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सैल्यूट तिरंगा राष्ट्रवादी संगठन महाराष्ट्र प्रदेश कार्यक्रम का आयोजन महाराष्ट्र अध्यक्ष रवि चिकारा द्वारा सम्पन्न 

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मुख्य अतिथि डॉ राजेन्द्र फडके, समाजसेवी श्री कपिल स्वामी, सच्चिदानंद पोखरियाल और संगठन के संस्थापक राजेश झा रहे उपस्थित, सैल्यूट तिरंगा का टाइटल सॉन्ग भी लॉन्च

सैल्यूट तिरंगा राष्ट्रवादी संगठन महाराष्ट्र प्रदेश कार्यकारिणी का कार्यक्रम मुम्बई के कंट्री क्लब में आयोजित किया गया। जहां सैल्यूट तिरंगा का टाइटल सॉन्ग भी लॉन्च किया गया। संगठन के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रवि चिकारा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ राजेन्द्र फडके (संरक्षक एवं राष्ट्रीय संयोजक बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ) और संरक्षक व समाजसेवी श्री कपिल स्वामी थे। स्पेशल गेस्ट के रूप में सच्चिदानंद पोखरियाल (पूर्व मंत्री उत्तराखंड सरकार, राष्ट्रीय संगठन मंत्री) और सैल्यूट तिरंगा के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश झा उपस्थित रहे। नेशनल यूथ प्रेसिडेंट नवीन कुमार ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।

अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम की शुरुआत की गई। मेहमानों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। फिर सभी अतिथियों ने अपनी बातें सामने रखीं और सैल्यूट तिरंगा संगठन के मुख्य उद्देश्य और इसके द्वारा वर्षो से किए जा रहे कार्यो का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। महाराष्ट्र में संगठन के पद पर जिन्हें चयनित किया गया उन्हें अपॉइंटमेंट लेटर दिए गए।

सैल्यूट तिरंगा राष्ट्रवादी संगठन महाराष्ट्र प्रदेश की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश झा ने बताया कि सैल्यूट तिरंगा देश के सभी राज्यों में पिछले आठ वर्षों से राष्ट्रवाद जन जागरण की दिशा में कार्य रही है। संगठन मुख्य रूप से तिरंगा यात्रा, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पर्यावरण सुरक्षा, वृक्षारोपण, गरीब बच्चों की शिक्षा देने की दिशा में लागतार काम कर रहा है। भारत की एकता अंखडता को बरकरार रखने के लिए यह संगठन अपनी ओर से वर्षो से प्रयासरत है। राष्ट्रवादी संगठन सैल्यूट तिरंगा द्वारा कश्मीर से कन्या कुमारी तक तिरंगा यात्रा आयोजित की गयी।

सैल्यूट तिरंगा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश झा ने बताया कि जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर की डल झील में तिरंगा शिकारा प्रतियोगिता का आयोजन चर्चा का विषय रहा, जिसकी प्रशंसा संसद भवन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी की। तिरंगा यात्रा देश के 28 प्रांतों में राष्ट्रवाद के जन-जागरण के लिए निकाली गयी।

उन्होंने आगे कहा कि हमारी सेना के जवान जो भारत माता की सुरक्षा में शहीद हुए हैं, उन्हें याद करने का भी हम कार्यक्रम करते हैं और ऐसे शहीदों के घरवालों को कार्यक्रम में बुलाते हैं। यह संगठन हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई को आपस मे जोड़ने का काम करता है ताकि भारत विश्वगुरु बन जाए। हमने सैल्यूट तिरंगा का महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रवि चिकारा को बनाया है जो समाजसेवा के क्षेत्र में काम करते आए हैं और राष्ट्रवादी हैं। साथ ही महाराष्ट्र में हमने कार्यकारिणी का विस्तार किया है। हम गंगा आरती के साथ राष्ट्रवाद को जोड़ते हैं और वहां तिरंगा यात्रा करते हैं। हम मीडिया के बंधुओ को भी धन्यवाद कहते हैं।

कपिल स्वामी ने कहा कि सैल्यूट तिरंगा ने हजारों बच्चियों की भलाई का कार्य किया है। शिक्षा के क्षेत्र में वर्षो से यह संस्था काम कर रही है। तिरंगा रैली निकाल कर देश मे राष्ट्रवाद की भावना जागृत की है। कश्मीर की घाटियों में युवाओं के हाथों में पत्थर की जगह तिरंगा पकड़ाया है सैल्यूट तिरंगा ने। आज देश भर में और 18 से ज्यादा देशों में सैल्यूट तिरंगा से जुड़े लोग मौजूद हैं। भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में संस्था कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के अध्यक्ष राजेंद्र फडके ने कहा कि बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मैं काम कर रहा हूँ। राजेश झा ने समर्पण भाव से इस संगठन की स्थापना की है। कश्मीर में तिरंगा यात्रा निकाला। देश की महिलाओं को सक्षम करने की दिशा में इस संगठन ने बड़ा काम किया है। महाराष्ट्र में संगठन की जिम्मेदारी रवि चिकारा को सौंपी गई है, उन्हें शुभकामनाएं कि वह इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाएं।

रवि चिकारा ने कहा कि सैल्यूट तिरंगा संगठन का मुख्य उद्देश्य यह है कि देशवासियों के दिलों में राष्ट्रवादी और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा दिया जाए। शहीद सैनिकों के घर, परिवार और उनके बच्चों की शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना। गरीब छात्रों को निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था करना। बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान में महत्वपूर्ण योगदान देना। स्वच्छ और विकसित भारत बनाने में योगदान देना।
पर्यावरण की रक्षा करना और वृक्षारोपण मुहिम चलाना, उसमें भाग लेना। भारत के सभी राज्यों में गरीबों और आम लोगों के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही परियोजनाओं का लाभ पहुंचाना। किसानों और मजदूरों के हित के लिए काम करना।

संकट में ब्रिटिशकालीन ऐतिहासिक धर्मशालाएं

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दीपक नौगांई – विनायक फीचर्स

गुलामी के दौर में जब पहाड़ों में पक्की सड़कों का निर्माण नहीं हुआ था और यात्राएं पैदल ही की जाती थी तब पिथौरागढ़ जनपद के धारचुला से आगे सीमांत गाँव दातू की दानवीर जसुली देवी शौकयानी द्वारा दान दिए धन से हल्द्वानी से लेकर नेपाल, कैलाश मानसरोवर मार्ग और पश्चिम तिब्बत के तकलाकोट क्षेत्र तक 350 से अधिक धर्मशालाओं का निर्माण किया गया था। ये धर्मशालाएं उन मार्गों पर भी बनाई गई दी जहां से भोटिया व्यापारी तिब्बत से व्यापार हेतु आवागमन किया करते थे।

