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चारधाम यात्रा में अव्यवस्था से परेशान आम आदमी

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पंकज शर्मा तरुण – विभूति फीचर्स

प्राय: यह बात भारतीय परिवेश में कही जाती रही है कि वृद्धावस्था में व्यक्ति को आध्यात्म से जुड़ जाना चाहिए तथा तीर्थ यात्रा पर निकल जाना चाहिए।पुरातन काल में जब आवागमन के साधन नहीं हुआ करते थे तब लोग तीर्थ यात्रा में घोड़े,गधे, बैल,भैंसे आदि की सवारी करते या पैदल यात्रा करते जिसमें कई महीनों का या सालों का समय लग जाता था। कई बुजुर्गों से तो यह भी सुना है कि तीर्थ यात्रा पर जाने वालों की विदाई यही सोच कर की जाती थी कि अब हो सकता है वे जीवित नहीं लौट सकेंगे,यदि लौट कर आ जाते थे तो वे उनका और अपना सौभाग्य समझते थे।

लेकिन वर्तमान आधुनिक युग की तीर्थ यात्रा की तस्वीर देखें तो काफी बदली हुई दिखाई देती है। आवागमन के साधन जल, थल, नभ तीनों रास्तों से हो जाने से यात्रा अत्यंत सुगम हो गई है।लोगों की आर्थिक स्थिति भी शनै:- शनै: सुदृढ़ हो गई है, जिसके चलते तीर्थ यात्रा में जाने के लिए सभी हिम्मत करने लगे हैं।मेरा स्वयं का अनुभव है कि हर व्यक्ति को पचास वर्ष की उम्र में यात्रा पर निकल ही जाना चाहिए। शारीरिक क्षमता इसके लिए सहायक होती है। खानपान के दूषित होने के कारण आज इंसानों को विभिन्न प्रकार के राजरोग हो जाते हैं जो कभी धनवानों को हुआ करते थे,मधुमेह और रक्तचाप जैसे रोग तो हर तीसरे इंसान में होने लगे हैं।

उत्तर दिशा में चारधाम की यात्रा जिसमें प्रमुख रूप से बद्रीनाथ धाम,केदारनाथ धाम, गंगोत्री तथा यमुनोत्री या जमनोत्री हैं जो कि हिमालय पर्वत की गोद में स्थित हैं। जहां पर पैदल, घोड़े या पालकी से चढ़ते हैं ,खास कर यमुनोत्री और केदारनाथ में तो काफी परिश्रम के पश्चात ही दर्शन हो पाते हैं। वहां स्थित बर्फ से ढंकी ऊंची- ऊंची चोटियां साक्षात शिव के दर्शनों का आभास करवाती हैं।

यहां मैं इस वर्ष लगी श्रद्धालुओं की उस ऐतिहासिक भीड़ के बारे में उल्लेख करना चाहता हूं जिसके चलते बीस पच्चीस किलो मीटर का जाम सड़कों पर लगा,कई निर्दोष तीर्थ यात्री अपनी जान देने को बाध्य हुए। जो यात्रा अभियान का संचालन करते हैं उनका कहना रहा कि इतनी भीड़ हमने अपने चालीस वर्ष के अनुभव में कभी नहीं देखी।इसके पीछे का कारण मैंने भी खोजने का प्रयास किया तो सर्व प्रथम यह पाया कि युवाओं का पर्यटन के प्रति और रील बनाने का अजीब आकर्षण या शौक। स्मार्ट मोबाइल के आगमन से फोटो ग्राफी,वीडियो ग्राफी आसान हो गई है। इंस्टाग्राम,यू ट्यूब और अन्य सोशल मीडिया पर अपने लाइक कमेंट बढ़ाने के अजीब जुनून ने भीड़ में अभिवृद्धि की है।

इन तथाकथित तीर्थ यात्रियों का आध्यात्मिक यात्रा से कोई लेना देना मुझे तो नजर नहीं आया।दूसरा कारण उत्तराखंड के प्रशासन की सीधी- सीधी लापरवाही। जिसके कारण जाम की भयावह स्थिति बनी। ऋषिकेश में चारधाम यात्रा करने वालों का पंजीयन किया जा रहा था, तो स्वाभाविक है कि प्रशासन को यह भी ज्ञात हो  रहा था कि कितने तीर्थ यात्री किस- किस प्रकार के व कितने वाहन से जाएंगे तो इनके द्वारा आवश्यकता से अधिक वाहनों को क्यों छोड़ा गया? यदि तीर्थ यात्रियों के समूह बना कर वाहनों को बारी- बारी से छोड़ते तो इतनी लंबी जाम की स्थिति से छुटकारा मिल सकता था। इस जाम से बुजुर्गों की सेहत खराब हुई तथा कई लोग मौत के मुंह में चले गए। बद्रीनाथ धाम में मंदिर परिसर में लिखा है कि यहां वी. आई. पी दर्शन नहीं करवाए जाते मगर खुले आम इसका उल्लंघन वहां की पुलिस करती दिखाई दी। शिकायत करने पर यात्रियों से अभद्रता की गई। इसी प्रकार लगभग सभी मंदिरों में फोटोग्राफी, वीडियो ग्राफी नहीं करने के निर्देश लिखे बोर्ड लगे थे मगर न तो यात्री मान रहे थे न कोई इन्हें रोकने वाला था।हम स्वयं सात घंटे की लंबी कतार में घंटों लगे रहे कई लोग कतार के मध्य घुसते रहे मगर कोई भी पुलिस वाला ड्यूटी नहीं कर रहा था सभी मंदिर के आसपास दिखाई दिए जो अपनी स्वार्थ सिद्धि में लिप्त थे।कांस्टेबल से लेकर एस डी ओ पी स्तर तक के पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

यदि प्रशासन की चुस्ती और अनुशासन होता तो निश्चित ही तीर्थ यात्रा आसान होती। आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि हर वस्तु का दाम निर्धारित दरों से दो से तीन गुना वसूला जा रहा था तथा नकली खाद्य पदार्थों को बेचा जा रहा था।

केदारनाथ में बिसलरी एवम अन्य चालू कंपनियों का मिनरल वाटर अस्सी रुपए प्रति बोतल बेचा जा रहा था। मिल्क पाउडर से बनी घटिया चाय तीस रुपए तक बेची जा रही थी। आलू का परांठा अस्सी रुपए में तीर्थ यात्रियों को खरीदना पड़ा। बाद में  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस भयावह स्थिति को स्वयं आकर संभालने का प्रयास तो किया मगर बिगड़े हालात सुधारने में काफी समय लग गया। बाद में प्रशासनिक अधिकारी अवश्य थोड़े सतर्क दिखाई दिए। (विभूति फीचर्स)

