहार हो। अन्न क्षेत्र खोलकर भगवान को भोग लगाने का प्रबंध हो। (विभूति फीचर्स)

गोवर्धन पूजा को लेकर मिट्टी समेत सवावटी सामग्री की बढ़ी मांग

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दीपावली के बाद हर साल कार्तिक माह की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। पंचांग के मुताबिक, एक तिथि बढ़ने की वजह से बुधवार को मनाया जाएगा। गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतिमा बनाकर पूजा होती है, साथ ही भगवान को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।

गोवर्धन पूजा को लेकर मिट्टी समेत सवावटी सामग्री की बढ़ी मांग

शहर में गोवर्धन पूजा उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा। पर्व को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिरों से लेकर घरों तक भक्ति का माहौल है। सभी लोग गोवर्धन पूजा की तैयारियों में व्यस्त हैं। बाजारों में गोबर, मिट्टी, फूल और सजावटी सामग्रियों की मांग बढ़ गई है। इनसे गोवर्धन पर्वत की छोटी प्रतिकृतियां बनाई जाएंगी।

भाेग लगाने को घरों में बनने लगे अन्नकूट के पकवान, मंदिरों में हुई सजावट

महिलाएं अन्नकूट के लिए स्वादिष्ट पकवान जैसे खिचड़ी, पूड़ी, सब्जियां और मिठाइयां तैयार कर रही हैं। शहर के प्रमुख मंदिर श्रीखाटू श्याम, इस्कान मंदिर समेत अन्य मंदिरो में विशेष सजावट और भोग की व्यवस्था के साथ भक्तों का स्वागत करने को तैयार हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन और भक्ति कार्यक्रमों की धूम रहेगी।

लीला को स्मरण कराती है पूजा

गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण की उस लीला को स्मरण कराती है, जब उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर गोकुलवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था। यह पर्व प्रकृति, पर्यावरण और गायों के प्रति सम्मान का संदेश देता है। शहर में भक्त इस दिन गाय की पूजा हाेगी और अन्नकूट का भोग लगाकर समृद्धि और एकता का उत्सव मनाया जाएगा।

शुभ मुहूर्त

पंडित चंद्रेश कौशिक के अनुसार, गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त बुधवार सुबह 6:30 से 8:45 बजे तक और शाम 5:15 से 7:30 बजे तक रहेगा। इस दौरान भक्त गोवर्धन पर्वत की पूजा करेंगे और भगवान कृष्ण को भोग अर्पित करेंगे। पर्व भक्ति, उत्साह और सामुदायिक एकता के साथ मनाया जाएगा।

घर-घर गौपाल’ बयान पर Jitu Patwari ने तीखा हमला बोला

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 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गौवर्धन पूजा के अवसर पर बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य में दुग्ध उत्पादन को 9% से बढ़ाकर 20% तक ले जाने की तैयारी है और इसके लिए ‘घर-घर गौपाल’ जैसी पहल जरूरी होगी. उनके इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया के ज़रिए सीएम पर पलटवार करते हुए कहा कि बातों से बदलाव नहीं होता, किसानों को जमीन पर नतीजे चाहिए. उन्होंने तंज कसा कि ‘आपको लगता है कि आप सबसे बड़े गौ-रक्षक बन गए हैं, लेकिन आपकी बातें सिर्फ़ कागज़ी बदलाव तक सीमित हैं. मोहन भैया झूठ बोलना बंद कीजिए.’ इतना ही नहीं पटवारी ने पिछले तीन साल में गौवंश की मौत का आंकड़ा भी बताया है. इसके अनुसार, पिछले तीन साल में 350+ गौवंश की मौत हुई है.

लोकप्रियता नहीं, जमीन पर सच्चाई दिखाइए

जीतू पटवारी ने लिखा कि मुख्यमंत्री सिर्फ बयानबाजी और सस्ती लोकप्रियता के सहारे सुर्खियां बटोर रहे हैं, जबकि असली गौ-पालक अच्छी तरह जानते हैं कि मौजूदा सरकार की ‘नकली गौ-भक्ति’ असली गौवंश पर ही भारी पड़ रही है.