इन धर्मशालाओं का निर्माण अंग्रेजों द्वारा 1840 के आसपास किया गया था। जल स्रोतों के पास , नदी के किनारे तथा कच्चे पैदल मार्र्गों के किनारे ये धर्मशालाएं बनाई गई थी। इतिहासकारों के अनुसार हर दस से पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर इनका निर्माण किया गया। मतलब एक दिन में जितना पैदल चला जा सकता था, उतनी ही दूरी पर इन्हें बनाया गया। इन धर्मशालाओं का वर्णन 1870 मे अल्मोड़ा के तत्कालीन कमिश्नर शेरिंग के यात्रा वृतांतों में भी मिलता है।

लेखक शक्तिप्रसाद सकलानी की पुस्तक उत्तराखण्ड की विभूतियों के अनुसार दानवीर जसुली देवी शौकयानी का जन्म सीमांत कस्बे धारचुला से आगे दारमा घाटी के दातू गांव में 1805 में हुआ था। जसुली देवी शौका समुदाय से ताल्लुक रखती थी , इसलिए उसे शौकयानी कहा गया। जसुली का विवाह उसी गाँव के अमीर परिवार के युवक जंबू सिंह के साथ हुआ। यह परिवार तिब्बत के साथ व्यापार से जुड़ा था इसलिए इनके पास काफी धन दौलत थी। जसुली का एक बेटा हुआ पर अल्प आयु में ही उसका देहांत हो गया। कुछ साल बाद जंबू सिंह का भी निधन हो गया। जंबू सिंह ने मरने से पहले जसुली को खेत मे दबाए गए धन के बारे मे बताया।

पति की मृत्यु से जसुली देवी टूट गई थी । उसने निर्णय लिया कि यह अपार दौलत अब उसके किसी काम की नहीं, इसलिए सारी दौलत को नदी में बहा दिया जाए। जब वह कुछ लोगों के साथ मिलकर ऐसा कर रही थी , उसी समय अंग्रेज अफसर सर हेनरी रैमसे दातू गांव के दौरे पर थे। उन्होंने देखा कि एक महिला न्यूला नदी व धौलीगंगा के संगम पर पुरोहितों के साथ अनुष्ठान कर रुपये से भरे बोरे को पानी में बहा रही है। पता चला कि मृत पति के अंतिम संस्कार के बाद नदी में रुपये बहाकर परोपकार का अनुष्ठान कर रही है और उसका मानना है कि ऐसा करने से पति की आत्मा को शांति मिलेगी।

अंग्रेज अफसर जसुली देवी के पास गए और उसे ऐसा करने से रोका और समझाया कि इस धन दौलत का इस्तेमाल जनहित में किया जाए। पहले तो जसुली देवी ने आनाकानी की पर अंग्रेज अफसर के बहुत समझाने पर आखिरकार मान गई।

जसुली ने कैलाश मानसरोवर और तिब्बत मार्ग पर धर्मशालाओं के निर्माण की इच्छा जाहिर की। अंग्रेज अफसर ने ऐसा ही करने का वादा किया और 350 से अधिक धर्मशालाए बनवाई। इनमें चार से लेकर आठ कमरे होते थे। कमरों का आकार छोटा होता था लेकिन उनमेंं तीन से चार व्यक्ति आसानी से रह सकते थे। पत्थर से बनी इन धर्मशालाओं में लकड़ी व लोहे का इस्तेमाल नहीं किया गया था । कमरों में खिड़कियां नहीं है तथा दरवाजे भी नहीं होते थे।

1970 के उपरांत सीमांत तक पक्की सड़क बन जाने के बाद धर्मशालाएं उपेक्षित हुई और खंडहर में तब्दील होने लगी। कुछ सालों से दारमा घाटी की एक समिति इन धर्मशालाओं को खोजने और संरक्षित करने के प्रयासों में जुटी हुई हैं। समिति ने अब तक 130 धर्मशालाओं को खोजने में सफलता पाई है। कई धर्मशालाओं पर स्थानीय लोगों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। कुछ धर्मशालाओं में लोगों ने दुकानें खोल दी है। समिति को 25 धर्मशालाएं नेपाल के पाटना, बैतडी और उससे लगे क्षेत्रों में मिली है। तिब्बत सीमा पर भी एक धर्मशाला खोजी गई है। पिथौरागढ़ के सतगढ़ और नैनीताल जिले में अल्मोड़ा मार्ग पर खैरना से आगे काकड़ीघाट के पास स्थित धर्मशाला को समिति द्वारा सुधारा गया है। नैनीताल जनपद के भवाली नगर में मुख्य बाजार में स्थित जसुली देवी धर्मशाला को दो साल पहले निवर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष संजय वर्मा द्वारा राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान की मदद से म्युजियम का रुप दिया गया है।

हल्द्वानी से आगे नैनीताल मार्ग पर रानीबाग में चित्रशाला घाट के रास्ते पर गौला नदी के किनारे भी एक धर्मशाला है। रंड समिति ने उत्तराखण्ड सरकार से लुप्त होती इन धर्मशालाओं को पुरातत्व धरोहर घोषित करने की मांग की है ताकि इनकी सुरक्षा और संरक्षण हो सके जिससे आने वाली पीढ़ी भी इनके बारे मे जान सके। (विनायक फीचर्स)

गायक अमित कुमार करेंगे वृद्धाश्रम के लिए चैरिटी शो

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गायक अमित कुमार करेंगे वृद्धाश्रम के लिए चैरिटी शो
मुंबई (अनिल बेदाग) : प्रसिद्ध गायक अमित कुमार 2 जून को मुंबई बोरिवली वेस्ट के कोरा केंद्र में एक नेक काम के लिए मंच पर परफॉर्म करेंगे। पीपल्स आर्ट सेंटर के गोपकुमार पिल्लई द्वारा आयोजित इस चैरिटी इवेंट का उद्देश्य वज्रेश्वरी में एक वृद्धाश्रम के निर्माण के लिए धन जुटाना है।
गोपकुमार पिल्लई, जो पिछले चार दशकों से इवेंट्स और अवॉर्ड के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नाम हैं, ने इस पहल को बुजुर्गों की देखभाल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए शुरू किया है। उन्होंने इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए गायक अमित कुमार के साथ शो प्लान किया है।
यह कार्यक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अमित कुमार के संगीत उद्योग में 60 वर्षों की शानदार यात्रा के पूरा होने का जश्न भी मनाता है। इस अवसर पर अमित कुमार को सम्मानित किया जाएगा और वे अपने पिता के प्रसिद्ध गानों की प्रस्तुति देंगे।
दर्शक BookMyShow के माध्यम से टिकट खरीदकर इस नेक काम में अपना योगदान दे सकते हैं। टिकटों की चार श्रेणियां हैं: ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, और ₹4,000। टिकट बिक्री से प्राप्त सभी राशि सीधे वृद्धाश्रम के निर्माण में जाएगी, जो समाज में सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए संगीत और परोपकार की शक्ति को दर्शाता है।
इस यादगार संगीत और संवेदना भरी शाम का हिस्सा बनने के लिए, अपने कैलेंडर पर 2 जून को चिन्हित करें और हमारे साथ कोरा केंद्र में शामिल हों। टिकट बुकिंग और अधिक जानकारी के लिए, BookMyShow पर जाएं।