अभिनेता विंदू दारासिंह और बिजनेसमैन डॉ निकेश जैन माधानी ने किए भगवान महाकाल के दर्शन

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उज्जैन। मध्यप्रदेश राज्य की प्राचीन नगरी उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर रविवार को अभिनेता बिंदू दारासिंह और मुंबई के युवा बिजनेसमैन डॉ निकेश ताराचंद जैन माधानी ने भगवान महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किए। अभिनेता बिंदू और डॉ निकेश जैन अभिभूत होकर महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि जब भी अवसर मिले तो बाबा महाकाल के दर्शन के लिए लोगों को अवश्य आना चाहिए। यहां आकर पॉजिटिव एनर्जी का अनुभव होता है। उन्होंने नंदी हॉल से भगवान के दर्शन किए, उनके लिए पूजन-अर्चन पं. माधव दिलीप शर्मा ने करवाया। उनके साथ दर्शन के लिए इंदौर के पियूष दुबे, रविंद्र राणा और नेविल कवरना भी पहुंचे थे।

शिवजी की बारह ज्योतिर्लिंग में उज्जैन के महाकालेश्वर की प्रतिदिन भस्म आरती श्मशान की राख से की जाती है। यहां राजा विक्रमादित्य ने भी राज किया था।
आपको बता दें कि बिंदू सुप्रसिद्ध अभिनेता और पहलवान दारासिंह के सुपुत्र हैं और उन्होंने कई फिल्म और टीवी शो में अपने अभिनय से दर्शकों के बीच पहचान बनाई है।
तो वहीं डॉ निकेश जैन माधानी बहुत कम उम्र से ही बिजनेस में सक्रिय हैं। एक युवा उद्यमी के रूप में उन्हें अनगिनत अवार्ड प्राप्त हो चुके हैं साथ ही उन्हें कई पुरस्कार समारोह में चीफ गेस्ट के रूप में सेलिब्रिटियों के साथ आमंत्रित किया जाता है। उनकी कंपनी पुष्पा गृह उद्योग और माधानी फायनांस इंटरटेनमेंट प्रमुख कार्यक्रमों में पार्टनर की भूमिका निभाती है।

– संतोष साहू

Modi 3.0 में 72 मंत्री, इनमें से 33 नए चेहरे

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पीएम मोदी  ने रविवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. पीएम मोदी के अलावा 30 कैबिनेट मंत्री, 5 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 36 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली. पीएम मोदी की कैबिनेट में 33 नए चेहरों को मौका दिया गया है. इनमें से 11 गैर भाजपाई भी हैं. आज मोदी कैबिनेट की पहली बैठक सोमवार शाम 5 बजे होगी.

पीएम मोदी के अलावा 30 कैबिनेट मंत्री ने ली शपथ

1. राजनाथ सिंह 2. अमित शाह 3. नितिन रमेश गडकरी 4. निर्मला सीतारमण 5. डॉ. सुब्रमण्यम जयशंकर 6. जगत प्रकाश नड्डा 7. शिवराज सिंह चौहान 8. मनोहर लाल (खट्टर) 9. एचडी कुमार स्वामी 10. पीयूष वेदप्रकाश गोयल 11. धर्मेन्द्र प्रधान 12. जीतनराम मांझी 13. राजीव रंजन सिंह ललन सिंह 14. सर्वानंद सोनोवाल 15. डॉ.वीरेंद्र कुमार खटीक 16. के.राममोहन नायडू 17. प्रह्लाद जोशी 18. जुएल उरांव 19. गिरिराज सिंह 20. अश्वनी वैष्णव 21. ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया 22. भूपेंद्र यादव 23. गजेंद्र सिंह शेखावत 24. अन्नपूर्णा देवी 25. किरन रिजिजू 26. हरदीप सिंह पुरी 27. डॉ. मनसुख मांडविया 28. गंगापुरम किशन रेड्डी 29. चिराग पासवान 30. सीआर पाटिल.

5 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने ली शपथ

राव इंद्रजीत सिंह, डॉ. जितेंद्र सिंह,  अर्जुन राम मेघवाल,  प्रताप राव गनपत राव जाधव और जयंत चौधरी ने राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की शपथ ली.

36 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली

जितिन प्रसाद, श्रीपद नाइक, पंकज चौधरी, कृष्णपाल गुर्जर, रामदास अठावले, रामनाथ ठाकुर, नित्यानंद राय, अनुप्रिया पटेल, वो सोमन्ना, पी चंद्रशेखर, एसपी सिंह बघेल, शोभा करंदलाजे,  कीर्तिवर्धन सिंह, बीएल वर्मा, शांतनु ठाकुर,  सुरेश गोपी, एल मुरुगम , अजय टम्टा, बंडी संजय कुमार, कमलेश पासवान, भागीरथ चौधरी, सतीश दुबे, संजय सेठ, रवनीत बिट्टू, दुर्गादास उइके, रक्षा खडसे, सुकांत मजूमदार, सावित्री ठाकुर, तोखन साहू, राजभूषण निषाद, भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा, हर्ष मल्होत्रा,  निमूबेन बांभनिया, मुरलीधर मोहोल, जॉर्ज कुरियन, पबित्रा मार्गरिटा ने राज्य मंत्री पद की शपथ ली.

नरेंद्र मोदी 9 जून को तीसरी बार लेंगे PM पद की शपथ

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PM Third Term Oath: NDA संसदीय दल के नेता नरेंद्र मोदी रविवार शाम लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे.  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को मोदी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया. मुर्मू ने मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए मनोनीत किया. लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA ने 293 सीट पर जीत दर्ज की. जबकि बीजेपी ने अकेले 240 सीटों पर जीत हासिल की है. पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव, भूटान, नेपाल, मॉरीशस और सेशेल्स के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, शपथ ग्रहण समारोह के लिए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों की पांच कंपनी, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) कमांडो, ड्रोन और ‘स्नाइपर’ को तैनात किया गया है. विदेशी मेहमान राजधानी के लीला, ताज, आईटीसी मौर्या, क्लेरिजस और ओबेरॉय होटल में रुकेंगे. इसके चलते होटलों को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है.

