नवरात्रि – अद्वितीय व अनूठी प्रतिमा है दिउड़ी माता की
स्वामी गोपाल आनंद बाबा-विनायक फीचर्स
स्वामी गोपाल आनंद बाबा-विनायक फीचर्स
सुभाष आनंद – विनायक फीचर्स
भारतीय जनता पार्टी जानती है कि 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर पंजाब की 13 सीटों पर कांटे की टक्कर हैं, लेकिन कंटीले रास्तों के बावजूद भारतीय जनता पार्टी सफलता का दावा भी पेश कर रही है। आज पंजाब भाजपा में बड़े नेताओं के साथ-साथ छोटे नेताओं ने अपने – अपने गुट बना लिए हैं,उससे लगता है कि उसकी स्थिति भी कांग्रेस जैसी हो रही है। जिस प्रकार कांग्रेस छोड़ बड़े पैमाने पर राजनीतिक लोग भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम रहे हैं, उससे लगता है कि शीघ्र ही भारतीय जनता पार्टी का कांग्रेसी करण हो जाएगा। इस समय पंजाब में कांग्रेस की तरह ही भारतीय जनता पार्टी के भी कई गुट सक्रिय हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्टी के चंद लोग पार्टी में गुटबंदी को हवा दे रहे है। पंजाब में एक बड़ा गुट अश्वनी शर्मा का है जो पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष हैं।
इस गुट में पंजाब के भा.ज.पा के कुछ वरिष्ट नेताओं के साथ साथ कई सैलों और मोर्चों के प्रमुख भी शामिल हैं। भा.ज.पा का दूसरा गुट पंजाब के पार्टी अध्यक्ष सुनील जाखड़ को लेकर सक्रिय हो रहा है, पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी के भीतर कई नेताओं ने उनका खुलकर विरोध किया था।
सुनील जाखड़ का संंबंध जिला फिरोजपुर से होने के कारण अंदर से राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी भी उनका विरोध कर रहे हैं। फिरोजपुर की लोकसभा टिकट के लिए वह भारतीय जनता पार्टी से टिकिट मांग रहे हैं। जबकि सुनील जाखड़ राणा सोढ़ी को फिरोजपुर लोकसभा टिकट दिए जाने का भीतर ही भीतर विरोध कर रहे हैं। यद्धपि प्रनीत कौर ने भाजपा का दामन थामा है लेकिन पटियाला के भाजपा कार्यकर्ता उनको पसंद नहीं करते। अश्वनी कुमार शर्मा जो भाजपा के पंजाब प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं उनके गुट में कई पूर्व विधायक शामिल हैं, जैसे मनोरंजन कालिया, तीक्षण सूद, सुखपाल सिंह नन्नू इत्यादि यह सभी अश्वनी शर्मा के साथ सुर मिलाने की बातें कर रहे हैं।
पंजाब के सभी जिलों एवं विधानसभा क्षेत्रों मेें पार्टी को छोटे- छोटे गुटों में बंटी होने के कारण नुकसान उठाना पड़ सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कई गुटों में बंटी होने के कारण 18 विधायकों तक सिमट कर रह गई। भारतीय जनता पार्टी यदि लोकसभा के चुनावों में अकेले उतरती है तो उसे कई जगहों पर लोकप्रिय उम्मीदवारों की कमी देखने को मिलेगी, इस समय भाजपा का गढ़ कही जाने वाली गुरदासपुर सीट भी खतरे में लगती है, क्योंकि सिटिंग लोकसभा सदस्य सन्नी देयोल ने साफ कह दिया है कि वह आगामी चुनाव नहीं लड़ेंगे, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पंजाब भा.ज.पा के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी कहा है कि वह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। (विनायक फीचर्स)