MPगौ संवर्धन बोर्ड के साथ भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के साथ बैठक

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मध्य प्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड के साथ भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य डॉ. गिरीश जयंतीलाल शाह, मैनेजिंग ट्रस्टी “समस्त महाजन” के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई – जुलाई में आयोजित होगा प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण – प्रतिनिधियों ने गौ संवर्धन और छुट्टा पशुओं के नियंत्रण कार्यक्रम का जायजा लिया – भीषण गर्मी मे पशुपक्षी राहत आदेश जारी हुआ

भोपाल। 26 मई 2024 :भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के सदस्य, डॉक्टर गिरीश जयंतीलाल शाह के प्रतिनिधियों ने मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग तथा मध्य प्रदेश गौसवर्धन बोर्ड के साथ बैठक की और मध्य प्रदेश राज्य सरकार किए जा रहे हो संवर्धन तथा छुट्टा पशुओं के नियंत्रण कार्यक्रम का जायजा लिया।

सरकार से यह भी अनुरोध किया कि भीषण गर्मी के दौरान जीव जंतुओं के लिए दाना पानी और कामकाजी पशुओं को राहत देने संबंधी सर्कुलर जारी करे। इस संबंध पशुपालन विभाग के निदेशक द्वारा कल 24 मई 2024 को सभी जनपदों में नियमानुसार दाना पानी और उनकी रहता व्यवस्था करने का निर्देश जारी कर दिया गया।

मीटिंग में शरीक हुए ने बताया कि भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड द्वारा विभिन्न राज्यों में गौ संवर्धन एवं संरक्षण की प्रगति के बारे जाकारी एकत्रित करने के लिए पत्र लिखा गया था,उसके संबंध में भी अनुरोध किया गया कि युक्त जवाब शीघ्र भेजा जाय। हालाकि विभाग ने बताया कि पत्र एक दो दिन मे जारी कर दिया जाएगा।

मध्य प्रदेश सरकार के पशु पालन अधिकारियों के साथ यह भी सुनिश्चित किया गया कि गौ संरक्षण संवर्धन के प्रगति पर जुलाई में एक राज्य स्तरीय एकदिवसीय गौ शाला प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा जो मध्य प्रदेश सरकार के साथ केंद्र सरकार के अधीन कार्यरत भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संस्था समस्त महाजन की साझेदारी रहेगी। इसमें से चुने हुए गौशाला प्रतिनिधियों को समस्त महाजन की पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि देशभर के राज्य सरकारों से पूछी गई रिपोर्ट नहीं मिलने से डॉक्टर साह द्वारा विशेष प्रतिनिधि के रूप में डॉक्टर आरबी चौधरी, केंद्रीय पशु पालन मंत्रालय के सलाहकार मित्तल खेतानी के सहकर्मी मंथन एवं भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के भोपाल से मानद जीव जंतु कल्याण प्रतिनिधि एवम राष्ट्रीय हिंदी दैनिक हमारा मैट्रो के संपादक अनोखेलाल द्विवेदी इस बैठक में शामिल थे।

इस मीटिंग मे मध्य प्रदेश सरकार से गौ संरक्षण संवर्धन की प्रगति प्राप्त करने, भीषण गर्मी में कामकाजी पशुओं को भोजन पानी और आराम देने के लिए राज्य सरकार द्वारा आदेश जारी कराने और गौशाला बनाने के लिए समस्त महाजन के द्वारा संचालित विशेष प्रशिक्षण पद्धति को मध्य प्रदेश के गौशाला प्रतिनिधियों के बीच में ले जाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मीटिंग की गई। मीटिंग मे यह निर्णय लिया गया कि जुलाई महीने में गौशाला प्रतिनिधि प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

ट्रेनिंग संबंधी निर्णय मध्य प्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड के सीईओ/मेंबर सेक्रेटरी डा बी एस शर्मा एवम डा प्रवीण शिंदे सहित डा गिरीश जयंतीलाल शाह के प्रतिनिधियों के साथ 24 मई,2024 को आखिरी बैठक का आयोजन किया गया जिसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम का फाइनल निर्णय लिया गया।

संजय लीला भंसाली की नजरों में अदाकारा सोनाक्षी सिन्हा अव्वल

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              भारतीय फिल्म जगत के चर्चित निर्देशक संजय लीला भंसाली ने ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर ‘हीरामंडी – द डायमंड बाज़ार’ की शानदार सफलता के बाद अदाकारा सोनाक्षी सिन्हा के अभिनय कला कौशल की तारीफ करते हुए सोनाक्षी को वैजयंतीमाला और श्रीदेवी की तरह अव्वल होने का दर्जा दिया है। सोनाक्षी सिन्हा को ‘फ़रीदान’ के चित्रण के लिए बहुत प्रशंसा मिली है, यह एक ऐसा किरदार है जो ‘हीरामंडी – द डायमंड बाज़ार’ के केंद्रीय कथानक को बुनता और आगे बढ़ाता है। फिल्म आलोचक, समीक्षक और दर्शक उनकी दोहरी भूमिका और उनकी रहस्यमय, दमदार स्क्रीन उपस्थिति से मंत्रमुग्ध हो गए हैं। उनकी अनूठी शैली और उनके प्रदर्शन में जो गहराई है, उसने फिल्म उद्योग में प्रतिभा के पावरहाउस के रूप में सोनाक्षी की स्थिति को मजबूत किया है। संजय लीला भंसाली कहते हैं “मैं सोनाक्षी की बेजोड़ स्टार पावर और व्यक्तित्व के कारण उनके साथ काम करना चाहता था। उनकी आंखों में, उनकी चाल में, उनकी संवाद अदायगी में कभी न मिटने वाली आग है। वह वास्तव में बॉलीवुड, भारतीय सिनेमा, मुख्यधारा की सर्वोत्कृष्ट स्टार हैं।”
प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