पुलिस और एनएसजी के कमांडो रहेंगे तैनात

समारोह के दिन दिल्ली पुलिस के स्वाट और एनएसजी के कमांडो राष्ट्रपति भवन एवं विभिन्न अहम स्थानों के आसपास तैनात रहेंगे. अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने समारोह के मद्देनजर सुरक्षा योजना बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय और नई दिल्ली जिले में कई बैठकें की. शपथ ग्रहण राष्ट्रपति भवन के अंदर होना है, इसलिए परिसर के अंदर और बाहर तीन-स्तरीय सुरक्षा होगी. ‘बाहरी घेरे’ पर दिल्ली पुलिस के जवान तैनात रहेंगे, उसके बाद अर्धसैनिक बल के जवान और ‘भीतरी घेरे’ में राष्ट्रपति भवन की आंतरिक सुरक्षा के जवान तैनात रहेंगे.

जी-20 शिखर सम्मेलन की तरह होगी व्यवस्था

अधिकारी ने बताया, अर्धसैनिक बलों और दिल्ली सशस्त्र पुलिस (डीएपी) के जवानों की पांच कंपनी सहित लगभग 2500 पुलिस कर्मियों को कार्यक्रम स्थल के आसपास तैनात किए जाने की योजना बनाई गई है. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि गणमान्य व्यक्ति जिन मार्गों का इस्तेमाल करेंगे, उन पर ‘स्नाइपर’ और सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे और नई दिल्ली जिले में अहम स्थानों पर ड्रोन तैनात किए जाएंगे.  उन्होंने बताया कि सुरक्षा घेरा पिछले वर्ष हुए जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई व्यवस्था की तरह ही रहने की संभावना है.

अधिकारी ने बताया कि रविवार को दिल्ली के मध्य भाग की ओर जाने वाली कई सड़कें बंद की जा सकती हैं या सुबह से ही यातायात में बदलाव किया जा सकता है. राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर शनिवार से ही जांच बढ़ा दी जाएगी.

ये विदेशी नेता होंगे शामिल

  • श्रीलंका के राष्ट्रपति- रानिल विक्रमसिंघे
  • मालदीव के राष्ट्रपति- डॉ मोहम्मद मुइज्जू
  • सेशेल्स के उपराष्ट्रपति- अहमद अफीक
  • बांग्लादेश की प्रधानमंत्री- शेख हसीना
  • मॉरीशस के प्रधानमंत्री- प्रविंद कुमार जुगनुथ
  • नेपाल के प्रधानमंत्री- पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’
  • भूटान के प्रधानमंत्री- शेरिंग टोबगे

राष्ट्रपति मुर्मू ने नरेंद्र मोदी को खिलाया दही

राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘राष्ट्रपति ने प्राप्त विभिन्न समर्थन पत्रों के आधार पर पाया कि भाजपा के नेतृत्व वाला राजग गठबंधन नवगठित 18वीं लोकसभा में बहुमत प्राप्त करने तथा एक स्थिर सरकार बनाने की स्थिति में है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए श्री नरेन्द्र मोदी को भारत का प्रधानमंत्री मनोनीत किया जाता है.” विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रपति रविवार की शाम सात बजकर 15 मिनट पर राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी.

राष्ट्रपति मुर्मू ने मोदी को मनोनयन का पत्र सौंपा

मोदी ने शुक्रवार शाम यहां राष्ट्रपति भवन में मुर्मू से मुलाकात की. राष्ट्रपति मुर्मू ने मोदी को मनोनयन का पत्र सौंपा. भाजपा ने ‘एक्स’ पर मुर्मू और मोदी की तस्वीर के साथ एक पोस्ट में कहा, ”राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने राजग के नेता एवं मनोनीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दही खिलाकर केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार बनाने का आमंत्रण दिया. सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के सभी प्रमुख सहयोगी दल, तेदेपा, जद (यू), शिवसेना और एलजेपी(आर) को शपथ ग्रहण समारोह के दौरान सरकार में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा.

यह भी पढ़ें- मोदी 3.0 के शपथग्रहण में श्रीलंका के राष्ट्रपति से बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना तक, ये होंगे चीफ गेस्ट

बीजेपी महाराष्ट्र प्रदेश के उपाध्यक्ष मनोज सोलंकी ने धूमधाम से मनाया अपनी पत्नी का जन्मदिन

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मुंबई। जन्मदिन को सेलिब्रेट करना आम जीवन में बहुत महत्व रखता है। हर कोई चाहता है कि उसका जन्मदिन विशेष हो और अपने करीबी लोगों के साथ इस दिन को उत्सव का रूप दें।

अभी हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज सोलंकी ने अपनी पत्नी निमीषा सोलंकी का जन्मदिन मुंबई में बड़े धूमधाम के साथ मनाया। उस अवसर पर परिवारिक रिश्तेदार और मित्र श्रीमती सोलंकी को जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे और उपहार भेंट किए।
मनोज सोलंकी ने कहा कि इन दिनों बीजेपी कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव में दो तीन राज्यों को छोड़कर पूरे भारत में जीत का परचम लहराया है और एक बार फिर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। जिस दिन मोदी जी शपथ ग्रहण करेंगे उस दिन एक बार फिर जबरदस्त ढंग से उत्सव मनाएंगे जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता आमंत्रित रहेंगे।
राजनीतिक पार्टी में सक्रिय रूप से जुड़े मनोज सोलंकी बिल्डर और बिजनेसमैन हैं और एक सोशल वर्कर के रूप में कई सामाजिक कार्यों को अंजाम दे चुके हैं। इसके साथ वे भाजपा चित्रपट कामगार आघाड़ी और अखिल राष्ट्रीय सिने कलाकार व कामगार संघटन के भी महाराष्ट्र उपाध्यक्ष हैं।

उस्ताद कमल सबरी का एक दिल को छू लेने वाला गीत

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उस्ताद कमल सबरी का एक दिल को छू लेने वाला गीत दिल दा जानी के निर्माता हैं दूरदर्शी फैशन डिजाइनर अश्विनी परसाड