पटवारी ने गिनाए गौवंश मौत के उदाहरण

उन्होंने सरकार को ‘आईना दिखाने’ के लिए प्रदेश के कई जिलों के उदाहरण दिए…

  • दिसंबर 2023, आगर-मालवा: 58 गायें गौशाला में मरीं, चारा नहीं था! फिर सवाल उठा सरकारी अनुदान कहां गया?
  • जून 2024, सिवनी: जंगलों में 63 गौ-कंकाल मिले! भाजपा सरकार की गोरक्षा पालन की असलियत उजागर हुई!
  • जून 2024, मंडला: फ्रीजर से मिला मांस, 150 गायों को सुरक्षा दी गई! मोहन सरकार मैदान से नदारद!
  • जून 2024, रतलाम: रतलाम मंदिर परिसर में बछड़े का सिर मिला, BJP ने सिर्फ़ राजनीति की!
  • जुलाई–सितंबर 2024, रीवा: रीवा हाईवे पर 78 गायें कुचली गईं! भविष्य में बचाव के नाम पर सिर्फ सरकारी नौटंकी हुई!
  • जुलाई-सितंबर 2024, देवास: हाईवे पर 54 गायों की मौत, BJP नेता केवल फोटो खिंचवाते रहे!
  • जुलाई-सितंबर 2024, सीहोर: 35 गायों ने हाईवे पर फिर दम तोड़ दिया! बेशर्म बीजेपी गोरक्षा के नाम पर ढोंग करती रही!
  • जुलाई-सितंबर 2024, विदिशा: विदिशा में 12 गायों की सड़क हादसे में मौत, सड़कें श्मशान बनती रही, CM चुप रहे!
  • जुलाई-सितंबर 2024, राजगढ़: राजगढ़ में 13 गायें हाईवे पर कुचली गईं! जनता बोली मोहन सरकार मूकदर्शक!
  • जून 2025, भोपाल: भोपाल की सड़कों पर रोज़ाना 50+हादसे, गायों के साथ जनता भी बेसहारा!

“गौरक्षा सिर्फ फोटो नहीं, जिम्मेदारी भी होती है”

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता सिर्फ फोटो खिंचवाने में व्यस्त रहे, जबकि हाईवे गायों के लिए कब्रगाह बनते गए. उनका दावा था कि सरकार की गौरक्षा राजनीति है, संरक्षण नहीं.

झूठ बोलना बंद कीजिए, मोहन भैया

पटवारी ने अपने संदेश का अंत तीखे शब्दों में करते हुए कहा कि ‘झूठ बोलना भाजपाइयों का धर्म होगा, लेकिन आप यह पाप मत कीजिए.’ उन्होंने दोबारा सीएम को गौवंश की वास्तविक स्थिति पर ध्यान देने की चुनौती दी.

ट्रक में पीछे आलू की बाेरियां और आगे थे 12 गौवंश यूपी के तस्कर अपनाते हैं यही तरीका

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हिमाचल प्रदेश में गोवंश की तस्करी का मामला सामने आया है। दीपावली की रात जिला सोलन की पंचायत बाहा, किनरी क्षेत्र में गोवंश से भरा एक ट्रक पकड़ा गया। जानकारी के अनुसार इस ट्रक में कुल 12 गोवंश थे, जिनमें से दम घुटने के कारण 10 की मौत हो चुकी थी, जबकि 2 जीवित पाए गए हैं।

इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। हैरानी की बात यह है कि ट्रक में सबसे पीछे आलू की बोरियां भरी हुई थी, ताकि वह किसी को भी चकमा देकर निकल सकें, लेकिन तकनीकी खराबी आने के कारण ट्रक सड़क किनारे खड़ा हो गया और गौरक्षा दल की नजरों में यह ट्रक आ गया, जिससे यह खुलासा हो पाया।

विदित हो कि दीपावली के दिन घटना की सूचना मिलते ही गौ रक्षा दल की टीम मौके पर पहुंची और पुलिस को सूचित किया। सोमवार सुबह मृत गोवंश का पोस्टमार्टम लगभग 12 बजे करवाया गया। ट्रक में मौजूद तस्कर मौके से भाग निकले हैं।

गौरक्षा दल ने ट्रक की जांच की

गौरक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डीडी राणा ने बताया कि उनकी टीम के सदस्य सोलन जिला के रोहित कुमार ने इस पूरे मामले का खुलासा करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने इस ट्रक की तहकीकात करने की हिम्मत जुटाई ओर दो बेजुबानों की जान बचाई और साथ ही इस तस्करी का नेटवर्क तोड़ने में सहायता की।