निर्देशक संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित वेब सीरीज़ “हीरामंडी” ने “तिलस्मी बाहें” नामक एक मंत्रमुग्ध कर देने वाले गीत के अनावरण के साथ मनोरंजन जगत में उत्साह की लहर दौड़ दी है, साथ ही सोनाक्षी सिन्हा के किरदार, फरीदन की जबरदस्त पहली झलक भी सामने आई है। सोनाक्षी सिन्हा ने न केवल अपना अब तक का सबसे कठिन प्रदर्शन देकर दर्शकों को आकर्षित किया है, बल्कि उन्होंने “हीरामंडी” के सेट पर एक शॉट को रिकॉर्ड-ब्रेकिंग 20 मिनट में यानि की पहले टेक में ही पूरा कर इतिहास भी रच दिया है – भंसाली निर्देशित फिल्म पर ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था।
एक सूत्र ने यह भी खुलासा किया है कि दमदार दृश्य की शूटिंग के बाद सेट पर मौजूद पूरी टीम के साथ-साथ जाने-माने फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली ने भी सोनाक्षी को स्टैंडिंग ओवेशन दिया था।अपने इंटेंस और हाई एनर्जी परफॉरमेंस के साथ सोनाक्षी पहली बार ऐसे अवतार में नजर आ रही हैं। सोनाक्षी साडी पहने हुए बहुत ही ख़ूबसूरत नज़र आ रही है। फरीदन का किरदार निभाने वाली सोनाक्षी एक दमदार स्टोरी का वादा करती है, जो उसकी भावनात्मक गहराई और सीमा को पहले की तरह प्रदर्शित करती है।पहले पोस्टर में उनके संतुलित और शालीन व्यवहार से लेकर गाने में उनके गहन और रोमांचकारी प्रदर्शन तक, प्रशंसक स्क्रीन पर सोनाक्षी की निपुणता और भावनात्मक प्रतिभा का अनुमान लगा सकते हैं।
जैसा कि “हीरामंडी” की रिलीज का लोगों को बेसब्री से इंतज़ार है सोनाक्षी सिन्हा का शानदार प्रदर्शन निश्चित रूप से शहर में चर्चा का विषय होगा, जो दर्शकों को “हीरामंडी” की मनोरम दुनिया में खींचेगा।
(राकेश अचल-विभूति फीचर्स)
पिछले साल लगभग जीता हुआ विधानसभा चुनाव हारने के बाद क्या कांग्रेस लोकसभा में भी हारने का मन बनाये बैठी है ? यह सवाल कांग्रेस द्वारा लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के चयन को लेकर की जा रही लेतलाली के कारण उठने लगे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पास मप्र की 29 सीटों में से मात्र एक सीट हिस्से में आयी थी। इस बार भी कांग्रेस ने प्रत्याशियों के चयन में सतर्कता नहीं बरती और चुनाव होने से पहले ही अनेक सीटें भाजपा को जीतने के लिए छोड़ दीं है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पास मात्र 2 सीटें थीं।
कांग्रेस इस बार प्रत्याशियों के नामों की घोषणा में भाजपा से पिछड़ गयी है । कांग्रेस ने पहली सूची में 12 प्रत्याशियों के नाम दिए थे । बाद में किश्तों में चार-छह नाम आते रहे किन्तु अभी भी ग्वालियर और मुरैना सीट के लिए कांग्रेस अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं कर पायी है। कांग्रेस में एक ओर तो पार्टी छोड़ने वालों का सिलसिला थम नहीं रहा दूसरे कांग्रेस अभी तक एक मजबूत प्रतिद्वंदी की तरह मैदान में खड़ी दिखाई नहीं दे रही है। कांग्रेस के दिग्गज नेता भी आधे-अधूरे मन से चुनाव मैदान में उतरे हुए हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग में तो कांग्रेस ने गुना और भिंड से जिन नामों की घोषणा की है उसे देखकर लगता है कि कांग्रेस यहां जीतना ही नहीं चाहती।