मुंबई। सारंगी के जाने-माने कलाकार कमल सबरी ने अपनी नवीनतम कृति “दिल दा जानी” का अनावरण किया है, जो एक मंत्रमुग्ध कर देने वाली संगीत यात्रा में दर्द और कविता का एक आकर्षक मिश्रण है। एक सार्वभौमिक संगीतकार के रूप में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए, कमल और उनकी पत्नी तरन्नुम सबरी ने सारंगी के लिए अपनी भावपूर्ण आवाज़ और महारत के साथ इसे लिखा और संगीतबद्ध किया है, जिससे एक मनमोहक अनुभव का निर्माण हुआ है। पुरस्कार विजेता “सजना में” 25 से अधिक एकल और सहयोगी सारंगी रिकॉर्डिंग के साथ, कमल सबरी सीमाओं को आगे बढ़ाते हुए संगीत शैलियों को फिर से परिभाषित करना जारी रखते हैं। सह-गायिका रुचिका चौहान के साथ मिलकर, “दिल दा जानी” सबरी के नवीनतम प्रयास को चिह्नित करता है, जिसे उद्योग की दिग्गज कंपनी ज़ी म्यूज़िक कंपनी द्वारा समर्थित किया गया है और दूरदर्शी डिजाइनर सुश्री अश्विनी परसाड द्वारा सह-निर्मित किया गया है। सारंगी संगीत को लोकप्रिय बनाने में साबरी के अग्रणी प्रयासों ने वैश्विक प्रशंसा प्राप्त की है, उनकी रचनाएँ सांस्कृतिक बाधाओं को पार करती हैं और दुनिया भर के दर्शकों को आकर्षित करती हैं। 2006 में भारत की ओर से ग्रैमी में प्रस्तुत “डांस ऑफ द डेजर्ट” की मंत्रमुग्ध कर देने वाली लय से लेकर “सारंगी फंक” और “सारंगी रिडिफाइंड” जैसे अभिनव मिश्रणों तक, सारंगी के जैज़, फ़ंक, फ़्लैमेंको, डेजर्ट डांस और अन्य के साथ साबरी ने दुनिया भर में प्रशंसा अर्जित की है। संगीत और संस्कृति में उनके योगदान के लिए पहचाने जाने वाले, कमल साबरी को कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें वर्ल्ड म्यूज़िक आर्टिस्ट ऑफ़ द ईयर 2023 अवार्ड, नैशविले म्यूज़िक सिटी अवार्ड, ग्लोबल म्यूज़िक अवार्ड्स लॉस एंजिल्स में गोल्ड मेडलिस्ट, GOPIO इंटरनेशनल ऑर्ग द्वारा प्रदर्शन कला में उत्कृष्ट उपलब्धि पुरस्कार शामिल हैं। यूएसए, न्यूयॉर्क के मेयर से सम्मान और ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में मदर टेरेसा विश्वविद्यालय से संगीत में मानद डॉक्टरेट की उपाधि। “दिल दा जानी” साबरी की कलात्मक प्रतिभा का उदाहरण है, जिसे द साड़ी और मिडनाइट कैयेटूर के आईएम और ग्रीन फैड द्वारा प्रायोजित किया गया है, जो द साड़ी और ग्रीन फैशन, आर्ट एंड डिज़ाइन म्यूज़ियम के अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय द्वारा प्रदर्शित संधारणीय फैशन और डिज़ाइन परियोजनाओं में अग्रणी हैं। “दिल दा जानी” की मार्मिक कथा दो प्रेमियों की भावनात्मक यात्रा का अनुसरण करती है, जो गलतफहमियों और प्रेम की परीक्षाओं से गुज़रते हुए संवेदनशीलता और गहराई के साथ चित्रित की गई है। अभिषेक सिंह द्वारा निर्देशित, विज़नरी फ़ैशन डिज़ाइनर अश्विनी पर्साड द्वारा निर्मित, सुशील पांडे और ज़ेक्यू पिक्चर्स प्रोडक्शन द्वारा निर्मित यह प्रोजेक्ट, “दिल दा जानी” वीडियो अपनी आकर्षक कहानी और बेहतरीन दृश्यों के साथ दर्शकों को लुभाने का वादा करता है। साबरी और चौहान की मधुर आवाज़ों के साथ सारंगी की उत्तेजक धुनों के साथ मिलकर जादू का अनुभव किया जा सकता है, जो प्रेम, लालसा और मुक्ति की कहानी बुनती है।

‘सब में राम शाश्वत श्रीराम’ महाराष्ट्र हिंदी साहित्य भारती, राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई विश्व विद्यालय का ओजपूर्ण कार्यक्रम

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मुंबई। हाल ही में मुंबई विद्यापीठ, एसएनडीटी कॉलेज, रेडियो क्लब में ‘सब में राम शाश्वत श्रीराम’ महाराष्ट्र हिंदी साहित्य भारती, राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई विश्व विद्यालय का ओजपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुआ।