अथ चुनाव कथा

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अथ चुनाव कथा

विवेक रंजन श्रीवास्तव –

जब दुनिया के ज्यादातर देशो में में राज सत्ता, हिटलर शाही, और मिलट्री रूल का लगभग समापन हो रहा था तब सबका हित चाहने वाले पत्रकार ने भगवान से पूछा कि कि हे प्रभु इस लोकतंत्र में अब जनता जनार्दन के काम काज कैसे होंगे? आप तो न जाने कहां बैठे हैं! कौन आम जनता के दुख दर्द सुनेगा! तो भगवान ने कहा कि हे वत्स तुम सदैव सबका हित चिंतन करते हो अत: आज मैं तुम्हें लोकतंत्र की चुनाव कथा बताता हूं। लोकतंत्र में जो इस कथा को समझकर व्यवहार करेगा उसके सारे कष्ट दूर हो जायेंगे और वह सत्ता सुख भोगेगा। चुनाव लोकतंत्र की जरूरत है। देश! देश के भीतर राज्य, राज्यों के भीतर जिले, जिलों में जनपदें, जनपदों में गांव हर जगह माननीय जन प्रतिनिधियों की दरकार होती है, क्योंकि सरकार चलानी है। इतना ही नहीं स्कूल, कालेज, रिक्शा चालक संघ से लेकर बार एसोसियेशन तक तरह-तरह के छोटे बड़े संगठन, हर कहीं समय समय पर चुनाव होना लोकतंत्र की खासियत है। हम अपने बीच से ही अपना प्रतिनिधि चुनते हैं। फिर चुने गये नेता ही जनता के दुख दर्द सुनने के अधिकृत प्रतिनिधि बनते हैं। चुनानों की घोषणा से पहले वोटर लिस्टें नवीनीकृत की जाती हैं।इस बीच सत्ता धारी पार्टी अपनी पसंद के अधिकारी चुनिंदा पदों पर तैनात कर देते हैं, जिससे फिर से उनकी जीत पक्की लग सके। संभावित उम्मीदवार अपनी तैयारियों में जुट
जाते हैं, वे अपने कुर्ते में लगे दागो को मेल मिलाप, जनहितकारी दिखने वाले कामों के जरिये मिटाने के हर संभव प्रयास करते हैं। टिकिट बंटती है।

माया के खेल चल निकलते हैं, योग्यता के बायोडाटा बनते हैं। महिला, पुरुष, आदिवासी, दलित, सामान्य तरह तरह की छलनियो से हाईकमान द्वारा उम्मीदवारी छानी जाती है। जातियों और धर्म के समीकरण की बैसाखियो के सहारे हर पार्टी की अपनी उम्मीदवारी तय हो जाती है। उम्मीदवार घोषित होते ही कैंडीडेट का गुट खुशियां मनाता है। जिसे टिकिट नहीं मिल पाती वह

खेमा विरोध और भितरघात की तैयारियों में भिड़ जाता है।
प्रथमो अध्याय समाप्त!। बोलो लोकतंत्र की जय

चुनाव आयोग द्वारा चुनावों की घोषणा के साथ ही आदर्श आचरण संहिता प्रभावी हो जाती है। नेता आम जनता बन जाता है। यह प्रश्न पूछने पर कि जब बिना जन प्रतिनिधियों के ही आदर्श प्रशासन चल सकता है तो फिर नेताजी को चुनकर सर पर बैठाने की क्या जरूरत है, बनते काम बिगड़ जाते हैं, इसलिये ऐसा विचार मन में भी न लाना। चुनावी प्रक्रिया शुरू होती है। नेताजी, अपने पंडित जी द्वारा निर्धारित मुहूर्त पर अपने दल बल सहित नामांकन दाखिल करने के लिये खुली गाड़ी में सवार होकर पहुंचते हैं। खुद के ही भरे फार्म के सही होने पर खुद को ही संशय के चलते नामांकन फार्म के वकील साहब से जांचे परखे कई सैट जमा किये जाते हैं। विश्वसनीय डमी उम्मीदवार भी खड़े किये जाते हैं। पार्टी ख्यालयों से वादो के पुलिंदो के भारी भरकम घोषणा पत्र जनता की खुशहाली की तस्वीरो के साथ जारी होते हैं।
कैनवासिंग, उम्मीदवार की सफलता का महा मंत्र होता है। नुक्कड़ सभायें होती हैं। चाय पान के ठेलों पर चर्चा से माहौल बनता है। गुप्तचर एजेंसियां सत्ताधारी दल की जीत की संभावनाओं का गोपनीय आकलन करती हैं।

समाचार पत्रो में विज्ञापनो की बहार आ जाती है। निर्धारित चुनाव व्यय से वास्तविक चुनावी प्रचार की तुलना करें तो लगता है, मंहगाई है ही नही। इस बीच टीवी चैनलो में गर्मा गरम बहसें जारी रहती हैं। स्टार प्रचारकों की सभायें होती हैं। भीड़ जुटाई जाती है। रैलियां निकाली जाती हैं। अनेकता में एकता हिन्द की विशेषता के अनुरूप एक ही थोक विक्रेता के यहां से प्राय: सभी पार्टियों के बैनर, पोस्टर, टोपियां इत्यादि चुनाव प्रचार सामग्री बिकती दिखती है। कई फ्रीलांसर फालतू घूमते लडक़ों को पार्ट टाइम जाब मिल जाता है, उम्मीदवार मोहल्ले मोहल्ले में अपने कार्यालय खोल देता है। पुलिस, गुण्डों, देर रात आने जाने वाली गाडिय़ों की धर पकड़ शुरू कर देती है। जो नेता कभी मिलने वालो को घंटों इंतजार करवा कर भी नहीं मिलता था, खुद ही घर घर जाकर जन संपर्क करता नजर आता है। सरे आम, भरे दिन सबको हर किसी के द्वारा सुखद सपने दिखाये जाते हैं, प्रचार अभियान चल निकलता है।