आम धारणा है कि कांग्रेस को इस चुनाव में पार्टी के पहले बड़े विभीषण केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ कोई मजबूत और चौंकाने वाला प्रत्याशी मैदान में उतारना चाहिए था ,लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सिंधिया के खिलाफ कांग्रेस ने पूर्व विधायक स्वर्गीय देशराज सिंह के बेटे राव यादवेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया है। कहने को सिंधिया और राव खानदान के बीच ये मुकाबला नया नहीं है। दोनों परिवारों के सियासी मुकाबला पुराना है। यहां वर्ष 1999 के चुनाव में माधवराव सिंधिया और देशराज सिंह यादव के बीच मुकाबला हुआ था। उसके बाद 2002 के उपचुनाव में ज्योतिरादित्य के सामने देशराज सिंह थे। अब सिंधिया का मुकाबला देशराज के पुत्र यादवेंद्र सिंह से है। यादवेंद्र सिंह का परिवार पुराने भाजपा परिवार के तौर पर पहचाना जाता है। उनके पिता देशराज सिंह यादव भाजपा के बड़े नेता रहे हैं। यादवेंद्र सिंह भी भाजपा में रहे हैं, मगर वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
कांग्रेस प्रत्याशी यादवेंद्र सिंह की मां तक उनके साथ नहीं हैं। वे जिला पंचायत सदस्य हैं, और भाजपा में लौट चुकी हैं ।उनके परिवार के अन्य सदस्य भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। गुना संसदीय क्षेत्र में तीन जिलों के विधानसभा क्षेत्र आते हैं, इनमें शिवपुरी के तीन, गुना के दो और अशोकनगर के तीन विधानसभा क्षेत्र हैं।इन आठ विधानसभा क्षेत्र में से छह विधानसभा क्षेत्र पर भाजपा का और दो पर कांग्रेस का कब्जा है। सिंधिया के लिए केवल यादव मतदाताओं की बगावत ही नुकसान कर सकती है अन्यथा उनकी जीत पक्की है।
गवालियर सीट से भाजपा ने विधानसभा चुनाव हारे पूर्व मंत्री भारत सिंह को प्रत्याशी बनाया है । उनका नाम सामने आते ही ये धारणा बन गयी थी कि अब भाजपा ये सीट जीतना भाजपा के लिए मुश्किल होगा बशर्ते कि कांग्रेस किसी मजबूत नेता को अपना प्रत्याशी बनाये लेकिन कांग्रेस अभी तक यहां अपना प्रत्याशी तय नहीं कर पायी है। यही स्थिति मुरैना सीट को लेकर है । मुरैना सीट से भी भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के भक्त पूर्व विधायक शिवमंगल सिंह तोमर को प्रत्याशी बनाया है। तोमर की छवि भी यहां ज्यादा अच्छी नहीं है । कांग्रेस यहां किसी भी मजबूत प्रत्याशी को लाकर लोकसभा की सीट जीत सकती थी ,लेकिन कांग्रेस ने यहां भी अभी तक प्रत्याशी का नाम तय नहीं किया है। हालाँकि मुरैना से पूर्व मंत्री राम निवास रावत कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ने को उतावले हैं। भिंड आरक्षित सीट से भाजपा ने अपने वर्तमान सांसद को ही मैदान में उतारा है। उनके खिलाफ कांग्रेस ने अपने विधायक फूल सिंह बरैया को मैदान में उतारा है। वे सवर्णों को सरेआम गरिया चुके हैं ,ऐसे में उनका जीतना आसान नहीं है ,जबकि ये सीट कांग्रेस के लिए मुरैना और ग्वालियर की सीट की तरह आसान हो सकती थी।