प्रभु श्रीराम की अपरम्पार महिमा का गुणगान, पवित्र धार्मिक ग्रंथ रामायण से धर्मरत राम, तुलसीदास कृत रामचरित मानस, रामायण में नारी सशक्तिकरण को मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में पधारे विशिष्ठजनों द्वारा ओजस्वी वाणी के साथ प्रस्तुत किया गया। सुप्रसिद्ध गायिका सुरुचि मोहता ने अपनी सुमधुर स्वर में राम सीता की सुंदर गीत गाकर कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों को भाव विभोर कर दिया।
हिमाचल प्रदेश से पधारी प्रोफेसर सपना चंदेल ने कहा कि हिमाचल में पहाड़ी लोक गाथा के रूप में रामायण सुना जाता है। निरंतर शोध का विषय रहा है। पहाड़ी जीवन में रामायण और राम अभिन्न है और राम और उनका कुटुंब देव रूप में पूजे जाते हैं। कार्यक्रम में शशि पांडेय ने सुंदर कविता के साथ राम की स्तुति की। इस आयोजन में सनातन संस्कृति और राम के नाम को आगे रखा गया।
अंजुम बाराबंकी ने दशरथनंदन श्री राम पर शेर सुनाकर कार्यक्रम में शमां बांध दिया।
डॉ. महताब आलम ने राम का गुणगान करते हुए कुछ अल्फाज सुनाया और तालियां बटोरी। तो वहीं रविंद्र शुक्ल ने आव्हान गीत सुनाते हुए सभी वीर पुरुषों और भारतवर्ष का गुणगान गाया। कवि दीक्षित दनकौरी ने गजल पेश किया जो कि हास्यरस और व्यंग्यात्मक था।
बिहार की निहारिका छबि ने रामचंद्र की सुंदर चरित्र को अभिव्यक्त करते हुए कहा कि वे सर्वव्याप्त हैं। वहीं श्रद्धा पृथ्वीराज जिंदल ने भी मंच पर कविता पाठ किया।
आईपीएस कृष्ण प्रकाश और करुणाशंकर उपाध्याय ने गरिमापूर्ण मंच संचालन किया। बुद्धिनाथ मिश्र ने कई रस में सुंदर कविताओं का पाठ कर अतिथियों का मन मोह लिया।
विशिष्ट अतिथि शीतला प्रसाद दुबे ने समापन सत्र में अपनी बात रखते हुए कहा कि मुझे महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के प्रतिनिधि के रूप में आमंत्रित किया गया। मुंबई में अचार संहिता के कारण यह कार्यक्रम का ओज फीका रहा। लेकिन प्रभु श्रीराम के आशीर्वाद से देश के सभी दिग्गज साहित्यकारों की इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में उपस्थिति रही।
मुंबई की अपनी संस्कृति है, महाराष्ट्र सनातन राष्ट्र है साथ ही साहित्य प्रेमी राज्य भी है।
रविंद्र शुक्ल ने इस कार्यक्रम के सहयोगियों का आभार प्रकट किया और कहा कि हिन्दी साहित्य भारती का अवतरण साहित्य का सम्पूर्ण राष्ट्र में विजय पताका फहराने के लिए हुआ है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जो चाहेगा वही होगा। संघ मानवता के हित, सनातन संस्कृति को अमर रखने के लिए है।
राम भारत की आत्मा है। वे हमारे आदर्श हैं और मर्यादा का प्रतिरूप हैं। हम उनका अनुसरण करते हैं। भारत सबका मार्गदर्शन करेगा। भारत देश का दार्शनिक परंपरा सबको प्रभावित करेगा।
शाश्वंत गिरी महाराज ने अपना आशीर्वचन देते हुए कहा कि मनुष्य होना अपने आप में एक दायित्व है। मनुष्यता का आनंद लेना चाहिए। हम सदैव प्रबुद्ध रहना चाहते हैं, आनंदित रहना चाहते हैं। हमारे अंदर समाहित राम हैं। हमें राम में रमना चाहिए और मूल्यजीवी बनना चाहिए। कोई अकेला नहीं है लेकिन सभी अकेले हैं। हमें देखना है कि श्रृष्टि को कैसे सुरक्षित रखना है।
सनातन की रक्षा विश्व को बचाने के लिए करना है। सत्य, धर्म, नीति से अनुमोदित होना चाहिए यही हमारे मूल्य हैं जिसे हमें बचाकर रखना है। मूल्यजीवी बनकर हमें हानि लाभ की परवाह नहीं करना है, मूल्यों की बात आए वहां हमें लोभ से बचना चाहिए। धर्म और राष्ट्र की रक्षा में अपना सर्वोच्च न्यौछावर करना है। यही राम में उतरने के सूत्र है।
कार्यक्रम के अंत में नम्रता तिवारी तालुकदार ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति दीं।
इस तीन दिवसीय दिव्य कार्यक्रम में महामण्डलेश्वर स्वामी डॉ. शाश्वतानंद गिरि महाराज (सदस्य परामर्श मंडल, हिंदी साहित्य भारती), बी. आर. शंकरानंद (अखिल भारतीय संगठन मंत्री, भारतीय शिक्षण मंडल), डॉ. रवींद्र शुक्ल (अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, हिंदी साहित्य भारती और पूर्व शिक्षा मंत्री, उत्तरप्रदेश), डॉ. रवींद्र कुलकर्णी (कुलगुरु, मुंबई विश्वविद्यालय), डॉ. उज्ज्वला चक्रदेव (कुलगुरु, श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी महिला विश्वविद्यालय, मुंबई), मिलिंद परांडे, वीरेंद्र याज्ञिक, अखिलेन्द्र मिश्र (अभिनेता), आशुतोष राणा (अभिनेता), डॉ. सचिन गपाट, डॉ. अखिलेश गुमास्ता, डॉ. श्वेता दीप्ति (नेपाल), डॉ. विनोद मिश्र (अध्यक्ष हिंदी विभाग, त्रिपुरा विश्वविद्यालय), बालाजी (श्रीलंका), शरीन नाओमी (बांग्लादेश), जनरल बक्शी, प्रमोद शाह ‘नफीस’, प्रदीप किराडू, पंडित संजीव चिम्मलगी, केरल के राज्यपाल आरिफ मुहम्मद, मनोज मुंतसिर (गीतकार), डॉ. राजीव शर्मा, श्यामशंकर उपाध्याय, पुनीत चतुर्वेदी (अधिवक्ता), डॉ. राम अवतार शर्मा (अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय भारत), डॉ. दिनेश पाठक, अनुराग श्रीवास्तव (कला इतिहासकार), डॉ. आनंद प्रकाश त्रिपाठी, डॉ. मधुलता बारा, डॉ. गीता पांडेय, डॉ. राकेश दुबे, डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय, कुशल गोपालका, अर्जुन नारायण, डॉ. नीलम सक्सेना, डॉ. रेनू मिश्रा, डॉ. अपर्णा प्रधान, अनूप जालान, पूर्ण पारीख, अर्चन अर्चना जैन (राजनांदगांव, छत्तीसगढ़) सुनील जोशी (पुणे), डॉ. पूर्णिमा कुलकर्णी, अभिनेता सुनील लहरी, संदीप सोपारकर, शिवसागर (रामानंद सागर के प्रपौत्र), फणीन्द्र कुमार, डॉ. अपर्णा प्रधान, रितु भटनागर, विनीत कुमार (खादी ग्रामोद्योग), रवीन्द्र कुमार गोयल (वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय रेल), आशीष पानसे, निलेश ओती, डॉ. चंचल सरीन (पूर्व प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय), विष्णु तिवारी, डॉ. ख्याति खोडा (प्रोफेसर, वेलिंगटन कालेज, पुणे), डॉ. अरुण सज्जन (अध्यक्ष हिंदी साहित्य भारती, झारखंड), डॉ. सपना चंदेल (हिमाचल प्रदेश), डॉ. प्रेमलता देवी (गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय, गांधीनगर), नाजनीन बानू (आई.ए.एस.), कृष्ण प्रकाश (आई.पी.एस. अपर पुलिस महानिदेशक, महाराष्ट्र), जागृति नंदा, डॉ. निधि चौधरी (आई.एस.एस.), श्रीमती श्वेता सिंघल (आई.एस.एस., सचिव राज्यपाल, महाराष्ट्र), डॉ. रमा प्राचार्य (हंसराज कॉलेज, नई दिल्ली, अध्यक्ष हिंदी साहित्य भारती दिल्ली), डॉ. सुरुचि मोहता (प्रख्यात गायिका), डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र (गीतकार), दीक्षित दनकौरी (गजलकार), डॉ. शशि पांडेय (कवयित्री), निहारिका छबि (संयुक्त आयुक्त), विशिष्ट अतिथि श्रद्धा पृथ्वीराज जिंदल (संयुक्त प्रबंध निदेशक, जिंदल), विशिष्ट अतिथि डॉ. शीतला प्रसाद दुबे (कार्यकारी अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी), पद्मश्री डॉ. विष्णु पंड्या (उपाध्यक्ष हिंदी साहित्य भारती), डॉ. दर्शन पाण्डेय (प्रोफेसर, हिंदी विभाग, शिवाजी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय) मंच पर सुशोभित रहे और प्रभु राम एवं रामायण पर अपने विचार रखे, कविता पाठ किए और सुंदर मनभावन गीत गाये।