इति द्वितीयो अध्याय! बोलो सब उम्मीदवारो की जय

धीरे-धीरे चुनाव प्रचार समाप्त होता है और, वोटिंग का दिन आ जाता है। उम्मीदवारों की धडक़ने बढऩे लगती हैं। वोटर एक दिन का राजा बन जाता है। घर परिवार में, गुप्त मशविरे होते हैं। कुछ को जिन्हें लोग वोट बैंक समझते हैं उन्हें फतवे जारी होते हैं। कुछ मोहल्लों में दारू, धोती, कम्बल, साड़ी वगैरह बांटने की गुप चुप प्रक्रिया रातों रात पूरी की जाती है। वोटिंग वाले दिन की तैयारी में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी जाती हैं । वोटर के घर से भले ही स्कूल, कालेज, अस्पताल, कोर्ट कचहरी दूर हो पर मतदान केंद्र आस पास ही बनाया जाता है। मुस्कराता हुआ वोटर गोपनीय तरीके से अपने मन की बात वोटिंग मशीन को बता आता है। शाम होते होते वोटिंग के आंकड़ों के आधार पर देश, दुनिया में सबसे बड़े लोकतंत्र होने का गौरव दोहराता है। किंबहुना थोड़ी बहुत झड़प, इक्का
दुक्का फायरिंग वगैरह के साथ शांति पूर्ण मतदान संपन्न हो जाता है। प्रशासन थोड़ी सी चैन की सांस लेता है। मतदान मशीनें सुरक्षा घेरे के बीच, सर्च लाइट की चौहद्दी में जमा हो जाती हैं। टी.वी. पर चुनाव अनुमानों की बाढ़ आ जाती है। हर उम्मीदवार जीत की उम्मीद के साथ सुस्ताने की मुद्रा में सावधान से विश्राम की स्थिति में आ जाता है।

तृतीयो अध्याय: समाप्तम! बोलो नेता जी की जय

समय किसी के लिये नही रुकता, अंततोगत्वा वोटो की गणना का दिन आ ही जाता है। जो कैंडीडेट उम्मीद से होते हैं वे और जिन्हें अंदाजा हो जाता है कि उन्हें हारना है वे भी काउंटिंग बूथ पर अपने प्रतिनिधि नियुक्त कर पहुंचा देते हैं। टीवी चैनल अपनी मोबाइल वैन लेकर काउंटिंग स्थल पर तैनात हो जाते हैं। परिणाम घोषित होते हैं। हारने वाले ई वी एम में धांधली के आरोप लगाकर अपना बचाव करते हैं, जीतने वाले जुलूस निकाल कर खुशियां मनाते हैं। जीतने वाले दल की सरकार बनती है। मंत्री चुने जाते हैं। शपथ ग्रहण होती है। जनता इस आशा में कि जैसे नेता जी के दिन बदले उनके भी बदलेंगे, इंतजार करती रह जाती है पर सत्ता के मद में चुने गये नेता जनता को भूल जाते हैं। जनता अगले चुनाव का इंतजार करती है। दूसरी पार्टी को जिताती है। पर जीतकर वे भी वैसे ही हो जाते हें। इस तरह लोकतंत्र की सरकारें चलती रहती हैं, जब तब थोड़ा बहुत काम काज, विकास वगैरह होता चलता है। जनता को इसी में खुश रहना उसकी मजबूरी है।

इति चतुर्थो अध्याय: समाप्तम्! बोलो सब सरकारों की जय।

पांचवे अध्याय कि कथा बड़ी रोचक, रोमांचक और शिक्षा प्रद है, सो सब जन हाथ जोडक़र ध्यान पूर्वक सुनें। एक नेता ने एक बार एक चुनाव में जनता से वादा किया कि वह चुनाव कथा करवाकर जनता के सारे दुख दूर कर देगा। जनता
देवता ने प्रसन्न होकर उसे ही अपना नेता चुन लिया। पर नेता राजधानी में ऐसा व्यस्त हो गया कि उसे जनता की, कथा की याद ही नहीं आई। फिर एक दिन जनता ने नेता से पूछा कि हे नेता!, तू मेरा सरताज बन गया है, हम तुझे हर आयोजन में मुख्य अतिथि बनाकर बुलाते हैं, तुझसे उद्घाटन और शिलान्यास करवाते हैं, तुझे गजहार पहनाते हैं, फिर तू हमसे किये वादे के अनुसार हमारे दुख दूर करने के लिये चुनाव कथा क्यों नही करवा रहा है, तो नेता ने जबाब दिया कि इस बार के चुनावों में जीत के लिये झुग्गी बस्ती में दारू बांटने बहुत सारा व्यय हो गया है, इसलिये मैं अगली पंचवर्षीय योजना पूरी होते ही चुनाव कथा का आयोजन करूंगा। भोली भाली जनता ने अगली बार भी नेता को विधिवत चुन लिया पर नेता ने फिर भी चुनाव कथा नहीं करवाई। इससे चुनाव देवता अप्रसन्न हो गये। जब नेता जी एक रात सो रहे थे तभी सुबह सुबह उनके ठिकानों पर छापा पड़ गया और उनके और उनके परिवार जनों पर मुकदमें कायम कर दिये गये, नेता जी की तमाम कोशिशों के बाद भी हाई कमान ने उनकी एक न सुनीऔर बेबसी में उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा। लम्बी कानूनी प्रक्रिया चली, नेता जी को जेल में डाल दिया गया। नेता जी की पत्नी एक दिन किसी पार्टी के दफ्तर से बाहर से निकल रही थी, वहां बड़ी भीड़-भाड़ थी, उसने लोगों से पूछा कि यहां क्या चल रहा है, लोगों ने बतलाया कि पार्टी की जीत की खुशी में यहां चुनाव कथा की जा रही है, वह वही बैठ गई उसने ध्यान पूर्वक पूरी कथा सुनी और श्रद्धा से प्रसाद ग्रहण किया। उसने मन ही मन निश्चय किया कि यदि उसके पति फिर से सत्ता में आयेंगे तो वह धूमधाम से चुनाव कथा करवायेंगे। इससे चुनाव देवता प्रसन्न हो गये और उन्होने जेल में आराम कर रहे नेता जी को स्वप्न में फिर से चुनाव लडऩे का आदेश दिया। नेता जी ने जेल से ही चुनाव लड़ा, उनके पुतले को सभाओं में घुमाकर जनता से वोट मांगे गये, वे चुनाव जीत गये। उन पर लगे सारे आरोप गलत सिद्ध हो गये वे फिर से सत्ता में आ गये। चुनाव देवता ने नेता जी की परीक्षा लेने की सोची, जेल से बाहर आये नेता जी के सम्मुख आम आदमी बनकर उनका रास्ता रोककर अपने मोहल्ले की खराब सडक़ सुधरवाने की गुहार लगाई, पर नेता जी ने चुनाव देवता को नही पहचाना वे सत्ता मद में चूर आम आदमी की अनसुनी करके आगे बढ़ गये। चुनाव देवता ने फिर से उन्हें श्राप दे दिया और नेता जी एक टर्म का सत्ता सुख भोगकर फिर जांच के घेरे में आ गये। भगवान ने कहा कि तब से यह क्रम चला आ रहा है, बहुत कम नेता जीत के बाद चुनाव कथा का स्मरण रखते हैं।