कांग्रेस की एक मात्र सुरक्षित सीट छिंदवाड़ा भी कांग्रेस में भाजपा द्वारा की गयी व्यापक तोड़फोड़ की वजह से खतरे में है ,कांग्रेस के दिग्गज दिग्विजय सिंह को हालाँकि कांग्रेस ने राजगढ़ से प्रत्याशी बनाकर छिंदवाड़ा की संभावित हार की भरपाई करने के लिए प्रत्याशी बनाया है लेकिन दिग्विजय सिंह राजगढ़ के मौजूदा भाजपा सांसद रोडमल नागर के सामने कितना टिक पाएंगे कहना कठिन है। नागर पिछले तीन चुनाव जीत चुके हैं। लगता है कि कांग्रेस को अब मध्यप्रदेश में वोटों की खेती करने में डर लगने लगा है ,अन्यथा इस बार ये मौक़ा था जब यहां से कांग्रेस कम से कम 10 सीटें आसानी से जीत सकती थी। अब देखना होगा कि हर तरह से कंगाल हो चुकी कांग्रेस मध्यप्रदेश में अपनी विजय पताका कितनी सीटों पर फहरा सकती है या उसे इस बार अपनी बचीखुची एकमात्र छिंदवाड़ा सीट से भी हाथ धोना पड़ सकता है ? (विभूति फीचर्स)

(विष्णुदत्त शर्मा-विनायक फीचर्स)
गुवाई वाली कांग्रेस सरकार में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सम्मिलित रहे थे किंतु नेहरू-लियाकत समझौते का विरोध एवं पंडित नेहरू की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के विरोध में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने 19 अप्रैल 1950 को केंद्रीय उद्योग मंत्री के पद से त्यागपत्र देकर कांग्रेस के विकल्प के रूप में एक नया राजनीतिक दल खड़ा करने का निर्णय किया। 21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली में जनसंघ की स्थापना हुई थी जिसके संस्थापक के रूप में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, प्रोफेसर बलराज मधोक जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी प्रमुख थे और जनसंघ का चुनाव चिन्ह दीपक तथा झंडा भगवा रंग का रखा गया। देश में सामान नागरिक सहिता, गौहत्या पर प्रतिबंध एवं जम्मू कश्मीर से धारा 370 को समाप्त करना जनसंघ की राजनीति के प्रमुख विषय थे। वर्ष 1975 तक जनसंघ इन्ही मुद्दों को लेकर अपनी राजनीति कर रहा था किंतु इंदिरा गाँधी द्वारा आपातकाल की घोषणा एवं आपातकाल के विरोध में सयुंक्त मोर्चा खड़ा करने के उद्देश्य से तत्कालीन जनसंघ के नेतृत्वकर्ताओं ने 1977 में जनसंघ का विलय जनता पार्टी में किया किंतु अपने वैचारिक अधिष्ठान के स्वाभिमान हेतु जनता पार्टी से अलग होकर श्रद्वेय अटल बिहारी वाजपेयी जी, श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी सहित जनसंघ के अन्य नेताओं ने 6 अप्रैल, 1980 को पंच निष्ठाओं के आधार पर भारतीय जनता पार्टी के नाम से नए राजनैतिक दल की स्थापना की।
भारतीय जनता पार्टी के शून्य से शिखर की इस 44 वर्षों की यात्रा में कई अच्छे-बुरे पड़ाव आये है किंतु अपने ध्येयों की वजह से हमारा संगठन अपने मूल विचार पर आज भी चट्टान की भांति अडिग है। श्रद्धेय अटलजी संगठन के पहले अध्यक्ष बने एवं 1980 में भारतीय जनता पार्टी का प्रथम अधिवेशन मुंबई में आयोजित किया गया था। अपने अध्यक्षीय भाषण में श्रद्वेय अटलजी ने भविष्यवाणी की थी, वो आज सत्य सिद्ध हो चुकी है। उन्होंने कहा था- ”मैं ये भविष्यवाणी करने का साहस करता हूं कि अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा”। मूलतः भाजपा की यह यात्रा एक विचार की है जिसके आधार पर भाजपा देश के अन्य राजनीतिक दलों से अलग है। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई का अध्यक्ष होने के नाते मैं यह गंभीरता के साथ कह सकता हूँ कि वर्तमान राजनीति में संभवतः भाजपा ही एक मात्र राजनीतिक पार्टी है जो व्यक्ति या परिवार पर आधारित ना होकर अपनी विचारधारा पर आधारित है। हमारी इसी वैचारिक स्पष्टता एवं अपने कार्यों के प्रति सक्रियता से ऐसे अनेक विषयों का समाधान हुआ है, जिनकी कल्पना करना भी असंभव था।