– संतोष साहू

धारावाहिक, शॉर्ट फिल्म, म्यूजिक वीडियो, विज्ञापन में काम कर चुकी है प्रियंका सिंह

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अभिनेत्री प्रियंका सिंह बलिया यूपी की रहने वाली है लेकिन इनका जन्म और शिक्षा दीक्षा गोरखपुर में हुआ है। पिछले कई सालों से वह मायानगरी मुम्बई में कार्य कर रही है। जल्द ही कन्नड़ और तेलगु भाषा में बनी इनकी फिल्म दक्षिण भारत में प्रदर्शित होगी। मैक्स प्लेयर पर इनकी शार्ट मूवी आएगी। शेमारू और अमेज़न प्राइम में इनकी वेबसीरीज आने वाली है। साथ ही म्यूजिक वीडियो में भी यह जल्द दिखायी देंगी। इससे पहले प्रियंका धारावाहिक, शार्ट फिल्म, म्यूजिक वीडियो, विज्ञापन में काम कर चुकी है। ‘क्राइम पेट्रोल’, ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’, ‘क्राइम स्टॉप’ में यह काम कर चुकी हैं। ऑल्ट बालाजी के शो ‘मेंटलहूड’ में भी इन्होंने काम किया है। एंकरिंग और निर्देशन का काम भी प्रियंका ने बखूबी किया है। प्रियंका ने अपने कैरियर की शुरुआत बतौर सहायक निर्देशक के रूप में किया है। आईपीएल के विज्ञापन का सहनिर्देशन प्रियंका ने किया है जिसमें भारतीय क्रिकेट इरफान पठान, मनप्रीत गोनी और प्रज्ञान ओझा ने काम किया। इन्हें डांस का भी बेहद शौक है। साथ ही रिडिंग, धार्मिक स्थलों में जाना, फिल्म देखना भी इन्हें अच्छा लगता है। नोरा फतेही के म्यूजिक वीडियो में उनके द्वारा किये डांस को प्रियंका सिंह ने बेहतरीन ढंग से कवर किया है। अभिनय की बारीकियों को सीखने और अपने अभिनय कौशल में सुधार हेतु इन्होंने बालाजी टेलीफिल्म्स में एक्टिंग में डिप्लोमा किया है। बचपन से प्रियंका का रुझान अभिनय और नृत्य में था स्कूल और कॉलेज में प्ले और डांस में हिस्सा भी लिया है लेकिन इन्हे निर्देशन में अधिक रुचि थी। निर्देशन का कार्य करते करते इन्हें कइयों ने सुझाव दिया कि आप अभिनय कर सकते हैं और इन्होंने कोशिश की और इनका काम सभी को पसंद आया और अभिनय जगत का यह हिस्सा बन गयी। प्रियंका कई अवार्ड से सम्मानित हो चुकी हैं जिसमें दादासाहेब फाल्के लाइफ स्टाइल आइकॉन अवार्ड, विंध्य गौरव अवार्ड और बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस का अवार्ड मिल चुका है। दुबई फैशन शो में लार्ड ऑफ ट्रेंड और श्रीराम कॉलेज और कॉमर्स की ओर से भी सम्मान प्राप्त हो चुका है।


अभिनेत्री काजोल और अभिनेता शाहिद कपूर से यह बहुत प्रभावित हैं। ‘जब वी मेट’ फिल्म इन्हें पसंद है और भविष्य में इस फिल्म में गीत जैसा बबली, बेबाक और बिंदास लड़की की भूमिका करना चाहती है। निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्में और उनका निर्देशन शैली इन्हें पसंद है साथ ही संजय लीला भंसाली, इम्तियाज अली, कारण जौहर निर्देशित फिल्मों की प्रशंसक है और उनके निर्देशन का अवलोकन कर सीखती है। प्रियंका की इच्छा है कि वह दिग्गज अभिनेता सलमान खान के साथ स्क्रीन शेयर करें। अभिनय के साथ वह समाज सेवा का कार्य भी बखूबी करती हैं कई एनजीओ के साथ वह सहभागिता से कार्य कर रही हैं। अभी ‘रोटी कपड़ा मकान’ एनजीओ के साथ जुड़ी हैं। प्रियंका सिंह का कहना है इस इंडस्ट्री में सबको कार्य मिलता है बस थोड़ा धैर्य और कड़ीमेहनत की आवश्यकता है। अपने जीवन के हर छोटे छोटे क्षण का आंनद लें। हार नहीं माने और खुश रहें। प्रियंका चाहती है कि हर महिला आत्मनिर्भर बने। किसी पर निर्भर ना रहे क्योंकि कोई जीवन भर सपोर्ट नहीं करता एक ना एक दिन आपको खुद की मदद करने को तैयार होना पड़ेगा तब शायद बहुत देर हो जाये, इसलिए अपने को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाओ। परिवार के साथ खुद की खुशी के लिए भी जियें। प्रियंका एक अभिनेत्री के रूप में चैलेंजिंग भूमिका निभाना चाहती है। अपने काम से एक अलग पहचान बनाना चाहती है।