ज्यादातर बार बार श्रापित होकर जांच के घेरे में आ जाते हैं कष्ट भोगते हैं पर वे आम आदमी बने चुनाव देवता को नहीं पहचान पाते। चुनाव में जनता से किये वादों को न निभाने के कारण वे तरह तरह के कष्ट भोग रहे हैं। हे वत्स यदि नेता जनता के हितों को ध्यान रखे तो लोकतंत्र से बेहतर कोई शासन प्रणाली है ही नही, जिसमें हर आम आदमी नेता बनकर सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है।! अथ पंचमो अध्याय: !! चुनाव कथा समाप्त !! बोलो जनता जनार्दन की जय। (विनायक फीचर्स)

अमान खान, मंजरी मिश्रा अभिनीत और अमोल बोरकर का म्युज़िक वीडियो “दीवाने” हुआ लॉन्च

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जिगजैग प्रोडक्शन के अमोल बोरकर द्वारा निर्मित म्युज़िक वीडियो “दीवाने” को मुम्बई के गॉडफादर क्लब एंड लाउंज में भव्य रूप से लॉन्च किया गया। अमान खान और मंजरी मिश्रा के अभिनय से सजे इस म्यूजिकल वीडियो के निर्देशक रमेश राउत, डीओपी राजवीर शिंग हैं। सॉन्ग के कोरियोग्राफर अनिल वाडकर, एडिटर रंजन खाती हैं। अमान खान ने इस रोमांटिक गाने को अपनी मधुर आवाज दी है। विशाल करले ने इस गीत को संगीत से सजाया है। लाइन प्रोड्यूसर चमन ठाकुर, प्रोडक्शन डिज़ाइनर दत्ता पाटिल हैं।

अमोल बोरकर न केवल इस एल्बम के निर्माता हैं बल्कि वह गॉडफादर क्लब के पार्टनर भी हैं। अंधेरी मुम्बई में स्थित इस क्लब को सॉन्ग लांच के अवसर पर रीलांच किया गया। इस म्युज़िक वीडियो के लॉन्च पर बॉलीवुड के लिजेंड्री ऎक्टर शाहबाज खान सहित कई हस्तियां अतिथि के रूप में शामिल हुईं और सभी ने निर्माता अमोल बोरकर, एक्टर्स अमान खान और मंजरी मिश्रा को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

निर्माता अमोल बोरकर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैंने कई मराठी सॉन्ग प्रोड्यूस किये हैं, दीवाने मेरा पहला हिंदी गीत है। हमारी कोशिश है कि हम नए गायकों, संगीतकारों, कलाकारों को एक उचित प्लेटफार्म दें। इस गाने में अमान खान को लांच किया गया है जो सिंगर भी हैं और ऎक्टर भी। मंजरी के साथ उनकी केमिस्ट्री सॉन्ग में अच्छी लग रही है।

निर्देशक रमेश राउत ने बताया कि इस गाने की शूटिंग मनाली की वादियों में हुई है। माइनस 12 डिग्री तापमान में इसकी शूटिंग करना बहुत ही चुनौतियों भरा काम रहा मगर आज गाने का रिजल्ट देखकर खुशी होती है। अमान और मंजरी ने पूरी शिद्दत के साथ काम किया है और निर्माता अमोल बोरकर ने इसमें खुलकर पैसे खर्च किए हैं। इस वीडियो में एक कहानी के माध्यम से नरेशन दिया गया है। हीरो अपनी प्रेमिका से बोलता है कि जैसे तूने मुझे तड़पाया है तू भी वैसे ही तड़पेगी। यह सिर्फ एक गाना नहीं है बल्कि 6 मिनट की लिरिकल म्यूजिकल फ़िल्म है जिसमे एक स्टोरी भी है एक कॉन्सेप्ट भी। यह गीत हर टूटे दिल से कनेक्ट होगा।

गायक और अभिनेता अमान खान ने बताया कि यह उनका पहला सॉन्ग है। मैं लिजेंड्री ऎक्टर धर्मेंद्र से बहुत प्रभावित रहा हूँ। यह गीत सुनकर कुछ लोगों को धरम जी की फ़िल्म धरमवीर का गीत “हम बंजारों की बात” याद आ जाएगा। उस गीत से प्रेरित होकर मैंने यह गीत लिखा है। मंजरी के साथ काम करने का अनुभव बहुत अच्छा रहा।

बेहद खूबसूरत दिख रही अभिनेत्री मंजरी मिश्रा ने कहा कि दीवाने उनका दूसरा म्युज़िक वीडियो है। अमान खान ने इसे बहुत प्रभावी ढंग से गाया है और वीडियो में उनकी परफॉर्मेंस भी अच्छी है। माइन्स डिग्री में साड़ी पहनकर शूटिंग करना बड़ा चैलेंजिंग था लेकिन टीम वर्क की वजह से यह सम्भव हो पाया। मैंने इसमे एक टूरिस्ट की भूमिका निभाई है जबकि अमान खान गाइड के रोल में हैं।