तिरपाल हटाई तो बेहद भयावह था अंदर का नजारा

डीडी राणा ने बताया कि यह ट्रक उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से लाया जा रहा था और माफिया इसे मनाली होते हुए श्रीनगर तक ले जाने की योजना में थे। उन्होंने कहा कि दीपावली से एक दिन पहले यह ट्रक जोघों के पास खराब हो गया था। जब टीम ने मौके पर जाकर ट्रक की तिरपाल हटाई, तो ऊपरी हिस्से में आलू रखे हुए थे और नीचे गोवंश को ठूंस-ठूंसकर भरा गया था।

यूपी के तस्कर अपनाते हैं यही तरीका

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से आने वाले अधिकतर ट्रकों में इसी प्रकार का तरीका अपनाया जाता है, ऊपर सब्जियों या फलों का लोड दिखाकर नीचे गऊ वंशों को छिपा दिया जाता है। उन्होंने सरकार से इस मामले में कड़ा संज्ञान लेने और हरियाणा व पंजाब बॉर्डर पर निगरानी बढ़ाने की मांग की।

काऊ सेस के नाम पर करोड़ों वसूले पर व्यवस्था नहीं

राणा ने कहा कि सरकार काऊ सेस के नाम पर करोड़ों रुपये वसूल रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर गौ तस्करी और गौ हत्या की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार दोनों से आग्रह किया कि बॉर्डर इलाकों में कड़े चेकपोस्ट व स्कैनिंग सिस्टम लगाए जाएं, ताकि इस प्रकार की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लग सके।

ये गौभक्त रहे मौके पर

इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष डीडी राणा, प्रदेश अध्यक्ष विनोद पंवार, संगठन मंत्री प्रदीप ठाकुर, चेयरमैन लकी, जिला संयोजक बजरंग दल मोहित ठाकुर, रोहित कुमार (महा सचिव सोलन), टीम लीडर संजू बाबा, युवराज, दीपि, अमित शर्मा, पीन्दी, अनिल कुमार, मुकुल बसी, सतीश कुमार, सुखवीर राणा, चतर सिंह सहित सैंकड़ों गौभक्त मौजूद रहे।

सहारनपुर भेजी पुलिस टीम

बीबीएन पुलिस ने कहा कि उन्होंने इस मामले की छानबीन शुरू कर दी है। एक टीम को सहारनपुर भेजा गया है, ताकि ट्रक के चालक व मालिक से इसके बारे में पूछताछ की जा सके।

भोपाल में गोवर्धन पर्व पर गौ पालकों को मोहन यादव का टास्क

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भोपाल: मध्य प्रदेश में गोवर्धन पूजा का ये दूसरा साल है, जब पूरे प्रदेश में सरकारी तौर पर गौ पूजा हो रही है. भोपाल में हुए गोवर्धन पर्व के आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “केवल भाषणों से बात नहीं बनती.” उन्होंने गौ पालकों को टास्क दिया कि मध्य प्रदेश को गौ पालन में देश का नंबर-1 राज्य बनाना है. उन्होंने कहा “प्रयास ये होना चाहिए कि दूध की राजधानी मध्य प्रदेश में हो.” मोहन यादव ने भारतीय संस्कृति और परंपरा के महत्व को बताने के लिए इकबाल के शेर को याद किया और कहा कि “कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.”

दूध प्रोडक्शन में ऐसे नंबर-1 पर पहुंचे मध्य प्रदेश

पूरे प्रदेश की गौ शालाओं में गोवर्धन पूजा के आयोजन हो रहें हैं. राजधानी भोपाल में हुए मुख्य आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भी मौजूदगी रही. उन्होंने इस मौके पर गौ पालकों से ये उम्मीद जताई कि जिस तरह से अभी दुग्ध उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में तीसरे नंबर पर है. इसे अब मिल्क प्रोडक्शन में देश का नंबर-1 राज्य बनाना है. उन्होंने कहा “केवल भाषण से बात नहीं बनती. हमने प्रयास किया कि त्योहार में जो संस्कार छिपा है, जो संदेश छिपा है, उसे आत्मसात किया जाए.”

मोहन यादव ने कहा कि “गायों के दूध से बना घी अमृत के समान है. गिर के गाय का जो दूध है लोग तो उसे सोना भी बताते हैं.” मोहन यादव ने अपने भाषण में गाय की वो नस्लें भी गिनाई जिनमें कुछ न कुछ विशिष्टता है. मसलन उन्होंने बताया कि गिर की गाय का दूध इतना पौष्टिक है कि कई बीमारियों से बचाव करता है. गायों के दूध का बना घी अमृत के समान होता है. मोहन यादव ने बताया कि “मालवी गाय में दूध कम मिलेगा लेकिन दूध पौष्टिक बहुत होता है.” उन्होंने आंध्र प्रदेश की पुंगरु गाय का भी जिक्र किया.