प्लेटिनम ज्वेलरी में स्लीक चेन से लेकर बोल्ड रिस्टवियर और स्टेटमेंट रिंग्स शामिल

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मैन ऑफ प्लेटिनम द्वारा क्रिकेट के दिन आपके स्टाईल के लिए आपकी मार्गदर्शिका

मुंबई: क्रिकेट का नया सीज़न लेकन आ रहा है, नया जोश और जुनून! इस अवसर पर अपनी पसंदीदा टीम का उत्साह बढ़ाने के लिए अपना लुक लेटेस्ट मेन ऑफ प्लेटिनम कलेक्शन से स्टेटमेंट पीसेज़ द्वारा आकर्षक बनाएं। दुनिया का सबसे बहुमूल्य और दुर्लभ मैटल, प्लेटिनम पूरे विश्व में कुछ ही स्थानों पर पाया जाता है, जिसके कारण यह एक एक्सक्लुसिव विकल्प है। अपनी चमक और टिकाऊ होने के साथ यह हाई-एनर्जी स्टाईल के लिए परफेक्ट है।

स्टैंड में खड़े होकर टीम का उत्साह बढ़ाना हो या फिर दोस्तों के साथ मिलकर मैच देखना हो, या अपने नजदीकी स्पोर्ट्स बार में जाकर मैच की स्क्रीनिंग देखनी हो, प्लेटिनम ज्वेलरी हर अवसर पर आपके परिधान को ज्यादा उच्च और आकर्षक बना देती है। प्लेटिनम ज्वेलरी में स्लीक चेन से लेकर बोल्ड रिस्टवियर और स्टेटमेंट रिंग्स शामिल हैं, जो आपके लुक को आधुनिक शान-ओ-शौकत और सादगी प्रदान करते हैं।

मैन ऑफ प्लेटिनम का लेटेस्ट कलेक्शन नेकवियर, रिस्टवियर, और रिंग्स के विस्तृत विकल्प प्रदान करता है, जो मेंस ज्वेलरी के ग्लोबल ट्रेंड्स से प्रेरित है। 95 प्रतिशत शुद्ध प्लेटिनम से बना इस ज्वेलरी का हर डिज़ाईन विभिन्न आउटफिट्स के साथ अनेक तरीकों से पहना जा सकता है। प्लेटिनम के मौलिक गुणों के अनुरूप इस कलेक्शन में जटिल विस्तार, कटाव और अलंकरण के साथ बनी क्लीन और बोल्ड लाईंस तथा विशिष्ट प्रतीक, ठोस रूप में क्रेस्ट, और एयरोडायनामिक एलिमेंट्स हैं।

प्लेटिनम प्राकृतिक सफेद चमक के कारण किसी भी परिधान के लिए उत्तम है, जो सादगीपूर्ण लग्ज़री का प्रदर्शन करता है। मैच के दिन के लिए यह बहुत ही स्टाईलिश स्टेटमेंट होगा, जो सादगीपूर्ण स्टाईल के साथ क्रिकेट के जुनून को प्रतिबिंबित करेगा और अपनी तरह के इस खास मैटल की दुर्लभता एवं बहुमूल्यता का प्रदर्शन करेगा। मैन ऑफ प्लेटिनम का लेटेस्ट कलेक्शन देश में अग्रणी ज्वेलरी रिटेल स्टोर्स पर उपलब्ध होगा। नीचे कुछ स्टेटमेंट पीस दिए गए हैं, जो क्रिकेट के मौसम में अपनी पसंदीदा टीम का उत्साह बढ़ाते हुए आपको सबसे खास बना देंगे।

केदारनाथ भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में माने जाते हैं

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निशीथ सकलानी ‘निशंक’ – विभूति फीचर्स

हिमालय के तीर्थ हर दृष्टि से अलौकिक हैं। जिस प्रकार भारत का प्रत्येक व्यक्ति दार्शनिक नजरिया रखता है, ठीक उसी प्रकार हिमालय का प्रत्येक प्रस्तर भी अपने आप में एक तीर्थ कहलाता है। हिमालय का कोई भी स्थान ऐसा नहीं है, जो ईश्वर की महिमा न गाता हो। कहने का तात्पर्य यह है कि भारतीय तीर्थ ज्ञान और भक्ति की पृष्ठभूमि हैं, भाव और विचार की सिद्धभूमि हैं तथा अनेक शास्त्रों एवं पुराणों की भावभूमि होने के साथ-साथ ये तीर्थ भक्तजनों के लिए धर्मभूमि भी हैं। हिमालय के तीर्थस्थलों में बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, कैलाश मानसरोवर, अमरनाथ, बूढ़े अमरनाथ, आदिबदरी, देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, गोमुख, तुंगनाथ, त्रियुगी नारायण, ऊखीमठ, कालीमठ, मदमहेश्वर, रुद्रनाथ, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग, कल्पेश्वर, ज्योतिर्मठ, पांडुकेश्वर आदि जहां अपना एक विशिष्ट स्थान रखते हैं, वहीं मध्य हिमालय में स्थित भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री केदारनाथ भी अपने आप में एक सिद्ध पीठ है। समुद्र तल से लगभग 11 हजार 750 फीट की ऊंचाई पर स्थित असंख्य श्रद्धालुओं की आस्था व श्रद्धा के प्रतीक केदारनाथ भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में माने जाते हैं।