58 करोड़ रुपये की खूबसूरत ड्रेस में उर्वशी रौतेला का लुक

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58 करोड़ रुपये की खूबसूरत ब्लैक एंड व्हाइट कस्टम ड्रेस में उर्वशी रौतेला का सनसनीखेज लुक
मुंबई (अनिल बेदाग) : इस साल अगर भारतीय मनोरंजन उद्योग से एक ऐसी अभिनेत्री को चुनना है, जो 77वें कान्स फेस्टिवल के रेड कार्पेट प्रीमियर में धमाकेदार प्रदर्शन करने और अपनी पूरी तरह से आकर्षक दिखने के मामले में पूरी तरह से सुसंगत रही है, तो वह वैश्विक आइकन उर्वशी रौतेला होंगी।
वह पहले दिन से ही पार्क के बाहर धूम्रपान कर रही है और अब तक, हम उसके लाखों लुक्स से आश्चर्यचकित हैं।  इतना ही नहीं, उन्होंने कई मौकों पर भारत को गौरवान्वित किया है।  प्रतिष्ठित मेरिल स्ट्रीप के सामने एक विशेष सम्मान जीतने से लेकर प्रमुख भारतीय और हॉलीवुड अभिनेत्रियों को पीछे छोड़ते हुए आधिकारिक तौर पर ‘क्वीन ऑफ़ कान्स’ अर्जित करने तक, उर्वशी रौतेला ने इस कथन को और अधिक मान्य किया है कि वह वास्तव में सबसे खूबसूरत लड़की हैं। इससे पहले हमने अलग-अलग कस्टम गाउन में उनकी प्राकृतिक सुंदरता और सुंदरता देखी थी। इस बार, हम उसे ग्लैमोडा के एक सम्मोहक काले और सफेद को-ऑर्ड पोशाक में देखकर मंत्रमुग्ध हो रहे हैं।  इस तथ्य को देखते हुए कि वह अपनी फिटनेस पर बहुत मेहनत करती है और उसका फिगर सबसे अविश्वसनीय है, यह पोशाक शानदार ढंग से फिट बैठती है जिससे उसके बोल्ड और सौम्य व्यक्तित्व में सही मसाला और ओम्फ जुड़ जाता है। हमें उसके बालों के साथ की गई कलाकृति बहुत पसंद है, जिसमें धारियाँ शानदार ढंग से दिखाई देती हैं और हमें यह भी पसंद है कि कैसे वह हीरे जड़ित झुमके और हल्के न्यूड-शेड लिपग्लॉस के साथ अपने अवतार की तारीफ करती है। इसे निश्चित रूप से ‘उस पल का नजारा’ माना गया जब वह नम्मोस कान्स के साथ महोत्सव में शामिल हुईं।  हमेशा की तरह, यह लुक भी उनके अन्य भारतीय समकालीनों के उत्साह से कहीं परे था और इसलिए, वह निश्चित रूप से इस बार भी स्टैंडिंग ओवेशन की हकदार हैं। पूरे लुक की कीमत 58 करोड़ रुपये है और इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि यह वास्तव में स्वप्न जैसा है।

चुनावी मुद्दे नहीं हैं भ्रष्टाचार और घोटाले* 

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चुनावी मुद्दे नहीं हैं भ्रष्टाचार और घोटाले*
(सुभाष आनंद – विनायक फीचर्स)
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में भ्रष्टाचार के आरोप के बाद अब जमानत पर जेल से बाहर आ गये हैं। भारतीय राजनीति में किसी नेता पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने की यह पहली घटना नहीं है।
यहां राजनेताओं पर हमेशा से भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं पर यह अलग बात है कि भ्रष्टाचार कभी भी चुनावी मुद्दा नहीं बनता। भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में जीप घोटाले से लेकर दिल्ली के शराब घोटाले तक घोटालों की लंबी फेहरिस्त है। राजनीतिक दल भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाते भी हैं पर आम जनता के बीच भ्रष्टाचार मुद्दा नहीं बन पाता है।
यदि हम भारतीय इतिहास पर पैनी दृष्टि दौड़ाएं तो राजनीतिक दल भ्रष्टाचार और घोटालों को चुनावी मुद्दा बनाते रहे हैं लेकिन 2024 के चुनाव में भ्रष्टाचार और घोटाले जनता के लिए आम मुद्दा नहीं बन सके। आज राजनीतिक पार्टियां भी मानती है कि केवल मुद्दों को लेकर चुनाव जीते नहीं जा सकते।
वर्ष 1977  में नागर वाला और मारुति लाइसेंस को लेकर मुद्दा बना था जिसने लोकसभा चुनाव में अपना प्रभाव दिखाया था । इमरजेंसी और आर्थिक भ्रष्टाचार भी इंदिरा गांधी के पतन का कारण बने । वर्ष 1989 में भ्रष्टाचार ने देश की राजनीति पर अपना गहरा प्रभाव छोड़ा और बोफोर्स  कांड को लेकर चंद्रशेखर ने देश का भ्रमण किया। राजीव गांधी से प्रधानमंत्री की कुर्सी  छीन ली गई, उसके पश्चात कई राजनीतिक घटनाएं हुई जिससे वोट की राजनीति भी प्रभावित हुई।
1987 में स्वीडन की तोप कंपनी होवित्जर से 155 एम एम तोपों की खरीद में 64 करोड रुपए की घूसखोरी के मामले में राजीव गांधी की काफी आलोचना हुई। 1989 के चुनाव में यह मुद्दा बना और इसके बाद हुए सभी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को घेरने की कोशिश की।
 1991 के हवाला कांड ने लालकृष्ण आडवाणी से लेकर एनडी तिवारी और आरिफ मोहम्मद से लेकर शरद यादव तक को कटहरे में खड़ा कर दिया।
चुनाव में यह मुद्दा प्रभावहीन रहा लेकिन नेताओं को इसका व्यक्तिगत खामियाजा भुगतना पड़ा। इस कांड के उजागर होने से कांग्रेस ने अपने बड़े नेताओं के टिकट काट दिए थे। जिनमें कमलनाथ, विद्याचरण शुक्ल और अरविंद नेताम जैसे लोग शामिल थे।
नरसिम्हा राव की सरकार ने घोटालों का नया कीर्तिमान ही स्थापित कर दिया था। हर्षद मेहता का शेयर घोटाला, झारखंड मुक्ति मोर्चा, सांसद रिश्वत कांड, लखु भाई रिश्वत कांड, यूरिया घोटाला और न जाने क्या-क्या नहीं हुआ। हजारों करोड़ों रुपए के चारा घोटाले के कारण भले ही लालू यादव को मुख्यमंत्री की कुर्सी छोडऩी पड़ी लेकिन यह मुद्दा बिहार और झारखंड तक ही सीमित रहा। (विनायक फीचर्स)

लायम ग्रुप ने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ाते कदम

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23 मई, 2024 – लायम ग्रुप उन उद्योगों का भरोसेमंद पार्टनर रहा है, जो लागत, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता पर अधिक ध्यान देते हैं। हाल ही में लायम ने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में रणनीति के साथ विस्तार करने की घोषणा की है। 17 वर्षों की शानदार विरासत के साथ यह कदम रखना नवाचार और विविधता को लेकर लायम की प्रतिबद्धता दर्शाती है। इस तरह अपने भागीदारों का ग्रोथ बढ़ाने में लायम की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी।

कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल लायम और उनके क्लाइंट के बीच एक खास करार है जिससे उत्पादन के सभी कार्य करने और बिना रुकावट उत्पादों की डिलीवरी सुनिश्चित करने का लक्ष्य पूरा होगा। लायम इस प्रक्रिया से जुड़ी खास जरूरतों और बाधाओं को समझता है इसलिए अपने ग्राहकों को सुव्यवस्थित उत्पादन समाधान देने में सफल रहेगा। इसके लिए इन-हाउस उत्पादन क्षमताएं बढ़ाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह मॉडल कंपनी के अंदर कंपनी के कांसेप्ट की मिसाल है। इसमें लायम उन संगठनों का भरोसेमंद भागीदार होगा जो अपनी खास जरूरतों के अनुसार उत्पादन का भरोसेमंद समाधान चाहते हैं।