दो सीटों पर विजय से शुरू हुआ भाजपा का संसदीय सफर आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 400 का जादुई आकंडा छूने के नजदीक है। आज देश के हर कोने में भाजपा की सशक्त उपस्थिति है। आज भाजपा के बिना देश में कोई राजनीतिक प्रक्रिया सम्भव नहीं है। पूर्वोत्तर के जिन राज्यों में भाजपा का सत्ता में आना कुछ समय पहले तक मृग मरीचिका माना जाता था, वहाँ की जनता ने भी भाजपा को अपना आशीर्वाद दिया और असम, त्रिपुरा, मणिपुर सहित अन्य राज्यों में भी भाजपा की सरकारें बनीं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत की हर छोटी से बड़ी पंचायत में भाजपा की प्रभावी उपस्थिति दिनोंदिन बढ़ रही है। अब चहुँओर कमल ही खिलता दिखाई दे रहा है। चप्पा चप्पा भाजपा, यह अब नारा नहीं आज की तारीख में एक हकीकत बन चुका है। जिन सपनों को लेकर जनसंघ से लेकर भाजपा के कार्यकर्ता गाँव-गाँव गए, वे आज साकार हुए हैं। इस दीर्घकालिक प्रक्रिया में पार्टी ने एक से बढ़कर एक पराक्रमी और परिश्रमी नेतृत्व देखा। स्वएर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी से लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी तक भाजपा ने देश की दलगत राजनीति में ऐसे प्रेरणा के पुँज दिए हैं, जिनकी आभा से राजनीतिक जगत जगमगा रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के रूप में हमारे नेतृत्व की संकल्प शक्ति की वजह से ही लगभग पांच सौ वर्षों की प्रतीक्षा के पश्चात आज अयोध्या में भव्य और दिव्य राम मंदिर के निर्माण का सपना वास्तविकता बना है। हमारे संस्थापकों ने एवं भाजपा के असंख्य कार्यकर्ताओं ने श्री रामलला को अपने मंदिर में विराजमान देखने हेतु अपनी चुनी हुयी सरकारें भी न्योछावर कर दीं, यह अपने विचारधारा पर अडिग रहने का एक उदाहरण मात्र है। हमारे पितृपुरुषों का संकल्प एवं एक देश में “दो विधान दो प्रधान दो निशान नहीं चलेंगे की पूर्ति स्वरूप प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार द्वारा लिया गया अनुच्छेद 370 को हटाने का ऐतिहासिक निर्णय हमारी ध्येय पूर्ति की यात्रा का और एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार एवं हमारे पूर्व राष्ट्री य अध्यक्ष एवं देश के वर्तमान गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के कार्यकाल में भाजपा ने श्रद्धेय अटलजी की सरकार तथा तत्कालीन संगठन की नीतियों को दिशा देने के प्रयास के साथ ही अपनी विचारधारा अनुरूप “राष्ट्र सर्वोपरि मानकर अनेकानेक ऐतिहासिक निर्णय किये हैं, जो हमारी विचारों की स्पष्टता को प्रतिलक्षित करते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की दृढ इच्छाशक्ति से जो सपना हमारे संस्थापकों ने भारत को विश्व गुरु बनाने का देखा था आज उस ओर हम कर्तव्यपरायणता के साथ अग्रसर हैं।