श्री केदारनाथ, जो कि हिम शिखर की गोद में स्थित होने के साथ-साथ मंदाकिनी के सुरम्य तट को भी सुशोभित कर रहे हैं और सघन वृक्ष जहां उसकी हरीतिमा को द्विगुणित करते हैं, वहीं यह तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों के लिए आकर्षण का एक विशेष केंद्रबिंदु हैं। कुल मिलाकर यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। मान्यता है कि सतयुग में उपमन्यु ने यहां भगवान शिव की आराधना की और द्वापर युग में पांडवों ने तपस्या की। धर्मशास्त्रों एवं पुराणों के अनुसार तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मदमहेश्वर, केदारनाथ, कल्पेश्वर और नेपाल स्थित पशुपतिनाथ, जिनको पंचकेदार के नाम से भी पुकारा जाता है। इन तमाम स्थानों पर भगवान शंकर का कोई न कोई अंग अपने अद्वितीय रूप में अवश्य विराजमान है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शंकर का तुंगनाथ में बाहु, रुद्रनाथ में मुख, मदमहेश्वर में नाभि, कल्पेश्वर में जटा, केदारनाथ में पृष्ठभाग (धड़) और पशुपतिनाथ (नेपाल) में सिर स्थित है। केदारनाथ, जो कि भगवान शिव की दिव्य भूमि है, यहां कोई मूर्ति न होकर अपितु स्वयं निर्मित एक त्रिकोण प्रस्तर प्रतिमा है। इसी स्थान पर शिवभक्त पूजा-अर्चना करते हैं। केदारनाथ मंदिर के निकट ही कुछ मनोरम तथा दिव्य स्थल हैं, जिनमें भृगुपंथ, क्षीरगंगा, वासुकिताल एवं भैरव शिला आदि प्रमुख हैं। यह स्थल अपनी अलौकिक छवि में पवित्रता के लिए चिरविख्यात हैं। मंदिर मंडप में ही उषा, अनिरुद्ध, पंचपांडव, श्रीकृष्ण तथा शिव-पार्वती की भव्य मूर्तियाँ हैं। मंदिर के समीप कई कुंड हैं। बारह परिक्रमा के निकट अमृत कुंड, ईशान कुंड, हंस कुंड, रेतम कुंड आदि दर्शनीय स्थान हैं। इसमें दो राय नहीं कि धर्म एवं सौंदर्य दोनों ही दृष्टियों से यह तीर्थ वंदनीय है। श्री केदारनाथ मंदिर के विषय में कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडवों ने कराया तथा बाद में इसका जीर्णोद्धार आदि जगद्गुरु शंकराचार्य ने कराया था। इसीलिए हिम से ढंके इस स्थान पर केदारनाथ मंदिर के समीप ही आदि शंकराचार्य का समाधिस्थल बनाया गया है।

केदारनाथ मंदिर में भगवान शिव के प्रतीक रूप में विराजमान त्रिकोण प्रस्तर प्रतिमा के संदर्भ में शिव पुराण के अनुसार कथा है कि जब महाभारत युद्ध के पश्चात पांडव अपने कुल परिवार और गोत्र के बंधु-बांधवों के वध के पाप का प्रायश्चित करने के लिए भगवान वेद व्यास के कहने से हिमालय पर तप करने आये तो गोत्र हत्या के दोषी होने के कारण भगवान शिव ने उन्हें दर्शन नहीं देना चाहा। पांडवों ने भी भगवान शिव के प्रति अपनी दर्शन की इच्छा को नहीं छोड़ा। शिव केदार भूमि पर भैंसे के रूप में अन्य भैंसों के बीच मिलकर हरी दूब चरने लगे, लेकिन सहदेव ने शिव को पहचान लिया। भीम ने अपनी दोनों जंघाओं से भैंसों के आने का रास्ता रोक दिया और केवल टाँगों के नीचे से ही जाने का रास्ता छोड़ा। शिव विवश होकर वहीं भूमि में धँसने लगे। भीम ने उन्हें पृथ्वी में अद्र्ध समाया हुआ देखकर बीच में ही पकड़ लिया। इस तरह पांडवों को सिर्फ उनकी पीठ के ही दर्शन हो सके। वही पीठ आज शिला के रूप में मंदिर में स्थापित है और अगला धड़, जो पृथ्वी में समा गया था, वह नेपाल में उदय हुआ, जो पशुपति के नाम से प्रसिद्ध है। केदारनाथ वास्तव में भगवान शंकर के अदृश्य रूप सदाशिव का मंदिर है। शिव के अन्य अंग जहाँ-जहाँ प्रकट हुए, वे केदार कहलाये, लेकिन यह समस्त केदार तीर्थों में श्रेष्ठ और प्रथम केदार के नाम से विख्यात है। केदार मंडल में अनेक तीर्थ सैकड़ों शिवलिंग व सुंदर तथा मीठे पानी की पवित्र धाराएं हैं। मंदिर के केंद्र में श्री केदारनाथ की स्वयंभू त्रिकोण प्रस्तर प्रतिमा है। उसी में भैंसे के पिछले धड़ की आकृति मालूम होती है। केदारनाथ का यह मंदिर शिल्प का अनूठा उदाहरण है। मंदिर भूरे रंग के विशाल शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया है। मंदिर के ठीक सामने नंदी की मूर्ति मंदिर के सौंदर्य को द्विगुणित कर देती है। मंदिर के सामने जगमोहन नामक स्थान पर द्रौपदी सहित पाँचों पांडवों की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं। द्वार के दोनों ओर द्वारपाल हैं। श्री केदारनाथ भगवान शंकर की श्रृंगार मूर्ति की सुंदरता को द्विगुणित कर रही है। मंदिर के भवन में राम-लक्ष्मण, सीता, नंदीश्वर तथा गरूड़ की भव्य तथा सुंदर प्रतिमाएँ भक्तों को भक्ति का संदेश देती प्रतीत होती हैं।

मंदाकिनी, सरस्वती, क्षीरगंगा, स्वर्णद्वारी और महोदधि पाँच नदियों का संगम केदारनाथ मंदिर को अलौकिक छटा प्रदान करता है। इसीलिए संगम का स्थान संगम महादेव कहलाता है। मंदिर की परिक्रमा में स्थित अमृत कुंड, ईशान कुंड, हंस कुंड और उदय कुंड हैं। इनमें आचमन तथा तर्पण का बड़ा महत्व है। केदारनाथ के बायें भाग में इंद्र पर्वत है। यहाँ इंद्र ने तप किया था। यहाँ भी शिवलिंग है। मंदिर से आधा किलोमीटर की दूरी पर भैरव शिला मंदिर हैं, जहाँ केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने व बंद होने के दिन ही पूजा होती है। भगवान केदारनाथ के कपाट शीतकाल में बंद कर दिये जाते हैं तथा वैशाख मास के आने पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ छह माह तक खुले रहते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण में लिखा है कि सतयुग में एक राजा ने यहाँ तपस्या की थी, इसलिए यह क्षेत्र श्री केदारनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वास्तव में यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण होने के साथ-साथ सतयुगीन साधकों की साधना भूमि, भगवान शिव की आराधना भूमि, पांडवों की तपोभूमि तथा कवियों की कविताओं की भावभूमि के रूप में सदियों से हमारे अंत:करण में ईश्वर की उपस्थिति का आभास दिलाती प्रतीत होती है। (विभूति फीचर्स)