लायम यह विस्तार अपने अत्याधुनिक धारवाड़ प्लांट के माध्यम से करेगा जहां वर्तमान में 100 से अधिक कुशल प्रोफेशनलों की टीम है। इस प्लांट में हल्के वाणिज्यिक वाहन (एलसीवी), मध्यम वाणिज्यिक वाहन (एमसीवी) और वाई1 बसें बनती हैं।

लायम ग्रुप के निदेशक श्री रोहित रमेश ने इस विस्तार के बारे में कहा, ‘‘आज की भारी प्रतिस्पर्धा में किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान की सफलता के लिए लागत कम करना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और ‘कम में अधिक’ करने की दूरदृष्टि रखनी होगी। कंट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल से यह सब संभव है। इस माध्यम से हम कंपनियों/ओईएम संगठनों के परिचालन कार्य संभाल लेते हैं ताकि वे कारोबार के रणनीतिक विकास के क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दें।’’

हमारे कंट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल में सबसे यूनिक यह है कि हम डिलिवरेबल्स क्या हैं इस पर ध्यान केंद्रित करते हैं ना कि डिलिवरेबल्स कैसे पूरा करें। कंट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में हम अपने ग्राहकों की लागत कम करने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और 100 प्रतिशत गुणवत्ता प्राप्त करने पर जोर देते हैं। हमारी सबस अलग पहचान यह है कि हेड काउंट के बजाय ब्रेन काउंट पर ध्यान देते हैं। लायम में हम सामने से समस्या का समाधान करते हैं। हम ने अपनी शुरुआत से ही बुद्धिमत्ता के साथ मानव संसाधन की आपूर्ति की है क्योंकि हम जानते हैं कि प्रतिभाशाली और सक्षम व्यक्ति ही हमारे ग्राहक की सबसे बड़ी पूंजी साबित होंगे। संक्षेप में कहें तो कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग हम जो भी काम करते हैं वह ब्रेन काउंट पर केंद्रित होता है और इस तरह हायर, ट्रेन और डिप्लॉय मॉडल पर काम करते हुए हम अपने ग्राहकों की संतुष्टि सुनिश्चित करते हैं।’’

लायम ग्रुप ने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल के साथ-साथ जॉब कॉन्ट्रैक्ट, स्टोर्स और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट जैसे अन्य कार्यों की शुरुआत कर दी है और वर्तमान में अशोक लीलैंड, एलएंडटी शिप बिल्डिंग, टाटा मार्काेपोलो, आईटीसी आदि को ये सेवाएं दे रहा है। लायम ग्रुप का यह कदम एक सुनहरे भविष्य की ओर है। यह उत्पादन में उत्कृष्टता के साथ प्रतिभा प्रबंधन कौशल का सही तालमेल करेगा। लायम के ग्राहक अपनी खास जरूरतें पूरा करने के लिए सुव्यवस्थित उत्पादन, कुशल संसाधन और अटूट विश्वसनीयता को लेकर आश्वस्त रहेंगे।

लायम ग्रुप का गठन 2007 में श्री जी.एस. रमेश ने किया जो उन सभी को अवसर देना चाहते थे जिनका बड़े उत्पादन संगठन से जुड़ने का सपना हो। इस ग्रुप में उद्योग जगत के सेवानिवृत्त प्रोफेशनल, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया ताकि एक यूनिक बिजनेस मॉडल के माध्यम से भागीदार संगठन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सफलता मिले। यह ग्रुप एचआर पर ध्यान केंद्रित करता है और भागीदार संगठनों को वांछित परिणाम देने में सफल रहा है।

लायम ग्रुप का परिचय:

लायम ग्रुप का गठन 2007 में श्री जी.एस. रमेश ने किया जो एक दूरदर्शी व्यक्ति हैं। चेन्नई के इस ग्रुप का सालाना कारोबार 300 करोड़ रुपये से अधिक है। यह अपने ग्राहकों का विश्वसनीय मैनेजमेंट सॉल्यूशन पार्टनर है। विभिन्न सेवाओं में विशेषज्ञता प्राप्त है जैसे मानव संसाधन समाधान, नियुक्ति, स्टाफिंग, कंट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग, प्रशिक्षण और व्यवसाय परामर्श आदि। लायम भारत और पूरी दुनिया के विभिन्न उद्योगों को सेवाएं देता है। अपने तीन विज़न सीक्यूपी (लागत, गुणवत्ता और उत्पादकता) के माध्यम से उद्योग जगत में आरओआई सुनिश्चित करते हुए अपनी साख बनाई है। यह कंपनी अपने कार्य और सेवाओं के लिए डी एंड बी और यूरोप और एशिया की कई अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से प्रमाणित है। आईएसओ 9001ः2015 प्रमाणित संगठन है और एनईईएम एजेंट, एनएपीएस टीपीए और सरकार से एएसडीसी भागीदार के रूप में मान्यता प्राप्त है।

लायम ग्रुप का मिशन ग्राहकों के लिए नई-नई सेवाएं सेवाएं इजाद कर प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे बना रहना है। ग्राहकों की बदलती जरूरतों, बाजार के रुझानों और तकनीकी प्रगति के आधार पर यह अपने मिशन में सफल रहा है। यह उत्पादन, ऑटोमोबाइल, तेल और औद्योगिक क्षेत्र, गैस, बीएफएसआई और संबद्ध क्षेत्र के अपने ग्राहकों का विश्वसनीय भागीदार बन गया है। लायम ने ग्राहकों के साथ मिल कर सफलता की कहानी लिखी है। वे शुरुआत से ही ग्रुप के साथ रहे हैं। कुछ खास ग्राहक हैं – महिंद्रा, टोयोटा, अशोक लीलैंड, मदरसन सुमी सिस्टम्स, एंड्योरेंस, टाटा पावर, टाटा मार्काेपोलो, हिताची, एमआरएफ, याजाकी, एलएंडटी, पीएसए, यामाहा म्यूजिक आदि।

लायम ग्रुप का मुख्यालय चेन्नई में है। पूरे भारत में कारोबार है। गुरुग्राम, पुणे और मुंबई में कार्यालय हैं। लायम का लक्ष्य आईटीआई और डिप्लोमा धारकों को प्रशिक्षण देकर या कौशल बढ़ाकर उनके लिए जॉब का अवसर सुनिश्चित करना है और इसमें यह सफल रहा है। लायम से प्राप्त स्किल सेट के बल पर आज हजारों युवा रोजगार योग्य बन गए हैं।