हमारी ध्येय यात्रा में केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली पूर्ण बहुमत की सरकार आते ही तीन तलाक कानून, नागरिकता संशोधन कानून, आपराधिक न्यायिक कानूनों में बदलाव के साथ ही पंडित दीनदयालजी जी के अंत्योदय पर आधारित गरीब- कल्याण की योजनाओं के द्वारा करोड़ों गरीब लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने का काम भी हुआ है। वास्तव में, केंद्र और राज्यों की हमारी सरकारें सुशासन के प्रति समर्पित रहती हैं क्योंकि यही लोकतंत्र की आवश्यकता है। भाजपा समाज के आखिरी छोर पर खड़े व्यक्ति के विकास की बात ही नहीं करती, बल्कि उसे चरितार्थ भी करती है। भाजपा द्वारा जनकल्याण के इस कार्य हेतु अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली हमारी केंद्र की सरकार ने अंत्योदय के सिद्धांत अनुरूप ही 50 करोड़ से अधिक लोगों के जनधन खाते खुलवाए। आयुष्मान, उज्ज्वला और आवास योजनाएं संचालित की गई। देश खुले में शौच से मुक्त हो गया, घर घर बिजली पहुंचाई। 10 करोड़ से अधिक के गैस कनेक्शन दिए। हर घर शुद्ध पेयजल पहुँचाया। यह कुछ प्रमुख कार्य है जो देश की पूर्ववर्ती सरकारों के 50 वर्षों के शासनकाल की प्राथमिकता होनी चाहिए थी, किन्तु वोट बैंक की राजनीति की वजह से किसी एक वर्ग विशेष की चिंता ही उनकी राजनीति की प्राथमिकता रही है।
आज भारत ही नहीं पूरा विश्व देख रहा है कि एक राजनीतिक दल और उसका नेतृत्व किस प्रकार अपने उन संकल्पों को पूरा करने में सफल सिद्ध हुआ है, जिन्हें पूरा करना कभी असंभव सा लगता था। अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ विश्व में एक बड़ी ताकत बनकर उभरे भारत ने अपने पुराने स्वाभिमान और आत्मवगौरव को भी वापस हासिल किया है। राष्ट्रीय संकट में जनकल्याण की कसौटी पर भी भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में भाजपा के नेतृत्व ने एक अनूठा उदाहरण विश्व के समक्ष प्रस्तुभत किया है। कोरोना संकट में दुनिया के अनेक देशों ने जहाँ अपने नागरिकों को अपने हाल पर छोड़ दिया, वहीं भारत में भाजपा की प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने हर नागरिक के जीवन को अमूल्य मानते हुए उनके लिए अनाज के साथ दवाओं और अन्य वस्तुओं को उपलब्ध कराया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने स्वदेशी वैक्सीन के आविष्कार में प्रेरक भूमिका तो निभाई ही, हर नागरिक के लिए उसे मुफ्त उपलब्ध कराने हेतु विश्व का सबसे बड़ा वैक्सिनेशन अभियान चला कर दुनिया से अपने सामर्थ्य का लोहा भी मनवा लिया। ‘‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” ही भाजपा का जीवन-मंत्र बन गया है।
समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की चिंता और उसके प्रति निष्ठा ने ही भाजपा को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनने का गौरव प्रदान किया है। अपनी 44 वर्षों की इस यात्रा में आज हमारी भाजपा भारतीय राजनीति के जिस शीर्ष पर पहुंची है, वो हमारी विचारधारा के प्रति एकनिष्ठ और समर्पित भाव से बढ़ते रहने के कारण ही संभव हुआ है। आमजन के जीवन में बदलाव लाकर उसे देश की मुख्य भूमिका में लाने में भाजपा के नेतृत्व ने अद्भुत सफलता पायी है, इस तथ्य को संसार के लगभग सभी राजनीतिक जानकार स्वीकारते हैं। अपने 45 वें वर्ष में प्रवेश कर रहे दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल ने चार दशक पूर्व जो सपने देखे, वह तो साकार हुए ही हैं, साथ ही स्वाधीनता के अमृत वर्ष में मोदी जी के नेतृत्व में भारत 2047 के लिए अपना दिशा-सूत्र बना चुका है, जिसको पूरा करने का दारोमदार भी भारतीय जनता पार्टी के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं के कंधों पर है। निश्चित ही भाजपा अपनी संकल्प शक्ति, निष्ठा और नियति से इसे पूरा करेगी तथा देश के भविष्य-निर्माण की प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभाते हुए संकल्प-सिद्धि की ओर अग्रसर रहेगी।
