राजधानी दिल्ली इनदिनों सनातन आस्था और भक्ति के भाव में डूबी हुई है। राष्ट्रीय राजधानी में चल रही ऐतिहासिक धर्म विजय यात्रा 2025 के अंतर्गत श्रृंगेरी शंकराचार्य श्री श्री विधुशेखरा भारती महास्वामीजी ने संवैधानिक पदाधिकारियों, वरिष्ठ नौकरशाहों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को संबोधित किया। अपने उद्बोधन में जगद्गुरू ने गौ संरक्षण को मात्र परंपरा नहीं, बल्कि मानवता के उत्थान का माध्यम और सनातन धर्म का अविचल हिस्सा बताया।
माँ और गौ माता का संबंध
जगद्गुरु ने आदि शंकराचार्य की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि माता शब्द गौ के लिए इसलिए प्रयुक्त होता है क्योंकि वह पोषण का सर्वोच्च प्रतीक है। देवी देवताओं और गौ को ही माता के रूप में संबोधित किया जाता है, जो इस विशेष संबंध को दर्शाता है। जगद्गुरू ने हजारों वर्षों से कृषि और मानव जीवन में पशुधन के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृषि की नींव हमेशा से पशुधन पर टिकी रही है।
कृषि और मानव अस्तित्व की रीढ़
शंकराचार्य जी ने मवेशियों के ऐतिहासिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हज़ारों वर्षों से वे कृषि और मानव अस्तित्व की रीढ़ रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि मानवता को मिलने वाला पोषण मुख्य रूप से मवेशियों से ही आता रहा है। उन्होंने यह भी आगाह किया कि पिछले पाँच दशकों में खाद्य उत्पादन और कृषि में देखे गए बदलावों ने मानव अस्तित्व को प्रभावित किया है। आचार्य ने मनुष्यों से इन जानवरों के प्रति उनके नैतिक दायित्व की ओर लौटने का आग्रह किया।