महाकाल का ये रूप देखकर बोले मोहन ‘आनंद आ गया’

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गोवर्धन पूजा के आयोजन में आए प्रदेश भर के गौ पालकों के हाथ से बनाए उत्पाद भी देखे. इसमें एक शिल्पी की गोबर से बनाए गए महाकाल का मुख्यमंत्री ने खास जिक्र किया. उन्होंने बताया कि “यहां जो गौ पालक आए हैं. वे केवल दूध नहीं गौ माता से जुड़े गौ मूत्र और गोबर से भी उत्पाद बना रहे हैं.” उन्होंने खास तौर पर गोबर से बनाए गए महाकाल का जिक्र करते हुए कहा कि “गोबर के महाकाल देखकर तो आनंद ही आ गया.”

मध्य प्रदेश में 1 करोड़ से ज्यादा गोवंश

मध्य प्रदेश में गौवंश की संख्या 1 करोड़ 39 लाख से ज्यादा है. मोहन सरकार ने हाल ही में गौ शालाओं को प्रति गाय की राशि बीस रुपए से बढ़ाकर चालीस रुपए कर दी है. इसके लिए बाकायदा गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए स्वावलंबी गौ शालाओं की स्थापना नीति 2025 लागू की गई है. फिलहाल देखें तो भारत के दूध उत्पादक राज्यों में मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है. देश भर के मिल्क प्रोडक्शन का 9 फीसदी अकेले मध्य प्रदेश में होता है. मध्य प्रदेश में गोवर्धन पूजा को सरकारी तौर पर मनाए जाने के ऐलान के बाद प्रदेश भर की गौशालाओं में गोवर्धन पूजा का आयोजन हो रहा है.

आफताब शिवदसानी, विशाल कोटियान और सना सूरी मुम्बई में रवि सिंह द्वारा आयोजित “होप्स मिस्टर इंडिया 2025” में हुए उपस्थित

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बॉलीवुड स्टार आफताब शिवदसानी, बिग बॉस फेम विशाल कोटियान और सना सूरी मुम्बई में आयोजित “होप्स मिस्टर इंडिया 2025” में जज के रूप में उपस्थित हुए. निलयश्री क्रिएशंस द्वारा प्रेजेंट इस पेजेन्ट के ऑर्गनाइजर रवि सिंह थे जो एक फिल्ममेकर भी हैं. इस अवसर पर सोशल मीडिया वायरल आर्टिस्ट राजू कलाकार इत्यादि को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया. इसके विजेता हर्षित मिश्रा, फर्स्ट रनरअप विवेक चौधरी और सेकंड रनरअप रूपेश प्रसाद को घोषित किया गया.

शो के ऑर्गनाइजर रवि सिंह ने कहा कि उनकी कंपनी निलयश्री क्रिएशंस दिल्ली में पिछले 10 साल से काम कर रही है. बहुत सारे इवेंट किए गए हैं. “होप्स मिस्टर इंडिया का आयोजन दिल्ली में भी सफल रहा है. अब पहली बार हमने मुम्बई मे इसका आयोजन किया. मैं शो के जजों आफताब शिवदसानी, विशाल कोटियान और सना सूरी का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने इस कार्यक्रम मे आकर प्रोग्राम की शोभा बढ़ा दी. सभी प्रतियोगियों ने काफी तैयारी और मेहनत की. विजेता को 5 लाख रुपये नकद और हमारे प्रोडक्शन की फिल्म मे अभिनय का अवसर दिया जाएगा. जैसा कि शो का नाम है होप्स मिस्टर इंडिया ये तमाम नए मॉडल के लिए उम्मीद का एक बड़ा प्लेटफार्म है जहां उन्हें अपना हुनर दिखाने का मौका मिलता है.

आफताब शिवदसानी, विशाल कोटियान और सना सूरी ने आयोजक रवि सिंह को बधाई और शुभकामनाएं दीं और कहा कि उन्होंने इतने अच्छे शो का बखूबी आयोजन किया ये उनकी टीम की मेहनत का परिणाम है. हर प्रतियोगी मे आत्मविश्वास और उम्मीद नजर आई. इस तरह के कार्यक्रम मे नए लोगों को बहुत कुछ सीखने का मौका मिलता है. इस शो के ग्रूमर अभिषेक कपूर थे और शो मैनेजमेंट अक्षित चौहान ने किया. मीडिया पार्टनर स्वदेश चैनल था.

