Home Gau Samachar मंगला पशु बीमा योजना: गाय, भैंस सहित इन पशुओं का बीमा शुरू

मंगला पशु बीमा योजना: गाय, भैंस सहित इन पशुओं का बीमा शुरू

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किसान इन जगहों पर करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन और पा सकते हैं बीमा लाभ, जानें पूरी जानकारी 

राज्य सरकार ने पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2025–26 की बजट घोषणा के तहत मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना में गाय, भैंस, भेड़, बकरी और ऊंट जैसे पशुओं का निःशुल्क बीमा शुरू कर दिया गया है। सरकार के निर्देशानुसार पशुओं के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है, जिसमें पशुपालक मोबाइल ऐप या पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत के नेतृत्व में इस योजना को तेजी से लागू किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि पशुपालकों का पशुधन उनके लिए आजीविका का प्रमुख आधार है और आकस्मिक रूप से पशु हानि होने पर परिवार आर्थिक संकट में घिर जाता है। ऐसे में यह बीमा योजना उन्हें बड़ी राहत प्रदान करेगी।

क्या है मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना

पशुपालकों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में बजट घोषणा (बिंदु संख्या 132) के तहत मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना शुरू की। इसके तहत राज्य में 5 लाख दुधारू गाय, 5 लाख भैंस, 5 लाख भेड़, 5 लाख बकरी, 1 लाख ऊंट का निःशुल्क बीमा करवाने की योजना है। इस योजना पर सरकार कुल 400 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बीमा कवरेज से पशुपालकों को पशुओं की आकस्मिक मृत्यु होने पर आर्थिक सहायता मिलेगी जिससे उनकी आजीविका पर अचानक आने वाले संकट से बचाव होगा।

मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना में बीमा कराने पर क्या मिलेगा लाभ

  • पशुपालकों के अमूल्य पशुधन का जोखिम कवरेज मिलेगा।
  • दुर्घटना या बीमारी से पशु की मृत्यु पर आर्थिक सहायता प्राप्त होगी।
  • गरीब व मध्यम वर्ग के पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
  • बीमा पूरी तरह निःशुल्क है, इसका कोई प्रीमियम पशुपालकों को नहीं देना होगा।

एक जनाधार कार्ड पर कितने पशुओं का कराया जा सकता है बीमा

मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना में इस बार पशुपालकों को एक जनाधार कार्ड पर अधिकतम 2 दुधारू गाय या 2 दुधारू भैंस, 10 बकरियां, 10 भेड़ें, 10 ऊंट का बीमा कराने की अनुमति दी गई है। जिलेवार लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं। उदाहरण के लिए एक जिले में 12,000 दुधारू गाय, 14,200 भैंस, 16,000 भेड़, 11,000 बकरियां और 400 ऊंट का लक्ष्य रखा गया है।

योजना के तहत कैसे तय होगी पशु बीमा की कीमत

राजस्थान सरकार ने बीमा राशि निर्धारित करने के लिए पशु श्रेणी के अनुसार अलग-अलग मानक तय किए हैं, जो इस प्रकार से हैं:

क्रमांक पशु का प्रकार बीमा हेतु मूल्य निर्धारण मानक
1 दुधारू गाय प्रति लीटर दूध उत्पादन के आधार पर 3000 रुपए प्रति लीटर प्रतिदिन, अधिकतम 40,000 रुपए
2 दुधारू भैंस 4000 रुपए प्रति लीटर प्रतिदिन के आधार पर, अधिकतम 40,000 रुपए
3 बकरी (मादा) अधिकतम 4000 रुपए प्रति पशु
4 भेड़ (मादा) अधिकतम 4000 रुपए प्रति पशु
5 ऊंट अधिकतम 40,000 रुपए प्रति पशु

ध्यान रहे कीमत निर्धारण पर किसी भी विवाद की स्थिति में पशु चिकित्सक का निर्णय ही अंतिम माना जाएगा।

योजना के तहत पशुपालक किसान कहां और कैसे कराएं रजिस्ट्रेशन

राज्य सरकार ने पशुपालकों की सुविधा के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी है। इच्छुक पशुपालक अपने जनाधार कार्ड के माध्यम से मोबाइल ऐप मंगला पशु बीमा योजना 25-26 या पोर्टल mmpby2526.rajasthan.gov.in पर जाकर स्वयं आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा जिन पशुपालकों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, वे ई-मित्र कियोस्क के माध्यम से भी आवेदन करवा सकते हैं। पशुपालन विभाग के अनुसार रजिस्ट्रेशन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर स्वीकार किए जाएंगे और लक्ष्य पूरा होते ही पोर्टल स्वतः बंद हो जाएगा।

गांवों में विशेष बीमा शिविर का किया जाएगा आयोजन

पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील घीया ने बताया कि इस बार रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद बीमा एजेंट और पशु चिकित्सक संयुक्त रूप से गांवों में विशेष शिविर आयोजित करेंगे। एक दिसंबर से जिले के विभिन्न राजस्व ग्रामों में बीमा शिविर शुरू होंगे, जहां पशुपालक मौके पर भी रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे शीघ्र अपने पशुओं का पंजीकरण करवाकर इस योजना का लाभ लें, क्योंकि लक्ष्य पूरा होने पर पोर्टल बंद हो जाएगा।

योजना से लाखों पशुपालक परिवारों को मिलेगी राहत

राजस्थान सरकार की यह योजना उन लाखों पशुपालक परिवारों के लिए राहत लेकर आई है जो पशुधन पर ही अपनी आजीविका निर्भर रखते हैं। रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं और सरकार लगातार गांवों तक इस योजना की जानकारी पहुंचा रही है। पशुपालनों से अपील है कि निर्धारित लक्ष्य पूरा होने से पहले अपने पशुओं का बीमा अवश्य करा लें, ताकि किसी भी आकस्मिक नुकसान की स्थिति में उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके।

 

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