( *विनायक फीचर्स)*- *लेखक, मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष एवं खजुराहो लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं।****
मुंबई। सदगुरु रितेश्वर जी महाराज तीन दिवसीय यात्रा में वृंदावन से मुंबई पधारे और महानगर में उन्हें संजय शर्मा अमान ने रहेजा क्लासिक अंधेरी में आयोजित एक समारोह में आमंत्रित किया। उसी अवसर कई विशिष्ट लोगों ने उनसे भेंट की साथ ही सदगुरु ने गऊ भारत भारती स्मृति चिन्ह देकर युवा बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को सम्मानित किया। सदगुरु के दर्शन और आशीर्वाद पाकर निकेश स्वयं को भाग्यशाली मानते हैं।
रितेश्वर जी महाराज एक मोटिवेशनल स्पीकर हैं और देश विदेश में उनके भक्तों की बड़ी संख्या है। पीएम मोदी भी सदगुरू का आशीर्वाद ग्रहण कर चुके हैं।
आपको बता दें कि हाल ही में ग्लैमर एंड लाइफ स्टाइल अवॉर्ड अभिनेत्री महिमा चौधरी के हाथों और प्रीति झंगियानी के हाथों नेशनल इंपैक्ट अवार्ड 2024 बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को प्राप्त हुआ है। इस अवॉर्ड शो में निकेश जैन वीआईपी गेस्ट थे साथ ही उनकी कंपनी माधानी ग्रुप और पुष्पा गृह उद्योग तथा पुष्पम पापड़ इस शो का सहयोगी पार्टनर था।
रामकुमार पाल 64 फाउंडेशन, साक्षात इंटरटेनमेंट प्रस्तुत इस अवॉर्ड के आयोजक रामकुमार पाल और मुंबई रफ्तार चैनल के सीइओ शैलेश पटेल थे। वहीं आनंद दुबे (शिवसेना प्रवक्ता), और सुधाकर कांबले (नाशिक सेंट्रल जेल के सीनियर जेलर) मुख्य अतिथि रहे। इनके साथ ही एडवोकेट नेमीचंद शर्मा, दिनेश जैन, अमित जैन, सुनील चौबे, राजेंद्र यादव, अमीश मोदी, भोला तिवारी और सीमा मीणा (मॉडल एक्ट्रेस और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एंबेसडर) भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
आपको बता दें कि हाल ही में बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को तेरे नाम की अभिनेत्री भूमिका चावला ने तमस आईकॉनिक अवॉर्ड्स 2024 से सम्मानित किया था। वहीं निकेश को दिग्गज अभिनेता निर्माता निर्देशक धीरज कुमार, गदर 2 के एक्शन डायरेक्टर टीनू वर्मा और डिस्को डांसर गीत के गायक विजय बेनेडिक्ट एवं शो के ओर्गेनाइजर संजीव कुमार के हाथों बेस्ट बिजनेसमैन कैटेगिरी में राष्ट्रीय अचीवर अवार्ड 2024 से सम्मानित किया गया था। तो वहीं डॉ निकेश जैन माधानी रामायण धारावाहिक में सीता की भूमिका निभाने वाली दीपिका चिखलिया के हाथों दादासाहेब फाल्के इंडियन टेलीविजन अवार्ड 2024, पार्श्वगायक उदित नारायण के हाथों अखंड भारत गौरव अवार्ड 2024 और अभिनेता सोनू सूद के हाथों एशियन एक्सीलेंस अवार्ड 2024 से सम्मानित हुए हैं।
इसके साथ ही उन्हें सुप्रसिद्ध अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे, एसीपी संजय पाटिल के हाथों दादासाहेब फाल्के अवार्ड प्रस्तुत आईआईएफए अवार्ड 2023 प्राप्त हुआ है।