अक्षय कुमार की सकारात्मक सोच और संयमित जीवनशैली से बहुत कुछ सीखा है : राज रानी

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अभिनेत्री राज रानी उर्फ रानी ने कलकत्ता में फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में अपनी प्रतिभा से नाम कमाया है और आज वह हिंदी फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। कोलकाता में उन्होंने कई फिल्मों, टीवी सीरियल्स, म्यूजिक वीडियो और विज्ञापनों में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा, जिसके बाद अब वह मायानगरी मुंबई में अपने अभिनय का परचम लहराने को बेताब हैं।

रानी ने लोकप्रिय बांग्ला धारावाहिक “आकाश कुसुम” में मुख्य भूमिका निभाकर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। इस सीरियल की सफलता के बाद उन्हें कई नए प्रोजेक्ट्स ऑफर हुए और उनका करियर नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ा। जल्द ही वह अपने नए हिंदी टीवी सीरियल में नज़र आएंगी, जिसमें वह सुमन का किरदार निभा रही हैं। यह एक पारिवारिक ड्रामा है, जो जायदाद के लिए चल रहे षड्यंत्रों के इर्द-गिर्द घूमता है।

हालाँकि रानी को फिल्मों में अभिनय करने में विशेष रुचि है। वह शाहरुख़ खान की फिल्मों और उनके व्यक्तित्व से बेहद प्रभावित हैं, वहीं ‘एक्शन कुमार’ अक्षय कुमार की फिटनेस, अनुशासन और आदर्श जीवनशैली को अपनी प्रेरणा मानती हैं। रानी का कहना है कि उन्होंने अक्षय कुमार की सकारात्मक सोच और संयमित जीवनशैली से बहुत कुछ सीखा है और वह स्वयं भी अपनी फिटनेस पर विशेष ध्यान देती हैं।

रानी अभिनेत्री श्रद्धा कपूर के अभिनय कौशल और सरलता से भी प्रभावित हैं। रानी कहती हैं कि अगर उन्हें सही अवसर मिला तो वह भी दिव्या भारती की तरह अपने दौर में एक अलग और यादगार छवि बनाना चाहेंगी।

फैशन जगत में भी रानी ने अपनी चमक बिखेरी है। वह मॉडलिंग और रैंप वॉक कर चुकी हैं और एक सेकंड रनर-अप विजेता रह चुकी हैं। उन्होंने मशहूर कोरियोग्राफर गणेश आचार्या की डांस एकेडमी से नृत्य की ट्रेनिंग ली और वहाँ आयोजित प्रतियोगिता में विजेता भी बनीं।

रानी को ऐतिहासिक और पौराणिक किरदार निभाना बेहद पसंद है। बचपन से ही अभिनय के प्रति जुनून रखने वाली रानी ने अपने इस शौक को करियर में बदलने के लिए निरंतर मेहनत की। उन्होंने रंगमंच (थिएटर) से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की और अपने शानदार प्रदर्शन के लिए खूब सराहना प्राप्त की। परिवार का सहयोग उन्हें हमेशा मिला और उन्होंने हर कठिन दौर में स्वयं पर विश्वास बनाए रखा।

रानी कहती हैं – “अगर आप स्वयं पर विश्वास नहीं करते, तो आप कुछ नहीं कर सकते। और अगर आप खुद से प्यार नहीं करते, तो दूसरों से क्या हमदर्दी दिखा पाएंगे। मंज़िल तक पहुँचने के लिए धैर्य रखना बहुत ज़रूरी है।”

खुशमिजाज और आत्मविश्वासी रानी संजय लीला भंसाली और मोहित सूरी की फिल्मों से गहराई से प्रभावित हैं और भविष्य में उनके साथ काम करने की इच्छा रखती हैं।

रानी बिग बॉस की भी बड़ी प्रशंसक हैं और एक दिन उस घर में जाने का सपना देखती हैं। वह मुस्कराते हुए कहती हैं -“बिग बॉस में लोग छोटी-छोटी बातों पर झगड़ते हैं। मैं वहाँ जाकर सबको यह दिखाना चाहती हूँ कि प्यार, सौहार्द और सरलता से भी गेम जीता जा सकता है।”

फिलहाल रानी अपने आगामी प्रोजेक्ट्स को लेकर बेहद उत्साहित हैं और उनका कहना है कि बहुत जल्द दर्शक उन्हें नए और दमदार किरदारों में देख पाएंगे।