विदित हो कि कुछ माह पूर्व दिल्ली में डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी को वर्ल्ड पीस ऑफ यूनाइटेड नेशन यूनिवर्सिटी द्वारा प्रसिद्ध अभिनेत्री काजल अग्रवाल एवं भारतीय पहलवान नरसिंह पंचम यादव के हाथों ऑनरेरी डॉक्टरेट डिग्री एवं बिजनेस अवार्ड और विंदू दारा सिंह के हाथों आत्मनिर्भर एक्सीलेंस अवार्ड भी मिल चुका है।
इसके साथ ही 2022 में निकेश जैन मधानी को महाराष्ट्र राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के हाथों गऊ भारत भारती अवार्ड तथा कैबिनेट मंत्री परषोत्तम रूपाला (मत्स्य, दुग्ध व उद्योग मंत्री) के हाथों से गऊ भारत भारती सर्वोत्तम सम्मान 2023 एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुरस्कार 2023 प्राप्त हो चुके हैं। उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज गौरव पुरस्कार 2021 भी मिल चुका है। ब्राइट आउटडोर के सीएमडी योगेश लखानी ने अपने जन्मदिन पर निकेश जैन को बिज़नेस आइकॉनिक ब्राइट अवार्ड एवं ब्राइट आउटडोर बी.एस.सी. आईपीओ आने की खुशी में बिज़नेस अवार्ड 2023 से सम्मानित किया। निकेश को परफेक्ट वुमेन अचीवर अवॉर्ड, गोल्डन ह्यूमेनिटी अवॉर्ड भी मिल चुका है। वहीं आईपीएस कृष्ण प्रकाश नायर 2021 और 2022 में उन्हें अवॉर्ड देकर सम्मानित कर चुके हैं।
विदित हो कि डॉ निकेश जैन मधानी फाइनेंस एडवाइजर हैं और इनके कई बिजनेस हैं जैसे कि माधानी फाइनेंस, माधानी एंटरटेनमेंट एंड प्रोडक्शन, माधानी ट्रेडिंग कंपनी, माधानी न्यूज लाइव 24×7 और मधानी इंटरप्राइज इत्यादि। इसके साथ ही निकेश की माँ के नाम पुष्पा गृह उद्योग कंपनी और पुष्पम पापड़ कंपनी है। जल्द ही मधानी कंपनी की लिस्टिंग हो जायेगी।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी ने एक हिंदी कॉमेडी फिल्म प्रोड्यूस की है। इसके पहले उन्होंने 12 म्यूजिक एल्बम ओर शॉर्टफिल्म को माधानी एंटरटेनमेंट और प्रोडक्शन यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया है।
निकेश ताराचंद जैन मधानी ने लॉ बुक में इतिहास बनाया है। दरअसल उनके ऊपर 2014 में ईडी पीएमएलए का केस हो गया था। फिर उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ते हुए 2017 में सुप्रीम कोर्ट से धारा 45 ए रद्द हुआ जिससे कानून के किताब में डॉ निकेश जैन मधानी का नाम दर्ज हुआ और उनके ऊपर लगे धारा को हटाने में प्रसिद्ध वकील मुकुल रोहतगी ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। निकेश जैन की कानून लड़ाई में जाने माने वकील साजल यादव, वकील नेमीचंद शर्मा और वकील मनीष वोरा ने भी सहयोग किया।
डॉ. निकेश ताराचंद जैन मधानी सबसे सफल व्यवसायी रतन टाटा, मुकेश अंबानी, गौतम आदानी और लक्ष्मी मित्तल से प्रेरित हैं।
– संतोष साहू
मुंबई – सद्गुरु रितेश्वर जी का अद्भुत सत्संग का कार्यक्रम मुंबई अँधेरी के क्लासिक क्लब में गऊ भारत भारती द्वारा आयोजित किया गया। जिस का लाभ सैकड़ो लोगो ने लिया। अपने तीन दिवसीय मुंबई प्रवास के दौरान सद्गुरु रितेश्वर जी का यह अद्भुत सत्संग का कार्यक्रम गऊ भारत भारती के संपादक संजय शर्मा द्वारा संयोजित किया गया।
सहयोगी विशाल भगत , प्रकाश तिवारी मधुर , औरविजय पाल सिंह रहे।

